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                <title>International Law - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>लेबनान में हालात तनावपूर्ण : इजरायली हमले में एक पत्रकार सहित पांच लोगों की मौत, बचाव औरा राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण लेबनान के अत-तिरी गांव में इजरायली हवाई हमलों में महिला पत्रकार अमल खलील और चार अन्य की मौत हो गई। लेबनान के प्रधानमंत्री ने पत्रकारों और राहत दलों को निशाना बनाने को 'युद्ध अपराध' करार दिया है। हिज्बुल्ला से जुड़े ठिकानों पर हमले के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानकों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/situation-tense-in-lebanon-five-people-including-a-journalist-killed/article-151431"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/एक-पत्रकार.png" alt=""></a><br /><p>बेरूत। लेबनान के दक्षिणी क्षेत्र में इजरायल के हमलों में एक पत्रकार सहित पांच लोगों की मौत हो गयी है। राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, पहला हमला दक्षिण लेबनान के अत-तिरी गांव में एक कार पर किया गया, जिसमें सवार दो लोगों की मौत हो गयी। इजरायली सेना ने कहा कि उसने दक्षिण लेबनान में दो वाहनों को निशाना बनाया, जो हिज्बुल्ला से जुड़े एक सैन्य ढांचे से निकले थे। इसके बाद उसी गांव में एक इमारत पर हुए हवाई हमले में एक महिला पत्रकार मलबे में दब गयी। स्थानीय समाचार संस्था में कार्यरत पत्रकार अमल खलील को बाद में मृत पाया गया, जिसकी पुष्टि उनके संस्थान ने की।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, खलील और उनकी सहकर्मी ज़ैनब फराज पहले हमले के स्थल पर कवरेज के लिए पहुंची थीं। कई घंटों तक राहतकर्मी और रेड क्रॉस की टीमें वहां पहुंचने की कोशिश करती रहीं, लेकिन इजरायल के लगातार हमलों के कारण उन्हें बाधाओं का सामना करना पड़ा। ज़ैनब फराज को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी शल्य चिकित्सा की आवश्यकता बतायी गयी है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पत्रकारों के शरण लेने के बाद जिस इमारत में वे मौजूद थे, उसे निशाना बनाया गया।</p>
<p>इस बीच, लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इन हमलों को युद्ध अपराध करार देते हुए कहा कि पत्रकारों को निशाना बनाना और राहत दलों को बाधित करना अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है। सलाम ने एक्स पर लिखा, "पत्रकारों को निशाना बनाना, बचाव टीमों को उन तक पहुंचने से रोकना, और फिर उन टीमों के पहुंचने के बाद उन्हें दोबारा निशाना बनाना, ये सभी 'युद्ध अपराध' की श्रेणी में आते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:28:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए ईरानी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की अपील को किया खारिज, होर्मुज़ जलड़मरूमध्य से ज़हाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए पाखंड बताया</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर यूरोपीय संघ की 'टोल-फ्री' आवागमन की मांग को "पाखंड" बताते हुए खारिज कर दिया है। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून ईरान को सैन्य आक्रामकता रोकने से नहीं रोकता। अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में आईआरजीसी ने शनिवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-ministry-rejects-eus-appeal-to-comply-with-international/article-150997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए यूरोपीय संघ की अपील को खारिज करते हुए इसे "चरम पाखंड" बताया। बगाई यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास के 17 अप्रैल के पोस्ट पर टिप्पणी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के लिए बिना शुल्क और टोल मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। कल्लास ने अपने पोस्ट में कहा था कि "अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार," होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन बिना शुल्क और टोल मुक्त होना चाहिए।</p>
<p>बगाई ने कल्लास की पोस्ट के जवाब में ‘एक्स’ पर कहा, “अरे, वो ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’?! वही कानून जिसका हवाला देकर यूरोपीय संघ दूसरों को उपदेश देता है, जबकि चुपचाप अमेरिका-इजरायल के आक्रामक युद्ध को हरी झंडी देता है और ईरानियों पर हो रहे अत्याचारों को अनदेखा करता है?! उपदेश देना बंद करो; यूरोप की अपने उपदेशों पर अमल न करने की आदत ने उसके ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’ के वादों को पाखंड की पराकाष्ठा में बदल दिया है।” राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का कोई भी प्रावधान ईरान को, एक तटीय राज्य होने के नाते, “होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रमण के लिए होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने” से नहीं रोकता है।</p>
