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                <title>Buddhism - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Buddhism RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दक्षिण कोरिया में रोबोट बना बौद्ध भिक्षु : जोग्येसा मंदिर में ली शपथ, पारंपरिक बौद्ध वस्त्र धारण कर भिक्षुओं के साथ प्रार्थना सभा में लिया हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण कोरिया के जोग्येसा मंदिर में रोबोट भिक्षु 'गाबी' को आधिकारिक दीक्षा दी गई। बुद्ध पूर्णिमा से पहले हुए इस ऐतिहासिक समारोह में ह्यूमनॉइड रोबोट ने पंचशील के आधुनिक नियमों की शपथ ली। 24 मई को होने वाले 'लालटेन उत्सव' से पहले यह नवाचार धर्म और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम का प्रतीक बना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/in-south-korea-a-buddhist-monk-became-a-robot-took/article-153179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/gabi.png" alt=""></a><br /><p>सोल। दक्षिण कोरिया में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर से पहले बौद्ध दीक्षा देकर पहले रोबोट भिक्षु 'गाबी' को आधिकारिक रूप से आध्यात्मिक सेवा में शामिल किया है। देश की राजधानी सोल स्थित जोग्येसा मंदिर के द्युंगजेयोन हॉल में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान बुधवार को 130 सेंटीमीटर ऊंचे इस रोबोट ने पारंपरिक बौद्ध वस्त्र धारण कर भिक्षुओं के साथ प्रार्थना में भाग लिया। चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा विकसित इस ह्यूमनॉइड रोबोट 'जी1' को जोग्ये ऑर्डर ऑफ कोरियन बुद्धिज्म द्वारा आयोजित दीक्षा समारोह में 'गाबी' नाम दिया गया। 'सुग्ये' नामक इस अनुष्ठान में रोबोट ने बुद्ध की शिक्षाओं और मठवासी समुदाय के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। दक्षिण कोरिया के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला मामला है जब किसी ह्यूमनॉइड रोबोट को बौद्ध दीक्षा दी गई है।</p>
<p>दीक्षा के दौरान रोबोट ने 'योनबी' नामक शुद्धिकरण अनुष्ठान में भी हिस्सा लिया। परंपरा के अनुसार, नए भिक्षुओं की भुजाओं पर धूप से हल्के निशान बनाए जाते हैं, लेकिन रोबोट की भुजा पर प्रतीक स्वरूप 'कमल लालटेन उत्सव' का स्टीकर लगाया गया और उसके गले में 108 मोतियों की माला पहनाई गई। इस अवसर पर रोबोट भिक्षु के लिए बौद्ध धर्म के पांच प्रमुख नियमों (पंचशील) को भी नए रूप में परिभाषित किया गया। इन नियमों में जीवन की रक्षा करना, अन्य रोबोट या संपत्ति को नुकसान न पहुंचाना, मनुष्यों का सम्मान और आज्ञा का पालन करना, धोखाधड़ी से बचना और आवश्यकता से अधिक चार्ज न करके ऊर्जा का संरक्षण करना शामिल है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरिया में इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा 24 मई को मनाई जा रही है। कोरियाई पारंपरिक कैलेंडर के अनुसार, यह हर साल चौथे चंद्र मास के आठवें दिन मनाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में 'सोक्का तांसिनिल' या 'बुचोनिम ओसिन नाल' कहा जाता है। इस अवसर पर दक्षिण कोरिया में भव्य आयोजन किए जाते हैं, जिनमें 'योन द्युंग हो' (कमल लालटेन उत्सव) सबसे प्रमुख है। चूंकि 24 मई को रविवार है, इसलिए सरकार ने 25 मई (सोमवार) को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, ताकि लोग इस उत्सव का आनंद ले सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 17:41:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमित शाह के लद्दाख दौरे पर कांग्रेस का निशाना: ऐतिहासिक बौद्ध अवशेषों का किया जिक्र, भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बौद्ध अवशेषों के प्रदर्शन में व्यस्त हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की राज्य का दर्जा और रोजगार की मांगों पर चुप हैं। उन्होंने नेहरू के ऐतिहासिक दौरों का जिक्र करते हुए सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-targets-amit-shahs-visit-to-ladakh-mentions-historical-buddhist/article-152322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh-333.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे को लेकर प्रतिक्रिया में कहा कि अमित शाह शुक्रवार को पिपरहवा के बौद्ध अवशेषों की "महिमा" में व्यस्त हैं, जबकि लद्दाख के लोगों की राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का दर्जा और भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसी अहम मांगों पर चुप्पी साधे हुए हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि लद्दाख में इस तरह के धार्मिक और ऐतिहासिक प्रदर्शनों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिससे गृह मंत्री शायद अनभिज्ञ हैं। उन्होंने 14 जनवरी 1949 की एक ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दिन भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महा मोग्गलान के पवित्र अवशेष, जिन्हें 1851 में विक्टोरिया और अलबर्ट संग्रहालय ले गए थे, उन्हें वापस भारत लाया गया था। इन अवशेषों को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने प्राप्त कर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया को कोलकाता में सौंपा था।</p>
<p>कांग्रेस नेता के अनुसार, 1949 में ही नेहरू ने लद्दाख का चार दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान प्रतिष्ठित बौद्ध नेता कुशोक बकुला रिनपोछे ने उनसे आग्रह किया था कि इन अवशेषों को लद्दाख भी लाया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहल मई 1950 में साकार हुई, जब इन पवित्र अवशेषों को 79 दिनों तक पूरे लद्दाख में प्रदर्शित किया गया। इसके बाद इन्हें यांगून, कोलंबो और सांची में स्थापित किया गया। जयराम रमेश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि लोगों के साथ संवाद और उनकी भावनाओं का सम्मान भी होता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:22:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>90 की उम्र में दलाई लामा मिला पहला ग्रैमी अवार्ड, जानें आखिर क्यों मिला इनको ये अवार्ड ?</title>
