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                <title>Geopolitical Tension - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Geopolitical Tension RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सेंटकॉम रिपोर्ट का दावा: अमेरिका ने ईरान में 11,000 से ज़्यादा सैन्य ठिकानों पर किए हमले, ईरान के परमाणु कार्यक्रम से खतरों का दिया हवाला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में अब तक 11,000 ठिकानों पर हमले किए गए हैं। इस 'प्री-एम्प्टिव' स्ट्राइक में 150 से अधिक जहाज नष्ट हुए हैं। परमाणु कार्यक्रम के खतरे का हवाला देते हुए अमेरिका और इजरायल ने तेहरान सहित कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/centcom-report-claims-america-attacked-more-than-11000-military-targets/article-148298"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान 11,000 से ज़्यादा सैन्य ठिकानों पर हमले किये है। अमरीकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) यह जानकारी दी है। सेंटकॉम द्वारा एक्स पर पोस्ट की गई जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने अब तक 11,000 से ज़्यादा ठिकानों पर हमला किये है, जिसमें 150 से ज़्यादा क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए जहाज़ शामिल हैं। सेंटकॉम ने दावा है कि अमरीकी वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने 11,000 से ज़्यादा उड़ानें भरी हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि, अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमला करना शुरू किया था। ईरान, इज़रायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर भी जवाबी हमला कर रहा है। अमेरिका और इजरायल ने इस सैन्य अभियान की शुरुआत को एक 'पहले से किया गया हमला' बताया और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से कथित खतरों का हवाला दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 14:09:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजरायल और ईरान जंग के बीच खलीफा एर्दोगन का इस्लामिक कार्ड, शिया हो या सुन्नी, मुसलमान एक हों </title>
                                    <description><![CDATA[तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने ईरान पर हमलों को बड़ी तबाही बताते हुए दुनिया भर के मुसलमानों से एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने शिया-सुन्नी भेद मिटाने और मानवता के आधार पर पीड़ितों के साथ खड़े होने की अपील की। एर्दोगन ने चेतावनी दी कि इस युद्ध की आर्थिक कीमत पूरी दुनिया को चुकानी होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/khalifa-erdogans-islamic-card-amid-the-war-between-israel-and/article-146318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/erdogan.png" alt=""></a><br /><p>अंकारा। अमेरिका-इजरायल और ईरान में युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट में फैले तनाव के बीच तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन अपने इस्लामी एजेंडा को बढ़ाने में जुट गए हैं। मध्य पूर्व में जंग की आंच के बीच एर्दोगन ने दुनिया के मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की है। एर्दोगन ने अपनी एके पार्टी की एक बैठक को संबोधित करते हुए युद्ध रोकने की अपील की और कहा कि हम हथियारों को शांत करने की कोशिश जारी रखे हुए हैं।</p>
<p><strong>ईरान पर हमले को एर्दोगन ने बताया तबाही: </strong>रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रगान की 105वीं वर्षगांठ के मौके पर एर्दोगन ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों को याद किया और इसे बड़ी तबाही बताया। तुर्की के राष्ट्रपति की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले जारी रखे हैं। इन हमलों में खामेनेई समेत कई शीर्ष रैंकिंग ईरानी अधिकारियों की हत्या कर दी गई है। ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर को बहुत नुकसान हुआ है। ईरानी लोग हर दिन जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p><strong>एर्दोगन ने इस्लामिक एकता पर दिया जोर</strong></p>
<p>तुर्की में इस्लामिक खिलाफत का दौर लाने का सपना देखने वाले एर्दोगन ने इस्लामिक एकता के नजरिए पर जोर दिया। उन्होंने कहा, हमने अपने क्षेत्र के लोगों, जिसमें ईरानी भाई भी शामिल हैं, को शिया, सुन्नी, तुर्क और कुर्द के तौर पर नहीं देखा और हम कभी देखेंगे भी नहीं। एर्दोगन ने कहा कि हम हर उस व्यक्ति के साथ खड़े हैं, जिसके साथ गलत हुआ है या जो पीड़ित है। हम नस्ल, संप्रदाय, धर्म, भाषा या मूल के आधार पर भेदभाव को नकारते हैं।</p>
