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                <title>Exam Stress - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एग्जाम स्ट्रेस से सफलता तक परीक्षा फोबिया</title>
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                        <![CDATA[इन दिनों हमारे देश में परीक्षाओं का दौर चल रहा है और ऐसे समय में बच्चे अक्सर तनाव, अवसाद और डर एक्जाम फोबिया का अनुभव करते हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/exam-phobia-from-exam-stress-to-success/article-143741"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>इन दिनों हमारे देश में परीक्षाओं का दौर चल रहा है और ऐसे समय में बच्चे अक्सर तनाव, अवसाद और डर एक्जाम फोबिया का अनुभव करते हैं। परीक्षा को लेकर उनके मन में अनेक प्रश्न उठते हैं क्या होगा, कैसे होगा, कितने अंक आएंगे, माता पिता क्या कहेंगे, शिक्षक या पड़ोसी क्या सोचेंगे आदि। लेकिन यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि परीक्षा जीवन की अंतिम कसौटी नहीं है। प्रतिस्पर्धा अपने स्थान पर उचित है, परंतु प्रत्येक बच्चे में व्यक्तिगत भिन्नता होती है। सभी की क्षमताएं और प्रतिभाएं अलग अलग होती हैं, इसलिए तुलना करना कभी भी उचित नहीं होता,यह हमें, अभिभावकों व शिक्षकों कोद् समझना चाहिए। किसी में एक गुण होता है तो किसी में दूसरा, इसलिए तुलना के बजाय प्रोत्साहन अधिक आवश्यक है।</p>
<p><strong>संतुलन बनाने का प्रयास करें :</strong></p>
<p>बहरहाल, यहां यह कहना ग़लत नहीं होगा कि परीक्षा का मौसम आते ही घरों का वातावरण भी बदल जाता है। बोर्ड परीक्षाएं हों या प्रवेश परीक्षाएं, लाखों छात्र उम्मीदों और दबाव के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं। ऐसे में केवल अधिक पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सही तरीके से पढ़ाई करना भी जरूरी है, जिसमें शरीर, मन और भावनाओं का संतुलन बना रहे। याद रखिए कि परीक्षा के तनाव से निपटने की शुरुआत शरीर से होती है। कई छात्र देर रात तक जागना या भोजन छोड़ना मेहनत समझ लेते हैं, जबकि पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम ही एकाग्रता तथा स्मरण शक्ति की वास्तविक नींव हैं। पौष्टिक भोजन मस्तिष्क को ऊर्जा देता है और अच्छी नींद पढ़ी हुई जानकारी तथा मुख्य बिंदुओं को याद रखने में सहायक होती है। बड़े पाठ्यक्रम को छोटे छोटे लक्ष्यों में बांटना और पढ़ाई के बीच थोड़े विश्राम लेना भी तनाव को कम करता है।</p>
<p><strong>रैंकिंग तनाव बढ़ा देती है :</strong></p>
<p>भारतीय परंपरा भी मानसिक संतुलन का महत्व बताती है। योग, प्राणायाम और ध्यान,मेडिटेशन जैसे सरल अभ्यास तनाव के समय राहत प्रदान कर सकते हैं। जब शरीर शांत होता है, तो मन भी शांत हो जाता है। प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन शरीर में जमा स्ट्रेस को कम करने में सहायक है, जबकि प्रतिदिन लगभग 10 मिनट का ध्यान मन को स्थिर और स्पष्ट बनाता है, जिससे छात्र घबराहट की बजाय आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर पाते हैं। यदि कक्षा का वातावरण ऐसा हो, जहां गलती को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाए और रटने के बजाय समझ पर जोर दिया जाए, तो परीक्षा का भय काफी कम हो सकता है। इसके विपरीत, बार बार तुलना और रैंकिंग तनाव बढ़ा देती है।</p>
<p><strong>सकारात्मक दृष्टिकोण रखें :</strong></p>
<p>जब शिक्षक यह संदेश देते हैं कि परीक्षा महत्वपूर्ण है, परंतु जीवन की अंतिम कसौटी नहीं, तो छात्रों में स्वस्थ व सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। घर का माहौल भी उतना ही प्रभाव डालता है। यदि माता पिता केवल अंकों पर ध्यान देने के बजाय बच्चों के प्रयास, प्रगति और व्यक्तित्व विकास को महत्व दें, तो बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है। परीक्षा पहचान नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की एक सीढ़ी है। जब छात्र स्वयं को केवल अंकों से नहीं, बल्कि अपनी बहुआयामी प्रतिभा से पहचानते हैं, तब वे इस चुनौतीपूर्ण दौर को संतुलन,साहस और गरिमा के साथ पार कर सकते हैं। परीक्षा को कभी भी फोबिया नहीं बनाना चाहिए और जितना पढ़ा है, उसी पर सकारात्मक रहकर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।</p>
<p><strong>मेहनत का कोई विकल्प नहीं :</strong></p>
