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                <title>New Beginning - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास बहाली की सार्थक पहल</title>
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                        <![CDATA[पिछले सप्ताह कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का चार दिवसीय भारत दौरा हुआ। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/meaningful-initiative-to-restore-confidence-in-bilateral-relations/article-145925"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(5)5.png" alt=""></a><br /><p>पिछले सप्ताह कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का चार दिवसीय भारत दौरा हुआ। दौरा भी ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक भू-राजनीतिक गठबंधन टूट रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल युद्ध छिड़ा हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध पांचवें वर्ष में प्रवेश कर गया है। भारत-कनाडा के संबंध पिछले कुछ वर्षों में गंभीर कूटनीतिक तनाव से गुजरे हैं। ऐसे में कार्नी की यह यात्रा केवल औपचारिक शिष्टाचार भर नहीं थी बल्कि द्विपक्षीय रिष्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कार्नी के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते की रूपरेखा तय करने, यूरेनियम की आपूर्ति, दुर्लभ खनिज समेत 17 समझौते हुए। इनमें सबसे प्रमुख 2.6 अरब डॉलर की दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति का वाणिज्यिक समझौता हुआ। जो भारत के लिए असैन्य परमाणु उूर्जा उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों की प्राप्ति और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>रक्षा उद्योग और व्यापार : </strong></p>
<p>दोनों देश मिलकर छोटे और आधुनिक परमाणु रिएक्टर पर भी काम करेंगे। साथ ही रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र जागरूकता, सैन्य आदान-प्रदान बढ़ाएंगे। इसी उद्देष्य से डिफेंस डॉयलाग शुरू करने का निर्णय लिया गया है। वर्ष 2030 तक दोनों देशों ने द्विपक्षीय कारोबार 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है जिसके लिए मुक्त व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। कनाडा ने इस मौके पर भारत की पहल पर इंटरनेशनल सोलर एलायंस, बॉयोफ्यूल एलायंस में शामिल होने की घोषणा की। साथ ही कनाडा के विश्वविद्यालय भारत में परिसर खोलेंगे। भारत-कनाडा-ऑस्ट्रेलिया के बीच तकनीक और इनोवेशन के बीच त्रिपक्षीय समझौता, कुंडली में पल्स प्रोटीन सेंटर की स्थापना, एआईसीटीई और कनाडा की एजेंसी के बीच रिसर्च 300 इंटर्नशिप, दुर्लभ खनिजों को लेकर समझौता हुआ। एआई, हैल्थकेयर, कृषि और नवाचार में शिक्षण संस्थाओं के बीच 24 समझौते हुए।</p>
<p><strong>सकारात्मकता की ओर बढ़ते कदम :</strong></p>
<p>आईओआरए में कनाडा डॉयलाग पार्टनर बना। भारत-कनाडा संसदीय समूह की स्थापना, इंडिया कनाडा सीईओ फोरम का पुनर्गठन, भारत-कनाडा डिफेंस डायलाग की स्थापना की घोषणाएं हुईं। दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ, पूरी मानवता के लिए साझा और गंभीर चुनौतियां हैं। इनके विरुद्ध दोनों का करीबी सहयोग दुनिया में षांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। मार्क कार्नी ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में कनाडा और भारत अपनी अर्थव्यवस्थाओं को अधिक स्वतंत्र अधिक विविधतापूर्ण और अधिक लचीला बनाने के लिए रूपांतरित कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच हुए समझौते एक नए और समृद्ध संबंध की शुरुआत है। यहां यह भी स्वीकारना होगा कि ऐसी पहल से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में सकारात्मक बदलाव को बल मिलता है।</p>
<p><strong>भारत-कनाडा की नई शुरूआत :</strong></p>
