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                <title>dark - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मोदी सरकार के आठ साल काले अध्याय के रुप में याद किए जाएंगे: अशोक गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। राहुल गांधी से बुधवार को तीसरे दिन भी ईडी दफ्तर में पूछताछ जारी है। वहीं कांग्रेस के इसके विरोध में सड़क तक विरोध-प्रदर्शन किए। तीसरे दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज यहां कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बीते आठ साल इतिहास में काले अध्याय के रुप में याद किए जाएंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/eight-years-of-modi-government-will-be-remembered-as-a-dark-chapter--ashok-gehlot/article-12206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/gehlot-pc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राहुल गांधी से बुधवार को तीसरे दिन भी ईडी दफ्तर में पूछताछ जारी है। वहीं कांग्रेसी नेता कार्यकर्ताओं की ओर से इसके विरोध में सड़क तक विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं । वहीं कांग्रेस मुख्यालय में पूरे मामले को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक, राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला सहित कांग्रेसी नेताओं ने प्रेसवार्ता कर केंद्र की मोदी सरकार पर मौजूदा दौर को लेकर जमकर निशानी साधा। </p>
<p>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यहां कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बीते आठ साल इतिहास में काले अध्याय के रुप में याद किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकार और जांच एजेंसियां हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। जबकि कांग्रेस शासन में सबकी बात सुनी जाती थी। इससे देश का वातावरण ठीक नहीं है। सीएम गहलोत ने पीएम मोदी से मांग की कि वह शांति, भाईचारे के लिए देश को संबोधित करें। क्योंकि आज समाज का हर वर्ग इस सरकार में परेशान, भयग्रस्त और चिंतित है। इस माहौल में भी केवल राहुल गांधी ही ऐसे नेता और विपक्ष की आवाज हैं जो पीएम मोदी और भाजपा के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। इसीलिए उन्हें ईडी की पूछताछ के बहाने तंग करने का काम किया जा रहा। लेकिन हम न डरेंगे, न दबेंगे।</p>
<p>गहलोत ने कहा कि एआईसीसी में हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को आने से रोका जा रहा है। दिल्ली के एनडीएमसी इलाके को पुलिस छावनी बना दिया गया है। सरकार नेशनल हेराल्ड मामले में इतना पूछताछ कर रही है। ऐसे में सीएम गहलोत ने आशंका जताई कि आरएसएस के अख़बार पांचजन्य को भी कोई मदद कर रहा होगा। यदि कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड को मदद की है, तो क्या गलती कर दी। आज भी संपत्ति एजेएल की ही है। कानूनन उसको कोई खरीद या बेच नहीं सकता।</p>
<p><br />गहलोत ने दावा किया कि आज दिल्ली पुलिस के कमिश्नर भी हमें मिलने का समय नहीं दे रहे हैं।<br />सीबीडीटी, सीबीआई, ईडी के प्रमुख हमारी बात सुनना भी नहीं चाहते। जबकि हम उनसे मिलना चाहते हैं। क्या ऐसी बातें लोकतंत्र के लिए ठीक हैं? विपक्ष की आवाज को सरकार द्धारा सुना जाना चाहिए। कोई भी फैसला लेना तो सरकार का काम है। कांग्रेस शासन में विपक्षी जनसंघ और भाजपा की बात सुनी जाती थी और वह ज्ञापन भी देते थे। लेकिन आज भाजपा सरकार ऐसा नहीं कर रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 12:06:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे एक विराट स्याह अंधेरा, ख्वाबों के टूटने के सदमें में खुदकुशी कर लेती हैं अभिनेत्रियां</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता। टॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे एक विराट स्याह अंधेरा है। जिसका पता तब मालूम होता है, जब कोई सितारा असमय टूटता और बुझ जाता है। वहां लाइम लाइट के बाद गुमनामी के अंधेरे में खो जाने का डर सताता है। गर इंसान जहां तन्हा होता है। मोहब्बत में भावनाओं की सच्चाई नहीं होती। गरजपरस्ती होती है। और जब चारों ओर घना अंधेरा पसरता नजर आता है, तो पलायनवादी लड़कियां कई बार खुदकुशी का रास्ता अपना लेती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/kolkata-news-behind-the-gleam-of-tollywood-a-vast-dark-darkness/article-11991"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tollywood.