<p><strong>शिया और सुन्नी का भेद मिटाने की अपील</strong></p>
<p>एर्दोगन ने सभी मुसलमानों से एक होने की अपील की और कहा, हमारा सुन्नीवाद या शियावाद जैसा कोई मजहब नहीं है। हमारा सिर्फ एक ही मजहब है, और वह है इस्लाम। हजरत अली हमारे हैं। हजरत उमर हमारे हैं। हमारी मां हजरत आयशा हमारी हैं और मां हजरत जैनब भी हमारी हैं। एर्दोगन ने ईरान पर हमले के वैश्विक असर के बारे में चेतावनी दी। तेल की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि सिर्फ लड़ाई में शामिल देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया इसकी कीमत चुकाने की तैयारी कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 11:23:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसली, जानें क्या है कारण ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त अस्थिरता है। सोमवार को $119 तक पहुँचने के बाद, ब्रेंट क्रूड अब गिरकर $87.57 पर आ गया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/crude-oil-prices-fell-below-88-per-barrel-know-the/article-146132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ईरान इजरायल युद्व का असर अब कच्चे तेल पर साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव दिखाई दे रहा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई थी, जिसके बाद लगातार दो दिनों से तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 87.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। बुधवार को डब्ल्यूटीआई 83.08 डॉलर पर आ गया। इससे पहले मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही और यह 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गया था। इससे पहले सोमवार को कच्चा तेल बीच कारोबार में 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था।</p>
<p>अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को एक संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान पर किये गये हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ईरान पर हमले और उसकी जवाबी प्रतिक्रिया के कारण पश्चिम एशिया में इन दोनों गंभीर भू-राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। इससे कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति और उत्पादन दोनों बाधित हुए हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 18:00:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी ने सुरक्षा मामलों की समिति में पश्चिम एशिया में स्थिति की समीक्षा की, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में CCS की बैठक में ईरान-इजराइल युद्ध से उत्पन्न स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई। समिति ने खाड़ी देशों में फंसे भारतीय प्रवासियों और छात्रों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कूटनीति की वापसी पर जोर दिया। सभी विभागों को प्रभावित नागरिकों की तत्काल सहायता और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-reviewed-the-situation-in-west-asia-in-the/article-145107"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई से पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की और क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार देर रात हुई बैठक में पश्चिम एशिया में निरंतर बदलते हालात की विस्तार से समीक्षा की गई। समिति ने टकराव को जल्द खत्म करने और बातचीत और कूटनीति पर लौटने की अहमियत पर जोर दिया।</p>
<p>समिति को 28 फरवरी को ईरान पर हवाई हमले और उसके बाद बढ़ी हिंसा, जिसमें कई गल्फ देशों में हुए हमले भी शामिल हैं, के बारे में जानकारी दी गई। इसने इस इलाके में रहने वाले बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई। समिति ने इस इलाके में आने-जाने वाले भारतीय यात्रियों और तय परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को होने वाली मुश्किलों के साथ-साथ इलाके की सुरक्षा और आर्थिक तथा  वाणिज्य गतिविधियों पर इसके बड़े असर की भी समीक्षा की।</p>
