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                <title>Economic Sanctions - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Economic Sanctions RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका ने की युद्व विराम की घोषणा, पढ़ें युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान ने क्या रखीं शर्ते ?  </title>
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                        <![CDATA[ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू हो गया है। शुक्रवार से इस्लामाबाद में शुरू होने वाली इस वार्ता के लिए ईरान ने 10 प्रमुख शर्तें रखी हैं, जिनमें प्रतिबंध हटाना, मुआवजा और स्थायी शांति शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण भी बहाल होगा, जिससे वैश्विक व्यापार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-announces-ceasefire-read-what-conditions-iran-has-set-to/article-149520"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba-khamenei.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि ईरान शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ वार्ता शुरू करेगा। ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने परिषद के हवाले से बुधवार को कहा, "अमेरिकी पक्ष पर अविश्वास के साथ यह वार्ता 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू होगी। ईरान इसके लिए दो सप्ताह का समय देगा। पक्षों की सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है। इस दौरान पूर्ण राष्ट्रीय एकता बनाए रखनी होगी।"</p>
<p>परिषद ने कहा कि इस अवधि के लिए युद्धविराम घोषित किया जाएगा साथ ही यह भी कहा कि वार्ता मतलब अमेरिका के साथ युद्ध का अंत नहीं है। बयान के अनुसार, अगर वार्ता के दौरान अमेरिका जरा सी भी गलती करता है तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की ओर से मैं अपने प्रिय भाइयों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और फील्ड मार्शल मुनीर के क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के अथक प्रयासों के लिए आभार व्यक्त करता हूं।"</p>
<p>इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा किया था कि उन्होंने ईरान के साथ दो सप्ताह के द्विपक्षीय युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा की गारंटी देने पर भी सहमति व्यक्त की है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण ईरान को सौंपने पर भी सहमति व्यक्त की है।</p>
<p>ईरान ने अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए मुख्य रूप से अपनी 10 प्रमुख शर्तें रखी है।</p>
<p>इराक, लेबनान और यमन में जारी युद्धों का पूरी तरह अंत किया जाए।<br />ईरान के साथ चल रहा संघर्ष बिना किसी समयसीमा के स्थायी रूप से खत्म किया जाए।<br />पूरे क्षेत्र में सभी प्रकार के टकराव और हिंसक हालात समाप्त किए जाएं।<br />होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल दिया जाए।<br />होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और स्वतंत्र नौवहन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियम और व्यवस्थाएं बनाई जाएं।<br />ईरान को पुनर्निर्माण से जुड़ी पूरी लागत का मुआवजा दिया जाए।<br />ईरान पर लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाने के लिए ठोस और पूर्ण प्रतिबद्धता दिखाई जाए।<br />अमेरिका के नियंत्रण में मौजूद ईरान की जमी हुई संपत्तियों और फंड्स को वापस किया जाए।<br />ईरान परमाणु हथियार विकसित या हासिल करने का प्रयास न करने की स्पष्ट और पूरी प्रतिबद्धता जताए।<br />इन सभी शर्तों को स्वीकार करते ही हर मोर्चे पर तुरंत युद्धविराम लागू कर दिया जाए।</p>]]>
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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:29:34 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>क्यूबा ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार राष्ट्रव्यापी विद्युत ठप होने की घोषणा की, ट्रंप ने की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी</title>
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                        <![CDATA[ईंधन संकट और ग्रिड फेल होने से क्यूबा में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और अमेरिकी प्रतिबंधों ने तनाव बढ़ा दिया है। द्वीप पर पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। क्यूबा सरकार ने मानवीय सहायता के बीच संभावित हमले की आशंका जताते हुए हाई अलर्ट जारी किया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/cuba-announces-second-nationwide-blackout-in-a-week-trump-predicts/article-147421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cuba.png" alt=""></a><br /><p>हवाना। क्यूबा के ऊर्जा मंत्रालय ने शनिवार शाम को घोषणा किया कि पूरे द्वीप में एक बार फिर विद्युत ठप हो गई है जिससे एक करोड़ से अधिक लोग बिजली के बिना रह गए हैं। यह जानकारी सीएनएन ने रविवार को दी। मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राष्ट्रीय विद्युत प्रणाली पूरी तरह से ठप हो गई है। बिजली बहाल करने के लिए प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं।"</p>
<p>सोमवार को हुए भीषण विद्युत ग्रिड के ठप होने से क्यूबा अभी उबर ही रहा था। यह इस साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला से ईंधन की आपूर्ति पर रोक लगाने के बाद पहली घटना थी। शनिवार को विद्युत ठप होने से ठीक पहले, देश की सरकारी बिजली कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा था कि शनिवार रात को सबसे व्यस्त समय के दौरान उसे 1.704 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल के दिनों में क्यूबा के बारे में अक्सर बातें की है और वहां की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी की है। सोमवार को उन्होंने खुलेआम यह सवाल उठाया था कि क्या उन्हें इस द्वीप पर कब्जा करने का सम्मान प्राप्त होगा।</p>
