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                <title>Energy Crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Energy Crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शांति की कोशिश नाकाम : डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी घोषण ; हॉर्मुज़ ज़लड़मरूमध्य की नाकेबंदी के बाद तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत की वृद्धि, ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार</title>
                                    <description><![CDATA[हॉर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी के बाद वैश्विक तेल बाजार में भूचाल आ गया है। ब्रेंट क्रूड $102 के पार पहुंच गया, जबकि तेल की कीमतों में 8% का उछाल दर्ज किया गया। शांति वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/peace-efforts-fail-donald-trumps-big-announcement-oil-prices-rise/article-150158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump--and-iran.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत का उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने सोमवार दोपहर (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) "ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने और वहां से निकलने वाले सभी समुद्री यातायात" की नाकेबंदी शुरू करने का संकल्प लिया। जून का ब्रेंट क्रूड वायदा रविवार रात (भारतीय समयानुसार सोमवार तड़के 3:31 बजे) तक पिछले बंद भाव से 7.76 प्रतिशत बढ़कर 102.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि मई का डब्ल्यू.टी.आई. वायदा 8.2 प्रतिशत बढ़कर 104.51 डॉलर पर पहुंच गया।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात को ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते की घोषणा की थी, जिसके बाद शनिवार को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हुई थी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने रविवार सुबह घोषणा की कि लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के स्वदेश वापस लौट रहा है।</p>
<p>इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को ही घोषणा की कि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने और वहां से निकलने की कोशिश करने वाले सभी जहाजों की नाकेबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जिन्होंने जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:56:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आईजीएल ने दिया बड़ा झटका : रसोई गैस के बाद अब पीएनजी भी हुई आम नागरिकों की पहुंच से बाहर, यहां जानें दिल्ली सहित आपके शहर में क्या है रेट ?</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के चलते इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने पीएनजी की कीमतों में वृद्धि कर दी है। दिल्ली में अब पीएनजी ₹49.59 प्रति एससीएम मिलेगी, जो पहले से ₹1.70 महंगी है। नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर सहित कई शहरों में भी दाम बढ़े हैं। एलपीजी के बाद अब रसोई गैस के बढ़ते दामों ने आम जनता का बजट बिगाड़ दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/igl-gave-a-big-blow-after-lpg-now-png-is/article-149360"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/png.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के कारण रसोई गैस (एलपीजी) के बाद अब पाइपलाइन के जरिये किचन तक आने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के दाम भी बढ़ गये हैं। दिल्ली-एनसीआर के साथ कानपुर, मेरठ, अजमेर जैसे कई शहरों में घरों में पीएनजी की आपूर्ति करने वाली कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने एक अप्रैल से पीएनजी की कीमत बढ़ाकर दिल्ली में 49.59 रुपये प्रति मानक घन मीटर (एससीएम) कर दिया है। इससे पहले एक जनवरी 2026 से इसकी कीमत 47.89 रुपये प्रति एससीएम थी। इस प्रकार राष्ट्रीय राजधानी में पीएनजी 1.70 रुपये प्रति एससीएम महंगी हो गयी है।</p>
<p>एनसीआर के दूसरे शहरों में भी कीमत 1.70 रुपये प्रति एससीएम बढ़ाई गयी है जबकि दूसरे शहरों में पीएनजी एक रुपये महंगी की गयी है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में एक एससीएम पीएनजी की कीमत 47.76 रुपये से बढ़ाकर 49.46 रुपये कर दी गयी है। मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली में कीमत 47.35 रुपये से बढ़ाकर 48.35 रुपये, अजमेर, पाली और राजसमंद में 47.27 रुपये से बढ़ाकर 48.27 रुपये तथा कानपुर, फतेहपुर, हमीरपुर और चित्रकूट में 47.95 रुपये से बढ़ाकर 48.95 रुपये कर दी गयी है। दूसरे शहरों में कीमतों में इसी प्रकार वृद्धि हुई है।</p>