<p>समिति ने सभी संबंधित विभागों को इन घटनाओं से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद के लिए जरूरी और मुमकिन कदम उठाने का निर्देश दिया। उसने टकराव को जल्द खत्म करने और बातचीत और कूटनीति पर लौटने की अहमियत पर जोर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 11:17:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद भारत ने दी नागरिकों को राहत, कहा- वीजा अवधि बढ़ाने के लिए कर सकते हैं आवेदन </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान पर हमलों के बाद हवाई क्षेत्र बंद होने से भारत में फंसे विदेशी यात्रियों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। विदेश मंत्रालय ने फंसे हुए नागरिकों को वीजा विस्तार और स्टे नियमित करने के लिए पंजीकरण कार्यालय (FRRO) से संपर्क करने की सलाह दी है। सुरक्षा कारणों से 11 देशों के ऊपर से उड़ानों पर 2 मार्च तक रोक लगाई गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-the-joint-military-action-by-america-and-israel-on/article-145034"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/india-canada-visa.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के कारण उड़ानों के बंद होने के चलते यहां फंसे विदेशी नागरिक अपने वीजा की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय ने रविवार सुबह एक परामर्श जारी कर कहा कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति के कारण यहां फंसे जिन विदेशी नागरिकों को अपने यात्रा कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा है वे वीजा संबंधी सुविधाओं के लिए निकट के विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p>परामर्श में कहा गया है, भारत में सभी विदेशी नागरिक, जिन्हें पश्चिम एशिया क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रम की वजह से अपनी यात्रा योजना बदलनी पड़ी  हैं और जिन्हें अपने वीजा को बढ़ाने या अपने स्टे को नियमित करने में मदद चाहिए, उनसे अनुरोध है कि वे पास के विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। संबंधित कार्यालय जरूरी औपचारिकता में मदद करेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि, ईरान की राजधानी तेहरान पर रविवार तड़के हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई  और सेना के अनेक शीर्ष अधिकारियों की मौत हो गयी है। इस तनाव से मध्य पूर्व का स्वरूप बदलने का खतरा है। अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान के बाद पश्चिम एशिया में बनी नयी भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच एयर इंडिया ने इन उड़ानों को रद्द करने की घोषणा की है। ये सभी उड़ानें पश्चिम एशिया के ऊपर से होकर गुजरने वाली हैं।</p>
<p>नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने 11 पश्चिम एशियाई देशों की सूची जारी करते हुए विमान सेवा कंपनियों को 02 मार्च तक इनके हवाई क्षेत्र से उड़ान न भरने की सलाह दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 14:39:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में भारी गिरावट जारी, सेंसेक्स 270.84 अंक टूटकर 81,909.63 पर बंद, निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक व्यापार युद्ध (Trade War) की आशंका और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण बुधवार, 21 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे सत्र में लाल निशान पर बंद हुआ। सेंसेक्स 271 अंक गिरकर 81,910 के स्तर पर रहा, जबकि निफ्टी 25,158 के नीचे फिसल गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/heavy-decline-continues-in-the-stock-market-sensex-fell-by/article-140387"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/share-market02.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। शेयर बाजारों में लगातार तीसरें दिन गिरावट देखी गई। बता दें कि सेंसेक्स 270.84 अंक टूटकर 81,909.63 अंक पर और निफ्टी-50 सूचकांक 75 अंक नीचे 25,157.50 अंक पर बंद हुआ। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty 50) शुरुआती कारोबार में 1,000 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ खुले, लेकिन बाद में निचले स्तरों से कुछ उबरने में सफल रहे। बाजार की इस अस्थिरता के पीछे कमजोर वैश्विक संकेत, विदेशी कोषों की निरंतर निकासी और तिमाही नतीजों का दबाव प्रमुख कारण रहे।</p>
<p><strong>उतार-चढ़ाव के प्रमुख कारण</strong></p>
<p>बाजार में इस तेज गिरावट और अस्थिरता के पीछे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारक जिम्मेदार हैं:</p>
<p>कमजोर वैश्विक संकेत: अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच शुल्क (tariff) विवाद को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में बिकवाली का माहौल पैदा किया, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।</p>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली: विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। मंगलवार (20 जनवरी, 2026) को भी उन्होंने करीब 2,938 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा।</p>
