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                <title>Astronomy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Astronomy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Surya Grahan 2026: आज आसमान में दिखेगा गजब नजारा, होगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें क्या भारत में पड़ेगा इसका असर या नहीं ?</title>
                                    <description><![CDATA[आज 17 फरवरी, 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण है, जिसे वैज्ञानिक रूप से 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/surya-grahan-2026-an-amazing-sight-will-be-seen-in/article-143543"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/surya-grahan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आज 17 फरवरी, 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण है, जिसे वैज्ञानिक रूप से 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है। इस घटना में चंद्रमा सूर्य के बीच के हिस्से को ढक लेता है, जिससे सूर्य के किनारे एक चमकती हुई अंगूठी की तरह दिखाई देते हैं।</p>
<p><strong>भारत में स्थिति और समय</strong></p>
<p>खगोलीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3:26 बजे शुरू होगा और शाम 7:57 बजे समाप्त होगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए यहाँ किसी भी प्रकार का सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।</p>
<p><strong>सावधानियां और महत्व</strong></p>
<p>भले ही यह भारत में न दिखे, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह सूर्य की संरचना के अध्ययन का बड़ा अवसर है। जहाँ यह दृश्यमान है, वहाँ इसे नंगी आँखों से देखना खतरनाक हो सकता है; इसके लिए विशेष फिल्टर या चश्मों की आवश्यकता होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 16:17:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट 2026 : पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप के साथ बनेंगे राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, युवाओं काे मिलेंगे नए रोजगार के अवसर ; हर जिले में बनेगा एक महिला छात्रावास</title>
                                    <description><![CDATA[बजट 2026-27 में शिक्षा को बढ़ावा देते हुए सरकार ने पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप, नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, महिला छात्रावास और खगोल विज्ञान हेतु टेलीस्कोप सुविधाओं की घोषणा की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/budget-2026-27-announces-creation-of-national-institute-of-design-with/article-141552"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप के साथ राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान बनाने की घोषणा की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप खोले जायेंगे इन टाउनशिप में आवास, शोध सुविधाएं, स्टार्टअप स्पेस, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक ढांचा शामिल होगा, जिससे छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को एक बेहतर और जीवंत शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में शिक्षा एवं विकास को बढावा देने के लिए नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान खोले जायेंगे। इससे भारतीय डिजाइन उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हर जिले में एक महिला छात्रावास बनाया जायेगा ताकि कामकाजी महिलाओं के सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध हो सके। खगोल भौतिकी और खगोल को बढावा देने के लिए चार टेलीस्कोप अवस्थापना सुविधाओं की स्थापना की जायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 13:29:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नासा को मिली बड़ी कामयाबी, जेम्स वेब टेलीस्कोप से डार्क मैटर का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद से वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा बनाया। अध्ययन से ब्रह्मांडीय संरचना और गुरुत्वीय लेंसिंग की नई समझ मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nasa-gets-a-big-success-the-most-detailed-map-of/article-141102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(12)3.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। वैज्ञानिकों ने नासा के जेम्स वेब टेलिस्कोप की मदद से अंतरिक्ष में डार्क मैटर का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा तैयार किया है। यह शोध ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम ने किया है। डार्क मैटर को ब्रह्मांड की सबसे बड़ी पहेलियों में से एक माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रह्मांड में मौजूद कुल पदार्थ का बड़ा हिस्सा डार्क मैटर ही है, लेकिन यह न तो देखा जा सकता है और न ही यह रोशनी को उत्सर्जित, परावर्तित या अवशोषित करता है। यही वजह है कि सामान्य दूरबीनों से इसे सीधे देखना संभव नहीं है।</p>
<p>डार्क मैटर का द्रव्यमान (मास) जरूर होता है और इसी कारण इसमें गुरुत्वाकर्षण शक्ति होती है। वैज्ञानिकों ने इसी गुण का उपयोग कर इसका नक्शा तैयार किया। डार्क मैटर की गुरुत्वाकर्षण शक्ति दूर स्थित आकाशगंगाओं से आने वाली रोशनी को मोड़ देती है, जिससे वे आकाशगंगाएं टेढ़ी-मेढ़ी या विकृत दिखायी देती हैं। इस प्रक्रिया को गुरुत्वीय लेंसिंग कहा जाता है।</p>
