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                <title>Energy Crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Energy Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही, डीजल और जेट ईंधन की कमी के खतरे की दी चेतावनी : दिमित्रीव</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विशेषज्ञ किरिल दिमित्रीव ने चेतावनी दी है कि दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। ईंधन की कमी से यूरोप में उड़ानें रद्द होने और वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kirill-dmitriev-warned-of-the-danger-of-diesel-and-jet/article-152524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vladimir.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के सीईओ और अन्य देशों के साथ निवेश एवं आर्थिक सहयोग के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष प्रतिनिधि किरिल दिमित्रीव ने कहा कि दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है और उसे इसका एहसास भी नहीं है। दिमित्रीव ने एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा, "दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर नींद में चलती जा रही है और अब जाकर कुछ समझदार लोग इस पर ध्यान देना शुरू कर रहे हैं।" उन्होंने साथी निवेशक एरिक नटाल के ब्लूमबर्ग को दिए एक साक्षात्कार पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि तेल की कीमत जल्द ही 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी।</p>
<p>इससे पहले, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने यूरोप में डीजल और जेट ईंधन की कमी के खतरे की चेतावनी दी थी।इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महानिदेशक विलियम वाल्श ने बाद में कहा कि जेट ईंधन की कमी के कारण मई के अंत तक यूरोप में उड़ानें रद्द होना शुरू हो सकता है जैसा कि पहले से ही कुछ एशियाई देशों में हो रहा है।</p>
<p>ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के कारण फारस की खाड़ी से वैश्विक बाजारों तक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो गया है और इससे तेल निर्यात और उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इस अवरोध के कारण, दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन एवं औद्योगिक उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 14:33:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डोनालड ट्रंप की चेतावनी: ईरान जब तक परमाणु हथियार बनाने की जिद्द नहीं छोड़ता तब तक नाकेबंदी रहेगी जारी, ईरानी राष्ट्रपति का दावा-परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए और कुछ नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु शर्तों पर समझौता न करने पर नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक दबाव बढ़ाने की चेतावनी दी है। इस तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $125 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। ट्रंप ने इसे बमबारी से अधिक प्रभावी बताया है, जिससे एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल सप्लाई चेन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-warning-that-the-blockade-will-continue-until-iran/article-152199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump4.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को ईरान को परमाणु समझौते की शर्तों पर सहमत होने की चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसा न होने पर अमेरिका उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेगा और आर्थिक दबाव बढ़ाएगा। ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाना जारी रखता है, तो उसके साथ 'कभी कोई समझौता नहीं' होगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जिसमें ईरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने का सुझाव दिया है, जबकि परमाणु वार्ता को स्थगित करने की बात कही है। नाकेबंदी जारी रखने के ट्रंप के फैसले से वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें गुरुवार को 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने ईरान से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर महीनों तक नाकेबंदी जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लंबे समय तक लगे प्रतिबंध अंततः ईरान को तेल उत्पादन रोकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह संघर्ष अब दसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि इसके चार से छह सप्ताह में सुलझने की उम्मीद थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित रहने से वैश्विक आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल कम हो रहा है। अमेरिका की इस लंबी नाकेबंदी की तैयारी से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र के कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, प्लास्टिक तथा उर्वरकों की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही है।</p>