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। टॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे एक विराट स्याह अंधेरा है। जिसका पता तब मालूम होता है, जब कोई सितारा असमय टूटता और बुझ जाता है। वहां लाइम लाइट के बाद गुमनामी के अंधेरे में खो जाने का डर सताता है। गर इंसान जहां तन्हा होता है। मोहब्बत में भावनाओं की सच्चाई नहीं होती। गरजपरस्ती होती है। और जब चारों ओर घना अंधेरा पसरता नजर आता है, तो पलायनवादी लड़कियां कई बार खुदकुशी का रास्ता अपना लेती हैं।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>खुद को मजबूत बताने के दस दिन बाद ही टूट गई विदिशा</strong></span> <br />कोलकाता की उभरती मॉडल विदिशा डे मजूमदार के पिता विश्वजीत डे मजूमदार बताते हैं कि अभिनेत्री पल्लवी डे की मौत के बाद अपनी बेटी को लेकर आशंकित हो गया था। वह भी पल्लवी की तरह अकेली रहती थी। ऐसे में वह कहीं कोई गलत फैसला न ले ले। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी भी संघर्ष से घबरा कर पलायन का रास्ता चुन लेगी। वह बताते हैं कि पल्लवी की मौत की खबर सुनने के बाद विदिशा की मां बहुत परेशान हो गई थीं और उन्होंने विदिशा से अपने मन का डर भी जताया था।</p>
<p>लेकिन तब विदिशा ने कहा था, अरे! पल्लवी ने बेवकूफी की है, मैं बहुत मजबूत लड़की हूं। आप एकदम बेफिक्र रहें। मैं ऐसा नहीं करूंगी।लेकिन ऐसा कहने वाली उस लड़की ने महज दस दिनों बाद ही अपनी इहलीला खत्म कर ली। उसके ठीक दो दिन बाद विदिशा की सहेली और एक अन्य मॉडल मंजूषा नियोगी ने भी इसी तरीके से अपनी जान दे दी। मंजूषा की मां बताती हैं, विदिशा की मौत के बाद से ही मेरी बेटी गहरे अवसाद में थी और बार बार उसी का जिक्र कर रही थी।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong> बांग्ला फिल्मोद्योग में चिंता का माहौल</strong></span><br />पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मई के आखिरी दो सप्ताह के दौरान छोटे परदे की तीन उभरती अभिनेत्रियों और एक मॉडल की मौत से टॉलीवुड के नाम से मशहूर बांग्ला फिल्मोद्योग में चिंता का माहौल है। इनमें से ज्यादातर मामलों को फिल्मी दुनिया की चमक दमक के नीचे पसरे अंधेरे और संघर्ष में नाकामी से जोड़ कर देखा जा रहा है। हालांकि एकाध मामलों में असफल प्रेम प्रसंग को कारण बताया जा रहा है। लेकिन इन चारों की मौत की मूल वजह मानसिक अवसाद ही है। इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है, लेकिन अब ज्यादातर लोग इन घटनाओं के बारे में खुल कर बात नहीं करना चाहते।</p>
<p>आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है। इन घटनाओं ने फिल्मों में रातोंरात कामयाब होने की जद्दोजहद, संघर्ष और पलायन को सतह पर ला दिया है। एक पखवाड़े के भीतर हुई इन चार मौतों ने बांग्ला फिल्म और धारावाहिकों की दुनिया को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आम धारणा  है कि बाहरी चमक से प्रभावित होकर तमाम लड़कियां इसकी ओर आकर्षित होती हैं, लेकिन भीतर की कालिख और कीचड़ देख कर उनके सपने जल्दी ही टूट जाते हैं। फिल्मोद्योग से जुड़े लोगों के अलावा मनोवैज्ञानिको ने भी इन पर गहरी चिंता जताई है और इससे सबक लेकर एहतियाती उपाय करने का अनुरोध किया है ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकी जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 12:02:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डार्क जोन में प्रदेश के 203 ब्लॉक </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के 295 भूजल ब्लॉक में से 203 ब्लॉक डार्क जोन (अति दोहित श्रेणी) में