<p>तिमाही नतीजों की चिंता: तीसरी तिमाही के कंपनियों के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। हैवीवेट कंपनियों, जैसे आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के कमजोर प्रदर्शन ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।</p>
<p>रुपये में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 91.28 तक गिर गया, जिसने विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 16:09:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में हाहाकार: गिरावट जारी, सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच बुधवार, 21 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में 'ब्लैकमेल' जैसी स्थिति रही। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 1,000 अंक से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 25,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसल गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/stock-markets-continue-to-fall-sensex-falls-by-more-than/article-140319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/share-market-down.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के बीच घरेलू शेयर बाजारों में बुधवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई का सेंसेक्स 1000 अंक से अधिक लुढ़क गया। रुपये पर जारी दबाव का असर भी बाजार पर देखा जा रहा है। भारतीय मुद्रा फिलहाल 40 पैसे की गिरावट में है।</p>
<p>सेंसेक्स 385.82 अंक गिरकर 81,794.65 अंक पर खुला। खुलने के कुछ ही देर बाद यह हरे निशान में गया लेकिन इसके बाद फिर बिकवाली तेज हो गयी। खबर लिखे जाते समय यह पिछले कारोबारी दिवस के मुकाबले 501.97 अंक (0.61 प्रतिशत) नीचे 81,678.50 अंक पर था।</p>
<p>इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 91.50 अंक टूटकर 25,141 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह भी 134.75 अंक यानी 0.55 फीसदी की गिरावट के साथ 25,097.75 अंक पर रहा। बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट है। मझौली और छोटी कंपनियों में भी बिकवाली हो रही है। </p>
<p>आईटी, रियलटी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, वित्त और रसायन समूहों की कंपनियों में बिकवाली ज्यादा देखी गयी। वहीं, फार्मा, स्वास्थ्य, धातु, सार्वजनिक बैंक और तेल एवं गैस समूहों के सूचकांक हरे निशान में थे। सेंसेक्स की गिरावट में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, एलएंडटी और बीईएल का योगदान अधिक था जबकि सनफार्मा, अल्ट्रटेक सीमेंट और टाटा स्टील के शेयरों में तेजी बनी हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 11:48:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऐतिहासिक तेजी: ग्रीनलैंड विवाद से वैश्विक बाजारों में कोहराम, सोना ₹1.48 लाख और चांदी ₹3.20 लाख के पार</title>
                                    <description><![CDATA[सोने चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी रूकने का नाम नहीं ले रही हैं। अगर हम सिर्फ चांदी की कीमतों की बात करें तो इसकी कीमतें आसमान छू रही है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड अधिग्रहण की कोशिशों और यूरोपीय देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने की धमकी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में 'पैनिक' की स्थिति पैदा कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/historic-rise-chaos-in-global-markets-due-to-greenland-dispute/article-140211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(4)19.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सोने चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी रूकने का नाम नहीं ले रही हैं। अगर हम सिर्फ चांदी की कीमतों की बात करें तो इसकी कीमतें आसमान छू रही है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड अधिग्रहण की कोशिशों और यूरोपीय देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने की धमकी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में 'पैनिक' की स्थिति पैदा कर दी है। इस Trade War के डर से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख किया है, जिससे आज घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतें नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।</p>