<p>इस बीच, पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी विफल रही हैं। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान बातचीत करना चाहता है तो वह कॉल कर सकता है। उन्होंने बताया कि अभी टेलीफोन के माध्यम से बातचीत हो रही है। 'एक्सियोस' के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प नाकेबंदी को 'बमबारी से अधिक प्रभावी' मानते हैं। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड बातचीत के गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान पर 'शक्तिशाली हमलों' की तैयारी कर रहा है लेकिन मंगलवार रात तक ट्रंप ने किसी हमले का आदेश नहीं दिया था। दूसरी ओर, ईरान ने संकल्प लिया है कि जब तक वह खतरा महसूस करेगा, होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बाधित करना जारी रखेगा। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी प्रतिनिधि ने अमेरिकी नाकेबंदी को 'समुद्री डकैती' करार दिया और चेतावनी दी कि इसका 'अभूतपूर्व' जवाब दिया जाएगा। हालांकि, ईरानी बलों ने कूटनीति को मौका देने के लिए अब तक संयम दिखाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:55:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>टिबोर गास्पर का दावा : रूस से ऊर्जा आपूर्ति बंद होने से यूरोप छोड़ रहे हैं उद्योग; रूसी तेल की वापसी पीछे जाने का कदम नहीं, ऊर्जा नीति की दिशा में अहम कदम होगा</title>
                                    <description><![CDATA[स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने चेतावनी दी है कि सस्ती रूसी ऊर्जा के बिना यूरोपीय उद्योग ईयू से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने आर्थिक स्थिरता के लिए रूसी ऊर्जा की वापसी को 'यथार्थवादी नीति' बताया। गास्पर के अनुसार, केवल अमेरिकी एलएनजी पर निर्भरता के बजाय रूस को एक विकल्प के रूप में रखना अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tibor-gaspar-claims-that-industries-are-leaving-europe-due-to/article-151035"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tibor.png" alt=""></a><br /><p>ब्रातिस्लावा। स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने कहा है कि पूर्व से मिलने वाली स्थिर ऊर्जा आपूर्ति पर आधारित यूरोपीय उद्योग अब उसके अभाव में यूरोपीय संघ से बाहर स्थानांतरित हो रहे हैं। टिबोर गास्पर ने कहा कि रूस के ऊर्जा संसाधन लंबे समय तक अन्य विकल्पों की तुलना में सस्ते रहे हैं और उनकी वापसी से उद्योग, महंगाई और आम उपभोक्ताओं पर दबाव कम होगा। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जर्मनी और मध्य यूरोप का औद्योगिक ढांचा पूर्व से मिलने वाली ऊर्जा पर टिका रहा है। उन्होंने कहा कि सस्ती ऊर्जा के बिना कोई भी अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धी नहीं रह सकती और इसी कारण उत्पादन अब यूरोपीय संघ से बाहर जा रहा है।</p>
<p>टिबोर गास्पर के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति का विविधीकरण किसी एक आपूर्तिकर्ता को स्थायी रूप से बाहर करना नहीं है, बल्कि विकल्पों को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि रूस एक विकल्प हो सकता है, न कि एकमात्र, लेकिन उसे पूरी तरह प्रतिबंधित करना भी उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल एलएनजी, विशेषकर अमेरिका से, पर निर्भरता के बजाय अधिक आपूर्तिकर्ता होने से बेहतर कीमतें और अधिक स्वतंत्रता मिलती है।</p>
<p>टिबोर गास्पर ने कहा कि रूसी तेल की वापसी ‘पीछे जाने का कदम नहीं, बल्कि यथार्थवादी ऊर्जा नीति की दिशा में कदम’ होगा और विचारधारा को आर्थिक स्थिरता व नागरिकों के जीवन स्तर पर हावी नहीं होना चाहिए। इस बीच, यूरोपीय संघ परिषद ने पहले ही एक जनवरी 2027 से रूसी एलएनजी आयात और 30 सितंबर 2027 से रूसी पाइपलाइन गैस पर प्रतिबंध को अंतिम मंजूरी दे दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कच्चा तेल फिर 95 डॉलर के करीब, जानें दाम बढ़ने के कारण, थोक मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हस्तक्षेप और ईरान वार्ता विफल होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की आशंका से दाम $95 प्रति बैरल के पार पहुंचने की कगार पर हैं। वैश्विक तनाव और ताज़ा प्रतिबंधों ने ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/crude-oil-again-close-to-95-dollars-due-to-increase/article-150472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/crude.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बुधवार को 95 डॉलर प्रति बैरल करीब पहुंच गया। हार्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका हस्तक्षेप के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला की बहाली में एक बार फिर संशय पैदा हो गया है। इससे इसके दामों पर काफी असर पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद लगाई जा रही है। अमेरिका की ताजा घोषणा से तनाव बढ़ने के कारण कच्चा तेल फिर 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकलने की संभावना है। </p>
<p>कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण मार्च में थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गयी। पिछले साल मार्च में यह आंकड़ा 2.25 प्रतिशत और इस साल फरवरी में 2.13 प्रतिशत था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में कच्चे तेल की कीमत सालाना आधार पर 51.57 प्रतिशत बढ़ी। कच्चे तेल में जबरदस्त उछाल के कारण प्राथमिक वस्तु वर्ग में थोक महंगाई की दर 6.36 प्रतिशत दर्ज की गयी।</p>