पहुंच गए हैं। इसमें से भी 23 क्रिटिकल और 29 सेमी क्रिटिकल हैं। मात्र 37 ब्लॉक ही सुरक्षित बचे हैं, जबकि वर्ष 2013 में डार्क जोन में 164 ब्लॉक को शामिल किया गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-203-block-of-in-dark-jone-of-state/article-9659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/logo-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के 295 भूजल ब्लॉक में से 203 ब्लॉक डार्क जोन (अति दोहित श्रेणी) में पहुंच गए हैं। इसमें से भी 23 क्रिटिकल और 29 सेमी क्रिटिकल हैं। मात्र 37 ब्लॉक ही सुरक्षित बचे हैं, जबकि वर्ष 2013 में डार्क जोन में 164 ब्लॉक को शामिल किया गया था। यदि इसी तरह से भूजल का दोहन तेजी से होता रहा, तो आने वाले समय में पूरे ब्लॉक डार्क जोन में पहुंच जाएंगे। इन सालों में जोधपुर का भूजल स्तर 15.93 मीटर नीचे चला गया है। हालांकि केन्द्र और विश्व बैंक की अटल भूजल योजना के तहत राज्य के 1144 ग्राम पंचायतों को डार्क जोन से बाहर निकालने की कवायद वर्ष 2020 से शुरू हो चुकी है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कुछ अच्छे परिणाम सामने आएंगे।</p>
<p><strong>कैसे बढ़ा सकते हैं भूजल स्तर</strong><br />एनिकट का निर्माण करना, वर्षा जल का संरक्षण, ऐसी फसलों का उत्पादन, जिसमें कम पानी खर्चा हो और पानी को बचाने की मुहिम चलाई जाए।</p>
<p><strong>जयपुर के सभी ब्लॉक डार्क जोन में</strong><br />जयपुर को 15 ब्लॉक में बांट रखा है और ये सभी डार्क जोन में पहुंच गए हैं। इसमें से नौ ब्लॉक विकट स्थिति में है, जिसमें आमेर, विराटनगर, शाहपुरा, बस्सी, गोविन्दगढ़, जमवारामगढ़, कोटपूतली, पावटा और सांगानेर। चाकसू, दूदू, फागी, जालसू की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है। झोटवाड़ा और सांभर की स्थिति थोड़ी सुधरी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 May 2022 10:20:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्मार्ट टच स्क्रीन पर महीनों से छाया अंधेरा, पर्यटकों को नहीं मिल रही सही जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[टिकट निकालने वाली मशीने हांफने लग गई हैं, ऐसे में कई स्मारकों में मेनुअल टिकट व्यवस्था करनी पड़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%9F%E0%A4%9A-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE--%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%9F%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-3581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/smart-kiyosk-copy.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। शहर के स्मारकों में इन दिनों हजारों की संख्या में पर्यटकों की आवाजाही देखने को मिल रही है। हालात ये हैं कि टिकट निकालने वाली मशीने हांफने लग गई हैं, ऐसे में कई स्मारकों में मेनुअल टिकट व्यवस्था करनी पड़ रही है। पर्यटन स्थलों पर विजिट के दौरान पर्यटकों को अन्य जगहों की जानकारी आसानी से मिले। इसके लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2016-17 में जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले स्मारकों पर लगाए इंटर एक्टिव स्मार्ट टच स्क्रीन कियोस्क धूल फांक रहे हैं। आलम ये है कि कियोस्क लोगों को जानकारी तो नहीं दे पा रहे, लेकिन उनके बिखरे बाल को संवारने में मददगार साबित हो रहे हैं।<br /> <br /> <strong>यहां लगाए गए कियोस्क</strong><br /> जानकारी के अनुसार शहर के अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में 2, जंतर-मंतर स्मारक के व्याख्यान केन्द्र पर एक, हवामहल स्मारक परिसर में 2 और आमेर महल परिसर में 2 स्मार्ट टच स्क्रीन कियोस्क लगाए गए हैं। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन्हें सही करने के संबंध में कई बार जेडीए के संबंधित अधिकारियों को कहा जा चुका है, लेकिन अभी तक इन्हें फिर से शुरू नहीं किया गया है। <br /> <br /> <strong>पर्यटकों को मिलती है ये जानकारियां </strong><br />     विभिन्न पर्यटन स्थलों के वर्चुअल टूर <br />     शहर में ट्रेवल और स्टे  <br />     फूड और बेवरेज <br />     कैब बुकिंग <br />     सिटी में शॉपिंग सेंटर्स  <br />     जनरल अवेयरनेस<br />     जरूरी टेलीफोन नम्बर्स<br />     नेविगेशन<br />     मोबाइल रिचार्ज<br />     मूवी टिकट बुकिंग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Dec 2021 12:43:17 +0530</pubDate>