<p>हालांकि, जब राष्ट्रपति ट्रम्प से पूछा गया कि क्या क्यूबा को अपने कब्जे में लेने के अभियान में उसी तरह का बल का प्रयोग किया जाएगा जैसा कि जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के दौरान किया था, तो उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया।</p>
<p>शनिवार को क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने द्वीप पर मानवीय सहायता पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार का मानना है कि क्यूबा पर हमला हो सकता है और तदनुसार वह तैयारी कर रही है। पिछले सप्ताह, राष्ट्रपति डियाज़-कैनेल ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि क्यूबा ईंधन प्रतिबंध समाप्त करने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, क्यूबा सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका अपनी राजनीतिक व्यवस्था पर बातचीत करने का कोई इरादा नहीं है।</p>
<p>क्यूबा में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में क्रांतिकारियों द्वारा 1959 में फुल्गेन्सियो बतिस्ता की सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से, देश अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। क्यूबा ने पहले भी गंभीर आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना किया है, जैसे कि "विशेष काल", जब 1991 में सोवियत संघ का पतन हुआ तब इसका प्रभाव उस समय के कम्युनिस्ट सरकार के मुख्य बाहरी सहायता स्रोत पर पड़ा।</p>
<p>यह ताजा संकट भी उतना ही निराशाजनक है। मेक्सिको और वेनेजुएला से ईंधन की कमी के कारण द्वीप का पर्यटन लगभग ठप हो गया है, शिक्षा व्यवस्था बाधित हुई है, अस्पतालों में सेवाएं कम हो गई हैं और किसानों को अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।</p>]]>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 16:05:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>ग्रीनलैंड विवाद: अमेरिका पर 93 अरब यूरो का आयात शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है यूरोपीय संघ</title>
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                        <![CDATA[यूरोपीय संघ डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने की धमकी के जवाब में 93 अरब यूरो का आयात शुल्क लगाने और अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का मसौदा तैयार कर रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-is-considering-imposing-import-duty-of-93-billion-euros/article-140122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>ब्रसेल्स। ग्रीनलैंड पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बयानों और धमकियों के बीच यूरोपीय संघ (ईयू) अमेरिका पर 93 अरब यूरो (107.68 अरब डॉलर) का आयात शुल्क लगाने या अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय ब्लॉक में व्यापार करने से रोकने पर विचार कर रहा है। </p>
<p>फाइनेंशियल टाइम्स की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा गया कि अगले हफ्ते दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) पर होने वाली बैठक से पहले इस शुल्क का मसौदा तैयार किया जा रहा है, ताकि राष्ट्रपति ट्रंप पर यूरोपीय नेताओं को थोड़ी बढ़त मिल सके। </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया कि यूरोपीय यूनियन ने पिछले साल ही आयात शुल्क की सूची बना ली थी लेकिन व्यापार युद्ध रोकने के लिये उसे छह फरवरी तक के लिये स्थगित कर दिया था। ग्रीनलैंड पर अमेरिका-यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईयू नेताओं ने रविवार को इसे दोबारा लागू करने पर विचार किया। इसके अलावा यूरोपीय नेताओं ने दबाव-विरोधी मसौदे पर भी बातचीत की, जिसके लागू होने पर अमेरिकी कंपनियां यूरोप में अपना सामान नहीं बेच पायेंगी। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि जो देश ग्रीनलैंड खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन नहीं करेंगे, वह उन पर आयात शुल्क लगा सकते हैं। ट्रंप ने डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा भी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर हालात नहीं बदलते तो एक जून से यह बढ़कर 25 प्रतिशत हो जायेगा। जिसके बाद आठों देशों ने रविवार को एक संयुक्त बयान जारी कर ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लिये पूर्ण समर्थन का ऐलान किया था। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार और गुरुवार को विश्व आर्थिक मंच की बैठक में हिस्सा लेंगे। वहां वह यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लियन सहित अन्य यूरोपीय नेताओं से बात कर सकते हैं। इसके साथ ही वह यूक्रेन का समर्थन करने वाले पश्चिमी देशों की एक बैठक में भी शामिल हो सकते हैं। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:13:07 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों के बाद ग्रीनलैंड, डेनमार्क में भड़का विरोध प्रदर्शन, ग्रीनलैंडवासियों का है ग्रीनलैंड के नारे लगाए</title>
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                        <![CDATA[ग्रीनलैंड की संप्रभुता के समर्थन में कोपेनहेगन और नूक में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रधानमंत्री निल्सन ने ट्रंप की आयात शुल्क और अधिग्रहण की धमकी को सिरे से खारिज किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/protests-broke-out-in-denmark-after-us-president-trumps-statements/article-140011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/hands-off-greenland-demonstration-in-copenhagen.webp" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगन। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने के अमेरिकी प्रयासों और बयानों के विरोध में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के कई शहरों में विशाल विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। </p>