<p>थोक मुद्रास्फीति में सबसे अधिक 64 प्रतिशत का भारांश रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के वर्ग में भी मुद्रास्फीति एक साल पहले के 3.21 प्रतिशत से बढ़कर 3.39 प्रतिशत पर पहुंच गयी। तिलहनों के थोक दाम भी सालाना आधार पर 22.81 प्रतिशत बढ़े और महंगाई बढ़ाने में इनका भी योगदान रहा।पेट्रोल और डीजल के दाम में साल-दर-साल क्रमशः 2.50 प्रतिशत और 3.26 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एलपीजी की थोक कीमत हालांकि एक साल पहले के मुकाबले 1.54 प्रतिशत कम रही।</p>
<p>खाने-पीने की वस्तुओं में अनाजों के दाम 2.51 प्रतिशत कम हुए हैं। सब्जियों की मुद्रास्फीति 1.45 प्रतिशत दर्ज की गयी है। फलों के दाम 2.11 प्रतिशत और दूध के 2.62 प्रतिशत बढ़े हैं। अंडा, मांस और मछली की महंगाई दर 6.63 प्रतिशत रही। गत 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में तेज उछाल देखा गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस संकट से पहले कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। इससे देश में भी थोक महंगाई बढ़ी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:23:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शांति की कोशिश नाकाम : डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी घोषण ; हॉर्मुज़ ज़लड़मरूमध्य की नाकेबंदी के बाद तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत की वृद्धि, ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार</title>
                                    <description><![CDATA[हॉर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी के बाद वैश्विक तेल बाजार में भूचाल आ गया है। ब्रेंट क्रूड $102 के पार पहुंच गया, जबकि तेल की कीमतों में 8% का उछाल दर्ज किया गया। शांति वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/peace-efforts-fail-donald-trumps-big-announcement-oil-prices-rise/article-150158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump--and-iran.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत का उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने सोमवार दोपहर (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) "ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने और वहां से निकलने वाले सभी समुद्री यातायात" की नाकेबंदी शुरू करने का संकल्प लिया। जून का ब्रेंट क्रूड वायदा रविवार रात (भारतीय समयानुसार सोमवार तड़के 3:31 बजे) तक पिछले बंद भाव से 7.76 प्रतिशत बढ़कर 102.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि मई का डब्ल्यू.टी.आई. वायदा 8.2 प्रतिशत बढ़कर 104.51 डॉलर पर पहुंच गया।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात को ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते की घोषणा की थी, जिसके बाद शनिवार को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हुई थी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने रविवार सुबह घोषणा की कि लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के स्वदेश वापस लौट रहा है।</p>
<p>इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को ही घोषणा की कि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने और वहां से निकलने की कोशिश करने वाले सभी जहाजों की नाकेबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जिन्होंने जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:56:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आईजीएल ने दिया बड़ा झटका : रसोई गैस के बाद अब पीएनजी भी हुई आम नागरिकों की पहुंच से बाहर, यहां जानें दिल्ली सहित आपके शहर में क्या है रेट ?</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के चलते इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने पीएनजी की कीमतों में वृद्धि कर दी है। दिल्ली में अब पीएनजी ₹49.59 प्रति एससीएम मिलेगी, जो पहले से ₹1.70 महंगी है। नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर सहित कई शहरों में भी दाम बढ़े हैं। एलपीजी के बाद अब रसोई गैस के बढ़ते दामों ने आम जनता का बजट बिगाड़ दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/igl-gave-a-big-blow-after-lpg-now-png-is/article-149360"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/png.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के कारण रसोई गैस (एलपीजी) के बाद अब पाइपलाइन के जरिये किचन तक आने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के दाम भी बढ़ गये हैं। दिल्ली-एनसीआर के साथ कानपुर, मेरठ, अजमेर जैसे कई शहरों में घरों में पीएनजी की आपूर्ति करने वाली कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने एक अप्रैल से पीएनजी की कीमत बढ़ाकर दिल्ली में 49.59 रुपये प्रति मानक घन मीटर (एससीएम) कर दिया है। इससे पहले एक जनवरी 2026 से इसकी कीमत 47.89 रुपये प्रति एससीएम थी। इस प्रकार राष्ट्रीय राजधानी में पीएनजी 1.70 रुपये प्रति एससीएम महंगी हो गयी है।</p>
<p>एनसीआर के दूसरे शहरों में भी कीमत 1.70 रुपये प्रति एससीएम बढ़ाई गयी है जबकि दूसरे शहरों में पीएनजी एक रुपये महंगी की गयी है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में एक एससीएम पीएनजी की कीमत 47.76 रुपये से बढ़ाकर 49.46 रुपये कर दी गयी है। मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली में कीमत 47.35 रुपये से बढ़ाकर 48.35 रुपये, अजमेर, पाली और राजसमंद में 47.27 रुपये से बढ़ाकर 48.27 रुपये तथा कानपुर, फतेहपुर, हमीरपुर और चित्रकूट में 47.95 रुपये से बढ़ाकर 48.95 रुपये कर दी गयी है। दूसरे शहरों में कीमतों में इसी प्रकार वृद्धि हुई है।</p>
