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                <title>suffering - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>प्रदूषण से बढ़ती बीमारियों से परेशान लोग</title>
                                    <description><![CDATA[एक अमरीकी रिसर्च के मुताबिक भारत के बड़े शहरों में मिट्टी, जल और ध्वनि प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली में यमुना, कानपुर, वाराणसी व प्रयागराज में गंगा और गुजरात व मध्य प्रदेश में नर्मदा का पानी प्रदूषित हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/people-suffering-from-increasing-diseases-due-to-pollution/article-80589"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy211rer-(13).png" alt=""></a><br /><p>दिल्ली में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या कोई नई बात नहीं है। साल के बारहों महीने एनसीआर वालों को प्रदूषण के सबसे खतरनाक या अति खतरनाक स्तर के असर से जूझना पड़ता है। इसे देखते हुए सरकार ने वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कई कदम उठाए। जिसके तहत दिल्ली में बाहर के वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए पूर्वी व पश्चिमी एक्सप्रेस- वे का निर्माण, पटाखे की बिक्री पर प्रतिबंध, पंजाब व हरियाणा के किसानों को 1400 करोड़ रुपए उपलब्ध कराना, एनसीआर को 2600 उद्योगों को पाइप्ड नेचुरल गैस  मुहैया कराना, बदरपुर बिजली संयंत्र को बंद करना, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 2.800 ईंट भट्टों में जिंग- जैग मुहैया कराने के साथ और निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम की शुरूआत जैसे कई ठोस कदम शामिल हैं। बावजूद एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या विकट रुप में बनी रहती है। वायु प्रदूषण की यह समस्या कई और समस्याओं को पैदा कर रही है जिनमें लोगों की उम्र में कमी, नई-नई बीमारियों से असमय में मृत्यु और प्राकृतिक संसाधनों का प्रदूषित होते रहना, प्रसिद्ध पर्याटक स्थलों का प्रदूषित होना जैसी समस्याएं शामिल हैं। </p>
<p>दिल्ली- एनसीआर में प्रदूषण का सबसे भयंकर असर लोगों का नई- नई बीमारियों से हलाकान होना है। दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली कभी पहले तो कभी दूसरे स्थान पर रहती है। कई बार तो क्यूआई 500 के आंकड़े को पार कर जाता है। जाहिर तौर पर इसका असर सेहत पर जबरदस्त तरीके से पड़ता ही है। 500 क्यूआई का पार जाना विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्धारित सीमा से 100 गुना ज्यादा है। दिल्ली- एनसीआर में 3.3 करोड़ लोग रहते हैं। यानी दुनिया के कई बड़े देशों की आबादी के लगभग। सोचा जा सकता है। दिल्ली- एनसीआर की इतना बड़ी आबादी हर वक्त जहरीली गैसों को श्वास के रूप में लेना जरूरी है। इस इलाके में रहना है तो इस जहर को पीना ही पड़ेगा, दूसरा कोई विकल्प नही है। शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के मुताबिक दिल्ली में हवा का अति खतरनाक बने रहने की वजह से यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी करीब 11.9 वर्ष कम हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में एनसीआर की हवा के जहरीले होने की वजह से सांस संबंधी बीमारियों में तेजी से इजाफा हुआ है। दिल, फेफड़े, आंत, आंख, हड्डी और यकृत संबंधी बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ी हैं। शारीरिक के साथ मानसिक सेहत पर भी जबरदस्त असर पड़ा है। शोध के मुताबिक पिछले कुछ सालों में दिल्ली- एनसीआर में रहने वाले बच्चों में याद रखने की क्षमता लगातार घट रही है। साथ ही गणित के सवाल करने में भी बच्चा पहले जैसे नहीं हैं। जाहिर तौर पर बढ़ते प्रदूषण से आने वाले वक्त में और कई नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यदि प्रदूषण से बच्चों की याददाश्त पर असर पड़ रहा है तो देश में जहां भी प्रदूषण की समस्या बढ़ेगी वहां इस तरह की समस्याओं का बढ़ना लाजमी है। </p>
<p>यह की महज हवा जहरीली नहीं हुई है बल्कि जल, ध्वनि, मिट्टी और प्रकाश प्रदूषण की भी समस्या लगातार बढ़ रही है। एक अमरीकी रिसर्च के मुताबिक भारत के बड़े शहरों में मिट्टी, जल और ध्वनि प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली में यमुना, कानपुर, वाराणसी व प्रयागराज में गंगा और गुजरात व मध्य प्रदेश में नर्मदा का पानी प्रदूषित हो गया है। दिल्ली में यमुना का पानी छूने लायक नहीं रह गया है। इससे आवारा जानवरों और पक्षियों में तमाम तरह की बीमारियां बढ़ गई हैं। आए दिन मवेशी और पक्षी मौत के शिकार होते दिखते हैं। </p>
