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                <title>helpless - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अपना घर आश्रम : जहां बेघर को मिलता है सुकून का ठिकाना, मानसिक विक्षिप्त, असहाय और लावारिसों के जीवन में उम्मीद की किरण</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा द्वारा शहर व हाड़ौती भर के विभिन्न स्थानों से लावारिस व मानसिक विक्षिप्त लोगों को रेस्क्यू कर आश्रम लाया जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/apna-ghar-ashram--where-the-homeless-find-solace--a-ray-of-hope-in-the-lives-of-the-mentally-ill--the-helpless--and-the-abandoned/article-132270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/_4500-px)-(25).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस- 1</strong>  28 अक्टूबर 2025 को महिला सुमित्रा (परिवर्तित नाम) को कैथून से एंबुलेंस द्वारा लाया गया उसके बाद आश्रम में उस महिला की देखभाल  करके उसका उपचार किया। जिसके बाद धीरे-धीरे उसकी  याददशत आने पर घर का पता परिजनों के बारे में बताने पर  संबंधित थाने में सूचना देकर उस महिला के परिजनों से संपर्क  करके उसका पुनर्वास  6 नवंबर 2025 को पुनर्वास किया गया। </p>
<p><strong>केस-2</strong> 27 अक्टूबर 2025 को महिला अल्का (परिवर्तित नाम) को लेकर आएं उसके बाद देखभाल की गई। जिनके द्वारा परिजनों का  पता  बताने  पर संबंधित थाने में सूचना देकर महिला का पुर्नवास  31 अक्टूबर को किया गया। </p>
<p><strong>केस- 3</strong> 10 फरवरी 2024 को पुरूष दिनेश कुमार (परिवर्तित नाम)जो कि झालावाड़ से लेकर आएं जो नाम भी सही से नहीं बता पा रही थे। उसके बाद उसका उपचार करके 25 नवंबर 2025 को उनका पुर्नवास किया। जिसको उसके परिजन घर पर ले गए।  </p>
<p>शहर के झालावाड़ रोड के पीछे स्थित अपना घर आश्रम, कोटा द्वारा शहर व हाड़ौती भर के विभिन्न स्थानों से लावारिस व मानसिक विक्षिप्त लोगों को रेस्क्यू कर आश्रम लाया जाता है। कार्यालय प्रभारी अंजली शर्मा ने बताया कि जब भी हमें हाड़ौती के विभिन्न स्थानों से कॉल आती है तो एंबुलेंस उस स्थान पर जाकर व्यक्ति को एंबुलेंस में बैठाकर थाने में सूचना देती है। उसके बाद उन्हें आश्रम कोटा लाया जाता है। वहीं आश्रम में 100 व्यक्तियों का खर्चा सरकार द्वारा वहन किया जाता है। उसके बाद भामाशाह हमारी मदद करते हैं। अभी आश्रम में करीब 314 प्रभुजी रहते हैं, जिनमें 125 पुरुषव 189 महिलाएं शामिल हैं। आश्रम की भारत में करीब 64 शाखाएं हैं और एक शाखा नेपाल में स्थित है। आश्रम द्वारा साल में एक बार ‘प्रभु मुक्त अभियान’ चलाया जाता है, जिसमें टीम एंबुलेंस के साथ पूरे संभाग में घूमती है और जो व्यक्ति लावारिस या मानसिक विक्षिप्त अवस्था में मिलता है, उसकी सूचना थाने में देकर उसे आश्रम लाया जाता है। इससे पहले आश्रम नांता स्थित नारी निकेतन में 2012 से 2016 तक संचालित होता था। बाद में शहर में इसकी स्थापना वर्ष 2017 में हुई। वर्तमान में यहां राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों के प्रभुजी निवास कर रहे हैं।</p>
<p><strong>प्रवेश से पहले संपूर्ण जांच</strong><br />मानसिक विक्षिप्त लोगों को अपना घर आश्रम कोटा में प्रवेश दिया जाता है, तब उनकी मेडिकल जांच की जाती है। उसके बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जाता है। यदि कोई व्यक्ति कैंसर से ग्रसित है तो उसे बीकानेर तथा टी.बी. से ग्रसित को भरतपुर शिफ्ट किया जाता है। अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को संबंधित आश्रम में भेजा जाता है। प्रवेश के बाद लावारिस व मानसिक विक्षिप्त लोगों को ‘प्रभुजी’ नाम दिया जाता है। वहीं महीने में दो बार इन्हें विशेष भोजन दिया जाता है। वर्षगांठ, जन्मदिन सहित विशेष अवसरों पर भी ‘प्रभुजी’ के लिए खास भोजन दिया जाता है।</p>
<p><strong>जरूरत की सामग्री के लिए ‘प्रभुजी को चिट्ठी’ लिखी जाती </strong><br />आश्रम में प्रतिदिन जरूरत की सामग्री किसी से नहीं मांगी जाती। आश्रम में बने बोर्ड पर ‘प्रभुजी को चिट्ठी’ लिखी जाती है। कार्यालय प्रभारी अंजली शर्मा ने बताया कि हम आश्रम के लिए आवश्यक सामग्री बोर्ड पर लिख देते हैं। जिसकी भी इच्छा होती है, वह आश्रम आकर सामग्री दान में देकर चला जाता है। आज तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि बोर्ड पर लिखी सामग्री हमें प्राप्त न हुई हो।</p>