<p>भारत-कनाडा संबंध वर्ष 2023-24 के दौरान खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या के आरोपों को लेकर काफी तनावपूर्ण रहे। उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंसियों पर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था। परिणामस्वरूप दोनों देशों ने अपने-अपने राजनयिकों का वापस बुलाया, वीजा सेवाएं प्रभावित हुईं और व्यापार वार्ता ठप पड़ गई।<br />ऐसे माहौल में मार्क कार्नी का प्रधानमंत्री बनना और भारत का दौरा करना इस बात का संकेत है कि ओटावा अब बीती बातों को भुलाकर नई शुरुआत करना चाहता है। कार्नी की छवि एक अनुभवी अर्थशास्त्री और वैश्विक वित्त विशेषज्ञ की रही है, जिन्होंने बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड का नेतृत्व किया है। इसलिए उनका दृष्टिकोण अधिक आर्थिक केंद्रित और व्यावहारिक माना जा रहा है।</p>
<p><strong>विश्वास बहाली पर जोर :</strong></p>
<p>इस यात्रा का सबसे बड़ा उद्देश्य विश्वास बहाली था। भारत की प्राथमिक चिंता रही है कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक समूहों को राजनीतिक संरक्षण न मिले। वहीं, कनाडा मानवाधिकार और कानून के शासन की बात करता रहा है। कार्नी के दौरे से यह संकेत मिला कि दोनों पक्ष इन मुद्दों को सार्वजनिक टकराव की बजाय मामले को बातचीत के माध्यम से सुलझाना चाहते हैं। भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 8-10 अरब डॉलर के आसपास रहा है जो संभावनाओं की तुलना में काफी कम है। पहले कॉम्प्रिहेंसिव इकॉनामी पार्टनरषिप एग्रीमेंट सेपा पर बातचीत चल रही थी जो तनाव के कारण रुक गई। इस दौरे में संकेत मिला कि व्यापार वार्ता को चरणबद्ध तरीके से फिर शुरू किया जा सकता है।</p>
<p><strong>ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स :</strong></p>
<p>कनाडा यूरेनियम, पोटाश और अन्य दुर्लभ खनिजों का बड़ा उत्पादक है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन के लिए ये खनिज अहम हैं। कनाडा से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते की रणनीतिक जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। कार्नी वैश्विक स्तर पर जलवायु वित्त के बड़े समर्थक रहे हैं। भारत की नेट जीरो 2070 प्रतिबद्धता और ग्रीन ट्रांजिशन में कनाडाई निवेश की संभावनाएं इस यात्रा का अहम हिस्सा रहीं। कनाडा ने हाल के वर्षों में अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति घोषित की है, जिसमें भारत को एक प्रमुख साझेदार बताया गया है। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच कनाडा भी एशिया में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। अब इस ओर पारदर्शिता के साथ प्रयास सुनिश्चित करने जरूरी है। कार्नी की वित्तीय पृष्ठभूमि भारत के डिजिटल भुगतान और फिनटेक इकोसिस्टम के साथ तालमेल बैठाने में मददगार साबित हो सकती है।</p>
<p><strong>-महेश चंद्र शर्मा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 11:41:56 +0530</pubDate>
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                <title>कलवकुंतला कविता ने की तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की पूजा-अर्चना: नई राजनीतिक पार्टी बनाने का दिया संकेत, दिल्ली आबकारी नीति के मामले में मिली क्लीन चीट</title>
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                        <![CDATA[दिल्ली आबकारी मामले में बरी होने के बाद कलवकुंतला कविता ने तिरुमाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की पूजा की। उन्होंने अपनी मन्नत पूरी होने पर पैदल यात्रा की और क्लीन चिट मिलने पर खुशी जताई। कविता ने जल्द ही तेलंगाना के लोगों के लिए एक नई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी बनाने का संकेत दिया है, जो राज्य के हितों के लिए कार्य करेगी।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kalvakuntla-kavita-worshiped-lord-venkateswara-swamy-in-tirumala-hinted-at/article-145462"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/k.-kavita.png" alt=""></a><br /><p>तिरुमाला। तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष कलवकुंतला कविता ने शुक्रवार सुबह तिरुमाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की पूजा-अर्जना की। कविता अपने पति अनिल के साथ सुबह मंदिर गईं और भगवान के दर्शन किए। वह गुरुवार शाम को अलीपिरी की सीढिय़ों से पैदल तिरुमाला पहुंची थीं, ताकि एक मन्नत पूरी कर सकें। दर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों से वह जिस मानसिक पीड़ा का सामना कर रही थीं, वह भगवान वेंकटेश्वर की कृपा से खत्म हो गई। </p>