<p>पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद सात मार्च को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाये गये थे। वहीं, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर के दाम एक मार्च, सात मार्च और एक अप्रैल को तीन बार में 338 रुपये बढ़ चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:47:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूरी चेर्निचुक का बड़ा बयान: बोले-संयंत्र की सुविधाओं पर युद्ध के प्रभाव के कारण ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र में स्थिति लगातार तनावपूर्ण </title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेनी हमलों के कारण ज़ापोरोज़े परमाणु संयंत्र की मुख्य बिजली लाइन 'नीप्रोव्स्काया' क्षतिग्रस्त हो गई है। संयंत्र निदेशक यूरी चेर्निचुक ने स्थिति को 'अत्यंत तनावपूर्ण' बताया है। वर्तमान में प्लांट केवल एक बैकअप लाइन और डीजल जनरेटर पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सहयोग से मरम्मत के लिए 'शांति मोड' स्थापित करने के प्रयास जारी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/yuri-chernichuks-big-statement-said-that-the-situation-at-the/article-149229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/zaporizhzhya-nuclear-power-plant.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निदेशक यूरी चेर्निचुक ने कहा है कि संयंत्र की सुविधाओं और शहर पर युद्ध के प्रभाव के कारण वहां की स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। संयंत्र की प्रवक्ता येवगेनिया याशिना ने शुक्रवार को बताया था कि पिछले दो हफ्तों में ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र और एनरगोदर के पास के क्षेत्र में यूक्रेन के सशस्त्र बलों के हमलों की तीव्रता में काफी वृद्धि हुई है। रोसाटॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेक्सी लिखाचेव ने रविवार को कहा कि पिछले कुछ दिनों में संयंत्र क्षेत्र पर कोई हमला नहीं हुआ है, लेकिन स्टेशन के अनुषंगी शहर एनरगोदर पर हमले हुए हैं। 'नीप्रोव्स्काया' लाइन के माध्यम से संयंत्र को मिलने वाली विद्युत आपूर्ति एक संवेदनशील स्थान - पानी के ऊपर - से कट गयी है, जिससे मरम्मत के समय का पूर्वानुमान लगाना कठिन हो गया है।</p>
<p>चेर्निचुक ने स्पूतनिक से कहा, “ दुर्भाग्य से, हमने समस्या का समाधान करने के लिये एक ऐसा तरीका निकाला है, जो पूरी तरह से सामान्य नहीं है, लेकिन फिर भी निरंतर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। यह स्वाभाविक रूप से युद्ध की तीव्रता, औद्योगिक क्षेत्र में संयंत्र की सुविधाओं, शहर और शहर की सार्वजनिक सेवाओं पर गोलाबारी के कारण है। ” संयंत्र के निदेशक ने बताया कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सहयोग से ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र की उच्च-वोल्टेज विद्युत लाइनों में से एक की मरम्मत के लिए ‘शांति’ (गोलाबारी रोकने) स्थापित करने का कार्य चल रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 24 मार्च को यूक्रेन के लड़ाकों के हमलों की वजह से संयंत्र की दो उच्च-वोल्टेज लाइनों में से एक ‘नीप्रोव्स्काया’ लाइन क्षतिग्रस्त होकर निष्क्रिय हो गयी थी, इसलिए वर्तमान में संयंत्र को केवल एक लाइन ‘फेरोस्प्लावनया’ के माध्यम से बिजली मिल रही है।<br />चेर्निचुक ने बताया, “ वर्तमान में बाहरी बिजली का मुख्य स्रोत 'फेरोस्प्लावनया' लाइन है। हमारे पास डीजल जनरेटर के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है, और हम वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ छठे ‘शांति मोड’ को स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि तकनीशियन लाइन की मरम्मत कर सकें। ” उन्होंने कहा कि संयंत्र में वैकल्पिक डीजल जनरेटर चालू हालत में हैं और आवश्यकता पड़ने पर इसे सुरक्षित रखने के लिए डीजल ईंधन की आपूर्ति पर्याप्त है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 13:39:25 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प ने फिर दी चेतावनी : होर्मुज खोलने के लिए ईरान के पास सिर्फ 48 घंटे, फिर कहर बरपेगा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) खोलने के लिए ईरान को दी गई 10 दिन की मोहलत खत्म होने से पहले 48 घंटे का आखिरी अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि समझौता न होने पर ईरान पर 'कहर' टूटेगा। इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति ठप हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-again-warns-that-iran-has-only-48-hours-to/article-149151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए ईरान को दिया गया 10 दिन का समय खत्म होने में अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। ईरान-अमेरिका के बीच समझौता न होने या होर्मुज न खुलने की स्थिति में ईरान पर कहर टूट पड़ेगा।  उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, याद है जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था। समय निकलता जा रहा है। सिर्फ 48 घंटे बाद ईरान पर कहर टूट पड़ेगा। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनियाभर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और कच्चे तेल का निर्यात प्रभावित हुआ है। ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका, इजरायल और इनके सहयोगियों के जहाजों को होर्मुज से पार नहीं होने देगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:37:56 +0530</pubDate>
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                <title>दुबई पोर्ट पर खड़े कुवैती तेल टैंकर पर ईरानी ड्रोन हमला: 24 कर्मचारियों को सुरक्षित बचाया, समुद्र में तेल रिसाव का बढ़ा खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[दुबई के पास कुवैती टैंकर 'अल-सलमी' पर ईरानी ड्रोन हमले से भीषण आग लग गई। गनीमत रही कि सभी 24 क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। इस हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के बीच अमेरिकी कच्चा तेल $116 के पार पहुंच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-drone-attack-on-kuwaiti-oil-tanker-near-dubai-24/article-148569"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/irani-oil-tanker.png" alt=""></a><br /><p>दुबई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में दुबई के समुद्री क्षेत्र में लंगर डाले एक कुवैती तेल टैंकर पर मंगलवार को ईरानी ड्रोन से हमला किया गया। इससे जहाज पर भीषण आग लग गई लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ न ही तेल रिसाव की कोई रिपोर्ट है। ब्रिटिश सैन्य निगरानी एजेंसी 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस' के अनुसार, 'अल-सलमी' नामक इस टैंकर को दुबई से लगभग 31 समुद्री मील उत्तर-पश्चिम में निशाना बनाया गया। दुबई की आपातकालीन टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए टैंकर पर लगी आग को बुझा दिया और चालक दल के सभी 24 सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।</p>
<p>कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने भी मीडिया के माध्यम से इस हमले की पुष्टि की है और संभावित पर्यावरणीय जोखिमों के प्रति आगाह किया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का हवाई अभियान पिछले एक महीने से जारी है, जिसके कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को पूरी तरह से नहीं खोला गया, तो वे ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाएंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि कूटनीतिक प्रयासों के बीच क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ाई जा रही है ताकि "अधिकतम विकल्प" खुले रहें।</p>
<p>उधर ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप द्वारा दी गई 15-सूत्रीय योजना और अमेरिकी मांगों को "अत्यधिक, अवास्तविक और अनुचित" बताते हुए कड़ी आलोचना की है। इस ताजा हमले और बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया, जहाँ अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत जुलाई 2022 के बाद पहली बार 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। फिलहाल, दुबई की टीमें जहाज को हुए नुकसान के आकलन में जुटी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:26:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य अगले एक महीने तक बंद : आसमान छू सकती है तेल की कीमतें; 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना, अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन ने जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने और बंद रहा, तो तेल $150 प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा। ईरान-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला ठप है। इससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और औद्योगिक उत्पादन पर गहरा संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/strait-of-hormuz-closed-for-the-next-one-month-oil/article-148506"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक और महीने के लिए बंद रहता है, तो तेल की कीमतें आसमान छूने के साथ 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्री कासमैन के बयान के हवाले से कहा, "ऐसी स्थिति में, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक और महीने तक बंद रहता है, तो तेल की कीमतें लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं और ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर औद्योगिक उपभोक्ताओं को कमी का सामना करना पड़ सकता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान की राजधानी तेहरान सहित देश के विभिन्न ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिससे भारी क्षति हुई और नागरिक हताहत हुए थे। ईरान पे इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है।</p>
<p>इस बीच, फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों में तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग - होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला नौपरिवहन प्रभावी रूप से ठप हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 11:34:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने की गुटेरेस से फोन पर बात: बोले-ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का कानूनी अधिकार, अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूएन प्रमुख से बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना अपना कानूनी अधिकार बताया है। अमेरिका-इजरायल हमलों के जवाब में की गई इस नाकाबंदी से वैश्विक तेल और एलएनजी (LNG) आपूर्ति ठप हो गई है। इस कूटनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईंधन की कीमतों को आसमान पर पहुँचा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-abbas-araghchi-spoke-to-guterres-on-phone/article-148077"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran10.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से फोन पर बातचीत की और कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना ईरान का कानूनी अधिकार है। यह जानकारी प्रेस टीवी ने शुक्रवार को मंत्री के हवाले से दी। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान सहित ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए, जिससे बहुत नुकसान हुआ और नागरिक हताहत हुए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।</p>
<p>ईरान ने बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की है जो फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजार में तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। इस नाकाबंदी ने क्षेत्र में तेल निर्यात एवं उत्पादन के स्तर को भी प्रभावित किया है जिससे कीमतें बढ़ गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 13:10:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एंटोनियो गुटेरेस ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर जताई चिंता: तत्काल युद्ध रोकने का किया आग्रह, युद्ध से वैश्विक बाजार अस्त-व्यस्त</title>
                                    <description><![CDATA[यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पश्चिम एशिया संघर्ष को "बेकाबू" बताते हुए तत्काल युद्धविराम की अपील की है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से तेल, गैस और उर्वरक आपूर्ति बाधित होने पर गहरी चिंता जताई। शांति बहाली हेतु जीन अर्नोल्ट को निजी दूत नियुक्त किया गया है ताकि कूटनीति के जरिए वैश्विक आर्थिक आपदा को रोका जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-expressed-concern-over-the-west-asia-conflict-and/article-147992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/antonio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध बेकाबू हो गया है, जिससे युद्ध का विस्तार हो जाने से नागरिकों की पीड़ा और वैश्विक आर्थिक संकट गहरा गया है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए गुटेरेस ने कहा कि युद्ध शुरू होने के तीन सप्ताह से अधिक समय बाद, लड़ाई सबसे खराब आशंकाओं से भी आगे निकल गयी है। गुटेरेस ने कहा कि दुनिया एक व्यापक युद्ध के कगार पर खड़ी है। उन्होंने संबधित पक्षों से युद्ध को तत्काल रोकने और कूटनीति एवं अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने का आह्वान किया।</p>
