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                <title>Taxation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Taxation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ब्रिटिश राजशाही का बड़ा खुलासा, किंग चार्ल्स और प्रिंस विलियम ने चुकाया करोड़ों का टैक्स</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए वर्ष 2024-2025 के लिए अपना ₹161 करोड़ का टैक्स बिल सार्वजनिक किया है। इसके साथ ही प्रिंस विलियम ने भी ₹96.83 करोड़ का टैक्स चुकाया। शाही परिवार की इस पारदर्शिता की जहां सराहना हो रही है, वहीं आलोचकों ने उनके भारी-भरकम खर्चों पर सवाल भी उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-revelation-of-british-monarchy-king-charles-and-prince-william/article-158152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(3)14.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने वर्ष 2024-2025 के लिए अपने लगभग 161 करोड़ रुपये के टैक्स बिल का खुलासा किया है, जिससे वह अपनी कर देनदारी सार्वजनिक करने वाले पहले ब्रिटिश सम्राट बन गये हैं। इस भुगतान के साथ ही वह ब्रिटेन के शीर्ष 100 करदाताओं की सूची में शामिल हो गये हैं। शाही परिवार की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि के दौरान उत्तराधिकारी और 'प्रिंस ऑफ वेल्स, प्रिंस विलियम' ने भी लगभग 96.83 करोड़ रुपये (77.6 लाख पाउंड) का टैक्स चुकाया है।</p>
<p>बकिंघम पैलेस ने इस कदम को पारदर्शिता बढ़ाने और जवाबदेही के प्रति समझ मजबूत करने का व्यक्तिगत एवं ऐतिहासिक निर्णय बताया है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला बकिंघम पैलेस के बजाय अपने पुराने निवास क्लेरेंस हाउस में ही रहना जारी रखेंगे। शाही कामकाज और महलों के रख-रखाव के लिए मिलने वाले सोवेरिन ग्रांट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गयी है, जो वर्ष 2027-28 के लिए बढ़कर लगभग 1,247.84 करोड़ रुपये (100 मिलियन पाउंड) वार्षिक हो जायेगी। वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि यह टैक्स खुलासा बेहद अस्पष्ट है, क्योंकि इसमें यह नहीं बताया गया है कि आय और पूंजीगत लाभ का विवरण क्या है और टैक्स की गणना किस आधार पर की गयी है।</p>
<p>किंग चार्ल्स को आधिकारिक और निजी खर्चों के लिए 'डची ऑफ लैंकेस्टर' एस्टेट से स्वतंत्र सालाना आय प्राप्त होती है, जो वर्ष 2025-26 में लगभग 314.50 करोड़ रुपये (25.2 मिलियन पाउंड) रही। वहीं प्रिंस विलियम को 'डची ऑफ कॉर्नवाल' से आय मिलती है। प्रिंस विलियम ने समाज सेवा की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए डार्टमूर जेल से मिलने वाले लगभग 18.72 करोड़ रुपये (1.5 मिलियन पाउंड) के वार्षिक किराये को छोड़ने और उस रकम को स्थानीय ग्रामीण समुदाय की मदद में खर्च करने का फैसला किया है। वार्षिक रिपोर्ट से शाही दौरों और अन्य खर्चों की बड़ी जानकारियां भी सामने आयी हैं। पिछले साल प्रिंस विलियम का तीन दिवसीय सऊदी अरब दौरा शाही परिवार का सबसे महंगा विदेशी दौरा रहा, जिस पर लगभग 1.62 करोड़ रुपये (1,30,000 पाउंड) से अधिक खर्च हुए। इसके बाद किंग और क्वीन की अप्रैल 2025 की चार दिवसीय इटली यात्रा पर लगभग 1.57 करोड़ रुपये (1,26,000 पाउंड) से ज्यादा का खर्च आया।</p>
<p>राजशाही खर्चों की आलोचना करने वाले विश्लेषकों का कहना है कि इस खुलासे से यह साफ हो गया है कि शाही परिवार की आय बेहद विशाल है। उनका तर्क है कि यदि किंग चार्ल्स और प्रिंस विलियम राजशाही के खर्चों में कटौती की बात करते हैं तो उन्हें केवल बकिंघम पैलेस की बालकनी पर दिखने वाले लोगों की संख्या कम करने के बजाय अपने भारी-भरकम खर्चों को भी कम करना चाहिए।बकिंघम पैलेस का करीब लगभग 4,616.86 करोड़ रुपये (370 मिलियन पाउंड) की लागत से चल रहा नवीनीकरण कार्य अगले वर्ष मार्च तक पूरा हो जायेगा, जिसके बाद इसे आम जनता के लिए खोलकर राजस्व बढ़ाने की योजना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:21:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>DGFT का झटका: RoDTEP दरें की आधी, राजस्थान के निर्यातकों में हाहाकार; हैंडीक्राफ्ट और जेम्स उद्योग पर मंडराया संकट</title>