<p>ईरानी आईआरजीसी नौसेना ने घोषणा की कि उसने शनिवार शाम से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, और यह तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह से हटा नहीं ली जाती। अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है।</p>
<p>वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:34:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा समर्थन : 18 देशों ने की तत्काल युद्धविराम की अपील, लेबनान को कूटनीतिक वार्ताओं का हिस्सा बनाना अनिवार्य </title>
                                    <description><![CDATA[लेबनान में शांति के लिए 18 देशों का महा-अभियान शुरू हुआ है। ब्रिटेन और फ्रांस सहित इन देशों ने तत्काल युद्धविराम और मानवीय संकट रोकने की अपील की है। इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने हेतु उन्होंने संप्रभुता का सम्मान करने और कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से स्थायी समाधान निकालने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/international-support-increased-to-end-the-west-asia-crisis-18/article-150559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/midil-esat.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। लेबनान में जारी जंग को रोकने के लिए कनाडा-ब्रिटेन समेत 10 देशों की शुरू की गयी शांति पहल अब बड़े वैश्विक अभियान में बदलती नजर आ रही है। मंगलवार को जारी इस साझा बयान का समर्थन करते हुए यूरोप के आठ अन्य देश भी इसमें शामिल हो गये हैं। इससे अब कुल 18 देशों ने एक सुर में लेबनान में तत्काल युद्धविराम की अपील की है। इन देशों ने बढ़ते मानवीय संकट और विस्थापन पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए लेबनान को कूटनीतिक वार्ताओं का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।</p>
<p>बयान में मार्च में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के तीन शांति रक्षकों की हत्या की भी निंदा की गयी है। संयुक्त राष्ट्र ने पिछले हफ्ते तीन इंडोनेशियाई शांति रक्षकों की मौत की शुरुआती जांच रिपोर्ट जारी की थी। इसमें पाया गया कि ये दो हमले संभवतः इजरायली टैंक के गोले और एक आईईडी के कारण हुए थे। मुमकिन है कि वह हिजबुल्ला ने लगाया हो। संयुक्त बयान में कहा गया, "हम ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, साइप्रस, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, ग्रीस, आइसलैंड, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम के विदेश मंत्री, क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयासों में लेबनान को शामिल करने का आह्वान करते हैं और सभी पक्षों से एक स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में काम करने का आग्रह करते हैं।"</p>
<p>लेबनान में युद्ध जारी रहने से मौजूदा क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों को खतरा पैदा हो गया है, जिसका सभी पक्षों को पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए। इन देशों ने इजरायल के साथ सीधी बातचीत शुरू करने की लेबनान की पहल और अमेरिका की मध्यस्थता में वार्ता शुरू करने की इजरायल की स्वीकृति का स्वागत किया है। बयान में कहा गया है, "हम दोनों पक्षों से इस अवसर का लाभ उठाने का आह्वान करते हैं। सीधी बातचीत लेबनान, इजरायल और इस पूरे क्षेत्र के लिए स्थायी सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। हम उनका समर्थन करने के लिए तैयार हैं। इसलिए हम सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे तनाव कम करें और अमेरिका व ईरान के बीच युद्धविराम से मिले इस अवसर का फायदा उठाएं।"</p>
<p>इसमें कहा गया है "हम इजरायल के खिलाफ हिजबुल्ला के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। हम आठ अप्रैल को लेबनान पर इजरायल की ओर से किये गये बड़े हमलों की भी सख्त निंदा करते हैं। इसमें लेबनानी अधिकारियों की साझा की गयी ताजा जानकारियों के अनुसार, 350 से अधिक लोग मारे गये और 1,000 से अधिक घायल हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की रक्षा की जानी चाहिए।"</p>
<p>इन देशों ने 'लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल' के खिलाफ हमलों की भी कड़े शब्दों में निंदा की और दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षकों की सुरक्षा और सलामती हर समय सुनिश्चित की जानी चाहिए। नेतृत्व समूह ने लेबनानी जनता और वहां के अधिकारियों के प्रति अपनी पूरी एकजुटता और अटूट समर्थन व्यक्त किया। इसके साथ ही, लेबनान सरकार के साथ समन्वय कर 10 लाख से अधिक विस्थापित लोगों को आपातकालीन सहायता प्रदान करने का संकल्प लिया।</p>
