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                <title>मेडिकल कॉलेज अस्पताल का मामला : ऑपरेशन के बाद बिगड़ी प्रसूताओं की तबीयत, एक की मौत, 4 की हालत गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[सिजेरियन के बाद बिगड़े हालत, बीपी अचानक हुआ लो, किडनी फेल और प्लेटलेट्स गिरने से तड़के टूटा दम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-from-medical-college-hospital--health-of-post-op-patients-worsens--one-dead--4-in-critical-condition/article-152866"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 5 प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। जिनमें से एक की मंगलवार तड़के मौत हो गई। वहीं, 4 प्रसूताओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें सुपर स्पेशलिटी में रैफर किया गया। जहां उनका उपचार चल रहा है। घटना के बाद से अस्पताल में हड़कम्प मचा हुआ है। वहीं, इलाज के दौरान हुई इस अप्रत्याशित मृत्यु ने अस्पताल प्रशासन को भी चौंका दिया। मृतका पायल की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच शुरू कर दी है। जिसकी रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि ऑपरेशन के बाद अचानक यह जटिल स्थिति क्यों बनी।</p>
<p><strong>पोस्ट गायनी वार्ड-1 में भर्ती थीं सभी प्रसूताएं</strong><br />जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को पांच प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। जिनमें पायल, ज्योति, चंद्रकला, धन्नी और रागिनी शामिल हैं। ऑपरेशन के बाद सभी प्रसूताओं को पोस्ट गायनी वार्ड-1 में भर्ती किया गया। जहां रात को पायल की अचानक तबीयत खराब हो गई। इस पर उसे सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया जहां मंगलवार सुबह 6 बजे उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>तेजी से गिरा बीपी, किडनी फेल होने से मौत</strong><br />चिकित्सा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मृतका पायल का ब्लड प्रेशर अचानक तेजी से नीचे गिरता चला गया। जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर विपरीत असर पड़ा और किडनी ने काम करना बंद कर दिया। साथ ही प्लेटलेट्स भी लगातार डाउन होती रही, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई और अनंत: महिला की मौत हो गई।इलाज के दौरान प्रसूता की अचानक मृत्यु होने से अस्पताल में भी हलचल तेज हो गई।</p>
<p><strong>4 प्रसूताओं की भी हालत खराब, एसएसबी में किया रैफर</strong><br />नए अस्पताल की सर्जिकल आईसीयू में तैनात कर्मचारी ने बताया कि पोस्ट गायनी वार्ड-1 में 4 सिजेरियन प्रसूताएं भर्ती थी। जिनकी तबीयत खराब होने पर सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। जहां पायल की मौत हो गई। इसके बाद तीन प्रसूताएं ज्योति, चंद्रकला, धन्नी व रागिनी की भी अचानक तबीयत खराब हो गई। हालात गंभीर होने पर सोमवार सुबह 10 बजे प्रसूता रागिनी व शाम 4 बजे ज्योति और चंद्रकला व धन्नी को रात 9 बजे करीब सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग में रैफर किया गया। वहीं, डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि कुछ महिलाओं की स्थिति गंभीर है, जिनका इलाज चल रहा है।</p>
<p><strong>मौत के कारणों पर उठे सवाल, मेडिकल बोर्ड करेगा जांच</strong><br />घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच डॉक्टरों की सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड पूरे उपचार क्रम, ऑपरेशन के बाद की स्थिति, दवाओं की प्रतिक्रिया, मेडिकल पैरामीटर और अचानक बिगड़ी शारीरिक स्थिति की विस्तृत जांच करेगा। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि आखिर किस वजह से महिला का ब्लड प्रेशर अचानक गिरा, किडनी फेल हुई और प्लेटलेट्स में तेजी से कमी आई।</p>
<p><strong>प्राचार्य बोले- रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी तस्वीर</strong><br />मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद महिला का बीपी लो हो गया था। इसके चलते किडनी फेल हुई और प्लेटलेट्स भी कम हो गए, जो उसकी मौत का कारण बने। यह स्थिति किन कारणों से उत्पन्न हुई, इसका पता लगाने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया गया है। बोर्ड की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:21:53 +0530</pubDate>
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                <title>एक ऑपरेटर के भरोसे एमबीएस का आरजीएचएस पर्ची काउन्टर, मची अफरा तफरी</title>
                                    <description><![CDATA[काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-hospital-s-rghs-slip-counter-left-dependent-on-a-single-operator--chaos-ensues/article-151944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ek-operator-k-bharose-mbs-ka-rghs-parche-caunter-,-mache-aphara-taphare...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान भर में निजी अस्पतालों और दवा काउंटरों द्वारा आरजीएचएस  के बहिष्कार के चलते अब सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव असहनीय स्तर तक पहुँच गया है। सोमवार सुबह कोटा के एमबीएस अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आरजीएचएस पर्ची काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी। इसके अव्यवस्था इतनी बढ़ गई कि काउंटर पर मौजूद एकमात्र कर्मचारी को देख लोगों के सब्र का बांध टूट गया। वह आपस में ही उलझते नजर आये।संविदा कर्मियों के काम छोड़ने और एक साथ छुट्टी पर जाने से व्यवस्था चरमरा गई।</p>
<p><strong>लाभार्थियों के लिये सरकारी इलाज से दवा में परेशानी</strong><br />एमबीएस अस्पताल से सामने आयी तस्वीरे बताती है कि आरजीएचएस को लेकर निजी अस्पतालों के विरोध के चलते सरकारी तंत्र पूरी तरह से बैकअप प्लान के बिना चल रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता और बुजुर्ग पेंशनर्स को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों की परेशानी है कि वह निजी अस्पताल में इलाज ले नहीं पा रहे यदि सरकारी मे सामान्य पर्ची से इलाज लेते है तो उन्हे पहले से चल रही ब्राण्ड़ेड दवाओं को सरकारी डॉक्टर सरकारी पर्चे पर नहीं लिख सकता।</p>