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                <title>आसमान में छाए रहे काले बादल, कई इलाकों में हल्की-हल्की बारिश</title>
                                    <description><![CDATA[तापमान में भी गिरावट दर्ज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%8F-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B2--%E0%A4%95%E0%A4%88-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6/article-2882"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/mavath.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में पश्चिमी विक्षोभ से राजधानी जयपुर सहित आसपास के नगरों में हल्की बारिश दर्ज की गई। गुरूवार को राज्य के जोधपुर,कोटा, जयपुर,उदयपुर व अजमेर संभाग के जिलों में मेघ गर्जन एवं अकाशीय बिजली के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा  एवं उदयपुर संभाग में एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा भी होने की संभावना है। बात करे जयपुर की तो जयपुर में सुबह से ठिठुरन का दौर जारी है, तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। शहर में सर्द हवाओं का दौर जारी है।</p>
<p> 3 दिसंबर 2021 को पूर्वी राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।  4 दिसंबर 2021 को एक बार पुनः राज्य में मौसम शुष्क होने की संभावना है| मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि कृषि मंडियों व खेतों में खुले आसमान में रखे अनाज को भीगने से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर भंडारण करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Dec 2021 12:48:13 +0530</pubDate>
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                <title>आसमान में छाए काले बदल,  कुछ इलाकों में हुई हल्की बूंदाबांदी</title>
                                    <description><![CDATA[20 नवंबर को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे तथा कोटा, जयपुर व उदयपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/619750fd945bf/article-2540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/whatsapp-image-2021-11-19-at-13.56.33.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के चलते आसमान में काले बदल छाए हुए हैं और प्रदेश के अन्य हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई है। आसमान में बादल छाने से तापमान में भी गिरावट दर्ज हुई है। पिछले चौबीस घंटों में उदयपुर, चित्तौड़गढ़ व डूंगरपुर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश दर्ज की गई है। जबकि उदयपुर, कोटा, जोधपुर, अजमेर व जयपुर संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की गई। पूर्वी राजस्थान में सर्वाधिक बारिश झाड़ोल, उदयपुर में 89 एमएम जबकि पश्चिमी राजस्थान में सर्वाधिक रानीवाड़ा, जालौर में 25 एमएम बारिश दर्ज की गई है।</p>
<p><br /> शुक्रवार को भी पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में मेघगर्जन के साथ बारिश का दौर जारी रहा। जयपुर के कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई। 20 नवंबर को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे तथा कोटा, जयपुर व उदयपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है। 21 नवंबर से मौसम शुष्क रहेगा तथा न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Nov 2021 14:09:54 +0530</pubDate>
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                <title>यह कैसी मस्ती की अंधेरी काली दुनिया!</title>
