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                <title>Global Security - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Global Security RSS Feed</description>
                
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                <title>पहलगाम हमले की बरसी पर अमेरिकी सांसदों की पाकिस्तान को दो टूक : लश्कर-ए-तैयबा पर कार्रवाई की मांग, आतंकवाद की स्पष्ट शब्दों में की निंदा </title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन में आयोजित प्रदर्शनी में अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तान को लश्कर जैसे आतंकी संगठनों पर नकेल कसने की चेतावनी दी। पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए ब्रैड शेरमन ने आतंकियों को मिलने वाली पनाह की निंदा की। राजदूत क्वात्रा ने भारत के कड़े रुख और 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता को दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-the-anniversary-of-pahalgam-attack-us-lawmakers-demand-pakistan/article-151501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी सांसदों ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक एकजुटता का आह्वान करते हुए पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों पर कठोर नकेल कसने की अपील की है। वाशिंगटन डी.सी. स्थित कैपिटल हिल में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित प्रदर्शनी 'आतंकवाद की मानवीय कीमत' के दौरान सांसदों ने 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पहलगाम हमले की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित इस विशेष प्रदर्शनी में अमेरिकी कांग्रेस के 19 सदस्य और 60 से अधिक कांग्रेसी कार्यालयों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों, थिंक टैंक और भारतीय समुदाय के बीच आतंकवाद की स्पष्ट शब्दों में निंदा की गई।</p>
<p>कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमन ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) को लश्कर-ए-तैयबा का ही हिस्सा माना जाता है, जिसे पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है। हमें पाकिस्तान सरकार से यह स्पष्ट मांग करनी चाहिए कि वह लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों को पूरी तरह खत्म करे।" संबोधन के दौरान राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के सामने कभी नहीं झुकेगा। उन्होंने जोर दिया कि मानवता की रक्षा के लिए दुनिया भर के देशों को आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।</p>
<p>हाउस रिपब्लिकन कॉन्फ्रेंस की अध्यक्ष लिसा मैकक्लेन और सांसद रिचर्ड मैककॉर्मिक ने भी इस खतरे को एक 'साझा दुश्मन' बताया। मैकक्लेन ने खुफिया जानकारी साझा करने और आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया, जबकि मैककॉर्मिक ने इसे एक ऐसी "अनोखी बुराई" करार दिया जो स्वतंत्रता और एकता पर प्रहार करती है। डिजिटल और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से इस प्रदर्शनी में 1993 के मुंबई बम धमाकों से लेकर 2008 के मुंबई हमलों और पिछले साल हुए पहलगाम हमले के विनाशकारी परिणामों को दिखाया गया। यह आयोजन उन परिवारों और समुदायों को समर्पित था जिन्होंने आतंकी हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया है।</p>
<p>कार्यक्रम में भारत की रक्षा नीति के उस कड़े संदेश को भी याद किया गया, जिसके तहत 7 मई, 2025 को भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। इस ऑपरेशन के जरिए पाकिस्तान और पीओके में स्थित लश्कर और जैश के नौ प्रमुख ठिकानों एवं ट्रेनिंग सेंटरों को ध्वस्त किया गया था। इस मिशन की विशेषता इसकी सटीक खुफिया जानकारी और नैतिक संयम रही, जिससे आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। इस दौरान रिपब्लिकन सांसद माइकल बॉमगार्टनर, बिल हुइज़ेंगा और डेमोक्रेट नेता रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, जूली जॉनसन, और श्री थानेदार सहित कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 18:23:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका ने बढ़ाया युद्धविराम, ट्रंप बोले-ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक &quot;एकीकृत प्रस्ताव&quot; पेश नहीं करता, तब तक नहीं होगी कोई आक्रामक कार्रवाई </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने और सैन्य हमला स्थगित करने की घोषणा की है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य तैयारी जारी रहेगी। अब तक 4,000 मौतों के बाद, यह कदम कूटनीति को एक आखिरी मौका देने के रूप में देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-extends-ceasefire-says-no-offensive-action-unless-iranian/article-151271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/chatgpt-image-apr-22,-2026,-11_56_00-am.