<p><strong>5 में से 4 ऑपरेटर नदारद: सिस्टम हुआ फेल</strong><br />जानकारी के अनुसार, आरजीएचएस काउंटर के सुचारू संचालन के लिए कुल 5 कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त हैं, जिनमें से 3 सुबह और 2 शाम की शिफ्ट में रहते हैं। लेकिन सोमवार को बदहाली का आलम यह था कि ऑपरेटर चेतन शर्मा ने काम छोड़ दिया। ऑपरेटर जीतू सहित अन्य कार्मिक छुट्टी पर चले गए। काउंटर पर केवल एक मात्र कर्मचारी योगेंद्र मौजूद था। जिससे लोगों के ओपीड़ी,भर्ती तथा डिस्चार्ज के लिये घंटों लगने लगे।</p>
<p><strong>भर्ती व डस्चार्ज की प्रक्रिया में लगता है समय</strong><br />बाहर खडे मरीजों में भर्ती-डिस्चार्ज की जटिल प्रक्रिया के बीच अकेला कर्मचारी पर्ची नहीं काट पा रहा था। जिससे कतार में खड़े बुजुर्गों और तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा और पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। ऐसे में सामान्य ओपीड़ी के लिये आये मरीजों को आरजीएचएस की पर्ची न बनने के कारण बिना इलाज के लौटना पड़ा।</p>
<p><strong>बुआ को लेने जाने की जिद पर अड़ा</strong><br />हैरानी की बात यह रही कि मुख्य नर्सिंग इंचार्ज खुद ड्यूटी से नदारद थे। इंचार्ज का जिम्मा संभाल रहीं वर्षा राठौर ने आनन-फानन में व्यवस्था संभालने के लिए एक लिफ्ट ऑपरेटर को पर्ची काउंटर पर बैठाया। लेकिन तमाशा तब खड़ा हुआ जब वह लिफ्ट ऑपरेटर भी थोड़ी देर बाद अपनी 'बुआ' को लेने जाने की जिद पर अड़ गया। लगभग 40 मिनट तक प्रभारी वर्षा उस ऑपरेटर की मान-मनुहार करती नजर आईं ताकि काउंटर चालू रह सके।</p>
<p><strong>मरीजों का फूटा गुस्सा, इंचार्ज को सुनाई खरी-खोटी</strong><br />निजी अस्पतालों में इलाज बंद होने के कारण मजबूरी में सरकारी अस्पताल पहुंचे मरीजों को यहाँ भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। घंटों इंतजार से झल्लाए लोगों ने अस्पताल प्रशासन की कुप्रबंधन पर नाराजगी जताई और मौके पर मौजूद प्रभारी को भी खरी-खोटी सुनाई। मरीजों का आरोप है कि जब निजी क्षेत्र में विरोध के चलते सरकारी अस्पतालों में भीड़ बढ़ना तय था, तो प्रशासन ने अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था क्यों नहीं की?</p>
<p>संविदा पर लगे कार्मिकों के काम छोडने और छुट्टी के समय लिफ्ट पर लगाये गये व्यक्ति को इमरजेन्सी में ऑपरेटर पर लगाया गया था। सभी को मौके पर मौजुद इंचार्ज के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिये।<br /><strong>- नरेन्द्र खींची, नर्सिंग इन्चार्ज</strong></p>
<p>मै सुबह ओपीड़ी की तरफ गया था मुझे किसी ने इस बारें में सूचना नहीं दी। नर्सिंग इंचार्ज से जानकारी जुटाई जा रही है।<br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:34:35 +0530</pubDate>
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                <title>बदहाली की मार, बिना भवन-संसाधन एक (कंपाउंडर) के भरोसे पशु चिकित्सालय </title>
                                    <description><![CDATA[जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा चिकित्स्थासालय,मवेशियों के उपचार हेतु पशुपालक परेशान ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-scourge-of-disrepair--without-a-building-or-resources--the-veterinary-hospital-is-dependent-on-a-single-compounder/article-143155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/kkkkkkota.jpg" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के देईखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय बदहाली का दंश झेल रहा है। स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी अस्पताल को न स्थायी भवन मिल पाया है और न ही पर्याप्त स्टाफ व संसाधन उपलब्ध हो सके हैं। वर्तमान में पूरा चिकित्सालय केवल एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) के भरोसे संचालित हो रहा है। अस्पताल अस्थायी रूप से जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा है, जबकि इससे क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार नए भवन निर्माण के लिए कम से कम 100़100 फीट भूमि का पट्टा जारी होना आवश्यक है, लेकिन स्थानीय पंचायत प्रशासन द्वारा पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है। इसके चलते अस्पताल पूर्व में मर्ज किए जा चुके राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में संचालित करना पड़ रहा है।</p>
<p>देईखेड़ा पशु चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक, एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) तथा एक पशु परिचर (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल एक पशुधन निरीक्षक के भरोसे व्यवस्थाएं चल रही हैं। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि स्थायी भवन, उपकरण और पशु चिकित्सक के अभाव में मवेशियों के उपचार में परेशानी आ रही है। गंभीर बीमार पशुओं को सर्जरी अथवा विशेष उपचार के लिए दूरस्थ केंद्रों तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन और पशुपालन विभाग से शीघ्र भूमि आवंटन व रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के साथ बीमार मवेशियों का हर सम्भव उपचार किया जा रहा है। भूमि आवंटन के लिये पंचायत को लिखा जा चुका है। पंचायत ने भवन के स्थानांतरित करने के लिये मौखिक बोला गया है। समस्त स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। <br /><strong>-ओमप्रकाश नागर,  पशुधन निरीक्षक, देईखेड़ा। </strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय के लिए भूमि आवंटन के लिए प्रस्ताव ले रखे है। जल्द ही भूमि चिहिन्त कर आवंटन किया जाएगा। <br /><strong>- राहुल पारीक, ग्राम विकास अधिकारी, देईखेड़ा। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 15:00:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमों की खुली अनदेखी, पेयजल व जनसुविधाओं की बदहाल स्थिति</title>
