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                <title>क्या कांग्रेस के हाथों से फिसल रहा कर्नाटक? दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित;  सिर्फ नेतृत्व नहीं, नियंत्रण भी</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी कलह तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को दिल्ली आलाकमान ने तलब किया है। 136 विधायकों के स्पष्ट बहुमत के बावजूद दोनों गुटों में नेतृत्व परिवर्तन और रोटेशन फॉर्मूले को लेकर रस्साकशी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-karnataka-slipping-from-the-hands-of-congress-the-claims/article-155038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/karnataka.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति को एक बार फिर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच शक्ति संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है और यह मुद्दा केवल मुख्यमंत्री पद को लेकर व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राज्य में सत्ता संतुलन, महत्वाकांक्षाओं और संगठनात्मक अनुशासन को संभालने की संरचनात्मक चुनौती का है। सिद्दारमैया और शिवकुमार को दिल्ली तलब किये जाने तथा पार्टी आलाकमान के साथ उनकी बैठकों के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। यह सवाल कांग्रेस सरकार के 2023 में गठन के समय से ही मौजूद हैं। </p>
<p>फर्क सिर्फ इतना है कि अब दोनों खेमों की ओर से संकेत अधिक स्पष्ट हो गये हैं और पार्टी के कुछ वर्गों में अधीरता बढ़ी है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में एक राजनीतिक विरोधाभास है। कर्नाटक में कांग्रेस संख्यात्मक रूप से मजबूत है, लेकिन आंतरिक रूप से पूरी तरह एकजुट नहीं है। 224 सदस्यीय विधानसभा में 136 विधायकों के साथ पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत है। इसके बावजूद यह मजबूती स्थिर नेतृत्व सहमति में तब्दील नहीं हो सकी है। स्थिति को अब तक अनौपचारिक समझौतों, परस्पर अपेक्षाओं और समय-समय पर आलाकमान के हस्तक्षेप के जरिए संभाला जाता रहा है। सिद्दारमैया अनुभव, जनाधार आधारित राजनीति और 'अहिंदा' सामाजिक समीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने लंबे समय से कर्नाटक में कांग्रेस के आधार को मजबूत किया है। उनके समर्थक उन्हें ऐसा स्थिर नेता मानते हैं जिसने चुनावी सफलता दिलायी और जो अब भी विधायकों के बीच प्रभाव बनाए हुए हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, शिवकुमार संगठनात्मक क्षमता, चुनावी रणनीति और 2023 की जीत में अपनी भूमिका के आधार पर दावेदारी पेश करते हैं। उनका खेमा संख्या बल के साथ-साथ योगदान, समय और पार्टी संगठन पर पकड़ को भी अपनी ताकत मानता है। कांग्रेस आलाकमान के सामने चुनौती यह है कि दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित हैं, लेकिन लंबे समय तक दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं है। एक पक्ष को संतुष्ट करने से दूसरे पक्ष में असंतोष बढ़ने का जोखिम बना रहता है। इसी कारण समाधान की जगह संतुलन साधने की राजनीति जारी है।</p>
<p>यही वजह है कि कर्नाटक की राजनीति बार-बार "रोटेशन", "मंत्रिमंडल फेरबदल" और "आलाकमान चर्चा" जैसे शब्दों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। ये स्थायी समाधान नहीं, बल्कि दबाव को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने के उपाय हैं, जो सरकार के भीतर दो शक्ति केंद्रों की मूल समस्या को टालते रहे हैं। हाल के दिनों में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा भी इसी पृष्ठभूमि में देखी जा रही है। विभागों में बदलाव या मंत्रिमंडल विस्तार से अस्थायी संतुलन जरूर बनाया जा सकता है, लेकिन इससे नेतृत्व अधिकार का मूल प्रश्न हल नहीं होता। इससे केवल मौजूदा व्यवस्था को कुछ समय के लिए आगे बढ़ाया जाता है।</p>
<p>असल सवाल यह नहीं है कि सिद्दारमैया अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या शिवकुमार भविष्य में मुख्यमंत्री बनेंगे। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या कांग्रेस के पास ऐसी कोई स्थायी व्यवस्था है, जिसके तहत उस राज्य में दोहरे नेतृत्व को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके, जहां चुनावी सफलता ने कई दावेदार पैदा कर दिये हैं, लेकिन आलाकमान के अलावा कोई स्पष्ट निर्णायक व्यवस्था नहीं है। दल-बदल, विधानसभा अंकगणित या विपक्षी समीकरणों को लेकर लगायी जा रही अटकलों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल किसी भी गुट के पास सरकार की स्थिरता को प्रभावित करने का स्पष्ट रास्ता नहीं दिखता और संख्या बल अब भी कांग्रेस के पक्ष में है। ऐसे में आलाकमान केवल दर्शक नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखने वाली प्रमुख शक्ति है। </p>
<p>हालांकि, उसकी क्षमता भी सीमित है। निर्णयों में देरी से अटकलें बढ़ती हैं, अस्पष्ट संकेतों से गुटीय व्याख्याओं को बल मिलता है और समझौता आधारित समाधान अक्सर उत्तराधिकार के सवाल को हल करने के बजाय टाल देते हैं। कर्नाटक की स्थिति भारतीय राजनीति के व्यापक स्वरूप को भी दर्शाती है, जहां मजबूत क्षेत्रीय नेताओं, व्यक्तिगत नेटवर्क और केंद्रीकृत पार्टी नियंत्रण के कारण चुनावी सफलता के बाद टकराव की स्थिति पैदा होती है, खासकर तब जब नेतृत्व पहले से स्पष्ट नहीं किया गया हो।</p>
<p>मंत्रिमंडल संतुलन, विभिन्न गुटों को आश्वस्त करने और नियंत्रित राजनीतिक संदेशों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। फिलहाल राजनीतिक हित निरंतरता के पक्ष में हैं, इसलिए किसी बड़े टकराव की संभावना कम मानी जा रही है।हालांकि सरकार संख्या बल के लिहाज से स्थिर है, लेकिन आंतरिक रूप से अस्थिर बनी हुई है। इसके पीछे वह मूल प्रश्न अब भी अनसुलझा है, जिससे पार्टी 2023 से बचती रही है; जब जीत सामूहिक हो, लेकिन नेतृत्व विवादित हो, तब अधिकार का निर्धारण कौन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ओबीसी की वंचित जातियों को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देने की मांग, कांग्रेस नेतृत्व को लिखा पत्र </title>
