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                <title>Modernization - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अश्विनी वैष्णव का लोकसभा में जवाब: रेलवे ने 2025-26 में 167 करोड़ टन माल का किया परिवहन, वित्त वर्ष में पिछले 50 वर्षों में सबसे कम रेल दुर्घटनाएं दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि भारतीय रेलवे ने 167 करोड़ टन माल ढुलाई का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। उर्वरक और स्टील परिवहन में 13% की वृद्धि के साथ सुरक्षा में भी सुधार हुआ है। पिछले 50 वर्षों में सबसे कम रेल दुर्घटनाओं के साथ, रेलवे अब प्रतिदिन 25,000 ट्रेनें संचालित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ashwini-vaishnavs-answer-in-lok-sabha-railways-transported-167-crore/article-148716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ashvini.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में माल परिवहन में एक नया रिकॉर्ड स्थापित करते हुए 167 करोड़ टन माल का परिवहन किया। यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में 3.25 प्रतिशत अधिक माल लदान के साथ रेलवे ने रिकॉर्ड 167 करोड़ टन माल का परिवहन किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने रेलवे क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व वित्तीय आवंटन की हैं, जिससे व्यापक विकास हुआ है। रेलवे में हुए सुधारों ने सभी सामाजिक-आर्थिक समूहों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है, विशेष रूप से गरीबों और मध्यम वर्ग पर। उन्होंने बताया कि उर्वरक, पिग आयरन और तैयार स्टील के परिवहन में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी, जिसने रेलवे को यह रिकॉर्ड बनाने में मदद की।</p>
<p>रेल मंत्री ने बताया कि इस दौरान लौह अयस्क का परिवहन 6.73 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सीमेंट के परिहवन में 3.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रेलवे ने 76,352 विशेष ट्रेनें चलाईं। वर्तमान में रेलवे नेटवर्क पर प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनें चलती हैं। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस वित्त वर्ष में पिछले 50 वर्षों में सबसे कम गंभीर रेल दुर्घटनाएं हुईं। इस दौरान केवल 16 गंभीर दुर्घटनाएं हुईं, जो सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:13:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रक्षा बल विजन-2047 में रासायनिक: जैविक और परमाणु खतरों को गंभीर चुनौती बताया; भविष्य के युद्धों के प्रति भारत बना रहा रणनीति, नए खतरों से निपटने के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार करने का खाका बनाया</title>
                                    <description><![CDATA[बदलते वैश्विक युद्ध तंत्र को देखते हुए भारत ने विज़न-2047 के तहत सीबीआरएन (CBRN) खतरों से निपटने की रणनीति बनाई है। इसके तहत परमाणु, रासायनिक और जैविक हमलों से बचाव के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली और आधुनिक डिटेक्शन सिस्टम तैनात किए जाएंगे। तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और स्वदेशी तकनीक के माध्यम से सामूहिक विनाश के खतरों को विफल किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-the-defense-force-vision-2047-chemical-biological-and-nuclear-threats/article-146547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञों को युद्ध के तौर तरीकों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। बदलते वैश्विक हालात और भविष्य के युद्ध के खतरों को देखते हुए भारत ने सुरक्षा रणनीति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हाल में पेश रक्षा बल विजन-2047 दस्तावेज में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु यानी सीबीआरएन खतरों को गंभीर चुनौती बताया गया है। इस दस्तावेज में ऐसे हमलों से बचाव के लिए आधुनिक और एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार करने का खाका पेश किया गया है।</p>
<p>इसका उद्देश्य भविष्य में किसी भी बड़े हमले की स्थिति में सेना और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है। विजन दस्तावेज के अनुसार अब युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक समय में सामूहिक विनाश के हथियारों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। खासकर जैविक खतरों को बड़ी चुनौती माना गया है क्योंकि ये अक्सर अदृश्य तरीके से फैलते हैं और इन्हें पहचानना मुश्किल होता है। इसलिए इन खतरों की पहचान, रोकथाम और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए नई तकनीकों और व्यवस्थाओं को विकसित करने की जरूरत बताई गई है।</p>
<p><strong>रासायनिक और जैविक खतरों से निपटने का फार्मूला</strong></p>
