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                <title>Global Security - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Global Security RSS Feed</description>
                
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                <title>राहुल गांधी ने दी ट्रंप की 'सभ्यता के अंत' वाली टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया : परमाणु खतरों को बताया अस्वीकार्य, हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं</title>
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                        <![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान पर "सभ्यता खत्म करने" वाली धमकी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि आधुनिक दुनिया में ऐसी भाषा की कोई जगह नहीं है। गांधी ने वैश्विक शक्तियों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने का आह्वान किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-gave-a-sharp-reaction-to-trumps-comment-about/article-149500"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gndhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सभ्यता के विनाश की बात करने वाले उनके बयान की आलोचना की और वैश्विक चर्चा में परमाणु खतरों के सामान्यीकरण के खिलाफ चेतावनी दी। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने एक कड़े बयान में कहा, "युद्ध दुखद होते हैं, फिर भी वे एक वास्तविकता हैं। सभ्यता के अंत की कल्पना करने वाली कोई भी भाषा या कार्रवाई आधुनिक दुनिया में अस्वीकार्य है।"</p>
<p>उनकी टिप्पणियों को व्यापक रूप से ट्रंप के हालिया पोस्ट का खंडन माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरानी सभ्यता के संभावित "समाप्ति" का जिक्र किया था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक नेताओं और पर्यवेक्षकों से चिंता और आलोचना को जन्म दिया है। राहुल गांधी ने वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ती बयानबाजी के खतरों पर विशेष बल दिया, खासकर जब बात परमाणु क्षमताओं से जुड़ी हो। उन्होंने कहा, "परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।" उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के मामलों में संयम और जिम्मेदार भागीदारी की वकालत करने वाले भारत के दीर्घकालिक रुख को दोहराया।</p>
<p>उनकी यह टिप्पणी बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और परमाणु प्रतिरोध तथा सैन्य प्रदर्शन पर नए सिरे से शुरू हुई बहसों के बीच आई है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से परमाणु हथियारों के "पहले इस्तेमाल न करने" के सिद्धांत का पालन किया है और लगातार वैश्विक निरस्त्रीकरण का आह्वान किया है। राहुल गांधी का बयान इस व्यापक नीतिगत ढांचे के अनुरूप है, जो इस चिंता को दर्शाता है कि प्रभावशाली नेताओं की आक्रामक बयानबाजी परमाणु संयम की दिशा में दशकों से किए जा रहे प्रयासों को कमजोर कर सकती है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 14:07:35 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>प्रमोद तिवारी ने किया अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम का स्वागत: स्थायी शांति की अपील, विश्व शांति के लिए एक सकारात्मक कदम</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 15 दिवसीय युद्धविराम का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद को चुने जाने और इसमें चीन की भूमिका पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती बताते हुए स्थायी शांति की प्रार्थना की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pramod-tiwari-welcomed-the-ceasefire-between-america-and-iran-appealed/article-149493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pramod-tiwari.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस राज्यसभा सांसद और उप नेता प्रमोद तिवारी ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय विश्व शांति के लिए एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने बुधवार को ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी पक्षों को सद्बुद्धि मिले और यह 15 दिनों का अस्थायी युद्धविराम स्थायी शांति समझौते में परिवर्तित हो। प्रमोद तिवारी ने कहा एक भारतीय होने के नाते उन्हें यह पीड़ा भी है कि आगे की शांति वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित है, जिसमें चीन की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। उनके अनुसार, यह स्थिति भारत की कूटनीतिक एवं राजनीतिक दृष्टि सेचिंताजनक है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम को लेकर सहमति बनी है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 10:56:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>क्या 48 घंटों में अमेरिका-ईरान में होने जा रहा सीजफायर? 45-दिनों के संभावित संघर्ष-विराम की शर्तों पर होगी चर्चा, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग तेज </title>
