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                <title>Nuclear Program - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Nuclear Program RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान : ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब, कूटनीतिक सफलता का दिया संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष समाप्त होने का संकेत देते हुए पाकिस्तान में दोबारा शांति वार्ता शुरू होने की घोषणा की है। अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकाबंदी से ईरान का 90% समुद्री व्यापार ठप हो गया है। अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन रोकने और परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की कड़ी शर्त रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trumps-big-announcement-indicates-diplomatic-success-as-war-with/article-150525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष 'समाप्त होने के करीब' है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से ठप हो गई है। शक्ति प्रदर्शन के बावजूद मुख्य गतिरोध अभी भी बने हुए हैं। अमेरिका ईरान के यूरेनियम संवर्धन को तत्काल रोकने और प्रमुख परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की मांग कर रहा है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की भी मांग कर रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों द्वारा समझौते पर सहमति नहीं बन पाने के कारण 10 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत के बाद मुख्य मुद्दे अनसुलझे रह गए हैं।</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दोनों पक्षों के बीच गहरी अविश्वास की भावना को स्वीकार किया लेकिन एक सतर्क आशावादी रुख भी अपनाया। उन्होंने कहा, "आप इस समस्या को रातों-रात हल नहीं करने जा रहे हैं।" जेडी वेंस ने हालांकि यह भी जोड़ा कि ईरानी वार्ताकार समझौता करने के इच्छुक दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम जहाँ हैं, उसे लेकर मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ।" डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया कि सप्ताहांत की चर्चाओं के विफल होने और घेराबंदी लागू होने के बाद, अगले 48 घंटों के भीतर पाकिस्तान में अगले दौर की बातचीत हो सकती है, जो बढ़ते दबाव के बीच एक नए कूटनीतिक प्रयास का संकेत है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए 'बेहद विस्तृत' सत्यापन तंत्र शामिल होना चाहिए। बातचीत के अगले चरण में यह प्रमुख मुद्दा हो सकता है। इस बीच, पूरे क्षेत्र में तनाव और कूटनीति का असर दिख रहा है। इजरायल और लेबनान ने 14 अप्रैल को दशकों में पहली बार अपनी पहली सीधी बातचीत की, जिसमें दोनों पक्ष जुड़ाव जारी रखने पर सहमत हुए। हालांकि, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम के लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई, जो ईरान-अमेरिका गतिरोध से जुड़ा एक और संवेदनशील मुद्दा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 16:26:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इजरायली पीएम नेतन्याहू का कड़ा रुख: ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए जमीनी कार्रवाई की जरूरत, ईरान के शासन को हवाई हमलों से नहीं उखाड़ा जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि केवल हवाई हमलों से ईरानी शासन को नहीं उखाड़ा जा सकता। उन्होंने 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' के तहत मिसाइल फैक्ट्रियों को नष्ट करने का दावा करते हुए जमीनी अभियान और विचारधारा में बदलाव को आवश्यक बताया। नेतन्याहू के अनुसार, ईरान अब परमाणु और बैलिस्टिक क्षमता में बेहद कमजोर हो चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/israeli-pm-netanyahu-said-ground-action-is-needed-for-regime/article-147219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm1.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को कहा कि केवल हवाई हमलों से ईरान के शासन को नहीं उखाड़ा जा सकता, बल्कि इसके लिए एक जमीनी कार्रवाई की आवश्यकता होगी। नेतन्याहू ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इजरायल और अमेरिका हवाई हमलों से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को नष्ट कर रहे हैं, लेकिन सार्थक सत्ता परिवर्तन केवल हवाई अभियानों से संभव नहीं है। उन्होंने कहा, क्रांति केवल हवा से नहीं आ सकती, इसके लिए जमीनी कार्रवाई भी जरूरी है। उन्होंने यह साझा करने से इनकार कर दिया कि इस जमीनी कार्रवाई का स्वरूप क्या होगा।</p>