                                    <description><![CDATA[नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा मुंबई से गोवा जा रहे क्रूज में नशाखोरी कर रहे अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी न केवल शर्मनाक है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%AF%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-1715"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/night-party.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नारकोटिक्स</strong> कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा मुंबई से गोवा जा रहे क्रूज में नशाखोरी कर रहे अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी न केवल शर्मनाक है बल्कि देश की जड़ों को खोखला करने वाली है। देश में नशीले पदार्थों का कारोबार और सेवन जिस गति से बढ़ता चला जा रहा है, वह चिन्ताजनक है। यह पहली बार नहीं, जब नशे का सेवन कर रहे नामचीन अथवा धनी लोगों को गिरफ्तार किया गया हो। रेव पार्टियां, नशे का बढ़ता प्रचलन एक त्रासदी है, विडम्बना है। ऐसे बहुत से गिरोह सक्रिय हैं जो युवा वर्ग को नशे की दलदल में ढकेल रहे हैं। बढ़ती रेव पार्टियां उन्मुक्त होने एवं नशे की अंधी सुरंगों में उतरने का एक माध्यम है, जो समाज एवं राष्ट्र के लिए खतरनाक साबित होती जा रही है। क्या ऐसी पार्टियां बिना स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के हो सकती हैं? यह सब कुछ पुलिस और ड्रग्स एवं नशे का धंधा करने वालों की सांठगांठ से ही होता है। इसमें सरकार की नीतियों पर भी प्रश्न खड़े होते हैं।  </p>
<p><br /> रेव पार्टियों का बढ़ता प्रचलन इसलिए खतरनाक है कि इनमें गांजा, चरस, अफीम, कोकीन और न जाने किन-किन ड्रग्स का इस्तेमाल होता ही है, एमडीएम नाम के एक ड्रग का भी उपयोग होता है जो सेक्स को लेकर उत्तेजना पैदा करता है। इतनी भीषण उत्तेजना कि घंटों तक और कई लोगों के साथ सेक्स में लगे रहने की शक्ति पैदा हो जाती है। जरा सोचिए कि जिन लड़कियों के साथ यह सब होता होगा वो भी तो किसी घर की बेटी ही होंगी! मस्ती के चक्कर में मासूम बालिकाएं किस तरह खुद को क्रूर पंजों में सौंप देती हैं? इसके लिए क्या वो अकेली दोषी हैं? आश्चर्य नहीं कि नशाखोरी से कलंकित बालीवुड फिर से विवादों में है। शाहरुख खान कोई आम भारतीय नहीं हैं। हिंदी सिनेमा के करोड़ों प्रशंसकों में उनकी पहचान है। जिन शाहरुख को उनके चाहने वाले अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं, उनके पुत्र का इतने संगीन अपराध से जुड़ा होना क्या प्रेरणा दे रहा है? शाहरुख खान जैसे धनाढ्य  माता-पिता और परिवार इसके लिए ज्यादा दोषी है। हमारा बच्चा क्या कर रहा है, इसकी जानकारी रखना परिवार का दायित्व है।</p>
<p><br /> दुनिया की चकाचौंध से आकर्षित मध्यम वर्ग की बच्चियों को शिकार बनाया जाता है तो दौलतमंद लोेगों की संतानें केवल मौज-मस्ती के चक्कर में फंस जाती हैं। गलत तरीकों से कमाई दौलत का इसी तरह औलादों को बिगाड़ रही हैं। एक वो माता-पिता होते हैं जो मजदूरी करके, घरों में बर्तन मांजकर अपने बच्चों को पढ़ाते हैं और उनमें से ही कोई अब्दुल कलाम निकल आता है। दूसरे वो मां-बाप हैं जो बच्चे को हर रोज हजारों रूपए जेब खर्च देते समय यह नहीं पूछते कि इतने पैसे क्यों चाहिए? देर रात तक लौटे तो नहीं पूछते कि कहां थे? नतीजा आपके सामने हैं। बच्चों को फांसने के लिए तो हर मोड़ पर ड्रग्स के सौदागर ग्लैमर लिए खड़े हैं। रेव पार्टियों में इसीलिए तो हालीवुड और बॉलीवुड के सितारों या उनकी औलादों को शामिल किया जाता है।</p>
