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                <title>colonies - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>colonies RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सरकारी भूमि पर चला जेडीए का बुलडोजर : अवैध कॉलोनी ध्वस्त, सड़कें और टीनशेड बनाकर कर रहे थे अतिक्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन दस्ते ने जोन-14 के जयचंदपुरा (चाकसू) में 15 बीघा सरकारी भूमि से करीब 60 करोड़ के अतिक्रमण हटाए। दयालपुर में अवैध कॉलोनी बसाने का प्रयास विफल किया गया। शिवदासपुरा के पदमपुरा में अवैध निर्माण ध्वस्त किया गया, जबकि जोन-17 के सरना चौड़ में आम रास्ता भी अतिक्रमण मुक्त कराया गया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jdas-bulldozer-operated-on-government-land-illegal-colonies-were-encroaching/article-150069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy40.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। जेडीए के प्रवर्तन दस्ते ने जोन 14 स्थित ग्राम जयचंदपुरा चाकसू में करीब 15 बीघा सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमणों को ध्वस्त किया। उप महानिरीक्षक पुलिस आनंद शर्मा ने बताया कि जोन 14 स्थित ग्राम जयचंदपुरा तहसील चाकसू में करीब 60 करोड़ रुपए मूल्य की 15 बीघा सरकारी भूमि से अतिक्रमणों हटाया। जोन 14 के ग्राम दयालपुर तहसील सांगानेर में करीब 3 बीघा कृषि भूमि पर जेडीए की बिना अनुमति अवैध कॉलोनी बसाने का प्रयास किया जा रहा था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यहां सड़कें और टीनशेड बनाकर अतिक्रमण किया जा रहा था जिसे हटाया गया है। उन्होंने बताया कि जोन 14 स्थित शिवदासपुरा के ग्राम पदमपुरा में गैर अनुमोदित योजना राम विहार के प्लॉट नंबर 62 पर किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त किया। इसी प्रकार जोन 17 में ग्राम सरना चौड के खसरा नंबर 193 में सरकारी आम रास्ते पर को अतिक्रमण मुक्त कराया।<span>  </span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 10:40:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉलोनियों के बीच खाली प्लॉट बने क्रोकोडाइल प्वाइंट, वर्द्धमान कॉलोनी के प्लॉटों में भरा 4 से 7 फीट पानी </title>
                                    <description><![CDATA[शाम ढलते ही कॉलोनियों में सन्नाटा, दहशत में कट रही  क्षेत्र के बाशिंदों की रात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vacant-plots-between-colonies-have-become-crocodile-hotspots--and-vardhaman-colony-s-plots-are-filled-with-4-to-7-feet-of-water/article-127217"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कुन्हाड़ी व बोरखेड़ा क्षेत्र की कॉलोनियों के बाशिंदे इन दिनों मगरमच्छ के आतंक से दहशत में हैं।  इन इलाकों में बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं, जिनमें 4 से 6 फीट तक बरसात का पानी भरा हुआ है। निकासी नहीं होने से मगरमच्छों का अड्डा बन गए। बीच-बीच में पानी से बाहर निकल धूप सेंकते नजर आ रहे हैं। रात को शिकार की तलाश में कॉलोनियों की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। हालात यह हो गए, शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। बच्चों को खेलना व बुजुर्गों का टहलना बंद हो गया।  क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से मगरमच्छों का रेस्क्यू करने की गुहार लगाई लेकिन साधन संसाधनों से वंचित वनकर्मियों ने पानी में मगर से बैर लेने में असमर्थता जताई। ऐसे में रहवासी  दहशत के बीच रहने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>दहशत में कट रही रात </strong><br />पार्षद बलविंदर सिंह बिल्लू ने बताया कि कुन्हाड़ी क्षेत्र की वर्द्धमान कॉलोनी के आसपास बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं। इनमें 4 से 6 फीट पानी भरा हुआ है, जो मगरमच्छ  छिपे हुए हैं। दोपहर को नजर आते हैं फिर वापस पानी में चले जाते हैं। रात में सड़कों पर दौड़ते हैं। शाम ढलते ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। रोड लाइटें खराब होने से कॉलोनी में अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में मगरमच्छ के घरों में घुसने व राहगीरों पर हमले का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>सुबह से रात तक चलाया पम्पसेट, 2 फीट पानी निकाला</strong><br />पार्षद बिल्लू ने बताया कि खाली प्लॉटों में कमर तक पानी भरा हुआ है। जिसे निकालने के लिए एक बड़ा मड पम्प लगाया है।  सुबह 10 से रात 8 बजे तक लगातार चलाकर पानी बाहर निकाला गया। जब तक पूरा पानी नहीं निकलेगा तब तक मगरमच्छ का रेस्क्यू संभव नहीं होगा। हालांकि, क्षेत्रवासियों की सूचना पर  मंगलवार देर रात फोरेस्ट की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची थी। लेकिन मगरमच्छ के वापस पानी में चले जाने से रेस्क्यू नहीं हो सका। हालात यह हैं, पिछले 6 दिन से लोग दहशत में हैं। </p>
<p><strong>इधर, डीसीएम क्षेत्र में युवकों ने पकड़ा 5 फीट लंबा मगरमच्छ</strong><br />डीसीएम इलाके के सूर्य नगर की सड़क पर 5 फीट लंबा मगरमच्छ आ गया, जिसे स्थानीय व्यक्तियों ने पकड़कर बोरखण्डी के नाले में छोड़ दिया। घटना तड़के 4 बजे की है। रेस्क्यू के बाद एक व्यक्ति ने मगरमच्छ को कंधे पर उठाकर वीडियो-फोटो खिंचवाया। फिर नाले में रिलीज किया। व्यक्ति का फोटो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मगरमच्छ सड़क पर दौड़ता हुआ कार के टायर के पास चला गया। मौके पर मौजूद व्यक्तियों ने मगरमच्छ की आंख पर बोरी फेंककर उसे काबू किया। लाडपुरा रेंजर इंद्रेश सिंह ने बताया कि टीम ने कैथून इलाके में मगरमच्छ पकड़ा है। सूर्य नगर में मगरमच्छ आने की जानकारी नहीं है। जिस व्यक्ति ने सूर्य नगर में मगरमच्छ पकड़ा उसने विभाग को सूचना नहीं दी। उसके बारे में पता किया जा रहा है।</p>