<p>पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद सात मार्च को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाये गये थे। वहीं, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर के दाम एक मार्च, सात मार्च और एक अप्रैल को तीन बार में 338 रुपये बढ़ चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:47:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूरी चेर्निचुक का बड़ा बयान: बोले-संयंत्र की सुविधाओं पर युद्ध के प्रभाव के कारण ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र में स्थिति लगातार तनावपूर्ण </title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेनी हमलों के कारण ज़ापोरोज़े परमाणु संयंत्र की मुख्य बिजली लाइन 'नीप्रोव्स्काया' क्षतिग्रस्त हो गई है। संयंत्र निदेशक यूरी चेर्निचुक ने स्थिति को 'अत्यंत तनावपूर्ण' बताया है। वर्तमान में प्लांट केवल एक बैकअप लाइन और डीजल जनरेटर पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सहयोग से मरम्मत के लिए 'शांति मोड' स्थापित करने के प्रयास जारी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/yuri-chernichuks-big-statement-said-that-the-situation-at-the/article-149229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/zaporizhzhya-nuclear-power-plant.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निदेशक यूरी चेर्निचुक ने कहा है कि संयंत्र की सुविधाओं और शहर पर युद्ध के प्रभाव के कारण वहां की स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। संयंत्र की प्रवक्ता येवगेनिया याशिना ने शुक्रवार को बताया था कि पिछले दो हफ्तों में ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र और एनरगोदर के पास के क्षेत्र में यूक्रेन के सशस्त्र बलों के हमलों की तीव्रता में काफी वृद्धि हुई है। रोसाटॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेक्सी लिखाचेव ने रविवार को कहा कि पिछले कुछ दिनों में संयंत्र क्षेत्र पर कोई हमला नहीं हुआ है, लेकिन स्टेशन के अनुषंगी शहर एनरगोदर पर हमले हुए हैं। 'नीप्रोव्स्काया' लाइन के माध्यम से संयंत्र को मिलने वाली विद्युत आपूर्ति एक संवेदनशील स्थान - पानी के ऊपर - से कट गयी है, जिससे मरम्मत के समय का पूर्वानुमान लगाना कठिन हो गया है।</p>
<p>चेर्निचुक ने स्पूतनिक से कहा, “ दुर्भाग्य से, हमने समस्या का समाधान करने के लिये एक ऐसा तरीका निकाला है, जो पूरी तरह से सामान्य नहीं है, लेकिन फिर भी निरंतर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। यह स्वाभाविक रूप से युद्ध की तीव्रता, औद्योगिक क्षेत्र में संयंत्र की सुविधाओं, शहर और शहर की सार्वजनिक सेवाओं पर गोलाबारी के कारण है। ” संयंत्र के निदेशक ने बताया कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सहयोग से ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र की उच्च-वोल्टेज विद्युत लाइनों में से एक की मरम्मत के लिए ‘शांति’ (गोलाबारी रोकने) स्थापित करने का कार्य चल रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 24 मार्च को यूक्रेन के लड़ाकों के हमलों की वजह से संयंत्र की दो उच्च-वोल्टेज लाइनों में से एक ‘नीप्रोव्स्काया’ लाइन क्षतिग्रस्त होकर निष्क्रिय हो गयी थी, इसलिए वर्तमान में संयंत्र को केवल एक लाइन ‘फेरोस्प्लावनया’ के माध्यम से बिजली मिल रही है।<br />चेर्निचुक ने बताया, “ वर्तमान में बाहरी बिजली का मुख्य स्रोत 'फेरोस्प्लावनया' लाइन है। हमारे पास डीजल जनरेटर के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है, और हम वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ छठे ‘शांति मोड’ को स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि तकनीशियन लाइन की मरम्मत कर सकें। ” उन्होंने कहा कि संयंत्र में वैकल्पिक डीजल जनरेटर चालू हालत में हैं और आवश्यकता पड़ने पर इसे सुरक्षित रखने के लिए डीजल ईंधन की आपूर्ति पर्याप्त है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 13:39:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रम्प ने फिर दी चेतावनी : होर्मुज खोलने के लिए ईरान के पास सिर्फ 48 घंटे, फिर कहर बरपेगा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) खोलने के लिए ईरान को दी गई 10 दिन की मोहलत खत्म होने से पहले 48 घंटे का आखिरी अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि समझौता न होने पर ईरान पर 'कहर' टूटेगा। इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति ठप हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-again-warns-that-iran-has-only-48-hours-to/article-149151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए ईरान को दिया गया 10 दिन का समय खत्म होने में अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। ईरान-अमेरिका के बीच समझौता न होने या होर्मुज न खुलने की स्थिति में ईरान पर कहर टूट पड़ेगा।  उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, याद है जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था। समय निकलता जा रहा है। सिर्फ 48 घंटे बाद ईरान पर कहर टूट पड़ेगा। