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                <title>Economic Cooperation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Economic Cooperation RSS Feed</description>
                
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                <title>मिडिल ईस्ट तनाव के चलते जयपुर में होने वाली ब्रिक्स वित्त मंत्रियों की बैठक स्थगित</title>
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                        <![CDATA[मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और हवाई मार्गों में व्यवधान के कारण जयपुर में 5-6 मार्च को होने वाली BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक स्थगित कर दी गई है। भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन को प्रतिनिधियों की सुरक्षा और यात्रा बाधाओं के चलते टाला गया है। नई तारीखों का निर्धारण जल्द किया जाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/brics-finance-ministers-meeting-to-be-held-in-jaipur-postponed/article-145168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/brics.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। 5 और 6 मार्च को जयपुर में आयोजित होने वाली BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की महत्वपूर्ण बैठक स्थगित कर दी गई है।  मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय यात्रा मार्गों पर पड़े असर के कारण यह निर्णय लिया गया है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर उड़ानों और ट्रांजिट रूट्स में व्यवधान की स्थिति को देखते हुए प्रतिनिधियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसी के मद्देनजर बैठक को फिलहाल टालने का फैसला किया गया।</p>
<p>BRICS India Finance Track टीम ने बैठक स्थगित किए जाने पर खेद जताया है। टीम की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “हमें इससे होने वाली असुविधा के लिए गहरा अफसोस है, लेकिन हमारे प्रतिनिधियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स फाइनेंस ट्रैक के एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता बरकरार है।</p>
<p>बयान में आगे कहा गया कि अगले कदमों और नई तिथि को लेकर सदस्य देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस बैठक में वैश्विक आर्थिक सहयोग, वित्तीय स्थिरता और बहुपक्षीय विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 11:44:15 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर पहली परामर्श समिति की बैठक: देश के स्थायी हितों की रोशनी में तय होगी विदेश नीति, विदेश मंत्री ने दी भारत-ईयू के मजबूत होते सहयोग पर जानकारी</title>
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                        <![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2026 की पहली परामर्श समिति बैठक में भारत-ईयू के मजबूत रिश्तों की सराहना की। ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत व्यापार, तकनीक और सुरक्षा पर सहमति बनी है। $136 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार के साथ, यह सौदा 2 अरब उपभोक्ताओं को जोड़कर वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक-चौथाई हिस्से को नई गति देगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-consultation-committee-meeting-on-india-european-union-relations-will/article-145018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वर्ष 2026 की भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर पहली परामर्श समिति की बैठक आयोजित की। इस बैठक में भारत-ईयू के मजबूत होते सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में आपकी लाभकारी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विदेश मंत्री ने शुक्रवार देर शाम को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट करते हुए बताया, भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर 2026 की पहली परामर्श समिति की बैठक आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी की मजबूत गति और व्यापार, टेक्नोलॉजी, सुरक्षा और गतिशीलता सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसके पारस्परिक लाभकारी पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक के एक प्रतिभागी ने कहा कि अब विदेश नीति के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों में अपूर्व सहमति है। वे मानते हैं कि हमारी विदेश नीति देश के स्थायी हितों की रोशनी में तय होने चाहिए, न कि दबाव समूहों की ब्लैक मेलिंग से। </p>
<p>उन्होंने कहा कि अब तुष्टीकरण के लिए विदेश नीति तय नहीं की जाएगी। उसका पैमाना होगा देश का हित।  एस जयशंकर ने बैठक में सक्रिय भागीदारी के लिए सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया। साथ ही इस मीटिंग की फोटोज भी सोशल मीडिया पर शेयर की। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल में ही मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), जिसे मदर ऑफ ऑल डील्स हुआ है। यह व्यापार समझौता हाल ही में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उसुर्ला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किया गया। इस समझौते से लगभग 2 अरब उपभोक्ता और दुनिया की कुल जीडीपी के करीब एक-चौथाई हिस्से को एक साथ लाने का वादा किया गया है। यूरोपीय संघ और भारत ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पहली बार 2007 में शुरू की थी, लेकिन कुछ मुद्दों के कारण 2013 में बातचीत स्थगित कर दी गई थी। जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू की गई।</p>