<p><strong>बोरखेड़ा : पार्वती कॉलोनी में भी दहशत </strong><br />पार्वती कॉलोनी निवासी अरबाज ने बताया कि कॉलोनी में  खाली प्लॉटों में 3 से 4 फीट पानी भरा हुआ है। जिनमें मगरमच्छ पनप रहे हैं। रात को घर की छत से टॉर्च लगाकर देखा तो भारी-भरकम मगरमच्छ पानी से बाहर निकल सड़क पर जाता नजर आया। हाल ही में सड़क पर दौड़ता नजर आया था। इसी तरह देवली अरब, काला तलाब, नम्रता आवास सहित अन्य कॉलोनियों में आए दिन मगरमच्छ आने की घटनाएं हो रही है। </p>
<p><strong>अलग-अलग प्लॉटों में छिपे मगरमच्छ</strong><br />स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह, उपेंद्र यादव, सार्थक नागर ने बताया कि वर्द्धमान कॉलोनी में ही सड़क के दोनों तरफ खाली पड़े प्लॉट पानी से लबालब हैं। यहां तीन से चार मगरमच्छ नजर आए हैं। रोड लाइटें भी खराब है, अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में घर से बाहर निकले के दौरान मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। जिसकी वजह से बच्चों का खेलना भी छूट गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 14:56:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>27 बीघा कृषि भूमि पर बसाई जा रही कॉलोनियां ध्वस्त</title>
                                    <description><![CDATA[रिंग रोड के पास ग्राम दादियां में अवैध रूप से निर्माण कर बसाई जा रही कॉलोनी के निर्माणों को ध्वस्त किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/colonies-being-established-on-27-bigha-agricultural-land-demolished/article-82423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/6633-copy76.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में अवैध निर्माण एवं अतिक्रमणों को लेकर की जा रही कार्रवाई के दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन दस्ते ने जोन 14 में निजी खातेदारी की करीब 27 बीघा कृषि भूमि पर अवैध रूप से बसाई जा रही 5 कॉलोनियों को ध्वस्त कर दिया।  </p>
<p>मुख्य नियंत्रक प्रवर्तन महेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि जोन 14 के एल एण्ड टी रोड मानपुरा टीलावाला में करीब तीन बीघा, ग्राम पहाडिया में करीब 13 बीघा एवं ग्राम वाटिका में हीरालाल जेडीए की योजना के पास रामसिंहपुरा रोड पर करीब चार बीघा एवं दूसरी दो बीघा निजी खातेदारी कृषि भूमि पर जेडीए की बिना स्वीकृति अनुमोदन के एवं बिना भू रूपान्तरण करवाए अवैध रूप से बसाई जा रही कॉलोनियों को ध्वस्त कर दिया। रिंग रोड के पास ग्राम दादियां में अवैध रूप से निर्माण कर बसाई जा रही कॉलोनी के निर्माणों को ध्वस्त किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Jun 2024 10:38:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार अवैध कॉलोनी ध्वस्त,  जयपुर विकास प्राधिकारी के प्रवर्तन दस्ते की 11वीं कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[जोन 12 के क्षेत्राधिकार स्थिति ग्राम नीमेड़ा में करीब पांच बीघा कृषि भूमि पर अवैध रुप से बसाई जा रही थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/four-illegal-colonies-demolished-11th-action-of-jaipur-development-authoritys/article-81299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy11rer-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में अवैध निर्माण को लेकर 11वीं कार्रवाई के दौरान जयपुर विकास प्राधिकारी के प्रवर्तन दस्ते में शहर के विभिन्न स्थानों में चार अवध कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया।</p>
<p>मुख्य नियंत्रक प्रवर्तन महेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि जोन 12 के क्षेत्राधिकार स्थिति ग्राम नीमेड़ा में करीब पांच बीघा कृषि भूमि पर अवैध रुप से बसाई जा रही जानकी विहार कॉलोनी, ग्राम सरना डूँगर में करीब दो बीघा पर भूमि पर राधे धाम कॉलोनी, ग्राम दोलतपुरा में माँ वैष्णो नगर नाम से क़रीब चार बीघा कृषि भूमि पर और ग्राम दोलतपुरा के पीछे पूजा पब्लिक स्कूल के पास सेवलियो की बस्ती में बसाई जा रही अवैध कॉलोनी को ध्वस्त किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jun 2024 17:16:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - पालिका ने बिना कंवर्ट कॉलोनियों पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[नगर पालिका प्रशासन ने बिना कंवर्ट कराए काटी जा रही 13 कॉलोनियों पर रोक लगा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---municipality-bans-without-convert-colonies/article-52255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/news.png" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। रामगंजमंडी नगर पालिका प्रशासन ने बिना कंवर्ट कराए काटी जा रही 13 कॉलोनियों पर रोक लगा दी है। जिसमें एएसआई कम्पनी द्वारा काटी जा रही कॉलोनी भी शामिल है। अधिशासी अधिकारी सत्यनारायण राठौर ने वृत्त निरीक्षक पुलिस से ऐसी कॉलोनियों पर चल रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगाने व बोर्ड लगाने की कार्यवाही के लिए जाब्ता भी मांगा है। गौरतलब है कि 4 जुलाई को दैनिक नवज्योति में आवासीय भूमि में बिना कंवर्ट हुए ही बन गर्इं सड़कें शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिस पर संज्ञान लेते हुए रामगंजमंडी नगर पालिका प्रशासन ने बिना कंवर्ट कराए काटी जा रही 13 कॉलोनियों पर रोक लगा दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2023 12:55:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आशियाने बन गए बाजार, बाशिंदे लाचार</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में हाउसिंग बोर्ड की करीब 17 कॉलोनियां हैं, जिनमें से अधिकतर मेन रोड की कॉलोनियां बाजार में तब्दील हो चुकी है। इन कॉलोनियों में कुछ लोगों ने अपने मकानों को किराए पर देकर दूसरी जगह घर बना लिया। वहीं, जो लोग इन कॉलोनियों में रह रहे हैं, उनके लिए यह बाजार मुसीबत बन गए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/homes-have-become-markets--residents-are-helpless/article-44084"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/aashiyane-ban-gaye-bazar,-bashinde-laachar...kota-news..28.