<p>महासचिव ने कहा कि उन्होंने जीन अर्नोल्ट को अपना निजी दूत नियुक्त किया है, ताकि जमीनी स्तर पर दोनों पक्षों के साथ सीधे तौर पर जुड़ने और चल रही शांति पहलों का समर्थन करने सहित मध्यस्थता प्रयासों में तेजी लायी जा सके। उन्होंने हताहतों की बढ़ती संख्या और आर्थिक दुष्परिणामों का हवाला देते हुए अमेरिका और इज़रायल से युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने ईरान से भी युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल न होने वाले पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का आह्वान किया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ऐसे कृत्यों की निंदा की है।</p>
<p>महासचिव ने प्रमुख नौवहन मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों पर चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि लंबे समय तक बंद रहने से विश्व भर में कृषि के लिए महत्वपूर्ण समय में तेल, गैस एवं उर्वरकों का प्रवाह बाधित हो सकता है। गुटेरेस ने लेबनान की स्थिति की भी चर्चा की, जहां उन्होंने हाल ही में दौरा किया था और हिजबुल्लाह से इजरायल पर हमले रोकने का आग्रह किया। उन्होंने इजरायल से उन सैन्य अभियानों को रोकने का आह्वान किया, जो नागरिकों को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाजा मॉडल को लेबनान में नहीं दोहराया जाना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस युद्ध से वैश्विक बाजार अस्त-व्यस्त हो गये हैं, जबकि मानवीय सहायता अभियान गंभीर बाधाओं का सामना कर रहे हैं और इस संकट का सबसे अधिक खामियाजा सबसे गरीब एवं सबसे कमजोर लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सवालों का जवाब देते हुए गुटेरेस ने कहा कि आगे तनाव बढ़ने के संकेतों के बावजूद, जिसमें कथित सैन्य तैनाती और अमेरिका और ईरान के बीच अस्वीकृत प्रस्ताव शामिल हैं, कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यवहार्य तरीका है। उन्होंने कहा, “ मेरा संदेश यह है कि कूटनीति को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हमें इस आपदा से निकलने का रास्ता चाहिए और शांति ही एकमात्र रास्ता है। ”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 17:06:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>भारत को कितना खाद निर्यात करता है रूस? तेल पर छूट खत्म की; खाद का निर्यात बंद किया, रूस दे रहा झटके पर झटका</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच रूस ने घरेलू मांग का हवाला देकर भारत को खाद निर्यात एक महीने के लिए रोक दिया है। साथ ही, रूस ने कच्चे तेल पर मिलने वाली रियायतें भी खत्म कर दी हैं। अब भारतीय रिफाइनरियों को प्रीमियम चुकाना होगा, जबकि रूस ने पाकिस्तान को डिस्काउंटेड तेल का ऑफर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/how-much-fertilizer-does-russia-export-to-india-russia-ends/article-147909"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/oil1.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही बंद है। इससे भारत में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। जो इक्का-दुक्का जहाज इस जलडमरूमध्य को पार कर रहे हैं, वो ऊर्जा की भारी डिमांड को पूरा करने में असमर्थ हैं। इस बीच रूस ने भी भारत को बड़ा झटका दिया है। रूस ने घरेलू मांग को प्राथमिकता देते हुए एक महीने के लिए खाद का निर्यात रोक दिया है। रूस भारत का सबसे बड़ा खाद आपूर्तिकर्ता है। जनवरी से जून 2025 तक रूस ने भारत को 25 लाख टन खाद की आपूर्ति की थी।</p>
<p>एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में रूस से भारत को खाद की आपूर्ति में पिछले साल के मुकाबले 20% की बढ़ोतरी हुई। इससे भारत के कुल खाद आयात में रूस की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 33% तक पहुंच गई है। रूस के कृषि मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि वह वसंत ऋतु में बुवाई के मौसम से पहले, एक महीने के लिए अमोनियम नाइट्रेट के निर्यात पर रोक लगा रहा है। उन्होंने बताया कि यह कदम रूस में घरेलू खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।</p>
<p><strong>रूसी कृषि मंत्रालय ने क्या कहा?</strong></p>