<p>डाउन टू अर्थ ने अपनी एक रिपोर्ट साल 2018 से लेकर साल 2023 के अक्टूबर महीने के बीच 25 रिसर्च बताते हैं कि भारत के बच्चों पर वायु प्रदूषण का असर महज उत्तर भारत तक सीमित नहीं है यानी देश के तमाम बड़े शहर इसके चपेट में हैं। जिस वजह से प्रेगनेंट लेडी के बच्चों के जन्म के वक्त उनके वजन में कमी, वक्त से पहले प्रसव और मरे हुए बच्चों के जन्म जैसी तमाम दिक्कतें देखने को मिलती हैं। यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट वताती है कि भारत में एनीमिया से ग्रस्त बच्चे करोड़ों में हैं। जिस तरह से एनसीआर में वाहनों की तादाद लगातार बढ़ रही है, धूल की समस्या बढ़ रही है इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाला वक्त सेहत के मद्देनजर बहुत खराब होगा।  यदि देश को पांचवी आर्थिक महाशक्ति बनना है तो प्रदूषण की समस्या और इससे होने वाली दुश्वारियों को भी समझना होगा। एनसीआर में जिस तरह से प्रदूषण भयावह रूप अख्तियार कर रहा है आने वाले वक्त में बहुत बड़ी त्रासदी के रूप में सामने आ सकता है। एनसीआर आने वाले वक्त में एक जहरीली गैस चैंबर के रूप में होगी, जहां लोगों का रहना नामुमकिन होगा।</p>
<p><strong>-अखिलेश आर्येंदु</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jun 2024 11:30:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>लम्बी कतार, इंतजार और हम लाचार</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में आधार सेवा केन्द्रों की कमी के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/long-queue--waiting-and-we-are-helpless/article-51680"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/lambi-kataar,-intezar-or-hm-lachaar...kota-news-13-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाथों में दस्तावेज लेकर अपनी बारी का इंतजार करते महिला-पुरुष, गर्मी से बेहाल होने पर प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश करती निगाहें, काफी देर तक खड़े रहने के कारण दीवार का सहारा तलाश करते वृद्धजन। यह हालात किसी के शिविर के नहीं हैं बल्कि शहर के एरोड्राम सर्किल स्थित आधार सेवा केन्द्र के हैं। जहां पर आधार कार्ड से सम्बंधित कार्य करवाने के लिए पहुंच रहे महिला व पुरुषों को कुछ इस तरह की पीड़ा भुगतनी पड़ रही है। इस केन्द्र पर रोजाना इस तरह के हालात नजर आ रहे हैं। हमारा आधार कार्ड एक ऐसा दस्तावेज है जिसके बिना कोई भी नागरिक सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं कर सकता है। केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से अधिकांश योजनाओं एवं अन्य कार्यों के लिए अनिवार्य किए गए आधार कार्ड को लेकर लोग परेशान हैं। शहर में आधार सेवा केन्द्रों की कमी के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>पंखें भी नहीं, पानी का भी संकट</strong><br />एरोड्राम स्थित आधार सेवा केन्द्र पर प्रतिदिन काफी संख्या में आवेदक पहुंच रहे हैं। आवेदकों की संख्या की तुलना में आधार सेवा केन्द्र पर व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। बुधवार को जब दैनिक नवज्योति की टीम यहां पहुंची तो आधार कार्ड से सम्बंधित कार्य को लेकर यहां पहुंचे आवेदक काफी परेशान नजर आए। आधार सेवा केन्द्र के बाहर महिला-पुरुष आवेदकों की कतार लगी हुई। यहां पर पंखे की सुविधा नहीं होने से सभी गर्मी से बेहाल थे। पेयजल की भी व्यवस्था नहीं होने से लोगों की निगाहें पानी को तलाश कर रही थीं। </p>
<p><strong>काफी देर में आ रहा था नम्बर</strong><br />आधार सेवा केन्द्र के बाहर मौजूद सुरेश व महेश ने बताया कि ई-मित्र से टोकन कटवाने के बाद यहां पर समय लेकर आया था। इसके बावजूद आधार कार्ड से सम्बंधित कार्य के लिए नम्बर नहीं आ रहा है। ऐसे में टोकन कटवाने का कोई फायदा नहीं है। इसी तरह की पीड़ा वहां खडेÞ अन्य लोगों ने भी जाहिर की। उन्होंने बताया कि यहां पर समय काफी लग रहा है। इसके बावजूद कोई उनकी पीड़ा कोई नहीं देख रहा है। इतनी आवश्यक सेवा बाधित होने के बावजूद प्रशासन उदासीन बना हुआ है। लोगों को आधार कार्ड की जरूरत बैंक खाता खुलवाने, पेनकार्ड बनवाने सहित अन्य आवश्यक कामों के लिए पड़ रही है। आधार कार्ड अपडेट नहीं होने के कारण शासकीय योजनाओं से भी वंचित हो रहे हैं। </p>
<p><strong>10 बजे टोकन, फिर लम्बा इंतजार</strong><br />10 बजे से टोकन के रूप में फॉर्म बांटे जा रहे हैं, लेकिन फॉर्म के बाद भी कई लोग बैरंग लौट रहे हैं। दिन भर में एक सेंटर में मात्र 25-30 आधार कार्ड का काम ही हो पा रहा है और कई आवेदकों को दूसरे दिन बुलाया जा रहा है जबकि हर रोज सैकड़ों लोग कतार में लग रहते हैं। अपडेशन के साथ नया आधार कार्ड बनाने वाले आवेदक परेशान हो रहे हैं क्योंकि जिले में काफी कम सेंटर हैं। उनमें से भी कई सेंटर बंद पड़े हैं। ग्रामीण इलाकों से लोग सुबह से ही शहरी इलाकों में जाकर अपना नंबर लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासन इनके लिए चिंतित नहीं है। पोस्ट आॅफिस खुलने के पहले लोग आॅफिस के सामने अपना नंबर लगा रहे हैं।</p>
<p><strong>एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा रहे </strong><br />कहने को तो सरकार ने आधार कार्ड की योजना जमीनी स्तर पर लगाकर लोगों के किए अच्छा काम किया, लेकिन उनके जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इनकी जिम्मेदारी ना समझते हुए आवेदकों को एक जगह से दूसरी जगह घुमाया जा रहा है। जिला मुख्यालय पर ही कई आवेदकों को बैंकों के कर्मचारियों द्वारा पोस्ट आॅफिस भेजा जा रहा है, जिससे पोस्ट आॅफिस में ज्यादा भीड़ हो रही है और समय पर आधार का काम नहीं हो रहा है। आवेदकों को यहां से वहां जाकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पोस्ट आॅफिस के कर्मचारियों ने बताया कि बैंक के कर्मचारी हमारे यहां अधिकांश आवेदकों को भेज रहे हैं और कह रहे हैं कि पोस्ट आॅफिस में आधार बनेगा।</p>