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में सजा मार्केट अब रहवासियों के लिए सजा बन गया है। दिनभर वाहनों के शोर-शराबे और असमाजिक तत्वों के हो-हल्ले से दिन का चैन और रात का सुकून छीन गया। घरों के आगे जहां दुकानें सज गई, वहीं थड़ी-गुमटियों पर लगे मझमे से शांति भंग हो गई। हालात यह हो रहे हैं कि दुकानों व थड़ियों पर आने वाले ग्राहक घरों के आगे बेतरतीब वाहन खड़े कर जाते हैं। वहीं, घरों के सामने दुकानों पर लोगों की भीड़ के कारण महिलाओं का घरों से बाहर निकलना तक दुभर हो गया है। मंदिर व बाजार जाने के दौरान बाहर निकलने में असहज महसूस करतीं हैं। हालांकि, कॉलोनियों में कुछ लोगों ने अपने आवासीय मकानों को व्यवसाय में तब्दील कर दिया तो कुछ लोगों ने दुकानें खोल मिनी कॉम्पेक्स खड़े कर दिए हैं। जिनकी वजह से अन्य बाशिंदों को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>यह कॉलोनियां बनी मार्केट</strong><br />शहर में हाउसिंग बोर्ड की करीब 17 कॉलोनियां हैं, जिनमें से अधिकतर मेन रोड की कॉलोनियां बाजार में तब्दील हो चुकी है। इनमें दादाबाड़ी छोटा चौराहा, दादाबाड़ी विस्तार योजना, तीन बत्ती सर्किल, महावीर नगर विस्तार, बसंत विहार, सुभाष सर्किल, केशवपुरा स्थित टीचर्स कॉलोनी, अम्बेड़कर नगर कुन्हाड़ी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी कुन्हाड़ी, महावीर नगर परिजात कॉलोनी, रंगबाड़ी, सकतपुरा, वल्लभबाड़ी, विज्ञान नगर व स्वामी विवेकानंद नगर सहित अन्य कॉलोनियां शामिल हैं। इन कॉलोनियों में कुछ लोगों ने अपने मकानों को किराए पर देकर दूसरी जगह घर बना लिया। वहीं, जो लोग इन कॉलोनियों में रह रहे हैं, उनके लिए यह बाजार मुसीबत बन गए हैं। </p>
<p><strong>कॉलोनियों में यह दुकानें</strong><br />दादाबाड़ी, बसंत विहार, सुभाष सर्किल, तीन बत्ती सर्किल, टीचर्स कॉलोनी, बसंत विहार, कुन्हाड़ी लैंडमार्क के सामने सहित कई कॉलोनियों में रेडिमेड गारमेंटस, स्टेशनरी, मोबाइल, जूस, जेरोक्स, मोटर मार्केट, फ्रेब्रिकेशन, हार्ड वेयर, कबाड़ा, सैनेट्री, इलेक्ट्रीकल, जनरल स्टोर, कचौरी-समोसे, साइकिल पंक्चर, पूजन हवन सामग्री, श्रृंगार, सैलून सहित कई दुकानें लगी हुई हैं। इसके अलावा फास्ट फू्रड के ठेले, चाय की गुमटियां आदि छोटी-बड़ी कई तरह के व्यवसाय चल रहे हैं। जिनकी वजह से वाहनों का शोर-शराबा और फ्रेब्रिकेशन पर लोहे काटने की मशीनों की कानफाडू आवाजों से स्थानीय बाशिंदें परेशान हैं। </p>
<p><strong>छिन गया सुख-चैन</strong><br />दादाबाड़ी विस्तार योजना निवासी शीतल जैन का कहना है कि कॉलोनियों में लोगों ने अपने मकानों को दुकानों में तब्दील कर दूसरी जगह बस गए। लेकिन, हम जैसे कई लोग यहां बरसों से रह रहे हैं। घरों के आगे दुकानों पर दिनभर लोगों का मजमा लगा रहता है। बहू-बेटियों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया। थड़ियों व दुकानों पर जमी भीड़ हो-हल्ला करती है। जिससे नींद में खलल पड़ती है और मन अशांत रहता है। दुकानदारों को टोकने पर झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। परेशानियां बहुत हैं लेकिन सुनने वाला कोई नहीं। </p>
<p><strong>बच्चों की पढ़ाई तक नहीं हो पाती</strong><br />टीचर्स कॉलोनी निवासी रामकृष्ण मेघवाल व तीन बत्ती सर्किल निवासी परमानंद सोनी, जमना शंकर मालव ने बताया कि इन दिनों कॉलेजों में यूजी व पीजी की परीक्षाएं चल रही हैं। लेकिन, घरों के आसपास फेब्रिकेशन व कूलर की बॉडियां बनाने की दुकानें लगी हुई हैं। दिनभर मशीनों से लोहे के एंगलें व सरिए काटे जाते हैं। जिसकी कानफाडू आवाज से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। दुकानदारों को मना करने पर झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। मजबूरन देर रात तक बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ती है। रोज-रोज की समस्या से तंग आ गए, कहां  शिकायत करें कुछ समझ नहीं आता। हाउसिंग बोर्ड ने लोगों को रहने के लिए कॉलोनियां बसाई थी लेकिन कुछ लोगों ने चंद पैसों की खातिर मार्केट ही बना दिया। घर की सुख-शांति खत्म हो गई। प्रशासन को कॉलोनियों में व्यवसायिक गतिविधियां बंद करवानी चाहिए। </p>
<p><strong>दहलीज को ही बना दी पार्किंग </strong><br />बसंत विहार निवासी पंकज गुप्ता व अमरीश खंडेलवाल का कहना है, देखते ही देखते कुछ ही सालों में पूरी कॉलोनी बाजार में बदल गई। दिनभर वाहनों के शोर-शराबे, हॉर्न से मन चिड़चिड़ा रहता है। वहीं, दुकानों पर आने वाले ग्राहक घरों की दहलीज तक वाहन खड़े कर जाते हैं। जिसकी वजह से घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। वहीं, मार्केट या आॅफिस जाने के लिए घर से बाइक बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। घर के आगे गाड़ी खड़ी करने से मना करते हैं तो लोग अपशब्द बोलते हैं। कई बार झगड़े की नौबत तक आ जाती है। </p>
<p><strong>साइन बोर्ड से ढके मकान</strong><br />दादाबाड़ी छोटा चौराहा निवासी रजनीश कुमार व बसंत विहार निवासी अुर्जन महावर ने बताया कि घरों के आगे बिजली के पोल लगे हैं। जिन पर आसपास के दुकानदारों ने अपनी-अपनी दुकानों के बड़े-बड़े साइन बोर्ड लगा दिए। बोर्ड के कारण मकान दिखाई नहीं देता और रात को बिजली की रोशनी तक नहीं हो पाती। वहीं, तीन दिन पहले साइन बोर्ड लगाने के दौरान बिजली का तार टूट गया, जो अभी तक नहीं जोड़ा गया। शाम ढलते ही घर के आगे अंधेरा रहता है। दिनभर वाहनों की हॉर्न से परेशानी होती है। घर के सामने ही थड़ियां व गुमटियां भी लग गई। यहां असमाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। दिनभर हो-हल्ला करते हैं। बिजली गुल होने पर घरों की खिड़कियां भी नहीं खोल पाते। पूर्व में नगर निगम में शिकायत की थी लेकिन कोई  कार्रवाई नहीं हुई। </p>
