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                <title>Ring of Fire - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Ring of Fire RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इंडोनेशिया में भीषण हादसा: दो ज्वालामुखी विस्फोट में तीन पर्वतारोहियों की मौत, बचाव और राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[इंडोनेशिया के माउंट दुकोनो में अचानक हुए विस्फोट ने तीन पर्वतारोहियों की जान ले ली। राख और मलबे के गुबार के बीच प्रतिबंधित क्षेत्र में फंसे ट्रैकर चट्टानों की चपेट में आ गए। रिंग ऑफ फायर पर स्थित इस क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी करते हुए प्रशासन ने सभी ट्रैकिंग मार्ग बंद कर दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/horrific-accident-in-indonesia-three-climbers-killed-in-two-volcanic/article-153140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ज्वालामुखी.png" alt=""></a><br /><p>जकार्ता। इंडोनेशिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक सुदूर हलमहेरा द्वीप पर स्थित माउंट दुकोनो में शुक्रवार सुबह अचानक हुए विस्फोट से तीन पर्वतारोही मौत हो गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, यह हादसा तब हुआ, जब ज्वालामुखी से अचानक राख की मोटी परत और ज्वालामुखीय मलबा निकलने लगा। इससे क्रेटर के पास मौजूद पर्वतारोहियों का एक समूह फंस गया। अन्य जीवित बचे लोगों से मिली सूचना के बाद तड़के बचाव दल मौके पर पहुंचा।</p>
<p>जहां ट्रैकिंग समूह के कई सदस्य भारी राख के कारण लगी मामूली चोटों और सांस संबंधी समस्याओं के साथ सुरक्षित निकलने में सफल रहे, वहीं तीन लोगों की मौत ज्वालामुखीय चट्टानों की चपेट में आने से हुई। स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि जब विस्फोट हुआ, तब ये पर्वतारोही शिखर के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में थे। माउंट दुकोनो के अलावा माउंट इबू में भी बड़ा विस्फोट हुआ है। उत्तरी मालुकु में स्थित इस ज्वालामुखी में स्थानीय समय के अनुसार आज दोपहर लगभग 1:41 बजे धमाका हुआ, जिससे राख का गुबार आसमान में कई मीटर ऊपर तक फैल गया। पिछले एक हफ्ते में यहां 27 विस्फोट दर्ज किये जा चुके हैं।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, फिलीपींस का माउंट मेयोन और ग्वाटेमाला का फ्यूगो ज्वालामुखी भी अत्यधिक सक्रिय बने हुए हैं, जहां हाल के दिनों में लावा और राख निकलने के कारण अलर्ट जारी किया गया है। अलास्का के शिशाल्डिन और ग्रेट सिटकिन ज्वालामुखियों में भी लगातार हलचल और धीमी गति से लावा का रिसाव जारी है। इसके कारण विमानन सेवाओं के लिए 'येलो' और 'ऑरेंज' कोड लागू किये गये हैं। माउंट दुकोनो पिछले कई महीनों से 'हाई अलर्ट' पर है और इंडोनेशियाई ज्वालामुखी विज्ञान एजेंसियों ने बार-बार पर्यटकों और स्थानीय लोगों को क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी है। प्रशांत क्षेत्र के 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित इंडोनेशिया में अक्सर ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं, लेकिन सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज करने वाले साहसी पर्यटकों के लिए इस तरह के अचानक विस्फोट बड़ा खतरा बने हुए हैं।</p>
<p>इस त्रासदी के मद्देनजर इंडोनेशियाई अधिकारियों ने शिखर तक जाने वाले सभी ट्रैकिंग मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और प्रतिबंधित क्षेत्र का दायरा बढ़ा दिया है। फिलहाल पूरा ध्यान ढलानों पर मौजूद किसी भी अन्य व्यक्ति को सुरक्षित निकालने और जीवित बचे लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने पर है। मृतकों की पहचान अभी तक आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:52:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>Surya Grahan 2026: आज आसमान में दिखेगा गजब नजारा, होगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें क्या भारत में पड़ेगा इसका असर या नहीं ?</title>
                                    <description><![CDATA[आज 17 फरवरी, 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण है, जिसे वैज्ञानिक रूप से 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/surya-grahan-2026-an-amazing-sight-will-be-seen-in/article-143543"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/surya-grahan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आज 17 फरवरी, 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण है, जिसे वैज्ञानिक रूप से 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है। इस घटना में चंद्रमा सूर्य के बीच के हिस्से को ढक लेता है, जिससे सूर्य के किनारे एक चमकती हुई अंगूठी की तरह दिखाई देते हैं।</p>
