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                <title>आज आएगी राहत की रेल, डीएपी व यूरिया की होगी आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा सहित हाड़ौती क्षेत्र में यूरिया और डीएपी की डिमांड बढ़ने लगी है। ऐसे में अब किसानों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/relief-train-will-arrive-today--dap-and-urea-will-be-supplied/article-125244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws110.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिले में गत वर्ष की तुलना में इस बार लगभग दोगुने क्षेत्रफल में धान एवं मक्का फसल की बुवाई होने से डीएपी और यूरिया की मांग निरन्तर बनी हुई है। अब फसलों की बढ़वार का दौर होने से किसान खाद के लिए भागदौड़ करने में लगे हुए हैं। कोटा सहित हाड़ौती क्षेत्र में यूरिया और डीएपी की डिमांड बढ़ने लगी है। ऐसे में अब किसानों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है। शनिवार को नर्मदा बायो केम की यूरिया, कृभको की डीएपी और इफको की यूरिया की नई रैक पहुंचेगी। इससे कोटा जिले को करीब 2600-2600 मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया और डीएपी मिल सकेगा। रैक आने के बाद यूरिया और डीएपी को ग्राम सेवा सहकारी समितियों के पास पहुंचाया जाएगा। इसके बाद वहां से किसानों को वितरित किया जाएगा। वितरण की पूरी तैयारी कर ली गई है।  </p>
<p><strong>उर्वरक उपलब्धता के कर रहे निरन्तर प्रयास</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में अभी लगभग 7014 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। 1910 मीट्रिक टन यूरिया सहकारी संस्थाओं यथा ग्राम सेवा सहकारी समितियों, क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में तथा 5104 मीट्रिक टन यूरिया प्राइवेट उर्वरक विक्रेताआें के पास उपलब्ध है। साथ ही, निजी डीलरों एवं सरकारी संस्थाओं के पास अब तक 4399 मीट्रिक टन डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) उपलब्ध है। चम्बल फर्टिलाईजर एण्ड केमिकल्स लिमिटेड, गढेपान द्वारा प्रतिदिन 400 मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति निरन्तर की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्धता के प्रयास निरन्तर किए जा रहे हैं। साथ ही, विभाग द्वारा धान की खेती करने वाले किसानों को यूरिया के स्थान पर बहुउपयोगी एवं गुणकारी अमोनियम सल्फेट उपयोग में लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />हाड़ौती अंचल में खरीफ सीजन के बीच डीएपी खाद की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। जार्डन, मोरक्को, सऊदी अरब जैसे देशों से आने वाली डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की आपूर्ति में बाधा पड़ने के कारण किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। डीएपी की कमी से अमोनिया और अन्य तत्वों की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, जो मुख्य रूप से सऊदी अरब, कतर, ओमान और रूस से आयात होते हैं। स्थिति यह है कि डीएपी की कमी ने अब यूरिया की खपत पर भी दबाव बढ़ा दिया है। किसान विकल्प के तौर पर यूरिया पर अधिक निर्भर होने लगे हैं। इससे स्थानीय गोदामों और सहकारी समितियों पर यूरिया की मांग अचानक बढ़ गई है। मांग बढ़ने से कई स्थानों पर यूरिया का स्टॉक कम पड़ने लगा है, जिससे किसानों को लंबी कतारों में लगकर खाद लेने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नर्मदा बायो केम की यूरिया, कृभको की डीएपी और इफको की यूरिया की नई रैक शनिवार को पहुंचेगी। इससे कोटा जिले को करीब 2600-2600 मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया और डीएपी मिल सकेगा।  