<p><strong>कार्रवाई का जिम्मा नगर निगम का</strong><br />हाउसिंग बोर्ड ने दो कॉलोनियां स्वामी विवेकानंद व कुन्हाड़ी को छोड़कर शहर की अन्य सभी  कॉलोनियां नगर निगम को हैंडओवर कर दी है। उनके रखरखाव, अतिक्रमण व व्यवसायिक गतिविधियों को रोकने का जिम्मा अब नगर निगम का है। बोर्ड की कॉलोनियों में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई परेशानी है तो वे नगर निगम कार्यालय में लिखित शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए निगम में अलग से एक प्रकोष्ठ भी बना हुआ है। जहां डीएसपी रैंक का अधिकारी तैनात हैं जो संबंधित शिकायतों का निस्तारण करने के लिए सक्षम हैं। <br /><strong>- अनिल सक्सेना, उप आवासन आयुक्त, राजस्थान आवासन मंडल</strong></p>
<p><strong>यह पॉलिसी मेटर</strong><br />यह पॉलिसी मेटर है, यदि किसी आवासीय कॉलोनी में 70 से 80 प्रतिशत मार्केट बस चुका है, दुकानें लग चुकी हैं यानी कॉमर्शियल एक्टिविटी शुरू हो चुकी है तो इस संबंध में राज्य सरकार कोई निर्णय ले सकती है। इसके अलावा कोई नई आवासीय कॉलोनी में दुकानें बनाने या व्यवसायिक गतिविधियां शुरू करने की कोशिश करता है और उसकी कोई लिखित शिकायत आती है तो उसे हम जरूर रोकेंगे। <br /><strong>- राजेश डागा, उपायुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Apr 2023 15:25:49 +0530</pubDate>
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                <title>खाली प्लॉटों में जमा पानी और कचरा बना जी का जंजाल</title>
                                    <description><![CDATA[कॉलोनियों में खाली पड़े भूखन्डों में हर बार बारिश के दौरान पानी भरता है जो सालभर वहीं जमा रहता है। वहीं रही सही कसर इन इलाकों मे मकान बना चुके लोग कर देते हैं जो अपना कूड़ा करकट इन प्लॉटों में फैंक जाते है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-and-garbage-accumulated-in-vacant-plots-became-a-mess/article-43785"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/khalo-plots-mei-jama-paani-aur-kachra-bana-ji-ka-janjaal...kota-news..25.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा में रहने वाले लोग बीते कुछ सालों से संक्रमित बीमारियों से लगातार जूझ रहे हैं लेकिन इन संक्रमित बीमारियों को फैलाने में अपनी महत्तपवूर्ण भूमिका निभाने वाले शहर की कॉलोनियों में खाला पड़े प्लॉटों की ओर प्रशासन का ध्यान कम ही गया है। शहर की बाहरी और आन्तरिक कॉलोनियों में खाली पड़ें इन प्लॉटों में बारिश के दौरान जमा होने वाला पानी और लोगों का फैंका गया कचरा दूसरे लोगों के लिए भारी परेशानी का कारण बना हुआ है और यहीं जमा पानी और उसमें फैंका गया कचरा संक्रमित बीमारियों को फैलाने में अपनी महत्तवपूर्ण भूमिका निभा रहा है। लोगों की इस समस्या की ओर ना तो इन प्लॉटों के मालिकों का और ना ही संबंधित विभाग का ध्यान गया है। ज्ञातव्य है कि शहर के बाहरी इलाकों में यूआईटी और कॉलोनाइजर की ओर से लोगों को भूखन्ड दिए गए थे। इनमें से कई भूखन्डों पर तो लोगों ने निर्माण करवा लिया लेकिन आज भी कई भूखन्ड खाली पड़े हैं। भूखन्ड मालिकों ने इन पर या तो चार दीवारी करवा दी है या यूं ही रख छोड़ा है। इन इलाकों में पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर, स्टेशन क्षेत्र, मुकुन्दरा, मोहनलाल सुखाड़िया, रानी लक्ष्मी बाई, रानपुर तथा सूरसागर आदि कॉलोनियां है। इन कॉलोनियों में खाली पड़े भूखन्डों में हर बार बारिश के दौरान पानी भरता है जो सालभर वहीं जमा रहता है। वहीं रही सही कसर इन इलाकों मे मकान बना चुके लोग कर देते हैं जो अपना कूड़ा करकट इन प्लॉटों में फैंक जाते है। </p>
<p>ऐसा नहीं है कि इस बारे में संबंधित विभाग को जानकारी नहीं है लेकिन अधिकारी केवल कुछ मौकों पर ही इन भूखन्ड मालिकों को नोटिस आदि देने की कार्यवाही करते हैं, भूखन्ड मालिक इन नोटिसों का जवाब देते हैं लेकिन स्थिति वहीं ढ़ाक के तीन पात। इन इलाकों के रहने वाले लोग बताते हैं कि इन प्लॉटों के मालिक तो साल में कभी कभार आकर देखते हैं और जब उनकों इस समस्या के बारे में बताया जाता है तो वे सुनकर भी अनसुना कर देते हैं, अगर प्रशासन इस मामले को लेकर कुद सख्ती दिखाए तो हमें इस समस्या से निजात मिल सकती है। लोग बताते हैं कि इन भूखन्डों में पड़े कचरे में दिनभर सुअर आदि आवारा जानवर पड़े रहते हैं। इस बारें में कुछ चिकित्सकों का कहना है कि वाकई शहर में संक्रमित बीमारियों के फैलाने में इन खला पड़े भूखन्डों का भी विशेष योगदान है। इन प्लॉटों में जमा पानी से मच्छर पैदा होते है तो कई संक्रमित बीमारियों के जनक होते हैं।  चिकित्सक बताते हैं कि संंबंधित विभाग अगर शहर में सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दे तो शायद लोगों को अस्पताल तक आने की जरुरत ही ना पड़ें। खासकर गर्मियों के दौरान संक्रमित बीमारियां ज्यादा फैलती हैं क्यों कि आज भी कई लोग गर्मियों में छतों पर सोना पसन्द करते हैं और जब इन प्लॉटों में पनपे मच्छर उनको काट लेते हैं तो उन्हे संक्रमित बीमारियों का शिकार होना ही पड़ता है। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं...</strong><br />गर्मियों में मलेरिया, डेंगू तथा आंत्रशोध यानि टाइफाइड के रोगी ज्यादा सामने आते हैं। खाली प्लॉटों में जमा पानी जमीन में जाता है और बोरिंग के माध्यम से घरों में पहुंचता है। जिसकी वजह से पेट तथा लीवर से जुड़ी बीमारियों का जन्म होता है। लीवर फेलियर तक की स्थिति पैदा हो जाती है। <br /><strong>- डॉ. राकेश उपाध्याय, डिप्टी डायरेक्टर, मेडिसिन विभाग। </strong></p>