<p>इस समय सेना के पास कोर ऑफ इंजीनियर्स के तहत विशेष दस्ता है जो रासायनिक और जैविक खतरों से निपटने का काम करता है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की टीमें नागरिक सुरक्षा के लिए तैनात रहती हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ भी इन खतरों से बचाव के लिए नई तकनीक और उपकरण विकसित कर रहा है। पिछले वर्ष सेना ने 223 आॅटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम खरीदे हैं। यह सिस्टम वास्तविक समय में खतरनाक रसायनों का पता लगाने में सक्षम है। इसके अलावा स्वदेशी मोबाइल डिकंटेमिनेशन सिस्टम भी तैयार किए गए हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल किसी रासायनिक या जैविक हमले के बाद प्रभावित इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए किया जाएगा।</p>
<p><strong>सभी एजेंसियां मिलकर तेजी से कार्रवाई करेंगी</strong></p>
<p>रक्षा बल विजन-2047 का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है। फिलहाल कई एजेंसियां अलग-अलग उपकरण और प्रक्रियाओं के साथ काम करती हैं। इससे संकट के समय प्रतिक्रिया में देरी हो सकती है। नई योजना के तहत एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार की जाएगी ताकि हमले की स्थिति में सभी एजेंसियां मिलकर तेजी से कार्रवाई कर सकें।</p>
<p><strong>सुरक्षा उपकरणों की खरीद को मानकीकृत करेंगे</strong></p>
<p>नई नीति के तहत तीनों सेनाओं के लिए सुरक्षा उपकरणों की खरीद को मानकीकृत किया जाएगा। यानी एक ही तकनीकी मानकों वाले उपकरण खरीदे जाएंगे। इसके साथ ही प्रशिक्षण प्रक्रिया को भी एक समान बनाया जाएगा। इससे हमले की स्थिति में हर यूनिट की प्रतिक्रिया सटीक और समन्वित होगी।</p>
<p><strong>घायल सैनिकों के प्रबंधन के लिए क्या योजना है?</strong></p>
<p>विजन-2047 में हताहत प्रबंधन की नीति भी तैयार करने की बात कही गई है। इसके तहत हमले की स्थिति में घायल सैनिकों के उपचार और उनके शरीर से विकिरण या रासायनिक प्रभाव हटाने की प्रक्रिया को मानकीकृत किया जाएगा। इससे संकट के समय उपचार तेज और प्रभावी हो सकेगा और सैनिकों की सुरक्षा बेहतर होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 11:15:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अश्विनी वैष्णव का दावा: रेल पटरियों को उन्नत बनाने का 80 प्रतिशत काम पूरा, 50 प्रतिशत मार्ग सेमी हाईस्पीड के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 50% रेल नेटवर्क अब सेमी-हाई स्पीड (130 किमी/घंटा) के लिए तैयार है। जापान की तर्ज पर AI और IoT आधारित निगरानी से समयबद्धता में सुधार किया जा रहा है। चेन्नई-बेंगलुरु जैसे नए हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रा का समय घटेगा और भारतीय रेल का प्रदर्शन अब यूरोपीय देशों के समकक्ष पहुँच गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ashwini-vaishnav-claims-80-percent-work-of-upgrading-railway-tracks/article-146421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rail-minister.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय रेल नेटवर्क के 50 प्रतिशत रेल-मार्गों को उन्नत कर सेमी-हाई स्पीट रेलगाड़ी चलाने लायक कर दिया गया है जिस पर रेलगाड़यिां 130 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित दौड़ सकती है। राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान अपने मंत्रालय से संबधित पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पिछले एक दशक में रेल पटरियों के अपग्रेडेशन (उन्नयन) का काम बहुत गंभीरता से किया जा रहा है। 80 प्रतिशत रेल लाइनों को अपग्रेड कर 110 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए मजबूत और सुरक्षित किया गया है तथा 50 प्रतिशत मार्ग 130 किमी प्रति घंटे की ट्रेनों के लिए उपयुक्त बनाए जा चुके हैं जो सेमी हाई-स्पीड की श्रेणी में आता है।</p>
<p>उन्होंने यात्री ट्रेनों के समय पर परिचालन के रिकार्ड के बारे में एक अनुपूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि इस समय रेलवे की 24 डिवीजनों में गाड़ियों के समय पर चलने का रिकार्ड 90 प्रतिशत, 43 डिवीजनों में 80 प्रतिशत और आठ डिवीजनों में 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मदुरै, रतलाम, हुबली, अजमेर जैसे कुछ डिवीजनों में समयानुसार परिचालन का स्तर 77 प्रतिशत है।</p>
<p>अश्विनी वैष्ण्व ने कहा, भारतीय रेल का यह प्रदर्शन जर्मनी, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों के स्तर का है पर हमारी तुलना का आधार जापान होना चाहिए जहां समयबद्ध परिलाचन का एक अपना ही पैमाना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वहां कुछ विशिष्ट कार्य प्रणालियां हैं जिनमें से कुछ को भारतीय रेल में भी अपनाया जा रहा है।</p>
