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                <title>Repatriation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Repatriation RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका ने ईरानी जहाज के चालक दल के 22 सदस्यों को पाकिस्तान को सौंपा, चेतावनियों के बावजूद की थी नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में जब्त ईरानी जहाज 'एम/वी टूसका' के 22 चालक दल सदस्यों को पाकिस्तान को सौंप दिया है। पाकिस्तान इन्हें आज ईरानी अधिकारियों को सौंपेगा। इस कदम को अमेरिका-ईरान तनाव के बीच 'कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर' माना जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय शांति और कूटनीति को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-handed-over-22-crew-members-of-an-iranian-ship/article-152651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि अमेरिका ने एक ईरानी कंटेनर जहाज पर पकड़े गए चालक दल के 22 सदस्यों को सुरक्षित पाकिस्तान पहुँचा दिया है, जिन्हें आज ही ईरानी अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा। पाकिस्तान ने चालक दल की इस वापसी को तनाव कम करने की दिशा में अमेरिका द्वारा उठाया गया एक 'विश्वास बढ़ाने वाला कदम' बताया है। ईरानी ध्वज वाला जहाज 'एम/वी टूसका', जो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स (आईआरआईएसएल) का हिस्सा है, पिछले महीने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा जब्त कर लिया गया था।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस जहाज ने बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद नौसैनिक नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की थी। अमेरिकी सेना ने जहाज के इंजन रूम पर फायरिंग भी की थी। ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी और इसे 'समुद्री डकैती' करार दिया था। पाकिस्तान के मुताबिक, चालक दल के सदस्यों को रविवार रात उसकी हिरासत में सौंपा गया था और सोमवार को उन्हें ईरान भेज दिया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि मरम्मत के बाद जहाज को उसके असली मालिकों को लौटा दिया जाएगा।</p>
<p>सीएनएन ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा कि इन सदस्यों की वापसी ईरानी और अमेरिकी पक्षों के समर्थन से मिलकर की जा रही है। पाकिस्तान ने ऐसे सकारात्मक कदमों का स्वागत करते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय शांति के लिए मध्यस्थता के प्रयासों को जारी रखेगा और बातचीत तथा कूटनीति को बढ़ावा देता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:52:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कोहिनूर हीरे पर ममदानी का बयान: किंग चार्ल्स से न्यूयॉर्क मेयर की अपील, भारत का कोहिनूर वापस करो</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूयॉर्क के मेयर जोहऱान ममदानी ने किंग चार्ल्स की यात्रा के दौरान कोहिनूर हीरा भारत लौटाने का मुद्दा छेड़ दिया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक न्याय और भारतीय विरासत का प्रतीक बताया। 1849 में ब्रिटिश कब्जे में गया यह बेशकीमती रत्न आज भी भारत और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/mamdanis-statement-on-kohinoor-diamond-new-york-mayors-appeal-to/article-152171"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/zohram-mamdani.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहऱान ममदानी ने कोहिनूर हीरे की वापसी को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस को हवा दे दी है। हाल ही में ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय की अमेरिका यात्रा के दौरान ममदानी ने संकेत दिया कि यदि उनसे मुलाकात होती है, तो वह औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रहेंगे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि वह कोहिनूर हीरे को भारत लौटाने की मांग उठाएंगे।</p>
<p>ममदानी का यह बयान केवल कूटनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि ऐतिहासिक मुद्दों को दोबारा सामने लाने की कोशिश माना जा रहा है। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी भारत से जुड़ी रही है—उनकी मां मीरा नायर भारतीय मूल की हैं, जिससे उनके विचारों में भारतीय इतिहास और विरासत का असर साफ दिखाई देता है।</p>
<p>कोहिनूर हीरा भारत के लिए सिर्फ एक बहुमूल्य रत्न नहीं, बल्कि औपनिवेशिक काल की याद और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यह हीरा मूल रूप से आंध्र प्रदेश की कोल्लूर खान से निकला था और समय के साथ मुगलों और सिख शासकों के पास रहा। लेकिन 1849 में द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लाहौर संधि के तहत इसे अपने कब्जे में ले लिया। उस समय सिख शासक महाराजा दलीप सिंह महज 10 साल के थे।</p>
<p>आज यह हीरा ब्रिटेन में सुरक्षित है और पूर्व में रानी एलिजाबेथ के ताज का हिस्सा रहा है। भारत लगातार इसे अपनी धरोहर बताते हुए वापसी की मांग करता रहा है, जबकि ब्रिटेन इसे कानूनी रूप से प्राप्त संपत्ति बताता है। ममदानी का बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी को लेकर आवाजें तेज हो रही हैं। ग्रीस और अफ्रीकी देशों की तरह भारत में भी यह मुद्दा भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों स्तरों पर गहराई से जुड़ा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:49:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच इंडिगो और एयर इंडिया ने जारी नई एडवाइजरी: कुल 78 उड़ानों का करेगी परिचालन, यहां जानिए पूरा शेड्यूल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में तनाव के बीच इंडिगो और एयर इंडिया ने मोर्चा संभाल लिया है। रविवार को 78 विशेष व नियमित उड़ानें दुबई, जेद्दा और मस्कट जैसे शहरों के लिए संचालित की जा रही हैं। सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए, एयरलाइंस भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और निरंतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indigo-and-air-india-issued-new-advisory-amid-west-asia/article-147414"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/air-india-and-indigo.