                                    <description><![CDATA[डीजीएफटी  ने  देश से निर्यात होने वाली वस्तुओं पर रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्स की दरें की आधी। राजस्थान के निर्यातकों के लिए बड़ा झटका। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती से निर्यातकों की बढ़ेगी लागत। वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dgfts-shock-rodtep-rates-halved-outcry-among-exporters-of-rajasthan/article-144409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/dgft.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक आदेश जारी कर देश से निर्यात होने वाली वस्तुओं पर दिए जा रहे रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्स (RoDTEP) की दरों को तुरंत प्रभाव से आधी कर दिया है। यह फैसला राजस्थान के निर्यातकों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, जहां हैंडीक्राफ्ट, जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल्स और कृषि उत्पादों का निर्यात प्रमुख रूप से होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती से निर्यातकों की लागत बढ़ जाएगी, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।</p>
<p>RoDTEP स्कीम जनवरी 2021 से लागू की गई थी, जिसके तहत केंद्र सरकार निर्यात होने वाले माल पर वसूले गए जीएसटी से इतर करों और ड्यूटीज की वापसी निर्यातकों को करती है। इनमें पेट्रोल-डीजल पर वसूले गए टैक्स, मंडी टैक्स, इलेक्ट्रिसिटी टैक्स इत्यादि शामिल हैं। यह वापसी विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सिद्धांत के आधार पर की जाती है कि ड्यूटीज और टैक्स निर्यात नहीं किए जा सकते।डीजीएफटी के महानिदेशक लव अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सभी एचएस लाइनों के लिए RoDTEP दरें मौजूदा अधिसूचित दरों की 50 प्रतिशत तक सीमित कर दी गई हैं।</p>
<p>राजस्थान के संदर्भ में यह फैसला विशेष रूप से नुकसानदेह है, क्योंकि राज्य का निर्यात मुख्यतः लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स पर निर्भर है। जोधपुर हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिनेश ने कहा, "निर्यातकों को अभी मिल रही RoDTEP दरें भी वास्तविक गणना से बहुत कम थीं तथा अब अचानक इनको आधी कर देने से निर्यातक बड़ी परेशानी में पड़ गए हैं। सभी निर्यातक अपने विदेशी बायर्स के साथ लंबी अवधि आगे तक के रेट कॉन्ट्रैक्ट करके रखते हैं। इसके साथ ही निर्यात होने वाले माल पर लगने वाले पूरे टैक्सेज की वापसी सरकार द्वारा पूरी नहीं किए जाने से भारतीय निर्यातक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाएंगे। सरकार को डब्ल्यूटीओ के सिद्धांत का पालन करते हुए निर्यातकों को तर्कसंगत दरों पर RoDTEP देना चाहिए।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में इस स्कीम के अंतर्गत 18,313 करोड़ रुपये तथा 2025-26 के लिए 18,232 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि वर्ष 2026-27 के बजट के लिए केवल 10 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस कटौती से राजस्थान के निर्यातकों को अनुमानित रूप से करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है, खासकर जोधपुर, जयपुर और उदयपुर जैसे क्षेत्रों में जहां हैंडीक्राफ्ट और जेम्स निर्यात से लाखों रोजगार जुड़े हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच निर्यात को और प्रभावित करेगा, जहां पहले से ही मांग में कमी है।</p>
