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                <title>बदलती जीवनशैली और तनाव से युवा व बच्चों के दिल दे रहे धोखा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रत्येक स्कूल में कार्डियक किट हो, सीपीआर प्रशिक्षण भी देना चाहिए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/due-to-changing-lifestyle-and-stress--hearts-of-youth-and-children-are-betraying/article-121457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news55.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भारत में हार्ट के मरीजों की संख्या साल दर साल बढ़ रही है। युवाओं से लेकर बच्चों तक दिल की बीमारी से परेशान हैं। बदलते जीवनशैली के चलते, युवा और बच्चों में दिल की धड़कन असामान्य हो जाती है। मांसपेशियों के सिकुड़ने के कारण ब्लड सर्कुलेट नहीं हो पाता है जिसके कारण असमय मृत्यु हो जाती है।  दैनिक दिनचर्या के बदलाव के कारण हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। यह विचार दैनिक नवज्योति कार्यालय में आयोजित मासिक परिचर्चा में  सामने आए। केस ऑफ साइलेंट अटैक आर इन्क्रीजिंग एमंग चिल्ड्रन एन्ड यूथ, व्हाट इज द रीजन विषय पर दैनिक नवज्योति कार्यालय में आयोजित टॉक शो में शहर के जाने-माने विशेषज्ञ कार्डियोलोजिस्ट, फिजीशियन, डायटीशियन, साइकेटिंस्ट, आयुर्वेद , योग टीचर, जिम ट्रेनर, पैरेंट्स व स्ट्रेस मैनेजमेंट से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।  विशेषज्ञों ने कोरोनाकाल के बाद जीवनशैली में आए बदलाव के कारण लोगों में तनाव, अनियमित खान-पान तथा फिजिकल एक्टिविटी कम होने को मुख्य कारण माना है। प्रस्तुत हैं परिचर्चा के मुख्य अंश:-</p>
<p><strong>स्कूलों में बच्चों की स्क्रीनिंग हो</strong><br />वर्तमान में लाइफ स्टाइल में काफी बदलाव आया है, जिसके चलते युवाओं में तनाव बढ़ने से डायबिटीज, बीपी सहित कई बीमारियों ने घेर लिया है। हार्टअटैक का प्रमुख कारण हार्ट सही तरीके से पंम्पिग नहीं कर पाने से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है, जिसके कारण शरीर में ब्लड सर्कुलर सही तरीके से नहीं हो पाता है। साइलेंट अटैक का प्रमुख कारण भी बिगड़ी दिनचर्या तथा खानपान है। अगर अटैक आने वाले व्यक्ति को सही समय पर सीपीआर देकर जीवन बचाया जा सकता है। सीपीआर की जानकारी सभी को जानकारी होनी चाहिए। स्कूली बच्चों में आ रहे अटैक भी स्ट्रैस ही है। शहर की कई स्कूलों में जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है तथा पैरेंट्स भी इस ओर ध्यान नहीं दे पाते है।<br /><strong>-डॉ. संजय शायर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर </strong></p>
<p><strong>शरीर के प्रति जागरूकता व पौष्टिक आहार जरूरी</strong><br />सुबह जल्दी उठने व रात को जल्दी सोने की आदत को बनाए रखने के साथ ही स्वास्थ्य के प्रति सभी  में जागरूकता होना आवश्यक है। दिनचर्या व खान-पान सही नहीं होने से तनाव  व रोग बढ़ते हैं। विशेष रूप से हार्ट संबंधी बीमारी का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में शरीर के लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं इस बारे में जानकारी होनी चाहिए।  पौष्टिक आहार लेना और नियमित योग व प्राणायम ऐसे माध्यम हैं जिनसे इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। <br /><strong>-डॉ. नितिन सोलंकी क्लीनिकल न्यूट्रियनिस्ट </strong></p>
<p><strong>डायबिटीज व स्मोकिंग बन रहे बड़े कारण</strong><br />आज के दौर में डायबिटीज व स्मोकिंग हार्ट अरेस्ट के बड़े कारक सामने आ रहे हैं। कार्डिक अरेस्ट और हार्ट अटैक दोनों अलग अलग स्थितियां हैं।  जीवन की भागदौड़ के चलते हमारी दिनचर्या में काफी बदलाव आया है। नियमित समय में डाइट नहीं लेना, फास्टफूड पर ज्यादा निर्भर रहना भी हार्ट की समस्या को बढावा देता है। ज्यादातर हार्ट अटैक के मामलों में कॉलेस्ट्रोल बढ़ने से खून की आपूर्ति रुक जाती है जिससे असमय मृत्य हो जाती है। समय पर खान-पान लेना नियमित  योग व फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखे। जीवन में तनाव (स्ट्रेस) कम रखें। स्कूलों में बच्चों की नियमित ब्लड, शुगर की जांच होनी चाहिए। वहीं प्रत्येक व्यक्ति को सीपीआर की जानकारी होनी चाहिए। हार्टअटैक के दौरान सीपीआर देने से व्यक्ति को नया जीवन मिल सकता है।<br /><strong>-डॉ. पवन सिंघल, कॉर्डियोलोजिस्ट कोटा हार्ट </strong></p>
<p><strong>स्कूलों में कार्डियो किट व डिस्प्रिन होना जरूरी</strong><br />वर्तमान में बच्चों में साइलेंट हार्ट अटैक बढ़ रहे है। इसका प्रमुख कारण बच्चों का हर छोटी बात का स्ट्रेस लेना है। बच्चों द्वारा माता-पिता को अपनी समस्या बताने पर उनको अनदेखा कर देता है। वहीं स्कूल या घर से बाहर भी अपने मन की बात किसी से शेयर नहीं करने पाने की वजह से भी डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। नियमित खान-पान या फिजिकल एक्टिविटी नहीं होने से भी दैनिक कार्य प्रभावित हो जाते हैं। स्कूलों में बच्चों की नियमित जांच होनी चाहिए। वहीं प्रत्येक स्कूल में कार्डियेक किट होना चाहिए। उसमें डिस्प्रीन टेबलेट भी होनी चाहिए, आपातकाल स्थिति में संभल सकते हैं। सीपीआर देने के लिए ट्रेनर होना चाहिए ताकि आपातकाल में हार्ट अटैक के दौरान गोल्डन ऑवर में सीपी देकर जान बचाई जा सके। सीपीआर देने संबंधी प्रशिक्षण प्रत्येक स्कूलों के कर्मचारी व बच्चों को मिलना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. सुरभी गोयल, फिजियोलॉजिस्ट व स्ट्रेस मैनेजमेन्ट विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>डाइट प्लानिंग से  लाएं दिनचर्या में बदलाव</strong><br />जीवन में सभी लोगों की बॉडी लेंग्वेज अलग-अलग होती है। नियमित आहार-विहार नहीं लेने से भी दिनचर्या बिगड़ जाती है। बाजार में मिल रहे फास्टफूड भी कॉलेस्ट्रोल को बढ़ाती है। कई लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते है तथा अपने कामकाज को लेकर तनावग्रस्त रहते हैं। देर रात खाना खाने या खाना खाने के बाद तुरंत सो जाना भी बीमारियों को दावत देना है। शुरूआत में अगर शरीर में थकान, चक्कर आने जैसी समस्या आने तुरंत डॉ. को दिखाना चाहिए। लोगों को अपनी डाइट प्लानिंग को नियमित दिनचर्या में शामिल करके तथा नियमित व्यायाम और योग से भी अपने आपको स्वस्थ रख सकते हैं।<br /><strong>-सलोनी सेठी, डायटीशियन,एन्ड न्यूट्रियनिस्ट</strong></p>