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी युद्ध में युद्धविराम की अवधि बढ़ा दी है और प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया गया है। व्हाइट हाउस द्वारा भारतीय समयानुसार देर रात के बाद जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के नेतृत्व की अपील पर ईरान पर नियोजित सैन्य हमले को स्थगित करने और युद्धविराम को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि ईरान के भीतर "गंभीर रूप से विभाजित" स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे ईरान की ओर से एकजुट बातचीत की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>बयान के अनुसार, युद्धविराम बढ़ाने का अनुरोध पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने किया था। अमेरिका ने कहा है कि जब तक ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक "एकीकृत प्रस्ताव" पेश नहीं करता, तब तक कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं की जाएगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैंने अपनी सेना को निर्देश दिया है कि वे नाकेबंदी जारी रखें और पूरी तरह तैयार रहें।" इसका मतलब है कि सक्रिय सैन्य कार्रवाई भले ही टाल दी गई हो लेकिन ईरान पर दबाव बना रहेगा।</p>
<p>बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि युद्धविराम तब तक प्रभावी रहेगा जब तक ईरान अपना प्रस्ताव पेश नहीं करता और वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती "चाहे जो भी परिणाम हो।" इससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीति विफल होने पर सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। यह कदम क्षेत्रीय संकट के बीच कूटनीति के लिए एक अस्थायी अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में एक अहम भूमिका निभाने के तौर पर उभर रहा है। अमेरिका के हालांकि नाकेबंदी जारी रहने से यह भी स्पष्ट है कि तनाव अभी कम नहीं हुआ है और बातचीत विफल होने पर स्थिति फिर से बिगड़ सकती है।</p>
<p>इससे पहले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हुए अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज "तौस्का " को जब्त करने की निंदा की थी और इसे "समुद्री डकैती" करार दिया था। अमेरिका-ईरान दोनों देशों के बीच संघर्षविराम रुकने तक लगभग 4,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर मौतें मिसाइल हमलों और ड्रोन हमलों के कारण हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:31:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>एनपीटी समीक्षा बैठक में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र बनाने के पुराने वादे को प्राथमिकता मिलेः ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[वियना में ईरानी मिशन ने मांग की है कि आगामी एनपीटी समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु मुक्त बनाने के वादों को प्राथमिकता दी जाए। ईरान ने चेतावनी दी कि इजरायल को संधि के दायरे में लाने में 30 साल की देरी ने एनपीटी की विश्वसनीयता को कम किया है। कार्रवाई न होने पर सम्मेलन विफल हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-old-promise-of-making-western-asia-a-nuclear-weapon/article-151230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran5.png" alt=""></a><br /><p>वियना। संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरानी मिशन ने मंगलवार को वियना में कहा कि 2026 में होने वाले परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त बनाने के पुराने वादों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। एनपीटी के 191 हस्ताक्षरकर्ता देशों में से अधिकांश के प्रतिनिधि 27 अप्रैल से 22 मई तक अमेरिका के न्यूयॉर्क में बैठक के लिए एकत्र होंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकना और परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।</p>
<p>ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया पर कहा कि 1995 में पश्चिमी एशिया को लेकर जो प्रस्ताव पास हुआ था, उसे अब पूरी तरह लागू करने का समय आ गया है। इस प्रस्ताव का मकसद इस पूरे क्षेत्र को परमाणु और सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त करना था। ईरान का कहना है कि इसी वादे पर इस संधि को आगे बढ़ाया गया था, इसलिए जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं होता, यह प्रस्ताव प्रभावी रहना चाहिए। बयान में 2000 के एनपीटी समीक्षा सम्मेलन के परिणामों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें इजरायल से संधि में शामिल होने और अपने सभी परमाणु केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा घेरे में रखने का आग्रह किया गया था।</p>
<p>ईरान ने कहा कि पश्चिमी एशिया पर एनपीटी प्रतिबद्धताओं को लागू करने में '30 से अधिक वर्षों की अनुचित देरी' ने संधि की विश्वसनीयता को कम किया है और इसकी समीक्षा प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। मिशन ने चेतावनी देते हुए कहा, "यह अनुचित देरी रुकनी चाहिए।" मिशन ने यह भी कहा कि कार्रवाई करने में विफलता आगामी समीक्षा सम्मेलन को एक 'विफल सम्मेलन' बना देगी।<br />उल्लेखनीय है कि इजरायल परमाणु अस्पष्टता की नीति बनाए रखता है, न तो वह परमाणु हथियार होने की पुष्टि करता है और न ही इससे इनकार करता है। वह एनपीटी का सदस्य भी नहीं है।</p>