                                    <description><![CDATA[ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य राजेंद्र सेन ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र भेजकर वंचित ओबीसी जातियों को राज्यसभा में अवसर देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सैन, सुनार, कुम्हार और दर्जी जैसे उपेक्षित समाजों को राजनीतिक भागीदारी मिलने से सामाजिक न्याय मजबूत होगा और आगामी चुनावों में पार्टी को बड़ा समर्थन मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/letter-written-to-congress-leadership-demanding-representation-in-rajya-sabha/article-154662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajendra-sen.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल सदस्य राजेन्द्र सेन ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व को पत्र लिखकर ओबीसी वर्ग की वंचित जातियों को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी यदि उन ओबीसी जातियों को राजनीतिक भागीदारी देती है जिन्हें आज तक लोकसभा और विधानसभा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला, तो इससे सामाजिक और राजनीतिक न्याय को मजबूती मिलेगी। राजेन्द्र सेन ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भागीदारी देने का जो विजन रखा गया है, उसे धरातल पर उतारने के लिए वंचित ओबीसी समाजों को राज्यसभा में अवसर दिया जाना आवश्यक है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश में कई मेहनतकश एवं सेवा आधारित ओबीसी समाज आज भी राजनीति में उपेक्षित हैं। उन्होंने अपने पत्र में सैन समाज, सुनार समाज, लुहार समाज, दर्जी समाज, जांगिड समाज, कुम्हार समाज, तेली समाज, कलाल समाज, रावणा राजपूत समाज एवं धाकड़ समाज सहित अनेक जातियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समाजों को आज तक विधानसभा और लोकसभा में पर्याप्त टिकट नहीं दिए गए हैं। इससे इन वर्गों में राजनीतिक भागीदारी की भावना कमजोर हुई है।</p>
<p>यदि कांग्रेस पार्टी इन वंचित ओबीसी समाजों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नेतृत्व को राज्यसभा में भेजती है, तो इससे इन समाजों में कांग्रेस के प्रति विश्वास मजबूत होगा तथा आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को व्यापक समर्थन प्राप्त होगा। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि राज्यसभा में वंचित ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधियों को अवसर देकर सामाजिक न्याय एवं भागीदा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 19:01:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान राज्यसभा चुनाव: BJP उम्मीदवारों की दौड़ में सुनीता बैंसला की एंट्री, सियासी चर्चाएं तेज</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा में उम्मीदवारों को लेकर हलचल तेज हो गई है। संख्या बल के अनुसार भाजपा को दो सीटें मिलना तय है। सतीश पूनिया और राजेंद्र राठौड़ के अलावा, गुर्जर नेता दिवंगत कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की बेटी सुनीता बैंसला का नाम तेजी से उभरा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sunita-bainslas-entry-in-the-race-for-rajasthan-rajya-sabha/article-154699"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/sunita.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटें अगले माह खाली होने जा रही हैं। विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से भारतीय जनता पार्टी को दो सीटें मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा में संभावित उम्मीदवारों को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब तक पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, भाजपा राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर, समाजसेवी नरसी कुलारिया और पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी के नाम चर्चा में थे। लेकिन अब पूर्व आईआरएस अधिकारी सुनीता बैंसला का नाम भी राजनीतिक गलियारों में तेजी से उभर रहा है। सुनीता बैंसला गुर्जर आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता रहे दिवंगत कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की बेटी हैं। </p>
<p>बताया जा रहा है कि भाजपा उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर रही है। सुनीता लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं और गुर्जर समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। सूत्रों के अनुसार हाल ही में दिल्ली में उनकी भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी हुई है, जिसके बाद उनके नाम की चर्चा और तेज हो गई है। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं। राजस्थान की राज्यसभा सीटों को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है, लेकिन मौजूदा चर्चाओं ने प्रदेश की सियासत में हलचल जरूर बढ़ा दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 17:30:56 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की तैयारियां तेज, 18 जून को होगा मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[भारत निर्वाचन आयोग ने राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव कराने की घोषणा की है। अधिसूचना 1 जून को जारी होगी। संख्या बल के अनुसार भाजपा दो सीटों पर मजबूत है और तीसरी सीट के लिए रणनीतिक बिसात बिछा रही है, जबकि कांग्रेस अपनी एक सीट बचाने के संघर्ष में जुटी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/preparations-for-rajya-sabha-elections-intensified-in-rajasthan-voting-will/article-154663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसमें राजस्थान की तीन सीटों पर 18 जून को मतदान होगा। अधिसूचना एक जून को जारी होगी, नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून और मतगणना उसी दिन होगी। इन सीटों पर 21 जून को रिटायर होने वाले सदस्यों के स्थान भरे जाएंगे। राजस्थान विधानसभा की वर्तमान संख्या बल के अनुसार भाजपा दो सीटें आराम से जीत सकती है, जबकि तीसरी सीट पर अंतरात्मा (क्रॉस वोटिंग) का खेल खेलने की रणनीति बना रही है।</p>