<p><strong>स्वस्थ जीवन के लिए योग जरूरी</strong><br />वर्तमान में लोगों की फिजिकल एक्टिविटी न होने से कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। अनियमित दिनचर्या के चलते डायबिटीज, दिल की बीमारी व बीपी, शुगर सहित कई बिमारियां जकड़ लेती है। स्वस्थ शरीर के लिए योग करना भी जरूरी है। रोजाना अनुलोम-व्योलोम में श्वांस अंदर लेने तथा बाहर छोड़ने से भी शरीर स्वस्थ रहता है। योग गुरु रामदेव बाबा के सिखाए योग को भी घर पर ही करके स्वस्थ रह सकते है। समयभाव के कारण हमने अपनी जिंदगी को मशीन की तरह बना लिया है। जिसके कारण हम अपने परिवार के प्रति भी ध्यान नहीं दे पाते है। स्वस्थ शरीर के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है।<br /><strong>-रचना शर्मा, व्याख्याता शारीरिक शिक्षा</strong></p>
<p><strong>स्कूलों में ही सीपीआर प्रशिक्षण</strong><br />बच्चों में जिस तरह से छोटी उम्र में ही पढ़ाई के साथ ही माता पिता की अपेक्षाओं को पूरा करने का तनाव बढ़ता जा रहा है। उस कारण से हार्ट अटैक कम उम्र में भी होने लगा है। इससे बचने के लिए बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार काम करने दिया जाए। यदि स्कूल में कभी इस घटना का कोई मामला हो तो उसे कंट्रोल करने के लिए  स्कूलों में सीपीआर प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही बच्चों के खान-पान पर शिक्षकों द्वारा ध्यान दिया जाए। कम उम्र में ही सावधानी रखी गई तो आने वाले खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। <br /><strong>- मोइनुद्दीन पैरेन्ट्स </strong></p>
<p><strong>प्रकृूति से जुड़ना जरूरी</strong><br />पहले लोग सुबह जल्दी उठकर बाग बगीचों में घूमने जाते थे। पेड़ पौधों के बीच रहने से प्राकृति से जुड़े रहते थे। शुद्ध हवा व ऑक्सीजन मिलने के साथ  ही खान-पान में शुद्धता थी। लेकिन वर्तमान में अधिकतर लोग प्रकृति से दूर होने के साथ ही खान-पान भी शुद्ध नहीं होने से साइलेंट अटैक का खतरा अधिक बढ़ा है। जिम में शरीर को स्वस्थ बनाने के तरीके बताए जाते हैं। उसके लिए उसी तरह की डाइट का सेवन किया जाता है। साथ ही शरीर को स्वस्थ रखने व बीमारियों से दूर रहने का एक ही उपाय है प्रकृति से जुड़ना या उसके नजदीक रहना। <br /><strong>- अशोक औदिच्य सचिव बॉडी बिल्डिंग संघ </strong></p>
<p><strong>फिजिकल एक्टिविटी बढ़ानी होगी</strong><br />शरीर को स्वस्थ रखने के लिए फिजिकल एक्टिविटी जितनी अधिक होगी उतना बेहतर रहता है। साथ ही लोगों को अपनी लाइफ स्टाइल को भी बदलना होगा। लाइफ स्टाइल सही नहीं होने से ही अटैक ही नहीं सभी तरह की बीमारियां जन्म लेती है।  शरीर के प्रति जागरूक लोग जिम में जाते है। लेकिन वहां जिस तरह की गतिविधि करवाई जाती है उसका नियमित अभ्यास व उसी अनुसार डाइट लेना आवश्यक है। जिम का मतलब शरीर के साथ ज्यादती करना नहीं है। स्वस्थ रहने के लिए  जागरूकता भी जरूरी है। <br /><strong>- पूजा यादव, जिम ट्रेनर</strong></p>
<p><strong>बदलते लाइफ स्टाइल का प्रभाव</strong><br />हार्ट अटैक का एक प्रमुख कारण लाइफ स्टाइल का प्रभाव भी है। इसके चलते युवा में स्मॉकिंग, शराब का सेवन तथा फिजिकल एक्टिविटी का भी अभाव है। जिम में आने वाले सभी को पहले दिनचर्या को सही करने, डाइट संबंधी नियमों का पालन करना तथा शारीरिक व्यायाम तथा जीवन में स्ट्रेस नहीं लेने की सलाह देता हूं।  जो युवा अपने आहार-विहार का पालन नहीं करते तथा फास्टफुड पर निर्भर रहते है, आने वाले दिनों में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ने से  हार्ट पर जोर पड़ता है वहीं इम्युनिटी पॉवर कम होने से भी अचानक थकान, चक्कर आना भी हार्ट अटैक् को इंगित करता है।<br /><strong>- नरेन्द्र यादव, जिम ट्रेनर</strong></p>
<p><strong>स्कूलों में हो योगा क्लास</strong><br />जिस तरह से वर्तमान में छोटी उम्र के बच्चों में  साइलेंट हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। उन्हें देखते हुए आवश्यक है कि बच्चों से  उनकी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करवाई जाए। स्कूलों में नियमित योगा क्लास लगाई जाए। जिससे बच्चा स्कूल में शिक्षकों की बात को जितना जल्दी अमल में लाता है उतना माता पिता की बात को भी नहीं लाता। बच्चों के खान-पान व उनकी दिनचर्या को भी सही रखकर इस बीमारी से बचाया जा सकता है।<br /><strong>-अंजली जैन सीए, अर्हं सोशल वेलफेयर फाउंडेशन </strong></p>
<p><strong>स्ट्रेस से बचने को मेडिटेशन जरूरी</strong><br />नियमित आहार-विहार तथा फिजिकल एक्टिविटी से अपने आपको स्वस्थ रखें। बदलती लाइफ स्टाइल में मेडिटेशन से भी अपने आपको फिट रख सकते हैं। वहीं व्यस्तता के कारण हम अपने स्वास्थ्य के प्रति अवेयर भी नहीं हो पाते है। अपने परिवार में भी सदस्यों से संवाद नहीं करने से अकेलेपन का शिकार हो जाते है।  स्वस्थ जीवन के लिए डाइट प्लानिंग भी जरूरी है। कोई भी शारीरिक बदलाव महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाए तथा उनके द्वारा दिए गए निर्देशों की पालना करें। स्ट्रेस से बचने के लिए मेडिटेशन का सहारा लें तथा कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताएं। <br /><strong>- डॉ.मिथिलश खींची, एसोसिएट प्रोफेसर, मनोचिकित्सक मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>बीमारी की जड़ पर पहले हो वार</strong><br />हार्ट अटैक की बात कर रहे हैं लेकिन आयुर्वेद तो बीमारी ही नहीं हो इस पर काम करता है। हेल्दी और संसकारी संतति हो ऐसे प्रयास करने चाहिए। हमें हमारी पुरानी जड़ों पर लौटना होगा। आज परिवार में दूरिया बढ़ जाती है।  छोटे बच्चे भी मोबाइल देखते रहते है।  माता-पिता के काम पर जाने के बाद बच्चे अकेले रह जाते है जिससे नियमित खान-पान नहीं ले पाते है। फिजिकल एक्टिविटी भी नहीं हो पाती है। शहर के अधिकांश स्कूलों में बच्चों के ब्लड व नियमित डाइट की जांच नहीं हो पाती है। उनकी जीवनशैली में भी बदलाव आ जाता है। बच्चों को दादा-दादी का प्यार नहीं मिलने से संस्कारों में भी कमी आ जाती है। बच्चे व युवा अंदर ही अंदर तनावग्रस्त हो जाते है या नशे या बुरी आदतों के शिकार हो जाते है।<br /><strong>-अंजना शर्मा, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी </strong></p>