<p>हर पांच साल में आयोजित होने वाला एनपीटी समीक्षा सम्मेलन, परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और निशस्त्रीकरण को बढ़ावा देने वाली संधि के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए सदस्य देशों को एक साथ लाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वैलेरी गेरासिमोव का दावा : लुगांस्क क्षेत्र पर पूरी तरह नियंत्रण, रूसी सेना सभी मोर्चों पर तेजी से बढ़ रही आगे</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी सैन्य प्रमुख वैलेरी गेरासिमोव ने घोषणा की है कि रूसी सेना ने LPR पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है। उन्होंने यूक्रेन के जवाबी दावों को खारिज करते हुए कहा कि रूसी सेना सभी मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, विफल जवाबी हमलों में यूक्रेन को 3,000 से अधिक सैनिकों का नुकसान हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/valery-gerasimov-claims-complete-control-of-lugansk-region-russian-army/article-151231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/russia1.png" alt=""></a><br /><p>माॅस्को। रूसी जनरल स्टाफ के प्रमुख वैलेरी गेरासिमोव ने मंगलवार को घोषणा की है कि रूसी सेना ने लुगांस्क पीपुल्स रिपब्लिक (एलपीआर) को पूरी तरह से मुक्त करा लिया है। गेरासिमोव ने कहा कि लुगांस्क पीपुल्स रिपब्लिक की मुक्ति का कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है। इस समय रूसी सेना सभी मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रही हैं और उनका अभियान जारी है। गौरतलब है कि लुगांस्क पीपुल्स रिपब्लिक (एलपीआर) यूक्रेन के लुहान्स्क क्षेत्र में एक स्वघोषित अलगाववादी क्षेत्र है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र समेत अधिकांश देश इसे यूक्रेन का ही हिस्सा मानते हैं। रूसी सैन्य प्रमुख ने यूक्रेनी कमान पर निशाना साधते हुए कहा कि वे फरवरी और मार्च में अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सूचना अभियान चला रहे हैं। यूक्रेन की ओर से 480 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर फिर से कब्जा करने का दावा किया जा रहा है, जो सच्चाई छिपाने की कोशिश मात्र है।</p>
<p>इससे पहले गेरासिमोव ने रूसी सेना के समूह 'युग' (दक्षिण) के मोर्चों का दौरा कर सैन्य अभियानों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने वहां यूनिट कमांडरों से अभियान के परिणामों पर रिपोर्ट भी ली। गेरासिमोव के अनुसार, रूसी सेना की बढ़त को रोकने के लिए यूक्रेन ने फरवरी और मार्च में 170 से अधिक असफल जवाबी हमले किए, जिनमें उसे 3,000 से अधिक सैनिकों का नुकसान उठाना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 17:38:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इज़रायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू : ट्रंप का दावा-सैन्य अभियानों को रोकने पर दोनों देश सहमत, जानें सीजफ़ायर पर कितने दिनों की बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान 10 दिनों के संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं। इसका उद्देश्य स्थायी शांति वार्ता के लिए मार्ग प्रशस्त करना है। हालांकि, आईडीएफ ने पिछले 24 घंटों में 380 हमले किए हैं। ट्रंप ने इसे एक शानदार मौका बताते हुए दोनों नेताओं को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ceasefire-between-israel-and-lebanon-is-in-force-trumps-claim/article-150769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/chatgpt-image-apr-17,-2026,-12_18_30-pm.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल और लेबनान 10 दिनों के लिए संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं, जो पूर्वी समय अनुसार 16 अप्रैल शाम पांच बजे (भारतीय समयानुसार 17 अप्रैल तड़के 3.30 बजे) से प्रभावी हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा, "लेबनान के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन हो सकता है। अच्छी चीजें हो रही हैं।" डोनाल्ट ट्रंप ने फिर से दावा किया कि उन्होंने दुनिया भर में नौ युद्धों को सुलझाया है और यह दसवां होगा। उन्होंने कहा, "तो चलिए इसे पूरा करते हैं।"</p>
<p>इस अस्थायी युद्धविराम का उद्देश्य स्थायी शांति समझौते की दिशा में बातचीत के लिए अवसर प्रदान करना है। यह समझौता ट्रंप द्वारा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन के साथ चर्चा के बाद कराया गया था। समझौते के अनुसार, इजरायल और लेबनान आक्रामक सैन्य अभियानों को रोकने पर सहमत हुए हैं। लेबनान ने हिजबुल्लाह को हमले करने से रोकने के लिए सार्थक कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है। इस अवधि के दौरान इजरायली बल दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर के 'सुरक्षा क्षेत्र' में बने रहेंगे।</p>