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                        <![CDATA[ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच संघर्ष टालने के लिए दो-चरणीय योजना पर बातचीत जारी है। इसके तहत 45 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव है, ताकि 'होर्मुज जलडमरूमध्य' और परमाणु मुद्दों पर स्थायी समाधान निकल सके। हालांकि तनाव बरकरार है, लेकिन मध्यस्थों के जरिए विश्वास बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि युद्ध को समाप्त किया जा सके।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-there-going-to-be-a-ceasefire-between-america-and/article-149225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-casefire.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ संघर्ष को सुलझाने के लिए बनाई गयी दो-चरणों वाली योजना के पहले चरण के तौर पर 45 दिनों के संभावित युद्धविराम की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं।अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ट्रंप प्रशासन ने हाल के दिनों में ईरान के सामने कई प्रस्ताव रखे थे, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने अभी तक उनमें से किसी को भी स्वीकार नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक अगले 48 घंटों के भीतर दोनों पक्षों के बीच किसी समझौते की संभावना कम है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले सोशल मीडिया पर ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पुलों को मंगलवार को नष्ट करने की धमकी दी है और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक दो-चरणों वाले समझौते पर फिलहाल चर्चा चल रही है। पहले चरण में 45 दिनों का युद्धविराम शामिल है, जिसके दौरान अंतिम शांति की शर्तों पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों ने कहा कि यदि पक्षों को बातचीत के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है, तो इस युद्धविराम को बढ़ाया भी जा सकता है। दूसरे चरण में युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप देना शामिल है।</p>
<p>सूत्रों के हवाले से कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने और ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होने जैसे मुद्दों को केवल एक अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ही सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा मध्यस्थ अमेरिका के लिए विश्वास-बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं और उन कदमों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें अमेरिका ईरान की कुछ मांगों को पूरा करने के लिए उठा सकता है। उधर, ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत कर रहा है और मंगलवार तक कोई समझौता हो सकता है। उन्होंने पहले कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक बातचीत हुई है।</p>
<p>वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने सीधे बातचीत से इनकार कर दिया था, लेकिन कहा था कि ईरान को मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका की ओर से संदेश मिले हैं कि वह संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करना चाहता है। गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में कई ठिकानों पर हमले शुरू किये थे, जिसमें तेहरान भी शामिल है। वहीं जवाबी कार्रवाई में ईरान इज़रायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 14:29:10 +0530</pubDate>
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                <title>यूरी चेर्निचुक का बड़ा बयान: बोले-संयंत्र की सुविधाओं पर युद्ध के प्रभाव के कारण ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र में स्थिति लगातार तनावपूर्ण </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[यूक्रेनी हमलों के कारण ज़ापोरोज़े परमाणु संयंत्र की मुख्य बिजली लाइन 'नीप्रोव्स्काया' क्षतिग्रस्त हो गई है। संयंत्र निदेशक यूरी चेर्निचुक ने स्थिति को 'अत्यंत तनावपूर्ण' बताया है। वर्तमान में प्लांट केवल एक बैकअप लाइन और डीजल जनरेटर पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सहयोग से मरम्मत के लिए 'शांति मोड' स्थापित करने के प्रयास जारी हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/yuri-chernichuks-big-statement-said-that-the-situation-at-the/article-149229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/zaporizhzhya-nuclear-power-plant.