<p><strong> स्कूल का रोल महत्वपूर्ण</strong><br />स्वथ शरीर के लिए फीजिकल एक्टिवीटी बहुत जरूरी है। चालीस वर्ष की उम्र के बाद नियमित जांच को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। वहीं बच्चों के जीवन में स्कूल का रोल काफी महत्वपूर्ण है। स्कूलों को भी अपने दैनिक कार्यक्रम में बच्चों के खानपान व बीपी, शुगर या फिर महिने में एक बार रूटिन चैकअप जरूर होना चाहिए। स्कूलों में पढ़ाने वाले क्लास टीचर के पास बच्चे की जानकारी होती है। अगर बच्चों की जीवनशैली में बदलाव आ रहा है तो माता-पिता को बता सकते है। या फिर प्यार से कारण जानकर बच्चों का स्ट्रेस दूर किया जा सकता है। माता-पिता में कामकाजी थकान के चलते बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दे पाते है।<br /><strong>-महेन्द्र चौधरी, प्रिसींपल महात्मा गांधी रा.वि. श्रीनाथपुरम </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jul 2025 14:54:26 +0530</pubDate>
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                <title>वर्ल्ड हार्ट डे आज: दैनिक नवज्योति ने जयपुर के हृदय रोग विशेषज्ञों से ली जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 20 प्रतिशत मृत्यु दर हृदय की स्थिति के कारण ही होते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-heart-day-today-dainik-navjyoti-took-information-from-cardiologists/article-91860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size22.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जयपुर। पिछले कुछ समय से 20 से 30 वर्ष की आयु वाले व्यक्तियों में भी साइलेंट हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे कई वजह हैं। जिनमें अत्यधिक तनाव, जिम में जरूरत से ज्यादा करसत, स्टेरॉयड, शराब, धूम्रपान आदि प्रमुख हैं। हार्ट अटैक के मामले में राजस्थान के आंकड़े चिंताजनक हैं। आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 20 प्रतिशत मृत्यु दर हृदय की स्थिति के कारण ही होते हैं। यह <a class="gL9Hy" href="https://www.google.com/search?sca_esv=4c3d1b1066869309&amp;sca_upv=1&amp;q=%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF+%E0%A4%94%E0%A4%B8%E0%A4%A4&amp;spell=1&amp;sa=X&amp;ved=2ahUKEwjQ4vPAoOeIAxUwxzgGHQdnLzEQkeECKAB6BAgLEAE">आंकड़ा <strong><em>राष्ट्रीय</em></strong> औसत</a> 31.6 प्रतिशत से थोड़ा कम है, लेकिन यह एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का संकेत देता है। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में कोरोनरी हृदय रोग की व्यापकता दर 6 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 3 प्रतिशत से 5 प्रतिशत के बीच।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जिम में व्यायाम, क्रिकेट, रनिंग के दौरान हो रहे हार्ट अटैक</strong><br />जिम में व्यायाम के दौरान, क्रिकेट खेलते हुए या रनिंग करते हुए हार्ट अटैक से कम उम्र में मौत की खबरें आम हो गई हैं। वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर दैनिक नवज्योति ने शहर के हृदय रोग विशेषज्ञों से बात की तो सामने आया कि समस्या हमारी फिटनेस एक्टिविटी में नहीं, बल्कि क्षमता से अधिक फिजिकल एक्टिविटी में है। जबकि हमारी उम्र और अभ्यास के अनुसार ही व्यायाम करना चाहिए। नेशनल सेंटर आॅफ  बायोटेक्नोलॉजी इनफॉर्मेशन में प्रकाशित हुई रिसर्च में यह जानकारी सामने आई।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कोरोना के बाद अचानक बढ़ी फिजिकल एक्टिविटी है बड़ा कारण</strong><br />कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल सिंघल ने बताया कि हृदय की नसों में ब्लॉकेज रूपी प्लाक जमना जवानी से ही शुरू हो जाता है। ये नसों में जगह-जगह जमता है और इससे नसों की दीवारों की अंदरूनी सतह में चिकनापन कम होता जाता है और इसमें से खून को प्रवाहित होने में घर्षण उत्पन्न होता है। कोरोना के समय जब फिजिकल ऐक्टिविटी बहुत कम हो गई तो प्लाक जमने की प्रक्रिया तेज हो गई और नसों के रास्ते जगह-जगह खुरदुरे हो गए। ऐसे में अब हमने बिना अभ्यास के अचानक अपनी फिजिकल एक्टिविटी बढ़ा दी है तो व्यायाम के दौरान तेज रक्तप्रवाह के घर्षण की वजह से प्लाक वाली खुरदुरी सतह फट जाती है। हमारी प्लेटलेट्स वहां तुरंत थक्का जमाती हैं और आर्टरी ब्लॉक हो जाती है। यही कारण है कि उससे अचानक हार्ट अटैक होता है। कम उम्र में हार्ट इसके लिए तैयार नहीं होता इसलिए व्यक्ति की तुरंत मौत हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं और जिमिंग, रनिंग या और कोई स्पोर्ट्स एक्टिविटी कर रहे हैं तो धीरे धीरे अपनी क्षमता बढ़ाएं। दिल पर जोर नहीं पड़ेगा और नसों में अंदरूनी घाव होने पर थक्का जमने जैसी स्थिति भी नहीं होगी। <br /><strong>-डॉ. रुद्रदेव पांडेय, कार्डियोलॉजिस्ट</strong></p>
<p style="text-align:justify;">हर ब्लॉकेज खतरनाक नहीं होता। आपके हार्ट की नसों में ब्लॉकेज है और वो खतरनाक स्थिति तक तो नहीं पहुंचा, यह जानने के लिए एफएफआर, आईवीयूएस या ओसीटी की जांच काफी कारगर है। <br /><strong>-डॉ. कुश कुमार भगत, कार्डियोलॉजिस्ट</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><br />40 की उम्र के बाद हार्ट से जुड़ी जांचों की सलाह दी जाती है लेकिन अब बढ़ते मामलों को देखते हुए युवा वर्ग के लोगों के लिए भी जांच आवश्यक है। प्रारंभिक जांच कॉलेज में प्रवेश के तुरंत बाद या 30 वर्ष की आयु से शुरू होनी चाहिए। <br /><strong>-डॉ. देवेन्द्र श्रीमाल, कार्डियोलॉजिस्ट </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Sep 2024 09:44:58 +0530</pubDate>
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                <title>मासूम को ड्यूल चैम्बर पेसमेकर इम्प्लांटेशन से मिली नई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[नारायणा हॉस्पिटल जयपुर में बच्ची के इलाज के लिए एक विशेष टीम बनाई गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/innocent-child-gets-new-life-through-dual-chamber-pacemaker-implantation/article-85589"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(1)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर के प्रताप नगर स्थित निजी अस्पताल में नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया के माध्यम से एक बच्ची में ड्यूल चैम्बर पेसमेकर का इम्प्लांटेशन हुआ और इससे बच्ची को नया जीवन मिला है। बच्ची को जन्मजात हृदय रोग था और कुछ साल पहले ही उसकी ओपन हार्ट सर्जरी हो चुकी थी। बच्ची का वजन भी मात्र 19 किलोग्राम ही था। हाल ही में उसे सांस लेने में कुछ समस्या होने लगी तो परिजन उसे लेकर जयपुर आए।</p>