<p>भले ही युद्धविराम आधिकारिक तौर पर प्रभावी है लेकिन लेबनानी सेना ने आज सुबह दक्षिणी गांवों में इजरायल द्वारा कई हमलों की सूचना दी। इस बीच, इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने दावा किया कि उन्होंने पिछले 24 घंटों के दौरान लेबनान में हिजबुल्लाह के 380 से अधिक ठिकानों पर हमला किया। हिजबुल्लाह ने कहा कि वे तभी तक संघर्षविराम का 'पालन' करेंगे जब तक इजरायली हमले बंद रहेंगे।<br />यह संघर्षविराम एक व्यापक क्षेत्रीय राजनयिक प्रयास का हिस्सा है जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच अलग से चल रहा दो सप्ताह का युद्धविराम भी शामिल है।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई कि हिजबुल्लाह इस महत्वपूर्ण समय के दौरान 'शालीनता और अच्छे से' व्यवहार करेगा। उन्होंने कहा, "अगर वे ऐसा करते हैं तो यह उनके लिए एक शानदार पल होगा। अब और हत्याएं नहीं। अंततः शांति होनी चाहिए!" अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बीबी नेतन्याहू के साथ 'बेहतरीन बातचीत' हुई। उन्होंने कहा कि मंगलवार को दोनों देशों के नेताओं ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ वाशिंगटन में 34 वर्षों में पहली बार मुलाकात की।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्री रुबियो को ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन रातिन केन के साथ मिलकर इजरायल और लेबनान के साथ स्थायी शांति प्राप्त करने के लिए काम करने का निर्देश दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह इजरायली प्रधानमंत्री और लेबनान के राष्ट्रपति को व्हाइट हाउस में 1983 के बाद पहली 'सार्थक बातचीत' के लिए आमंत्रित करेंगे। उन्होंने कहा, "दोनों पक्ष शांति चाहते हैं और मेरा मानना है कि यह जल्द ही होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 12:17:29 +0530</pubDate>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान : ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब, कूटनीतिक सफलता का दिया संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष समाप्त होने का संकेत देते हुए पाकिस्तान में दोबारा शांति वार्ता शुरू होने की घोषणा की है। अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकाबंदी से ईरान का 90% समुद्री व्यापार ठप हो गया है। अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन रोकने और परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की कड़ी शर्त रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trumps-big-announcement-indicates-diplomatic-success-as-war-with/article-150525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष 'समाप्त होने के करीब' है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से ठप हो गई है। शक्ति प्रदर्शन के बावजूद मुख्य गतिरोध अभी भी बने हुए हैं। अमेरिका ईरान के यूरेनियम संवर्धन को तत्काल रोकने और प्रमुख परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की मांग कर रहा है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की भी मांग कर रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों द्वारा समझौते पर सहमति नहीं बन पाने के कारण 10 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत के बाद मुख्य मुद्दे अनसुलझे रह गए हैं।</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दोनों पक्षों के बीच गहरी अविश्वास की भावना को स्वीकार किया लेकिन एक सतर्क आशावादी रुख भी अपनाया। उन्होंने कहा, "आप इस समस्या को रातों-रात हल नहीं करने जा रहे हैं।" जेडी वेंस ने हालांकि यह भी जोड़ा कि ईरानी वार्ताकार समझौता करने के इच्छुक दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम जहाँ हैं, उसे लेकर मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ।" डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया कि सप्ताहांत की चर्चाओं के विफल होने और घेराबंदी लागू होने के बाद, अगले 48 घंटों के भीतर पाकिस्तान में अगले दौर की बातचीत हो सकती है, जो बढ़ते दबाव के बीच एक नए कूटनीतिक प्रयास का संकेत है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए 'बेहद विस्तृत' सत्यापन तंत्र शामिल होना चाहिए। बातचीत के अगले चरण में यह प्रमुख मुद्दा हो सकता है। इस बीच, पूरे क्षेत्र में तनाव और कूटनीति का असर दिख रहा है। इजरायल और लेबनान ने 14 अप्रैल को दशकों में पहली बार अपनी पहली सीधी बातचीत की, जिसमें दोनों पक्ष जुड़ाव जारी रखने पर सहमत हुए। हालांकि, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम के लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई, जो ईरान-अमेरिका गतिरोध से जुड़ा एक और संवेदनशील मुद्दा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 16:26:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शी जिनपिंग ने रखा चार-सूत्री योजना का प्रस्ताव : दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का करना चाहिए सम्मान, विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए चार-सूत्री सुरक्षा प्रस्ताव पेश किया है। अबू धाबी के युवराज के साथ बैठक में उन्होंने संप्रभुता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर जोर दिया। अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने और तेल की कीमतों में उछाल के बीच चीन अब इस संकट में मध्यस्थ बनने की तैयारी में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-the-increasing-tension-in-west-asia-xi-jinping-proposed/article-150367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/shi-jinpin.