<p>रूसी कृषि मंत्रालय ने एक बयान में कहा, बढ़ती निर्यात मांग के बीच विदेशों में नाइट्रोजन खाद की खेप भेजना रोकने से हमें वसंत ऋतु में खेतों में होने वाले काम के दौरान घरेलू बाजार को प्राथमिकता देने और काम में कोई रुकावट न आए, यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। रूस से आने वाले अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल खेती में बड़े पैमाने पर होता है। इसका उपयोग विस्फोटक बनाने में भी एक कंपोनेंट के तौर पर किया जाता है। दुनिया में कुल अमोनियम नाइट्रेट के उत्पादन में रूस की हिस्सेदारी एक-चौथाई है। अमोनियम नाइट्रेट बनाने में इस्तेमाल होने वाला मुख्य तत्व अमोनिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से 24 प्रतिशत अमोनिया की आवाजाही होती है, लेकिन इसके बंद होने से उत्पादन पर प्रभाव पड़ रहा है। रूसी कृषि मंत्रालय ने बताया कि उसने नए निर्यात लाइसेंस जारी करना बंद कर दिया है। सिर्फ सरकारी अनुबंधों के तहत होने वाली आपूर्ति को ही इस नियम से छूट दी गई है।</p>
<p><strong>रूस ने भारत को तेल पर छूट खत्म की</strong></p>
<p>रूस ने भारत को मिलने वाली रियायती दरें खत्म कर दी हैं और अब भारतीय रिफाइनरी को ब्रेंट क्रूड के मुकाबले $4-5 प्रति बैरल अधिक प्रीमियम पर तेल मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव (ईरान संकट) के बीच, अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी, जिसके तहत भारत ने अप्रैल के लिए 60 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदा है, लेकिन यह सस्ता नहीं है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान को तेल का ऑफर दे रहा रूस</strong></p>
<p>चंद दिनों पहले इस्लामाबाद में रूस के राजदूत राजदूत अल्बर्ट खोरेव ने कहा था कि अगर पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर गुहार लगाता है, तो मॉस्को उसकी खाली होती तेल की टंकियों को भरने के लिए तैयार है और वो भी डिस्काउंट वाले दामों पर। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक पाकिस्तान की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया गया है। खोरेव ने दावा किया कि अगर पाकिस्तान सरकार हाथ आगे बढ़ाती है, तो रूस पीछे नहीं हटेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 09:29:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान युद्ध में रुकावट? ट्रंप ने कहा अमेरिका और ईरान के बीच 'प्रोडक्टिव' बातचीत शुरू, 5 दिनों के लिए मिलिट्री ऑपरेशनों पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी पावर प्लांट्स को नष्ट करने की 48 घंटे की चेतावनी दी थी, जिसे वार्ता के बाद 5 दिनों के लिए टाल दिया गया है। 2,000 से अधिक मौतों और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, दुनिया की नजरें अब इस कूटनीतिक समाधान पर टिकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/interruption-in-iran-war-trump-said-start-productive-talks-between/article-147588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिका-इजरायल के ईरान के साथ युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट "बेहद गंभीर" है और यह 1970 के दशक केनु तेल संकट से भी बदतर हो गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने सोमवार को यह चेतावनी दी, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को खतरा बना हुआ है।उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े युद्ध के कारण पैदा हुआ वैश्विक ऊर्जा संकट 1970 के दशक के तेल संकटों से भी अधिक गंभीर हो सकता है।</p>
<p>मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को हिला दिया है। खाड़ी क्षेत्र में एनर्जी और फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों और जवाबी चेतावनियों के चलते हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोला गया तो ईरानी पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जाएगा।</p>
<p>ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिका के ऊर्जा और तकनीकी ढांचे पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस बीच, अमेरिका और इज़राइल के सैन्य अभियान के बाद अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, लगभग बंद होने से यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट गहराने लगा है।</p>
<p>हालांकि, हालिया घटनाक्रम में ट्रंप ने बातचीत को “सकारात्मक” बताते हुए ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने की घोषणा की है। दोनों देशों के बीच जारी वार्ता से तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।</p>
<p>इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार देर रात फोन पर हुई बातचीत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य संकट पर चर्चा की। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के कार्यालय डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "वे इस बात पर सहमत हुए कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना आवश्यक है।" बयान में यह भी कहा गया कि वे 'जल्द ही फिर से बात करेंगे।'</p>