<p>नारायणा हॉस्पिटल जयपुर में बच्ची के इलिएलाज के  एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी डॉ. प्रशांत महावर, सीनियर कंसलटेंट कार्डियोलॉजी और इलेक्ट्रो फिजियोलॉजी डॉ. विनोद पूनिया और सीनियर एनेस्थेटिक्स शामिल थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jul 2024 11:13:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NIMS Heart and Brain Stroke Center में हुआ प्रोसीजर, 20 मिनट में दिल में छेद का सफल इलाज</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल चौधरी के नेतृत्व में यह प्रक्रिया की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/procedure-done-at-nims-heart-and-brain-stroke-center-successful/article-83565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। निम्स हार्ट एंड ब्रेन हॉस्पिटल ने एक नॉन इनवेसिव तकनीक तकनीक का उपयोग करके एट्रियल सेप्टल दोष यानी एएसडी से पीड़ित 20 वर्षीय रोगी का सफलतापूर्वक इलाज करके महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल चौधरी के नेतृत्व में यह प्रक्रिया की गई है।</p>
<p>चौधरी ने बताया कि यह एक जन्मजात ह्दय दोष है, जिसका इलाज ओपन-हार्ट सर्जरी के माध्यम से किया जाता है, जिसे साधारण शब्दों में दिल में छेद कहा जाता है। इस केस में हमने एक नया तरीका अपनाया है, जिससे इनवेसिव सर्जरी की जरूरत खत्म हो गई है। इस प्रक्रिया में सेप्टल ऑक्लुडर का इस्तेमाल किया गया, जो एक छोटा शर्ट बटन जैसा दिखने वाला उपकरण है, जिसे मरीज के पैर की नस में से गुजरने वाले कैथेटर के जरिए दिल में डाला जाता है। इस तकनीक ने सामान्य एनेस्थीसिया की आवश्यकता के बिनाए केवल 20 मिनट में ह्दय दोष को बंद करना शामिल है। इस नॉन इनवेसिव तकनीक के इस्तेमाल से मरीज को उसी दिन छुट्टी दे दी गई और उसे लगातार मॉनिटर किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jul 2024 10:43:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[जब हम खुश रहते हैं तो हमारे दिल की धड़कनें भी सही अनुपात में रहती हैं और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह तेज होता है, जिससे शरीर तरोताजा महसूस करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/it-is-important-to-keep-the-heart-healthy/article-38532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/site-photo-size-(15)4.jpg" alt=""></a><br /><p>हमारा दिल हर पल धड़कता रहता है, जीवन के आखिरी पलों तक ये सिलसिला लगातार यूं ही चलता रहता है। जिस दिन किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद हो जाता है, उस दिन उसके  जीवन का भी अंत हो जाता है। इसलिए अपने दिल का ख्याल रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि जब तक ये स्वस्थ है तभी तक हम हैं। वर्ल्ड हार्ट डे यानी विश्व हृदय दिवस की शुरुआत वर्ष 2000 में इसीलिए की गई थी, ताकि हृदय रोगों के प्रति लोगों के मन में जागरूकता पैदा की जाए। यदि कोई व्यक्ति अचेत हो जाए तो यह जानने के लिए कि वह जीवित है कि नहीं, सबसे पहले उसके ह्रदय की धड़कनों को और सांसों को ही चेक किया जाता है। जब हम खुश रहते हैं तो हमारे दिल की धड़कनें भी सही अनुपात में रहती हैं और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह तेज होता है, जिससे शरीर तरोताजा महसूस करता है।</p>
<p>दिल हर रोज 1 लाख 15 हजार बार धड़कता है, इसकी एक-एक धड़कन अमूल्य है। एक धड़कन का भी नुकसान, हमारे जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ह्रदय 1 दिन में 7.5 हजार लीटर खून शरीर में पंप करता है और हृदय का वजन लगभग 450 ग्राम होता है, लेकिन पुरुषों का दिल महिलाओं के मुकाबले 60 ग्राम ज्यादा भारी होता है। आंकड़े कहते हैं कि महिलाओं के मुकाबले पुरुष आसानी से हार्टअटैक का शिकार हो जाते हैं। हृदय शरीर की सभी धमनियों तक रक्त पहुंचाता है और इन धमनियों की लंबाई 96 हजार किलोमीटर से ज्यादा होती है। जीवन भर में दिल औसतन ढ़ाई सौ करोड़ बार धड़कता है। शरीर के सभी अंगों तक रक्त पहुंचाने के लिए दिल को लगभग उतनी ही शक्ति लगानी पड़ती है, जितनी शक्ति हमें टेनिस की एक बाल को पूरी तरह दबाने के लिए लगानी पड़ती है, यानी दिल का काम आसान नहीं है, इसलिए हमें अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दिल के स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान देना होगा।</p>
<p>ह्रदय रोग भारत में होने वाली मौतों के सबसे बड़े कारणों में से एक है। इंडियन हॉर्ट एसोसिएशन के मुताबिक भारत में हर साल 17 लाख लोगों की मौत दिल की बीमारियों के कारण होती है, इनमें से 50 प्रतिशत हार्टअटैक उन लोगों को आते हैं, जिनकी उम्र 50 वर्ष से कम होती है जबकि इनमें 25 प्रतिशत लोग 40 वर्ष से कम उम्र के होते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2030 तक भारत में हृदय रोगों की वजह से हर साल ढाई करोड़ लोगों की मृत्यु होने की संभावना है, यानी कोरोना वायरस से भी ज्यादा दिल की बीमारियां खतरनाक हैं। पुराने समय में हृदय रोगों की बीमारियां ज्यादातर उम्र दराज लोगों को ही होती थीं और हार्ट अटैक के शिकार भी ज्यादातर बुजुर्ग ही होते थे, लेकिन आजकल युवा भी बड़ी संख्या में हृदय रोगों के शिकार हो रहे हैं और इसका कारण है, आजकल की आपा-धापी भरी जिंदगी, खाने-पीने की गलत आदतें, शराब और सिगरेट का शौक, जरूरत से ज्यादा तनाव, काम का प्रेशर, रिश्तों में कड़वाहट का होना, डिप्रेशन और एंग्जायटी आदि।</p>
<p>डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक अब 20-39 वर्ष के युवाओं को भी समय-समय पर अपने हृदय की जांच कराते रहना चाहिए। कोरोना महामारी के इस दौर में हृदय रोगों का खतरा और भी बढ़ गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना वायरस के इस दौर में भारत में दिल के मरीजों की संख्या 10-20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि कई मामलों में तो हृदय को पहुंचे नुकसान की भरपाई शरीर कर लेता है, लेकिन कई मामलों में हृदय को हमेशा के लिए नुकसान हो जाता है। इसलिए शरीर में खून पंप करने वाली इस सबसे अहम मशीन दिल की देखभाल की जरूरत अब कोरोना संक्रमण के दौरान और भी बढ़ गई है। एक स्टडी ने भारत में दिल के मरीजों की चिंता को बढ़ा दिया है। स्टडी में 45 से 80 वर्ष की आयु के रोगियों पर अध्ययन किया गया और कोरोना के दिल पर पड़ने वाले असर से जुड़ी समस्याओं को देखा गया। एक स्वस्थ व्यक्ति की सामान्य हृदय गति 60 से 100 बीट्स प्रति मिनट के बीच होती है, लेकिन 7 कोरोना से संक्रमित