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निदेशक यूरी चेर्निचुक ने कहा है कि संयंत्र की सुविधाओं और शहर पर युद्ध के प्रभाव के कारण वहां की स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। संयंत्र की प्रवक्ता येवगेनिया याशिना ने शुक्रवार को बताया था कि पिछले दो हफ्तों में ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र और एनरगोदर के पास के क्षेत्र में यूक्रेन के सशस्त्र बलों के हमलों की तीव्रता में काफी वृद्धि हुई है। रोसाटॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेक्सी लिखाचेव ने रविवार को कहा कि पिछले कुछ दिनों में संयंत्र क्षेत्र पर कोई हमला नहीं हुआ है, लेकिन स्टेशन के अनुषंगी शहर एनरगोदर पर हमले हुए हैं। 'नीप्रोव्स्काया' लाइन के माध्यम से संयंत्र को मिलने वाली विद्युत आपूर्ति एक संवेदनशील स्थान - पानी के ऊपर - से कट गयी है, जिससे मरम्मत के समय का पूर्वानुमान लगाना कठिन हो गया है।</p>
<p>चेर्निचुक ने स्पूतनिक से कहा, “ दुर्भाग्य से, हमने समस्या का समाधान करने के लिये एक ऐसा तरीका निकाला है, जो पूरी तरह से सामान्य नहीं है, लेकिन फिर भी निरंतर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। यह स्वाभाविक रूप से युद्ध की तीव्रता, औद्योगिक क्षेत्र में संयंत्र की सुविधाओं, शहर और शहर की सार्वजनिक सेवाओं पर गोलाबारी के कारण है। ” संयंत्र के निदेशक ने बताया कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सहयोग से ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र की उच्च-वोल्टेज विद्युत लाइनों में से एक की मरम्मत के लिए ‘शांति’ (गोलाबारी रोकने) स्थापित करने का कार्य चल रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 24 मार्च को यूक्रेन के लड़ाकों के हमलों की वजह से संयंत्र की दो उच्च-वोल्टेज लाइनों में से एक ‘नीप्रोव्स्काया’ लाइन क्षतिग्रस्त होकर निष्क्रिय हो गयी थी, इसलिए वर्तमान में संयंत्र को केवल एक लाइन ‘फेरोस्प्लावनया’ के माध्यम से बिजली मिल रही है।<br />चेर्निचुक ने बताया, “ वर्तमान में बाहरी बिजली का मुख्य स्रोत 'फेरोस्प्लावनया' लाइन है। हमारे पास डीजल जनरेटर के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है, और हम वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ छठे ‘शांति मोड’ को स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि तकनीशियन लाइन की मरम्मत कर सकें। ” उन्होंने कहा कि संयंत्र में वैकल्पिक डीजल जनरेटर चालू हालत में हैं और आवश्यकता पड़ने पर इसे सुरक्षित रखने के लिए डीजल ईंधन की आपूर्ति पर्याप्त है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 13:39:25 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>वॉर या नो वॉर...क्या खत्म होगी जंग? ट्रंप के संबोधन से पहले तेज हुई कूटनीतिक हलचल, 2 अप्रैल को करेंगे राष्ट्र को संबोधित</title>
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                        <![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें ईरान संघर्ष समाप्ति की बड़ी घोषणा संभव है। चीन और पाकिस्तान ने शांति के लिए पांच सूत्रीय फार्मूला पेश किया है, जिसमें तत्काल युद्धविराम और समुद्री सुरक्षा पर जोर दिया गया है। तेहरान ने भी बातचीत के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में शांति की उम्मीद जागी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/war-or-no-war-is-us-president-trump-going-to/article-148764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दुनिया की नजरें अब डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित संबोधन पर टिकी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें जारी सैन्य टकराव को समाप्त करने से जुड़ी अहम घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है। ट्रंप के द्वारा दिए गए हाल के बयानों से संकेत मिल रहा है कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अब उसके लिए निर्णायक मुद्दा नहीं रही।</p>
<p>इसी बीच कूटनीतिक मोर्चे पर चीन और पाकिस्तान ने 31 मार्च को बीजिंग में साझा पहल पेश कर शांति की नई राह सुझाई है। इस पहल को इशाक डार और वांग यी ने आगे बढ़ाया, जिसमें पांच सूत्रों के जरिए तत्काल युद्धविराम और संवाद की बहाली पर जोर दिया गया है। प्रस्ताव में नागरिक ढांचे पर हमले रोकने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समाधान तलाशने की बात प्रमुख है।</p>