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनियाभर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और कच्चे तेल का निर्यात प्रभावित हुआ है। ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका, इजरायल और इनके सहयोगियों के जहाजों को होर्मुज से पार नहीं होने देगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:37:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दुबई पोर्ट पर खड़े कुवैती तेल टैंकर पर ईरानी ड्रोन हमला: 24 कर्मचारियों को सुरक्षित बचाया, समुद्र में तेल रिसाव का बढ़ा खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[दुबई के पास कुवैती टैंकर 'अल-सलमी' पर ईरानी ड्रोन हमले से भीषण आग लग गई। गनीमत रही कि सभी 24 क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। इस हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के बीच अमेरिकी कच्चा तेल $116 के पार पहुंच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-drone-attack-on-kuwaiti-oil-tanker-near-dubai-24/article-148569"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/irani-oil-tanker.png" alt=""></a><br /><p>दुबई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में दुबई के समुद्री क्षेत्र में लंगर डाले एक कुवैती तेल टैंकर पर मंगलवार को ईरानी ड्रोन से हमला किया गया। इससे जहाज पर भीषण आग लग गई लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ न ही तेल रिसाव की कोई रिपोर्ट है। ब्रिटिश सैन्य निगरानी एजेंसी 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस' के अनुसार, 'अल-सलमी' नामक इस टैंकर को दुबई से लगभग 31 समुद्री मील उत्तर-पश्चिम में निशाना बनाया गया। दुबई की आपातकालीन टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए टैंकर पर लगी आग को बुझा दिया और चालक दल के सभी 24 सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।</p>
<p>कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने भी मीडिया के माध्यम से इस हमले की पुष्टि की है और संभावित पर्यावरणीय जोखिमों के प्रति आगाह किया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का हवाई अभियान पिछले एक महीने से जारी है, जिसके कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को पूरी तरह से नहीं खोला गया, तो वे ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाएंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि कूटनीतिक प्रयासों के बीच क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ाई जा रही है ताकि "अधिकतम विकल्प" खुले रहें।</p>
<p>उधर ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप द्वारा दी गई 15-सूत्रीय योजना और अमेरिकी मांगों को "अत्यधिक, अवास्तविक और अनुचित" बताते हुए कड़ी आलोचना की है। इस ताजा हमले और बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया, जहाँ अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत जुलाई 2022 के बाद पहली बार 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। फिलहाल, दुबई की टीमें जहाज को हुए नुकसान के आकलन में जुटी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-drone-attack-on-kuwaiti-oil-tanker-near-dubai-24/article-148569</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:26:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य अगले एक महीने तक बंद : आसमान छू सकती है तेल की कीमतें; 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना, अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन ने जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने और बंद रहा, तो तेल $150 प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा। ईरान-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला ठप है। इससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और औद्योगिक उत्पादन पर गहरा संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/strait-of-hormuz-closed-for-the-next-one-month-oil/article-148506"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक और महीने के लिए बंद रहता है, तो तेल की कीमतें आसमान छूने के साथ 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्री कासमैन के बयान के हवाले से कहा, "ऐसी स्थिति में, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक और महीने तक बंद रहता है, तो तेल की कीमतें लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं और ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर औद्योगिक उपभोक्ताओं को कमी का सामना करना पड़ सकता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान की राजधानी तेहरान सहित देश के विभिन्न ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिससे भारी क्षति हुई और नागरिक हताहत हुए थे। ईरान पे इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है।</p>