<p>उद्योग संघों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) ने कहा कि यह कटौती निर्यातकों की लागत बढ़ाएगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को पीछे धकेल सकती है। हैंडीक्राफ्ट निर्यातक नवनीत झालानी ने बताया कि राजस्थान के निर्यातकों के लिए यह आदेश फायदेमंद नहीं बल्कि नुकसानदेह साबित होगा, क्योंकि पहले से ही कम दरों को आधा करने से उनकी लाभप्रदता पर सीधा असर पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 14:37:17 +0530</pubDate>
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                <title>नए साल के दूसरे दिन शेयर बाजारों में तेजी, सेंसेक्स 573 अंक उछला, आईटीसी का शेयर दो दिन में 13 फीसदी टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशी संकेतों से घरेलू शेयर बाजार में तेजी रही; सेंसेक्स 85,762 और निफ्टी 26,328 पर बंद हुआ। हालांकि, कर बढ़ने की खबर से आईटीसी के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/on-the-second-day-of-the-new-year-there-was/article-138166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/share_market_file_630x400.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। विदेशों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को तेजी रही और बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 573.41 अंक (0.67 प्रतिशत) की बढ़त में 85,762.01 अंक पर बंद हुआ। बाजार में आज शुरू से ही तेजी रही। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 182 अंक यानी 0.70 प्रतिशत ऊपर 26,328.55 अंक पर पहुंच गया।</p>
<p>चौतरफा लिवाली के बीच 01 फरवरी से पान मसाला, सिगरेट-बीड़ी तथा अन्य तंबाकू उत्पादों पर उपकर और कर बढ़ाने की अधिसूचना के बाद एफएमसीजी कंपनी आईटीसी के शेयरों में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही। इसका शेयर आज पौने चार प्रतिशत टूट गया। मझौली और छोटी कंपनियों के सूचकांक भी बढ़त में रहे। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.94 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.72 प्रतिशत चढ़ा। </p>
<p>एफएमसीजी को छोड़कर अन्य सभी सेक्टरों में तेजी रही। रियलिटी, धातु, ऑटो, वित्त, बैंङ्क्षकग और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूहों की कंपनियों में लिवाली ज्यादा रही। एनटीपीसी का शेयर चार प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा। ट्रेंट में ढाई फीसदी से अधिक की तेजी रही। बजाज फाइनेंस, पावरग्रिड, मारुति सुजुकी, भारतीय स्टेट बैंक, बीईएल, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनीलिवर और एचडीएफसी बैंक के शेयर एक से दो प्रतिशत की बीच चढ़े। इंफोसिस, टीसीएस, एशियन पेंट्स, सनफार्मा, एलएंडटी, टाटा स्टील और अडानी पोर्टस के शेयर भी हरे निशान में बंद हुए। </p>
<p>पान मसाला और सिगरेट-बीड़ी पर 01 फरवरी से उपकर, कर और सीमा शुल्क बढ़ाने संबंधी अधिसूचनाओं के बाद एफएमसीजी कंपनी आईटीसी का शेयर दो दिन में 13 फीसदी से अधिक टूटकर 23 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। आईटीसी देश की सबसे बड़ी सिगरेट कंपनी है। मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में कंपनी ने सिगरेट कारोबार से 8,723 करोड़ रुपये की कमाई की थी जो उसके कुल राजस्व का लगभग 46 प्रतिशत था। </p>
<p>वहीं, इस कारोबार में उसे 5,241 करोड़ रुपये का कर पूर्व लाभ प्राप्त हुआ जो कर पूर्व कुल मुनाफे का 76.5 प्रतिशत है। कंपनी का शेयर 31 दिसंबर को 403 रुपये पर बंद हुआ था। उसी दिन देर रात सरकार ने सिगरेट-बीड़ी पर कर बढ़ाने संबंधी अधिसूचनाएं जारी कीं। अगले दिन 01 जनवरी को आईटीसी का शेयर 9.69 प्रतिशत टूट गया। शुक्रवार 02 जनवरी को इसमें 3.79 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 350.15 रुपये पर बंद हुआ। इस प्रकार दो दिन में यह 13.15 प्रतिशत टूट चुका है। बीच कारोबार में एक समय कंपनी का शेयर 345.35 रुपये तक उतर गया था जो 02 फरवरी 2023 के बाद का निचला स्तर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 17:37:20 +0530</pubDate>
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