<p>एरोड्राम चौराहे पर स्थित आधार सेवा केन्द्र केन्द्र सरकार हैं। इसकी सारी व्यवस्थाएं यूआईडीएआई की ओर से संचालित की जाती है। पूर्व में इस केन्द्र पर अव्यवस्थाओं की शिकायत आने पर जिला कलक्टर के माध्यम से नोटिस देकर जवाब तलब भी किया गया था। अब भी यदि किसी को कोई शिकायत है तो वह केन्द्र के मैनेजर को बता सकता है। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर हमसे शिकायत कर सकता है। वैसे पूरे जिले में 100 से अधिक आधार सेवा केन्द्र हैं। बैंकों और डाकघरों में आधार कार्ड सम्बंधित कार्य किए जा रहे हैं। <br /><strong>- मुकेश विजय, उपनिदेशक, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>आवेदकों की पीड़ा</strong><br />मैं और मेरे बेटा आधार कार्ड बनवाने के लिए 4 दिन से भटक रहे हैं। कई दिन से नंबर लगाने आ रही हूं और आज नंबर आया है। स्कूलों में एडमिशन शुरू हो गए हैं। बिना आधार कार्ड के एडमिशन नहीं दिया जा रहा है। यहां पर सुविधाएं नहीं होने से काफी परेशानी हो रही है।  <br /><strong>- हेमलता गुप्ता,  आवेदक</strong></p>
<p>मेरे आधार कार्ड में मोबाइल नम्बर नहीं हैं। मोबाइल नम्बर जुड़वाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ईमित्र से टोकन कटवा कर समय व तारीख लेकर आया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सुबह 10 बजे से कतार में लगा हुआ हंू पता नहीं कब नम्बर आएगा।<br /><strong>- विवेक परमार, आवेदक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2023 15:55:02 +0530</pubDate>
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                <title>लम्पी ने लगाया पशुओं की धरपकड़ पर ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[ करीब तीन माह पहले पशुओं विशेष रूप से गायों में लम्पी रोग फेलने पर सरकार व प्रशासन द्वारा पशुओं के आवागमन पर ही रोक लगा दी। जिससे पशु मेले समेत पशुओं से जुड़े अन्य आयोजन भी नहीं हो सके। नगर निगम द्वारा भी सड़कों से पशुओं को पकड़ने का काम बंद कर दिया गया। करीब तीन महीने से अधिक का समय हो गया। जिनमें गिनती के ही पशु पकड़े हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lumpy-applied-brakes-on-the-capture-of-animals/article-29207"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/lampi-ne-lagaya-pashuo-ki-dhar-pakad-par-break...kota-news-10.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में लावारिस हालत में घूमने वाले पशुओं को पकड़ने का काम नगर निगम का है। लेकिन पशुओं में फेले लम्पी रोग ने पशुओं को पकड़ने पर ही ब्रेक लगा दिया है। पिछले काफी समय से निगम ने पशुओं को घेरा डालकर नहीं पकड़ा है। निगम के कायन हाउस में वर्तमान में करीब एक दर्जन से अधिक पशु लग्पी रोग से पीड़ित हैं। शहर में मेन रोड से लेकर गलियों और चौराहों पर बड़ी संख्या में पशु लावारिस हालत में खड़े  व बैठे हुए नजर आ जाएंगे। जिनसे यातायात बाधित हो रहा है। ऐसे पशुओं को पकड़ने का काम नगर निगम का है। निगम ऐसे पशुओं को पकड़कर निगम के कायन हाउस व गौशाला में रखता है। जिन्हें छोड़ने पर भारी जुर्माना भी वसूल किया जा रहा है। जिससे पशु पालक अपने पशुओं को लावारिस हालत में सड़क पर नहीं छोड़े। नगर निगम ने पशुओं को पकड़ने का ठेका दिया हुआ है। कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण निगम में अलग-अलग ठेका होने से पशुओं को पकड़कर गौशाला में भेजा जाता है। हालत यह है कि करीब तीन माह पहले पशुओं विशेष रूप से गायों में यह रोग फेलने पर सरकार व प्रशासन द्वारा पशुओं के आवागमन पर ही रोक  लगा दी। जिससे पशु मेले समेत पशुओं से जुड़े अन्य आयोजन भी नहीं हो सके। इधर नगर निगम द्वारा भी सड़कों से पशुओं को पकड़ने का काम बंद कर दिया गया। करीब तीन महीने से अधिक का समय हो गया। जिनमें गिनती के ही पशु पकड़े हैं। </p>
<p><strong>कायन हाउस को बनाया आइसोलेशन सेंटर</strong><br />नगर निगम की ओर से सड़कों से लावारिस हालत में पकड़े गए पशुओं को सबसे  पहले किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में रखा जाता है।  वहां से यदि पशु पालक उन्हें छुड़वा लेते हैं तो ठीक वरना उन्हें वहां से बंधा धर्मपुरा स्थित निगम की गौशाला में भेज दिया जाता है। हालत यह है कि लम्पी रोग आने के बाद निगम ने पशुओं को पकड़ना बंद कर दिया। साथ ही पशु पालक विभाग द्वारा कायन हाउस को आईसोलेशन सेंटर बना दिया। जहां लम्पी रोग से ग्रसित पशुओं को रखा जा रहा है। वर्तमान में भी यह आईसोलेशन सेंटर ही बना हुआ है। इस कारण से अभी तक भी निगम ने पशुओं को पकड़ने का काम शुरू नहीं किया है। </p>