<p>डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के 'सिटी हॉल स्क्वायर' पर शनिवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 12 बजे (भारतीय समयानुसार अपराह्न 4:30 बजे) भारी भीड़ जमा हुई, जिसने अमेरिकी दूतावास तक मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों देशों के नागरिक शामिल हुए, जो अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे हुए थे। </p>
<p>इस बीच ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में भी दोपहर से ही लोग जुटना शुरू हो गए और ग्रीनलैंडवासियों का है ग्रीनलैंड के नारे लगाए। इस प्रदर्शन में ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक इनुइट गीत गाए और कई लोग मेक अमेरिका गो अवे (अमेरिका को वापस भेजो) लिखी हुई टोपियां पहने नजर आये। </p>
<p>प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि अमेरिका एक फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाएगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ग्रीनलैंड की खरीद को लेकर कोई समझौता नहीं होता है, तो एक जून से इस शुल्क को बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य के भीतर एक स्वशासी क्षेत्र है, जिसकी रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क सरकार के नियंत्रण में है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी इस द्वीप को खरीदने की इच्छा जतायी थी, लेकिन अब वे इसे हासिल करने के लिए अमेरिकी सेना के उपयोग सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। </p>
<p>इससे पहले बुधवार को वॉशिगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी, जिसमें ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर मौलिक असहमति बनी रही। इस बीच, ट्रंप की आयात शुल्क लगाने की धमकियों पर नॉर्डिक देशों और यूरोपीय संघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। डेनमार्क सहित कई यूरोपीय देशों ने ब्लैकमेल और अस्वीकार्य करार देते हुए एकजुट होकर जवाब देने की चेतावनी दी है। </p>
<p>डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने इस धमकी पर हैरानी जताते हुए कहा कि वे यूरोपीय आयोग के संपर्क में हैं। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने स्पष्ट किया कि सहयोगियों के बीच विवादों का समाधान दबाव के बजाय बातचीत से होना चाहिए। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने इसे सीधे तौर पर ब्लैकमेल बताते हुए कहा कि स्वीडन ऐसी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। </p>
<p>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी ट्रंप के कदम की आलोचना की है। मैक्रों ने कहा कि यूरोपीय देश इस पर समन्वित प्रतिक्रिया देंगे, जबकि स्टार्मर ने ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला डेनमार्क और वहां के लोगों द्वारा किए जाने की वकालत की। </p>
<p>यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम से ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में गिरावट आएगी। इस बीच, यूरोपीय संसद में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों को स्थगित करने और दबाव विरोधी रणनीति जैसे सख्त व्यापारिक हथियारों के इस्तेमाल की मांग तेज हो गयी है। साइप्रस की अध्यक्षता में रविवार को यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के राजदूतों की आपात बैठक बुलाई गयी है। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 18:54:08 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रीनलैंड विवाद:  बढ़ते तनाव के बीच ईयू ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर लगाई रोक</title>
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                        <![CDATA[ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड न बेचने पर आयात शुल्क लगाने की धमकी के बाद ईयू ने प्रस्तावित व्यापार समझौते पर रोक लगा दी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-bans-proposed-trade-deal-with-us-amid-rising-tension/article-139976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। ग्रीनलैंड मामले में अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईयू ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत रोक दी है। ईयू ने यह कदम डेनमार्क और संघ के कई देशों पर अमेरिका द्वारा आयात शुल्क लगाने की चेतावनी के बाद उठाया है। ईयू के नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ये आयात शुल्क संघ और अमेरिका के संबंधों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता ऐसे सिद्धांत हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।</p>
<p>गौरतलब है कि, जुलाई 2025 में प्रस्तावित समझौते को आयात शुल्क कम करने और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि ग्रीनलैंड पर ट्रंप के रुख और और आयात शुल्क लगाने की उनकी चेतावनी के बाद संघ ने इस प्रस्तावित समझौते के अनुमोदन को रोकने का आह्वान किया है। </p>
<p>ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में धमकी दी है कि यदि ग्रीनलैंड को'पूरी तरह' से अमेरिका को नहीं बेच दिया जाता, तो एक फरवरी 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो 1 जून से बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा।</p>