<p>हालांकि ईरान ने पाकिस्तान की प्रत्यक्ष मध्यस्थता पर आपत्ति जताई है, लेकिन क्षेत्र में शांति स्थापित करने की अपील का समर्थन किया है। तेहरान का यह रुख संकेत देता है कि वह बातचीत के पक्ष में है, पर मध्यस्थ की भूमिका को लेकर सतर्क रणनीति अपना रहा है। अब वैश्विक समुदाय की निगाहें ट्रंप के संबोधन पर टिकी हैं—क्या वे चीन-पाकिस्तान की पहल को स्वीकार करेंगे या अपनी शर्तों के साथ इस संघर्ष के अंत की घोषणा करेंगे।</p>]]>
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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:12:02 +0530</pubDate>
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                <title>दुबई पोर्ट पर खड़े कुवैती तेल टैंकर पर ईरानी ड्रोन हमला: 24 कर्मचारियों को सुरक्षित बचाया, समुद्र में तेल रिसाव का बढ़ा खतरा </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दुबई के पास कुवैती टैंकर 'अल-सलमी' पर ईरानी ड्रोन हमले से भीषण आग लग गई। गनीमत रही कि सभी 24 क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। इस हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के बीच अमेरिकी कच्चा तेल $116 के पार पहुंच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-drone-attack-on-kuwaiti-oil-tanker-near-dubai-24/article-148569"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/irani-oil-tanker.png" alt=""></a><br /><p>दुबई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में दुबई के समुद्री क्षेत्र में लंगर डाले एक कुवैती तेल टैंकर पर मंगलवार को ईरानी ड्रोन से हमला किया गया। इससे जहाज पर भीषण आग लग गई लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ न ही तेल रिसाव की कोई रिपोर्ट है। ब्रिटिश सैन्य निगरानी एजेंसी 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस' के अनुसार, 'अल-सलमी' नामक इस टैंकर को दुबई से लगभग 31 समुद्री मील उत्तर-पश्चिम में निशाना बनाया गया। दुबई की आपातकालीन टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए टैंकर पर लगी आग को बुझा दिया और चालक दल के सभी 24 सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।</p>
<p>कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने भी मीडिया के माध्यम से इस हमले की पुष्टि की है और संभावित पर्यावरणीय जोखिमों के प्रति आगाह किया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का हवाई अभियान पिछले एक महीने से जारी है, जिसके कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को पूरी तरह से नहीं खोला गया, तो वे ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाएंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि कूटनीतिक प्रयासों के बीच क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ाई जा रही है ताकि "अधिकतम विकल्प" खुले रहें।</p>
<p>उधर ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप द्वारा दी गई 15-सूत्रीय योजना और अमेरिकी मांगों को "अत्यधिक, अवास्तविक और अनुचित" बताते हुए कड़ी आलोचना की है। इस ताजा हमले और बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया, जहाँ अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत जुलाई 2022 के बाद पहली बार 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। फिलहाल, दुबई की टीमें जहाज को हुए नुकसान के आकलन में जुटी हुई हैं।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:26:09 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान पर शिकंजा: यूरोपीय संघ परिषद ने मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर ईरान पर लगे प्रतिबंधों को बढ़ाया, दूरसंचार निगरानी उपकरणों के निर्यात पर प्रतिबंध शामिल</title>
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                        <![CDATA[यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के चलते प्रतिबंधों को 13 अप्रैल 2027 तक बढ़ा दिया है। इन उपायों में संपत्ति फ्रीज करना, यात्रा प्रतिबंध और दूरसंचार निगरानी उपकरणों के निर्यात पर रोक शामिल है। यह कार्रवाई 2011 से जारी प्रतिबंधात्मक नीति का हिस्सा है, जिसे हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद और सख्त किया गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-council-extends-sanctions-on-iran-over-human-rights-violations/article-148539"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/eu.png" alt=""></a><br /><p>ब्रसेल्स। यूरोपीय संघ (ईयू) ने कथित मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनाें को लेकर ईरान पर लगे प्रतिबंधों को 13 अप्रैल, 2027 तक बढ़ा दिया है। यूरोपीय संघ परिषद ने यह जानकारी दी। परिषद ने सोमवार को एक बयान में कहा, "परिषद ने आज ईरान में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के जवाब में यूरोपीय संघ के प्रतिबंधात्मक उपायों को 13 अप्रैल 2027 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।"</p>
