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                <title>Global Crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Global Crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शेयर बाजार में गिरावट के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया 55 पैसे हुआ कमजोर, 93.34 पर पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में 8% के उछाल ने भारतीय मुद्रा को बड़ा झटका दिया है। सोमवार को रुपया 55 पैसे टूटकर 93.34 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। ब्रेंट क्रूड के $102 पार जाने से आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/after-the-fall-in-the-stock-market-the-rupee-weakened/article-150169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rupee.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया सोमवार को 55 पैसे की गिरावट के साथ खुला, जिसके बाद रूपया 93.34 पर ट्रेंड कर रहा है। पिछले कारोबारी दिवस पर रुपया तीन पैसे की मजबूती के साथ 92.51 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, रूपए में आज दिन भर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत का उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:35:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने से शेयर बाजारों में भ़ारी गिरावट: सेंसेक्स 1,600 अंक लुढ़का, निवेशकों के 10 लाख करोड़ लगे दांव पर</title>
                                    <description><![CDATA[हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मच गया। सेंसेक्स 1,613 अंक और निफ्टी 461 अंक गिरकर खुले, जबकि रुपया ₹93.38 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया। बैंकिंग, ऑटो और तेल क्षेत्रों में भारी बिकवाली से निवेशकों के अरबों रुपये डूब गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/due-to-increasing-tension-between-america-and-iran-huge-fall/article-150136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/share-market.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच हार्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ने से सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों और रुपये में शुरुआती गिरावट देखी गयी। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1,613.09 अंक टूटकर 75,937.16 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 1,530.50 अंक नीचे 76,019.75 अंक पर था।</p>
<p>अमेरिका के हार्मुज जलडमरूमध्य को अपने नियंत्रण में लेने के बयान के बाद रुपये पर भी दबाव आया। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया फिलहाल 55 पैसे की गिरावट के साथ 93.38 रुपये प्रति डॉलर पर है। सेंसेक्स की तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 461 अंक फिसलकर 23,589.60 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 456.60 अंक उतरकर 23,549 अंक पर रहा।</p>
<p>बैंकिंग, वित्त, ऑटो, रियलटी, तेल एवं गैस और रसायन समूहों के सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक गिरे। एफएमसीजी, आईटी, मीडिया, स्वास्थ्य और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूहों में एक से दो प्रतिशत तक गिरावट रही। सेंसेक्स की कंपनियों में सनफार्मा को छोड़कर अन्य सभी इस समय दबाव में हैं। इंडिगो का शेयर छह फीसदी से अधिक, मारुति सुजुका का चार फीसदी से अधिक और एलएंडटी, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस और अडानी पोर्ट्स के शेयर तीन से चार प्रतिशत टूटे। भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, एक्सिस बैंक और एयरटेल में दो से तीन प्रतिशत की गिरावट रही।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:53:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव गिरा: होर्मुज खोलने की मांग पर चीन-रूस का वीटो, ट्रम्प की धमकी, आज रात ईरान की पूरी सभ्यता खत्म होगी</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का यूएन प्रस्ताव रूस और चीन के वीटो से गिर गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "पूरी सभ्यता" खत्म करने की चेतावनी देते हुए आज रात को ऐतिहासिक पल बताया है। जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने ईरान के रेल नेटवर्क को ध्वस्त किया, जबकि 1.40 करोड़ ईरानी नागरिक मानव श्रृंखला बनाकर ढाल बन रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/resolution-dropped-in-un-security-council-china-russia-veto-on-demand/article-149486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन/तेल अवीव/तेहरान। ईरान संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर लाया गया प्रस्ताव पास नहीं हो सका। रूस और चीन ने इस पर वीटो कर दिया। यह प्रस्ताव बहरीन की तरफ से लाया गया था। इसके पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि कोलंबिया और पाकिस्तान ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। रूस और चीन होर्मुज खोलने के लिए किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हैं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होने से पहले ही ईरान को एक और बड़ी धमकी दी है। ट्रम्प ने ईरान को धमकाते हुए कहा है कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे वापस नहीं लाया जा सकेगा। मैं ऐसा नहीं चाहता लेकिन शायद ऐसा होगा। </p>
