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                <title>philanthropists - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शिक्षा विभाग : स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी फिर भी खिलाड़ियों के हाथ खाली</title>
                                    <description><![CDATA[दो साल से नहीं मिला खेल मद का बजट और सामग्री।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/education-department--sports-calendar-released--yet-players--hands-remain-empty/article-161095"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । राजस्थान माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से सत्र 2026-27 के राज्य स्तरीय विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिता का वार्षिक पंचांग जारी कर दिया है। लेकिन, स्कूलों को पिछले दो साल से स्पोर्ट्स एक्यूपमेंट खरीदने के लिए बजट तक नहीं मिला। बिना बजट व खेल सामग्री के प्रतिभाओं को राज्य स्तरीय टूर्नामेंट के लिए तैयार करना शारीरिक शिक्षकों के लिए मुश्किल हो रहा है। हालांकि, शिक्षकों को भामाशाहों के सहयोग से खेल सामग्री का जुगाड़ करना पड़ता है। इधर, शिक्षाविदें का कहना है, अभी तक स्कूलों को खेल मद की राशि और आवश्यक खेल सामग्री तक उपलब्ध नहीं हुई, जिसके अभाव में विद्यार्थियों को अभ्यास करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का शेड्यूल</strong><br />स्कूल स्तर के 17 व 19 वर्ष के छात्र-छात्रा वर्ग के 33 प्रकार के गेम्स निर्धारित किए गए हैं। जिन्हें आयोजित कराने के लिए चार समूहों में विभाजित किया गया है। इस बार स्कूल स्तर की खेल प्रतियोगिताएं 25 अगस्त से पहले सम्पन्न करवानी होंगी। इसके बाद जिला स्तर की सभी प्रतियोगिताएं 29 अगस्त से 17 अक्टूबर तक होंगी। राज्य स्तर की प्रतियोगिताएं 9 सितंबर से 29 अक्टूबर तक करवाई जाएंगी।</p>
<p><strong>भामाशाहों के भरोसे स्कूलों में अभ्यास</strong><br />सरकारी विद्यालयों में फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स सहित विभिन्न खेलों की आवश्यक सामग्री का अभाव बना है। कई जगह खिलाड़ी सीमित संसाधनों के साथ अभ्यास कर रहे हैं, जबकि कई विद्यालयों में शारीरिक शिक्षकों को ग्रामीणों, भामाशाहों और स्थानीय सहयोग से खेल सामग्री जुटाकर खिलाड़ियों तैयार करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>गत वर्ष प्रतियोगिताएं खत्म होने के बाद मिला था किट</strong><br />शिक्षाविद् मोहर सिंह का कहना है कि वर्ष 2025 में विद्यालयों को खेल सामग्री की किट मार्च माह के आसपास उपलब्ध कराई गई थी, जबकि तब तक राष्ट्रीय स्तर तक की अधिकांश प्रतियोगिताएं समाप्त हो चुकी थीं। सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके बाद विभाग ने विद्यालयों से सामग्री को संतोषजनक बताते हुए रिपोर्ट तो मंगवा ली, लेकिन उसके बाद से न तो नई खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई और न ही खेल मद की राशि जारी हुई।</p>
<p><strong>दो वर्षों से नहीं मिला रहा नियमित बजट</strong><br />शरीरिक शिक्षकों के अनुसार, पिछले दो वर्षों से सरकारी विद्यालयों को न तो नियमित खेल मद की राशि मिल रही है और न ही आवश्यकता के अनुरूप खेल सामग्री उपलब्ध हो रही है। इससे पहले उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25 हजार रुपए, उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10 हजार रुपए तथा प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार रुपए खेल गतिविधियों के लिए दिए जाते थे। वर्तमान में विद्यालयों के पास अन्य मद से भी खेल सामग्री खरीदने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है।</p>
<p><strong>इस बार भामाशाहों से भी सहयोग मांगना मुश्किल</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर कुछ स्कूलों के पीटीआई ने बताया कि हॉकी जैसे खेलों की सामग्री काफी महंगी होती है। बजट नहीं मिलने से टीम तैयार करना कठिन हो रहा है। गत वर्ष भी बजट नहीं मिला। अब तक भामाशाहों और व्यक्तिगत परिचितों के सहयोग से काम चलाया जाता था, लेकिन इस बार कमजोर मानसून के कारण उनसे भी सहयोग की उम्मीद कम है। ऐसे में सरकार को जल्द खेल मद का बजट जारी करना चाहिए।</p>