<p>इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान में केवल शासन बदलना काफी नहीं है, बल्कि वहां की विचारधारा में बदलाव आना जरूरी है। उन्होंने इसकी तुलना इतिहास से करते हुए कहा, आप एक तानाशाह (अयातुल्लाह) को हटाकर दूसरे को नहीं लाना चाहेंगे। आप हिटलर की जगह दूसरे हिटलर को नहीं बिठाना चाहेंगे।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल और अमेरिका हवाई हमलों के जरिए केवल स्थितियां पैदा कर सकते हैं, लेकिन वास्तविक क्रांति और सत्ता का तख्तापलट केवल जमीनी स्तर पर ईरानी जनता के प्रयासों और सक्रियता से ही संभव है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु के बाद शासन के भीतर काफी तनाव और दरारें हैं। उन्होंने उनके संभावित उत्तराधिकारी मुज्तबा खामेनेई पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अभी तक सामने नहीं आए हैं, जो शासन की कमजोरी को दर्शाता है।</p>
<p>अभियान के 20वें दिन नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान अब यूरेनियम संवर्धन करने और बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता खो चुका है। उन्होंने कहा, हम इन क्षमताओं को धूल और राख में मिलाना जारी रखेंगे। ईरान आज पहले से कहीं ज्यादा कमजोर है, जबकि इजरायल एक क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत इजरायल अब उन कारखानों को निशाना बना रहा है जो मिसाइलों के पुर्जे बनाते हैं, ताकि ईरान के औद्योगिक आधार को पूरी तरह खत्म किया जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मतभेदों की खबरों पर नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायल ने अकेले कार्रवाई की थी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के अनुरोध पर भविष्य के कुछ हमलों को फिलहाल रोक दिया गया है। </p>
<p>उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया कि उन्होंने अमेरिका को इस युद्ध में धकेला है। साथ ही, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील रास्तों के विकल्प के रूप में अरब प्रायद्वीप से भूमध्यसागरीय बंदरगाहों तक पाइपलाइन बिछाने का सुझाव दिया। नेतन्याहू के इस संबोधन के कुछ ही घंटों बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर नए मिसाइल हमले किए, जिससे यरूशलम और इजरायल के अन्य हिस्सों में हवाई हमले के सायरन बजने लगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 18:22:17 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-ईरान बातचीत: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का दावा, अमेरिका के साथ बातचीत प्रगति पर, इन मुद्दों पर हो रही चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता को प्रगति पर बताया। विदेश मंत्री अराघची ने शांतिपूर्ण संवाद पर जोर देते हुए दबाव की भाषा खारिज की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-iran-talks-iranian-president-masoud-pezeshkian-claims-talks-with-us/article-142420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)7.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने रविवार को अपने देश और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई परमाणु (एजेंसी) को प्रगति पर कहा। उन्होंने ये टिप्पणियां एक्स पर एक पोस्ट में कीं जिसमें उन्होंने शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई अप्रत्यक्ष (एजेंसी) पर प्रकाश डाला।</p>
<p>पेजेशकियान ने कहा कि ये चर्चाएं पश्चिम एशिया क्षेत्र में मित्रवत सरकारों द्वारा किए गए अनुवर्ती प्रयासों के परिणामस्वरूप हुईं, और इस बात पर बल दिया कि ईरान की हमेशा से ही संवाद द्वारा मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की चुनी हुई रणनीति रही है। इसी बीच, तेहरान में एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, जिन्होंने शुक्रवार की (एजेंसी) में देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, ने कहा, कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमारे पास क्या होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने आश्वासन दिया कि ईरान का परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है, साथ ही उन्होंने किसी भी प्रकार की दादागिरी को दृढ़ता से खारिज कर दिया। अराघची ने कहा, अगर वे ईरानी लोगों से बल प्रयोग की भाषा में बात करेंगे तो हम भी उन्हें उसी भाषा में जवाब देंगे। हालांकि, अगर वे हमसे सम्मान की भाषा में बात करेंगे तो उन्हें भी उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा।</p>