<p>इन देशों ने लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 (2006) को पूरी तरह से लागू करने के महत्व की पुष्टि की। वे अपने क्षेत्र पर पूर्ण संप्रभुता का प्रयोग करने में लेबनान का समर्थन करना जारी रखेंगे।<br />गौरतलब है कि लेबनान में शांति बहाली के लिए यह पहली कोशिश नहीं है। इससे पहले मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में यूरोपीय संघ (ईयू) के नेतृत्व में बेल्जियम, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने भी इसी तरह का आह्वान किया था।</p>
<p>इसके अलावा, सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी अमेरिका और फ्रांस ने एक अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था। इसे तब सऊदी अरब और कतर जैसे क्षेत्रीय देशों का भी साथ मिला था। हालांकि, मंगलवार का यह ताजा कदम इसलिए खास है, क्योंकि इसकी शुरुआत भले ही 10 देशों के छोटे समूह ने की थी, लेकिन देखते ही देखते इसमें यूरोप के कई प्रभावशाली राष्ट्र जुड़ते गये, जो इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती एकजुटता को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:28:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शी जिनपिंग ने रखा चार-सूत्री योजना का प्रस्ताव : दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का करना चाहिए सम्मान, विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए चार-सूत्री सुरक्षा प्रस्ताव पेश किया है। अबू धाबी के युवराज के साथ बैठक में उन्होंने संप्रभुता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर जोर दिया। अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने और तेल की कीमतों में उछाल के बीच चीन अब इस संकट में मध्यस्थ बनने की तैयारी में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-the-increasing-tension-in-west-asia-xi-jinping-proposed/article-150367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/shi-jinpin.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका में दिलचस्पी दिखाते हुए कहा है कि उन्होंने क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए यहां अबू धाबी के युवराज ज़ायेद अल नहयान के साथ बैठक में चार-सूत्री प्रस्ताव रखा है। शी जिनपिंग ने शांति पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के लिए एक साझा, विस्तृत, सहयोगपूर्ण और टिकाऊ सुरक्षा व्यवस्था बनायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का भी पूरी तरह सम्मान होना चाहिए। साथ ही नागरिकों एवं अवसंरचनाओं की भी सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।</p>
<p>शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर जोर देते हुए सभी पक्षों से साथ आकर क्षेत्रीय विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने अनुरोध किया। चीन का कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम चल रहा है। इस दौरान दोनों देशों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में बैठकर शांति वार्ता भी की। यह शांति वार्ता 21 घंटे तक चली लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला, जिससे युद्धविराम पर संकट के बादल मंडराने लगे। इस बीच, अमेरिका ने राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान के बंदरगाहों को बाधित कर दिया है, जिससे तेल के दामों में उछाल देखने को मिला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी नाकेबंदी पर ईरान का पलटवार : राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार ; इरावानी ने इसे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का &quot;घोर उल्लंघन&quot; बताया </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताते हुए सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और पड़ोसी देशों से भारी हर्जाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/irans-counterattack-on-us-blockade-is-a-gross-violation-of/article-150373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-war.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। ईरान ने अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की कथित नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का "घोर उल्लंघन" बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे पत्र में इस कदम को "अवैध आक्रामक कार्रवाई" करार दिया, जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।</p>
<p>इरावानी ने कहा कि 12 अप्रैल को यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा घोषित यह नाकेबंदी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "आक्रामकता का स्पष्ट उदाहरण" है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात को रोकने का प्रयास है, जिससे न केवल ईरान के संप्रभु अधिकारों में हस्तक्षेप हो रहा है, बल्कि तीसरे देशों और वैध समुद्री व्यापार के अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है। ईरानी दूत ने चेतावनी दी कि तेहरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए "सभी आवश्यक और उचित कदम" उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।</p>