<p><strong>समय पर बजट उपलब्ध कराना शिक्षा परिषद की जिम्मेदारी फोटो है दोनों में</strong><br />राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को शारीरिक शिक्षक उनकी रुचि के खेलो में तैयार करते है लेकिन दूसरी और इन खिलाड़ियों के खेलों की सामग्री के लिए राज्य स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से पिछले दो सत्रों से बजट ही नहीं मिल रहा। ऐसे में खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे। शिक्षा मंत्री मामले को संज्ञान में लेते हुए दो सत्रों की बजट राशि इस माह जारी करवाई जाएं ताकि, खेल सामग्री समय पर खरीदी जा सके, जिसका आगामी विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगताओं में उपयोग हो सकें।<br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसट</strong></p>
<p>राजकीय विद्यालयों को पिछले दो साल से स्पोट्स मद में बजट नहीं दिया जा रहा। जबकि, खेल बजट की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक है। क्योंकि, नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर देती है, लेकिन कई स्कूलों में खेल सामग्री, मैदान और आवश्यक संसाधनों का अभाव है। प्रत्येक विद्यालय को पर्याप्त और नियमित स्पोर्ट्स बजट उपलब्ध कराया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों की छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। सरकार को पिछले व वर्तमान सत्र का बजट जल्द जारी करना चाहिए।<br /><strong>-राजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष शिक्षक संघ रेसटा</strong></p>
<p>पिछले सत्र में बजट दिया है, जिससे खेलकूद उपलब्ध कराई गई है। स्पोर्ट्स एक्यूपमेंट यानी खेल सामग्री की कमी नहीं है। रही बात नए सत्र के बजट की तो वह जल्द ही स्कूलों को मिलेगा।<br /><strong>-सतीश कुमार गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 14:26:14 +0530</pubDate>
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                <title>बर्फीली ढलानों से ओलंपिक तक का सफर, पैसों की कमी में अटका भारत का सपना</title>
                                    <description><![CDATA[जनप्रतिनिधियों व भामाशाहओं से दिन-रात संपर्क साध रहे  पर अभी तक निराशा ही हाथ लग रही ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/from-icy-slopes-to-the-olympics--india-s-dream-is-stalled-due-to-lack-of-funds/article-137619"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा निवासी अल्पाइन स्की खिलाड़ी विकास अंबवानी आज आर्थिक तंगी के कारण अपने लक्ष्य से कुछ कदम दूर खड़े हैं। आठ वर्षों की कड़ी मेहनत, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व और ओलंपिक क्वालिफिकेशन अंक अर्जित करने के बावजूद संसाधनों का अभाव उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। विकास अंबवानी ने दैनिक नवज्योति कार्यालय पहुंचकर बताया कि वे संभवत: राजस्थान के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जो शीतकालीन खेल अल्पाइन स्की में लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक भामाशाहों के सहयोग से वे मनाली, गुलमर्ग सहित देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे हैं।</p>
<p><strong>भारत के लिए खेले, ओलंपिक के अंक भी कमाए </strong><br />विकास ने बताया कि दिसंबर माह में उन्होंने अल्पाइन स्की जाइंट स्लालम श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए महत्वपूर्ण अंक अर्जित किए। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि राजस्थान और देश के लिए भी गर्व का विषय है।</p>
<p><strong>जनवरी 2026 में स्वीडन जाना जरूरी, 4 लाख रुपये की जरूरत </strong><br />विकास ने बताया कि जनवरी 2026 में स्वीडन के डूवेट स्की रिजॉर्ट में एक माह का विशेष प्रशिक्षण प्रस्तावित है। इस प्रशिक्षण में भाग लेकर वे आगामी ओलंपिक क्वालिफिकेशन पॉइंट्स हासिल करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें लगभग 4 लाख रुपये की आवश्यकता है, जो फिलहाल उनके लिए जुटा पाना संभव नहीं हो पा रहा है।</p>
<p><strong>भामाशाहों का सहयोग बना सहारा </strong><br />विकास ने बताया कि समय-समय पर भामाशाहों के सहयोग से उन्हें हेलमेट, कपड़े,<br />एंटी-कट क्लॉथ, चश्मे, हीटिंग ग्लव्स, शॉक्स सहित अन्य आवश्यक खेल सामग्री प्राप्त हुई है, जिसके दम पर वे अब तक प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सके हैं।</p>
<p><strong>सहयोग के लिए हर जगह लगाई गुहार </strong><br />विकास अंबवानी ने बताया कि ओलंपिक 2026 में भाग लेने के लिए उन्होने शहर के विभिन्न जनप्रतिनिधियों व भामाशाहओं से दिन-रात संपर्क साध रहे है। पर अभी तक उनको हर जगह से निराशा ही हाथ लगी है। उनका कहना है कि मैं प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 15:04:23 +0530</pubDate>
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