<p>लगभग 10 लाख दूरस्थ आकाशगंगाओं की आकृति और रोशनी में आए इस बदलाव को मापकर वैज्ञानिक यह पता लगाने में सफल रहे कि डार्क मैटर कहां है और उसकी मात्रा कितनी हो सकती है। डरहम विश्वविद्यालय के कम्प्यूटेशनल कॉस्मोलॉजी प्रोफेसर रिचर्ड मेसी ने कहा कि कई दूर की आकाशगंगाएं असामान्य आकार में दिखाई देती हैं और यह इस बात का संकेत है कि उनके सामने डार्क मैटर मौजूद है। उन्होंने कहा कि इसी तरीके से जेम्स वेब टेलीस्कोप डार्क मैटर को देख पाता है, भले ही वह स्वयं अदृश्य हो।</p>
<p>इस नए नक्शे से यह भी पुष्टि हुई है कि डार्क मैटर बेतरतीब ढंग से फैला नहीं है, बल्कि वह उन संरचनाओं से गहराई से जुड़ा है, जिन्हें हम ब्रह्मांड में देख सकते हैं। जिस क्षेत्र का अध्ययन किया गया है, वह सेक्सटैंस तारामंडल में स्थित है। इस हिस्से का अध्ययन पहले भी किया गया था, लेकिन इतनी बारीकी से कभी नहीं। यह क्षेत्र पृथ्वी से दिखाई देने वाले पूर्ण चंद्रमा की चौड़ाई से लगभग ढाई गुना बड़ा है।</p>
<p>डरहम विश्वविद्यालय के शोधकर्ता गैविन लिरॉय ने कहा कि पहले के नक्शे ऐसे थे जैसे धुंधले शीशे से डार्क मैटर को देखना, लेकिन जेम्स वेब टेलीस्कोप के उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़ों से अब तस्वीर कहीं ज्यादा साफ हो गयी है। जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद से इस बार लगभग 10 लाख आकाशगंगाओं की पहचान की जा सकी, जो हबल टेलीस्कोप के सबसे गहरे सर्वेक्षण से भी दोगुनी है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह नक्शा भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों और ब्रह्मांड को समझने के प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 18:47:15 +0530</pubDate>
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                <title>साल 2026 में भारत के ऐतिहासिक सोलर मिशन के अलावा अंतरिक्ष में दिखेगी रिंग ऑफ फायर, चंद्रग्रहण और सुपरमून के साथ उल्कापिंडों की बारिश</title>
                                    <description><![CDATA[2026 खगोल विज्ञान के लिए खास रहेगा। साल की शुरुआत सुपरमून से होगी। फरवरी में वलयाकार सूर्यग्रहण का रिंग ऑफ फायर दिखेगा। अगस्त में पूर्ण सूर्यग्रहण, मार्च में ब्लड मून, तीन सुपरमून और आदित्य-एल1 का अहम चरण वैज्ञानिकों की उत्सुकता बढ़ाएगा। दुर्लभ घटनाएं दुनिया भर में देखी जाएंगी। भरपूर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/apart-from-indias-historic-solar-mission-in-the-year-2026/article-137965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/year--2026.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। पूरी दुनिया साल 2026 के स्वागत के लिए तैयार है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर लोग नए साल का स्वागत करेंगे। वहीं, दुनियाभर के खगोलविदों के लिए आने वाला साल कुछ खास होगा, जो कई दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का दीदार कराने वाला है। साल की शुरूआत सुपरमून से होगी तो दूसरे महीने में सूर्य ग्रहण के दौरान रिंग ऑफ फायर का दुर्लभ नजारा होगा। इसके साथ ही यह साल एस्ट्रोनॉट के लिए बहुत खास होने वाला है और 50 सालों में सबसे ज्यादा अंतरिक्षयात्रियों को अपनी ओर खींचेगा। साल के दूसरे हिस्से में एक पूर्ण सूर्यग्रहण को लेकर खगोल वैज्ञानिकों में उत्सुकता बनी हुई है। साथ ही भारत का आदित्य-एल1 इस वर्ष अपने सबसे अहम चरण में प्रवेश करेगा।</p>
<p><strong>सूर्य ग्रहण और रिंग ऑफ फायर</strong></p>
<p>साल 2026 में 17 फरवरी को एक वलयाकार सूर्यग्रहण होने जा रहा है। इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा के आने से सूरज एक चमकीली अंगूठी के रूप में दिखाई देता है। इसे रिंग आॅफ फायर के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, इसे अंटार्कटिका में कुछ रिसर्च स्टेशन से ही अच्छी तरह देखा जा सकेगा। 12 अगस्त को एक पूर्ण सूर्यग्रहण होने जा रहा है, जो आर्कटिक में शुरू होगा और ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन से होकर गुजरेगा। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को ढक लेगा जिससे 2 मिनट 18 सेकंड तक आसमान में अंधेरा छा जाएगा।</p>
<p><strong>चंद्र ग्रहण और ब्लडमून</strong></p>
<p>साल का पहला चंद्रग्रहण रिंग ऑफ फायर सूर्यग्रहण के दो सप्ताह बाद 3 मार्च को होने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्रग्रहण होगा जिसे ब्लड मून कहा जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा की सतह 58 मिनट तक लाल रंग की चमकेगी। इससे पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र से सबसे अच्छे से देखा जा सकेगा। साल का आखिरी ग्रहण एक आंशिक चंद्रग्रहण होगा। 28 अगस्त को चंद्रमा की सतह का 96% हिस्सा लाल हो जाएगा, लेकिन पूरी तरह से ग्रहण नहीं लेगा। इस दौरान पृथ्वी की छाया के किनारे को चंद्रमा की सतह को पार करते हुए देखना शानदार अनुभव होगा।</p>
<p><strong>सुपरमून</strong></p>
<p>साल 2026 में तीन सुपरमून अपनी अद्भुत चमक से आसमान को रोशन करेंगे। यह तब होता है जब पूर्णिमा का चांद अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी के ज्यादा करीब आ जाता है। इन सुपरमून के खास नजारे को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती। इन्हें आप अपनी आंखों से ही देख सकते हैं। साल पहला सुपरमून जनवरी में उल्कापिंडों की बारिश के साथ होगा। दूसरा सुपरमून 24 नवम्बर को होगा, जबकि साल का आखिरी और सबसे करीबी सुपरमून 23 और 24 दिसम्बर की रात में होगा। उम्मीद है कि 2026 में सूरज में ज्यादा विस्फोट होंगे जिससे धरती पर जियोमैग्नेटिक तूफान आ सकते हैं, जिससे शानदार ऑरोरा दिखाई देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 11:40:39 +0530</pubDate>
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