<p><strong>इन समस्याओं का करना पड़ता है सामना</strong><br />आश्रम में लाने से पहले व्यक्ति जो मानसिक संतुलन खो देते वे आश्रम में कार्यरत स्टॉफ को कई बार चोटिल कर देते है। वहीं कई बार हमारे सामने भाषा की चुनौतियों रहती है। जिसके समाधान के लिए हम थर्मल में कार्यरत स्टॉफ, यूटयूब व गूगल की मदद लेते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे लाया जाता है</strong><br />कार्यालय प्रभारी ने बताया कि हमारे आश्रम में जब भी कोई कॉल करता उसके द्वारा बताई गई जगह पर हम एंबुलेंस से पहुंचाते है। उसके बाद थाने में सूचना देकर हम व्यक्ति को आश्रम में लेकर आते हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाईल </strong><br /><strong>वर्ष     पुनर्वास किया </strong><br />2022    109 <br />2023     114<br />2024    149    <br />2025    76</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 15:50:50 +0530</pubDate>
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                <title>राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ समाज के वंचित, असहाय एवं जरूरतमंदों को मिले: बी.एल.मेहरा:</title>
                                    <description><![CDATA[ संभागीय आयुक्त अजमेर बी.एल.मेहरा ने कहा कि राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ समाज के वंचित, असहाय एवं जरूरतमंदों को मिले। राज्य सरकार की मंशानुरूप अधिकारी संवेदनशील, जवाबदेह और पारदर्शी तरीके से अपने राजकार्य का निर्वहन करें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/-bl-mehra--the-benefit-of-flagship-schemes-of-the-state-government-should-be-given-to-the-deprived--helpless-and-needy-of-the-society/article-12398"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/16-june-bhod.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टोंक।</strong>  संभागीय आयुक्त अजमेर बी.एल.मेहरा ने कहा कि राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ समाज के वंचित, असहाय एवं जरूरतमंदों को मिले। राज्य सरकार की मंशानुरूप अधिकारी संवेदनशील, जवाबदेह और पारदर्शी तरीके से अपने राजकार्य का निर्वहन करें।मेहरा ने बुधवार को देर शाम कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं की जिले में प्रगति, 20 सूत्रीय कार्यक्रम, जल जीवन मिशन, पेयजल व्यवस्था, बजट घोषणा से संबंधित प्रकरण एवं जिले में कानून व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।</p>
<p>बैठक में जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल, पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी, सीईओ देशलदान, एडीएम परशुराम धानका सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। संभागीय आयुक्त मेहरा ने शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत खाद्य सामग्री में असुरक्षित पाए गए सैम्पल पर 20 मिलावटी खाद्य पदार्थ आपूर्तिकर्ता के विरूद्ध एडीएम कोर्ट द्वारा अधिकतम जुर्माना राशि लगाने जाने की सराहना की। उन्होंने सीएमएचओ को अनसेफ सैम्पल प्रकरणों के चालान न्यायालय में शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।</p>
<p>मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा एवं जांच योजना में लाभार्थियों की विगत वर्ष की तुलना में वृद्धि होने पर प्रसन्नता जाहिर की। शुद्ध के लिए युद्ध अभियान को जिले के सभी उपखण्डों में निरंतर जारी रखने के लिए निर्देशित किया। संभागीय आयुक्त ने कोरोना वैक्सीनेशन में 60 प्लस आयु के लोगों के प्रिकॉसन डोज में कम प्रगति पर चिन्ता जताते हुए इसे बढ़ाने पर जोर दिया। शिक्षा विभाग के महात्मा गांधी राजकीय (अंग्रेजी माध्यम) विद्यालयों में साक्षात्कार के माध्यम से श्रेष्ठ शिक्षक चयन करने के लिए डीईओ रामनिवास शर्मा को निर्देशित किया। संभागीय आयुक्त ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त निदेशक देवेन्द्र माथुर को ई-मित्र केन्द्रों की सतत् मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि किसी भी ई-मित्र संचालक द्वारा राजकीय/गैर राजकीय सेवाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली जाने पर उसके विरूद्ध नियमानुसार सख्त कार्यवाही की जाएं। सआदत अस्पताल के पीएमओ बी.एल.मीणा को सीसी टीवी कैमरे चालू अवस्था में होने तथा सभी अधिकारियों, नियमित व संविदा कार्मिकों के आईडी कार्ड पहने होने की सुनिश्चितता रखने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि अस्पताल में साफ-सफाई, सुरक्षा एवं मरीजों की चिकित्सा सुविधा को बेहतर बनाएं। राज्य सरकार की घर-घर औषधी योजना की समीक्षा के दौरान संभागीय आयुक्त ने विगत वर्ष जिले के परिवारों में वितरित किए गए औषधिय पौधों की संख्या में से 10 प्रतिशत का फील्ड से फीडबैक लेकर जिला कलेक्टर को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही आगामी माह में शुरू होने वाले इस योजना के द्वितीय चरण में राज्य सरकार से दिए गए 54 लाख के बजट की प्रभावी कार्ययोजना बनाने के लिए निर्देशित किया।