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                <title>Currency Crash - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Currency Crash RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: 34 पैसे टूटकर 94.30 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, लगातार बिकवाली से भारतीय मुद्रा दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपया शुक्रवार को ऐतिहासिक निचले स्तर ₹94.30 प्रति डॉलर पर लुढ़क गया। पश्चिम एशिया संकट के बाद से मुद्रा में ₹3 की गिरावट आई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय अस्थिरता और डॉलर की मजबूती ने घरेलू अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-falls-by-34-paise-to-reach-record-low-of/article-148061"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)74.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 34 पैसे टूटकर 94.30 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। बीच कारोबार में पहली बार भारतीय मुद्रा इस स्तर तक कमजोर हुई है। पिछले कारोबारी दिवस पर 25 मार्च को यह 20 पैसे की गिरावट में 93.96 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी जो इसका अब तक का सबसे कमजोर बंद भाव है।</p>
<p>रुपया आज 22.75 पैसे की गिरावट में 94.1875 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और 94.30 रुपये प्रति डॉलर तक टूट गया। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि और विदेशी संस्थागत निवेशकों के भारतीय पूंजी बाजार में इस महीने लगातार बिकवाली रहने से भारतीय मुद्रा दबाव में है। पश्चिम एशिया संकट से पहले रुपया 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। इस संकट के शुरू होने के बाद अब तक इसमें तीन रुपये प्रति डॉलर की गिरावट आ चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 11:21:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया तनाव के बीच USD के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा: 93.84 प्रति डॉलर के पार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय रुपया सोमवार को 33 पैसे टूट गया। यह $93.89$ के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक तनाव का असर घरेलू मुद्रा पर साफ दिख रहा है। मुद्रा बाजार में रुपये की गिरती कीमत से आयात और निवेश पर दबाव बढ़ने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-falls-by-almost-33-paise-to-cross-9386-per/article-147472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/delloar-and-ruppe.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच सोमवार को भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा गया, क्योंकि एनर्जी सप्लाई में लगातार रुकावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिससे एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.84 पर आ गया, जो शुक्रवार को 93.7350 के अपने पिछले निचले स्तर से भी ज़्यादा है।</p>
<p>BofA ग्लोबल रिसर्च को उम्मीद है कि जून 2026 तक रुपया 94 पर ट्रेड करेगा, जबकि पहले इसका अनुमान 89 था, यह मानते हुए कि मौजूदा संकट कुछ हफ़्तों में हल हो जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:45:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया में भारी गिरावट, 93.69 प्रति डॉलर के पार</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया शनिवार को शुरुआती कारोबार में गिरकर 93.69 प्रति डॉलर के नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले सत्र में 49 पैसे की भारी गिरावट के बाद, आज रुपया फिर से कमजोर खुला। वैश्विक आर्थिक दबाव और डॉलर की मजबूती ने घरेलू मुद्रा को रिकॉर्ड गिरावट की ओर धकेल दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/heavy-fall-in-rupee-in-interbank-currency-market-crosses-9369/article-147315"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/dollar-vs-ruppee.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया शनिवार को निचले स्तर 93.69 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। पिछले कारोबारी दिवस पर भारतीय मुद्रा 49 पैसे लुढ़ककर 92.89 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।</p>
<p>रुपया आज लगभग तीन पैसे की गिरावट में 93.69 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 13:11:10 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान में भड़का जनविद्रोह, इस्लामिक शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरें लोग</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में गिरते रियाल और 42.2% महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। 'मुल्ला शासन' के विरोध में लोग सड़कों पर हैं। आर्थिक बदहाली और अमेरिकी प्रतिबंधों ने खामेनेई सरकार के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/public-revolt-broke-out-in-iran-people-took-to-the/article-137860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/iran.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पिछले दो दिनों से ईरान के कई शहरों और कस्बों की सड़कों पर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ईरानी रियाल की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है और महंगाई दर 42.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसमें खाद्य पदार्थों की कीमतें 72 प्रतिशत बढ़ गई हैं। इसके बाद सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाला धार्मिक शासन तीन साल की सबसे बड़ी जन-विरोधी लहर का सामना कर रहा है। तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुआ सरकार विरोधी प्रदर्शन अब मशहद, इस्फहान, शिराज, हमदान समेत कई शहरों में फैल गया है।</p>