                                    <description><![CDATA[पांच माह पूर्व स्थानांतरित हो चुके चिकित्सक की नेमप्लेट व मोबाइल नंबर अब भी प्रदर्शित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/blatant-disregard-for-rules-at-the-adarsh-primary-health-center/article-143053"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(6)10.png" alt=""></a><br /><p>दबलाना। आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दबलाना में विभागीय निदेर्शों और स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के नियमों की खुलेआम अनदेखी सामने आ रही है। चिकित्सक कक्ष पर वर्तमान स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी व चिकित्सक की नेमप्लेट तक नहीं लगी है और न ही मोबाइल नंबर अंकित हैं। पांच माह पूर्व स्थानांतरित हो चुके चिकित्सक की नेमप्लेट व मोबाइल नंबर अब भी प्रदर्शित हैं। रोगी अथवा उनके तीमारदार जब नेमप्लेट पर अंकित नंबरों पर संपर्क करते हैं तो स्थानांतरण हो चुके चिकित्सक से बातचीत होती है और तब ट्रांसफर की जानकारी मिलती है। रेजिडेंस की नेमप्लेट पर भी पुराने चिकित्सक का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होने से लोगों को उपचार की बजाय असुविधा झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>कस्बे के मुकुट नागर ने बताया कि कई बार चिकित्सक के अनुपस्थित रहने पर नाम और नंबर उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को अलोद या बूंदी जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की हानि हो रही है। स्वास्थ्य केंद्र के जनसुविधा घरों के ऊपर पाइप कनेक्शन सहित पानी की टंकियां रखी हैं, लेकिन जल संग्रहण नहीं होने से नलों में पानी नहीं आता और वे शोपीस बने हैं। सीएचसी परिसर में ट्यूबवेल का पानी फ्लोराइड युक्त है। पेयजल के लिए लगाया गया आरओ ऐसे स्थान पर है जहां आमजन की नजर नहीं पड़ती। शुद्ध जल के लिए भटकना पड़ रहा है। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पर्यावरण को बढ़ावा देने , हरियाली, स्वच्छता का सदेश देने के लिए गार्डन एवं क्यारियां बनी हुई है। सुरक्षा कीदष्टि से तार बाड़ भी 5 माह पहले से ही मौजूद है । जिनमें हरियाली गायब होकर के सूखी जहरीली घास अपनी मौजूदगी बताने के साथ ही मौजूद पेड पौधे अपनी सार संभाल , सिंचाई की कमी वअनदेखी को बता रहे हैं । घास पूस ,बेकार के पौधे, झाड़ झझाड़ डॉक्टर रेजिडेंस के आसपास तथा सीएचसी परिसर में मौजूद होसे से पर्यावरण के नियमों की अनदेखी है ।<br /><strong>-सुरेन्द्र गौतम, उपसरपंच, दबलाना </strong><br /> <br />दबलाना भाजपा मंडल अध्यक्ष हेमराज राठौर ने कहा कि आदर्श पीएचसी में नियमों की अनदेखी, स्टाफ की कमी, डॉक्टर के नदारद रहने के मामले में बीसीएमएचओ हिंडोली को अवगत करायाहआ है ।<br /><strong>-हेमराज राठौर, भाजपा मंडल अध्यक्ष, दबलाना</strong></p>
<p>पीएचसी इंचार्ज एवं नर्सिंग आॅफिसर जयकुमार सोनी ने कहा कि नए- नाम और नंबर लिखवा जाएंगे। टंकी में जल संग्रहण व्यवस्था करवाने के साथ-साथ झाड़  झंझाड़ो की सांफ सफाई कराई जएगी।<br /><strong>-जयकुमार सोनी, इंचार्ज एवं नर्सिंग आॅफिसर, पीएचसी,दबलाना। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 16:28:47 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही : मौसमी बीमारियों का प्रकोप मरीजों पर पड़ रहा भारी,भटक रहे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[कई बार  चिकित्सक समय पर नहीं आते और आते है तो चले जाते है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--seasonal-illnesses-are-taking-a-toll-on-patients--leaving-patients-stranded/article-142590"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि मरीजों को इलाज के लिए दर ब दर भटकना पड़ रहा है। यहां डॉक्टरों की भारी कमी के चलते मरीजों को सही समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है । नियमानुसार एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर फिजिशियन, महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग, सर्जन आदि चिकित्सकों को लगाया जाता है ताकि मरीजों को सही समय पर सही इलाज मिल सके लेकिन यहां पर चिकित्सकों के अभाव के कारण मरीजों को कई घंटों लाइन में लगना पड़ता है वहीं कई बार तो चिकित्सक समय पर नहीं आते और आते है तो चले जाते है। अभी सर्दी का असर धीरे धीरे जाने लगा है तो मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है , जिस कारण सर्दी जुखाम, खांसी बुखार, वायरल के मरीजों की संख्या ज्यादा है लेकिन मरीजों को इलाज चिकित्सक के अभाव में उपचार नहीं मिल पा रहा है जिस कारण मरीज उपचार के लिए भटक रहे है। वहीं अस्पताल में एक्स रे, दवाईयां काउंटर, बीमारियों की जांचों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में सफाई व्यवस्था भी चरमराई हुई है , संक्रमित कचरा ज्यादा खतरनाक होता है जिसे सही समय पर उचित स्थान पर डालना चाहिए लेकिन सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं हो रही है, डस्टबिन में कचरा बाहर आ रहा है वहीं दीवारों पर गुटखें के निशान आदि से गंदगी के आसार बने हुए है । ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल में अव्यवस्थाओं को सुधारा जाए।</p>
<p>खानपुर अब नगर पालिका बन चुकी है और नगर पालिका बनने के बाद अब आसपास के गांव के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है इधर तो मरीजों की संख्या बढ़ रही है और उधर डॉक्टरों की संख्या कम हो रही है । मजबूरन मरीजों को प्राइवेट अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है ।<br /><strong>- अभिषेक वर्मा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>अस्पताल में कई बार लम्बी लाइनें लगाकर मरीज अपना इंतजार करता है लेकिन तब तक चिकित्सक से नहीं मिल पाता ।<br /><strong>- मुकेश मालव, कस्बेवासी</strong></p>
<p>चिकित्सकों की कमी की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।<br /><strong>- टोनी मीणा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>खानपुर सीएचसी पर आज तो केवल दो ही डॉक्टर थे और तादाद की संख्या में मरीजों की भीड़ लगी हुई थी ओपीडी में ज्यादा मरीज आते हैं, सही समय पर उपचार मिलना चाहिए।<br /><strong>- उग्रसेन नागर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>यहां खानपुर सीएचसी में चार डॉक्टरों में से भी एक डॉक्टर सिजेरियन व एक गाइनेकोलॉजिस्ट व एक सीएचसी प्रभारी है वह भी अपना कार्य करेंगे उन्हें भी अपने ड्यूटी टाइम से लेकर लगातार कार्य करना पड़ता है लगातार ड्यूटी पर बैठते हैं लेकिन क्या करें इतने मरीजों को कैसे संभाले यह भारी विडंबना है डॉक्टरों की कमी है।<br /><strong>- राजाराम गुर्जर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>अभी नई नियुक्तियां हुई है जयपुर निदेशालय द्वारा खानपुर में इसी सप्ताह में डॉक्टर लगा दिए जाएंगे ।<br /><strong>-डॉ. साजिद खान सीएमएचओ, झालावाड़</strong></p>