<p><br /> रेव पार्टियों की नई पनप रही संस्कृति अनेक विकृतियों का सबब बन रही है, जिसमें युवा पीढ़ी को नए-नए नशे के साधन उपलब्ध कराए जाते हैं। देर रात तक चलने वाली इन पार्टियों में महफिलें जमती हैं, महानगरों में हर वीकेंड पर फार्म हाउस एवं आलीशान बिल्डिंगों, होटलों, क्रूज में ये महफिलें सजती हैं। इन महफिलों में आने वाले लोगों को पूरी रात डांस, म्यूजिक, ड्रग्स और सैक्स का काकटेल मिलता है। इन रेव पार्टी में भारी मात्रा में विदेशी ब्रांड की शराब के साथ ब्रिक्स कोकिंग टैबलेट परोसी जाती है। रात भर उन्मुक्तता, अश्लीलता एवं सैक्स से भरपूर मनोरंजन तरह-तरह के नशे के साथ परोसा जाता है। नशे एवं पागलपन की हद तक चूर हो जाने के बाद छात्र-छात्राएं अपनी चमचमाती गाड़ियों में घर लौट जाते हैं। इन महफिलों की सूचना भी खास-खास लोगों को सोशल मीडिया पर दी जाती है। समाज में नशीले पदार्थों एवं सैक्स के एजेंट सक्रिय हैं, जो युवा पीढ़ी को ऐसी पार्टियों के लिए आकर्षित करते हैं। रेव पार्टियों में पकड़े जाने वाले लोगों में स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं से लेकर बड़े बिजनेसमैन,सिने स्टार, राजनीतिज्ञों और अफसरों के बच्चे तक शामिल हैं। ऐसी पार्टियों में ऊंची पहुंच वाले और पैसे वाले ही जा सकते हैं। आयोजक न केवल एक ही रात में लाखों कमाते हैं बल्कि जो लड़के-लड़कियां अपने ज्यादा दोस्तों को लाते हैं, उन्हें भी मोटी कमीशन दी जाती है। यह मुम्बई-दिल्ली जैसे महानगरों की रातों को रंगीन बनाने का जरिया बनता जा रहा है। लेकिन ये रंगीनियां कितने अंधेरों एवं खतरों का कारण बन रही है, इस पर चिन्तन करना जरूरी है।</p>
<p><br /> मुम्बई, गोवा, पुणे, खंडाला, पुष्कर, मनाली से चली रेव पार्टियों ने दिल्ली और आसपास के शहरों में भी जगह बना ली है। ड्रग्स का धंधा करने वालों के लिए यह पार्टियां फायदे का धंधा बन गई हैं। जो देश के युवाओं को बर्बाद कर रहे हैैं, अब तो लड़कियों ने भी सारी सीमाएं तोड़ दी हैं। नशीले पदार्थों, शराब, बीयर से लेकर तेज मादक पदार्थों, औषधियों तक की सहज उपलब्धता से इन रेव पार्टियां के प्रति युवा एवं किशोर वर्ग का आकर्षक बढ़ता जा रहा है। इस दीवानगी को ओढ़ने के लिए प्रचार माध्यमों ने भी भटकाया है।  <br /> <strong>          -ललित गर्ग<br /> (ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /> <br /> सरकार भी विवेक से काम नहीं ले रही है। शराबबन्दी का नारा देती है, नशे की बुराइयों से लोगों को आगाह भी करती है और शराब, तम्बाकू का उत्पादन भी बढ़ा रही है। राजस्व प्राप्ति के लिए जनता की जिन्दगी से खेलना क्या किसी लोक कल्याणकारी सरकार का काम होना चाहिए? यह कैसी समाज-व्यवस्था है जिसमें लाइसेंस लेकर आप चाहे जो करों? इनके पीछे कौन-कौन लोग हैं, जो देश के युवाओं को बर्बाद कर रहे हैं, ड्रग्स एवं नशीले पदार्थों के सेवन से जवानी खत्म हो रही है। बावजूद इसके उन पर हाथ डालने की हिम्मत किसी में नहीं होती। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) अब सक्रिय हुआ है, तो उसे अपराध पर काबू पाने में कोई बाधा राजनीतिक पहुंच या बड़ी हस्ति होने की न खड़ी हो, इस पर शीर्ष नेतृत्व को ध्यान देना चाहिए।</p>
<p><br /> विश्व की गम्भीर समस्याओं में प्रमुख है नशीले पदार्थों का उत्पादन, तस्करी और सेवन की निरंतर हो रही वृद्धि। नई पीढ़ी इस जाल में बुरी तरह कैद हो चुकी है। आज हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी नशे का आदी हो चुका है। गुजरात प्रांत में कुल शराबबन्दी है, क्योंकि वह महात्मा गांधी का गृह प्रदेश है। क्या पूरा देश गांधी का नहीं है? वे तो राष्टÑ के पिता थे, जनता के बापू थे। नशे की संस्कृति युवा पीढ़ी को गुमराह कर रही है। अगर यही प्रवृत्ति रही तो सरकार, सेना और समाज के ऊंचे पदों के लिए शरीर और दिमाग से स्वस्थ व्यक्ति नहीं मिलेंगे। एक नशेड़ी पीढ़ी का देश कैसे अपना पूर्व गौरव प्राप्त कर सकेगा?<br /> बढ़ती नशा प्रवृति के चलते महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं। भावी पीढ़ी को बचाना है तो राजनीतिक दलों और समाज को मिलकर नशे के विरुद्ध अभियान चलाना होगा और पुलिस को भी युवाओं को मौत की ओर धकेलने वाली अपने भीतर की काली भेड़ों की पहचान करनी होगी। अगर ऐसा नहीं किया गया तो युवा वर्ग नशे की दलदल में इतना फंस जाएगा, जहां से उसे निकालना मुश्किल होगा। किसी भी महानगर का रात की बांहों में झूमना जीवन की शैली हो सकता है, लेकिन नशे में झूमना एक कैंसर है। नशे की आदत कांच की तरह नहीं टूटती, इसे लोहे की तरह गलाना पड़ता है। पक्षी भी एक विशेष मौसम में अपने घोंसले बदल लेते हैं। पर मनुष्य अपनी वृत्तियां नहीं बदलता। वह अपनी वृत्तियां तब बदलने को मजबूर होता है जब दुर्घटना, दुर्दिन या दुर्भाग्य का सामना होता है। आखिर हम क्यों दुर्घटना, दुर्दिन या दुर्भाग्य का इंतजार कर रहे हैं? हजारों-लाखों लोग अपने लाभ के लिए नशे के व्यापार में लगे हुए हैं और राष्टÑ के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। चमड़े के फीते के लिए भैंस मारने जैसा अपराध कर रहे हैं।