<p>ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अब हमने ईरान में सत्ता बदल दी है। अब वहां पहले की तुलना में स्मार्ट और कम कट्टरपंथी लोग हैं। किसे पता कि कुछ क्रांतिकारी कदम उठा लिया जाए? हमें आज रात पता चल जाएगा। यह दुनिया के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण पल हो सकता है। 47 साल की उगाही, भ्रष्टाचार और मौत का तांडव आखिरकार खत्म होगा।</p>
<p><strong>ब्रिटेन के बेस से अमेरिकी बमवर्षक ने भरी उड़ान</strong></p>
<p>इस बीच मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी एयरफोर्स के बी-2 बमवर्षक विमान ने मंगलवार को ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से उड़ान भरी। यह विमान हथियारों से लैस बताया जा रहा है और इसे मौजूदा हालात के बीच एक बड़े सैन्य संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>मर-मिटने को तैयार 1.40 करोड़ ईरानी! </strong></p>
<p>उधर ईरानी नागरिक भी देश के प्रति एकजुट हो गए गए हैं। ये अपने देश के लिए डटकर खड़े हो गए हैं। ईरानी नागरिक अपने देश के बड़े संसाधनों की सुरक्षा के लिए ‘मानव श्रृंखला’ बना रहे हैं। ईरानी नागरिक पावर प्लांट के बाहर पहुंच रहे हैं। तबरीज शहर के थर्मल पावर प्लांट के सामने ईरानी लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर एकता का सबूत दिया है। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इनमें ईरानी नागरिक हाथों में देश का झंडा लिए हमलों का डटकर विरोध करते दिख रहे हैं।</p>
<p><strong>ईरान में इजरायल ने किए बड़े हमले</strong></p>
<p>इजरायली ने मंगलवार को ईरान में करीब 10 अहम रेल लाइनों और पुलों पर हमला किया है। यह हमले इसलिए किए गए ताकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स अपने हथियार और सैन्य सामान एक जगह से दूसरी जगह न ले जा सके। इससे पहले इजरायली सेना के सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की गई एक पोस्ट में ईरानी लोगों से ‘अपनी सुरक्षा के खातिर’ पूरे देश में ‘ईरानी समय के अनुसार रात 9:00 बजे तक’ ट्रेन का उपयोग करने और उससे यात्रा करने से बचने का आग्रह किया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 09:26:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान वॉर पर एंटोनियो गुटेरेस का साफ संदेश : मौत और विनाश का यह सिलसिला अब रुकना चाहिए; युद्ध जितना खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी बढ़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आगाह किया है कि पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका ईरान युद्ध पूरी दुनिया को तबाही की ओर धकेल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से खाद्य और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। गुटेरेस ने तत्काल युद्धविराम और कूटनीतिक संवाद के जरिए शांति बहाली की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-clear-message-on-iran-war-this-cycle-of/article-148999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/un-general-secretary-antonio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका ईरान युद्ध पूरे क्षेत्र को एक व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रहा है, जिससे वैश्विक आर्थिक और मानवीय संकट पैदा हो सकता है। गुटेरेस ने गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा, "यह युद्ध जितने दिन खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी ही बढ़ेगी। तबाही का दायरा, अंधाधुंध हमले और नागरिकों के साथ-साथ नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हम एक व्यापक युद्ध के मुहाने पर हैं जो पूरे पश्चिमी एशिया को अपनी चपेट में ले लेगा और इसका दुनिया भर में नाटकीय असर होगा।"