<p>खाली पड़े प्लॉटों की समस्या आज या कल की नहीं है। ये सालों से चली आ रही समस्या है। संबंधित विभाग को इन भूखन्डों के मालिकों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करनी चाहिए। वैसे ही बीते कुछ सालों से पूरा क्षेत्र कई बीमारियों से जूझ रहा है ऐसे में जो दिखता दिखाता कारण है उसे तो हटाया ही जा सकता है।<br /><strong>- ओम महावर, स्टेशन क्षेत्र निवासी। </strong></p>
<p>वाकई शहर के कई स्थानों पर खाली पड़ें भूखन्डों में जमा पानी और कचरा लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई है। लोग इन प्लॉटों को डस्टबिन के रूप में काम लेते है। कुछ लोगों ने इन प्लॉटों को खुला शौचालय भी बनाया हुआ है। इन भूखन्डों के मालिक इनकी सुध ही नहीं लेते हैं। इसको लेकर कुछ कठोर नियम होने चाहिए तभी इस समस्या को समाप्त किया जा सकेगा। <br /><strong>- लव शर्मा, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम दक्षिण। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Apr 2023 14:42:07 +0530</pubDate>
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                <title>16 बीघा भूमि पर बसाई जा रही 4 कॉलोनियों को हटाया </title>
                                    <description><![CDATA[करीब दो बीघा एवं जयसिंहपुरा खोर में हेवल्स गार्डन के पास करीब 3 बीघा एवं भारत गैस गोदाम के पास करीब एक बीघा निजी खातेदारी कृषि भूमि पर बसाई अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त कर दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/4-colonies-being-set-up-on-16-bighas-of-land/article-42394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/a-45.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण दस्ते ने जोन 10 के इकोलॉजिकल जोन में करीब 16 बीघा कृषि भूमि पर बसाई जा रही चार अवैध नई कॉलोनियों को हटा दिया। इसके साथ ही जेडीए ने व्यावयसायिक प्रयोजनार्थ निर्माणाधीन 35 अवैध विलाज एवं 3 दुकानों का प्रारंभिक स्तर पर ही ध्वस्त कर दिया। मुख्य नियंत्रक प्रवर्तन रघुवीर सैनी ने बताया कि जोन 10 के इकॉलोजिकल जोन में राम नगर, मोती नगर के पास विजयपुरा में करीब 10 बीघा, इसके पास ही दूसरी करीब दो बीघा एवं जयसिंहपुरा खोर में हेवल्स गार्डन के पास करीब 3 बीघा एवं भारत गैस गोदाम के पास करीब एक बीघा निजी खातेदारी कृषि भूमि पर बसाई अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त कर दिया। </p>
<p>रोहित नगर 6 के नाम से निर्माणाधीन 7 अवैध विलाज, विजयपुरा में बसंत विहार कॉलोनी में 3 विलाज, जयसिंहपुरा खोर में 4 विलाज, जयसिंहपुरा खोर में रोहित हॉस्पिटल के पास 6 विलाज, दूसरे स्थान पर 9 विलाज, सुमेल रोड पर पार्वती नगर कॉलोनी में 4 विलाज, सांवलिया धाम के सामने कालरा फार्म हाउस के पास 9 विलाज सहित सुमेल रोड पर रुकमणी नगर कॉलोनी में 2 दुकानों सहित अन्य निर्माणों को ध्वस्त कर दिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Apr 2023 10:02:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 21 : कॉलोनियों की सड़कें खोद बनाना भूल गए पार्षद</title>
                                    <description><![CDATA[बरसों से बसी कॉलोनियां आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रही है। सड़कें, बिजली, पानी, गंदगी सहित तमाम समस्याओं से वार्डवासी जूझ रहे हैं। पार्षद भी लोगों की तकलीफों से सरोकार नहीं रखते। चुनाव से पहले एक-एक गलियों का दरवाजा खटखटा कर वोट मांगा फिर जीतने के बाद झांक कर तक भी नहीं देखते  कि लोग किन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-21--the-councillors-forget-to-make-the-roads-of-the-colonies/article-19209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/ward-21,-colonies-ki-sadke-khod-bananaa-bhul-gaye-parshad..kota-news-16.8.20221.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के वार्डों का समूचित विकास के लिए नगर निगम गंभीर नहीं है। बरसों से बसी कॉलोनियां आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रही है। सड़कें, बिजली, पानी, गंदगी सहित तमाम समस्याओं से वार्डवासी जूझ रहे हैं। पार्षद भी लोगों की तकलीफों से सरोकार नहीं रखते। चुनाव से पहले एक-एक गलियों का दरवाजा खटखटा कर वोट मांगा फिर जीतने के बाद झांक कर तक भी नहीं देखते कि लोग किन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। घरों की दहलीज पर खतरनाक बीमारियों का लार्वा पनप रहा है। कचरा व गंदगी से उठती दुर्गंध से वार्डवासियों का जीना मुहाल हो रहा है। सड़क बनाना तो दूर कॉलोनियों की सफाई तक नहीं होती। पार्षद बजट नहीं होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ने से नहीं चूक रहे। कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड 21 के बाशिंदे गंदगी-दुर्गंध व उधड़ी सड़कों से परेशान हैं। यह है वार्ड क्षेत्र नया भदाना, बैरवा मोहल्ला, रिद्धि-सिद्धि नगर, सरस्वती कॉलोनी का आंशिक भाग, आदर्श कॉलोनी, अम्बेडकर नगर, जगदम्बा कॉलोनी। 