<p>यहां पहले ही चिकित्सकों की कमी चल रही है और जैसे गर्मी बढ़ती हुई जाएगी मरीजों की संख्या बढ़ेगी अब केवल मात्र चार डॉक्टर ही रह जाएंगे, जिसके ऊपर खानपुर सीएचसी निर्भर रहेगी ।<br /><strong>-डॉ. धीरेंद्र गोपाल मिश्रा सीएचसी इंचार्ज, खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 14:56:31 +0530</pubDate>
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                <title>ईसाटोरी गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित, इस रास्ते से जुड़े  हैं दर्जनों गांव </title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी, गांव में नहीं पहुंच रही एम्बुलेंस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/isatori-village-still-lacks-a-paved-road--dozens-of-villages-are-connected-by-this-route/article-141449"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/85641.png" alt=""></a><br /><p>समरानियां। ग्राम पंचायत हाटरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम ईसाटोरी सड़क बनी है और न ही ऐसा कोई वैकल्पिक मार्ग है, जिससे बरसात के समस्या से आक्रोशित मौसम में बीमार लोगों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके। इस ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी समाधान नहीं हुआ तो वे आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब वादे हवा हो जाते हैं और गांव की हालत जस की तस बनी रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि ईसाटोरी गांव से होकर दर्जनों  गांवों का आवागमन होता है। यह रास्ता रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सड़क खराब होने से लोगों का समय भी अधिक लगता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>बारिश में हालात बद से बदतर</strong><br />बरसात के मौसम में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाए तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में ग्रामीणों को मरीजों को मध्यप्रदेश के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। ग्राम पंचायत ने गांव के अंदर तक सीसी रोड नहीं बनवाई है। कच्चे रास्तों पर कीचड़ भर जाने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>हर चुनाव में वादे, लेकिन जमीन पर काम शून्य</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचते हैं और सड़क निर्माण के बड़े-बड़े वादे करते लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कोई सुध लेने नहीं आता। वर्षों से ग्रामीण कच्चे, कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं ।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की मांग: जल्द मिले स्थायी समाधान</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फॉरेस्ट विभाग से समन्वय कर जल्द एनओसी दिलवाई जाए और सड़क निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए। उनका कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु का सवाल बन चुकी है।</p>
<p>इस रास्ते से दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं और रोजाना लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क न होने के कारण समय भी ज्यादा लगता है और परेशानी भी होती है।<br /><strong>-सुनील शिवहरे, ग्रामीण</strong></p>
<p>बरसात के दिनों में यदि कोई बीमार हो जाए, तो गांव से अस्पताल ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में कई बार लोगों को इलाज के लिए मध्यप्रदेश की ओर जाना पड़ता है।<br /><strong>- करण सहरिया, ग्रामीण</strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा गांव के अंदर तक सीसी रोड तक नहीं बनवाई गई है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- मुरारी प्रजापति, ग्रामीण</strong></p>
<p>सहरिया बस्ती के रोड का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।<br /><strong>- सियाराम, वीडीओ</strong></p>
<p>सड़क निर्माण की स्वीकृति जारी हो चुकी है, लेकिन फॉरेस्ट विभाग की एनओसी अभी तक नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है।<br /><strong>-बसंत गुप्ता, एएक्सईएन, पीडब्ल्यूडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 17:02:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई करवाना जंग जीतने जैसा, मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस , जेके लोन और रामपुरा जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में भी एमआरआई सुविधा नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/getting-an-mri-at-kota-medical-college-hospital-is-like-winning-a-battle/article-140714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ेलल्े्.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को एमआरआई जांच के लिए एक से 2 महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति तब और बदतर हो जाती है, जब मरीजों को शहर के प्रमुख एमबीएस अस्पताल से करीब 10 किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कॉलेज पहुंचना पड़ता है, लेकिन वहां भी तारीख एक महीने बाद की मिल रही है। शहर के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में केवल एक एमआरआई मशीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही उपलब्ध है, जबकि एमबीएस अस्पताल में यह सुविधा ही नहीं है। नतीजतन, मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों पर 2000 से 4,000 रुपये खर्च कर एमआरआई करवानी पड़ रही है। ग्रामीण और गरीब तबके के मरीजों की इस पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है।</p>
<p><strong>हाड़ौतीभर से आते मरीज, हो रहे परेशान</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई मशीन की कमी और लंबी प्रतीक्षा सूची ने मरीजों को निजी केंद्रों की ओर धकेल दिया है। लंबी प्रतीक्षा और और अत्यधिक भीड़ के चलते मरीजो को मजबूरन निजी केंद्रो की ओर रुख करना पड़ रहा है, जहां 4 से 5 हजार की चपत लग रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन 90 से ज्यादा होती है एमआरआई</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल से बाली जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन 90 से ज्यादा मरी जांच की जाती है गत वर्ष 23 हजार 62 एमआरआई जांचे की गई है। हाडोतीभर से यहां बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। निजी केन्द्रों पर महंगे दमों पर यह जांच होने से मरीजों का अत्यधिक भार मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर पड़ता है। ऐसे में यहां एमआरआई करवाना चुनौती बना हुआ है।</p>