</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसके वैश्विक आर्थिक और मानवीय परिणामों पर जोर देते हुए फिलीपींस से लेकर श्रीलंका और मोजाम्बिक तक के कमजोर समुदायों पर खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी कि जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में बाधा आने से दुनिया के सबसे गरीब लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p>गुटेरेस ने तत्काल कूटनीतिक प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा, "विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। मौत और विनाश का यह सिलसिला रुकना चाहिए। शांतिपूर्ण रास्ता निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। उन्हें सफल होने के लिए पर्याप्त जगह और समर्थन मिलना चाहिए, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून में मजबूती से निहित हो।" महासचिव ने सभी पक्षों के सामने स्पष्ट मांगें रखीं। उन्होंने अमेरिका और इजरायल से युद्ध को तुरंत रोकने का आग्रह किया, जो भारी मानवीय पीड़ा और आर्थिक संकट का कारण बन रहा है। वहीं ईरान से उन्होंने पड़ोसी देशों पर हमले बंद करने की मांग की। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी देशों को संप्रभुता, नागरिक सुरक्षा, परमाणु केंद्रों और नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।</p>
<p>गुटेरेस ने चल रहे शांति प्रयासों में मदद के लिए अपने व्यक्तिगत दूत ज्यां अरनॉल्ट को क्षेत्र में भेजने की घोषणा की। उन्होंने कहा, "संघर्ष अपने आप खत्म नहीं होते। वे तब खत्म होते हैं जब नेता विनाश के बजाय संवाद को चुनते हैं। वह विकल्प अभी भी मौजूद है और उसे अभी चुना जाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 16:36:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लाल निशान में बंद हुआ शेयर बाजार: सेंसेक्स 1,636 अंक लुढ़का, निवेशकों के 10 लाख करोड़ स्वाहा</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के चलते घरेलू शेयर बाजार में हाहाकार मच गया। सोमवार को सेंसेक्स 1,635 अंक गिरकर 25 महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 488 अंक लुढ़का। बजाज फाइनेंस, एसबीआई और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों में भारी बिकवाली से बैंकिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/stock-market-closed-in-red-sensex-fell-1636-points-investors/article-148453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/share-market5.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। विदेशों से मिले नकारात्मक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों में सोमवार को बड़ी गिरावट देखी गयी और बीएसई का सेंसेक्स 1,635.67 अंक (2.22 प्रतिशत) लुढ़ककर 25 महीने से अधिक के निचले स्तर 71,947.55 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 488.20 अंक यानी 2.14 प्रतिशत टूटकर 22,331.40 अंक पर बंद हुआ जो इसका करीब एक साल का निचला स्तर है।</p>
<p>पश्चिम एशिया संकट और उद्योगों पर उनके प्रभाव के कारण शेयर बाजारों में शुरू से ही बिकवाली हावी रही। सेंसेक्स एक हजार अंक से अधिक की गिरावट में खुला। दोपहर बाद बाजार पर दबाव और बढ़ गया। मझौली तथा छोटी कंपनियों में बिकवाली ज्यादा देखी गयी। वृहत सूचकांकों में निफ्टी मिडकैप-50 में 2.68 फीसदी और स्मॉलकैप-100 सूचकांक में 2.66 फीसदी की गिरावट रही। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भारी दबाव रहा। ऑटो, मीडिया, एफएमसीजी, रियलटी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, फार्मा और स्वास्थ्य सेक्टरों के सूचकांकों में भी अधिक गिरावट रही।</p>
<p>सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फाइनेंस का शेयर पांच प्रतिशत से ऊपर टूट गया। भारतीय स्टेट बैंक, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक और ट्रेंट के शेयर तीन से चार प्रतिशत तक लुढ़के। भारती एयरटेल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक और सनफार्मा के शेयर दो से तीन प्रतिशत फिसल गये। एशियन पेंट्स, अडानी पोर्ट्स, इटरनल, एलएंडटी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, एनटीपीसी, टीसीएस, बीईएल और मारुति सुजुकी के शेयरों में एक से दो फीसदी की गिरावट रही। हिंदुस्तान यूनीलिवर, टाटा स्टील और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी लाल निशान में रहे। टेक महिंद्रा का शेयर डेढ़ प्रतिशत से अधिक चढ़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरदीप सिंह पु​री ने की केंद्र सरकार की तारीफ: देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यक्त किया आभार, वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने का निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि जहाँ दुनिया ईंधन की कमी से जूझ रही है, पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ऊर्जा सुरक्षित है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल का बोझ खुद उठाकर जनता को राहत दी है। वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन बढ़ाकर 70% किया गया है और निर्यात कर लगाकर घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hardeep-singh-puri-praised-modi-government-for-ensuring-adequate-availability/article-148149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/modi-and-hardeep-singh-puri.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि जहां दुनिया ईंधन की कमी से गुजर रही है, वहीं भारत में ईंधन की प्रचुर उपलब्धता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में श्री पुरी ने कहा कि जहाँ दुनिया के अन्य देश ईंधन संरक्षण के लिए ऑड-ईवन, सप्ताह में चार दिन काम और स्कूलों-कार्यालयों को बंद करने जैसे कड़े कदम उठा रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ऊर्जा सुरक्षा और उपलब्धता का एक बेमिसाल उदाहरण बना हुआ है।</p>