जिले में निरन्तर यूरिया एवं डीएपी की आपूर्ति हो रही है। विभाग द्वारा धान की खेती करने वाले किसानों को यूरिया के स्थान पर बहुउपयोगी एवं गुणकारी अमोनियम सल्फेट उपयोग में लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।<br /><strong>-अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:09:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डीएपी खाद की किल्लत किसानों पर पड़ रही भारी, खरीफ की फसल का बुवाई का कार्य होगा शुरू तो आएगी परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[भवानीमंडी में खाद के रैक खाली होगे तो जिले में खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो सकेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/-the-shortage-of-dap-fertilizer-is-taking-a-toll-on-farmers/article-118106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(2)32.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। चौमहला क्षेत्र में अभी खरीफ की फसल का बुवाई का कार्य शुरू होने वाला है, लेकिन किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। किसान खाद के लिए इधर उधर भटक रहे है, लेकिन उन्हें कही से डीएपी खाद नहीं मिल रहा है,किसानों ने सरकार से शीघ्र डीएपी खाद उपलब्ध करवाने की मांग की है। क्षेत्र में डीएपी खाद की किल्लत से किसान परेशान है, सहकारी समितियों मे पिछले कई दिनों से किसान को डीएपी खाद नहीं मिल पाया है। सहकारी समितियों  के अलावा बाजार में भी प्राइवेट कम्पनियों के द्वारा डीएपी खाद की सप्लाई नहीं हो पाई है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है। किसान डीएपी खाद के लिए इधर उधर भटक रहे है लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पा रहा है। कृषि विभाग व सहकारी समिति का कहना है कि सरकार ने डीएपी खाद का आर्यात कम कर दिया है जिस कारण डीएपी की किल्लत बनी हुई है। साकरिया निवासी किसान भगवान सिंह,भाटखेड़ी निवासी ईश्वर सिंह ने बताया कि इन दिनों बाजार व सहकारी समितियों में डीएपी खाद नहीं मिल रहा है अभी बुवाई शुरू होने वाली है हमें खेतो में डीएपी डालना है लेकिन खाद मिल नहीं रहा है जिससे किसान परेशान हो रहे है। सहायक कृषि अधिकारी विकास जैन ने बताया कि किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी की जगह एन पी के 20 20 13 का उपयोग करे  यह बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है इसके अलावा किसान एस एस पी 3 बोरी व यूरिया 1 बोरी मिक्स कर खेतों में डाले यह डीएपी का कार्य करेगी,उन्होंने बताया कि गांव गांव कृषक गोष्ठी कर किसानों को गोबर खाद, केंचुआ खाद के उपयोग की सलाह दी जा रही है। किसान नैनो डीएपी का भी उपयोग कर सकते है। सहकारी समिति व्यवस्थापक सुरेश चंद्र खमोरा ने बताया कि आगे से सप्लाई नहीं आने से क्षेत्र में खाद की समस्या बनी हुई है। खाद के स्थाई समाधान के लिए इफको, कृपको कंपनी के ट्रेन से आने वाले खाद के रैक भवानीमंडी स्टेशन पर खाली होने चाहिए यदि भवानीमंडी में खाद के रैक खाली होगे तो जिले में खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो सकेगा।</p>
<p>डीएपी खाद नहीं मिलने से किसान परेशान हो रहे है, किसानों को शीघ्र डीएपी खाद उपलब्ध कराना चाहिए। <br /><strong>- ईश्वर सेन, अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ</strong></p>
<p>इफको,कृपको कंपनी द्वारा डीएपी खाद की आपूर्ति नहीं होने के कारण सहकारी समितियों में खाद की कमी बनी हुई है, समिति द्वारा हर माह खाद की डिमांड भेजी जा रही है।<br /><strong>- सुरेश खमोरा, व्यवस्थापक, गंगधार क्रय विक्रय सहकारी समिति चौमहला</strong></p>
