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                <title>largest - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>20 करोड़ मिले तो बदले बायोलॉजिकल पार्क की सूरत</title>
                                    <description><![CDATA[ बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, मगरमच्छ, बंदर व कछुए व ऐमु सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/20-crores-will-change-the-face-of-biological-park/article-43891"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/14.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान का सबसे बड़ा बायोलॉजिकल पार्क दो साल से बजट को तरस रहा है। बजट के अभाव में सुविधाएं विकसित नहीं हो पा रही। वहीं, रियासतकालीन चिड़ियाघर से वन्यजीवों की अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्टिंग भी नहीं हो पा रही। यहां न तो कैफेटेरिया है और न ही ई-रिक्शा। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटकों को चाय नाश्ते के लिए भटकना पड़ता है। दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 20 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं, जो बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पाए। जबकि, वन्यजीव विभाग प्रशासन सरकार को कई बार प्रस्ताव भेज चुका है। इसके बावजूद बजट स्वीकृत नहीं हुआ। इसके चलते एक दर्जन से अधिक वन्यजीव चिड़ियाघर से बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं हो पा रहे। बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, मगरमच्छ, बंदर व कछुए व ऐमु सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे। एनक्लोजर की कमी के कारण चिड़ियाघर के वन्यजीवों की शिफ्टिंग अटक गई। </p>
<p><strong>कैफेटेरिया व ई-रिक्शा की खल रही कमी</strong><br />वर्तमान में बायोलॉजिकल पार्क में कुल 64 वन्यजीव हैं, जिनमें 10 मांसाहारी और 54 शाकाहारी हैं। यहां आने वाले पर्यटक 52 रुपए खर्च कर पार्क में वन्यजीवों के दीदार को  आते हैं लेकिन इलेक्ट्रिकल व्हीकल नहीं होने से 3 किमी लंबे ट्रैक पर पैदल घूमना मुश्किल हो जाता है। वहीं, कैफेटेरिया सुविधा नहीं होने से लोगों को चाय-नाश्ते के लिए परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा पर्यटकों के बैठने के लिए छायादार शेड व वाटरकूलर भी र्प्याप्त नहीं हैं। पानी के लिए भी भटकना पड़ता है।   </p>
<p><strong>आॅपरेशन या पोस्टमार्टम के लिए लगता  है16 किमी का चक्कर</strong><br />वेटनरी हॉस्पिटल नहीं होने से वन्यजीवों के इलाज में परेशानी होती है। इलाज के संबंधित कुछ उपकरण बायोलॉजिकल पार्क में तो कुछ चिड़ियाघर में हैं। वन्यजीवों को यदि दवाइयां देनी हो तो यहां से दे देते हैं लेकिन आॅपरेशन या पोस्टमार्टम करना हो तो उसे करीब 16 किमी दूर नयापुरा स्थित चिड़ियाघर  लाना होता है। ऐसे में कई बार वन्यजीवों को समय पर इलाज मुहैया करवाना काफी चुनौतिपूर्ण हो जाता है। </p>
<p><strong>30 करोड़ से बना था बायोलॉजिकल पार्क </strong><br />डीसीएफ उड़नदस्ता अनुराग भटनागर ने बताया कि वर्ष 2017 में 30 करोड़ की लागत से बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। जिसे 2019 में पूरा किया जाना था लेकिन कोविड के 2 साल के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके बाद 21 नवम्बर 2021 को काम पूरा हुआ। </p>
<p><strong>प्रथम चरण में ये हुए थे कार्य </strong><br />प्रथम चरण के तहत पार्क में 13 एनक्लोजर बनाए गए। इसके अलावा पाथ-वे, पर्यटकों के लिए सुविधाघर, छायादार शेड, कैफेटेरिया का थोड़ा कार्य, जल व्यवस्था के लिए टैंक सहित फेंसिंग करवाई गई। वहीं, अभी तक यहां करीब 25 हजार पौधे लगवा चुके हैं। </p>