<p><strong>MCX पर कीमतों का तांडव</strong></p>
<p>भारतीय वायदा बाजार (MCX) में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों ने इतिहास रच दिया।</p>
<p>MCX गोल्ड: सोना पहली बार ₹1,47,996 प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर जा पहुंचा।</p>
<p>MCX सिल्वर: चांदी ने भी लंबी छलांग लगाई और ₹3,19,949 प्रति किलोग्राम का नया शिखर छुआ।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल</strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा डेनमार्क, जर्मनी और ब्रिटेन सहित 8 यूरोपीय देशों पर 10% से 25% टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद स्पॉट गोल्ड $4,689.39 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, बुलियन मार्केट में यह 'बुल रन' जारी रह सकता है। Citigroup ने अनुमान लगाया है कि अगले तीन महीनों में सोना $5,000 और चांदी $100 प्रति औंस तक पहुंच सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 15:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तरी सीरिया में अंतरिम सरकार, एसडीएफ़ के बीच फिर शुरू हुईं झड़पें</title>
                                    <description><![CDATA[अलेप्पो और रक्का में सीरियाई सेना और SDF के बीच भीषण लड़ाई छिड़ गई है, जिससे शांति समझौता टूटने की कगार पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/clashes-resume-between-interim-government-and-sdf-in-northern-syria/article-140001"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/image1170x530cropped.jpg" alt=""></a><br /><p>दमिश्क। सीरिया के उत्तर-पश्चिम में मौजूद अलेप्पो और रक्का में सीरिया के अंतरिम प्रशासन और कुर्द नेतृत्व वाले सीरियाई लोकतांत्रिक बलो (एसडीएफ) के बीच सैन्य तनाव अचानक बढ़ गया है। एक दिन पहले घोषित वापसी समझौते के बावजूद दोनों पक्षों के बीच भीषण झड़पें शुरू हो गयी हैं। </p>
<p>दिन की शुरुआत पूर्वी अलेप्पो के ग्रामीण इलाकों में फिर से शुरू हुई लड़ाई के साथ हुई। एसडीएफ ने सीरियाई सेना पर आरोप लगाया कि वह 48 घंटे की वापसी अवधि समाप्त होने से पहले ही देर हाफऱ और मस्कानह शहरों में दाखिल हो गयी। दूसरी ओर, सीरियाई सेना ने कहा कि उसने समझौते के उल्लंघन और अपने दो सैनिकों की हत्या के बाद क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिये तैनाती की है।  </p>
<p>जैसे-जैसे टकराव बढ़ा, सीरियाई सुरक्षा बलों ने पूर्वी अलेप्पो से आगे रक्का प्रांत की ओर बढऩे की घोषणा की और फुरात नदी के पश्चिम के सभी क्षेत्रों को बंद सैन्य क्षेत्र घोषित कर दिया। सरकारी मीडिया के अनुसार, सेना ने तबका के पास सफय़ान और अल-सौरा तेल क्षेत्रों सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों और कस्बों पर कब्जा कर लिया है और सैन्य हवाई अड्डे की घेराबंदी शुरू कर दी है। </p>
<p>एसडीएफ ने इन दावों को खारिज कर दिया कि रक्का प्रांत वापसी समझौते के दायरे में था। उनका कहना है कि समझौता केवल देर हाफऱ और मस्कानह के लिए था। एसडीएफ ने रक्का में पूर्ण कफ्र्यू लागू कर दिया है और चेतावनी दी है कि इस तनाव से इस्लामिक स्टेट के कैदियों वाली जेलों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।</p>
<p>तनाव शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही एसडीएफ कमांडर मजलूम आब्दी ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की अपील पर उनकी सेनाएं शनिवार सुबह से फुरात के पूर्व से हटने लगेंगी। एसडीएफ और सीरियाई अंतरिम अधिकारियों दोनों का समर्थन करने वाले अमेरिका ने दोनों पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया है। अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने सीरियाई सरकारी बलों से अलेप्पो और तबका के बीच आक्रामक अभियान रोकने का आग्रह किया है। </p>
<p>दोनों पक्षों ने मार्च 2025 में हुए 'एकीकरण समझौते' को लागू करने की बात कही है, लेकिन लगातार झड़पों के कारण यह प्रक्रिया थमी रही है। पूर्वी अलेप्पो और पश्चिमी रक्का के कुछ हिस्सों में शनिवार रात तक लड़ाई जारी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 17:21:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वार्षिकी 2025 सोना : आम आदमी की पहुंच से दूर हुआ सोना, निवेशकों की चांदी</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक तनाव और मांग के कारण 2025 में सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी हुई। एक साल में सोना 81% बढ़कर ₹1.37 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी 167% की उछाल के साथ ₹2.28 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई। आसमान छूती कीमतों ने जेवरों की खपत घटाई है, लेकिन निवेशकों को मालामाल कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/annuity-2025-gold-out-of-reach-of-common-man-and/article-137540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/gold.