<p><strong>लम्पी रोग से 180 पशु ग्रसित</strong><br />रोग शुरू होने के बाद से बुधवार तक निगम के कायन हाउस में कुल 180 पशु लम्पी ग्रसित  जा चुके हैं। जिनमें से करीब 155 से अधिक इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। जिन्हें पहले कायन हाउस के बाहर पशु आवक बाड़े में रखा हुआ था। ठीक होने पर उन्हें अंदर बाड़े में शिफ्ट कर दिया गया। वर्तमान में एक दर्जन से अधिक पशु लम्पी रोग से ग्रसित हैं। </p>
<p><strong>तीन माह से नहीं पकड़े पशु</strong><br />नगर निगम द्वारा संवेदक के माध्यम से लावारित पशुओं को पकड़ा जा रहा था। लेकिन करीब तीन माह से पशुअं को घेरा डालकर नहीं पकड़ा गया है। जिससे शहर की सड़कों से पशुओं का जमावड़ा कम नहीं हो पा रहा है। किशोरपुरा स्थित कायन हाउस मे कुल 180 पशु हैं ये सभी लम्पी रोग से ग्रहित या उससे ठेक हुए पशु ही हैं। इससे पहले पकड़े गए सभी पशुओं को निगम की गौशाला में शिफ्ट किया जा चुका है। </p>
<p><strong>गौशाला में करीब दो हजार पशु</strong><br />नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 2 हजार पशु बंद हैं। ये सभी लम्पी रोेग के आने से पहले के हैं। पकड़े गए पशुओं में से गिनती के पशुओं को जो दूध देने वाले हैं उन्हें ही पशु पालक छुड़वाकर ले गए हैं। जबकि  अधिकतर अभी भी गौशाला में ही हैं। </p>
<p> लम्पी लगने के बाद से पशुओं को घेरा डालकर पकड़ना बंद किया हुआ है। कायन हाउस में जहां नई आवक पशुओं को रखा जाता था। उसे आईसोलेशन सेंटर बनाया हुआ है। ऐसे में वहां पशुओं को नहीं रख सकते हैं। कायन हाउस में वर्तमान में करीब 180 पशु लम्पी रोग के आ चुके हैं। जिनमें से अधिकतर ठीक हो गए हैं। अभी भी कुछ पशु इस रोग से ग्रसित हैं जिनका उपचार किया जा रहा है। <br /><strong>- दिनेश शर्माा, प्रभारी अधिकारी, नगर निगम गौशाला </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Nov 2022 16:14:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लंपी से ग्रसित गायों का इलाज जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले 24 घंटों में लम्पी रोग से पीड़ित एक भी गौवंश की मृत्यु नहीं हुई बताते हैं। मौके पर ही गौवंश के बचाव हेतु आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/churu/treatment-of-cows-suffering-from-lumpi-continues/article-19693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/119.jpg" alt=""></a><br /><p>सरदारशहर। गांधी विद्या मंदिर द्वारा संचालित स्वामीश्री रामशरण महाराज लम्पी केयर व क्वारनटाइन सेंटर बुकनसर फ ांटा का पशु चिकित्सालय में नोडल अधिकारी डॉ. केशरीचंद नाई ने टीम सहित निरीक्षण किया। मौके पर 93 गौवंश लम्पी से ग्रसित पाई गई। जिन्हे लम्पी केयर व क्वारनटाइन सेंटर में भर्ती रखा गया हैं। जहां पर्याप्त छाया, पानी, चिकित्सा एलोपैथी व आयुर्वेद सहित समुचित व्यवस्था हैं। पिछले 24 घंटों में लम्पी रोग से पीड़ित एक भी गौवंश की मृत्यु नहीं हुई बताते हैं। मौके पर ही गौवंश के बचाव हेतु आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। गांधी विद्या मंदिर द्वारा संचालित यह सेंटर स्वयं आयुर्वेदिक दवा बना कर गौवंश को दे रहा हैं। औषधि उत्पादन एकाई का निरीक्षण भी किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चूरू</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Aug 2022 13:13:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी से बेहाल लोगों ने इंद्रदेव को मनाने के लिए शुरू किये प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[ बाड़ी। जून महीने का अंतिम सप्ताह चल रहा है और आषाढ़ मास भी आधा बीत गया है लेकिन बारिश का दौर अभी क्षेत्र में शुरू नहीं हुआ। इसी के चलते जहां किसानों को खेतों में पड़े बीज के सड़ने की आशंका सता रही है। आमजन का भी उमस भरी गर्मी में हाल-बेहाल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/people-suffering-from-heat-started-efforts-to-persuade-indradev/article-13219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/m-1.jpg" alt=""></a><br /><p> बाड़ी। जून महीने का अंतिम सप्ताह चल रहा है और आषाढ़ मास भी आधा बीत गया है लेकिन बारिश का दौर अभी क्षेत्र में शुरू नहीं हुआ। इसी के चलते जहां किसानों को खेतों में पड़े बीज के सड़ने की आशंका सता रही है। आमजन का भी उमस भरी गर्मी में हाल-बेहाल है। ऐसे में बड़े बुजुर्गों द्वारा बारिश को लेकर किए जाने वाली पुरानी परंपराओं की फिर से याद आ रही है और उनको करने के साथ ईश्वर से बारिश को लेकर प्रार्थना की जाने लगी है। मंगलवार को शहर के किला परिसर में रूठे हुए बारिश के देवता इंद्रदेव को मनाने के लिए दाल-रोटी का प्रसाद लगाया गया। जिसे बिना पानी ही भोजन के रूप में छोटे बच्चों को खिलाया गया। पुरानी मान्यता है कि इससे बारिश के देवता इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश होती है। किला निवासी नरेश यादव ने बताया कि उनके बड़े बुजुर्गों से इस प्रकार का कार्यक्रम होता चला आ रहा है।</p>