<p>बयान के अनुसार, इन उपायों में ईयू में प्रवेश पर प्रतिबंध और संपत्ति को फ्रीज करना, साथ ही ईरान को दूरसंचार निगरानी उपकरणों के निर्यात पर प्रतिबंध शामिल है। इसमें ईयू के नागरिकों और कंपनियों को प्रतिबंध सूची में शामिल व्यक्तियों और संस्थाओं को धन उपलब्ध कराने से भी प्रतिबंधित किया गया है।</p>
<p>ईयू ने 2011 में ईरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाना शुरू किया था और तब से हर साल प्रतिबंधों को बढाया जाता है। इस बार, प्रतिबंधों के विस्तार का कारण हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान ईरान द्वारा कथित मानवाधिकार उल्लंघन बताया गया है।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 13:24:07 +0530</pubDate>
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                <title>पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार का दावा: अमेरिका, ईरान के बीच वार्ता की मध्यस्थता करने के लिए तैयार है पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की भी हो सकते हैं शामिल</title>
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                        <![CDATA[पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की है कि उनका देश ईरान और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक वार्ता की मेजबानी करेगा। सऊदी अरब और तुर्की के समर्थन से यह कूटनीतिक प्रयास बढ़ते सैन्य तनाव और तेल संकट के बीच शुरू हुआ है। दोनों देशों के साथ अच्छे संबंधों के कारण पाकिस्तान इस जटिल संघर्ष में मुख्य मध्यस्थ बनकर उभरा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistani-foreign-minister-ishaq-dar-claims-america-is-ready-to/article-148465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/isak-dar.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान जल्द ही ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता वार्ता की मेज़बानी करने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने रविवार को इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इसको लेकर मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की के शीर्ष राजनयिकों के साथ बातचीत हुई है। ये बातचीत ऐसे समय में हुई जब ईरान ने अमेरिका को ज़मीनी हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी थी और अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी जंग के चलते वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।</p>
<p>इशाक डार ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत सीधी होगी या परोक्ष, या यह कब और कहाँ होगी लेकिन उन्होंने कहा कि यह आने वाले दिनों में होगी। पाकिस्तानी विदेश मंत्री के दावों के बाद अमेरिका या ईरान, किसी ने भी तत्काल कोई टिप्पणी जारी नहीं की। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान बहुत खुश है कि ईरान और अमेरिका दोनों ने बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अपना भरोसा जताया है, जो आने वाले दिनों में होगी।</p>
<p>राजनयिकों से मुलाक़ात के बाद इशाक डार ने दावा किया कि उन्होंने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का सक्रिय रूप से समर्थन किया है और पाकिस्तान से अपील की है कि वह शामिल पक्षों के बीच व्यवस्थित बातचीत के लिए माहौल तैयार करे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इशाक डार ने बढ़ते तनाव के बीच शांति तक पहुँचने के एकमात्र व्यावहारिक रास्ते के रूप में कूटनीति की वकालत की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष को समाप्त करने के सभी प्रयासों और पहलों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। उन्होंने कहा, "हम स्थिति को शांत करने और संघर्ष का समाधान खोजने के अपने प्रयासों में अमेरिकी नेतृत्व के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं।" पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि मंत्री चतुष्पक्षीय बैठक समाप्त होने के बाद पाकिस्तान से रवाना हो गए हैं।</p>