<p><strong>क्यों पास नहीं हो पा रहा बजट   </strong><br />वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2020-21 में जाइका प्रोजेक्ट के तहत बायलोजिकल पार्क में अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करवाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद फिर से रिव्यू प्रस्ताव भेजे गए, वह भी स्वीकृत नहीं हुए। गत वर्ष 4 जून को वन विभाग के शासन सचिव शिखर अग्रवाल के बायलॉजिकल पार्क निरीक्षण के दौरान समस्या से अवगत कराया था। इस पर उन्होंने जल्द ही बजट पास करवाने का भरोसा दिलाया था लेकिन दो साल बीतने के बाद भी बजट नहीं मिल पाया।   </p>
<p><strong>द्वितीय चरण में यह होने हैं कार्य </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 20 करोड़ की लागत से 31 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं। </p>
<p><strong>इसी वर्ष बजट मिलने की उम्मीद</strong><br />द्वितीय चरण में बेहद महत्वपूर्ण काम होने थे, जो बजट के अभाव में नहीं हो सके। सरकार को पूर्व में प्रस्ताव भेजे गए हैं लेकिन अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ। अभी 31 एनक्लोजर बनने शेष हैं। इस कारण चिड़ियाघर से अन्य वन्यजीवों को बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं कर पा रहे। वहीं, वेटनरी हॉस्पिटल, स्टाफ  क्वार्टर, आॅडिटोरियम, इंटरपिटेक्शन सेंटर व कैफेटेरिया बनना पर्यटन की दृष्टि से जरूरी है। हालांकि, इसी वर्ष बजट मिलने की उम्मीद है। बायोलॉजिकल पार्क में सुविधाएं विकसित करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>-राजबिहारी मित्तल, एसीएफ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Apr 2023 15:38:33 +0530</pubDate>
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                <title>जयपुर स्थित चौंप में बन रहे स्टेडियम का शिलान्यास, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने किया वर्चुअल शिलान्यास, PINKCITY में बनने जा रहा है दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में बन रहा प्रोफेशनल क्रिकेट का माहौल: गहलोत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%82%E0%A4%AA-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8--%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%95-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%86%E0%A4%88-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%B8%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A4%B5-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%85%E0%A4%B2-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8--pinkcity-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE/article-4295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/whatsapp-image-2022-02-05-at-14.24.42.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर: राजधानी जयपुर में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने शनिवार को स्टेडियम का वर्चुअल शिलान्यास किया। इस दौरान बीसीसीआई सेक्रेटरी जय शाह भी वर्चुअली जुड़े। शिलान्यास समारोह से पहले आरसीए के पदाधिकारियों ने क्रिकेट स्टेडियम का भूमि पूजन किया। यह स्टेडियम जयपुर स्थित दिल्ली बाईपास पर चौंप में बन रहा है।</p>