<p>हरदीप सिंह पुरी ने घोषणा की कि वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को आसान बनाने के लिए भारत सरकार ने राज्यों के वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन को बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। इसमें से 20 प्रतिशत आवंटन स्टील, ऑटोमोबाइल, कपड़ा और अन्य श्रम-गहन उद्योगों को दिया जाएगा। उन उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी जहाँ 'पाइप्ड गैस' एक विकल्प नहीं है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके परिणामस्वरूप दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 30-50 प्रतिशत, उत्तरी अमेरिका में 30 प्रतिशत, यूरोप में 20 प्रतिशत और अफ्रीकी देशों में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।</p>
<p>हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे- या तो अन्य देशों की तरह नागरिकों के लिए कीमतें बढ़ा दी जाएं या फिर अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से देशवासियों को बचाने के लिए सरकारी खजाने पर इसका बोझ उठाया जाए। प्रधानमंत्री ने सरकारी खजाने से इस समस्या के समाधान का विकल्प चुना ताकि भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके।</p>
<p>हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल-डीजल आदि पर कर कम कर दिया है ताकि तेल कंपनियों के उच्च घाटे (पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर) को कम किया जा सके। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल को देखते हुए निर्यात कर भी लगाया गया है, जिससे विदेशों में निर्यात करने वाली किसी भी रिफाइनरी को कर देना होगा। उन्होंने इस 'साहसिक और दूरदर्शी' निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 18:22:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान के समर्थन में कश्मीरियों की मानवीय पहल: राहत के लिए बड़े पैमाने पर दान-अभियान शुरू, ईरानी दूतावास से आभार व्यक्त किया</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच कश्मीर के लोगों ने मानवता की मिसाल पेश की है। घाटी के गांवों से लेकर शहरों तक, लोग नकदी, सोना और तांबे के बर्तन दान कर रहे हैं। ईरानी दूतावास ने इस एकजुटता के लिए आभार जताया, जबकि इमरान अंसारी और मुन्तजीर मेहदी जैसे नेताओं ने इसे धार्मिक और मानवीय कर्तव्य बताते हुए अपना वेतन दान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/large-scale-donation-campaign-started-for-humanitarian-relief-relief-of/article-147539"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-help.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में लोगों ने अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच ईरान के प्रभावित नागरिकों के लिए बड़े पैमाने पर दान-अभियान शुरू किया है, जिसमें नकदी, आभूषण और बचत राशि तक का योगदान दिया जा रहा है। भारत में ईरान के दूतावास ने इस मानवीय सहयोग के लिए कश्मीर के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया है। दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, कश्मीर के भलेमानस लोगों का हम दिल से धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस कठिन समय में ईरान के लोगों के साथ एकजुटता दिखाई। यह सछ्वावना कभी भुलाई नहीं जाएगी। </p>
<p>दूतावास द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक महिला को अपने दिवंगत पति की याद में संभालकर रखा गया सोना दान करते हुए और बच्चों को अपनी गुल्लक सौंपते हुए देखा गया। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो और तस्वीरों में, विशेषकर शिया बहुल क्षेत्रों से लोग नकद, आभूषण और तांबे के बर्तन तक दान करते नजर आ रहे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने इस पहल को मानवता की मिसाल बताते हुए कहा कि गांवों से लेकर शहरों तक लोगों का आगे आना सामूहिक संवेदनशीलता और करुणा को दर्शाता है। उन्होंने अपील की कि दान करें, लेकिन उसका प्रदर्शन न करें।</p>