<p>जब भी मानसून रूठता है या क्षेत्र में बारिश नहीं होती तो किले के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे बाबा के स्थान पर यह आयोजन होता है। इसी को लेकर किला निवासियों के सहयोग से सामूहिक दाल-रोटी तैयार की गई और छोटे बच्चों के साथ बड़े बुजुर्गों को साथ हर राहगीर को खिलाया गया। जिसमें खाने के दौरान पानी नहीं दिया गया। पानी के लिए ईश्वर से पानी मांगने की बात कही। बाड़ी उपखण्ड मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र में दाल-रोटी का यह प्रसाद बारिश को लेकर लगाया जाता है। जो सिद्ध स्थान या मंदिर और आश्रमों पर होता है। ग्रामीण लोग भी अपने गांव की चौपाल पर ऐसा आयोजन करते हैं। जिसमें खूब मसाले की दाल तैयार की जाती है। जिसे मोटी रोटी अंगा के साथ परोसा जाता है लेकिन भोजन के दौरान पानी के लिए पानी नहीं दिया जाता। जब छोटे बच्चे दाल-रोटी खाकर पानी मांगते हैं तो इंद्र देव प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश होती है। अब देखना यह है कि ऐसी परंपरागत रूप से चली आ रही परम्पराओ द्वारा बारिश को लेकर किए जा रहे प्रयासों का कितना असर रूठे मानसून पर होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 15:41:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानसून में देरी, उमस और गर्मी से बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। राज्य में अगले दो दिन में मानसून की एंट्री होगी। पिछले 10 दिन से मध्य प्रदेश, गुजरात में अटका मानसून आगे बढ़कर राजस्थान की सीमा पर पहुंच गया है और जल्द ही डूंगरपुर-बांसवाड़ा-झालावाड़ के रास्ते प्रदेश में प्रवेश कर जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/monsoon-delayed--suffering-from-humidity-and-heat/article-13136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/garmi.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में अगले दो दिन में मानसून की एंट्री होगी। पिछले 10 दिन से मध्य प्रदेश, गुजरात में अटका मानसून आगे बढ़कर राजस्थान की सीमा पर पहुंच गया है और जल्द ही डूंगरपुर-बांसवाड़ा-झालावाड़ के रास्ते प्रदेश में प्रवेश कर जाएगा। मौसम विभाग ने बुधवार को 15 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।</p>
<p>मौसम विभाग के मुताबिक अगले 48 घंटे में प्रदेश के कई भागों में बरसात का सिलसिला शुरू हो सकता है। प्रदेश के तीन जिलों झालावाड़, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ जिलों में भारी बरसात की संभावना है। वहीं राजधानी जयपुर सहित अजमेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बूंदी, बारां, डूंगरपुर, राजसमंद, कोटा, टोंक, सवाई माधोपुर, उदयपुर जिलों में तेज हवा के साथ बरसात का अलर्ट जारी किया है।आज भी कई जिलों में बरस सकते हैं मेघ15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट|</p>
<p><strong>सात जिलों में पारा 43 डिग्री पार</strong><br />भीषण गर्मी में मंगलवार को प्रदेश के सात जिलों में दिन का तापमान 43 डिग्री के पार दर्ज किया गया। इनमें फलौदी में सर्वाधिक 45.4, बीकानेर में 44.2, श्रीगंगानगर में 44.2, जैसलमेर 44.2, नागौर 43.9, बाड़मेर 43.6 और चूरू में 43.5 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। वहीं अन्य जिलों में भी पारा 40 डिग्री के पार दर्ज किया गया।</p>
<p><strong>कोटा संभाग में भारी बारिश का अलर्ट</strong><br />28 जून को कोटा संभाग के बारां, झालावाड़, कोटा और चित्तौड़गढ़ जिले में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा 29 और 30 जून को बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, बारां, कोटा, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा समेत अन्य जिलों में मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। एक जुलाई को दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के अलावा पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, पाली, जालौर समेत आसपास के जिलों में बारिश होने की संभावना है।</p>
<p><strong>कूलर-पंखे हुए फेल</strong><br />बारिश नहीं होने से राजस्थान में गर्मी और उमस से लोग परेशान है। राज्य में बीती रात और सोमवार को भी उमस के साथ भीषण गर्मी से लोग बेहाल हो गए। जयपुर में बीते दो दिन से तेज गर्मी और उमस से कूलर-पंखे फेल हो गए हैं। इस बीच प्रदेश में सोमवार को फलौदी 45.2 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा। बीती रात 15 जिलों का पारा 30 डिग्री या इससे अधिक रहा। वहीं मंगलवार को राजधानी जयपुर का अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री रहा, वहीं बीती रात का तापमान 31 डिग्री दर्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 12:41:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीसीसी के बाहर बेरोजगारों का धरना, पुलिस ने जबरन हटाया, दिल्ली कूच की तैयारी, चुनावों में भुगतने की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। प्रदेश के बेरोजगार गुरूवार को शहीद स्मारक से सड़कों पर उतर कर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी पीसीसी में जमे बैठे हैं। उनकी मांग आश्वासनों को धरातल पर उतारने की है। बेरोजगार स्पष्ट कह रहे हैं कि जब तक इनकी नहीं सुनी जाएगी ये डटे रहेंगे और नहीं हटेंगे। बुधवार को शहीद स्मारक पर धरना दे रहे बेरोजगारों और पुलिस के बीच खूब हाथापाई भी हुई थी पुलिस ने लाठियां भी भांजी थीं।