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनैतिक और व्यापार तनावों के बीच पिछले एक साल में सोने-चांदी में जबरदस्त तेजी रही और एक तरफ जहां दोनों कीमती धातु आम लोगों की पहुंच से दूर हो गयीं, वहीं निवेशकों को खूब फायदा हुआ। एमसीएक्स इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, अहमदाबाद में सोने की कीमत 31 दिसंबर 2024 को 75,913 रुपये प्रति दस ग्राम थी जो 26 दिसंबर 2025 को बढ़कर 1,37,591 रुपये पर पहुंच गयी। इस प्रकार, इसकी कीमत 81 प्रतिशत से अधिक बढ़ी। इस दौरान चांद भी 85, 851 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2,28,948 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गयी। इसकी कीमत एक साल में 167 प्रतिशत बढ़ी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमत में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण वैश्विक है। एक तरफ रूस युक्रेन युद्ध और दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली पीली धातु की मांग बढ़ी है। इसके अलावा, व्यापार तनाव भी इसकी एक वजह है। निवेशक ही नहीं, विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं। </p>
<p>एक तरफ जहां मूल्य में सोने की खपत बढ़ी है, वहीं वास्तविक खपत में कमी आयी है। इसका मुख्य कारण इसकी आसमान छूती कीमतें हैं जिससे यह आम लोगों की पहुंच से दूर चला गया है।</p>
<p>ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) ने सोने चांदी में तेजी के लिए वैश्विक कारकों के साथ देश में वैवाहिक और त्योहारी मांग को भी जिम्मेदार ठहराया है। उसका कहना है कि बढ़ती कीमतों के बीच देश में इसकी निवेश मांग भी बनी हुई है। उसने नये साल में भी तेजी जारी रहने की संभावना जतायी है।</p>
<p>जीजेसी के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि साल 2025 में एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया है कि कीमती धातुएं रणनीतिक संपत्ति हैं। सोने की ऐतिहासिक तेजी भारतीय परिवारों के इसमें पीढिय़ों से कायम भरोसे का सत्यापन है। दूसरी तरफ, सौर उपकरणों, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों में बढ़ती खपत के कारण चांदी में जबरदस्त देखी जा रही है।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर लंदन बुलियन मार्केट में इस साल सोना 70.7 प्रतिशत चढ़कर 4,482 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी भी 135 प्रतिशत की तेजी के साथ 69.22 डॉलर प्रति औंस पर रही।  दोनों कीमती धातुओं में विदेशों में रही तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट से देश में इनके दाम बढ़े हैं। </p>
<p>विश्व स्वर्ण परिषद का कहना है कि पिछले एक साल में सोना 60 प्रतिशत से अधिक महंगा हुआ है। कई दशक में यह सोने का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इसके पीछे मुख्य वजह निवेश मांग है। बेहद तनावपूर्ण भू-राजनैतिक परिवेश और कमजोर अमेरिकी डॉलर के कारण निवेशक सोने में पैसा लगा रहे हैं। साथ ही केंद्रीय बैंकों की ओर से भी मांग ऊंची बनी हुई है।</p>
<p>रिजर्व बैंक की दिसंबर की मासिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की उपयोगिता बनी हुई है। मूल्य के मामले में यह सबसे स्थिर कॅमोडिटी है। वहीं, सोने की तुलना में अस्थिर होने के बावजूद सफेद धातु में भी काफी हद तक सुरक्षित निवेश के गुण हैं। </p>
<p>सोने की ऊंची कीमतों के कारण इसकी वैवाहिक मांग कम हुई है। लोग अब पहले के मुकाबले जेवर कम खरीद रहे हैं या कम कैरेट के गहने लेना पसंद कर रहे हैं। विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, इस साल भारत में सोने की मांग में 12 प्रतिशत की कमी का अनुमान है। वहीं, सोने के बिस्कुट और सिक्कों की मांग बढ़ी है। </p>
<p>निवेशकों के अलावा सर्राफा कारोबारी और शो-रूम चेन को भी भारी मुनाफा हो रहा है। ये मेकिंग-चार्ज प्रतिशत में लेते हैं जिससे सोना-चांदी जितनी महंगी होती जा रही है, मेकिंग-चार्ज का शुद्ध मूल्य उतना ही बढ़ रहा है। </p>
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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 18:51:16 +0530</pubDate>
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