<p>भाजपा ने तीनों सीटों के लिए पैनल तैयार कर लिया है, जिसमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, सतीश पूनिया, राजेंद्र राठौड़, अलका गुर्जर जैसे नाम चर्चा में हैं। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जल्द दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से अंतिम फैसला लेंगे। कांग्रेस की ओर से भी तैयारियां चल रही हैं। पार्टी अपनी एक सीट बचाने की कोशिश में है, लेकिन संख्या बल के कारण चुनौतीपूर्ण स्थिति है। नीरज डांगी जैसी मौजूदा सदस्यता और आंतरिक चर्चाओं के बीच उम्मीदवार चयन पर मंथन जारी है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव केवल सीटों का नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख दलों की रणनीति और अनुशासन का भी परीक्षण होगा। क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच पार्टियां अपने विधायकों पर कड़ी नजर रख रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:53:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीयूष गोयल का राहुल गांधी पर पलटवार: अपशब्द कमजोरों का हथियार;  तिरंगे का मान बढ़ाना गद्दारी नहीं, जानें और क्या-क्या बोले केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ?</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी पर की गई टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि हताशा में राहुल गांधी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। गोयल ने रेखांकित किया कि पीएम की 5 देशों की सफल यात्रा और मिले 3 अंतरराष्ट्रीय सम्मान हर भारतीय के लिए गर्व की बात हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/piyush-goyals-sharp-attack-on-congress-rahul-is-repeatedly-showing/article-154597"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/piyush-goyal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गद्दार कहे जाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया है और कहा है कि वह अपने शब्दों और भाषणों के ज़रिए बार-बार अपना असली स्वभाव और चरित्र दिखा रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "आज मैं आपके सामने एक बहुत ही महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा को उजागर करने के लिए उपस्थित हूँ, जिसे पीएम मोदी ने आज पूरा किया है। पांच दिनों में पांच देशों की यात्रा के दौरान जिस तरह से भारत ने अपनी छाप छोड़ी, जिस गर्मजोशी के साथ प्रधानमंत्री का उन सभी पांच राष्ट्रों में विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान स्वागत किया गया, भारतीय प्रवासियों द्वारा उन्हें जो सम्मान दिया गया और भारत को मिले तीन अंतरराष्ट्रीय सम्मान, जिनमें दो देशों और खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा प्रधानमंत्री को सम्मानित किया गया, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "यह केवल कूटनीतिक और राजनीतिक मंच पर की गयी एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा मात्र नहीं थी। इसने भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण परिणाम उत्पन्न किये हैं। चाहे वह भारत के विकास की भविष्य की रणनीति से संबंधित हो, भारत की आर्थिक यात्रा से या आने वाले दिनों में भारत की क्षमताओं का विस्तार करने से,आत्मनिर्भरता को मजबूत करने से अथवा यह सुनिश्चित करने से कि आम जनता को उनके दैनिक जीवन में आवश्यक वस्तुएँ आसानी से उपलब्ध हों, हर तरह से यात्रा कारगर साबित हुई है।"</p>
<p>इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ पूरी दुनिया भारत और प्रधानमंत्री की ओर बहुत भरोसे के साथ देखती है। वहीं, दूसरी ओर राहुल गांधी अपने शब्दों और भाषणों के ज़रिए बार-बार अपना असली स्वभाव और चरित्र दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा, "भारत की जनता उन्हें बार-बार नकार रही है और वह एक के बाद एक चुनाव हार रहे हैं। इसकी वजह से जो हताशा और एक तरह की कुंठा उनमें पैदा हुई है, वह उनके व्यवहार में साफ़ झलकती है। वह जिस तरह से अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं और प्रधानमंत्री के बारे में अपमानजनक बातें करते हैं, वह निंदनीय है।"</p>
<p>इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार घुसपैठियों का समर्थन करते हैं, वह 'गद्दारी' है। उन्होंने सवाल किया, "क्या वैश्विक मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाना 'गद्दारी' कहलाएगा, या विदेश जाकर भारत के तिरंगे का अपमान करना 'गद्दारी' माना जाएगा" उन्होंने सवाल किया कि क्या आतंकवाद की कमर तोड़ना, आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देना देशद्रोह माना जाता है? या आतंकवादियों को बिरयानी खिलाना या आतंकवादियों के साथ समझौता करना देशद्रोह माना जाता है? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिस शब्दावली का उपयोग करते हैं, उसे अंग्रेजी में 'गालियां कमजोरों का हथियार होती हैं' कहा जाता है। उन्होंने कहा, "देश अब राहुल गांधी की कमजोरियों, गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी की असफलताओं और पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को देख रहा है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 50 से अधिक प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से मुलाकात की और उनके साथ संवाद किया। इनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की 'फॉर्च्यून 500' कंपनियाँ भी शामिल हैं, जो इन निगमों का नेतृत्व और प्रबंधन कर रही हैं। उनके साथ भारत में और अधिक निवेश, व्यापार और संबंधों को मजबूत करने के संबंध में चर्चाएँ की गयी। यदि हम केवल उन कंपनियों के बाजार मूल्य का आकलन करें जिनका प्रतिनिधित्व उन सीईओ द्वारा किया गया जिनके साथ प्रधानमंत्री ने चर्चा की, तो उनका कुल मूल्य तीस लाख करोड़ डॉलर से भी अधिक है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "आज पूरी दुनिया भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखती है। आज पूरी दुनिया भारत को एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में देखती है। मेरा मानना है कि यह केवल एक संयोग नहीं है, बल्कि एक सुविचारित रणनीति है।" केंद्रीय मंत्री कहा, "मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री ऐसे समय में देश नेतृत्व कर रहे हैं, जब दुनिया में बहुत ज़्यादा अनिश्चितता है। अलग-अलग देश युद्ध की चपेट में आ गये हैं। ऐसी स्थिति में यूरोप और भारत एक-दूसरे के दोस्त और साझेदार की तरह हैं। वे एक-दूसरे के पूरक हैं। उनमें प्रतिस्पर्धा कम और साझेदारी ज़्यादा है।" संवाददाता सम्मेलन के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रखुख अनिल बलूनी और मीडिया सह-प्रमुख डॉ. संजय मयूख भी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:52:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पूरी दुनिया में पीएम मोदी का डंका : 2026 के प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक से हुए सम्मानित, बोले- ये करोड़ों किसानों, वैज्ञानिकों का सम्मान है</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोम में FAO मुख्यालय में प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक (2026) से सम्मानित किया गया है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण विकास में उनके असाधारण नेतृत्व के लिए यह पुरस्कार मिला। पीएम मोदी ने इस वैश्विक सम्मान को भारतीय किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modis-sting-all-over-the-world-those-honored-with/article-154552"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi11.png" alt=""></a><br /><p>रोम। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा रोम स्थित एफएओ मुख्यालय में वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित एग्रीकोला पदक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत तथा वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके असाधारण नेतृत्व के सम्मान में प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह पुरस्कार एफएओ के महानिदेशक डॉ. क्यू डोंग्यू से प्राप्त किया। उन्होंने यह सम्मान भारतीय किसानों और भारतीय कृषि वैज्ञानिक समुदाय को समर्पित किया, जो भारतीयों तथा विश्वभर के लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करने हेतु निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मानव कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारत में कृषि जीवन की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि मातृभूमि और भारतीय जनमानस के बीच एक पवित्र संबंध है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भारत का वैज्ञानिक और नवाचार-आधारित दृष्टिकोण एक सतत, जलवायु-सहिष्णु और भविष्य के लिए तैयार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दे रहा है। इस दिशा में उन्होंने कहा कि 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' जैसी पहल तथा सूक्ष्म सिंचाई और सटीक कृषि के लिए मिशन-आधारित दृष्टिकोण भारत की कृषि नीतियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। प्रौद्योगिकी-आधारित कृषि समाधानों पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परामर्श प्रणाली, ड्रोन, दूरसंवेदी प्रौद्योगिकियाँ तथा सेंसर-आधारित मशीनें भारतीय किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक कृषि आय प्राप्त करने में सहायता कर रही हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने लगभग 3,000 जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों का विकास किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विज्ञान-आधारित कृषि वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ कर रही है, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए। प्रधानमंत्री ने याद किया कि एफएओ के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत को वैश्विक खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और भूख-मुक्त विश्व को बढ़ावा देने के लिए संगठन के साथ कार्य करने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के आयोजन के माध्यम से स्वस्थ खाद्य विकल्पों को प्रोत्साहित करने हेतु भारत के साथ कार्य करने के लिए एफएओ का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी की एफएओ मुख्यालय की यह यात्रा पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय शासनाध्यक्ष द्वारा की गई पहली यात्रा थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:54:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>145 साल पुराने सेंट स्टीफंस कॉलेज को मिली पहली महिला प्रिंसिपल, प्रो. सुसान एलियास संभालेंगी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[सेंट स्टीफंस कॉलेज के 145 साल के इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया है। प्रोफेसर सुसान एलियास संस्थान की पहली महिला प्रिंसिपल नियुक्त की गई हैं। वह 1 जून 2026 से कार्यभार संभालेंगी। तीन दशक का अनुभव रखने वाली सुसान की नियुक्ति को बिशप डॉ. पॉल स्वरूप की अध्यक्षता वाली काउंसिल ने मंजूरी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/145-year-old-st-stephens-college-gets-its-first-woman/article-153600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/collage.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध देश के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज ने अपने 145 साल से अधिक लंबे इतिहास में पहली बार किसी महिला को प्रिंसिपल नियुक्त किया है। कॉलेज प्रशासन ने प्रोफेसर सुसान एलियास को संस्थान की 14वीं प्रिंसिपल बनाने की घोषणा की है। वह 1 जून 2026 से अपना कार्यभार संभालेंगी।</p>