मरीजों में ह्रदय की अधिकतम गति 42 बीट्स प्रति मिनट और न्यूनतम 30 बीट्स प्रति मिनट थी, जो कि बहुत कम थी। इन सात मरीजों में से पांच को पेसमेकर लगाने की जरूरत पड़ी। कोरोना दिल की मांसपेशियों की सूजन बढ़ा देता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और उनमें खून जमने लगता है। सामान्य मरीजों में सर्दी जुकाम आसानी से ठीक हो जाता है, लेकिन दिल के मरीजों की सांस इस वजह से फूलने लगती है और मौत होने का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना काल में फेफड़े और दिमाग के साथ-साथ दिल के मरीज भी फिलहाल खराब दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन कोरोना का संक्रमण होने पर उन्हें बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले उन्हें तनाव से दूर रहना चाहिए। अपनी सभी दवाएं समय पर लेनी चाहिए, ताजा और गर्म खाना खाएं, रात में 8 घंटे की नींद अवश्य लें, रोज सैर करनी चाहिए और हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए।                     -<strong>रंजना मिश्रा</strong><br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Feb 2023 10:12:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की नेशनल कांफ्रेंस, हार्ट की जटिलताओं और उपचार पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[कांफ्रेंस के आर्गनाइजिंग चेयरमैन व सीनियर कार्डियक प्रोफेसर डॉ. एस.एम. शर्मा ने बताया कि, होटल मैरियट में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में लाइफ स्टाइल, बीपी, शुगर से होने वाली हार्ट डिजीज के साथ साथ हार्ट की विभिन्न जटिलताओं व उनके नवीनतम उपचार पर चर्चा होगी।तमाम हृदय रोगों व इलाज की अत्याधुनिक तकनीकों पर नई जानकारी साझा की जाएंगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/national-conference-in-jaipur-from-24th-on-behalf-of-rajasthan/article-23940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/911.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तेजी से बढ़ते हृदय रोग में इंटरवेंशन प्रोसीजर या नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट में नए एडवांसमेंट पर चर्चा करने के लिए देशभर के नामी हृदय रोग विशेषज्ञ जयपुर में एकत्रित होने जा रहे हैं। कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की राजस्थान शाखा की ओर से आगामी 24 और 25 सितंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस 'राज सीएसआईकॉन 2022' आयोजित की जा रही है जिसमें अलग-अलग राज्यों से 500 से अधिक कार्डियोलॉजिस्ट शामिल होंगे। एसएमएस अस्पताल में हुई प्रेस वार्ता में आयोजकों ने यह जानकारी दी। कांफ्रेंस के आर्गनाइजिंग चेयरमैन व सीनियर कार्डियक प्रोफेसर डॉ. एस.एम. शर्मा ने बताया कि, होटल मैरियट में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में लाइफ स्टाइल, बीपी, शुगर से होने वाली हार्ट डिजीज के साथ साथ हार्ट की विभिन्न जटिलताओं व उनके नवीनतम उपचार पर चर्चा होगी। आयोजन सचिव डॉ. सीबी मीणा ने बताया कि दो दिनों में जन्मजात हृदय रोग, वाल्व की खराबी, बिना ओपन सर्जरी वाल्व रिपलेसमेंट, हार्ट अटैक, हार्ट फैलियर, सडन कार्डियक अरेस्ट, कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसे तमाम हृदय रोगों व इलाज की अत्याधुनिक तकनीकों पर नई जानकारी साझा की जाएंगी। </p>
<p>सीएसआई राज के अध्यक्ष डॉ. एसके कौशिक और एसएमएस मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल व कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. राजीव बगरहट्टा ने जानकारी दी कि विभिन्न सत्रों में हृदय रोगों से संबंधित नए शोधों पर पत्रवाचन, स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज, हार्ट फैलियर, कोलेस्ट्रोल रिस्क, रूमेटिक हार्ट डिजीज, सीएडी, आरएचडी, अरद्मिया आदि पर व्याख्यान होंगे। नए हार्ट स्टेंट, हार्ट डिजीज में नई डिवाइस आदि की जानकारी भी दी जाएगी।  को-आर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि इस दौरान कुछ प्रेजेंटेशन भी दिए जाएंगे जिसमें एक्सपर्ट पैनल द्वारा चर्चा की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/health/national-conference-in-jaipur-from-24th-on-behalf-of-rajasthan/article-23940</link>
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                <pubDate>Thu, 22 Sep 2022 14:33:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ये लक्षण दिखें तो समझ जाइये, दिल में कुछ गड़बड़ है</title>
                                    <description><![CDATA[सीने में जलन के कई कारण होते हैं। एसिडिटी, खाना हजम न होना आदि के कारण भी सीने में जलन होती है और खट्टी डकार आने लगती हैं। लेकिन यह कभी कभार होता है। लेकिन जब यह हार्ट अटैक का सांकेतिक लक्षण हो तो आप महसूस करेंगे कि सीने में सिर्फ जलन का ही एहसास नहीं हो रहा बल्कि कुछ अलग तरह से भी महसूस हो रहा है। इसलिए सीने में असहजता पैदा करने वाली जलन से सावधान रहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/if-you-see-these-symptoms-then-understand-that-there-is/article-18567"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/82.jpg" alt=""></a><br /><p>कहते हैं कोई बीमारी अचानक से नहीं आ धमकती। हर बीमारी आने के पहले कई तरह के संकेत देती हैं। हार्ट अटैक के मामले में भी यही होता है। हार्ट अटैक अचानक नहीं आ जाता, इसके आने के पहले कई तरह के लक्षण दिखते हैं। जब लगे जानलेवा थकान जब हर दिन बिना कुछ खास मेहनत किये भी शरीर में जानलेवा थकान महसूस हो तो समझ जाइये यह मामला महज काम से थकने भर का नहीं है। वास्तव में यह हार्ट अटैक की दस्तक हो सकती है। दरअसल जब हृदय की धमनियां कोलोस्ट्रोल के कारण बंद या संकुचित हो जाती हैं, तब दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और इस कारण हमें बहुत ज्यादा थकान का एहसास होता है। एक उम्र के बाद सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूलना कोई अनोखी बात नहीं है। लेकिन जब महज 10 सीढ़ियां चढ़ने पर ही हम हांफने लगें या आधा किलोमीटर पैदल चलने में भी सांस लेने में बेचैनी महसूस हो, जब लगे कि हमारे सांस लेने का तरीका बदल रहा है, तो समझ जाइये ये महज सांस का मामला नहीं है, इसके तार दिल से जुड़े हो सकते हैं। क्योंकि जब दिल अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाता तो फेफड़ों तक इतनी मात्रा में आॅक्सीजन नहीं पहुंचती जितनी