<p>उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा कहा है कि सच्चाई, न्याय और नेकी उनके साथ हैं और उन्होंने खुशी जताई कि अदालत ने उन्हें दिल्ली आबकारी नीति के मामले में पूरी तरह से बरी कर दिया  है। उन्होंने कहा, भगवान के आशीर्वाद से, मुझे क्लीन चिट मिल गई है। इसीलिए मैं पैदल तिरुमाला आई और अपनी मन्नत पूरी होने पर भगवान वेंकटेश्वर की पूजा-अर्चना की।</p>
<p>कविता ने संकेत दिया कि वह जल्द ही तेलंगाना के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए एक नयी राजनीति पार्टी बनाएंगी। उन्होंने कहा, हम आने वाले दिनों में एक राजनीतिक पार्टी बनाने की योजना बना रही हूं जो राज्य के लोगों के लिए तेलंगाना की गृह पार्टी के तौर पर काम करेगी। मैंने भगवान से प्रार्थना की है कि नयी पार्टी को उनका आशीर्वाद और कृपा मिले। उन्होंने कहा कि हालांकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश अलग-अलग राज्य हैं, लेकिन दोनों इलाकों के लोगों को मिलजुलकर रहना चाहिए। कविता ने कहा कि उन्होंने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लोगों की भलाई और खुशहाली के लिए प्रार्थना की।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:53:16 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>नववर्ष में समाज के निर्माण का संकल्प लें</title>
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                        <![CDATA[नववर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन, आत्मसमीक्षा और नए संकल्पों का अवसर होता है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/take-a-resolution-to-build-an-egalitarian-society-in-the/article-137997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)2.png" alt=""></a><br /><p>नववर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन, आत्मसमीक्षा और नए संकल्पों का अवसर होता है। हर नया साल हमें यह सोचने का मौका देता है कि बीते समय में हमने क्या खोया, क्या पाया और आगे किस दिशा में बढ़ना है। व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ सामाजिक जीवन में भी नववर्ष का महत्व कम नहीं है। यह वह क्षण होता है, जब समाज को नई दिशा देने वाले विचार जन्म लेते हैं और बेहतर भविष्य के सपने आकार लेते हैं। आज जब समाज अनेक तरह की चुनौतियों,असमानता, भेदभाव, जातिवाद, सांप्रदायिकता और सामाजिक विघटन से जूझ रहा है, तब नववर्ष पर समतामूलक समाज के निर्माण का संकल्प लेना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। ऐसा समाज,जहां व्यक्ति की पहचान उसकी जाति, धर्म, भाषा या वर्ग से नहीं, बल्कि उसकी मानवता से हो, जहां हर नागरिक को समान अवसर, सम्मान और न्याय मिले,यही एक सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।</p>
<p><strong>सोचने का अवसर : </strong></p>
<p>नववर्ष हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम समाज के लिए क्या कर सकते हैं। अक्सर हम अपने व्यक्तिगत लक्ष्य तय करते हैं स्वास्थ्य, करियर, आर्थिक प्रगति,लेकिन समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भूल जाते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि जब समाज मजबूत होता है, तभी व्यक्ति भी सुरक्षित और समृद्ध हो पाता है। इसलिए नववर्ष का संकल्प केवल व्यक्तिगत न होकर सामाजिक भी होना चाहिए। समाज निर्माण में सबसे पहली आवश्यकता है एकता और सहयोग। आज समाज में विभाजन की रेखाएं गहरी होती जा रही हैं। जाति, धर्म और विचारधारा के नाम पर नफरत फैलाने की कोशिशें हो रही हैं। ऐसे समय में हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम विभाजन नहीं, बल्कि संवाद और समझ को बढ़ावा देंगे। मतभेद हो सकते हैं,लेकिन मनभेद नहीं। एक-दूसरे की बात सुनना, समझना और सम्मान देना ही सामाजिक एकता की बुनियाद है।</p>