6 माह से खुदी पड़ी सड़कें रंगपुर रोड स्थित सरस्वती कॉलोनी की तीन गलियों में 6 माह पूर्व नालियां व सड़कें बनाने के लिए पूरा रोड खोद दिया। नालियां तो बना दी लेकिन उधड़ी सड़कें नहीं बनाई। पार्षद से शिकायत की तो उन्होंने बजट नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। नगर निगम व यूआईटी में शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बरसात के दौरान गलियों में पानी भर जाता है। घरों तक पहुंचना तक मुश्किल हो रहा है। कीचड़ व गंदगी से उठती दुर्गंध से जीना मुहाल हो रहा है। - मुकेश कुमार, सरस्वती कॉलोनी सड़ रही नालियां, नहीं होती सफाई इलाके की कॉलोनियों में हाल में ही सीसी नालियां बनाई गई हैं, जिसकी नियमित सफाई नहीं होती। बरसात में इलाके का कचरा बहकर नालियों में जमा हो गया। जिससे पानी की निकासी नहीं हो रही। घरों से निकलने वाला गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर फैला रहता है, जिसमें मच्छर पनप रहे हैं। मौसमी बीमारियों का खतरा रहता है। सफाईकर्मी नियमित रूप से नहीं आते। लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हुई। पार्षद से शिकायत की लेकिन फायदा नहीं हुआ। - राहुल कुमार, वार्ड 21 निवासी बंद पड़ी रोड लाइटें, कॉलोनियों में अंधेरा सरस्वती कॉलोनी की कई गलियों में अंधेरा पसरा है। यहां लंबे समय से रोड लाइटें बंद पड़ी हैं। सड़कें पूरी तरह से उधड़ी पड़ी है, अंधेरे में दुर्घटना का खतरा रहता है। कुछ दिनों पहले बाइक सवार दम्पति गिरकर चोटिल हो गए थे। मोहल्लेवासियों ने पार्षद से रोड बनवाने का आग्रह किया था लेकिन अनसुना कर दिया। वहीं, सफाईकर्मी वार्ड के मुख्यमार्ग पर ही सफाई करते हैं लेकिन गलियों में नहीं आते। घरों के सामने खाली प्लॉट पड़े हैं, जिनमें बरसाती पानी भरा होने से हादसे व बीमारियों का खतरा बना रहता है। प्लॉट मालिकों को नोटिस तक नहीं दिए जाते। - हेमंत गौतम निगम में पक्षपात, सुनवाई नहीं होती वार्ड की जनसंख्या करीब 7 हजार है, जिसके अनुपात में हमारे पासे संसाधन नहीं है। एक टिपर है, जबकि आवश्यकता 4 की है। 10 सफाईकर्मी है, जरूरत 40 की है। इलाका बड़ा है, सफाई नहीं हो पाती। वहीं, गत 4 माह पहले यूआईटी एईएन, जेईएन व एक्सईएन को सरस्वती कॉलोनी की गलियों में रोड बनवाने के लिए मौका मुआयना करवाया था, उस समय आश्वास दिया जो आज तक पूरा नहीं हुआ। इसकी लिखित में महापौर, आयुक्त व उप महापौर सहित जिला कलक्टर को शिकायत की। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हुई। यूआईटी की जेईएन ममता यादव रोड न बनवाने का न तो कोई कारण दे रही और न ही फोन उठाती हैं। आॅफिस जाते हैं तो मिलते तक नहीं है। नगर निगम बोर्ड बने हुए करीब पौने दो साल बीत गए लेकिन विकास कार्यों के लिए बजट तक नहीं दिया गया। बीजेपी पार्षद होने के चलते पक्षपात किया जाता है। वार्ड में काम नहीं होने से लोगों का गुस्सा झेलना पड़ता है। कुछ दिनों पहले भदाना रोड पर यूडीएच मंत्री को ज्ञापन देकर वार्ड की जरूरतों से अवगत कराया था, आश्वासन मिला जो आज तक पूरा नहीं हुआ। - संदीप नायक, पार्षद वार्ड 21</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Aug 2022 17:05:44 +0530</pubDate>
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                <title>  कोटा दक्षिण वार्ड 16 : कॉलोनियों के बीच मगरमच्छों का डेरा, डर के साये में रहने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[सड़क पर खेलते बच्चे और पास ही घूमते मगरमच्छ, यह किसी जंगल की स्थिति नहीं है बल्कि स्मार्ट सिटी का तमगा ले चुके कोटा के दक्षिण नगर निगम की वार्ड 16 की कॉलोनियों के हालात हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-kota-south-ward-16--crocodiles-camp-among-colonies--forced-to-live-in-fear/article-17695"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/21.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सड़क पर खेलते बच्चे और पास ही घूमते मगरमच्छ, यह किसी जंगल की स्थिति नहीं है बल्कि स्मार्ट सिटी का तमगा ले चुके कोटा के दक्षिण नगर निगम की वार्ड 16 की कॉलोनियों के हालात हैं। यहां पर कई कॉलोनियों के निवासी खतरे के साये में रहने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि हर पल मौत का खतरा बना रहता है। वहीं सड़कों का अभाव व मूलभूत सुविधाओं की कमी भी स्थानीय लोगों को दोहरी पीड़ा दे रही है। कई समस्याएं होने के बावजूद समाधान का प्रयास नहीं किया जा रहा है।  <br /><br /><strong>नाला बना मगरमच्छों का आशियाना</strong><br />वार्ड 16 में अधिकांश कॉलोनियां कृषि भूमि पर बसी हुई है। इन कॉलोनियों की बसावट से पहले ही यहां पर एक नाला बना हुआ है, जिसके माध्यम से शहर के अन्य क्षेत्रों से बहकर आने वाले पानी की निकासी होती है। कॉलोनियां बनने के बाद इस नाले को अन्यत्र स्थानांतरित करने पर ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण इन नाले को मगरमच्छों ने अपना आशियाना बना लिया है, जो स्थानीय लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। हालात यह है कि कई बार मगरमच्छ नाले से बाहर निकलकर सड़क पर आ जाते हैं। ऐसे में लोगों को यहां पर विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। बच्चों को नाले के पास खेलने भी नहीं दिया जाता है। <br /><br /><strong>बरसों से पट्टों व सुविधाओं का इंतजार</strong><br />आदर्श नगर सोसायटी के अध्यक्ष भगवान सिंह हाड़ा ने बताया कि इस वार्ड की अधिकांश कॉलोनियां 15 से 20 साल पहले से बस गई थी। इसके बावजूद कई कॉलोनियां अभी तक अनुमोदित नहीं हो पाई है। ऐसे में लोग मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। कॉलोनियों में अभी तक सड़क नहीं बनी है। ऐसे में कच्ची डगर पर आवागमन करने को मजबूर है। <br /><br /><strong>तेज बारिश होते ही कॉलोनियों में जलभराव</strong><br />इस वार्ड में बसी कॉलोनियों के बीच निकल रहा नाला जलभराव का कारण भी बना हुआ है। आदर्श नगर विस्तार और अन्य कॉलोनियों के बीच इस नाले पर पुलिया बनी हुई है। इस पुलिया का निर्माण करीब तीस साल पहले हुआ था। उस दौरान पानी की निकासी के लिए मौखे बनाए गए थे, जिनकी चौड़ाई काफी कम हैं। ऐसे में अब तेज बरसात होने पर पानी नाले के मौखों से नहीं निकल पाता है और कॉलोनियों में भर जाता है। कई दिनों तक कॉलोनियों की सड़क पानी में डूबी रहती है। वहीं इस साल लगातार हुई तेज बारिश से पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो गई है। बारिश से पुलिया पर कीचड़ हो गया, जिससे दुपहिया वाहन सवार फिसल रहे हैं। इससे लोगों को एक-दूसरी कॉलोनियों में आवाजाही करने में परेशानी हो रही है।