पहुंचनी चाहिए। इसलिए सांस लेने में दिक्कत पैदा होती है। पंजे और टखने में बार-बार सूजन जब शरीर के सभी हिस्सों पर रक्त पहुंचाने के लिए दिल को जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है तो हमारी शिराएं खुल जाती हैं और उनमें रह-रहकर सूजन आने लगती है। यह सूजन आमतौर पर पैर के पंजों और टखने में आती है। कभी कभी होंठों में भी यह सूजन नीली या स्याह पपड़ी के साथ दिखती है। सूजन के ये लक्षण काफी खतरनाक हैं, जब महीने में कम से कम दो से तीन बार ऐसी स्थितियां बन जाएं तो बिना किसी देरी किये डॉक्टर को दिखाएं। जब सीने में हो जलन यह हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण है। सीने में जलन के कई कारण होते हैं। एसिडिटी, खाना हजम न होना आदि के कारण भी सीने में जलन होती है और खट्टी डकार आने लगती हैं। लेकिन यह कभी कभार होता है। लेकिन जब यह हार्ट अटैक का सांकेतिक लक्षण हो तो आप महसूस करेंगे कि सीने में सिर्फ जलन का ही एहसास नहीं हो रहा बल्कि कुछ अलग तरह से भी महसूस हो रहा है। इसलिए सीने में असहजता पैदा करने वाली जलन से सावधान रहिए। जब लगातार सर्दी लगे सर्दी हर किसी को लगती है। लेकिन शरीर का एक तरीका है कि एक स्थिति के बाद वह इसे मैनेज कर लेता है। लेकिन जब लगातार सर्दी लगे। कंट्रोल ही न आती लग रही हो तो यह दिल के दौरे का संकेत हो सकता है। जब दिल हर जगह शरीर में रक्त संचार को सुनिश्चित नहीं कर पाता तो शरीर में कंपकपी के साथ ठंड लगती है और कई बार कंपकपी भी नहीं होती लेकिन हल्की हल्की ठंड का एहसास होता रहता है। निश्चित रूप से ये फेफड़ों की समस्या है और ऐसा महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Aug 2022 14:21:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हीरोगिरी से भरा मन, अब विलेन-खलनायक बनना चाहते हैं रणबीर कपूर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। बॉलीवुड के रॉकस्टार रणबीर कपूर फिल्मों में खलनायक बनना चाहते हैं। रणबीर कपूर ने कहा, किसी फिल्म में जितना महत्वपूर्ण किरदार हीरो का होता है उससे कहीं ज्यादा खलनायक का होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/-heart-full-of-heroism--now-ranbir-kapoor-wants-to-be-a-villain/article-13523"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/ranbeer-kapoor-new.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड के रॉकस्टार रणबीर कपूर फिल्मों में खलनायक बनना चाहते हैं। रणबीर कपूर ने कहा, किसी फिल्म में जितना महत्वपूर्ण किरदार हीरो का होता है उससे कहीं ज्यादा खलनायक का होता है। फिल्म में हीरो को अपनी हीरोगिरी दिखाने के लिए खलनायक का  होना जरुरी है। यदि खलनायक नहीं होगा तो हीरो, हीरो कैसे होगा। हमारी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई खलनायक हैं, जिन्होंने हीरोज को भी पीछे छोड़ दिया।<br /><br />रणबीर कपूर ने कहा, ''शोले'' में गब्बर जय वीरु से भी ज्यादा फेमस हुए। 'मिस्टर इंडिया' के मोगेंबो ने सारी लाइमलाइट खीच ली थी। वहीं 'अग्निपथ' में कांचा चीना सबपर भारी पड़ गया। फिल्म इंडस्ट्री में अब हीरोज विलन के रोल में भी धूम मचा रहे हैं। इसका बेस्ट एग्जांपल हैं, संजय दत्त जो अब शमशेरा में भी विलन का रोल निभा रहे हैं। मेरी भी ख्वाहिश है कि मैं भी कभी विलन का रोल करूं और लोग अपने बच्चों से कहें कि सो जा बेटा नहीं तो रणवीर आ जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Jul 2022 16:29:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुम्बई ने तोड़ा दिल्ली का दिल, आईपीएल के अपने आखिरी मैच में दिल्ली को पांच विकेट से हराया, भाग्य के सहारे आरसीबी प्लेऑफ में</title>
                                    <description><![CDATA[टिम डेविड ने खेली मैच जिताऊ पारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/sports-news--mumbai-broke-delhi-s-heart--beat-delhi-by-five-wickets-in-their-last-match-of-ipl--rcb-in-playoff-with-the-help-of-luck/article-10214"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/team-devid_new.jpg" alt=""></a><br /><p>मुम्बई। टिम डेविड के 11 गेंदों पर 2 चौके और चार छक्के सहित बनाए आतिशी 34 रनों की बदौलत मुम्बई इंडियंस ने शनिवार को आईपीएल के अपने आखिरी मैच में दिल्ली को पांच विकेट से पराजित कर दिया। मुम्बई की इस जीत से जहां दिल्ली का प्लेऑफ का सपना टूट गया, वहीं भाग्य के सहारे रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 16 अंकों के साथ प्लेऑफ में पहुंच गई। दिल्ली ने 14 मैचों में 14 अंकों के साथ अपना सफर समाप्त किया। जबकि मुम्बई की टीम 14 मैचों में 8 अंकों के साथ तालिका में आखिरी स्थान पर रही। मैच में  दिल्ली ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 159 रन बनाए। मुम्बई ने 19.1 ओवर में 5 विकेट पर 160 रन बना आईपीएल से जीत के साथ विदाई ली।</p>
<table style="width:655px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:651px;" colspan="5"><strong>स्कोर बोर्ड</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">दिल्ली कैपिटल्स पारी:    </td>
<td style="width:69.3667px;">रन</td>
<td style="width:61.6333px;">गेंद</td>
<td style="width:56px;">4</td>
<td style="width:56px;">6</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">पृथ्वी को. इशान बो. बुमराह  </td>
<td style="width:69.3667px;">24</td>
<td style="width:61.6333px;">23</td>
<td style="width:56px;">2</td>
<td style="width:56px;">1</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">वार्नर को. बुमराह बो. सैम्स </td>
<td style="width:69.3667px;">5</td>
<td style="width:61.6333px;">6</td>
<td style="width:56px;">1</td>
<td style="width:56px;">0</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">मिचेल मार्श को. रोहित बो. बुमराह </td>
<td style="width:69.3667px;">0</td>
<td style="width:61.6333px;">1</td>
<td style="width:56px;">0</td>
<td style="width:56px;">0</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">पन्त को. इशान बो. रमनदीप  </td>
<td style="width:69.3667px;">39</td>
<td style="width:61.6333px;">33</td>
<td style="width:56px;">4</td>
<td style="width:56px;">1</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">सरफराज को. इशान बो. मार्कंडे  </td>
<td style="width:69.3667px;">10</td>