<p>यह बातचीत स्टार्मर द्वार ईरान के साथ चल रहे युद्ध में ब्रिटेन के शामिल होने से इनकार के बाद श्री ट्रंप और अन्य यूरोपीय सहयोगियों की तीखी आलोचना के बाद हुई है। ब्रिटेन उन 22 देशों में शामिल है, जिन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के प्रयासों में योगदान देने की इच्छा व्यक्त की है। दुनिया के सबसे व्यस्त नौवहन मार्गों में से एक इस जलमार्ग से यातायात 28 फरवरी को युद्ध छिड़ने के बाद से लगभग 95 प्रतिशत तक गिर गया है।</p>
<p>रविवार को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्क रूट ने कहा कि वह 'पूरी तरह से आश्वस्त' हैं कि नाटो इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन की संवेदनशील प्रकृति के कारण सदस्य देशों को थोड़ा समय चाहिए। डाउनिंग स्ट्रीट के एक प्रवक्ता ने दोहराया कि नेताओं ने अपनी बातचीत के दौरान इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इसे खोलना अनिवार्य है।</p>
<p>यह चर्चा सोमवार को स्टार्मर की अध्यक्षता में होने वाली 'कोबरा' बैठक से पहले हुई है, जिसमें बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली भी शामिल होंगे। इस बैठक में ऊर्जा की कीमतों, जीवन यापन की लागत और व्यापक आर्थिक स्थितियों पर इस संकट के प्रभाव का आकलन किया जाएगा। प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और ऊर्जा मंत्री सहित वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा व्यवसायों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर इसके प्रभावों की समीक्षा करने की भी उम्मीद है।</p>
<p>नाकेबंदी के बाद से कच्चे तेल की कीमतें लगभग 45 प्रतिशत बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने धमकी दी थी कि यदि 48 घंटों के भीतर जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया, तो वे ईरानी बिजली संयंत्रों को 'मिटा' देंगे। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान ने भी बदले में चेतावनी दी है। यदि अमेरिका अपनी धमकी पर अमल करता है, तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।</p>
<p>अलग से, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर ने कहा कि उन्होंने मौजूदा संकट के बीच डीजल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) सहित प्रमुख ऊर्जा आपूर्ति हासिल करने पर समन्वय मजबूत करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा, "हम ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करना, नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को तेज करना और खुले व्यापार को बनाए रखना शामिल है।"</p>
<p>यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर के देश होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बाद ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जहां से आमतौर पर वैश्विक तेल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:50:39 +0530</pubDate>
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                <title>अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी: पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, गाड़ी के टेंक फुल करवाने से पहले जानें क्या है आज आपके शहर में भाव</title>
                                    <description><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 110 डॉलर के पार पहुंचने और रुपये की गिरावट के बावजूद घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतें सोमवार को स्थिर रहीं। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये पर बरकरार है। हालांकि, तेल कंपनियों पर बढ़ते वैश्विक दबाव के बीच प्रीमियम ईंधनों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे भविष्य में बदलाव की संभावना बनी हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/crude-oil-prices-rise-in-the-international-market-petrol-and/article-147468"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच पेट्रोल और डीजल के दाम सोमवार को स्थिर बने रहे। देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में आज पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये और डीजल की 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रही। पेट्रोल-डीजल के दाम में 30 अक्टूबर 2024 के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है।</p>
<p>इंडियन ऑयल के प्रीमियम पेट्रोल एक्सपी95 का मूल्य 20 मार्च को दो रुपये बढ़ाया गया था। दिल्ली में इसकी कीमत अब 101.89 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। इंडियन ऑयल के प्रीमियम डीजल एक्सजी का मूल्य 91.49 रुपये प्रति डॉलर पर स्थिर है।</p>