<p>डीएपी का आयात कम करने के कारण समस्या बनी हुई है,बाजार में डीएपी का विकल्प पर्याप्त मात्रा में मौजूद है,यदि डीएपी आता भी है तो कंपनी अटैचमेंट देती है जो कोई किसान नहीं लेता।<br /><strong>- शरद अग्रवाल, अध्यक्ष, खाद बीज व्यापार संघ</strong></p>
<p>डीएपी की आगे से ही सप्लाई नहीं है, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे एनपी के 20.20.13 का उपयोग करे जो पर्याप्त मात्रा में बाजार में उपलब्ध है।<br /><strong>- विकास जैन, सहायक कृषि अधिकारी चौमहला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 18:58:29 +0530</pubDate>
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                <title>डीएपी की किल्लत से किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों की हालत यह है कि खाद के इंतजाम के लिए जल्द सुबह ही अपने घरों से निकलते है लेकिन शाम को खाली हाथ ही घर लौटते है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/farmers-troubled-by-the-shortage-of-dap/article-93635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/277rtrer-(6).png" alt=""></a><br /><p>इटावा। खरीफ की फसल नहीं होने से परेशान धरतीपुत्रों की परेशानी दूर होने का नाम ही नहीं ले रही है। खेतों में सरसों की बुवाई के लिए खेतों में पलेवा कर दिया, बुवाई करनी है लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल रहा ऐसी स्थिति में बुवाई में देरी हो रही है। इटावा क्षेत्र में पिछले एक माह से ग्राम सेवा सहकारी समिति संस्थाओं व इटावा मार्केटिंग सोसाइटी के गोदाम खाली है। किसानों की हालत यह है कि खाद के इंतजाम के लिए जल्द सुबह ही अपने घरों से निकलते है लेकिन शाम को खाली हाथ ही घर लौटते है। </p>
<p><strong> खाद वितरण में मनमानी</strong><br />जोरावरपुरा के किसान नंदराम नागर का कहना है कि सहकारी संस्थाओं में खाद नहीं आ रहा। वहीं निजी डीलर के यहां आता है, वह अटैचमेंट देते है। वहीं खाद वितरण में भी मनमानी करते हैं। अभी दो-तीन पूर्व खातौली व गणेशगंज और अन्य जगह आया लेकिन डीलरों ने मनमानी की। कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में भी मनमानी करते हैं। यही कहानी इटावा क्षेत्र के 100 से 150 गांवों के किसानों की है। </p>
<p><strong>समय पर खाद नहीं तो बुवाई होगी प्रभावित</strong><br />खेत तैयार हो चुके है। किसानों ने ट्यूबवेल से पानी दे दिया है। अब बुवाई करनी है लेकिन खाद नहीं मिल रहा है। जिसके चलते किसानों की देरी से बुवाई होगी तो उत्पादन प्रभावित होगा। वहीं दुबारा पानी देना पड़ेगा। किसान अपनी परेशानी के साथ परेशान और चिंतित नजर आ रहा है। क्योंकि इस बार खरीफ की उड़द ओर सोयाबीन की अधिकाश फसल खराब हो गई। वहीं नाम मात्र का उत्पादन हुआ है। उसके लिए जैसे तैसे करके साहूकारों से कर्ज लेकर खेती करने पर मजबूर हो रहे है।</p>
<p><strong>आखिर खाद गया कहां  </strong><br /> डीएपी खाद की किल्लत ने कई सवाल भी खड़े कर रखे है कि आखिर खाद की किल्लत क्यों हुई जबकि खरीफ के सीजन में डीएपी की जरूरत नहीं होती। उस समय जो खाद का वितरण हुआ वह खाद किस तरह वितरण हुआ। बाजारों में जो किल्लत दिख रही है। वह कालाबाजारी के लिए तो नहीं है। क्योंकि कई कंपनियों का कहना है कि डिमांड से अधिक डीएपी खाद का आवंटन हो चुका। </p>
<p> खेत तैयार हैं। पिछले आठ दिन से रोजाना इटावा आ रहा हूं कि जैसे तैसे डीएपी का इंतजाम हो जाए लेकिन थक हार कर शाम को घर लौट रहा हूं। <br /><strong>- पूरणमल, किसान, करवाड</strong></p>
<p>डीएपी के लिए सभी दुकानों पर चक्कर लगा रहे है लेकिन एक ही जवाब मिलता है कि डीएपी नहीं है। <br /><strong>- रघुवीर गुर्जर, किसान,  पीपल्दा। </strong></p>
<p> इस वर्ष करीब 15 हजार डीएपी के कट्टों का वितरण किया जा चुका है। वहीं 50 हजार कट्टों की डिमांड की थी। <br /><strong>- बाबूलाल पारेता, सहायक व्यवस्थापक, इटावा मार्केटिंग। </strong></p>