<td style="width:61.6333px;">7</td>
<td style="width:56px;">0</td>
<td style="width:56px;">1</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">पावेल बो. बुमराह   </td>
<td style="width:69.3667px;">43</td>
<td style="width:61.6333px;">34</td>
<td style="width:56px;">1</td>
<td style="width:56px;">4</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">अक्षर पटेल अविजित   </td>
<td style="width:69.3667px;">19</td>
<td style="width:61.6333px;">10</td>
<td style="width:56px;">0</td>
<td style="width:56px;">2</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">शार्दुल को. वार्नर बो. रमनदीप  </td>
<td style="width:69.3667px;">4</td>
<td style="width:61.6333px;">5</td>
<td style="width:56px;">0</td>
<td style="width:56px;">0</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;">कुलदीप यादव अविजित    1    1    0    0</td>
<td style="width:69.3667px;">1</td>
<td style="width:61.6333px;">1</td>
<td style="width:56px;">0</td>
<td style="width:56px;">0</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;" colspan="5">अतिरिक्त :     14</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;" colspan="5">कुल : 20 ओवर में 7 विकेट पर 159 रन।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;" colspan="5">विकेट पतन : 1-21 (वार्नर), 2-22 (मिचेल मार्श), 3-31 (पृथ्वी शॉ), 4-50 (सरफराज), 5-125 (रिषभ पंत), 6-143 (रोवमैन पावेल), 7-151 (शार्दुल ठाकुर).</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:408px;" colspan="5">गेंदबाजी : सैम्स 4-0-30-1, रितिक 4-0-34-0, बुमराह 4-0-25-3, मयंक मार्कंडे 4-0-26-1, मेरेडिथ 2-0-9-0, रमनदीप 2-0-29-2.</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:703px;" colspan="5"><strong>स्कोर बोर्ड:</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;">मुम्बई इंडियंस पारी:  </td>
<td style="width:76.0833px;">रन</td>
<td style="width:64.9167px;">गेंद</td>
<td style="width:62px;">4</td>
<td style="width:62px;">6</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;">रोहित को. ठाकुर बो. नॉर्त्जे</td>
<td style="width:76.0833px;">2</td>
<td style="width:64.9167px;">13</td>
<td style="width:62px;">0</td>
<td style="width:62px;">0</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;">इशान को. वार्नर बो. कुलदीप   </td>
<td style="width:76.0833px;">48</td>
<td style="width:64.9167px;">35</td>
<td style="width:62px;">3</td>
<td style="width:62px;">4</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;">डेवाल्ड बो. ठाकुर    </td>
<td style="width:76.0833px;">37</td>
<td style="width:64.9167px;">33</td>
<td style="width:62px;">1</td>
<td style="width:62px;">3</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;">तिलक वर्मा को. पंत बो. नॉर्त्जे   </td>
<td style="width:76.0833px;">21</td>
<td style="width:64.9167px;">17</td>
<td style="width:62px;">1</td>
<td style="width:62px;">1</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;">टिम डेविड को. शॉ बो. ठाकुर   </td>
<td style="width:76.0833px;">34</td>
<td style="width:64.9167px;">11</td>
<td style="width:62px;">2</td>
<td style="width:62px;">4</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;">रमनदीप अविजित  </td>
<td style="width:76.0833px;">13</td>
<td style="width:64.9167px;">6</td>
<td style="width:62px;">2</td>
<td style="width:62px;">0</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;">डेनियल सैम्स अविजित </td>
<td style="width:76.0833px;">0</td>
<td style="width:64.9167px;">1</td>
<td style="width:62px;">0</td>
<td style="width:62px;">0</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;" colspan="5">अतिरिक्त :     5</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;" colspan="5">कुल : 19.1 ओवर में 5 विकेट पर 160 रन।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;" colspan="5">विकेट पतन : 1-25 (रोहित), 2-76 (इशान), 3-95 ( ब्रेविस), 4-145 (टिम डेविड), 5-155 (तिलक).</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;" colspan="5">गेंदबाजी : खलील 3.1-0-24-0, एनरिच नॉर्त्जे 4-0-37-2, शार्दुल 3-0-32-2, मिचेल मार्श 2-0-7-0, कुलदीप 4-0-33-1, पटेल 3-0-26-0.</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:438px;" colspan="5">प्लेयर ऑफ द मैच : जसप्रीत बुमराह</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table>
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;" colspan="6"><strong>आईपीएल  अंक तालिका</strong></td>
</tr>
<tr>
<td>टीम   </td>
<td>मैच    </td>
<td>जीते    </td>
<td>हारे   </td>
<td>अंक    </td>
<td>रन रेट</td>
</tr>
<tr>
<td>गुजरात टाइटंस     </td>
<td>14</td>
<td>10</td>
<td>4</td>
<td>20</td>
<td>+0.316</td>
</tr>
<tr>
<td>राजस्थान रॉयल्स     </td>
<td>14</td>
<td>9</td>
<td>5</td>
<td>18</td>
<td>+0.298</td>
</tr>
<tr>
<td>लखनऊ जायंट्स    </td>
<td>14</td>
<td>9</td>
<td>5</td>
<td>18</td>
<td>+0.251</td>
</tr>
<tr>
<td>आरसीबी    </td>
<td>14</td>
<td>8</td>
<td>6</td>
<td>16</td>
<td>-0.253</td>
</tr>
<tr>
<td>दिल्ली कैपिटल्स     </td>
<td>14</td>
<td>7</td>
<td>7</td>
<td>14</td>
<td>+0.204</td>
</tr>
<tr>
<td>केकेआर    </td>
<td>14</td>
<td>6</td>
<td>8</td>
<td>12</td>
<td>+0.146</td>
</tr>
<tr>
<td>पंजाब किंग्स  </td>
<td>14</td>
<td>6</td>
<td>7</td>
<td>12</td>
<td>-0.043</td>
</tr>
<tr>
<td>हैदराबाद    </td>
<td>13</td>
<td>6</td>
<td>7</td>
<td>12</td>
<td>-0.230</td>
</tr>
<tr>
<td>सीएसके   </td>
<td>14</td>
<td>4</td>
<td>10</td>
<td>8</td>
<td>-0.203</td>
</tr>
<tr>
<td>मुंबई इंडियंस    </td>
<td>14</td>
<td>4</td>
<td>10</td>
<td>8</td>