<p>इशाक डार ने बताया कि इस बैठक के बाद प्रत्येक मंत्री के साथ अलग-अलग बहुत ही सार्थक द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरते हुए, पाकिस्तान उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके अमेरिका और ईरान दोनों के साथ कूटनीतिक रूप से अच्छे संबंध हैं। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि उनके ये सार्वजनिक प्रयास हफ़्तों की खामोश कूटनीति के बाद सामने आए हैं, हालाँकि अब तक न तो ईरान और न ही अमेरिका ने बातचीत करने में बहुत ज़्यादा इच्छा दिखाई है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अब तक कूटनीति और बातचीत करने के प्रयासों को लेकर अमेरिका की गंभीरता के बारे में मिले-जुले संकेत दिए हैं। जहाँ एक ओर उन्होंने इस्लामिक गणराज्य के नेतृत्व के साथ बातचीत करने की सक्रिय रूप से अपील की है, वहीं साथ ही उन्होंने अमेरिकी सेना की तरफ से बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान की तैयारियों को लेकर चेतावनी भी दी है। यहाँ तक कि उन्होंने ज़मीन पर पूरी तरह से हमला करने की धमकी भी दी है। सैन्य शक्ति प्रदर्शन को और बढ़ाते हुए, अमेरिका ने इस क्षेत्र में हज़ारों अतिरिक्त सैनिक और एक पूरा नया नौसैनिक हमला समूह भेजा है, जिसमें एक हमलावर जहाज़ और लड़ाकू विमान शामिल हैं।</p>]]>
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                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:24:55 +0530</pubDate>
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                <title>इजरायली एयरस्ट्राइक: तेहरान में सैन्य ठिकानों पर हुए नए हमले, अमेरिका ने 10 दिनों के लिए किया सीज़फायर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[IDF ने घोषणा की है कि वह ईरानी शासन के सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर तेहरान पर नए हमले कर रहा है। 28 फरवरी के हमलों के बाद जारी यह जवाबी संघर्ष अब और तेज हो गया है। पूरे क्षेत्र में भारी क्षति और हताहतों की खबरों के बीच पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/idf-claims-new-attacks-on-military-targets-in-tehran-retaliatory/article-148378"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/war1.png" alt=""></a><br /><p>यरूशलेम। इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने कहा है कि वह तेहरान पर लक्ष्य साधकर उसके सैन्य ठिकानों पर नये हमले कर रहा है।आईडीएफ ने टेलीग्राम पर कहा, "इजरायली रक्षा बल वर्तमान में पूरे तेहरान ईरानी आतंकी शासन के बुनियादी सैन्य ढांचों पर हमले कर रहा है।"</p>
<p>गौरतलब है कि, अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को तेहरान सहित ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए थे, जिससे भारी क्षति हुई और नागरिक हताहत हुए। इसके बाद ईरान ने इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किये</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 11:36:47 +0530</pubDate>
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                <title>संघर्ष के विस्तार का खतरा: जंग में कूदे हूती, इजरायल पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें</title>
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                        <![CDATA[यमन के हूती बलों ने इज़रायली सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर जंग में सीधा हस्तक्षेप किया है। ईरानी हमलों के मलबे से अबू धाबी में 5 भारतीय घायल हुए, जबकि सऊदी अरब में अमेरिकी सैनिकों पर ड्रोन हमले हुए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य अभियान को सफल बताया है, जिससे लाल सागर में नया मोर्चा खुलने का खतरा बढ़ गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/danger-of-conflict-expansion-ballistic-missiles-fired-at-israel-as/article-148281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-misal.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन/सना। यमन में हूती बलों ने कहा है कि उन्होंने ईरान, लेबनान, इराक और फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर हमलों के जवाब में इजरायल के सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।  संघर्ष शुरू होने के बाद यह इजरायल पर उनका पहला हमला है। हूती हमले ऐसे समय हुए हैं जब अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच संघर्ष तेज हो गया है। हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने अल-मसीरा टीवी के हवाले से कहा कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक घोषित उद्देश्यों को हासिल नहीं किया जाता और प्रतिरोध के सभी मोर्चों पर आक्रमण बंद नहीं होता।</p>
<p>इजरायली सेना ने कहा कि उसने एक मिसाइल को मार गिराया। ये हमले ब्रिगेडियर सरी के उस बयान के बाद हुए, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि हूती इस संघर्ष में शामिल होंगे। उन्होंने कहा था कि संवेदनशील इज़रायली सैन्य ठिकाने उनका निशाना होंगे। रात के दौरान बीर शेबा सहित कई इलाकों और इज़रायल के प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास सायरन बजे, जबकि ईरान और हिजबुल्लाह ने इज़रायल पर हमले जारी रखे। हूती 2014 से यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण रखते हैं और अब तक अमेरिका-इज़रायल संघर्ष से मोटे तौर पर बाहर रहे थे।   </p>