<p> डीएपी जैसे आवंटन होगा वैसे ही कृषि अधिकारियों की देखरेख में वितरण करवाया जा रहा है। अभी खाद नहीं आया है।  <br /><strong>- मुरारीलाल बैरवा, कृषि अधिकारी, सुल्तानपुर। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2024 16:16:34 +0530</pubDate>
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                <title>खरीफ की बुवाई का हुआ समय! लेकिन नहीं मिल रहा डीएपी </title>
                                    <description><![CDATA[किसानों में चिंता की लहर, नहीं कर पा रहे बुवाई। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/it-s-time-for-sowing-kharif-crops--but-dap-is-not-available/article-83319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/khairf-ki-buvayi-ka-hua-samaye,-lekin-nhi-mil-rhi-dap...sangod,-kota-news-01-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>सांगोद। क्षेत्र में प्री मानसून व 25 जून से मानसून की बरसात के साथ ही खरीफ की फसल की बुवाई का समय आ गया है। परंतु डीएपी की भारी किल्लत देखी जा रही है। किसान डीएपी खाद के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हो रहे हैं। सहकारी अधिकारी व स्थानीय दुकानदारों ने डीएपी खाद की किल्लत के कारण हाथ खड़े कर दिए हैं। डीएपी की कमी हो जाने से किसान खरीफ की फसलों की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। जबकि बुवाई का समय हो चुका है। जिससे किसानों में चिंता की लहर फैली हुई है। किसानों ने बताया कि धान की फसल के लिए बुवाई के साथ डीएपी की जरूरत है। परंतु सहकारी समितियों में डीएपी का स्टॉक खत्म हो चुका है। क्षेत्र की सहकारी समितियों में भी खाद उपलब्ध नहीं है। इस कारण किसानों में बुवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। </p>
<p><strong>स्टॉक खत्म हुए हो चुका है लंबा समय</strong><br />किसानों ने बताया कि नगर में मौजूद खाद की दुकानों का स्टॉक खत्म हुए काफी दिन हो गए हैं। परंतु डीएपी की आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण प्राइवेट डीलर भी किसानों को डीएपी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं।</p>
<p><strong>अच्छी पैदावार के लिए खाद की जरूरत</strong><br />किसानों ने बताया कि दो बार की अच्छी बरसात के बाद अब किसान सोयाबीन व खरीफ की फसल की बुवाई की तैयारी में हैं। लेकिन फसल के अच्छे उत्पादन के लिए अन्नदाताओं को खाद की जरूरत है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सोयाबीन की फसल तो बो दी है। लेकिन बिना डीएपी के अच्छी उपज मिलना मुश्किल है। किसानों की रोजी फसल पर ही निर्भर है। प्रशासन और सरकार को इसके लिए प्रयास करने चाहिए।<br /><strong>- पुरुषौत्तम मेहता, किसान, लक्ष्मीपुरा</strong></p>
<p>हर वर्ष इसी तरह डीएपी की किल्लत होती है। सहकारी समिति को पहले से इसकी व्यवस्था रखनी चाहिए या आगे सूचित करना चाहिए। ताकि किसानों को समस्या का सामना नहीं करना पड़े। <br /><strong>- कुलदीप नागर, किसान, ओदपुर</strong></p>
<p>डीएपी की कमी हो जाने से किसान खरीफ की फसलों की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। जबकि बुवाई का समय हो चुका है। जिससे किसानों में चिंता की लहर फैली हुई है।  अगर एक सप्ताह के अंदर डीएपी की कमी पूरी नहीं हुई तो किसानों के सामने बहुत बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी।  सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। <br /><strong>- हंसराज गोचर, खजूरी ओदपुर, किसान</strong></p>