<p>ईरानी-अमेरिकी पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  पर लिखा कि ईरान से आ रहे कई वीडियो में लोग एक स्वर में नारे लगा रहे हैं- मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा और तानाशाही मुदार्बाद। उनके मुताबिक, यह उस जनता की आवाज है जो अब इस्लामिक रिपब्लिक नहीं चाहती. 9.2 करोड़ से अधिक आबादी वाले इस देश में आर्थिक बदहाली और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति ने खामेनेई शासन के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। यह संकट ऐसे समय आया है, जब ईरान पहले से ही अपने परमाणु ठिकानों पर इजरायल और अमेरिका की कार्रवाइयों तथा डोनाल्ड ट्रंप की मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी के दबाव से जूझ रहा है।</p>
<p><strong>सड़कों पर शाह समर्थक नारे भी सुनाई दिए</strong></p>
<p>इसी बीच, ईरानी प्रवासियों द्वारा साझा की जा रही एक तस्वीर ने दुनिया का ध्यान खींचा है, जिसमें तेहरान की एक हाईवे पर एक व्यक्ति अकेले, शांत बैठा दिख रहा है, जबकि मोटरसाइकिलों पर सवार सुरक्षाबल उसकी ओर बढ़ रहे हैं। यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान (वअठक) के पॉलिसी डायरेक्टर जेसन ब्रॉडस्की ने इस दृश्य की तुलना 1989 के तियानआनमेन स्क्वायर आंदोलन की महशूर तस्वीर टैंक मैन से की है। कुछ विश्लेषकों का दावा है कि सड़कों पर शाह समर्थक नारे भी सुनाई दिए, जिनकी सत्ता को 1979 में खामेनेई समर्थित आंदोलन ने उखाड़ फेंका था।</p>
<p><strong>ईरान की जनता सड़कों पर क्यों उतरी?</strong></p>
<p>ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए ये सरकार विरोधी प्रदर्शन 2022-23 के बाद सबसे बड़े हैं, जब महसा अमीनी की मौत के बाद देशव्यापी आंदोलन हुआ था। तेहरान और मशहद में सोमवार को प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाबलों से झड़पें हुईं। सेंट्रल तेहरान, जहां सरकारी और व्यावसायिक केंद्र स्थित हैं, विरोध का बड़ा केंद्र बना। </p>
<p>सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ग्रैंड बाजार के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के भीतर लोग नारे लगाते दिखे- डरो मत, हम सब साथ हैं। रियाल की ऐतिहासिक गिरावट ने आम लोगों की क्रय शक्ति को लगभग खत्म कर दिया है। खाने-पीने की चीजें, दवाइयां और रोजमर्रा के सामान आम नागरिकों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। हालात ये है कि तेहरान, इस्फहान, शिराज और मशहद में व्यापारी, दुकानदार और छोटे कारोबारी सड़कों पर उतर आए हैं। </p>
<p><strong>इसके लिए ट्रंप फैक्टर कितना जिम्मेदार?</strong></p>
<p>ईरान की आर्थिक बदहाली का बड़ा कारण उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध माने जा रहे हैं। अमेरिका के 2015 के परमाणु समझौते से पीछे हटने और ट्रंप की मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी ने ईरान की तेल से होने वाली आय को बुरी तरह प्रभावित किया है। ट्रंप के जनवरी 2025 में दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद ये प्रतिबंध और सख्त हुए हैं, जिसने हालात और बिगाड़ दिए। पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि इस्लामिक शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे ईरानियों का गुस्सा कोई हैरानी की बात नहीं है। </p>
<p><strong>रियाल के गिरने से नाराज मोबाइल फोन विक्रेताओं का प्रदर्शन </strong></p>
<p>हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया ने विरोध प्रदर्शनों को सीमित बताने की कोशिश की है। सरकारी समाचार एजेंसी ने इन्हें राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक नाराजगी करार दिया और कहा कि रियाल के गिरने से नाराज मोबाइल फोन विक्रेताओं ने प्रदर्शन किया। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर करने की भी कोशिश की, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं। ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर मोहम्मद रेजा फरजिन ने इस्तीफा दे दिया है। जिसे राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर कहा कि लोगों की आजीविका उनकी मुख्य चिंता है और सरकार मॉनेटरी रिफॉर्म करने की योजना बना रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 11:45:34 +0530</pubDate>
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