<p>याद रखें कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है, जबकि शांत मन, संयम और धैर्य सबसे बड़े गुण हैं। सही खान पान रखें, पर्याप्त नींद लें और सकारात्मक सोच बनाए रखें। माता पिता, अभिभावकों व शिक्षकों को बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए तथा यह समझाना चाहिए कि परीक्षा कोई डरावनी चीज नहीं है। याद रखिए, असफलता हार नहीं होती, बल्कि एक सीख होती है,जो हमें और बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है, इसलिए सबसे जरूरी है स्वयं पर दृढ़ विश्वास रखना। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि परीक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अवश्य है, लेकिन पूरी जिंदगी नहीं। सही तैयारी, संतुलित दिनचर्या, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ छात्र किसी भी परीक्षा का सामना सहजता से कर सकते हैं।</p>
<p><strong>बोझ नहीं रोमांचक चुनौती है :</strong></p>
<p>माता पिता और शिक्षकों का सहयोग, प्रोत्साहन और समझ बच्चों के परीक्षाई तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वास्तव में परीक्षा भय किसी विषय की अज्ञानता से अधिक हमारी मानसिक स्थिति और असफलता के डर से उत्पन्न होता है। यह कोई स्थायी समस्या नहीं है, सही समय प्रबंधन, निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच के माध्यम से इसे पूरी तरह दूर किया जा सकता है। अक्सर छात्र परीक्षा को जीवन मरण का प्रश्न मान लेते हैं, जबकि यह केवल शैक्षणिक मूल्यांकन की एक सामान्य प्रक्रिया है। यदि विद्यार्थी अपनी तैयारी व्यवस्थित रखें और अभिभावक बच्चों की दूसरों से तुलना करना बंद कर दें, तो परीक्षा का बोझ एक रोमांचक चुनौती में बदल सकता है। अंततः सफलता के लिए मानसिक शांति और स्वयं पर विश्वास उतना ही आवश्यक है, जितना कि पाठ्यक्रम का ज्ञान। इसलिए परीक्षा को डर नहीं, अवसर समझकर शांत मन से आगे बढ़ना ही सफलता का सही मार्ग है।</p>
<p><strong>-सुनील कुमार महला</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 11:16:05 +0530</pubDate>
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                <title>परीक्षा पर चर्चा-2026: पीएम मोदी ने कहा, परीक्षा में सफलता की गारंटी आत्मविश्वास होता है, हड़बड़ी नहीं </title>
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                        <![CDATA[पीएम मोदी ने परीक्षा पर चर्चा में छात्रों से कहा कि तनाव नहीं, लक्ष्य, धैर्य, आत्मविश्वास और सपने पर ध्यान दें, हड़बड़ी छोड़ समझदारी से पढ़ें, निरंतर मेहनत।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/discussion-on-examination-2026-pm-modi-said-that-the-guarantee-of/article-142131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि छात्रों को परीक्षा के लिए तनाव पालने और ज्यादा नंबर लाने की होड़ की सोच पर ध्यान देने की बजाय जीवन के लक्ष्य की कसौटी पर खुद को कसते हुए निरंतर और धैर्य तथा आत्मविश्वास के साथ काम करते रहने की जरूरत पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।</p>
<p>पीएम मोदी ने शुक्रवार को यहां अपने आवास पर 'परीक्षा पर चर्चा' को लेकर देश की विभिन्न हिस्सों से आए बच्चों से संवाद के कार्यक्रम में बच्चों से बात करते हुए कहा कि परीक्षा को बोझ नहीं मानना है और उसे आसानी से लेते हुए अपनी पढ़ाई करनी है। उन्होंने पुराने पेपर देखकर तैयारी करने को पुरानी बीमारी बताया और कहा कि नए दौर ने इसका कोई औचित्य नहीं है। यह एक तरह की बीमारी है इसलिए सहज रूप से अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयारी करनी चाहिए और परीक्षा को तनाव की वजह या बोझ नहीं बनाना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी से एक बच्चे ने सवाल किया कि जीवन में सपना पलना जरूरी है, पीएम मोदी ने कहा कि सपना ना देखना जीवन के साथ सबसे बड़ा अपराध है। सपने से ही लक्ष्य बनते हैं और उससे शक्ति के साथ जीवन मे आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। कठिन से कठिन सपने को पाने के लिए अनुकूल मेहनत कर ही उसे पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को खुद का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए महापुरुषों की जीवनियां पढऩी चाहिए।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी परीक्षा के लिए आत्मविश्वास जरूरी है और आत्मविश्वास तभी आता है जब सच्चे मन से अपने विषय को अपने लक्ष्य के अनुसार पढ़ते हैं। उनका कहना था कि परीक्षा के समय हड़बड़ी नहीं करनी होती है क्योंकि हड़बड़ी से सब कुछ गड़बड़ हो जाता है इसलिए हड़बड़ी के बजाय आत्मविश्वास और पूरी समझ के साथ ध्यान लगाकर अपने विषय के प्रश्नपत्र को हल करना है। हड़बड़ी के कारण कई बार जो सवाल आते हैं वे भी गड़बड़ा जाते हैं जितनी भी मेहनत की होती है वह सब कुछ बेकार हो जाता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि अब वह समय नहीं है कि जब कहा जाता था कि सफलता उन्हीं को मिलती है जिनके पास सारी सुविधा होती है लेकिन अब हालात बदल गए है। गरीब से गरीब घर के बच्चे भी सर्वोत्तम अंकों के साथ परीक्षा पास कर रहे हैं। उन्होंने इसकी वजह स्वतंत्र सोच और सुविधा अनुसार पढ़ाई करने को बताया।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों से कहा कि हर चीज का एक पैटर्न होता है और अनुभव के आधार पर उसे बदला जा सकता है। उनका कहना था कि परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम उन्होंने जिस पैटर्न पर पहले शुरू किया था उसमें अनुभव के आधार पर धीरे-धीरे बदलाव उंन्होने लाया है। इसी तरह से हर बच्चे को अनुभव के आधार पर अपने कार्यों में बदलाव लाना चाहिए।</p>