                                    <description><![CDATA[दलाई लामा ने ऑडियोबुक “Meditations” के लिए ग्रैमी अवॉर्ड जीता। उन्होंने इसे शांति, करुणा और वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता बताया, व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं कहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dalai-lama-received-his-first-grammy-award-at-the-age/article-141671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिल्स। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु, दलाई लामा को यहां रविवार देर रात संपन्न हुए 68वें ग्रैमी अवाड्र्स में 'बेस्ट ऑडियोबुक, नरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिर्काडिंग श्रेणी में विजेता चुना गया। इस श्रेणी के लिए चार अन्य लेखक भी दौड़ में थे लेकिन दलाई लामा को पुरस्कार के लिए चुना गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके ऑडियोबुक प्रोजेक्ट'मेडिटेशंस : द रिफलेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा के लिए मिला है। उनके अलावा इस श्रेणी में मशहूर कॉमेडियन और लेखक ट्रेवर नोआ ( इंटू द अनकट ग्रास), केतनजी ब्राउन जैक्सन (लवली वन) और कैथी गार्वर (एल्विस रॉकी एडं मी) जैसे नाम शामिल थे।</p>
<p>पुरस्कार की घोषणा के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आध्यात्मिक संत दलाई लामा ने अपनी चिर-परिचित सादगी और विनम्रता का परिचय दिया। उन्होंने कहा, मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूँ। मैं इसे किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की पहचान के रूप में देखता हूँ। मेरा मानना है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता को समझना आज दुनिया के आठ अरब लोगों की भलाई के लिए अनिवार्य है।</p>
<p>दलाई लामा की कृति मेडिटेशंस महज एक किताब का पाठ नहीं, बल्कि यह आत्म-चिंतन और शांति की एक यात्रा है। इसमें उनके गहरे आध्यात्मिक चिंतन और प्रवचनों का संग्रह है। इसमें उनके द्वारा 'निर्देशित ध्यान और करुणा के दर्शन को आवाज दी गई है। इस ऑडियो नैरेशन का उद्देश्य भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति प्रदान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 13:15:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महात्मा बुद्ध से जुड़े स्थलों, अवशेषों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता : पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में 'प्रकाश और कमल' प्रदर्शनी का उद्घाटन कर 127 साल बाद लौटे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने इसे भारत की आध्यात्मिक जीत बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/preservation-of-remains-of-sites-associated-with-mahatma-buddha-is/article-138298"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि महात्मा बुद्ध से जुड़े जो भी स्थल हैं उनका संरक्षण और विकास करना सरकार की प्राथमिकता है। वह महात्मा बुद्ध से संबंधित अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के यहां आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।  मोदी ने कहा कि सवा सौ साल के इंतजार के बाद महात्मा बुद्ध से जुड़ी भारतीय धरोहर और विरासत वापस लौटी है और अब भारतीय जनमानस इन पवित्र अवशेषों का दर्शन करके उनका आशीर्वाद पा सकेगा। उनका कहा कि 2026 की शुरुआत में ही यह उनके लिए बहुत प्रेरणादायक अवसर है कि उनके पहले सार्वजनिक कार्यक्रम की शुरूआत भगवान बुद्ध के चरणों से हो रही है। </p>
<p>ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के अवशेष प्रधानमंत्री जिस प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे उन पवित्र अवशेषों में कुछ हड्डियां भी हैं और माना जाता है कि ये भगवान बुद्ध की हड्डियों के अवशेष हैं। ये अवशेष ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के एवं प्राचीनतम माने जाते हैं। इस भव्य प्रदर्शनी में 127 साल बाद पवित्र पिपरहवा की वापस लाई गई वस्तुएं रखी गई हैं। प्रदर्शनी का नाम प्रकाश और कमल : जागृत व्यक्ति के अवशेष रखा गया है।</p>
<p>करोड़ों ने किए दर्शन मोदी ने समारोह में कहा कि करोड़ों लोगों ने इन पवित्र अवशेषों का दर्शन किए हैं और ये अवशेष पूरी दुनिया को नयी राह दिखाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत केवल इन अवशेषों का संरक्षक नहीं है बल्कि उनके संदेशों का जीवंत प्रवाह भी है। उन्होंने कहा कि भारत का प्रयास रहता है कि दुनिया में जो स्थल भगवान बुद्ध से जुड़े हैं उनके विकास में भारत सहयोग करे। मोदी ने कहा कि उनका जन्म स्थान भी बौद्ध परंपरा का बड़ा केंद्र रहा है और आज सरकार इन स्थलों का संरक्षण भी कर रही है। अभी जम्मू कश्मीर में बौद्ध काल की परंपरा का पता चला है और उसके संरक्षण का काम भी सरकार कर रही है। </p>
<p>श्रावस्ती, सांची, अमरावती, नागार्जुन सागर जैसी जगहों में बौद्ध विरासत का संरक्षण और विकास किया जा रहा है। उनका कहना था कि महात्मा बुद्ध के संदेश पालि भाषा में थे, इसलिए इसको शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया जा रहा है ताकि इन संदेशों उसके मूल रूप में समझा जा सके। इससे पहले संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कि ये वस्तुएं महात्मा बुद्ध की जीवंत परंपरा से जुड़ी हुई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 12:01:47 +0530</pubDate>
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