<p>पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायक मुन्तजीर मेहदी ने राहत प्रयासों के लिए अपना एक माह का वेतन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में ईरान के लोगों के साथ खड़ा होना जरूरी है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता और ऑल जम्मू-कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान अंसारी ने कहा कि विशेष रूप से शिया समुदाय ने बड़ी संख्या में भागीदारी की है और इसे नैतिक व धार्मिक कर्तव्य के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दान संग्रह में शामिल कुछ लोगों को विभिन्न एजेंसियों से जानकारी मांगने के लिए कॉल आ रहे हैं, जिस पर उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता और समझदारी बरतने की अपील की।</p>
<p>अंसारी ने कहा कि यह दान पूरी तरह मानवीय और धार्मिक उद्देश्य से किया जा रहा है और इसमें लोगों की भावनाएं गहराई से जुड़ी हैं, इसलिए अनावश्यक दबाव से बचना चाहिए। यह अभियान युद्धग्रस्त लोगों के प्रति कश्मीर के लोगों की एकजुटता और सहानुभूति का प्रतीक बनकर उभरा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:32:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नकारात्मक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट, खुलते ही 1,550 अंक लुढका सेंसेक्स, इन शेयरों पर रखें नजर</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट और रुपये की ऐतिहासिक गिरावट के बीच घरेलू शेयर बाजार सोमवार को धराशायी हो गया। सेंसेक्स 1,555 अंक तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी में 1.76% की भारी गिरावट दर्ज की गई। HDFC और SBI जैसे बड़े शेयरों में बिकवाली और $93.88$ प्रति डॉलर के कमजोर रुपये ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-fall-in-domestic-stock-markets-amid-negative-signals-sensex/article-147467"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(4)20.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। विदेशों से मिले नकारात्मक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों में सोमवार को शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट देखी गयी। बीएसई का सेंसेक्स 800.38 अंक टूटकर 73,732.58 अंक पर खुला और खुलते ही 1,555.62 अंक की गिरावट में 72,977.34 अंक तक लुढ़क गया। खबर लिखे जाते समय यह 1,293.73 अंक (1.74 प्रतिशत) नीचे 73,239.23 अंक पर था।</p>
<p>नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 407.55 अंक यानी 1.76 प्रतिशत फिसलकर 22,706.95 अंक पर रहा। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक स्तर पर शेयर बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। इसके अलावा रुपये के कमजोर पड़ने से भी निवेश धारणा प्रभावित हो रही है। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया फिलहाल 34.50 पैसे गिरकर 93.88 रुपये प्रति डॉलर पर है।</p>
<p>बाजार में चौतरफा गिरावट है। धातु और सार्वजनिक बैंकों के समूहों के सूचकांक तीन फीसदी से ज्यादा नीचे चल रहे हैं। ऑटो, वित्त, रियलटी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और रसायन सेक्टरों से सूचकांक दो प्रतिशत से ज्यादा टूटे। एफएमसीजी, आईटी, मीडिया, फार्मा, निजी बैंक, स्वास्थ्य और तेल एवं गैस सेक्टरों में भी बड़ी गिरावट रही। सेंसेक्स की गिरावट में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, भारती एयरटेल, एलएंडटी, एक्सिस बैंक और टाटा स्टील का योगदान अधिक रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:36:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने रेपो रेट में नहीं की कोई कमी: तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट तनाव ने बढ़ाई चिंता, शेयर बाजार हुए लाल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने महंगाई और पश्चिम एशिया संकट के बीच रेपो दरों को 3.5% से 3.75% पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। जेरोम पॉवेल ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति अब भी लक्ष्य से ऊपर है। इस फैसले से बाजार की कटौती की उम्मीदें टूट गईं, जिससे अमेरिकी शेयर बाजार 1.5% तक लुढ़क गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-federal-reserve-did-not-reduce-repo-rate-oil-prices/article-147000"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/repo-rate.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया संकट से उपजी वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में आये भारी उछाल के बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बाजार की उम्मीद के विपरीत रेपो दरों में कोई कटौती नहीं की है। फेड की दो दिन चली बैठक के बाद बुधवार को जारी बयान में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन हाल के महीनों में नये रोजगार की रफ्तार सुस्त रही है और मुद्रास्फीति बढ़ी हुई है। साथ ही पश्चिम एशिया के घटनाक्रम के अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव में भी अनिश्चितता है।</p>