<p><strong>भारत में स्थिति और समय</strong></p>
<p>खगोलीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3:26 बजे शुरू होगा और शाम 7:57 बजे समाप्त होगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए यहाँ किसी भी प्रकार का सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।</p>
<p><strong>सावधानियां और महत्व</strong></p>
<p>भले ही यह भारत में न दिखे, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह सूर्य की संरचना के अध्ययन का बड़ा अवसर है। जहाँ यह दृश्यमान है, वहाँ इसे नंगी आँखों से देखना खतरनाक हो सकता है; इसके लिए विशेष फिल्टर या चश्मों की आवश्यकता होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 16:17:51 +0530</pubDate>
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                <title>साल 2026 में भारत के ऐतिहासिक सोलर मिशन के अलावा अंतरिक्ष में दिखेगी रिंग ऑफ फायर, चंद्रग्रहण और सुपरमून के साथ उल्कापिंडों की बारिश</title>
                                    <description><![CDATA[2026 खगोल विज्ञान के लिए खास रहेगा। साल की शुरुआत सुपरमून से होगी। फरवरी में वलयाकार सूर्यग्रहण का रिंग ऑफ फायर दिखेगा। अगस्त में पूर्ण सूर्यग्रहण, मार्च में ब्लड मून, तीन सुपरमून और आदित्य-एल1 का अहम चरण वैज्ञानिकों की उत्सुकता बढ़ाएगा। दुर्लभ घटनाएं दुनिया भर में देखी जाएंगी। भरपूर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/apart-from-indias-historic-solar-mission-in-the-year-2026/article-137965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/year--2026.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। पूरी दुनिया साल 2026 के स्वागत के लिए तैयार है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर लोग नए साल का स्वागत करेंगे। वहीं, दुनियाभर के खगोलविदों के लिए आने वाला साल कुछ खास होगा, जो कई दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का दीदार कराने वाला है। साल की शुरूआत सुपरमून से होगी तो दूसरे महीने में सूर्य ग्रहण के दौरान रिंग ऑफ फायर का दुर्लभ नजारा होगा। इसके साथ ही यह साल एस्ट्रोनॉट के लिए बहुत खास होने वाला है और 50 सालों में सबसे ज्यादा अंतरिक्षयात्रियों को अपनी ओर खींचेगा। साल के दूसरे हिस्से में एक पूर्ण सूर्यग्रहण को लेकर खगोल वैज्ञानिकों में उत्सुकता बनी हुई है। साथ ही भारत का आदित्य-एल1 इस वर्ष अपने सबसे अहम चरण में प्रवेश करेगा।</p>
<p><strong>सूर्य ग्रहण और रिंग ऑफ फायर</strong></p>
<p>साल 2026 में 17 फरवरी को एक वलयाकार सूर्यग्रहण होने जा रहा है। इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा के आने से सूरज एक चमकीली अंगूठी के रूप में दिखाई देता है। इसे रिंग आॅफ फायर के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, इसे अंटार्कटिका में कुछ रिसर्च स्टेशन से ही अच्छी तरह देखा जा सकेगा। 12 अगस्त को एक पूर्ण सूर्यग्रहण होने जा रहा है, जो आर्कटिक में शुरू होगा और ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन से होकर गुजरेगा। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को ढक लेगा जिससे 2 मिनट 18 सेकंड तक आसमान में अंधेरा छा जाएगा।</p>
<p><strong>चंद्र ग्रहण और ब्लडमून</strong></p>
<p>साल का पहला चंद्रग्रहण रिंग ऑफ फायर सूर्यग्रहण के दो सप्ताह बाद 3 मार्च को होने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्रग्रहण होगा जिसे ब्लड मून कहा जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा की सतह 58 मिनट तक लाल रंग की चमकेगी। इससे पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र से सबसे अच्छे से देखा जा सकेगा। साल का आखिरी ग्रहण एक आंशिक चंद्रग्रहण होगा। 28 अगस्त को चंद्रमा की सतह का 96% हिस्सा लाल हो जाएगा, लेकिन पूरी तरह से ग्रहण नहीं लेगा। इस दौरान पृथ्वी की छाया के किनारे को चंद्रमा की सतह को पार करते हुए देखना शानदार अनुभव होगा।</p>
<p><strong>सुपरमून</strong></p>
<p>साल 2026 में तीन सुपरमून अपनी अद्भुत चमक से आसमान को रोशन करेंगे। यह तब होता है जब पूर्णिमा का चांद अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी के ज्यादा करीब आ जाता है। इन सुपरमून के खास नजारे को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती। इन्हें आप अपनी आंखों से ही देख सकते हैं। साल पहला सुपरमून जनवरी में उल्कापिंडों की बारिश के साथ होगा। दूसरा सुपरमून 24 नवम्बर को होगा, जबकि साल का आखिरी और सबसे करीबी सुपरमून 23 और 24 दिसम्बर की रात में होगा। उम्मीद है कि 2026 में सूरज में ज्यादा विस्फोट होंगे जिससे धरती पर जियोमैग्नेटिक तूफान आ सकते हैं, जिससे शानदार ऑरोरा दिखाई देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 11:40:39 +0530</pubDate>
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