<p><strong>एक ही मशीन पर सारा भार</strong><br />सरकारी क्षेत्र में एमआरआई की नए अस्पताल में ही मशीन है। यहां कोटा संभागभर से मरीज इलाज के लिए पहुंचते है। सरकार की ओर से नि:शुल्क जांच की सुविधा देने की घोषणा के साथ ही मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। इससे एक ही मशीन पर सारा भार आ गया है।</p>
<p><strong>मरीज को झेलनी पड़ रही दोहरी मार</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में केवल एक एमआरआई मशीन होने के कारण मरीजों को समय पर जांच नहीं हो पा रही। इधर एमबीएस अस्पताल, जो कोटा का प्रमुख सरकारी अस्पताल होने के बावजूद एमआरआई मशीन की अनुपस्थिति मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को शहर में आने-जाने और निजी केंद्रों पर खर्च करने की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।<br /><strong>- एड. बीटा स्वामी</strong></p>
<p><strong>लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधाए बनी चुनौती</strong><br />ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल शहर में ही है, लेकिन लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधायें मरीजों के लिए चुनौती बन गई है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकतार्ओं ने सरकार से मांग की है कि एमबीएस अस्पताल में एमआरआई मशीन स्थापित की जाए ।<br /><strong>- कुशाल सेन, समाजसेवी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक ही एमआरआई मशीन है, जो काफी पुरानी है। ऐसे में उच्च गुणवत्तायुक्त मशीन स्थापित होनी चाहिए। हालांकि इसके लिए प्रपोजल दिया हुआ है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लगातार प्रयास किया जा रहे हैं।<br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 17:22:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय: सोनोग्राफी मशीन पर जमी धूल, काफी समय से खराब होने से नहीं हो रहा उपयोग </title>
                                    <description><![CDATA[पशु चिकित्सालय में रोज 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mokhapaada-veterinary-hospital--sonography-machine-covered-in-dust--unused-for-a-long-time-due-to-being-out-of-order/article-138233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन काफी समय से बंद पड़ी हुई है। आधुनिक जांच सुविधा के अभाव में चिकित्सकों को बीमार पशुओं का उपचार केवल लक्षणों और अनुभव के आधार पर करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि कई जटिल मामलों में पशुओं की जान पर भी जोखिम बढ़ गया है। पशु चिकित्सालय में रोजाना 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या दुधारू गाय-भैंसों, गर्भवती पशुओं और प्रजनन संबंधी समस्याओं वाले मामलों की होती है। सोनोग्राफी मशीन के जरिए गर्भ की स्थिति, भ्रूण का विकास, आंतरिक सूजन, ट्यूमर, चोट या संक्रमण की सटीक जानकारी मिलती है। सोनोग्राफी मशीन बंद होने से गर्भ जांच पूरी तरह प्रभावित हो गई है।</p>
<p><strong>निजी जांच केंद्रों का ही सहारा</strong><br />सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं मिलने से पशुपालकों को निजी क्लीनिकों और जांच केंद्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। निजी स्तर पर सोनोग्राफी कराने पर 800 से 1500 रुपऐ तक खर्च आ रहा है, जो छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए बड़ी रकम है। कई पशुपालक आर्थिक तंगी के कारण जांच नहीं करा पा रहे हैं, जिससे बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आ रही। चिकित्सकों के अनुसार सोनोग्राफी के बिना कई बार बीमारी की सही वजह स्पष्ट नहीं हो पाती। इससे इलाज ट्रायल-बेस पर करना पड़ता है, दवाइयों की अवधि बढ़ जाती है और पशु के स्वस्थ होने में अधिक समय लगता है। दुधारू पशुओं के मामलों में दूध उत्पादन घटने से पशुपालकों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>नई मशीन की मांग, लेकिन अब तक इंतजार</strong><br />पशु चिकित्सालय प्रशासन की ओर से कई माह पहले ही नई सोनोग्राफी मशीन की मांग उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। बजट और प्रक्रिया का हवाला देते हुए मामला लंबित बताया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक मशीन मिलने से न सिर्फ जांच सटीक होगी, बल्कि रेफर के मामलों में भी कमी आएगी। स्थानीय पशुपालकों ने विभाग से मांग की है कि मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय में जल्द से जल्द नई सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध कराई जाए। ताकि क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं का समय पर, सटीक और प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं होने से हमें निजी जगह जांच करानी पड़ती है। खर्च ज्यादा आता है, ऊपर से समय भी बर्बाद होता है। गरीब पशुपालकों के लिए यह बड़ी समस्या है।<br /><strong>-रामलाल, पशुपालक</strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन खराब पड़ी हुई है। नई मशीन के लिए डिमांड भेज रखी है। नई मशीन मिलने के बाद उपचार की गुणवत्ता काफी बेहतर हो सकेगी।<br /><strong>-डॉ. भंवर सिंह, उपनिदेशक, राजकीय पशु चिकित्सालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mokhapaada-veterinary-hospital--sonography-machine-covered-in-dust--unused-for-a-long-time-due-to-being-out-of-order/article-138233</link>
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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 15:21:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दुर्गंध के बीच कैसे करें उपचार, डॉक्टर खुद होने लगे बीमार, बदबू के कारण सांस लेना  हो रहा  मुश्किल </title>
                                    <description><![CDATA[राजकीय पशु चिकित्सालय से नहीं उठ रहे मृत मवेशी  चिकित्सालय सटाफ व पशुपालक हो रहे परेशान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-to-provide-treatment-amidst-the-stench--doctors-themselves-are-falling-ill--breathing-is-becoming-difficult-due-to-the-foul-smell/article-137177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में बीते कई दिनों से मृत मवेशियों को नहीं उठाए जाने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अस्पताल परिसर में पड़े मृत पशुओं से उठ रही दुर्गंध के कारण न सिर्फ उपचार कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि चिकित्सक, स्टाफ और पशुपालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं, लेकिन परिसर में फैली बदबू के चलते वहां रुकना तक मुश्किल हो गया है। दुर्गंध के कारण कई पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। इसके बावजूद मृत मवेशियों के निस्तारण को लेकर जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।</p>