<p>ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप कर नाकेबंदी की निंदा करने और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रोकने की अपील की है। इस बीच, अमेरिकी नौसेना ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिसमें यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित कई युद्धपोत और 11 विध्वंसक तैनात हैं। हालांकि, ऑपरेशन में शामिल जहाजों की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सप्ताहांत में हुई वार्ता विफल रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को मंजूरी दी।</p>
<p>इसके अलावा, ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन से भी मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अमेरिका-इज़राइल अभियान में भूमिका निभाई और कुछ मामलों में ईरान के भीतर नागरिक ठिकानों पर "अवैध हमलों" में भी शामिल रहे। इरावानी ने पत्र में श्री एंटोनियो गुटेरेस और बहरीन (जो अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाल रहा है) को संबोधित करते हुए कहा कि बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन को ईरान को "पूर्ण क्षतिपूर्ति" देनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन देशों को अपने "अंतरराष्ट्रीय रूप से अवैध कृत्यों" के कारण हुए सभी भौतिक और नैतिक नुकसान की भरपाई करनी होगी। ईरान के अनुसार, इन कार्रवाइयों से उसे भौतिक और नैतिक दोनों प्रकार का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई संबंधित देशों को करनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 15:34:26 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम एशिया तनाव : सुरक्षा परिषद में पश्चिमी एशिया पर रूस-चीन के प्रस्ताव पर होगी चर्चा, रूसी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में तनाव घटाने के लिए रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक नया संकल्प प्रस्तावित किया है। इस मसौदे में समुद्री सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान पर जोर दिया गया है। मतदान की तारीख जमीनी हालात के आधार पर तय होगी। दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पुराने प्रस्तावों का विरोध किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-tension-russia-china-proposal-on-west-asia-will-be/article-150203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/unsc.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए रूस और चीन की ओर से प्रस्तावित संकल्प पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में मतदान की तारीख वहां की जमीनी स्थिति के आधार पर तय की जाएगी। रूस के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। इससे पहले, रूस और चीन ने प्रस्ताव दिया था कि सुरक्षा परिषद पश्चिमी एशिया की वर्तमान स्थिति पर एक वैकल्पिक मसौदा प्रस्ताव पर विचार करे, जिसमें समुद्री सुरक्षा के पहलुओं को भी शामिल किया जाये।</p>
<p>रूस के विदेश मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय संगठन विभाग के निदेशक किरिल लोग्विनोव ने स्पूतनिक से कहा, “ बैठक में हमने अपने चीन के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में एक वैकल्पिक मसौदा प्रस्ताव की घोषणा की है। इस पर मतदान की तिथि जमीनी हालात को देखते हुए निर्धारित की जाएगी।” रूस के राजनयिक ने उम्मीद जतायी कि सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य भी चीन और रूस की इस पहल का समर्थन करेंगे।</p>
<p>गौरतलब है कि सात अप्रैल को रूस और चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव पर वीटो कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने स्पष्ट किया था कि रूस ऐसे किसी भी मसौदे का समर्थन नहीं कर सकता, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:13:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान वॉर पर एंटोनियो गुटेरेस का साफ संदेश : मौत और विनाश का यह सिलसिला अब रुकना चाहिए; युद्ध जितना खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी बढ़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आगाह किया है कि पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका ईरान युद्ध पूरी दुनिया को तबाही की ओर धकेल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से खाद्य और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। गुटेरेस ने तत्काल युद्धविराम और कूटनीतिक संवाद के जरिए शांति बहाली की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-clear-message-on-iran-war-this-cycle-of/article-148999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/un-general-secretary-antonio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका ईरान युद्ध पूरे क्षेत्र को एक व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रहा है, जिससे वैश्विक आर्थिक और मानवीय संकट पैदा हो सकता है। गुटेरेस ने गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा, "यह युद्ध जितने दिन खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी ही बढ़ेगी। तबाही का दायरा, अंधाधुंध हमले और नागरिकों के साथ-साथ नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हम एक व्यापक युद्ध के मुहाने पर हैं जो पूरे पश्चिमी एशिया को अपनी चपेट में ले लेगा और इसका दुनिया भर में नाटकीय असर होगा।"