<p>बच्चों से संवाद करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें लगता है कि अब देश के विभिन्न हिस्सों में बच्चों से परीक्षा पर चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई राज्य में उन्होंने यह कार्यक्रम किए हैं और उन्हें लगता है की और कार्यक्रम अन्य राज्यों में भी किए जाने चाहिए।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:00:23 +0530</pubDate>
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                <title>परीक्षा पे चर्चा 2026: 3 करोड़ से अधिक छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने किया पंजीकृत</title>
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                        <![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रमुख पहल परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) के लिए वर्ष के अंत तक छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के तीन करोड़ से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। पीपीसी का नौवां संस्करण जनवरी 2026 में आयोजित होगा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pariksha-pe-charcha-2026-more-than-3-crore-students-parents/article-137946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/.pariksha-pe-charcha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रमुख पहल परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) के लिए वर्ष के अंत तक छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के तीन करोड़ से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। पीपीसी का नौवां संस्करण जनवरी 2026 में आयोजित होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने यहां जारी एक बयान में कहा कि यह प्रतिक्रिया कार्यक्रम की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है तथा छात्रों की मानसिक भलाई को संबोधित करने और परीक्षाओं के प्रति सकारात्मक एवं आत्मविश्वासी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में इसकी सफलता को प्रदर्शित करती है।</p>
<p>परीक्षा पे चर्चा 2026 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 1 दिसंबर 2025 से एमवाईजीओवी पोर्टल पर शुरू हुए थे। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा आयोजित यह पहल अब सीखने और संवाद का एक व्यापक रूप से प्रतीक्षित उत्सव बन चुकी है, जो छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को एक साझा मंच पर लाती है। वर्ष 2018 से हर साल आयोजित होने वाले इस वार्षिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश भर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद करते हैं तथा बोर्ड और प्रवेश परीक्षाओं को तनावमुक्त एवं आरामदायक तरीके से देने के टिप्स साझा करते हैं।</p>
<p>कक्षा 6 से 12 तक के छात्र, उनके अभिभावक और शिक्षक इनोवेट इंडिया-एमवाईजीओवी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑनलाइन बहुविकल्पीय प्रश्नावली के माध्यम से भाग ले सकते हैं। पोर्टल पर पंजीकृत उपयोगकर्ता प्रधानमंत्री के लिए प्रश्न भी जमा कर सकते हैं, जो 500 अक्षरों तक सीमित हैं। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने वालों को भागीदारी की मान्यता में एक डिजिटल प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। इसके अलावा, प्रतियोगिता के माध्यम से चुने गए विजेताओं को कार्यक्रम में उपस्थित होने का अवसर मिलता है तथा कुछ विजेताओं को प्रधानमंत्री से सीधे संवाद करने का मौका भी मिलता है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, पीपीसी के 8वें संस्करण ने गिनीज विश्व रिकॉड्र्स में जगह बनाई थी, जिसमें एक महीने में सबसे अधिक लोगों का एक नागरिक जुड़ाव प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण का रिकॉर्ड हासिल किया गया था। यह रिकॉर्ड एमवाईजीओवी.इन प्लेटफॉर्म पर दर्ज 3.53 करोड़ वैध पंजीकरणों के साथ प्राप्त किया गया था।</p>]]>
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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 18:26:29 +0530</pubDate>
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