<p>मुंबई में पेट्रोल की कीमत 103.54 रुपये, चेन्नई में 100.84 रुपये और कोलकाता में 105.45 रुपये प्रति लीटर है। डीजल मुंबई में 90.03 रुपये, चेन्नई में 92.39 रुपये और कोलकाता में 92.02 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के अलावा रुपये में लगातार जारी गिरावट से भी तेल विपणन कंपनियों पर दाम बढ़ाने का दबाव है। हालांकि फिलहाल वे ग्राहकों पर ज्यादा भार नहीं देना चाह रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:35:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्यूबा ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार राष्ट्रव्यापी विद्युत ठप होने की घोषणा की, ट्रंप ने की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी</title>
                                    <description><![CDATA[ईंधन संकट और ग्रिड फेल होने से क्यूबा में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और अमेरिकी प्रतिबंधों ने तनाव बढ़ा दिया है। द्वीप पर पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। क्यूबा सरकार ने मानवीय सहायता के बीच संभावित हमले की आशंका जताते हुए हाई अलर्ट जारी किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/cuba-announces-second-nationwide-blackout-in-a-week-trump-predicts/article-147421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cuba.png" alt=""></a><br /><p>हवाना। क्यूबा के ऊर्जा मंत्रालय ने शनिवार शाम को घोषणा किया कि पूरे द्वीप में एक बार फिर विद्युत ठप हो गई है जिससे एक करोड़ से अधिक लोग बिजली के बिना रह गए हैं। यह जानकारी सीएनएन ने रविवार को दी। मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राष्ट्रीय विद्युत प्रणाली पूरी तरह से ठप हो गई है। बिजली बहाल करने के लिए प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं।"</p>
<p>सोमवार को हुए भीषण विद्युत ग्रिड के ठप होने से क्यूबा अभी उबर ही रहा था। यह इस साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला से ईंधन की आपूर्ति पर रोक लगाने के बाद पहली घटना थी। शनिवार को विद्युत ठप होने से ठीक पहले, देश की सरकारी बिजली कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा था कि शनिवार रात को सबसे व्यस्त समय के दौरान उसे 1.704 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल के दिनों में क्यूबा के बारे में अक्सर बातें की है और वहां की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी की है। सोमवार को उन्होंने खुलेआम यह सवाल उठाया था कि क्या उन्हें इस द्वीप पर कब्जा करने का सम्मान प्राप्त होगा।</p>
<p>हालांकि, जब राष्ट्रपति ट्रम्प से पूछा गया कि क्या क्यूबा को अपने कब्जे में लेने के अभियान में उसी तरह का बल का प्रयोग किया जाएगा जैसा कि जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के दौरान किया था, तो उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया।</p>
<p>शनिवार को क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने द्वीप पर मानवीय सहायता पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार का मानना है कि क्यूबा पर हमला हो सकता है और तदनुसार वह तैयारी कर रही है। पिछले सप्ताह, राष्ट्रपति डियाज़-कैनेल ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि क्यूबा ईंधन प्रतिबंध समाप्त करने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, क्यूबा सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका अपनी राजनीतिक व्यवस्था पर बातचीत करने का कोई इरादा नहीं है।</p>
<p>क्यूबा में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में क्रांतिकारियों द्वारा 1959 में फुल्गेन्सियो बतिस्ता की सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से, देश अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। क्यूबा ने पहले भी गंभीर आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना किया है, जैसे कि "विशेष काल", जब 1991 में सोवियत संघ का पतन हुआ तब इसका प्रभाव उस समय के कम्युनिस्ट सरकार के मुख्य बाहरी सहायता स्रोत पर पड़ा।</p>
<p>यह ताजा संकट भी उतना ही निराशाजनक है। मेक्सिको और वेनेजुएला से ईंधन की कमी के कारण द्वीप का पर्यटन लगभग ठप हो गया है, शिक्षा व्यवस्था बाधित हुई है, अस्पतालों में सेवाएं कम हो गई हैं और किसानों को अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 16:05:10 +0530</pubDate>
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