<p><strong>साहस का संकल्प :</strong></p>
<p>नववर्ष पर हमें आशावाद और साहस का संकल्प भी लेना चाहिए। समाज में बदलाव आसान नहीं होता। जब भी समानता और न्याय की बात होती है, तो विरोध और कठिनाइयां सामने आती हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि हर बड़ा सामाजिक परिवर्तन कुछ साहसी लोगों के संकल्प से ही संभव हुआ है। हमें निराशा के बजाय आशा को चुनना होगा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस विकसित करना होगा। समाज के हर व्यक्ति के पास कोई न कोई प्रतिभा, कौशल या अनुभव होता है। नववर्ष पर यह संकल्प लेना आवश्यक है कि हम अपनी क्षमताओं का उपयोग केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक हित में करेंगे। कोई शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे सकता है, कोई स्वास्थ्य, कोई सामाजिक सेवा, तो कोई जागरूकता फैलाने के माध्यम से। छोटे-छोटे प्रयास भी यदि ईमानदारी से किए जाएं, तो वे बड़े बदलाव की नींव बन सकते हैं।</p>
<p><strong>हमारी जिम्मेदारी है :</strong></p>
<p>यदि समाज विकसित होगा, तो देश स्वत: विकसित होगा। राष्ट्र निर्माण किसी एक सरकार या संस्था का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति यह सोच ले कि मेरा छोटा सा योगदान भी मायने रखता है, तो समाज और देश को बदलने से कोई नहीं रोक सकता। यही लोकतंत्र की असली शक्ति है। भारत विविधताओं का देश रहा है। यहां अनेक धर्म, संस्कृतियां, भाषाएं और परंपराएं सदियों से एक-दूसरे के साथ सह-अस्तित्व में रही हैं। हमारी सभ्यता की खूबसूरती इसी विविधता में निहित है। नववर्ष पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम इस विविधता का सम्मान करेंगे और इसे अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाएंगे। आपसी मेल-जोल, प्रेम और भाईचारे से ही राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलती है। हमारे संविधान निर्माताओं ने भारत के लिए जिस समाज की परिकल्पना की थी, उसके मूल में स्वतंत्रता, समता, बंधुता और न्याय के मूल्य थे।</p>
<p><strong>संकल्प लेना होगा :</strong></p>
<p>नववर्ष पर हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम इन मूल्यों को केवल भाषणों और पुस्तकों तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि अपने व्यवहार और सोच में उतारेंगे। संविधान केवल कानून की किताब नहीं, बल्कि एक मानवतावादी दस्तावेज है, जो हर नागरिक को बराबरी का अधिकार देता है। इसलिए यह हमारा संवैधानिक दायित्व है कि हम संविधान को पढ़ें, समझें । किसी भी समाज में असंतोष की स्थिति उत्पन्न होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे संवाद और सहयोग से सुलझाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। नववर्ष पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व के मार्ग पर चलेंगे। नववर्ष का वास्तविक संदेश यही है कि हम केवल अपनी भलाई तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें। इतिहास गवाह है कि बड़े सामाजिक परिवर्तन छोटे-छोटे संकल्पों से ही शुरू हुए हैं। यदि हम ईमानदारी से अपने दायित्व निभाएं, तो बदलाव निश्चित है। अत: इस नववर्ष पर आइए, हम सब मिलकर यह शपथ लें कि हम समतामूलक, न्यायपूर्ण और मानवतावादी समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। यही नववर्ष का सच्चा स्वागत और हमारे लोकतंत्र के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता होगी।</p>
<p><strong>-बाबूलाल नागा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 12:51:29 +0530</pubDate>
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