<td>-0.506</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><br /><br /><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 May 2022 12:33:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर में धड़केगा गुड़गांव निवासी 25 वर्षीय युवक का दिल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के 10वा हार्ट ट्रांसप्लांट की  तैयारी हुई शुरू      ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--heart-of-25-year-old-youth-resident-of-gurgaon-will-beat-in-jaipur--air-ambulance-from-private-hospital-in-gurgaon-to-eternal-hospital-jaipur-heart-came--preparation-for-the-state-s-10th-heart-transplant-started/article-6940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/untitled-design-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश की राजधानी जयपुर एक बार फिर चिकित्सा के क्षेत्र में इतिहास रचने की तैयारी कर रही है। दरअसल जयपुर के जवाहर सर्किल स्थित एक निजी अस्पताल में गुड़गांव से एयर एम्बुलेंस के जरिए 25 वर्षीय ब्रेन डेडयुवक का हार्ट आया है। जिसे अस्पताल में जरूरत मंद मरीज को लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।</p>
<p><br /> 25 साल के भूपेंद्र गुड़गांव में सड़क दुर्घटना से ब्रेन डेड हो गए थे। ऐसे में जयपुर के इटर्नल हॉस्पिटल में हार्ट को आज सुबह भेजा गया है। राजस्थान में पहली बार एयर एम्बुलेंस से ट्रांसप्लांट के लिए जयपुर आया है। इससे पहले जयपुर से हार्ट अन्य शहरों में भेजा गया था। इसके लिये ट्रैफिक पुलिस जयपुर ने ग्रीन कॉरिडोर बना सिर्फ 3 मिनिट में T2 व्हीकल गेट से EHCC हॉस्पिटल में हार्ट पहुंचाया। सीनियर कार्डियक सर्जन डॉ. अजीत बाना के नेतृत्व में अब अस्पताल में हार्ट  ट्रांसप्लांट हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--heart-of-25-year-old-youth-resident-of-gurgaon-will-beat-in-jaipur--air-ambulance-from-private-hospital-in-gurgaon-to-eternal-hospital-jaipur-heart-came--preparation-for-the-state-s-10th-heart-transplant-started/article-6940</link>
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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 14:13:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल के दौरे की भविष्यवाणी में होगी मदद : वैज्ञानिकों</title>
                                    <description><![CDATA[एक हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस ऐसे उपकरण बनाने का दावा किया है, जो किसी व्यक्ति में दिल का दौरा पड़ने की संभावना का अनुमान लगा सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/will-help-in-predicting-heart-attacks--scientists/article-6690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/heart-attack.jpg" alt=""></a><br /><p>आधुनिक युग में व्यस्ततम दिनचर्या की वजह से दिल के मरीजों की संख्या में लगातार बढ रही है। एक हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस ऐसे उपकरण बनाने का दावा किया है, जो किसी व्यक्ति में दिल का दौरा पड़ने की संभावना का अनुमान लगा सकता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष द लैंसेट डिजिटल हेल्थ में प्रकाशित हुए हैं। जांचकर्ताओं द्वारा निर्मित उपकरण ने हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में प्लाक की मात्रा और संरचना के आधार पर सटीक भविष्यवाणी की कि कौन से रोगियों को पांच वर्षों में दिल का दौरा पड़ेगा। सीडर.सिनाई में बायोमेडिकल इमेजिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट में मात्रात्मक छवि विश्लेषण प्रयोगशाला की निदेशक और अध्ययन की वरिष्ठ लेखक दामिनी डे और उनके सहयोगियों ने विश्लेषण किया। जांचकर्ताओं ने 921 लोगों से कोरोनरी सीटी, छवियों से सीखकर पट्टिका को मापने के लिए एआई एल्गोरिदम को प्रशिक्षित किया, जिसका पहले से ही प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा विश्लेषण किया गया था।  जांचकर्ताओं ने पाया कि उपकरण का माप कोरोनरी सीटी में देखी गई पट्टिका मात्रा के अनुरूप है। उन्होंने कोरोनरी धमनी पट्टिका और संकुचन का आकलन करने में अत्यधिक सटीक माने जाने वाले दो परीक्षणों इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड और कैथेटर.आधारित कोरोनरी एंजियोग्राफी द्वारा ली गई छवियों के साथ परिणामों का मिलान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Mar 2022 11:39:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों का कमाल : बिना हड्डी काटे छह साल के बच्चे के दिल में छेद का किया सफल ऑपरेशन, टोसिंग बिंग नामक बीमारी से ग्रसित था</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चे को टोसिंग बिंग यानि दिल में छेद की समस्या जन्म से ही थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amazing-of-doctors-of-sms-hospital--successful-operation-of-hole-in-the-heart-of-six-year-old-child-without-cutting-bone--was-suffering-from-a-disease-called-tossing-binge/article-4649"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/13.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। एसएमएस अस्पताल के कार्डियो थोरेसिक विभाग के चिकित्सकों ने एक छह साल के बच्चे के दिल में छेद की विकृति का बिना छाती की हड्डी काटे सफल ऑपरेशन किया है। बच्चे को टोसिंग बिंग यानि दिल में छेद की समस्या जन्म से ही थी। सामान्यतया ओपन हार्ट सर्जरी छाती की हड्डी (स्टर्नम) को काट कर की जाती है लेकिन इस केस में छाती में बांयी तरफ  छोटे से चीरे के जरिए बिना छाती की हड्डी काटे सर्जरी की गई है। विभाग के चिकित्सकों ने दावा किया है कि यह सर्जरी अपने आप में विश्व की पहली सर्जरी है और इसका मेडिकल जर्नल्स में अभी तक उल्लेख नहीं हैं।<br /><br /><strong>एक ही छोटे से चीरे से सर्जरी के फायदे</strong><br />    यह सर्जरी पारम्परिक उपकरणों से की जा सकती है और इसके लिए बहुत ज्यादा खर्चे और विशिष्ट उपकरणों की आवश्यकता नहीं है।<br />    बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम।<br />    सर्जरी के दौरान कम खून की आवश्यकता।<br />    छाती की हड्डी काटने से होने वाले इन्फेक्शन का कोई खतरा नहीं।<br />    जांघ में कोई अतिरिक्त चीरा नहीं लगाना पड़ता।<br />    मिनिमल इनवेसिव सर्जरी के दौरान जांघ में केन्युलेशन से होने वाले दुष्परिणामों से मुक्ति और पैरों में रक्त अवरोध से होने वाले नुकसान का कोई खतरा नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 14:35:18 +0530</pubDate>
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