<p>डीएपी खाद को लेकर डिमांड रिपोर्ट भेजी गई है। जल्द ही क्षेत्र में डीएपी की आपूर्ति की जाएगी।<br /><strong>- ओम मेहता, अध्यक्ष, मार्केटिंग सोसायटी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 16:50:21 +0530</pubDate>
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                <title>CM गहलोत का केंद्र पर आरोप : राजस्थान को मांग के अनुरूप पर्याप्त DAP नहीं मिल रहा</title>
                                    <description><![CDATA[डीएपी के संकट पर बोले गहलोत.....केन्द्र सरकार ने 6 लाख मीट्रिक टन मांगा, लेकिन अब तक 3.83 लाख मीट्रिक टन डीएपी ही मिला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AA---%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4-dap-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE/article-1889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ashok-gehlot8.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान को मांग के अनुरूप पर्याप्त डीएपी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में कृषकों से अनुरोध है कि वर्तमान में आवश्यकता के अनुरूप ही उर्वरकों का क्रय करें, अनावश्यक भंडारण ना करें। उर्वरकों की आपूर्ति में सुधार के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है।<br /> <br /> गहलोत ने कहा कि प्रदेश को डीएपी केन्द्र सरकार के माध्यम से ही प्राप्त होता है। राज्य सरकार चाहकर भी सीधे क्रय नहीं कर सकती। अप्रैल से अक्टूबर 2021 के दौरान केन्द्र सरकार ने 6 लाख मीट्रिक टन मांग के विरुद्ध अब तक 3.83 लाख मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति की गई। गत दिनों प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में उत्पन्न डीएपी संकट व किसानों की कठिनाई की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया व केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री से वार्ता कर अवगत करवाया गया। प्रदेश के कृषि मंत्री, प्रमुख शासन सचिव, अधिकारीगण डीएपी आपूर्ति सुधार के लिए निरन्तर केन्द्र सरकार के सम्पर्क में हैं।<br /> <br /> <strong>विश्व और देश भर में डीएपी का संकट</strong><br /> <br /> डीएपी की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। चीन से उर्वरक आयात कम होने से डीएपी की आपूर्ति में कमी देश डीएपी की आपूर्ति हेतु काफी हद तक आयात पर निर्भर है। देश के विभिन्न राज्य जैसे उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान डीएपी की कमी से जूझ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Oct 2021 12:37:15 +0530</pubDate>
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                <title>डीएपी खाद की कमी से किसान परेशान, कालाबाजारी रोकने प्रशासन: सिंघवी</title>
                                    <description><![CDATA[खाद विक्रेताओं द्वारा डीएपी के 1 कट्टे के साथ काश्तकारों को दो  फाॅस्फेट के कट्टे साथ में दिए जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61701081ebf6d/article-1799"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/121.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  छबड़ा विधायक व पूर्व मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी ने बताया कि क्षेत्र के कई किसानों की आए दिन डीएपी खाद के संबंध में शिकायतें प्राप्त हो रही है। किसानों द्वारा बताया जा रहा है कि क्षेत्र के खाद विक्रेताओं द्वारा डीएपी के 1 कट्टे के साथ काश्तकारों को दो  फाॅस्फेट के कट्टे साथ में दिए जा रहे हैं। तथा कई विक्रेताओं द्वारा खाद की कालाबाजारी की जा रही है।  विधायक सिंघवी ने सरकार से मांग की है कि छबड़ा विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे जिले में खाद की जो भयंकर कमी आ रही है उसको दूर किया जाए।</p>