<p><strong>कई चिकित्सकों की बिगड़ी तबीयत</strong><br />अस्पताल में कार्यरत पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बताया कि लगातार दुर्गंध के संपर्क में रहने से उन्हें सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। कुछ चिकित्सकों को तो इलाज के बाद खुद चिकित्सकीय परामर्श लेना पड़ा है। एक चिकित्सक ने बताया कि मृत मवेशियों से निकलने वाली दुर्गंध में अमोनिया और सड़ांध की गैसें होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। लगातार ऐसे माहौल में काम करने से हमारी तबीयत बिगड़ रही है, फिर भी मजबूरी में हमें पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है। एक अन्य चिकित्सक ने कहा कि यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>पशु उपचार कार्य भी प्रभावित</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण में पशुओं का इलाज करना बेहद कठिन हो गया है। संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अन्य बीमार पशुओं की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। दुर्गंध और असहज वातावरण के चलते कई बार पशुओं का उपचार जल्दी-जल्दी निपटाना पड़ रहा है या फिर पशुपालकों को इंतजार करने को कहा जा रहा है। इससे गंभीर रूप से बीमार पशुओं के इलाज में देरी हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की स्थिति में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उपचार संभव नहीं हो पा रहा है। बदबू के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>अब संक्रमण का खतरा बढ़ा</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि मृत पशुओं के लंबे समय तक पड़े रहने से बैक्टीरिया और कीटाणुओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ अस्पताल परिसर अस्वच्छ हो रहा है, बल्कि अन्य बीमार पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है। दुर्गंध के कारण मक्खियों और अन्य कीटों की संख्या भी बढ़ गई है, जो बीमारियों को और फैलाने का कारण बन सकती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध इतनी तीव्र है कि उपचार कक्षों में लंबे समय तक रुकना मुश्किल हो गया है, जिससे नियमित जांच, इंजेक्शन, ड्रेसिंग और आॅपरेशन जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p>-हमारे पशु बीमार हैं, उन्हें आराम और साफ माहौल चाहिए, लेकिन यहां बदबू के कारण पशु भी बेचैन हो जाते हैं। प्रशासन को यहां की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए।<br /><strong>- रमेश गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>-राजकीय पशु चिकित्सालय में मृत मवेशियों को कई दिनों से नहीं उठाए जाने के कारण फैली दुर्गंध अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुकी है। बदबू के चलते पशुओं की उपचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई पशु चिकित्सकर्मियों की तबीयत तक बिगड़ चुकी है।<br /><strong>- डॉ. भंवर सिंह, वरिष्ठ पशु चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:30:54 +0530</pubDate>
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                <title>इलाज से पहले मरीजों को दर्द दे रहा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, प्रवेश द्वार से इमरजेंसी-गेट नंबर 4 तक हो रहे गहरे गड्ढे</title>
                                    <description><![CDATA[यहां हाड़ौती से ही नहीं मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज को आते हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-medical-college-hospital-is-causing-patients-pain-even-before-treatment--with-deep-potholes-from-the-entrance-gate-to-the-emergency-gate-number-4/article-131482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज अस्पताल इलाज से पहले ही मरीजों का दर्द बढ़ा रहा है। राहत की उम्मीद लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का यहां कदम रखते ही दर्दभरा सफर शुरू हो जाता है। हालात यह हैं, अस्पताल के प्रवेश द्वार से लेकर ओपीडी गेट नंबर 1 और इमरजेंसी गेट नंबर-4 तक की प्रमुख सड़कें उधड़ी पड़ी। जगह-जगह गहरे गड्ढ़े हो रहे हैं। डॉक्टर्स के पास पहुंचने से पहले जख्मी सड़कें मरीजों के साथ तीमारदारों की जान भी खतरे में डाल रही है। जबकि, चिकित्सक भी इन्हीं गड्ढ़ोंभरी राह से गुजरते हैं।  इसके बावजूद अस्पताल  प्रशाासन द्वारा सड़कों की मरम्मत नहीं करवाई जा रही।  </p>
<p><strong>7 माह से उधड़ी सड़कें, दर्द से कहरा रहे मरीज</strong><br />मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, कोटा संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां हाड़ौती से ही नहीं मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज को आते हैं। लेकिन, अस्पताल परिसर की सड़कें पिछले 7 महीने से उधड़ी पड़ी हैं। जगह-जगह गहरे गड्ढ़े हो रहे हैं। जहां से गुजरने के दौरान वाहनों में सवार घायल व प्रसूताएं दर्द से कराह उठते हैं। शिकायतों  के बावजूद अस्पताल प्रशासन क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत नहीं करवा रहा। जिसका खामियाजा मरीजों व तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>आॅथोपेडिक व प्रसूताओं को सबसे ज्यादा खतरा</strong><br />अस्पताल की ओपीडी प्रतिदिन 3 हजार से ज्यादा रहती है। इसका मतलब, हर दिन तीन हजार से अधिक लोग इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचते हैं। ऐसे में क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण सबसे ज्यादा खतरा  प्रसूताओं और आॅथोर्पेडिक मरीजों को रहता है। एंबुलेंस जैसे ही परिसर में घुसती है, गड्ढ़ों से वाहन उछल पड़ते हंै। प्रसूताएं तेज झटकों से कराह उठती हैं। जिससे जच्चा-बच्चा को नुकसान पहुंचने का डर बना रहता है। वहीं, हड्डी रोगियों का हाल बेहाल हो जाता है। गड्ढ़ों के कारण रीढ़, गर्दन, कमर की चोट वाले मरीजों के लिए यह इमरजेंसी तक पहुंचना मुसीबत को मोल लेना जैसा बन जाता है। </p>