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/unemployment-picket-outside-pcc--preparations-for-delhi-march--warning-of-suffering-in-elections/article-12345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/dh.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> प्रदेश के बेरोजगार गुरूवार को शहीद स्मारक से सड़कों पर उतर कर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी पीसीसी में जमे बैठे हैं। उनकी मांग आश्वासनों को धरातल पर उतारने की है। बेरोजगार स्पष्ट कह रहे हैं कि जब तक इनकी नहीं सुनी जाएगी ये डटे रहेंगे और नहीं हटेंगे। हालांकि थोड़े समय बाद उपेन यादव और सैकड़ो बेरोजगारों को पीसीसी कार्यालय से लाठी चार्ज करके घसीटकर अज्ञात थाने में ले जाया गया। बुधवार को शहीद स्मारक पर धरना दे रहे बेरोजगारों और पुलिस के बीच खूब हाथापाई भी हुई थी पुलिस ने लाठियां भी भांजी थीं।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>दिल्ली कूच की तैयारी</strong></span></p>
<p>शहीद स्मारक पर हुई झड़प के बाद पुलिस ने आंदोलन कर रहे युवाओं पर मुकदमे भी दर्ज कर दिए थे विधायकपुरी थाने में 8 लोगों के नाम शामिल हैं जिन पर धारा 144 लगाई गई है। बेरोजगारों ने आज सुबह दिल्ली कूच का आह्वान कर दिया जिसके बाद हजारों की संख्या में बेरोजगार युवा दिल्ली के लिए निकलने से पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय के बाहर आकर नारेबाजी करने लगे। इसे देखते हुए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। यहीं से बात और बिगड़ गई। राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेंद्र यादव ने साफ कह दिया कि वो यहीं धरने पर बैठेंगे, तब तक जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती इसके लिए चाहें पुलिस चाहे जेल में डाल दें या फिर लाठियां मारे।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>चुनावों में भुगतेगी सरकार</strong></span></p>
<p>उपेन यादव ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि नतीजे राजनैतिक तौर पर उसे भुगतने पड़ेंगे। आरोप लगाया कि सरकार अपने वायदे से मुकर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने बजट में जो भर्तियों की घोषणा की थी, उन्हें भी अब तक पूरा नहीं किया है। इसका खामियाजा आने वाले विधानसभा चुनाव में भी सरकार को भुगतना पड़ेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 14:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुदरत के साथ अस्पताल भी दे रहा दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्य सरकार ने तो अस्पतालों में मरीजों के लिए उपचार से लेकर दवाई तक और जांचों से लेकर पर्ची तक की सुविधा नि:शुल्क कर दी है, लेकिन अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को  बीमारी से अधिक व्यवस्थाओं के दर्द के पीड़ा भुगतनी पड़ रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/along-with-nature--the-hospital-is-also-giving-pain/article-11821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/13245.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार ने तो अस्पतालों में मरीजों के लिए उपचार से लेकर दवाई तक और जांचों से लेकर पर्ची तक की सुविधा नि:शुल्क कर दी है, लेकिन अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को  बीमारी से अधिक व्यवस्थाओं के दर्द के पीड़ा भुगतनी पड़ रही है। ऐसा ही स्थिति जे.के. लोन अस्पताल में आने वाले थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों व उनके परिजनों की है। अस्पताल में संचालित थैलीसीमिया वार्ड को कुछ समय पहले अस्पताल परिसर में ही नए बने भवन जीएमएमटीसीा में शिफ्ट किया है, जबकि अस्पताल के थैलीसीमिया वार्ड को एनआईसीयू बना दिया है। वहीं थैलीसीमिया का नया वार्ड नए ओपीडी ब्लॉक में तैयार किया जा रहा है। <br /><br /><strong>एक घंटे का उपचार, चार घंटे का इंतजार</strong><br />थैलीसीमिया वार्ड में बच्चों को रक्त चढ़वाने आए परिजनों ने बताया कि उन्हें रक्त चढ़वाने में अधिक समय नहीं लगता है। उससे अधिक समय बच्चों को अस्पताल में भर्ती  व डिस्चार्ज करवाने की व्यवस्थाओं में लग रहा है। साथ ही परेशानी भी अधिक हो रही है। रंगबाड़ी निवासी तीरथ सिंह व स्वामी विवेकानंद नगर निवासी सुरजीत सिंह ने बताया कि उनके बच्चे थैलीसीमिया पीड़ित हैं। जिन्हें हर सप्ताह रक्त चढ़वाने के लिए जे.