<br />संभागीय आयुक्त ने इंदिरा रसोई योजना में नगर पालिका टोड़ारायसिंह की उपलब्धि को बढ़ाने पर जोर देते हुए जिले में प्रस्तावित नवीन रसोई के स्थान चयन की जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल से चर्चा की। उन्होंने जल जीवन मिषन में घर-घर नल कनेक्शन कार्य में पीएचईडी विभाग के एसई को त्वरित गति से कार्य के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, विद्युत, उद्योग विभाग की योजनाओं की समीक्षा कर संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।<br />जिला मुख्यालय पर बैठक से पूर्व संभागीय आयुक्त ने पीपलू में उपखण्ड अधिकारी कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संभागीय आयुक्त ने उपखण्ड अधिकारी पीपलू रवि वर्मा एवं तहसीलदार नेहा चौधरी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।</p>
<p><strong>आवंटित लक्ष्य शत प्रतिशत प्राप्त करें</strong><br />संभागीय आयुक्त मेहरा ने बीस सूत्री कार्यक्रम की विभिन्न योजनाओं की बिन्दुवार समीक्षा तथा जिन विभागों की उपलब्धि कम थी उन्हें सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभागों को प्राप्त आवंटित वार्षिक लक्ष्य शत-प्रतिशत प्राप्त करें। इस योजनाओं के माध्यम से गरीब, आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को लाभ पहुंचाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 13:41:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>किसान की बेबसी-दिन के उजाले में नहीं रात के अंधेरे में मिलता डीएपी</title>
                                    <description><![CDATA[सवाईमाधोपुर में 12 सौ रुपए का कट्टा, 25 सौ रुपए में रात के अंधेरे में बिका : डीएपी खाद नहीं होेने से नहीं हो रही बुवाई :   डीएपी खाद नहीं मिलने से फसल की गुणवक्ता पर पड़ा विपरीत असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AA%E0%A5%80/article-1707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/dholpur-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। राज्य में डीएपी खाद की किल्लत ने किसान को बेबस कर दिया है। प्रदेश के अधिकांश गांवों में डीएपी खाद को दुकानदार दिन के उजाले में बेचने के बजाए, रात के अंधेरे में मनमाने दामों में बेच रहे हैं। सवाईमाधोपुर के खंड़ार विधानसभा में तो 12 सौ रुपए का डीएपी खाद का कट्टा 25 सौ रुपए में बिकने की सूचना है। खाद-बीज की दुकान संचालकों के डीएपी खाद को मनमाने दामों पर बेचने से पौबारह हो गई है और सरकारी स्तर पर मॉनिटरिंग नहीं होने से किसान खासा बेहाल है। सवाईमाधोपुर के भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष लटूर सिंह गुर्जर ने बताया कि खंड़ार में मध्यप्रदेश के श्योपुर से लाकर डीएपी खाद मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है, जिस पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं हैं। जयपुर जिले के बस्सी, चाकसू, चौमूं, जमवारामगढ़ में किसान को डीएपी की उपलब्धता नहीं है, लेकिन दुकानदार से मान-मनोव्वल करने और अधिक राशि देने पर चुपके से रात के अंधेरे में खाद उपलब्ध कराने की सूचना हैं। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>सवाईमाधोपुर के किसान ने 1200 का कट्टा, 25 सौ में लिया</strong></span></span>-<br /> बालमुकुन्द चौधरी और सुमेर सिंह शेखावत निवासी सुखवास, जिला सवाईमाधोपुर ने बताया कि दुकानदार ने 12 सौ का कट्टा क्रमश:  2500 और 17 सौ रुपए में दिया है। जबकि डीएपी के कट्टे दुकान पर देने की बजाए किसी दूसरे स्थान से उपलब्ध कराए गए।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>बुवाई में देरी, किसान परेशान</strong></span></span><br /> किसान को डीएपी खाद नहीं मिलने से सरसों और चने की बुवाई नहीं कर पा रहा है। आमतौर पर सरसों की बुवाई एक अक्टूबर से शुरू हो जाती है, लेकिन अभी तक प्रदेश में सरसों की बहुत कम बुवाई हो पाई है। प्रदेश में इस बार सरसों और तारामीरा की 30 लाख हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन अभी तक 25 प्रतिशत बुवाई भी नहीं हो पाई है। यदि बुवाई के समय डीएपी खाद का सही प्रकार से उपयोग नहीं किया तो उससे सरसों और चने की फसल की गुणवक्ता पर विपरीत असर पड़ता है। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Oct 2021 14:59:29 +0530</pubDate>
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