<p><strong>तिमारदार बोले-मेन गेट पर ही खतरा, गिरने से बाल-बाल बचे</strong><br />तिमारदार प्रदीप मरोठा, अक्षय और रोहित बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुख्य गेट पर ही गहरे गड्ढ़े हो रहे हैं। वहीं, नालियों के ढकान के लिए लगा रही लोहे की जालियां धंस चुकी है। जिससे वाहनों के गुजरने के दौरान हादसे का डर बना रहता है। कुछ दिनों पहले अस्पताल से बाहर निकलते वक्त गड्ढ़ों के कारण बाइक अनियंत्रित हो गई। जिससे बाइक सवार दम्पती गिरने से बाल बाल बचे। </p>
<p><strong>गिट्टियों से फिसल रहे वाहन, चोटिल हो रहे लोग</strong><br />श्रीनाथपुरम निवासी रामजानकी नंदन, आयुष कुमार कहते हैं, ब्लड बैंक से इमरजेंसी गेट तक सीसी सड़क हो रही है, जो उधड़ा पड़ा है। वहीं, गेट नंबर एक की ओपीडी की तरफ डामर सड़क है, जो बरसात में पूरी तरह से छलनी हो गई। सड़क पर गिट्टियां फैली पड़ी रहती है। यहां से गुजरने के दौरान वाहन सवार फिसलकर चोटिल हो जाते हैं।  जब प्रतिदिन हजारों मरीज अस्पताल आते हैं, इसके बावजूद सड़कों की स्थिति सुधरवाने में अस्पताल प्रशासन द्वारा लापरवाही क्यों बरती जा रही है। यह समझ से परे है। </p>
<p><strong>पहली बारिश में ही बहा पेचवर्क</strong><br />अस्पताल प्रशासन ने बारिश से पहले जून माह में गड्ढ़ों पर पेचवर्क करवाया था, जो 15 जून की पहली बारिश में ही बह गया। इसके बाद तीन महीने बारिश का दौर रहा। जिसमें ओपीड़ी गेट नंबर 1 से इमरजेंसी गेट नंबर 4 तक की सभी सड़कें छलनी हो गई। ब्लडबैंक के सामने वाली सड़क पर तो सीवरेज के चैम्बर ही बाहर निकल गए। ऐसे में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का दर्द गड्ढ़ों  के कारण और बढ़ जाता है। </p>
<p><strong>यातना से कम नहीं अस्पताल की सड़कें</strong><br />बारां से आए कमलेश मीणा, अखिलेश मीणा और प्रियंक सलावद ने बताया कि कुछ दिन पहले रिश्तेदार की तबीयत खराब हो गई थी, जिन्हें गत शनिवार रात अस्पताल लेकर पहुंचे थे। प्रवेश द्वारा से लेकर इमरजेंसी  गेट तक पहुंचने तक अनगिनत गड्ढ़ों के कारण कार सवार तीमारदार और मरीज तेज झटकों से हालत खराब हो गई। अस्पताल प्रशासन को क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करवानी चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सड़कों की मरम्मत का कार्य शुरू हो गया है। मेडिकल कॉलेज  की तरफ नई सड़क बन चुकी है। लगातार बारिश के कारण काम रुक गया था, अब मौसम साफ होने पर काम फिर से शुरू हो गया है। जल्द ही अस्पताल के गेट-नंबर 1 से इमरजेंसी गेट नंबर 4 तक की सड़कों की मरम्मत हो जाएगी। मरीजों को किसी भी तरह की असुविधा न हो इसके लिए पूरी शिद्दत से प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 15:45:37 +0530</pubDate>
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                <title>कायनात की बेबस छलकती आंखें ढूंढ रहीं पति शाहिद व बेटी आलिया-तस्नीम की मुस्कान : कैंसर से गई आवाज, ऑपरेशन में कटेगी जीभ व जबड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[छिन गई परिवार की खुशियां, पत्नी कायनात की उम्मीदें अब होने लगी धूमिल।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kainat-s-helpless--tearful-eyes-search-for-the-smiles-of-her-husband-shahid-and-daughters-alia-and-tasneem--cancer-has-taken-away-his-voice--and-his-tongue-and-jaw-will-be-amputated-in-an-operation/article-129532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के छावनी रोड के मोती महाराज मौहल्ला में एक छोटे से मकान में दर्द की ऐसी दास्तान छिपी है, जिसे सुनकर हर किसी का दिल भर आए। कभी पेंटिंग और पीओपी का हुनर दिखाकर दूसरों के घरों की दीवारें चमकाने वाले 44 वर्षीय शाहिद खान आज खुद अंधेरे में घिर गया हैं। जो हाथ कभी रंगों से जिंदगी को सजाया करते थे, उनके घर में जहां कभी हंसी-खुशी की आवाजें गूंजती थीं। दीपावली के त्योहार पर अपने हुनर से दूसरों के घर सजाया करते थे। लेकिन आज अपने ही घर में सन्नाटा छाया हुआ है। सात दिन बाद दिवाली आने वाली है लेकिन अब उनके घर में हमेशा के लिए अंधेरा हो गया है।  कैंसर ने शाहिद की आवाज छीन ली, बीमारियों ने उनके परिवार को भी तोड़ दिया है। परिवार अब बेबस होकर समाज और सरकार से दवा और मदद के गुहार लगा रहा हैं।  जब दैनिक नवज्योति का रिपोर्टर जब छावनी रोड पर स्थित मोती महाराज मौहल्ला में पहुंचा तो परिवार के आंसू छलक गए। परिवार में पत्नी कायनात, बेटा रहमत, बेटियां आलिया व तस्नीम और खुद शाहिद फफक कर रो पड़े। उनके परिवार का कहना है कि प्रशासन की छोटी-सी मदद भी मिल जाए तो हमारे परिवार के लिए किसी खजाने से कम नहीं होगा।</p>
<p><strong>परिवार पर टूट पड़ा एक साथ कई बीमारियों का पहाड़</strong><br />बीमारी की मार सिर्फ शाहिद तक सीमित नहीं रही। अब पूरा परिवार किसी न किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। 15 वर्षीय बेटी आलिया, जो कभी 9वीं में पढ़ती थी, दो साल से ब्रैन स्ट्रॉक्स की समस्या से जूझ रही है। अचानक बेहोश हो जाती है, गिर पड़ती है। जेके लोन अस्पताल में इलाज चल रहा है। जांचे करवाने के बाद उसकी भी दवाइयां लागू हो गई हैं। ब्रैन स्ट्रॉक्स  की वजह से आलिया का स्कूल भी छूट गया। वहीं 13 वर्षीय छोटी बेटी तस्नीम पिछले छह महीने से थायराइड की बीमारी से पीड़ित है। गले में दर्द इतना होता है कि वह खाना और पानी तक नहीं ले पाती।  खाना सामने होती हुए भी खा नहीं पाती थी और रोने लग जाती है। अब निजी डॉक्टर को घर बुलाकर कभी अस्पताल जाकर इलाज करवाया जा रहा है। शाहिद की बूढ़ी मां अख्तरी बेगम भी बीमार हैं। उन्हें खुद चलने-फिरने में परेशानी होती है। वो खुद अपने बेटे व परिवार की हालत में आंसू बहा रही है।</p>
<p><strong>मामूली छाले से कैंसर तक का सफर </strong><br />करीब दो साल पहले शाहिद की जीभ पर मामूली छाला निकला। उन्होंने सोचा कुछ दिन में ठीक हो जाएगा। लेकिन यह मामूली छाला धीरे-धीरे कैंसर में बदल गया।  इलाज इतना महंगा था कि घर की जमा पूंजी एक-एक करके सब खत्म हो गई। तीन महीने पहले आई बायोप्सी रिपोर्ट ने शाहिद और उनके परिवार की दुनिया ही हिला दी। अब शाहिद के कैंसर को ठीक करने के लिए आॅपरेशन से जबड़ा व जीभ काटनी पड़ेगी। उसमें भी बचने कोई गारंटी नहीं है। अब वे न तो बोल सकते हैं, न खाना खा सकते हैं। उनके चेहरे और शरीर पर बीमारी का असर साफ झलकता है। </p>