<p>यूरोपीय संघ एक समूह के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर का था। इसमें निर्यात करीब 76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60 अरब अमेरिकी डॉलर का था। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:50:48 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता: अमेरिका ने बांग्लादेशी वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19% किया, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूती पर दिया जोर</title>
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                        <![CDATA[अमेरिका-बांग्लादेश के बीच नए व्यापार समझौते से आयात शुल्क घटेगा। वस्त्र, कृषि, ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-bangladesh-trade-agreement-us-reduced-import-duty-on-bangladeshi-goods/article-142561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)8.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और बांग्लादेश के बीच एक पारस्परिक व्यापार समझौता हुआ है, जो बांग्लादेश वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19 प्रतिशत कर देगा और कुछ वस्त्र एवं परिधान उत्पादों पर छूट प्रदान करेगा और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने बताया कि यह समझौता एक ऐसा तंत्र स्थापित करेगा जिसके तहत बांग्लादेश के कुछ कपड़ों और परिधान एवं उत्पादों को शून्य पारस्परिक आयात शुल्क प्रदान किया जाएगा। इसके तहत अमेरिकी मूल की सामग्रियों का उपयोग करके बनाए गए कुछ कपड़ा और परिधान उत्पादों के लिए भी छूट दिया गया है। पात्रा आयात की मात्रा का निर्धारण बांग्लादेश द्वारा उपयोग किये गये कपास और मानव निर्मित फाइबर के साथ-साथ अमेरिकी सामग्री के इस्तेमाल के आधार पर किया जाएगा।</p>
<p>व्हाइट हाउस के बयान में बताया गया है कि बांग्लादेश लगभग 3.5 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद करेगा, जिसमें गेहूं, सोया, कपास और मक्का शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 15 वर्षों में लगभग 15 अरब डॉलर ऊर्जा उत्पादों की भी खरीददारी बांग्लादेश द्वारा की जाएगी। साथ ही इसमें अमेरिकी विमानों के खरीद का भी उल्लेख किया गया है।</p>
<p>यह समझौता 2013 में हस्ताक्षरित अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार और निवेश सहयोग मंच समझौते (टीआईसीएफए) पर आधारित है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे एक-दूसरे के बाजारों तक अभूतपूर्व पहुंच के रूप में वर्णित किया है। अमेरिका और बांग्लादेश ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा करना और दोनों देशों के निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करना है।</p>
<p>सौदे के तहत, बांग्लादेश, अमेरिकी औद्योगिक और कृषि सामानों के लिए महत्वपूर्ण तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करेगा, जिसमें रसायन, चिकित्सा उपकरण, मशीनरी, मोटर वाहन और पुर्जे, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी उपकरण, ऊर्जा उत्पाद, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद, गोमांस, पोल्ट्री, ट्री नट्स और फल शामिल हैं।</p>
<p>दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें बांग्लादेश, अमेरिकी वाहन सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों को स्वीकार करने, चिकित्सा उपकरणों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) प्रमाणपत्रों को मान्यता देने और अमेरिकी पुनर्मानिर्मित वस्तुओं और पुर्जों पर प्रतिबंध हटाने के लिए सहमत हुआ है।</p>
<p>बांग्लादेश ने विश्वसनीय सीमाओं के पार डेटा के मुफ्त हस्तांतरण की अनुमति देने और विश्व व्यापार संगठन में इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण पर सीमा शुल्क पर स्थायी रोक का समर्थन करने पर भी सहमति जतायी है। साथ ही कृषि आयात के लिए विज्ञान और जोखिम-आधारित मानकों को अपनाने, बीमा क्षेत्र में बाधाओं को कम करने, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने और अच्छी नियामक प्रथाओं को लागू करने की भी प्रतिबद्धता जताई है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त श्रम अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया है, जिसमें जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित करना और श्रम कानूनों में संशोधन करके संघों की स्वतंत्रता और सामूहिक सौदेबाजी की पूरी तरह से रक्षा करना एवं प्रवर्तन को मजबूत करना शामिल है। समझौते में पर्यावरण संरक्षण, भ्रष्टाचार विरोधी उपाय, बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा और सब्सिडी तथा राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों के कारण होने वाली विकृतियों को दूर करने की प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं। बांग्लादेश भौगोलिक संकेतों पर महत्वपूर्ण प्रावधानों पर सहमत हुआ है, विशेष रूप से पनीर और मांस उत्पादों के लिए।</p>
<p>दोनों देशों ने यह भी कहा कि वे आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन बढ़ाने, शुल्क चोरी का मुकाबला करने, निर्यात नियंत्रण पर सहयोग करने और निवेश पर जानकारी साझा करने के लिए आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि अमेरिका के निर्यात-आयात बैंक और अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम सहित अमेरिकी संस्थान पात्रता और कानून के अधीन बांग्लादेश में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश का समर्थन करने पर विचार करेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 11:49:57 +0530</pubDate>
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                <title>विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार की सहायता न दें पोलैंड </title>