<p>कॉलेज की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया कि दिल्ली के बिशप और कॉलेज के चेयरमैन डॉ. पॉल स्वरूप की अध्यक्षता वाली सुप्रीम काउंसिल ने इस नियुक्ति को मंजूरी दी है। सेंट स्टीफंस कॉलेज लंबे समय तक पुरुष प्रधान संस्थान रहा। शुरुआती वर्षों में कुछ छात्राओं को प्रवेश मिला था, लेकिन 1950 से 1975 तक यह पूरी तरह लड़कों का कॉलेज रहा। बाद में इसे सह-शिक्षा संस्थान बनाया गया।</p>
<p>1881 में स्थापित यह कॉलेज राजनीति, साहित्य, कानून और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में अपने नामी पूर्व छात्रों के लिए जाना जाता है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लेखक अमिताव घोष जैसे कई चर्चित नाम इसी संस्थान से जुड़े रहे हैं। आईआईटी मद्रास की पूर्व छात्रा सुसान एलियास तीन दशक से अधिक समय का शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव रखती हैं। उन्होंने कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में शोध और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 18:40:41 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी राजनयिकों का दावा: प्रमुख ताकत बनकर उभरे मुजतबा खामेनेई, जंग की रणनीति और राजनयिक वार्ता दोनों का कर रहे नेतृत्व</title>
                                    <description><![CDATA[हमले में घायल होने के बावजूद मुजतबा खामेनेई ईरान की युद्ध रणनीति और राजनयिक वार्ताओं का गुप्त रूप से नेतृत्व कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक संचार से बचते हुए, वह हस्तलिखित नोटों के जरिए सरकार को निर्देशित कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य दबाव के बावजूद ईरान अब भी अपनी मिसाइल क्षमताओं को पुनः संगठित करने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-president-pejeshkyan-claims-that-mujtaba-khamenei-has-emerged-as/article-153244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mojtaba-khamenei-iran-new-supreme-leader.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई संघर्ष के दौरान देश की युद्ध रणनीति को आकार देने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ राजनयिक बातचीत में शामिल अधिकारियों को निर्देशित करने वाले प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के पहले ही दिन उनके पिता और ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडर मारे गये थे। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के आकलन के अनुसार, उसी हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मुजतबा कथित तौर पर ईरान की युद्धकालीन रणनीति बनाने, सैन्य अभियानों का निर्देशन करने और अमेरिका से समझौते के राजनयिक प्रयासों का मार्गदर्शन करने में गहराई से लगे हुए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, मुजतबा के चेहरे, हाथ, धड़ और पैर काफी ज्यादा झुलस गये थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसी का मानना है कि वह सार्वजनिक नजरों से दूर रहकर स्वस्थ होने के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संचार से जानबूझकर बच रहे हैं और केवल व्यक्तिगत मुलाकातों या संदेशवाहकों के जरिये हस्तलिखित नोटों से ही संवाद कर रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने इस सप्ताह पुष्टि की कि उन्होंने मुजतबा के साथ ढाई घंटे तक आमने-सामने बैठक की। हमले के बाद नये सर्वोच्च नेता और ईरान के किसी वरिष्ठ अधिकारी के बीच यह पहली सार्वजनिक रूप से पुष्ट मुलाकात थी।</p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय में प्रोटोकॉल प्रमुख मजाहिर हुसैनी ने शुक्रवार को कहा, "खामेनेई अपनी चोटों से उबर रहे हैं और अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।" रिपोर्ट के अनुसार, हुसैनी ने सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर चिंताओं को कम करने की कोशिश की और कहा कि खामेनेई के पैर और पीठ के निचले हिस्से में मामूली चोटें आयी थीं। उन्होंने यह भी बताया, "छर्रे का एक छोटा-सा टुकड़ा उनके कान के पीछे लगा था, लेकिन घाव अब भर रहे हैं।"</p>
<p>ईरान में एक जनसमूह को संबोधित करते हुए हुसैनी ने कहा, "खुदा का शुक्र है कि वह स्वस्थ हैं। दुश्मन हर तरह की अफवाहें फैला रहा है और झूठे दावे कर रहा है। वे उन्हें देखना और ढूंढ़ना चाहते हैं, लेकिन लोगों को धैर्य रखना चाहिए और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सही समय आने पर वह आपसे बात करेंगे।" अमेरिकी विश्लेषक स्वीकार करते हैं कि वे मुजतबा की मौजूदगी की पुष्टि प्रत्यक्ष तौर पर नहीं कर सकते। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ईरान के सत्ता ढांचे के भीतर मौजूद अधिकारी अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उन तक अपनी पहुंच को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।</p>
<p>आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के सहयोग से चलता प्रतीत होता है। गालिबाफ ने ही अमेरिका के साथ परमाणु और युद्धविराम वार्ता के पहले दौर का नेतृत्व किया था। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई वह वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गयी थी और दूसरे दौर की प्रस्तावित बैठक कभी नहीं हो पायी। बाद में ट्रंप ने इस विफलता का कारण ईरान के नेतृत्व के भीतर गहरे आंतरिक मतभेदों को बताया।</p>