<p>इस बीच, फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों में तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग - होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला नौपरिवहन प्रभावी रूप से ठप हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 11:34:44 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने की गुटेरेस से फोन पर बात: बोले-ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का कानूनी अधिकार, अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूएन प्रमुख से बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना अपना कानूनी अधिकार बताया है। अमेरिका-इजरायल हमलों के जवाब में की गई इस नाकाबंदी से वैश्विक तेल और एलएनजी (LNG) आपूर्ति ठप हो गई है। इस कूटनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईंधन की कीमतों को आसमान पर पहुँचा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-abbas-araghchi-spoke-to-guterres-on-phone/article-148077"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran10.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से फोन पर बातचीत की और कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना ईरान का कानूनी अधिकार है। यह जानकारी प्रेस टीवी ने शुक्रवार को मंत्री के हवाले से दी। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान सहित ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए, जिससे बहुत नुकसान हुआ और नागरिक हताहत हुए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।</p>
<p>ईरान ने बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की है जो फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजार में तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। इस नाकाबंदी ने क्षेत्र में तेल निर्यात एवं उत्पादन के स्तर को भी प्रभावित किया है जिससे कीमतें बढ़ गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 13:10:06 +0530</pubDate>
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                <title>एंटोनियो गुटेरेस ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर जताई चिंता: तत्काल युद्ध रोकने का किया आग्रह, युद्ध से वैश्विक बाजार अस्त-व्यस्त</title>
                                    <description><![CDATA[यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पश्चिम एशिया संघर्ष को "बेकाबू" बताते हुए तत्काल युद्धविराम की अपील की है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से तेल, गैस और उर्वरक आपूर्ति बाधित होने पर गहरी चिंता जताई। शांति बहाली हेतु जीन अर्नोल्ट को निजी दूत नियुक्त किया गया है ताकि कूटनीति के जरिए वैश्विक आर्थिक आपदा को रोका जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-expressed-concern-over-the-west-asia-conflict-and/article-147992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/antonio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध बेकाबू हो गया है, जिससे युद्ध का विस्तार हो जाने से नागरिकों की पीड़ा और वैश्विक आर्थिक संकट गहरा गया है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए गुटेरेस ने कहा कि युद्ध शुरू होने के तीन सप्ताह से अधिक समय बाद, लड़ाई सबसे खराब आशंकाओं से भी आगे निकल गयी है। गुटेरेस ने कहा कि दुनिया एक व्यापक युद्ध के कगार पर खड़ी है। उन्होंने संबधित पक्षों से युद्ध को तत्काल रोकने और कूटनीति एवं अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने का आह्वान किया।</p>
<p>महासचिव ने कहा कि उन्होंने जीन अर्नोल्ट को अपना निजी दूत नियुक्त किया है, ताकि जमीनी स्तर पर दोनों पक्षों के साथ सीधे तौर पर जुड़ने और चल रही शांति पहलों का समर्थन करने सहित मध्यस्थता प्रयासों में तेजी लायी जा सके। उन्होंने हताहतों की बढ़ती संख्या और आर्थिक दुष्परिणामों का हवाला देते हुए अमेरिका और इज़रायल से युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने ईरान से भी युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल न होने वाले पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का आह्वान किया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ऐसे कृत्यों की निंदा की है।</p>
<p>महासचिव ने प्रमुख नौवहन मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों पर चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि लंबे समय तक बंद रहने से विश्व भर में कृषि के लिए महत्वपूर्ण समय में तेल, गैस एवं उर्वरकों का प्रवाह बाधित हो सकता है। गुटेरेस ने लेबनान की स्थिति की भी चर्चा की, जहां उन्होंने हाल ही में दौरा किया था और हिजबुल्लाह से इजरायल पर हमले रोकने का आग्रह किया। उन्होंने इजरायल से उन सैन्य अभियानों को रोकने का आह्वान किया, जो नागरिकों को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाजा मॉडल को लेबनान में नहीं दोहराया जाना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस युद्ध से वैश्विक बाजार अस्त-व्यस्त हो गये हैं, जबकि मानवीय सहायता अभियान गंभीर बाधाओं का सामना कर रहे हैं और इस संकट का सबसे अधिक खामियाजा सबसे गरीब एवं सबसे कमजोर लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सवालों का जवाब देते हुए गुटेरेस ने कहा कि आगे तनाव बढ़ने के संकेतों के बावजूद, जिसमें कथित सैन्य तैनाती और अमेरिका और ईरान के बीच अस्वीकृत प्रस्ताव शामिल हैं, कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यवहार्य तरीका है। उन्होंने कहा, “ मेरा संदेश यह है कि कूटनीति को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हमें इस आपदा से निकलने का रास्ता चाहिए और शांति ही एकमात्र रास्ता है। ”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 17:06:24 +0530</pubDate>
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