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                <title>Buddhism - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>90 की उम्र में दलाई लामा मिला पहला ग्रैमी अवार्ड, जानें आखिर क्यों मिला इनको ये अवार्ड ?</title>
                                    <description><![CDATA[दलाई लामा ने ऑडियोबुक “Meditations” के लिए ग्रैमी अवॉर्ड जीता। उन्होंने इसे शांति, करुणा और वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता बताया, व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं कहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dalai-lama-received-his-first-grammy-award-at-the-age/article-141671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिल्स। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु, दलाई लामा को यहां रविवार देर रात संपन्न हुए 68वें ग्रैमी अवाड्र्स में 'बेस्ट ऑडियोबुक, नरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिर्काडिंग श्रेणी में विजेता चुना गया। इस श्रेणी के लिए चार अन्य लेखक भी दौड़ में थे लेकिन दलाई लामा को पुरस्कार के लिए चुना गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके ऑडियोबुक प्रोजेक्ट'मेडिटेशंस : द रिफलेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा के लिए मिला है। उनके अलावा इस श्रेणी में मशहूर कॉमेडियन और लेखक ट्रेवर नोआ ( इंटू द अनकट ग्रास), केतनजी ब्राउन जैक्सन (लवली वन) और कैथी गार्वर (एल्विस रॉकी एडं मी) जैसे नाम शामिल थे।</p>
<p>पुरस्कार की घोषणा के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आध्यात्मिक संत दलाई लामा ने अपनी चिर-परिचित सादगी और विनम्रता का परिचय दिया। उन्होंने कहा, मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूँ। मैं इसे किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की पहचान के रूप में देखता हूँ। मेरा मानना है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता को समझना आज दुनिया के आठ अरब लोगों की भलाई के लिए अनिवार्य है।</p>
<p>दलाई लामा की कृति मेडिटेशंस महज एक किताब का पाठ नहीं, बल्कि यह आत्म-चिंतन और शांति की एक यात्रा है। इसमें उनके गहरे आध्यात्मिक चिंतन और प्रवचनों का संग्रह है। इसमें उनके द्वारा 'निर्देशित ध्यान और करुणा के दर्शन को आवाज दी गई है। इस ऑडियो नैरेशन का उद्देश्य भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति प्रदान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 13:15:24 +0530</pubDate>
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                <title>महात्मा बुद्ध से जुड़े स्थलों, अवशेषों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता : पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में 'प्रकाश और कमल' प्रदर्शनी का उद्घाटन कर 127 साल बाद लौटे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने इसे भारत की आध्यात्मिक जीत बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/preservation-of-remains-of-sites-associated-with-mahatma-buddha-is/article-138298"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि महात्मा बुद्ध से जुड़े जो भी स्थल हैं उनका संरक्षण और विकास करना सरकार की प्राथमिकता है। वह महात्मा बुद्ध से संबंधित अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के यहां आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।  मोदी ने कहा कि सवा सौ साल के इंतजार के बाद महात्मा बुद्ध से जुड़ी भारतीय धरोहर और विरासत वापस लौटी है और अब भारतीय जनमानस इन पवित्र अवशेषों का दर्शन करके उनका आशीर्वाद पा सकेगा। उनका कहा कि 2026 की शुरुआत में ही यह उनके लिए बहुत प्रेरणादायक अवसर है कि उनके पहले सार्वजनिक कार्यक्रम की शुरूआत भगवान बुद्ध के चरणों से हो रही है। </p>
<p>ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के अवशेष प्रधानमंत्री जिस प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे उन पवित्र अवशेषों में कुछ हड्डियां भी हैं और माना जाता है कि ये भगवान बुद्ध की हड्डियों के अवशेष हैं। ये अवशेष ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के एवं प्राचीनतम माने जाते हैं। इस भव्य प्रदर्शनी में 127 साल बाद पवित्र पिपरहवा की वापस लाई गई वस्तुएं रखी गई हैं। प्रदर्शनी का नाम प्रकाश और कमल : जागृत व्यक्ति के अवशेष रखा गया है।</p>
<p>करोड़ों ने किए दर्शन मोदी ने समारोह में कहा कि करोड़ों लोगों ने इन पवित्र अवशेषों का दर्शन किए हैं और ये अवशेष पूरी दुनिया को नयी राह दिखाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत केवल इन अवशेषों का संरक्षक नहीं है बल्कि उनके संदेशों का जीवंत प्रवाह भी है। उन्होंने कहा कि भारत का प्रयास रहता है कि दुनिया में जो स्थल भगवान बुद्ध से जुड़े हैं उनके विकास में भारत सहयोग करे। मोदी ने कहा कि उनका जन्म स्थान भी बौद्ध परंपरा का बड़ा केंद्र रहा है और आज सरकार इन स्थलों का संरक्षण भी कर रही है। अभी जम्मू कश्मीर में बौद्ध काल की परंपरा का पता चला है और उसके संरक्षण का काम भी सरकार कर रही है। </p>
<p>श्रावस्ती, सांची, अमरावती, नागार्जुन सागर जैसी जगहों में बौद्ध विरासत का संरक्षण और विकास किया जा रहा है। उनका कहना था कि महात्मा बुद्ध के संदेश पालि भाषा में थे, इसलिए इसको शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया जा रहा है ताकि इन संदेशों उसके मूल रूप में समझा जा सके। इससे पहले संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कि ये वस्तुएं महात्मा बुद्ध की जीवंत परंपरा से जुड़ी हुई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 12:01:47 +0530</pubDate>
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