<p>अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अनिश्चितता के बावजूद युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम जरूर किया है, लेकिन उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान के लगभग दो-तिहाई मिसाइल लॉन्चर अब भी चालू माने जा रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले अनुमानों से कहीं अधिक है। इसका आंशिक कारण वर्तमान में जारी युद्धविराम है, जिसने ईरान को संभलने और उन लॉन्चरों को बाहर निकालने का समय दे दिया है, जो पिछले हमलों के दौरान दब गये थे।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए के एक आकलन में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि ईरान भारी आर्थिक संकट का सामना करने से पहले अमेरिका के नेतृत्व वाली वर्तमान नाकेबंदी को अगले चार महीनों तक और झेल सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के शासन ढांचे को 'पूरी तरह से बिखरा' बताया है। वहीं ह्वाइट हाउस ने इस बात पर जोर दिया है कि सैन्य दबाव, आर्थिक अलगाव और आंतरिक कलह ने ईरानी शासन को काफी कमजोर कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे भी आगे बढ़कर तर्क दिया है कि ईरान में प्रभावी रूप से सत्ता परिवर्तन हो चुका है और वर्तमान वार्ताकार पहले वालों की तुलना में अधिक 'समझदार' हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:30:25 +0530</pubDate>
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                <title>सीएम योगी ने दी बंगाल के नए मंत्रियों को शुभकामनाएं, बोले- जनसेवा से पुनर्स्थापित करें सोनार बांग्ला का गौरव</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंगाल के नए मंत्रिमंडल को बधाई देते हुए "सोनार बांग्ला" के गौरव को पुनर्स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने मंत्रियों से जनसेवा को सर्वोपरि रखने की अपील की और माँ काली से उनके यशस्वी कार्यकाल की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने बंगाल की समृद्ध विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का विश्वास जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-yogi-congratulated-the-new-ministers-of-bengal-and-said/article-153255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/yogi_adityanath_630x400.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री और मंत्री पद की शपथ लेने वाले सभी जनप्रतिनिधियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में नए मंत्रियों से जनसेवा को सर्वोपरि रखते हुए “सोनार बांग्ला” के गौरव को पुनर्स्थापित करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में लिखा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि सभी मंत्री जनसेवा को सर्वोच्च मानकर कार्य करेंगे और पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान देंगे।</p>
<p>उन्होंने मां काली का स्मरण करते हुए कहा कि देवी की कृपा से सभी मंत्रियों का कार्यकाल यशस्वी, जनकल्याणकारी और लोकहित को समर्पित हो। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश का समापन “वंदे मातरम्” के साथ किया। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल के सदस्यों ने शनिवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से शुभकामनाएं दी जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:32:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में बड़े बदलाव की तैयारी: योगी सरकार कैबिनेट विस्तार और संगठन में जल्द होगा फेरबदल, इन दिग्गजों के नामों को लेकर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[बंगाल के बाद अब भाजपा का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर है। योगी सरकार में 10 से 15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार और बड़े संगठनात्मक बदलाव संभावित हैं। जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए पिछड़ा वर्ग, दलित और महिलाओं को विशेष प्रतिनिधित्व देकर 2027 की चुनावी बिसात बिछाई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/yogi-government-is-preparing-for-big-changes-in-up-before/article-153231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/yogi-cabinet.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का केंद्रीय नेतृत्व उत्तर प्रदेश पर फोकस करने जा रहा है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी भाजपा में बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक बदलावों की तैयारी तेज हो गई है। दरअसल पार्टी और सरकार स्तर पर होने वाले ये बदलाव भाजपा के लिए सामाजिक, क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का अहम अवसर माने जा रहे हैं। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, संगठन में फेरबदल, योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट विस्तार तथा विभिन्न आयोगों, निगमों और बोर्डों में खाली पदों पर नियुक्तियां जल्द हो सकती हैं।</p>
<p>पार्टी का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले यह आखिरी बड़ा मौका होगा, जब विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समूहों को संतुलित तरीके से प्रतिनिधित्व दिया जा सके। भाजपा के एक वरिष्ठ सांसद के अनुसार, “पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होते ही केंद्रीय नेतृत्व उत्तर प्रदेश की ओर ध्यान देगा। संगठनात्मक बदलाव, कैबिनेट विस्तार और विभिन्न निगमों-बोर्डों में नियुक्तियों को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी पहले ही हो चुकी है।”</p>