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की प्रमुख विमान सेवा कंपनी इंडिगो पश्चिम एशिया के लिए रविवार को 28 उड़ानों (दोनों तरफ की मिलाकर) उड़ानों का परिचालन करेगी। इंडिगो ने बताया कि वह दुबई, अबु धाबी, शारजाह, जेद्दा, मस्कट और मदीना के लिए आज उड़ानों का परिचालन कर रही है। इसमें दुबई से मुंबई के लिए भी एक उड़ान शामिल है। साथ ही उसकी एक उड़ान मुंबई से इस्तांबुल के लिए भी होगी। एयरलाइंस ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि वह पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है और जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सभी नियामकीय मंजूरियों के साथ इन उड़ानों का परिचालन किया जा रहा है।</p>
<p>दूसरी तरफ, एयर इंडिया समूह ने रविवार को पश्चिम एशिया के लिए और वहां से कुल 50 उड़ानों के परिचालन की योजना बनायी है।एयरलाइंस ने एक अपडेट में बताया कि वह अपनी सहायक इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ आज सऊदी अरब के जेद्दा और ओमान की राजधानी मस्कट के लिए कुल 20 नियमित उड़ानों का परिचालन करेगी। इसके अलावा पश्चिम एशिया के विभिन्न शहरों से 30 विशेष उड़ानों (दोनों तरफ की मिलाकर) के परिचालन की योजना है।</p>
<p>एयर इंडिया एक्सप्रेस मस्कट की दिल्ली, कोच्चि, मुंबई और कन्नूर के लिए उड़ानें उपलब्ध होंगी। एयर इंडिया की उड़ान दिल्ली और मुबंई से जेद्दा के लिए होगी। एयर इंडिया एक्सप्रेस सऊदी अरब की राजधानी रियाद से बेंगलुरु और मेंगलुरु के लिए एक-एक और कोझिकोड़ के लिए दो उड़ानों का परिचालर कर रही है। सऊदी अरब के दम्मम से भी कोझिकोड़ के लिए उसकी एक उड़ान होगी।</p>
<p>समूह की सभी विशेष उड़ानें संयुक्त अरब अमीरात से होंगी। एयर इंडिया दुबई से दिल्ली के लिए एक उड़ान का परिचालन कर रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की अबुधाबी से दिल्ली के लिए दो और बेंगलुरु, कोच्चि, कोझिकोड़ और मुंबई के लिए एक-एक उड़ान तय की गयी है। रस-अल-खैमा से उसकी उड़ानें अमृतसर, कोच्चि, कोझिकोड़, मुंबई और तिरुवनंतपुरम् के लिए होंगी। शारजाह से वह कन्नूर और मुंबई के लिए उड़ानों का परिचालन करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 13:01:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महात्मा बुद्ध से जुड़े स्थलों, अवशेषों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता : पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में 'प्रकाश और कमल' प्रदर्शनी का उद्घाटन कर 127 साल बाद लौटे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने इसे भारत की आध्यात्मिक जीत बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/preservation-of-remains-of-sites-associated-with-mahatma-buddha-is/article-138298"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि महात्मा बुद्ध से जुड़े जो भी स्थल हैं उनका संरक्षण और विकास करना सरकार की प्राथमिकता है। वह महात्मा बुद्ध से संबंधित अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के यहां आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।  मोदी ने कहा कि सवा सौ साल के इंतजार के बाद महात्मा बुद्ध से जुड़ी भारतीय धरोहर और विरासत वापस लौटी है और अब भारतीय जनमानस इन पवित्र अवशेषों का दर्शन करके उनका आशीर्वाद पा सकेगा। उनका कहा कि 2026 की शुरुआत में ही यह उनके लिए बहुत प्रेरणादायक अवसर है कि उनके पहले सार्वजनिक कार्यक्रम की शुरूआत भगवान बुद्ध के चरणों से हो रही है। </p>
<p>ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के अवशेष प्रधानमंत्री जिस प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे उन पवित्र अवशेषों में कुछ हड्डियां भी हैं और माना जाता है कि ये भगवान बुद्ध की हड्डियों के अवशेष हैं। ये अवशेष ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के एवं प्राचीनतम माने जाते हैं। इस भव्य प्रदर्शनी में 127 साल बाद पवित्र पिपरहवा की वापस लाई गई वस्तुएं रखी गई हैं। प्रदर्शनी का नाम प्रकाश और कमल : जागृत व्यक्ति के अवशेष रखा गया है।</p>
<p>करोड़ों ने किए दर्शन मोदी ने समारोह में कहा कि करोड़ों लोगों ने इन पवित्र अवशेषों का दर्शन किए हैं और ये अवशेष पूरी दुनिया को नयी राह दिखाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत केवल इन अवशेषों का संरक्षक नहीं है बल्कि उनके संदेशों का जीवंत प्रवाह भी है। उन्होंने कहा कि भारत का प्रयास रहता है कि दुनिया में जो स्थल भगवान बुद्ध से जुड़े हैं उनके विकास में भारत सहयोग करे। मोदी ने कहा कि उनका जन्म स्थान भी बौद्ध परंपरा का बड़ा केंद्र रहा है और आज सरकार इन स्थलों का संरक्षण भी कर रही है। अभी जम्मू कश्मीर में बौद्ध काल की परंपरा का पता चला है और उसके संरक्षण का काम भी सरकार कर रही है। </p>
<p>श्रावस्ती, सांची, अमरावती, नागार्जुन सागर जैसी जगहों में बौद्ध विरासत का संरक्षण और विकास किया जा रहा है। उनका कहना था कि महात्मा बुद्ध के संदेश पालि भाषा में थे, इसलिए इसको शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया जा रहा है ताकि इन संदेशों उसके मूल रूप में समझा जा सके। इससे पहले संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कि ये वस्तुएं महात्मा बुद्ध की जीवंत परंपरा से जुड़ी हुई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 12:01:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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