<p>अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने बताया कि समिति ने दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत के बीच स्थिर रखने का फैसला किया है। समिति के 12 में से 11 सदस्यों ने फैसले के पक्ष में वोट दिया जबकि स्टिफन माइरन एक-चौथाई प्रतिशत की कटौती के पक्ष में थे। बयान में कहा गया है कि फेड का लक्ष्य रोजगार को अधिकतम करना और महंगाई दर को दो प्रतिशत पर रखना है।</p>
<p>संवाददाताओं से बात करते हुए फेड के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा कि इस समय बेरोजगारी दर दीर्घावधि औसत के आसपास है और मुद्रास्फीति उससे एक प्रतिशत ऊपर है। उन्होंने कहा मुद्रास्फीति में जितनी कमी का अनुमान था उतनी देखने को नहीं मिली है। अनिश्चितताओं के बावजूद फेड के भविष्य के अनुमानों में इस साल चौथाई प्रतिशत कटौती की संभावना जतायी गयी है। हालांकि, महंगाई का अनुमान पहले की तुलना में बढ़ा दिया गया है।</p>
<p>रेपो दरों को स्थिर रखने का अमेरिकी केंद्रीय बैंक का फैसला शेयर बाजारों को रास नहीं आया। बाजार दरों में कटौती की उम्मीद लगाये बैठा था। फेड के फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार लगभग डेढ़ प्रतिशत टूट गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 11:14:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नाटो के भविष्य पर मंडराया संकट: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के लिए मांगी सहयोगी देशों से मदद  </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल करने हेतु चीन, जापान और ब्रिटेन से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने की मांग की है। उन्होंने सहयोग न करने पर नाटो के भविष्य को लेकर चेतावनी दी। ईरान ने वार्ता की पेशकश की है, लेकिन 20 जहाजों पर हमलों के बाद ऊर्जा संकट का खतरा गंभीर बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/crisis-looms-over-natos-future-us-president-trump-seeks-help/article-146711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंकाओं के बीच कहा है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सहयोगी देश मदद नहीं करते हैं तो नाटो के लिए भविष्य "बहुत खराब" हो सकता है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब तक ऑस्ट्रेलिया और जापान ने स्पष्ट किया है कि वे फिलहाल अपने जहाज भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं। ब्रिटेन ने कहा है कि वह विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि चीन ने संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि जो देश जलडमरूमध्य के सुरक्षित उपयोग को लेकर बातचीत करना चाहते हैं, उनके साथ तेहरान चर्चा के लिए तैयार है।</p>
<p>ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार पिछले तीन दिनों में कोई नई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन जलडमरूमध्य पर खतरा अभी भी "गंभीर" बना हुआ है। युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास कम से कम 20 जहाजों पर हमले हो चुके हैं।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, ईरान द्वारा इस प्रमुख समुद्री मार्ग को बंद किए जाने से विश्व के लगभग पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गयी है। इसी बीच, ट्रंप ने कहा है कि इस मुद्दे पर चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि महीने के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक से पहले वह यह जानना चाहते हैं कि चीन जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में सहयोग करेगा या नहीं।</p>
<p>उधर जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि जापान ने फिलहाल नौसैनिक जहाज भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया है और देश अपने कानूनी ढांचे के भीतर संभावित विकल्पों पर विचार कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने भी स्पष्ट किया है कि उसने इस मिशन में जहाज भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 18:43:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज संकट: अमेरिका की अपील के बावजूद जापान और ऑस्ट्रेलिया में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में गश्त को लेकर असमंजस बरकार </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा हेतु सहयोगियों से युद्धपोत भेजने की अपील की है। हालांकि, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने फिलहाल नौसैनिक बेड़े भेजने से इनकार कर दिया है। जापान अपने कानूनी दायरे की समीक्षा कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया केवल सैन्य विमान तैनात करेगा। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-americas-appeal-confusion-persists-in-japan-and-australia-regarding/article-146714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के दो प्रमुख सहयोगी देशों जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को संकेत दिया कि वे विवादित होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग में गश्त के लिए अपने नौसैनिक जहाज़ तैनात करने को शायद तैयार न हों। यह संकेत तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र के तेल पर निर्भर सात देशों से बातचीत कर रहा है और यह बातचीत इस संकरे लेकिन रणनीतिक समुद्री मार्ग में जहाज़ों की सुरक्षा में मदद पहुंचाने को लेकर हो रही है।</p>