<p>शुक्रवार को हुई अमेरिका और ईरान के बीच क्षेत्रीय तनाव बढऩे के बीच हुई, जिसमें मध्य पूर्व में हाल ही में अमेरिका द्वारा सैन्य जमावड़ा और ईरान द्वारा तैयारियों में तेजी शामिल हैं। समाप्त होने के बाद, अराघची ने कहा, कुल मिलाकर, मैं कह सकता हूं कि यह एक अच्छी शुरुआत थी। हालांकि, प्रक्रिया की निरंतरता दोनों पक्षों की अपनी-अपनी राजधानियों में होने वाली बातचीत और इसे आगे बढ़ाने के बारे में उनके निर्णयों पर निर्भर करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 13:03:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अयातुल्लाह खामनेई ने कहा, पश्चिम के साथ ईरान के टकराव का मुख्य मुद्दा परमाणु नहीं, वैचारिक</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई ने कहा कि पश्चिम के साथ विवाद का मुख्य कारण परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान द्वारा पश्चिमी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को दी जा रही चुनौती है। उन्होंने इस टकराव को वैचारिक बताया। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि इस कड़े रुख और प्रतिबंधों से ईरानी अर्थव्यवस्था पंगु हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ayatollah-khamenei-said-the-main-issue-of-irans-conflict-with/article-137541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/khamnoi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई का कहना है कि ईरान के प्रति पश्चिमी देशों की शत्रुता का मुख्य कारण उसका परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि पश्चिमी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को ईरान द्वारा दी जा रही चुनौती है। यूरोप में इस्लामी छात्र संघों की वार्षिक बैठक के लिए जारी एक संदेश में खामेनेई ने जोर देकर कहा कि ईरान और पश्चिमी शक्तियों के बीच समस्या का मुख्य कारण परमाणु मुद्दा नहीं है, बल्कि ईरान की उस योजना का विरोध है जिसके तहत वह एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय इस्लामी व्यवस्था स्थापित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि मुख्य विवाद वैचारिक है। </p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता ने इस टकराव को अन्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के विरुद्ध एक प्रतिरोध बताया। उन्होंने हालिया क्षेत्रीय संघर्षों का संदर्भ देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना और क्षेत्र में उसके सहयोगियों के हमले को ईरान के युवाओं की पहल, साहस और बलिदान ने विफल कर दिया है।</p>
<p>गौरतलब है कि, कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि हाल के बारह दिवसीय युद्ध में ईरान को अपने वरिष्ठ सैन्य कमांडरों को खोना पड़ा और परमाणु तथा सुरक्षा बुनियादी ढांचे में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इन आलोचकों का कहना है कि खामेनेई की दशकों पुरानी नीतियों के कारण पश्चिमी देशों के साथ हुए इस टकराव ने ईरानी जनता पर भारी आर्थिक बोझ डाला है। यही नहीं कड़े प्रतिबंधों ने अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया है, मुद्रा को कमजोर किया है और जीवन यापन के लिए मुश्किलें पैदा की हैं। आलोचकों का कहना है कि इन चुनौतियों के बावजूद ईरान के वरिष्ठ अधिकारी इस रणनीति का बचाव कर रहे हैं।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि प्रतिबंधों ने आर्थिक अव्यवस्था को प्रभावित किया है, लेकिन उन्होंने इसे ईरान की औद्योगिक स्वतंत्रता और रक्षा क्षेत्र के विकास का एक कारक भी बताया। कुछ पर्यवेक्षकों के अनुसार, खामेनेई का यह कहना कि परमाणु मुद्दा गौण है, तेहरान के उन हालिया बयानों के विपरीत है जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईऐईऐ) की रिपोर्टों ने ईरान के परमाणु केंद्रों पर इसरायली और अमेरिकी हमलों का रास्ता साफ किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 18:32:21 +0530</pubDate>
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