<br /> <br /> दुनिया की चकाचौंध से आकर्षित मध्यम वर्ग की बच्चियों को शिकार बनाया जाता है तो दौलतमंद लोेगों की संतानें केवल मौज-मस्ती के चक्कर में फंस जाती हैं। गलत तरीकों से कमाई दौलत का इसी तरह औलादों को बिगाड़ रही हैं। एक वो माता-पिता होते हैं जो मजदूरी करके, घरों में बर्तन मांजकर अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। और उनमें से ही कोई अब्दुल कलाम निकल आता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Oct 2021 17:49:49 +0530</pubDate>
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                <title>किसान की बेबसी-दिन के उजाले में नहीं रात के अंधेरे में मिलता डीएपी</title>
                                    <description><![CDATA[सवाईमाधोपुर में 12 सौ रुपए का कट्टा, 25 सौ रुपए में रात के अंधेरे में बिका : डीएपी खाद नहीं होेने से नहीं हो रही बुवाई :   डीएपी खाद नहीं मिलने से फसल की गुणवक्ता पर पड़ा विपरीत असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AA%E0%A5%80/article-1707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/dholpur-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। राज्य में डीएपी खाद की किल्लत ने किसान को बेबस कर दिया है। प्रदेश के अधिकांश गांवों में डीएपी खाद को दुकानदार दिन के उजाले में बेचने के बजाए, रात के अंधेरे में मनमाने दामों में बेच रहे हैं। सवाईमाधोपुर के खंड़ार विधानसभा में तो 12 सौ रुपए का डीएपी खाद का कट्टा 25 सौ रुपए में बिकने की सूचना है। खाद-बीज की दुकान संचालकों के डीएपी खाद को मनमाने दामों पर बेचने से पौबारह हो गई है और सरकारी स्तर पर मॉनिटरिंग नहीं होने से किसान खासा बेहाल है। सवाईमाधोपुर के भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष लटूर सिंह गुर्जर ने बताया कि खंड़ार में मध्यप्रदेश के श्योपुर से लाकर डीएपी खाद मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है, जिस पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं हैं। जयपुर जिले के बस्सी, चाकसू, चौमूं, जमवारामगढ़ में किसान को डीएपी की उपलब्धता नहीं है, लेकिन दुकानदार से मान-मनोव्वल करने और अधिक राशि देने पर चुपके से रात के अंधेरे में खाद उपलब्ध कराने की सूचना हैं। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>सवाईमाधोपुर के किसान ने 1200 का कट्टा, 25 सौ में लिया</strong></span></span>-<br /> बालमुकुन्द चौधरी और सुमेर सिंह शेखावत निवासी सुखवास, जिला सवाईमाधोपुर ने बताया कि दुकानदार ने 12 सौ का कट्टा क्रमश:  2500 और 17 सौ रुपए में दिया है। जबकि डीएपी के कट्टे दुकान पर देने की बजाए किसी दूसरे स्थान से उपलब्ध कराए गए।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>बुवाई में देरी, किसान परेशान</strong></span></span><br /> किसान को डीएपी खाद नहीं मिलने से सरसों और चने की बुवाई नहीं कर पा रहा है। आमतौर पर सरसों की बुवाई एक अक्टूबर से शुरू हो जाती है, लेकिन अभी तक प्रदेश में सरसों की बहुत कम बुवाई हो पाई है। प्रदेश में इस बार सरसों और तारामीरा की 30 लाख हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन अभी तक 25 प्रतिशत बुवाई भी नहीं हो पाई है। यदि बुवाई के समय डीएपी खाद का सही प्रकार से उपयोग नहीं किया तो उससे सरसों और चने की फसल की गुणवक्ता पर विपरीत असर पड़ता है। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Oct 2021 14:59:29 +0530</pubDate>
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