<p>'एयर फ़ोर्स वन' में सवार होकर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने रविवार को कहा कि इस संकरे जलमार्ग से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा में मदद के लिए कई सरकारों से संपर्क किया गया है। हालांकि, उन्होंने उन देशों के नाम नहीं बताये। इससे पहले उन्होंने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य ऐसे देश जो इस कृत्रिम बाधा से प्रभावित हैं, वे इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में गश्त के लिए अपने जहाज़ भेजेंगे।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, "मैं अपील कर रहा हूं कि ये देश आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।" उन्होंने कहा कि उन्हें आपस में सहयोग करना चाहिए, क्योंकि उन्हें ऊर्जा इसी क्षेत्र से मिलती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जिन देशों से संपर्क किया गया है, उनमें से कई देश जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित गुज़रने की सुविधा प्रदान करने के लिए नौसैनिक जहाज़ तैनात करेंगे। यह जलडमरूमध्य एक अहम समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुज़रती है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बारे में बातचीत करते हुए संकेत दिया कि ईरान के साथ बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। उन्होंने कहा, "वे बातचीत करने के लिए बहुत ज़्यादा उत्सुक हैं जैसा कि उन्हें होना भी चाहिए लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे वह करने के लिए तैयार हैं जो उन्हें करना चाहिए।" उन्होंने कहा, "हम इस काम को पूरा करेंगे।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, फरवरी के अंत में शुरू हुई अमेरिका और इज़रायल तथा ईरान के बीच की जंग अब तक काफ़ी बढ़ गई है। इसके कारण इस संघर्ष ने टैंकरों की आवाजाही को बाधित किया है और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अस्थिरता पैदा कर दी है। ईरान ने ड्रोन, बारूदी सुरंगों आदि का इस्तेमाल करके इस मार्ग से होने वाली तेल की खेपों को रोकने का सहारा लिया है।</p>
<p>जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोमवार को कहा कि जापान ने इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाज़ भेजने का कोई फ़ैसला नहीं किया है। संसद में उन्होंने कहा कि सरकार अभी भी इस बात की जाँच कर रही है कि जापान के कानूनी दायरे के भीतर कौन से कदम उठाए जा सकते हैं और वह स्वतंत्र रूप से कौन सी कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा, "हमने सुरक्षा के लिए जहाज़ भेजने के बारे में अभी तक कोई फ़ैसला नहीं किया है। हम लगातार इस बात की जाँच कर रहे हैं कि जापान स्वतंत्र रूप से क्या कर सकता है और कानूनी दायरे के भीतर क्या किया जा सकता है।"</p>
<p>जापानी प्रधानमंत्री ने बताया कि अमेरिका ने इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा में मदद के लिए जापान से कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया है। जापान पश्चिमी एशिया से होने वाले ऊर्जा आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। उसके लगभग 70 प्रतिशत आयातित ऊर्जा संसाधन इसी क्षेत्र से आते हैं। इस वजह से, वहाँ के समुद्री मार्गों में स्थिरता बनाए रखना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है।</p>
<p>इस बीच, भारत-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के एक और अहम सहयोगी ऑस्ट्रेलिया ने संकेत दिया है कि इस क्षेत्र में उसकी भूमिका सीमित ही रहेगी। एक रेडियो इंटरव्यू में अवसंचना एवं परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने बताया कि देश रक्षा से जुड़ी गतिविधियों में मदद के लिए संयुक्त अरब अमीरात में एक सैन्य विमान तैनात करने की योजना बना रहा है।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि ऑस्ट्रेलिया होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना के जहाज़ नहीं भेजेगा। उनके मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया को जहाज़ भेजने के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है और वह इस जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही बहाल करने के मकसद से चलाए जा रहे अभियान में शामिल नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार की फिलहाल इस इलाके में नौसेना बल भेजने की कोई योजना नहीं है।</p>