<br /><br /><strong>वार्ड क्षेत्र</strong><br />श्रीराम कॉलोनी, अक्षरधाम, प्रतापनगर प्रथम व द्वितीय, थेकड़ा, श्रीरामनगर, जयश्रीविहार, मालीपुरा, शिवसागर, आस्था नगर, होली फैमिली अस्पताल का क्षेत्र, रॉयलसन सिटी आदि का क्षेत्र।<br /><br />लाखों रुपए खर्च कर कोटा शहर में अपने मकान तो बना लिए, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। मगरमच्छ नाले से निकलकर कॉलोनियों में आ रहे हैं। सड़क की सुविधा अभी तक नहीं मिली है। गत दिनों यहां पर प्रशासन शहरों के संग शिविर आयोजित किया गया था, जिसमें लोगों ने पट्टे देने की मांग उठाई, लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। ऐसे में पट्टों के अभाव में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। <strong>- भगवान सिंह हाड़ा, आदर्श नगर</strong><br /><br />इस वार्ड की अधिकांश कॉलोनियां करीब 15 से 20 साल पहले बस गई थी। उस समय लाखों रुपए देकर यहां भूखंड खरीदे थे। उसके बाद अपने आशियानें तो बना लिए, लेकिन पर्याप्त सुविाधाएं नहीं मिल पा रही है। रोड लाइट तो स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर लगवा ली, लेकिन पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं है। नाले की पुलिया क्षतिग्रस्त होने से दूसरी कॉलोनियों से आवागमन कट गया है। पुलिया की मरम्मत भी नहीं की जा रही है। <strong>- राकेश दाधीच, वार्ड 16</strong><br /><br />वार्ड की प्रमुख समस्या सड़कों की है। इस वार्ड की अधिकांश कॉलोनियों में अभी तक सड़क नहीं है। जिससे आवागमन में दिक्कत होती है। वहीं नाले से निकल रहे मगरमच्छ भी खतरा बने हुए हैं। बच्चों को अपनी निगरानी में रखकर खेलने भेजते हैं। एक तरफ तो शहर को स्मार्ट सिटी बनाया जा रहा है वहीं इसी शहर के कई क्षेत्र सुविधाओं को तरस रहे हैं। हमें भी स्मार्ट सिटी की सुविधाएं मिलनी चाहिए। <strong>- राजू गौतम, आदर्श नगर विस्तार</strong> <br /><br />इस वार्ड की अधिकांश कॉलोनियां अनुमोदित हो चुकी हैं। इसके बावजूद ुसुविधाएं विकसित करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सरकार अन्य क्षेत्रों पर तो ध्यान दे रही है वहीं रायपुरा क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है। समस्याओं को लेकर कई बार नगर निगम व नगर विकास न्यास के अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। आगे भी इस सम्बंध में प्रयास किया जाएगा। <strong>- दीपकंवर खटाणा, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Aug 2022 12:56:15 +0530</pubDate>
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                <title>कॉलोनियों की सड़कें बढ़ा रही दर्द, मोटर बिना नहीं आता पानी</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में कई कॉलोनियां  ऐसी भी हैं जो सालों पहले बस तो गईं लेकिन यहां रहने वाले बाशिंदों को आज भी मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे ही हालात विज्ञाननगर के वार्ड 57 के बने हुए है। यहां समस्याएं लोगों के जीवन पर हावी हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-pain-is-increasing-the-roads-of-the-colonies--water-does-not-come-without-the-motor/article-13719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/raste-par-faila-keechad-paidal-chalna-dubhar..panwar.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में कई कॉलोनियां  ऐसी भी हैं जो सालों पहले बस तो गईं लेकिन यहां रहने वाले बाशिंदों को आज भी मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे ही हालात विज्ञाननगर के वार्ड 57 के बने हुए है। यहां समस्याएं लोगों के जीवन पर हावी हैं। चाहे फिर वह पानी की समस्या हो या गंदगी की। सड़क, बिजली व पेयजल आपूर्ति सहित कई परेशानियों से गुजर रहे हैं। नवज्योति ने वार्डों में  जाकर लोगों की समस्याएं जानी तो उन्होंने खुलकर अपनी पीड़ा बयां की। वार्ड के सेक्टर-2 व 3 की कॉलोनियों  की प्रमुख सड़कों पर गहरे गडढे हो रह हैं। वहीं, ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने से बरसात का पानी कॉलोनियो ंमें भरा रहता है। जिससे मच्छर जनित बीमारियों का अंदेशा लगा रहता है। इसके अलावा सेक्टर दो स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के सामने पार्क बदहाली का शिकार हो रहा है। पार्क  की  चारदीवारी टूट चुकी है। दिन में आवारा मवेशियों का तो रात में असमाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। वहीं, गंदगी व कीचड़ होने से दुर्गंध रहती है जिससे स्थानीय बाशिंदों का रहना दुश्वार हो रहा है।<br /><br /><strong>यह है वार्ड क्षेत्र</strong><br />वार्ड 57 में विज्ञान नगर की कई कॉलोनियां आती हैं, जिनमें सेक्टर-2 व 3, जैन मंदिर के पीछे का इलाका, नगर निगम सेक्टर कार्यालय, ईएसआई हॉस्पिटल, अयप्पा मंदिर, माहेश्वरी भवन, सिंधु अस्पताल, लॉयंस क्लब व न्यू मोटर मार्केट का इलाका शामिल है। <br /><br /><strong>कम दबाव से होती है जलापूर्ति </strong> <br /> विज्ञान नगर सेक्टर-3 कॉलोनी काफी अरसे पहले ही बस गई थी। लेकिन ड्रेनेज सिस्टम का ख्याल नहीं रखा जाने से बरसाती पानी की निकासी नहीं हो पाती।  नतीजन, घरों की दहलीज पर पानी जमा रहता है, जिनमें गंभीर बीमारियों का लार्वा पनपता है। वहीं, बिजली आने-जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। दिनभर में कभी भी बिजली बाधित हो जाती है।  <br /><strong>-मुकेश मेवाड़ा, सेक्टर-3 निवासी </strong> <br /><br /><strong>सड़कों पर हो रहे गड्ढ़े</strong> <br /> गांधीगृह सेक्टर-2 व 3 की कॉलोनियों के प्रवेश मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे हो रहे हैं। वहीं, स्पीड ब्रेकर भी क्षतिग्रस्त हो गए। यहां से गुजरने के दौरान दुपहिया वाहनों के पार्ट्स डेमेज हो रहे हैं। जिससे वाहनों का अनावश्यक मेंटिनेंस बढ़ रहा है। वहीं, बाइक गड्ढ़ों से गुजरने के दौरान रीड की हड्डी में तकलीफ होती है। बरसात के दिनों में मुश्किलें और बढ़ गई। सड़कों पर पानी भरा होने से गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिसकी वजह से हादसा घटित हो जाता है। <br /><strong>-ललित सिंह बेस, सेक्टर-2 निवासी</strong><br /><br /><strong>चिल्ड्रन पार्क बना मवेशियों का अड्डा</strong><br /> राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के ठीक सामने चिल्ड्रन पार्क है, यहां स्कूल के बच्चे खेलते थे। मोहल्लेवासियों व विद्यार्थियों ने पार्क को सुंदर बनाने के लिए पौधे व घास लगाई। चारदीवारी टूटने से यह मवेशियों का अड्डा बन गया। सारे पौधे-घास नष्ट हो गए। पार्क की चारदीवारी क्षतिग्रस्त हो चुकी है, कचरे का ढेर लगा है। झूले में लगी लोहे की चैन भी असमाजिक तत्व चुरा ले गए।  <br /><strong>-हितेश कुमार, सेक्टर-3 निवासी</strong><br /><br /><strong>मयूखेश्वर मंदिर के पास गंदगी का ढेर</strong><br /> विज्ञान नगर स्थित मयूखेश्वर मंदिर के आसपास गंदगी का ढेर लगा है। मंदिर के पीछे वाली कॉलोनी के रास्ते पर कीचड़ फैला है। सीवरेज पाइप लाइन डालने के लिए पूरी सड़क को आधी-अधूरी खोद डाली। जिससे नालियों का पानी सड़क पर भर गया। जिससे गड्ढे दिखाई नहीं दे रहे। यहां से बाइक गुजरने के दौरान हादसे का डर लगा रहता है। साथ ही बीमारियों का भी खतरा रहता है। <br /><strong>-चेतन कुमार, सेक्टर-2 निवासी </strong><br /><br /> सेक्टर-2 व 3 में कम दबाव से जलापूर्ति की शिकायत थी, जिस पर यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के प्रयास से जलदाय विभाग द्वारा 850 मीटर पाइप लाइन डलवाई गई। सीवरेज लाइन के चलते कॉलोनियां के रास्ते खुदे पड़े हैं, काम जल्द खत्म करवाकर सीसी सड़क बनाने के लिए आरयूआईडीपी के एसई राकेश गर्ग से आग्रह किया है। एक करोड़ के बजट से हनुमान वाटिका, चिल्ड्रन व बाबा पार्क में निर्माण कार्य करवा रहे हैं। साथ ही चारदीवारी, रेलिंग व फुटपाथ बनवा रहे हैं। साथ ही गायत्री, अजय आहूजा व मयूखेश्वर पार्क में महिला स्नानघर का निर्माण करवा रहे हैं। वहीं, महात्मा गांधी व अन्य पार्कों में नई बैंच व झूले लगवाना प्राथमिकता है। <strong>-  कपिल शर्मा, पार्षद वार्ड 57</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 15:14:47 +0530</pubDate>
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                <title>कॉलोनियों के नियमन के लिए कट ऑफ डेट दिसंबर 2018 होगी</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बसी कच्ची बस्तियों के नियमन के लिए राज्य सरकार नई पॉलिसी लाएगी। इसका प्रारूप तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-cut-off-date-for-regulation-of-colonies-will-be-december-2018--government-will-bring-a-new-policy-for-regulation-of-raw-settlements/article-4644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/jaipur_kachi_basti_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बसी कच्ची बस्तियों के नियमन के लिए राज्य सरकार नई पॉलिसी लाएगी। इसका प्रारूप तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा। इसके साथ ही आवासन मण्डल क्षेत्राधिकार की कॉलोनियों में पट्टे देने के लिए बोर्ड अपने एक्ट में संशोधन करेगा ताकि बोर्ड के मकानों के बेचान के बाद आखिरी क्रेता के पक्ष में नियमितिकरण किया जा सके। बोर्ड का क्षेत्र ट्रांसफर होने के बाद निकाय इन कॉलोनियों में पट्टे देने के लिए बोर्ड से एनओसी मांग रहे थे। कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन के लिए कट ऑफ डेट को भी दिसंबर 2018 तक बढ़ाई जाएगी। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्रशासन शहरों के संग अभियान की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। अपने आवास पर हुई बैठक में धारीवाल ने नई नीति का प्रस्ताव करने करने के यूडीएच अधिकारियों को निर्देश दिए।<br /><br /><br /><strong>हाउसिंग बोर्ड एक्ट में संशोधन कर शेष कॉलोनियों में देगा पट्टे<br />कट ऑफ डेट बढ़ाने से मिलेगी राहत</strong><br />साथ ही नियमन के लिए मौजूदा कट ऑफ डेट को बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। अभी नियमन के लिए कॉलोनियों की कट ऑफ डेट 15 अगस्त, 2009 निर्धारित है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर दिसंबर 2018 करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के लिए 17 जून, 1999 है, जिसे भी बढ़ाकर दिसंबर 2018 किया जा सकता है। बैठक में बताया गया कि कट ऑफ डेट बढ़ाने के लिए भू-राजस्व अधिनियम में बदलाव जरूरी है, ऐसा होने से हजारों की तादाद में भूखण्डधारियों को राहत मिल सकेगी। भूखण्ड व सुविधा क्षेत्र में 60:40 के अनुपात की बजाय 70:30 अनुपात भी हो सकता है। साथ ही पट्टा लेने के लिए पहले की तुलना में कम राशि देनी होगी।<br /><br /><strong><br />नाम हस्तांतरण के मामलों में आर्थिक भार कम</strong><br />मकान व भूखण्ड का नाम हस्तांतरण के लिए विज्ञप्ति प्रकाशित कराने में विस्तृत ब्यौरा नहीं देने का निर्णय लिया गया ताकि आवेदक पर आर्थिक भार कम हो। प्रशासन शहरों के संग अभियान के कैम्प मार्च में फिर शुरू हो सकते है। इसके लिए धारीवाल-मुख्यमंत्री के बीच चर्चा कर समय तय किया जाएगा। <br /><br /><strong>चार सीई का पदोन्नति के बाद पदस्थापन</strong><br />नगरीय विकास विभाग ने पदोन्नति के बाद चार मुख्य अभियंता के पदस्थापन कर दिया है। इसमें सीई अशोक कुमार चौधरी को निदेशक जेडीए, महेन्द्र कुमार माथुर को निदेशक जेडीए, पीके जैन को अतिरिक्त परियोजना निदेशक आरयूआईडीपी और ओपी वर्मा को कोटा यूआईटी में पदस्थापित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 13:26:57 +0530</pubDate>
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