<p><br /> गहलोत में इस अवसर पर कहा कि आज का दिन राजस्थान क्रिकेट के लिए स्वर्णिम अवसर है। आरसीए के पूर्व अध्यक्ष सीपी जोशी ने जयपुर में आरसीए का अपना स्टेडियम का सपना देखा था ,जिसे आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत पूरा करने जा रहे हैं । राजस्थान में प्रोफेशनल क्रिकेट का माहौल बन रहा है। जयपुर में एसएमएस स्टेडियम के बाद जोधपुर बरकतुल्ला स्टेडियम और उदयपुर में भी स्टेडियम बन रहा है। इसके साथ ही चौंप में भी स्टेडियम बन रहा है। दुनिया के 10 में से 7 बड़े स्टेडियम भारत में हैं और राजस्थान के का ये स्टेडियम तीसरे स्थान पर होगा। ये राजस्थान के खिलाड़ी और प्रदेश वासियों के लिए गौरव की बात है। दीपक चाहर, महिपाल, राहुल चाहर, खलील अहमद और अब रवि बिश्नोई का भारतीय टीम में होना बड़ी उपलब्धि है। ऐसी उम्मीद है कि अब राजस्थान को बीसीसीआई इग्नोर नहीं होने देगा। आईपीएल मैचों में राजस्थान को प्रिफरेंस दीजिए। राजस्थान को यदि मैच देंगे तो राजस्थान के साथ न्याय होगा। भारत-न्यूजीलैंड के मैच में जाने का उन्हें मौका मिला जहां अच्छा प्रबंधन था। आगे भी उम्मीद है कि मैच का आयोजन होता है तो राजस्थान सरकार की तरफ से भी बीसीसीआई को पूरा सहयोग मिलेगा।</p>
<p><br /> बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा कि पिछले दस साल में काफी संसाधनों का विकास हुआ है। बीसीसीआई आज दुनिया में लीडिंग क्रिकेट बोर्ड है। मैंने काफी दिन जयपुर में बिताए हैं। भले ही जूनियर क्रिकेट या रणजी की बात की जाए यहां का एसएमएस स्टेडियम बेहतरीन है, लेकिन अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टेडियम बना रहे हैं यह खुशी की बात है। मुझे इस बात की कुछ निराशा है कि मेरा कोलकाता का स्टेडियम अब पिछले पायदान पर आएगा। पहले अहमदाबाद और जयपुर का स्टेडियम होगा, लेकिन यह बहुत खुशी की बात है की भारत के दो स्टेडियम दुनिया की सूची में हैं। बहुत सारे खिलाड़ी राजस्थान से देश के लिए खेल रहे हैं। उम्मीद है आगे भी खेलेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे। आज एक ऐतिहासिक दिन है कि वेस्टइंडीज और इंडिया अंडर 19 का वर्ल्ड कप फाइनल खेल रही है। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने कहा कि अब तक बड़े-बड़े आयोजन कराने के बाद भी किराए के घर में रह रहे थे, अब आरसीए का खुद का घर तैयार हो रहा है।</p>
<p><br />  आरसीए के अध्यक्ष वैभव गहलोत ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का निर्माण तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। यह भारत का दूसरा और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम होगा। इसमें एक साथ 75 हजार दर्शक बैठ सकेंगे। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री महेश जोशी, आरसीए उपाध्यक्ष अमीन पठान, सचिव महेंद्र शर्मा सहित कई अधिकारी भी शामिल हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Feb 2022 14:38:37 +0530</pubDate>
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                <title>ये राह नहीं आसान, डगर-डगर पर गड्ढ़े : कैलाश जैसी दुर्गम हुईं सड़कें</title>
                                    <description><![CDATA[जिम्मेदार आवासन मंडल का तर्क : हमने निगम ग्रेटर को हैंडओवर कर दी कॉलोनियां
जयपुर नगर निगम ग्रेटर का रोना : आवासन मंडल से नहीं मिल रहा है विकास का पैसा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8--%E0%A4%A1%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%A1%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A5%9D%E0%A5%87---%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%88%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%9C%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82/article-1709"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/5.