के. लोन अस्पताल लाना पड़ रहा है। अस्पताल में बच्चों को रक्त चढ़वाने से पहले काउंटर पर पर्ची बनवाने और उसके बाद भामाशाह काउंटर पर औपचारिकताएं पूरी करने में समय अधिक लग रहा है। भामाशाह काउंटर पर ही थैलीसीमिया पीडितों का भी काम किया जा रहा है। ऐसे में काउंटर पर बैठे कर्मचारी पहले भामाशाह के मरीजों का काम करते हैं, फिर उसके बाद बच्चों का। ब्लड बैंक से ब्लड लाने तक का काम उन्हें ही करना पड़ रहा है। रक्त चढ़ाने के बाद डिस्चार्ज के समय फिर से वही औपचारिकताएं करनी पड़ती हैं। जिससे समय अधिक लग रहा है। <br /><br /><strong>हर सप्ताह पूरी औपचारिकताएं</strong><br />बच्चों के परिजनों का कहना है थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को हर सप्ताह रक्त चढ़वाने के लिए अस्पताल लाना पड़ रहा है। उसमें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन हर सप्ताह भर्ती से लेकर डिस्चार्ज तक पूरी औपचारिकताएं करनी पड़ रही हैं। जिससे परेशानी अधिक हो रही है। परिजनों का कहना है कि औपचारिकताओं को पूरा करने में जितना समय लगता है उतनी देर तक बच्चे भी उनके साथ ही कतार में खड़े रहते हैं। यदि  हर सप्ताह की जगह एक महीने का कार्ड बना दिया जाए तो यह परेशानी समाप्त हो सकती है। <br /><br />जे.के. लोन  अस्पताल में 30 बैड का थैलीसीमिया वार्ड है। उसमें वर्तमान में आईसीयू संचालित हो रहा है। थैलीसीमिया वार्ड को फिलहाल जीएमएमटीसी में संचालित किया जा रहा है। थैलीसीमिया का नया वार्ड नए ओपीडी में बन रहा है। जहां 30 बैड का वार्ड होगा। उसके तैयार होने के बाद वार्ड को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। बच्चों व परिजनों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए व्यवस्था को सही करवा देंगे। <strong>- डॉ. एच.एल. मीना, अधीक्षक जे.के. लोन अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/along-with-nature--the-hospital-is-also-giving-pain/article-11821</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jun 2022 16:16:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> मंहगाई को लेकर सरकार पर राहुल की दो पंक्ति कविता </title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी ने ट्वीट किया राजा करे महल की तैयारी, प्रजा बेचारी महंगाई की मारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/former-congress-president-rahul-gandhi--in-a-two-line-poem-on-inflation---took-a-jibe-at-the-government--saying-that-it-is-busy-building-a-palace-of-prosperity-for-itself-and-the-public-is-suffering-from-inflation/article-6762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल से लेकर खाद्य पदार्थों तक में महंगाई साफ नजर आ रही है। बढ़ती कीमतों और महंगाई से देश में कोई चीज पहुंच से बाहर नही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महंगाई को लेकर दो पंक्ति की कविता में सरकार पर शनिवार को  तीखा तंज करते हुए कहा कि वह अपने लिए खुशहाली का महल बनाने में जुटी है  और जनता महंगाई की मार से त्रस्त है।</p>
<p><br />गांधी ने ट्वीट किया राजा करे महल की तैयारी, प्रजा बेचारी महंगाई की मारी। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के कुछ ट्वीट को उद्धृत किया है जिनमें कहा गया है कि पेट्रोल डीजल की कीमतें आउट ऑफ कंट्रोल हो गई हैं और पांच दिन में इनकी दर 3.20 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है जबकि घरेलू सिलेंडर गैस की कीमत 50 रुपये तक महँगी हो गई है।</p>
<p>इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के कुछ ट्वीट को उद्धृत किया है जिनमें कहा गया है कि पेट्रोल डीजल की कीमतें आउट ऑफ कंट्रोल हो गई है और पांच दिन में इनकी दर 3.20 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है जबकि घरेलू सिलेंडर गैस की कीमत 50 रुपये तक महंगी हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 13:33:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>20 साल से बिस्तर पर सिमटी थी जिंदगी, सर्जरी बाद मिला नया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[20 साल से बिस्तर पर ही जिंदगी गुजारने को मजबूर 28 वर्षीय युवक को जटिल सर्जरी कर नया जीवन मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/life-was-confined-to-bed-for-20-years--got-new-life-after-surgery-the-patient-was-suffering-from-ankylosing-spondylitis/article-6585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/qq.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। 20 साल से बिस्तर पर ही जिंदगी गुजारने को मजबूर 28 वर्षीय युवक को जटिल सर्जरी कर नया जीवन मिला है। युवक एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी से पीड़ित था, जिसके कारण उसका दायां कूल्हे का जोड़ फ्यूज्ड हो चुका था। इससे न तो वह चल पा रहा था और न ही ठीक से बैठ पाता था। शैल्बी हॉस्पिटल के सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. धीरज दुबे ने अत्याधुनिक तकनीक से मरीज के अविकसित हिप जॉइंट को दोबारा बनाया और सर्जरी कर उसे फिर से चलने योग्य बना दिया। डॉ. दुबे ने बताया कि ऐसे केस में मरीज की सामान्य जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी नहीं हो सकती। इस केस में कूल्हे के जोड़ को दोबारा बनाने के लिए डबल विंडो एक्सपोजर तकनीक का उपयोग कर मरीज को विशेष तरह का ड्यूल मोबिलिटी कप जॉइंट लगाया गया, ताकि जोड़ की चाल सामान्य हो सके। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 15:19:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों का कमाल : बिना हड्डी काटे छह साल के बच्चे के दिल में छेद का किया सफल ऑपरेशन, टोसिंग बिंग नामक बीमारी से ग्रसित था</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चे को टोसिंग बिंग यानि दिल में छेद की समस्या जन्म से ही थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amazing-of-doctors-of-sms-hospital--successful-operation-of-hole-in-the-heart-of-six-year-old-child-without-cutting-bone--was-suffering-from-a-disease-called-tossing-binge/article-4649"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/13.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। एसएमएस अस्पताल के कार्डियो थोरेसिक विभाग के चिकित्सकों ने एक छह साल के बच्चे के दिल में छेद की विकृति का बिना छाती की हड्डी काटे सफल ऑपरेशन किया है। बच्चे को टोसिंग बिंग यानि दिल में छेद की समस्या जन्म से ही थी। सामान्यतया ओपन हार्ट सर्जरी छाती की हड्डी (स्टर्नम) को काट कर की जाती है लेकिन इस केस में छाती में बांयी तरफ  छोटे से चीरे के जरिए बिना छाती की हड्डी काटे सर्जरी की गई है। विभाग के चिकित्सकों ने दावा किया है कि यह सर्जरी अपने आप में विश्व की पहली सर्जरी है और इसका मेडिकल जर्नल्स में अभी तक उल्लेख नहीं हैं।<br /><br /><strong>एक ही छोटे से चीरे से सर्जरी के फायदे</strong><br />    यह सर्जरी पारम्परिक उपकरणों से की जा सकती है और इसके लिए बहुत ज्यादा खर्चे और विशिष्ट उपकरणों की आवश्यकता नहीं है।<br />    बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम।<br />    सर्जरी के दौरान कम खून की आवश्यकता।<br />    छाती की हड्डी काटने से होने वाले इन्फेक्शन का कोई खतरा नहीं।<br />    जांघ में कोई अतिरिक्त चीरा नहीं लगाना पड़ता।<br />    मिनिमल इनवेसिव सर्जरी के दौरान जांघ में केन्युलेशन से होने वाले दुष्परिणामों से मुक्ति और पैरों में रक्त अवरोध से होने वाले नुकसान का कोई खतरा नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 14:35:18 +0530</pubDate>
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                <title>सर्दी में 35 % तक बढ़ जाते हैं स्ट्रॉक</title>
                                    <description><![CDATA[अल्कोहल, धूम्रपान, जंकफूड के कारण 40 से कम उम्र के लोग भी हो रहे स्ट्रोक से पीड़ित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-35---%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A5%9D-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%89%E0%A4%95/article-3501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/stroke.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी वैसे-वैसे आमजन को बीमारियां जकड़ना शुरू कर देंगी। कड़ाके की ठंड बुजुर्गों के लिए घातक होती है। इस मौसम में खासतौर पर 60 साल से अधिक की आयु वाले लोगों को स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है। वहीं मोटापा, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी स्ट्रोक का खतरा रहता है। सर्दियों में स्ट्रोक से होने वाली मौतों के मामले 25 से 35 फीसदी तक बढ़ जाते हैं। वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि सर्दी में शरीर के तापमान में कमी और विटामिन-डी के स्तर में कमी और रक्त के गाढ़ेपन में वृद्धि स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा देती है। वहीं ठंडी तेज हवा शरीर के तापमान को और कम कर देती है। इस कारण ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा ज्यादा रहता है। खून की धमनियों में सिकुड़न या क्लॉटिंग  से मस्तिष्क में खून का प्रवाह बाधित होने पर स्ट्रोक पड़ता है, जबकि मस्तिष्क के भीतर खून की धमनियां फटने पर ब्रेन हैमरेज होता है।<br /> <br /> <strong>30 फीसदी युवाओं में स्ट्रोक</strong><br /> डॉ. सिंह ने बताया कि युवाओं में बढ़ते अल्कोहल, धूम्रपान, जंकफूड के चलन के कारण आज बुजुर्गों के साथ युवा भी स्ट्रोक की चपेट में आने लगे हैं। स्ट्रोक के कुल पीड़ितों में 30 फीसदी युवा हैं, जिनकी उम्र 40 से कम है। साल दर साल यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। इन युवाओं में 80 फीसदी पुरुष हैं।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>ऐसे बचें</strong></span></span><br /> जहां तक हो सके गुनगुना पानी पीएं। सुबह जल्दी सैर या मॉर्निंग वॉक करें। ठंड से बचने के लिए शरीर को पूरी तरह से खासतौर से सिर को ढांक कर रखें। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल व मधुमेह के मरीज नियमित दवा खाएं और इन्हें कंट्रोल में रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Dec 2021 15:09:50 +0530</pubDate>
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