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                <title>असर खबर का - कोटा पहुंची 1494 मीट्रिक टन डीएपी की रैक</title>
                                    <description><![CDATA[समाचार प्रकाशित होने के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने डीएपी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रयास तेज कर दिए थे। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---rack-of-1494-metric-tons-of-dap-reached-kota/article-93332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(3)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में डीएपी खाद की किल्लत झेल रहे किसानों को अब राहत मिलने लगी है। गुरुवार को दो कम्पनियों की लगभग 1494 मीट्रिक टन डीएपी खाद कोटा पहुंची। किसानों की डिमांड को देखते हुए कृषि विभाग ने डीएपी का वितरण शुरू करवा दिया है। कोटा जिले सहित संभाग में रबी फसलों की बुवाई का कार्य गति पकड़ने लगा है। बुवाई के दौरान किसानों को डीएपी की जरूरत होती है। इसलिए इसकी मांग बढ़ गई है। मांग की तुलना में पूर्व में डीएपी उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इस कारण किसानों को परेशानी हो रही थी। अब डीएपी की आपूर्ति होने लगी है। इससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।   </p>
<p><strong>लोकसभा अध्यक्ष ने दिए थे निर्देश</strong><br />कुछ दिनों से लगातार सामने आ रही खाद की कमी को लेकर जनप्रतिनिधि व किसान प्रतिनिधियों ने लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला से वार्ता कर डीएपी की समस्या से अवगत करवाया था। इसके बाद बिरला के निर्देश पर  आईपीएल कम्पनी की 800 मीट्रिक टन और एक अन्य कम्पनी की 694 मीट्रिक टन डीएपी खाद कोटा पहुंची। बिरला ने केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय के उच्च अधिकारियों को अतिरिक्त डीएपी की आपूर्ति के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कृषि विभाग अधिकारियों को कहा कि वे डीएपी आपूर्ति की मॉनिटरिंग करें और साथ ही स्थानीय उत्पादकों के माध्यमों से मार्केटिंग सोसायटी को पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करवाएं। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />जिले में किसानों द्वारा डीएपी खाद के लिए भागदौड़ करने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति के 13 अक्टूबर के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि रबी फसलों की बुवाई का दौर शुरू हो गया है। इस कारण डीएपी खाद की मांग में तेजी आ गई है। मांग के अनुरूप खाद की उपलब्धता कम होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं किसानों द्वारा निर्धारित मात्रा से अधिक खाद खरीदने से किल्लत हो रही है। जिले में डीएपी के लिए हो रही मशक्कत को देखते हुए कृषि विभाग ने डीएपी खाद लेने की मात्रा निर्धारित कर दी है। समाचार प्रकाशित होने के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने डीएपी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रयास तेज कर दिए थे। </p>
<p><strong>रैक आते ही वितरण प्रक्रिया शुरू</strong><br />कृषि मुख्यालय के सहायक निदेशक राजवीर सिंह ने बताया कि रैक के कोटा पहुंचते ही विभाग की ओर से वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग की ओर से निरन्तर मॉनिटरिंग की जा रही है। अगले कुछ दिनों में आपूर्ति में इजाफा होने से स्थिति में भी सुधार होगा। विभाग द्वारा किसानों से डीएपी- यूरिया का अनावश्यक स्टॉक नहीं करने के साथ दलहन और तिलहन में डीएपी के विकल्प के तौर पर एसएसपी और यूरिया का उपयोग करने का आग्रह किया, इससे उत्पादन अच्छा होगा साथ ही जमीन की उर्वरक क्षमता भी प्रभावित नहीं होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 13:10:18 +0530</pubDate>
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                <title>किसान की बेबसी-दिन के उजाले में नहीं रात के अंधेरे में मिलता डीएपी</title>
                                    <description><![CDATA[सवाईमाधोपुर में 12 सौ रुपए का कट्टा, 25 सौ रुपए में रात के अंधेरे में बिका : डीएपी खाद नहीं होेने से नहीं हो रही बुवाई :   डीएपी खाद नहीं मिलने से फसल की गुणवक्ता पर पड़ा विपरीत असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AA%E0%A5%80/article-1707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/dholpur-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। राज्य में डीएपी खाद की किल्लत ने किसान को बेबस कर दिया है। प्रदेश के अधिकांश गांवों में डीएपी खाद को दुकानदार दिन के उजाले में बेचने के बजाए, रात के अंधेरे में मनमाने दामों में बेच रहे हैं। सवाईमाधोपुर के खंड़ार विधानसभा में तो 12 सौ रुपए का डीएपी खाद का कट्टा 25 सौ रुपए में बिकने की सूचना है। खाद-बीज की दुकान संचालकों के डीएपी खाद को मनमाने दामों पर बेचने से पौबारह हो गई है और सरकारी स्तर पर मॉनिटरिंग नहीं होने से किसान खासा बेहाल है। सवाईमाधोपुर के भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष लटूर सिंह गुर्जर ने बताया कि खंड़ार में मध्यप्रदेश के श्योपुर से लाकर डीएपी खाद मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है, जिस पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं हैं। जयपुर जिले के बस्सी, चाकसू, चौमूं, जमवारामगढ़ में किसान को डीएपी की उपलब्धता नहीं है, लेकिन दुकानदार से मान-मनोव्वल करने और अधिक राशि देने पर चुपके से रात के अंधेरे में खाद उपलब्ध कराने की सूचना हैं। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>सवाईमाधोपुर के किसान ने 1200 का कट्टा, 25 सौ में लिया</strong></span></span>-<br /> बालमुकुन्द चौधरी और सुमेर सिंह शेखावत निवासी सुखवास, जिला सवाईमाधोपुर ने बताया कि दुकानदार ने 12 सौ का कट्टा क्रमश:  2500 और 17 सौ रुपए में दिया है। जबकि डीएपी के कट्टे दुकान पर देने की बजाए किसी दूसरे स्थान से उपलब्ध कराए गए।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>बुवाई में देरी, किसान परेशान</strong></span></span><br /> किसान को डीएपी खाद नहीं मिलने से सरसों और चने की बुवाई नहीं कर पा रहा है। आमतौर पर सरसों की बुवाई एक अक्टूबर से शुरू हो जाती है, लेकिन अभी तक प्रदेश में सरसों की बहुत कम बुवाई हो पाई है। प्रदेश में इस बार सरसों और तारामीरा की 30 लाख हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन अभी तक 25 प्रतिशत बुवाई भी नहीं हो पाई है। यदि बुवाई के समय डीएपी खाद का सही प्रकार से उपयोग नहीं किया तो उससे सरसों और चने की फसल की गुणवक्ता पर विपरीत असर पड़ता है। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Oct 2021 14:59:29 +0530</pubDate>
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