<p>ट्रंप ने ग्रीनलैंड के'रणनीतिक स्थान और खनिज संसाधनों को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी, एक फरवरी 2026 से, उपर्युक्त सभी देशों द्वारा अमेरिका को भेजे जाने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। एक जून 2026 को यह शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह तब तक लागू रहेगा, जब तक ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए कोई समझौता नहीं हो जाता।</p>
<p>यूरोपियन पीपल्स पार्टी के उपाध्यक्ष सिगफ्राइड मूरसन और अन्य यूरोपीय अधिकारियों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घोषणा उस स्थिरता को कमजोर करती है, जिसे सुनिश्चित करने के लिए यह व्यापार समझौता किया गया था। मूरसन ने कहा, पिछले साल अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते से स्थिरता ही एकमात्र लाभ होता। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कई ईयू सदस्य देशों पर नए आयात लगाने की आज की घोषणा उस स्थिरता को छीन लेती है। यही कारण है कि उस व्यापार समझौते के अनुसमर्थन को स्थगित करना उचित है।</p>
<p>मूरसन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, हमें पिछले जुलाई के ईयू-यूएस व्यापार समझौते को बहुत जल्द अनुमोदित करना था, जिससे अमेरिका से यूरोपीय संघ में होने वाले आयात पर आयात शुल्क शून्य हो जाता। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए इस मंजूरी के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को हासिल करने पर आमादा हैं। हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपने 'आत्मनिर्णय के अधिकार' पर जोर देते हुए इस विचार को खारिज कर दिया है। बढ़ते तनाव के जवाब में, डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है, जबकि जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे और नीदरलैंड ने भी छोटी सैन्य टुकड़यिाँ भेजी हैं। यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के किसी भी अमेरिकी प्रयास का नाटो और अटलांटिक के दोनों ओर की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 13:35:00 +0530</pubDate>
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                <title>अयातुल्लाह खामनेई ने कहा, पश्चिम के साथ ईरान के टकराव का मुख्य मुद्दा परमाणु नहीं, वैचारिक</title>
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                        <![CDATA[ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई ने कहा कि पश्चिम के साथ विवाद का मुख्य कारण परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान द्वारा पश्चिमी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को दी जा रही चुनौती है। उन्होंने इस टकराव को वैचारिक बताया। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि इस कड़े रुख और प्रतिबंधों से ईरानी अर्थव्यवस्था पंगु हो गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ayatollah-khamenei-said-the-main-issue-of-irans-conflict-with/article-137541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/khamnoi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई का कहना है कि ईरान के प्रति पश्चिमी देशों की शत्रुता का मुख्य कारण उसका परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि पश्चिमी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को ईरान द्वारा दी जा रही चुनौती है। यूरोप में इस्लामी छात्र संघों की वार्षिक बैठक के लिए जारी एक संदेश में खामेनेई ने जोर देकर कहा कि ईरान और पश्चिमी शक्तियों के बीच समस्या का मुख्य कारण परमाणु मुद्दा नहीं है, बल्कि ईरान की उस योजना का विरोध है जिसके तहत वह एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय इस्लामी व्यवस्था स्थापित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि मुख्य विवाद वैचारिक है। </p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता ने इस टकराव को अन्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के विरुद्ध एक प्रतिरोध बताया। उन्होंने हालिया क्षेत्रीय संघर्षों का संदर्भ देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना और क्षेत्र में उसके सहयोगियों के हमले को ईरान के युवाओं की पहल, साहस और बलिदान ने विफल कर दिया है।</p>
<p>गौरतलब है कि, कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि हाल के बारह दिवसीय युद्ध में ईरान को अपने वरिष्ठ सैन्य कमांडरों को खोना पड़ा और परमाणु तथा सुरक्षा बुनियादी ढांचे में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इन आलोचकों का कहना है कि खामेनेई की दशकों पुरानी नीतियों के कारण पश्चिमी देशों के साथ हुए इस टकराव ने ईरानी जनता पर भारी आर्थिक बोझ डाला है। यही नहीं कड़े प्रतिबंधों ने अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया है, मुद्रा को कमजोर किया है और जीवन यापन के लिए मुश्किलें पैदा की हैं। आलोचकों का कहना है कि इन चुनौतियों के बावजूद ईरान के वरिष्ठ अधिकारी इस रणनीति का बचाव कर रहे हैं।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि प्रतिबंधों ने आर्थिक अव्यवस्था को प्रभावित किया है, लेकिन उन्होंने इसे ईरान की औद्योगिक स्वतंत्रता और रक्षा क्षेत्र के विकास का एक कारक भी बताया। कुछ पर्यवेक्षकों के अनुसार, खामेनेई का यह कहना कि परमाणु मुद्दा गौण है, तेहरान के उन हालिया बयानों के विपरीत है जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईऐईऐ) की रिपोर्टों ने ईरान के परमाणु केंद्रों पर इसरायली और अमेरिकी हमलों का रास्ता साफ किया। </p>]]>
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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 18:32:21 +0530</pubDate>
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