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका में दिलचस्पी दिखाते हुए कहा है कि उन्होंने क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए यहां अबू धाबी के युवराज ज़ायेद अल नहयान के साथ बैठक में चार-सूत्री प्रस्ताव रखा है। शी जिनपिंग ने शांति पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के लिए एक साझा, विस्तृत, सहयोगपूर्ण और टिकाऊ सुरक्षा व्यवस्था बनायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का भी पूरी तरह सम्मान होना चाहिए। साथ ही नागरिकों एवं अवसंरचनाओं की भी सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।</p>
<p>शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर जोर देते हुए सभी पक्षों से साथ आकर क्षेत्रीय विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने अनुरोध किया। चीन का कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम चल रहा है। इस दौरान दोनों देशों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में बैठकर शांति वार्ता भी की। यह शांति वार्ता 21 घंटे तक चली लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला, जिससे युद्धविराम पर संकट के बादल मंडराने लगे। इस बीच, अमेरिका ने राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान के बंदरगाहों को बाधित कर दिया है, जिससे तेल के दामों में उछाल देखने को मिला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने की क्रिस्टोफर लैंडौ से मुलाकात : वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा, अमेरिका और भारत के बीच घनिष्ठ साझेदारी की पुष्टि की</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ रक्षा, व्यापार और क्वॉड पर महत्वपूर्ण वार्ता की। फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर साझा रुख अपनाते हुए दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की आगामी भारत यात्रा इस जुड़ाव को नई दिशा देगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/indian-foreign-secretary-vikram-misri-meets-christopher-landau-discusses-global/article-149869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/vikram-mistri.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ और भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने फारस की खाड़ी की स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण वैश्विक एवं क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इस दौरान दोनों ने अमेरिका और भारत के बीच घनिष्ठ साझेदारी की पुष्टि की। उनकी चर्चा ने द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और क्षेत्रीय स्थिरता एवं वैश्विक सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। अपनी यात्रा के दौरान विदेश सचिव मिस्री ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। इस बैठक में व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा और क्वॉड ढांचे पर सहयोग की समीक्षा की गई।</p>
<p>भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इन वार्ताओं को 'रचनात्मक और भविष्योन्मुखी' बताया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि रुबियो अगले महीने भारत की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले राजनीतिक मामलों की अमेरिकी उपमंत्री एलिसन हुकर के साथ हुई बैठकों में पिछले दिसंबर के विदेश कार्यालय परामर्श के बाद हुई प्रगति, पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और अन्य साझा क्षेत्रीय चिंताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। मिस्री ने वाशिंगटन स्थित रणनीतिक विशेषज्ञों के साथ भी संवाद किया और ऊर्जा, भोजन एवं आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाली वैश्विक चुनौतियों तथा भारत-अमेरिका संबंधों पर चर्चा की। यह यात्रा भारत-अमेरिका रणनीतिक जुड़ाव की गति और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर उनके सहयोगात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 15:57:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर संकट के बादल : सीजफायर तो हो गया लेकिन बयानों में जंग अब भी जारी, ईरान ने कहा-इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार है। बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे केवल एक 'विराम' बताया है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने समझौता पूरी तरह लागू होने तक सैन्य तैनाती जारी रखने की चेतावनी दी है। ईरान ने लेबनान पर इजरायली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताते हुए अपना हाथ 'ट्रिगर पर' होने की बात कही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/there-is-a-cloud-of-crisis-over-the-us-iran-ceasefire/article-149811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/casefire.