<p><strong>लाल सागर के पास एक नया मोर्चा खुलने की आशंका </strong></p>
<p>अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध में हूती हस्तक्षेप से लाल सागर के पास एक नया मोर्चा खुलने की आशंका बढ़ गई है। इज़राइल-हमास युद्ध के दौरान इस मिलिशिया ने नवंबर 2023 से जनवरी 2025 के बीच 100 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमले कर समुद्री यातायात बाधित किया था, जिसमें दो जहाज डूबे और चार नाविकों की मौत हुई थी। </p>
<p><strong>ईरानी हमले में 5 भारतीय घायल</strong></p>
<p>संयुक्त अरब की राजधानी अबू धाबी में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले के मलबे गिरने से शनिवार तड़के पांच भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक घायल हो गए। अबू धाबी मीडिया कार्यालय के अनुसार, खलीफा इकोनॉमिक ज़ोन्स अबू धाबी (केजाड) के आसपास हुई घटना के संबंध में की गई समीक्षा के तहत यह पुष्टि हुई है कि इस घटना में पांच भारतीय नागरिकों को हल्की चोटें आई हैं। वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक अवरोधित किए जाने के बाद गिरा मलबा तीन स्थानों पर आग लगने का कारण बना। सभी घायलों को मामूली चोटें आई हैं। घटना के बाद वहां लगी आग पर काबू पा लिया गया है। </p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान बेहतरीन ढंग से आगे बढ़ रहा है। लेकिन इसी दौरान ईरान ने सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें 12 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई गई है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर कहा कि ईरान में हमारा सैन्य अभियान बहुत अच्छा चल रहा है, हालांकि उन्होंने इस पर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। इसी बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में समाप्त हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान में जमीनी सैनिक भेजने की संभावना नहीं है। </p>
<p>रुबियो ने फ्रांस में आयोजित जी-7 विदेश मंत्रियों की बैक में भाग लेते हुए सहयोगी देशों से अधिक समर्थन की अपील की और कहा कि इस अभियान के उद्देश्यों को अधिकतम साझेदार योगदान के साथ पूरा किया जाना चाहिए। </p>]]>
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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 09:40:52 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की का आरोप, रूस शेयर कर रहा ईरान को खुफिया जानकारी</title>
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                        <![CDATA[राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पुख्ता सबूत होने का दावा किया है कि रूस, ईरान को सैन्य खुफिया जानकारी साझा कर रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, रूस अपनी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का उपयोग कर रहा है। यूक्रेन ने चेतावनी दी है कि कब्जे वाले क्षेत्रों में ड्रोन कंट्रोल स्टेशन तैनात किए जा रहे हैं, जिसकी जानकारी पश्चिमी सहयोगियों को दी जाएगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ukrainian-president-volodymyr-zelensky-alleges-russia-is-sharing-intelligence-with/article-147699"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/volodymyr-zelensky.png" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि उनके पास "पुख्ता सबूत" हैं कि रूस ईरान को खुफिया जानकारी उपलब्ध करा रहा है। यह दावा यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी (एचयूआर) के प्रमुख ओलेह इवाशचेंको के साथ बैठक के बाद किया गया, जिसमें ज़ेलेंस्की ने प्रस्तुत मूल्यांकन की समीक्षा की।</p>
<p>राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने टेलीग्राम पर पोस्ट में चर्चा का सार देते हुए कहा, "रूस अपनी रेडियो-तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक खुफिया क्षमताओं का उपयोग कर रहा है, साथ ही मध्य पूर्व के भागीदारों से प्राप्त कुछ खुफिया जानकारी भी साझा कर रहा है।" इन आरोपों पर रूस या ईरान की ओर से अभी कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p>
<p>ज़ेलेंस्की का बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है और अमेरिका-इज़राइल बनाम ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का चौथा सप्ताह जारी है। हाल के वर्षों में रूस और ईरान के बीच संबंध मजबूत हुए हैं, खासकर यूक्रेन में रूस के युद्ध के दौरान, जब ईरान ने रूसी सेनाओं को ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए हैं।</p>