<p>सूत्रों का कहना है कि योगी सरकार में बहुप्रतीक्षित कैबिनेट फेरबदल 10 से 15 मई के बीच कभी भी हो सकता है। करीब आधा दर्जन नेताओं के नाम संभावित मंत्रिमंडल विस्तार या विभागीय बदलाव को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। भाजपा सांसद ने बताया कि भाजपा इस फेरबदल को केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसके जरिए स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की भी तैयारी है। लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों और भाजपा के सामाजिक गठबंधन में आई चुनौतियों को देखते हुए पार्टी विभिन्न जातीय समूहों, क्षेत्रों और समुदायों के प्रतिनिधित्व का नए सिरे से आकलन कर रही है।</p>
<p>सांसद ने कहा, “ पार्टी विशेष रूप से उन वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रही है, जहां उसे समर्थन में कमी महसूस हुई है या जहां विपक्ष अपनी सामाजिक पैठ बढ़ाने में जुटा है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक-दो महिलाओं को मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की चर्चा है। साथ ही ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, कुर्मी, पासी, पाल और वाल्मीकि समुदायों को साधने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।”<br />सूत्रों की मानें तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्रिमंडल में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा मनोज पांडेय, अशोक कटारिया, कृष्णा पासवान और पूजा पाल के नाम भी चर्चा में हैं।</p>
<p>सरकार के अलावा संगठनात्मक स्तर पर भी बड़े बदलाव संभावित हैं। पार्टी संगठन में कई पद लंबे समय से लंबित हैं, जबकि अनेक आयोगों, बोर्डों और निगमों में नियुक्तियां अभी बाकी हैं। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों के नेताओं को समायोजित करने के साथ-साथ आंतरिक संतुलन साधने की कोशिश करेगी। भाजपा सांसद का मानना है कि भाजपा का पूरा फोकस पिछड़ा वर्ग, दलित और गैर-प्रभावशाली जातियों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर रहेगा। साथ ही उन क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश होगी, जहां पार्टी को पर्याप्त राजनीतिक भागीदारी नहीं मिल सकी है।</p>
<p>सूत्रों की मानें तो महिला प्रतिनिधित्व को भी भाजपा विशेष महत्व दे सकती है। केंद्र और राज्य सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं और लाभार्थी राजनीति को देखते हुए पार्टी महिला वोटरों के बीच अपना संदेश और मजबूत करना चाहती है। भाजपा सूत्रों का मानना है कि हिंदुत्व के मुद्दे पर पार्टी को कोई बड़ी चुनौती नहीं है, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले जातीय, क्षेत्रीय और लैंगिक संतुलन साधना बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट विस्तार, संगठनात्मक बदलाव और निगमों-बोर्डों में नियुक्तियों को भाजपा राजनीतिक संदेश और सामाजिक संतुलन के बड़े अभियान के रूप में इस्तेमाल कर सकती है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने कहा कि जहां तक पार्टी में बदलाव और मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा का सवाल है तो पार्टी नेतृत्व को जो उचित लगेगा वो कदम उठाएगी । भाजपा का कार्यकर्ता 2027 चुनाव को लेकर पूरी तरह से तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 13:27:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल में के​सरिया बयार: शुभेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, राज्य में पहली बार भाजपा सरकार; पीएम मोदी सहित कई दिग्गज रहे मौजूद</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिगेड परेड मैदान में शुभेंदु अधिकारी ने के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में भव्य समारोह हुआ। राज्य में 15 साल के टीएमसी शासन का अंत। आजादी के बाद पहली बार बंगाल में भाजपा सरकार का गठन। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/saffron-breeze-in-bengal-subhendu-adhikari-took-oath-as-chief/article-153201"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1122.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड़ मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बंगाल की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने के लिए पीएम मोदी कोलकाता पहुंचे। कोलकाता एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत सुवेंदु अधिकारी ने खुद किया। पीएम मोदी सड़क मार्ग से होते हुए समारोह स्थल तक गए और रास्ते में उन्होंने अपने समर्थकों का अभिवादन किया। </p>
<p>राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार के गठन के साथ राजनीति का एक नया अध्याय शुरु हुआ है और तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्ष के शासन का अंत हो गया है। छप्पन वर्षीय शुभेंदु अधिकारी को राज्यपाल आर एन रवि ने ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में विशाल जन समूह के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। उनके साथ श्री दिलीप घोष, सुश्री अग्निमित्रा पॉल, श्री अशोक कीर्तनिया, श्री खुदीराम टुडू और श्री निसिथ प्रमाणिक को भी मंत्री पद की शपथ दिलायी गयी। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और भाजपा तथा उसके नेतृत्ववाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के शासन वाले विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।</p>
<p>निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगातार दो चुनावों में शिकस्त देने वाले श्री अधिकारी को शुक्रवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुना गया था। उन्नीस सौ पचास के दशक में गठित जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की राजनीतिक विरासत और विचारधारा की वाहक भाजपा पश्चिम बंगाल में 20।6 से पहले राजनीतिक हाशिए पर थी। वर्ष 2016 के विधान सभा चुनाव में उसने पहली बार तीन सीटों के साथ अपना खाता खोला था और 2021 के चुनाव में पार्टी ने 77 सीटें जीत कर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा प्राप्त किया। राज्य में भाजपा के उदय के साथ वर्षों से सत्ता में रहे कांग्रेस और वामपंथी दल हाशिए पर चले गये।</p>