<p><br />  अतिवृष्टि से पीड़ित किसान  जिसकी आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है।  जिसकी माली हालत अभी डीएपी के कट्टे खरीदने जैसी भी नहीं है।  उनको सरकार द्वारा प्रदेश में उत्पादित एसएसपी (सिंगल सुपर फाॅस्फेट) के   कट्टे जो खाद विक्रेताओं से जबरन बिकाये जा रहे हैं।  इसको अतिशीघ्र बंद किया जाए तथा किसानों को आवश्यकतानुसार डीएपी (ड्राई अमोनिया फाॅस्फेट) खाद के कट्टे उपलब्ध कराया  जाये।  कृषि विभाग व जिला प्रशासन खाद की कालाबाजारी रोकने की उचित व्यवस्था करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Oct 2021 18:32:59 +0530</pubDate>
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                <title>किसान की बेबसी-दिन के उजाले में नहीं रात के अंधेरे में मिलता डीएपी</title>
                                    <description><![CDATA[सवाईमाधोपुर में 12 सौ रुपए का कट्टा, 25 सौ रुपए में रात के अंधेरे में बिका : डीएपी खाद नहीं होेने से नहीं हो रही बुवाई :   डीएपी खाद नहीं मिलने से फसल की गुणवक्ता पर पड़ा विपरीत असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AA%E0%A5%80/article-1707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/dholpur-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। राज्य में डीएपी खाद की किल्लत ने किसान को बेबस कर दिया है। प्रदेश के अधिकांश गांवों में डीएपी खाद को दुकानदार दिन के उजाले में बेचने के बजाए, रात के अंधेरे में मनमाने दामों में बेच रहे हैं। सवाईमाधोपुर के खंड़ार विधानसभा में तो 12 सौ रुपए का डीएपी खाद का कट्टा 25 सौ रुपए में बिकने की सूचना है। खाद-बीज की दुकान संचालकों के डीएपी खाद को मनमाने दामों पर बेचने से पौबारह हो गई है और सरकारी स्तर पर मॉनिटरिंग नहीं होने से किसान खासा बेहाल है। सवाईमाधोपुर के भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष लटूर सिंह गुर्जर ने बताया कि खंड़ार में मध्यप्रदेश के श्योपुर से लाकर डीएपी खाद मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है, जिस पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं हैं। जयपुर जिले के बस्सी, चाकसू, चौमूं, जमवारामगढ़ में किसान को डीएपी की उपलब्धता नहीं है, लेकिन दुकानदार से मान-मनोव्वल करने और अधिक राशि देने पर चुपके से रात के अंधेरे में खाद उपलब्ध कराने की सूचना हैं। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>सवाईमाधोपुर के किसान ने 1200 का कट्टा, 25 सौ में लिया</strong></span></span>-<br /> बालमुकुन्द चौधरी और सुमेर सिंह शेखावत निवासी सुखवास, जिला सवाईमाधोपुर ने बताया कि दुकानदार ने 12 सौ का कट्टा क्रमश:  2500 और 17 सौ रुपए में दिया है। जबकि डीएपी के कट्टे दुकान पर देने की बजाए किसी दूसरे स्थान से उपलब्ध कराए गए।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>बुवाई में देरी, किसान परेशान</strong></span></span><br /> किसान को डीएपी खाद नहीं मिलने से सरसों और चने की बुवाई नहीं कर पा रहा है। आमतौर पर सरसों की बुवाई एक अक्टूबर से शुरू हो जाती है, लेकिन अभी तक प्रदेश में सरसों की बहुत कम बुवाई हो पाई है। प्रदेश में इस बार सरसों और तारामीरा की 30 लाख हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन अभी तक 25 प्रतिशत बुवाई भी नहीं हो पाई है। यदि बुवाई के समय डीएपी खाद का सही प्रकार से उपयोग नहीं किया तो उससे सरसों और चने की फसल की गुणवक्ता पर विपरीत असर पड़ता है। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Oct 2021 14:59:29 +0530</pubDate>
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