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान में सीजफायर हो गया है। लेकिन जमीनी हालात स्थिर नहीं हैं। इजरायल के लेबनान पर हमले के बाद स्थिति नाजुक बनी हुई है। ईरान ने साफ कह दिया है कि लेबनान पर इजरायल के हमले रुकवाना अमेरिका की जिम्मेदारी है वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजरायल और हिजबुल्ला आतंकवादियों के बीच चल रहे समानांतर संघर्ष को सुलझाने का कोई वादा कभी नहीं किया गया था। इतना ही नहीं होर्मुज को लेकर भी ईरान और अमेरिका अपने-अपने दावों को लेकर अड़े हुए हैं। ईरान ने अभी होर्मुज पूरी तरह खोला नहीं है। दूसरी तरफ ट्रम्प इसे खोलने को लेकर नाटो पर फिर से बरसे हैं।</p>
<p><strong>युद्धविराम एक अल्पविराम, अभियान का अंत नहीं: नेतन्याहू </strong></p>
<p>इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, ईरान अब पहले से कहीं अधिक कमजोर है और इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत। हमारे पास अभी भी कुछ लक्ष्य बाकी हैं और हम उन्हें या तो समझौते के माध्यम से या फिर से लड़ाई शुरू करके हासिल करेंगे। यह दो सप्ताह का युद्धविराम केवल एक अल्पविराम है और ‘अभियान का अंत नहीं’ है। उन्होंने इसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के रास्ते में केवल एक ‘पड़ाव’ बताया। </p>
<p><strong>समझौता होने तक ईरान के पास तैनात रहेंगे अमेरिकी जहाज: डोनाल्ड ट्रम्प</strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा कि अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी, अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और अन्य सभी चीजें ईरान में और उसके आसपास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि वास्तविक समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता लागू नहीं हुआ, तो संघर्ष पहले से कहीं अधिक बड़ा, बेहतर और अधिक ताकतवर रूप ले सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर कायम है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तथा सुरक्षित रहेगा।  </p>
<p><strong>लेबनान पर इजरायली हमला युद्धविराम का घोर उल्लंघन: ईरान</strong></p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने गुरुवार को कहा कि लेबनान पर इजरायल के हमले एक ‘खतरनाक संकेत’ हैं तथा युद्धविराम समझौते का घोर उल्लंघन है और इस तरह की कार्रवाइयां बातचीत की प्रक्रिया को अर्थहीन बना देती हैं।  पेजेशक्यान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, इजरायल की बार-बार की आक्रामकता मूल युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है। यह एक जाल और संभावित समझौतों के पालन न करने का खतरनाक संकेत है। इन कार्रवाइयों को जारी रखना बातचीत को निरर्थक बना देगा। लेबनान पर इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान का ‘हाथ ट्रिगर पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 11:25:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान के तीन-सूत्री उल्लंघन के दावों पर वेंस का बड़ा बयान : हमेशा पेचीदा होते हैं युद्धविराम, लेबनान हवाई हमलों में 254 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के आरोपों पर कहा कि युद्धविराम की प्रक्रिया अक्सर अव्यवस्थित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों का लक्ष्य बमबारी रोकना है। वेंस ने ईरान के यूरेनियम भंडार पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका दावों के बजाय ईरान के वास्तविक कार्यों पर ध्यान देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/vances-big-statement-on-irans-three-point-violation-claims-ceasefire-is/article-149782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jd-vance1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते के तीन बिंदुओं के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "युद्धविराम हमेशा पेचीदा होते हैं।" जेडी वेंस ने हंगरी से प्रस्थान से पहले संवाददाताओं से बातचीत में ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ के उस बयान पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने वॉशिंगटन पर युद्धविराम के तीन प्रावधानों के जानबूझकर उल्लंघन का आरोप लगाया था। वेंस ने कहा कि यदि ग़ालिबाफ़ के पास केवल तीन असहमति के बिंदु हैं, तो इसका अर्थ है कि काफी हद तक सहमति भी है।</p>
<p>जेडी वेंस ने कहा, "युद्धविराम हमेशा थोड़ा अव्यवस्थित होता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा के एक घंटे के भीतर ही ईरान ने पड़ोसी देशों पर कई मिसाइलें दागीं, जिसके बाद इज़रायल और कुछ खाड़ी अरब देशों ने जवाबी कार्रवाई की।" उन्होंने कहा, "यही युद्धविराम की प्रकृति है। कोई भी युद्धविराम बिना कुछ उतार-चढ़ाव के नहीं होता। हम स्पष्ट रूप से यह चाहते हैं कि बमबारी रुके। हम अपने सहयोगियों से भी बमबारी रोकने को कहते हैं और ईरान से भी यही अपेक्षा रखते हैं। हमें संकेत मिल रहे हैं कि स्थिति सही दिशा में जा रही है, लेकिन इसमें थोड़ा समय लगेगा।"</p>