<p>रेल मंत्री ने कहा कि जापान में मरम्मत और रख रखाव की योजना 26 सप्ताह पहले से लागू की जाती है। भारत में भी पिछले दो-ढाई साल से इसकी शुरुआत की गयी है जिसके परिणाम बहुत अच्छे आ रहे हैं। इसके और व्यापक इस्तेमाल और इसमें महारथ हासिल कर लिये जाने के बाद  स्थिति में निश्चित रूप से बड़ा सुधार दिखेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यात्री ट्रेनों के समय पर आने-जाने को सुनिश्चित करते के लिए भारतीय रेल का मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी वाले औजार और समाधान समावेश जिसमें एआई आधारित निगरानी के अलावा रख रखाव पर जोर है। रेल अवसंरचना की निरंतर निगरानी के लिए इंटरनेट ऑफ दी थिंग्स और एआई का भी प्रयाग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिंगल सेट ट्रेन ( जिसमें इंजन को ट्रेन से अलग नहीं करना पड़ता) से भी समयबद्धता सुधरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल हर रोज 25000 ट्रेनों का परिचालन करती है और इनकी समय सारिणी का प्रबंधन एक जटिल काम है। </p>
<p>ट्रेनों की समयबद्धता को लेकर यात्रियों को डैश-बोर्ड (इलेक्ट्रानिक सूचना पट्टिका) की सुविधा दिये जाने के विचार के संबंध में एक अन्य अनुपूरक प्रश्न के जवाब में वैष्णव ने कहा कि रेलवे के नेटवर्क के इष्टतम उपयोग के लिए रेलवे अपनी समय सारिणी पर आईआईटी बांबे और आईआईटी मद्रास के माध्यम से अनुसंधान करा रही है। आईआईटी मुंबई ने कुछ अच्छा काम किया है। रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) भी नेटवर्क के इष्टतम प्रयोग को सुनिश्चित करने में आईटी टूल के विकास में लगा रहता है।</p>
<p>रेल मंत्री ने कहा कि जापान और दक्षिण कोरिया में यात्रियों के लिए रेल कॉरीडोर अलग कर दिए गये हैं और पुराने मार्गों को मालगाड़ी गलियारों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में सात हाईस्पीड रेल गलियारों की घोषणा उसी दिशा में शुरुआत है। उन्होंने उदाहरण दिया कि चेन्नई- बेंगलूरू हाईस्पीड गलियारे के चालू हो जाने पर दोनों महानगरों की दूरी घट कर 73 मिनट की रह जाएगी।</p>
<p>एक अन्य प्रश्न के जवाब में रेल मंत्री ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरीडॉर के निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय के एक दल ने हाल में कार्य का निरीक्षण करने के बाद प्रगति पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की पिछली उद्धव ठाकरे सरकार ने इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का काम नहीं किया जबकि गुजरात में समय से जमीन की व्यवस्था होने के चलते वहां के हिस्से में पहले से ही काम तेज चल रहा है। इस रेल-मार्ग पर देश में पहली बार समुद्र के अंदर रेल टनल बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/ashwini-vaishnav-claims-80-percent-work-of-upgrading-railway-tracks/article-146421</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 18:19:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुश्मन देशों की उड़ने वाली है नींद, सशस्त्र बलों की क्षमता बढाने के लिए 79,000 करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने सशस्त्र बलों के लिए ₹79,000 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें पिनाका रॉकेट सिस्टम, स्वदेशी ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम (IDDIS), अस्त्र मिसाइलें और आर्टिलरी के लिए आधुनिक हथियारों की खरीद शामिल है, जो सेना की मारक क्षमता को बढ़ाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/under-the-chairmanship-of-union-defense-minister-rajnath-singh-defense/article-137640"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rajnaht-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए 79,000 करोड़ रुपये के रक्षा खरीद सौदों के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में तीनों सेनाओं के लिए आवश्यकता के आधार पर खरीद के इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी। </p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस वर्ष की अंतिम बैठक में मंजूर किये गये इन खरीद सौदों की कुल अनुमानित लागत लगभग 79,000 करोड़ रुपये है और इनमें सेना की तोपखाना रेजिमेंट के लिए लॉयटर म्यूनिशन सिस्टम, लो लेवल लाइट वेट रडार, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट एम्युनिशन तथा इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (IDDIS) मार्क-2 की खरीद को मंजूरी दी गई।</p>
<p>बैठक में नौसेना के लिए बोलार्ड पुल टग्स, हाई फ्रीक्वेंसी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो मैनपैक तथा हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग रेंज रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम को लीज पर लेने के प्रस्तावों को आवश्यकता पर खरीद की स्वीकृति प्रदान की गई। वायु सेना के लिए ऑटोमैटिक टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम, अस्त्र मार्क-(IDDIS) मिसाइलें, फुल मिशन सिम्युलेटर तथा स्पाइस-1000 लॉन्ग रेंज गाइडेंस किट्स आदि की खरीद को आवश्यकता की स्वीकृति दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 16:10:08 +0530</pubDate>
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