<p>हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने प्रस्ताव दिया था कि यदि अमेरिका यूक्रेन को खुफिया सहायता रोक दे तो वह ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर देगा, लेकिन वॉशिंगटन ने इस सुझाव को ठुकरा दिया है। ज़ेलेंस्की ने यह भी कहा कि यूक्रेन के पास "स्पष्ट जानकारी" है कि रूसी-कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों और बेलारूस में रूस लंबी दूरी के ड्रोन के लिए अतिरिक्त ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तैनात करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सहयोगियों को इन निष्कर्षों की जानकारी दी जाएगी।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:12:01 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान, तुर्की के बाद दुनिया में एक और ड्रोन सेना के सुपर पावर का जन्म: ड्रोन इंडस्ट्री में बहुत तेजी से पैर पसार रहा ताइवान, हर साल लाखों ड्रोन बनाने का लक्ष्य</title>
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                        <![CDATA[ईरानी ड्रोन की तबाही के बीच ताइवान चुपचाप दुनिया का नया ड्रोन हब बन रहा है। चीन के खतरे को देखते हुए ताइपे ने 1 लाख से अधिक स्वदेशी ड्रोन यूक्रेन भेजे हैं। 2030 तक सालाना 1.80 लाख ड्रोन बनाने का लक्ष्य रखने वाला ताइवान अब अमेरिका और भारत जैसे देशों के लिए सप्लाई चेन का सुरक्षित विकल्प बन गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-iran-and-turkey-the-birth-of-another-drone-army/article-147162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trukey.png" alt=""></a><br /><p>ताइपे। ईरान और अमेरिका की जंग में विस्फोटक ड्रोन विमानों की ताकत देखकर दुनिया हैरान है। ईरान सऊदी अरब से लेकर कतर तक में तबाही मचा रहा है और सुपरपावर अमेरिका तथा इजरायली सेना इसे पूरी तरह से रोकने में नाकाम साबित हो रही है। अमेरिका के थॉड और पेट्रियट तथा इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी शाहेद ड्रोन के आगे फेल हो गए हैं। इससे खाड़ी देशों में भारी नुकसान पहुंचा है। दुनियाभर के सैन्य रणनीतिकार विस्फोटक ड्रोन को लेकर अब बड़ी चेतावनी दे रहे हैं। इससे पहले यूक्रेन युद्ध में भी रूस ने ईरानी शाहेद ड्रोन की मदद से यूक्रेन में भारी तबाही मचाई थी। </p>
<p>वहीं, यूक्रेन तुर्की के बायरकतार सीरिज के ड्रोन पर भरोसा करता है। तुर्की एवं ईरान के बाद अब एक और देश है जो अगला ड्रोन सुपरपावर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस देश का नाम ताइवान है जिसे चीन अपना हिस्सा कहता है। दुनिया में ड्रोन सेना की बढ़ती मांग के बीच ताइवान बहुत चुपचाप तरीके से बहुत बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक की मदद से ड्रोन बना रहा है। यही नहीं ताइवान इन हमलावर ड्रोन को यूक्रेन को निर्यात कर रहा है जो रूस के साथ जंग लड़ रहा है। इससे अब ताइवान में यह ड्रोन इंडस्ट्री बहुत तेजी से पैर पसार रही है। ताइवान में ड्रोन निर्माण को एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया था लेकिन ताइपे ने पिछले एक साल में ही 1 लाख ड्रोन का यूक्रेन को निर्यात किया है। यह बिक्री पोलैंड और चेक रिपब्लिक की मदद से की गई है।</p>
<p>चीन की धमकियों का सामना कर रहे ताइवान के लिए हमलावर ड्रोन उसके अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए भी बहुत ही जरूरी हैं। ताइवान ने ड्रोन बनाया है जो मध्यम ऊंचाई तक लंबे समय तक उड़ान भर सकता है। इसके अलावा ताइवान ने Chien Hsiang कामीकाजी ड्रोन बनाया है जो ईरान के शाहेद की तरह से ही निगरानी करने, इलेक्ट्रानिक हमले और हाई वैल्यू टारगेट पर लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम है। ताइवान न केवल खुद से ड्रोन बना रहा है, बल्कि अमेरिका से भी ड्रोन खरीद रहा है। ताइवान का इरादा साल 2030 तक हर साल 1 लाख 80 हजार ड्रोन बनाने का है। ताइवान अपने साथ राजनयिक संबंध रखने वाले देशों को ड्रोन की सप्लाई कर रहा है जिसका नागरिक और सैन्य दोनों ही तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। </p>
<p><strong>चीन के हमले का खतरा</strong></p>
<p>असल में ताइवान उन देशों को विकल्प मुहैया करा रहा है जो चीनी उपकरणों से मुक्त ड्रोन चाहते हैं। यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों जैसे जापान, भारत, यूरोपीय देशों के लिए मददगार है जो अपने सप्लाई चेन में विविधता लाना चाहते हैं। ताइवान पर चीन के हमले का खतरा मंडरा रहा है, इसी वजह से ताइपे बहुत तेजी से घरेलू ड्रोन उद्योग को खड़ा करना चाहता है। आज ताइवान में 260 कंपनियां ड्रोन के पूरे सिस्टम को खुद से बना रही हैं और एकीकृत कर रही हैं। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 12:08:17 +0530</pubDate>
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