<p>शपथ ग्रहण समारोह के मंच पर कविवर रवींद्र नाथ टैगोर का चित्र लगा हुआ था जिनकी आज जयंती मनायी जा रही है। प्रधानमंत्री ने मंच पर पहुंचते ही उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। उनके बाद शुभेंदु अधिकारी ने भी साहित्य के नोबेल से सम्मानित गुरुदेव को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से राज्य की जनता को दंडवंत प्रणाम किया। उन्होंने मंच पर ही पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे पुराने कार्यकर्ताओं में से एक माखनलाल सरकार का शॉल ओढ़ा कर अभिनंदन किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। अधिकारी ने कल भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद पश्चिम बंगाल के पुर्निर्माण का संकल्प लेते हुए कहा था कि भाजपा सरकार राज्य की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करेगी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि बंगाल एक समय देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य था लेकिन राजनीतिक माहौल के चलते धीरे धीरे पिछड़ता गया । इस बार विधान सभा चुनाव में यह भी एक प्रमुख मुद्दा था। इसके अलावा राज्य में घुसपैठिए, हिंसा, भ्रष्टाचार , बेरोजगारी, महिला सुरक्षा को भी भाजपा नेताओं ने ममता सरकार के विरुद्ध प्रमुख मुद्दा बनाया था। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चले विवाद के बीच हुए इस चुनाव में मतदाताओं की ऐतिहासिक भागीदारी रही और 92.93 प्रतिशत मतदान हुआ। यह आजादी के बाद एक रिकार्ड है। तृणमूल ने एसआईआर को एक बड़ा मुद्दा बनाया था और आरोप लगाया था कि जानबूझ कर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गये हैं। चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से कराने तथा मतदाताओं को हिंसा तथा भय मुक्त वोट का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये थे।</p>
<p>इस चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक वोटों से पराजित हुईं। पिछले 2021 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट पर हराया था। शुभेंदु इस बार नंदीग्राम से भी चुनाव जीते हैं।</p>
<p>पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और नमन किया। सीएम अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए "विश्वकवि" को नमन किया और बांग्ला साहित्य, संस्कृति और चिंतन में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। उन्होंने कहा, "उनकी अमर रचनाएं, मानवतावादी दर्शन और देशभक्ति ने युगों-युगों तक हमारे मार्गदर्शन का काम किया है। वे हमेशा बांग्ला साहित्य और संस्कृति के आकाश में एक चमकते सितारे के रूप में बने रहेंगे। मानव सभ्यता उसी महान विचार से प्रेरित होकर आगे बढ़ती रहे —'जहां मन भय से मुक्त हो और मस्तक ऊँचा रहे'।"</p>
<p>इससे पहले पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता सुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाक़ात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। यह राज्य में भाजपा की पहली सरकार होगी। शुभेंदु अधिकारी विधायक दल का नेता चुने जाने के करीब दो घंटे बादपार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ लोक भवन पहुँचे। इस दौरान उनके साथ मौजूद लोगों में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और वरिष्ठ नेता दिलीप घोष, लॉकेट चटर्जी तथा तापस रॉय मौजूद थे।</p>
<p>शुभेंदु अधिकारी पिछली विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर काम कर चुके हैं। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में विधायक दल का नेता चुना गया।</p>
<p><br /> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 11:34:50 +0530</pubDate>
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                <title>अबकी बार &quot;विजय सरकार&quot;: बहुमत का आंकड़ा पार, कांग्रेस के बाद इन 3 दलों ने दिया समर्थन, आज करेंगे राज्यपाल से मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु में राजनीतिक गतिरोध समाप्त! थलापति विजय की पार्टी TVK को सीपीआई(एम), सीपीआई और वीसीके का निर्णायक समर्थन मिल गया है। 118 के बहुमत आंकड़े को पार करते हुए विजय आज शाम राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। यह राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/this-time-vijay-sarkar-crossed-the-majority-mark-after-congress/article-153175"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk-2.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर चल रहा राजनीतिक असमंजस अब लगभग खत्म होता नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक, सीपीआई(एम), सीपीआई और वीसीके ने थलापति विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है। इन दलों के समर्थन के बाद विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन को विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा मिल गया है।</p>
<p>234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है, जो अब टीवीके के पक्ष में बताया जा रहा है। पार्टी के पास पहले से 107 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस समेत अन्य सहयोगी दलों का समर्थन भी उसे प्राप्त है। सूत्रों के अनुसार, विजय आज शाम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। वहीं, समर्थन देने वाले दल संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने फैसले की औपचारिक घोषणा भी कर सकते हैं। टीवीके नेताओं ने दावा किया है कि पार्टी के पास स्थिर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 17:27:43 +0530</pubDate>
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