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनियों में शुमार मानसरोवर में इन दिनों निवासियों का सड़क पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना मुश्किल हो गया है। क्षतिग्रस्त सड़कों पर हो गड्ढ़ों में वाहन चालक आए दिन दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग सुध लेने की बजाय चैन की नींद सो रहा है। मानसरोवर कॉलोनी में सड़कों का विकास राजस्थान आवासन मंडल एवं क्षेत्र में कार्य कराने वाली कार्यकारी एजेंसी के बीच फंसी नजर आ रही है। मानसरोवर क्षेत्र में सड़कों के रख-रखाव का मुख्य जिम्मा राजस्थान आवासन मंडल का है, लेकिन मंडल की ओर से मुख्य सड़कों की देखरेख की सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। मानसरोवर में तीन मुख्य मार्ग न्यू सांगानेर, मध्यम मार्ग एवं शिप्रापथ है, जहां न्यू सांगानेर रोड पर भारी वाहनों का आवागमन होता है, जिससे यह सड़क आमतौर पर क्षतिग्रस्त ही रहती है। वहीं दूसरी अन्य सड़कों की हालात भी बुरे हैं। क्षेत्र की मुख्य सड़कों के साथ ही कॉलोनियों में हाल बुरे है, जहां क्षेत्रवासियों को सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong><br /> पटेल मार्ग, विजय पथ, सेक्टर 12 अग्रवाल फार्म में नजर हटी तो दुर्घटना घटी</strong></span></span></span><br /> मानसरोवर के पटेल मार्ग, विजय पथ, सेक्टर 12 अग्रवाल फार्म सहित अन्य जगहों पर सड़कों की लंबे समय से खराब है। इसको लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ ही विकास समितियों की ओर से समय पर सड़कों की मरम्मत के लिए विभाग के अधिकारियों को पत्राचार भी किया जाता है। क्षेत्र में अरावली मार्ग पर सालों से सड़कों की स्थिति खराब लेकिन दुबारा बनाने के स्थान पर समय पर इनकी मरम्मत भी नहीं हुई है। अग्रवाल फार्म निवासी अभय अरोड़ा का कहना है कि वाहन चलाते समय टूटी सड़क और गड्ढ़ों का ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि नजर हटी और दुर्घटना घटी जैसी स्थिति की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>स्थानीय व्यापारी भी परेशान</strong></span></span></span><br /> अग्रवाल फार्म क्षेत्र में लोगों का दिनभर आवागमन होता है। टूटी-फूटी सड़कों पर धूल के गुबार उड़ने से व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है और दुकानों के अंदर रखे सामान भी गंदे हो जाते हैं। मानसरोवर दवा विक्रता संघ के संरक्षक यशपाल भाटिया का कहना है कि कावेरी पथ से लेकर एसएफएस की ओर जाने वाली सड़कों की समस्या से कई बार प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। कई जगहों पर स्पीड ब्रेकर भी लगाए जाने चाहिए, ताकि तेज रफ्तार वाहन चलाने वाले चालक भी संभल कर गाड़ी चलाएं।</p>
<p><br /> मानसरोवर कॉलोनी नगर निगम जयुपर ग्रेटर को हैंडओवर कर दी गई है और यहां सड़कों की देखरेख का काम उनका है। <br /> <strong>-पवन अरोड़ा, आयुक्त, आवासन मंंडल </strong></p>
<p><br /> आवासन मंडल से विधिवत रूप से कॉलोनी हमें हैंडओवर नहीं की है और विकास के पेटे नीलामी सहित कोटे के पैसे भी हमें नहीं दिए गए है ऐसे में विकास का काम राजस्थान आवासन मंडल है।<br /> <strong>-हेमाराम चौधरी, उपायुक्त, मानसरोवर जोन</strong><br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>कालीचरण की चेतावनी : 7 दिन में सड़कें नहीं सुधरी तो घेरेंगे निगम</strong></span></span><br /> मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ ने कहा कि नगर निगम सहित अन्य प्रशासन की ओर से नई बनी सड़कों को खोदने और  बारिश से टूटी सड़कों को आगामी सात दिन में ठीक नहीं कराया तो स्थानीय लोगों के साथ ग्रेटर नगर निगम कार्यालय का घेराव करेंगे। सराफ ने शुक्रवार को पार्षदों, प्रतिनिधिमंडल के साथ अपने क्षेत्र के राजापार्क, गुरुनानकपुरा, तिलक नगर में जाकर टूटी सड़कों का निरीक्षण किया। इसके बाद वे निगम आयुक्त यज्ञमित्र देव से मिलने गए। जलदाय विभाग ने चार महीने पूर्व ही पाइपलाइन बिछाई थी और रोड कटाई के 85 लाख रुपए नगर निगम में जमा करवाए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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