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                        <![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात कर आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' अपनाने और भारत के पड़ोस में आतंकी बुनियादी ढांचे को समर्थन न देने का आग्रह किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/foreign-minister-jaishankar-said-that-poland-should-not-provide-any/article-140127"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jai-shankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने पोलैंड से आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा है कि उसे भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं देनी चाहिए। डा. जयशंकर ने भारत यात्रा पर आये पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ सोमवार को यहां के दौरान प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि पोलैंड इस क्षेत्र के लिए कोई अजनबी नहीं हैं और वह सीमा-पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड को आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनानी चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं करनी चाहिए।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों की बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा स्वाभाविक रूप से शामिल होगी। विशेष रूप से अपने-अपने पड़ोस के संबंध में आकलनों का आदान-प्रदान उपयोगी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष और उसके प्रभावों पर भारत के विचार पहले भी स्पष्ट रूप से साझा कर चुके हैं और उन्होंने जोर देकर कहा है कि चुनकर भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित बल्कि अन्यायपूर्ण भी है। विदेश मंत्री ने कहा कि वह आज एक बार फिर इस बात को दोहरा रहे हैं।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में काफी उथल-पुथल है। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड  अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनकी अपनी-अपनी चुनौतियां और अवसर हैं इसे देखते हुए विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना स्वाभाविक रूप से उपयोगी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध भी निरंतर प्रगति कर रहे हैं लेकिन इन पर निरंतर ध्यान दिये जाने की जरूरत है। </p>
<p>भारत और पोलैंड के बीच परंपरागत रूप से गर्मजोशीपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में ये संबंध उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान तथा सशक्त आर्थिक और लोगों के बीच संपर्कों से आगे बढकर मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2024 की पोलैंड यात्रा के दौरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।</p>
<p>डा. जयशंकर ने कहा कि दोनों देश बातचीत के दौरान 2024 से 28 तक कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे जिसके माध्यम से हम अपनी रणनीतिक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करना चाहते हैं। इसके अलावा व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचार में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7 अरब डॉलर है जिसमें पिछले एक दशक में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पोलैंड में भारतीय निवेश तीन अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जिससे पोलैंड के नागरिकों के लिए रोजगार के अनेक अवसर सृजित हुए हैं। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बड़े बाजार का आकार और निवेश-अनुकूल नीतियाँ वहां के व्यवसायों के लिए अपार अवसर प्रदान करती हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:56:42 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रपति पुतिन का दावा, बोलें रूस-चीन ने 2025 में व्यापार सहयोग को सक्रिय रूप बढ़ावा दिया</title>
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                        <![CDATA[राष्ट्रपति पुतिन ने शी जिनपिंग को भेजे संदेश में 2025 के आर्थिक सहयोग और वीजा-मुक्त यात्रा की सफलता की सराहना की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/president-putin-claims-russia-china-will-actively-promote-trade-cooperation-in/article-137898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/putin-and-chinping.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को कहा कि रूस और चीन ने 2025 में व्यापार एवं आर्थिक सहयोग को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जबकि पारस्परिक वीजा-मुक्त यात्रा ने लोगों के बीच आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाया। चीनी केंद्रीय प्रसारक के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपने नव वर्ष संदेश में कहा, रूस और चीन ने व्यापार एवं आर्थिक सहयोग का सक्रिय रूप से विस्तार किया है और प्रमुख सहयोग परियोजनाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं।</p>
<p>रूसी नेता ने इस बात पर बल दिया कि दोनों देशों के बीच पारस्परिक वीजा-मुक्त यात्रा की शुरुआत होने से लोगों के बीच आदान-प्रदान बहुत सुविधाजनक हुई है। राष्ट्रपति पुतिन ने कथित रूप से कहा, रूस और चीन के बीच संबंध अच्छी तरह से आगे बढ़ रहे हैं और उनसे अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चीनी नेता के साथ घनिष्ठ संपर्क बनाए रखने की अपनी तत्परता व्यक्त की।</p>
<p>चीनी प्रसारक के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और चीनी लोगों के सुख एवं स्वास्थ्य की कामना की।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 14:20:22 +0530</pubDate>
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