<p><strong>अब घर की जिम्मेदारी ही सबसे बड़ी परीक्षा : रहमत</strong><br />घर की जिम्मेदारी तथा अपने पिता का कैंसर का व अपनी छोटी बहनों की गंभीर बीमारियों का इलाज अब 17 वर्षीय रहमत खान के कंधों पर आ गई है। दसवीं का छात्र रहमत अब ओपन स्कूल से पढ़ाई कर रहा है ताकि दिन में थोड़ा काम कर सके। उसने बताया कि अब घर चलाना ही मेरे लिए सबसे बड़ी परीक्षा है, रहमत कहता है। अब्बू को देखकर दिल टूट जाता है। अब मेरे लिए पढ़ाई से ज्यादा जरूरी घर की जिम्मेदारी है, मेरी बहनों की परवरिश है, मां व दादी का ख्याल रखना है मैं अपने परिवार के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हूं। वह कभी किसी किराना तो कभी कपड़े की दुकान पर काम करता है, तो कभी किसी के साथ पेंटिंग में हाथ बंटा देता है। जितना कमाता है, उससे केवल घर खर्च ही मुश्किल से निकल पा रहा है।</p>
<p><strong>कायनात की मजबूरी :अब नहीं बची जीने की हिम्मत </strong><br />शाहिद की पत्नी कायनात अब पूरी तरह थक चुकी हैं। वह कहती है कि मैं बाहर जाकर काम भी नहीं कर सकती, बीमारी के चलते पति व बेटियों को हर पल मेरी जरूरत होती है, बेटियां बीमार हैं, सास की सेवा करनी है। अब समझ नहीं आता कहां जाऊं, किससे मदद मांगू। अब बेबश होकर तथा आंख में आंसू लिए बोलीं तब तो जीने की इच्छा ही खत्म हो गई। ऐसा दर्द किसी भी परिवार को नहीं दें। सबके घर में खुशियां व बरकत दें। किसी भी घर में आंसू नहीं छलकना चाहिए।</p>
<p><strong>मोहल्ले वालों का सहारा...पर कब तक!</strong><br />मोहल्ले के लोग और रिश्तेदार इस परिवार की मदद कर रहे हैं। कोई दवा के पैसे देता है, कोई राशन लाकर रख देता है। लेकिन ये मदद कितनी देर तक चलेगी, कोई नहीं जानता। पड़ोसी इमरान कहते हैं हम सब कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इलाज बहुत महंगा है। सरकार या कोई संस्था आगे आए तो शायद शाहिद भाई को बचाया जा सके।  कभी दीपावली के वक्त शाहिद रात-रातभर काम करते थे। अब उनके परिवार को आने वाले त्योहार डरावने लगते हैं। लोग अपने घर सजा रहे हैं, और उनका परिवार अपने घर में ही अंधेरे में बैठा हैं।</p>
<p><strong>सरकार और समाज से मदद की उम्मीद</strong><br />पत्नी कायनात कहती है कि अब किसी की मदद मिल जाए तो इलाज हो सकता है, वरना बस अल्लाह के भरोसे हैं। अब यह परिवार समाज और सरकार से मदद की आस लगाए बैठा है। मोहल्लेवालों ने भी जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि शाहिद खान जैसे परिवारों की पहचान कर सरकारी सहायता योजनाओं से जोड़ें। वहीं कायनात का कहना है कि अगर कोई संस्था या सरकारी मदद या कोई व्यक्ति हमारे लिए मदद में आगे आए तो वो हमारे लिए किसी परिश्ते से कम नहीं होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 15:49:52 +0530</pubDate>
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                <title>गौशाला में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-medical-facilities-in-the-cowshed/article-125574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(630-x-400-px)-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। यहां हजारों की संख्या में लावारिस हालत में पकड़कर लाए गए पशु रखे गए हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इतनी बड़ी संख्या में गौवंश के लिए गौशाला में अब तक पशु चिकित्सालय तक संचालित नहीं हो पाया है। कम्पाउंडरों के भरोसे ही बीमार व कमजोर पशुओं का उपचार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>ग्रीनबेल्ट पर खर्च, जरूरी काम अधूरे</strong><br />सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि निगम की ओर से गौशाला में जो आवश्यक निर्माण कार्य हैं, वे तो अधूरे पड़े हैं। इसके उलट लाखों रुपए खर्च कर ग्रीनबेल्ट विकसित की गई है। लेकिन बीमार पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा और रहने के लिए शेड जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हुई हैं।</p>
<p><strong>निगम का पक्ष</strong><br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के अधिकारियों का कहना है कि गौशाला में निर्माण कार्यों की टेंडर प्रक्रिया जारी है। जल्द ही पशुओं के लिए शेड व अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा।</p>
<p><strong>कायन हाउस की स्थिति और खराब </strong><br />सिंह ने बताया कि किशोरपुरा स्थित कायन हाउस की स्थिति तो और भी खराब है। वहां तो चिकित्सा केन्द्र तक मौजूद नहीं है। कम्पाउंडरों से ही काम चलाया जा रहा है। शहर में निजी स्तर पर करीब दो दर्जन पशु चिकित्सा केन्द्र संचालित हो रहे हैं, लेकिन निगम की गौशालाओं में मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल रही है। इससे बीमार पशुओं की देखभाल में कठिनाई आती है।</p>
<p><strong>डॉक्टर आते हैं सप्ताह में एक-दो बार</strong><br />गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि यहां लाए जाने वाले अधिकांश गौवंश बीमार और कमजोर स्थिति में होते हैं। उन्हें लगातार चिकित्सा सुविधा की जरूरत रहती है। लेकिन निगम की ओर से यहां स्थायी पशु चिकित्सक तैनात नहीं है। बोरावास व मंडाना से सप्ताह में केवल एक-दो बार ही डॉक्टर आते हैं। ऐसे में आपात स्थिति में समय पर उपचार न मिल पाने से कई बार गंभीर परेशानी खड़ी हो जाती है। फिलहाल एक रिटायर्ड डॉक्टर को निगम की ओर से नियुक्त किया गया है, जिनसे काम चल रहा है।</p>
<p><strong>टेंडर तक नहीं हुए</strong><br />समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि निगम अधिकारियों को कई बार कहा गया, लेकिन अब तक शेड लगाने का काम शुरू नहीं हुआ। कई कार्यों के तो टेंडर तक जारी नहीं हुए हैं। इससे गौवंश की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर लगातार खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong> बरसात व धूप में खुले में रहने को मजबूर पशु</strong><br />गौशाला परिसर में एक और बड़ी समस्या टीनशेड की कमी है। मानसून में भारी बारिश और गर्मी में तेज धूप से बचाने के लिए शेड जरूरी है, लेकिन निगम अभी तक यह काम भी शुरू नहीं कर पाया है। इस कारण अधिकतर पशु खुले में ही खड़े रहने को मजबूर हैं। बारिश में गीली जमीन पर खड़े रहने और धूप में तपते रहने से उनकी सेहत और बिगड़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 16:38:48 +0530</pubDate>
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