<p>जेडी वेंस ने यह भी कहा कि उन्हें यह "दिलचस्प" लगा कि श्री ग़ालिबफ़ ने कहा कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के बड़े भंडार को छोड़ने के अपने "अधिकार" से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा, "हम इस बात की चिंता नहीं करते कि वे क्या करने का अधिकार होने का दावा करते हैं, बल्कि इस बात पर ध्यान देते हैं कि वे वास्तव में क्या करते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:26:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप ने की पुष्टि : अंतिम समझौता होने तक ईरान के आसपास तैनात रहेंगे अमेरिकी जहाज़ और विमान, परमाणु हथियार विकसित करने पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ पूर्ण समझौता लागू होने तक अमेरिकी युद्धपोत और सैन्य बल वहां तैनात रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौते का उल्लंघन होने पर "बड़ा और घातक" पलटवार किया जाएगा। ट्रंप ने परमाणु हथियारों पर रोक और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/american-ships-and-aircraft-will-be-deployed-nearby-until-the/article-149716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ अंतिम समझौते के पूरी तरह लागू होने तक उनके युद्धपोत, विमान और सैन्य बल ईरान के आसपास तैनात रहेंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा, "अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी, अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और अन्य सभी चीजें ईरान में और उसके आसपास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि वास्तविक समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता।"</p>
<p>उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता लागू नहीं हुआ, तो संघर्ष पहले से कहीं अधिक "बड़ा, बेहतर और अधिक ताकतवर" रूप ले सकता है।अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर कायम है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तथा सुरक्षित रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है और आगे की कार्रवाई के लिए पूरी तरह से सतर्क है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:30:56 +0530</pubDate>
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                <title>जेडी वैंस का दावा: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौते में लेबनान शामिल नहीं, समझौते की तीन धाराओं के उल्लंघन का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ हुए युद्धविराम में लेबनान शामिल नहीं था। उन्होंने ईरानी दावों को 'गलतफहमी' बताते हुए कहा कि संघर्ष विराम की प्रक्रिया जटिल होती है। वैंस के अनुसार, इजरायल और खाड़ी देशों की जवाबी कार्रवाई समझौतों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सुरक्षा का हिस्सा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jd-vance-claims-lebanon-is-not-included-in-the-ceasefire/article-149657"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने ईरान के साथ हुए युद्धविराम पर कहा कि उनका मानना है कि ईरान को यह गलतफहमी थी कि लेबनान को भी इसमें शामिल किया गया है। श्री वैंस बुधवार को हंगरी से रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कही। जेडी वैंस ने कहा कि युद्धविराम हमेशा पेचीदा होते हैं और उन्होंने ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ के इस दावे का जवाब दिया कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते की तीन धाराओं का उल्लंघन किया है।</p>
<p>ईरानी संसद के अध्यक्ष ने दावा किया था कि अमेरिका युद्धविराम समझौते के तीन बिंदुओं का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने लेबनान में लगातार गोलीबारी, कथित रूप से ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन के प्रवेश और ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से इनकार का हवाला दिया। जेडी वेंस ने कहा कि अगर श्री ग़ालिबफ़ के असहमति के केवल तीन बिंदु हैं, तो निश्चित रूप से कई बिंदुओं पर सहमति भी होगी। उपराष्ट्रपति ने कहा, "सबसे पहले, उन्होंने ईरान पर हुए एक कथित हमले का जिक्र किया और बताया कि यह युद्धविराम का उल्लंघन था। युद्धविराम हमेशा ही पेचीदा होते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा युद्धविराम की घोषणा के एक घंटे बाद ही कई मिसाइलें दागी गईं, इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की और कुछ खाड़ी अरब देशों ने भी जवाबी कार्रवाई की।</p>
<p>जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने कभी भी लेबनान को युद्धविराम समझौते में शामिल करने का वादा नहीं किया था, भले ही ईरान ने ऐसा दावा किया हो और उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच एक गलतफहमी करार दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:35:19 +0530</pubDate>
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