<p>इससे पहले, ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामले और व्यापार विभाग ने अपने 'स्मार्टट्रैवलर' प्लेटफॉर्म के ज़रिए इस क्षेत्र के कई देशों के लिए यात्रा संबंधी सलाह पहले ही जारी कर दी थी। विभाग ने शनिवार को अपनी सलाह का दायरा बढ़ाते हुए ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों से आग्रह किया कि वे उन देशों से गुज़रने से भी बचें जिसमें देश में प्रवेश किए बिना सिर्फ़ एयरपोर्ट टर्मिनल के अंदर रुकना भी शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 16:58:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ा: सेंसेक्स, निफ्टी में दो प्रतिशत तक की गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजार धराशायी हो गया। सेंसेक्स 1470 अंक और निफ्टी 488 अंक गिरकर बंद हुए। निवेशकों ने मुद्रास्फीति और मार्जिन दबाव के चलते चौतरफा बिकवाली की। रिलायंस और एलएंडटी जैसे दिग्गजों में भारी गिरावट रही, जबकि FII की निकासी ने बाजार का सेंटिमेंट बिगाड़ दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/selling-pressure-increased-in-stock-markets-sensex-and-nifty-fell/article-146399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/share-market-fall-down.png" alt=""></a><br /><p>मु्ंबई। ईरान युद्ध के चलते वैश्विक बाजार में गहराते संकट के बीच भारत के शेयर बाजारों में तेज गिरावट का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा और प्रमुख सूचकांकों में दो प्रतिशत या उससे अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गयी। पश्चिम एशिया की स्थिति से ईंधन और मुद्रास्फीति को लेकर बढ़ती चिताओं के चलते आज स्थानीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली दिखी। विश्लेषकों के अनुसार मार्जिन मनी का दबाव बढ़ने से निवेशकों को अपने अल्पकालिक दबाव से निपटने के लिए बिकवाली करनी पड़ रही है।</p>
<p>इन सबके सम्मिलित प्रभाव से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 प्रमुख शेयरों वाला निफ्टी-50 कल की तुलना में 488.05 अंक यानी 2.06 प्रतिशत गिर कर 23151.10 अंक पर बंद हुआ। बीएसई30 सेंसेक्स में 1470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी और यह 74563.92 पर बंद हुआ।</p>
<p>कारोबार के दौरान बीएसई30 शुरू में ही बड़ी गिरावट के साथ 75,444.22 पर खुलने के बाद सुधर कर 75,576.20 तक गया लेकिन लेकिन यह तेजी टिकी नहीं और लगातार गिरावट के बीच एक समय दिन के न्यूनतम 74,454.60 पर पहुंचने के बाद अंत में 74,563.92 पर बंद हुआ। कल सेंसेक्स करीब एक प्रतिशत गिरावट के साथ 76,034.42 पर बंद हुआ था।</p>
<p>बीएसई में आज 30 में से 29 शेयरों में घाटा हुआ। केवल हिंदुस्तान लीवर (1.18 प्रतिशत) और भारती एयरटेल (0.33 प्रतिशत)- ये दो शेयर ही फायदे में दिखे। एल एंड टी में सबसे अधिक (7.52 प्रतिशत) की गिरावट रही। एसबीआई, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति, बीईएल, में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही। इंडिगो, कोटक बैंक, इटर्नल, एचसीएल टेक, महिंद्रा एंड महिंद्रा तथा एक्सिस बैंक को भी दो प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ।</p>
<p>निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 2.04 प्रतिशत, निफ्टी बैंक 2.44 प्रतिशत, निफ्टी 100 2.15 , निफ्टी मिड कैप 100 में 2.65 प्रतिशत तथा स्माल कैप 100 सूचकांक में 2.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। बीएसई में आज 941 शेयर (21.22 प्रतिशत) लाभ में 3348 शेयर (75.51 प्रतिशत) घाटे में और 145 (3.27 प्रतिशत ) शेयरों के भाव स्थिर रहे।</p>
<p>जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, " बाज़ार में देखी गई तेज़ गिरावट कई कारणों के एक साथ आने से हुई है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने व्यापक आर्थिक झटके पैदा किए हैं, वहीं निवेशकों को मार्जिन से जुड़े तकनीकी दबावों के कारण अल्पकालिक पोज़िशन को निपटाना करना पड़ा। कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं, जिससे महंगाई, कॉरपोरेट मार्जिन और रुपये की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली, क्योंकि आपूर्ति संबंधी बाधाएं और इनपुट लागत में वृद्धि से कारोबार और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है। बढ़ती अस्थिरता ने शेयर बाजार में मुनाफे के लिए ट्रेडिग करने वालों के मनोबल को कमजोर किया, जिसके चलते लगातार बने भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच वे सप्ताहांत में अपनी पोज़िशन लेकर जाने से बचते दिखाई दिए। श्री नायर ने कहा, ''घरेलू संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों की ओर से खरीदारी का समर्थन नहीं मिलने तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार निकासी ने बाज़ार में गिरावट को और तेज कर दिया।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 17:44:52 +0530</pubDate>
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