</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसके वैश्विक आर्थिक और मानवीय परिणामों पर जोर देते हुए फिलीपींस से लेकर श्रीलंका और मोजाम्बिक तक के कमजोर समुदायों पर खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी कि जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में बाधा आने से दुनिया के सबसे गरीब लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p>गुटेरेस ने तत्काल कूटनीतिक प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा, "विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। मौत और विनाश का यह सिलसिला रुकना चाहिए। शांतिपूर्ण रास्ता निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। उन्हें सफल होने के लिए पर्याप्त जगह और समर्थन मिलना चाहिए, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून में मजबूती से निहित हो।" महासचिव ने सभी पक्षों के सामने स्पष्ट मांगें रखीं। उन्होंने अमेरिका और इजरायल से युद्ध को तुरंत रोकने का आग्रह किया, जो भारी मानवीय पीड़ा और आर्थिक संकट का कारण बन रहा है। वहीं ईरान से उन्होंने पड़ोसी देशों पर हमले बंद करने की मांग की। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी देशों को संप्रभुता, नागरिक सुरक्षा, परमाणु केंद्रों और नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।</p>
<p>गुटेरेस ने चल रहे शांति प्रयासों में मदद के लिए अपने व्यक्तिगत दूत ज्यां अरनॉल्ट को क्षेत्र में भेजने की घोषणा की। उन्होंने कहा, "संघर्ष अपने आप खत्म नहीं होते। वे तब खत्म होते हैं जब नेता विनाश के बजाय संवाद को चुनते हैं। वह विकल्प अभी भी मौजूद है और उसे अभी चुना जाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 16:36:16 +0530</pubDate>
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                <title>वॉर या नो वॉर...क्या खत्म होगी जंग? ट्रंप के संबोधन से पहले तेज हुई कूटनीतिक हलचल, 2 अप्रैल को करेंगे राष्ट्र को संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें ईरान संघर्ष समाप्ति की बड़ी घोषणा संभव है। चीन और पाकिस्तान ने शांति के लिए पांच सूत्रीय फार्मूला पेश किया है, जिसमें तत्काल युद्धविराम और समुद्री सुरक्षा पर जोर दिया गया है। तेहरान ने भी बातचीत के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में शांति की उम्मीद जागी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/war-or-no-war-is-us-president-trump-going-to/article-148764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दुनिया की नजरें अब डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित संबोधन पर टिकी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें जारी सैन्य टकराव को समाप्त करने से जुड़ी अहम घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है। ट्रंप के द्वारा दिए गए हाल के बयानों से संकेत मिल रहा है कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अब उसके लिए निर्णायक मुद्दा नहीं रही।</p>
<p>इसी बीच कूटनीतिक मोर्चे पर चीन और पाकिस्तान ने 31 मार्च को बीजिंग में साझा पहल पेश कर शांति की नई राह सुझाई है। इस पहल को इशाक डार और वांग यी ने आगे बढ़ाया, जिसमें पांच सूत्रों के जरिए तत्काल युद्धविराम और संवाद की बहाली पर जोर दिया गया है। प्रस्ताव में नागरिक ढांचे पर हमले रोकने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समाधान तलाशने की बात प्रमुख है।</p>
<p>हालांकि ईरान ने पाकिस्तान की प्रत्यक्ष मध्यस्थता पर आपत्ति जताई है, लेकिन क्षेत्र में शांति स्थापित करने की अपील का समर्थन किया है। तेहरान का यह रुख संकेत देता है कि वह बातचीत के पक्ष में है, पर मध्यस्थ की भूमिका को लेकर सतर्क रणनीति अपना रहा है। अब वैश्विक समुदाय की निगाहें ट्रंप के संबोधन पर टिकी हैं—क्या वे चीन-पाकिस्तान की पहल को स्वीकार करेंगे या अपनी शर्तों के साथ इस संघर्ष के अंत की घोषणा करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:12:02 +0530</pubDate>
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                <title>इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर बरपाया कहर: फास्फोरस युक्त गोला-बारूद से किया हमला; एक शख्स की मौत, 11 अन्य घायल </title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी लेबनान की आठ बस्तियों पर इजरायली तोपखाने द्वारा प्रतिबंधित फास्फोरस गोला-बारूद के इस्तेमाल से तनाव चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के आरोपों के बीच, हिजबुल्लाह की जवाबी गोलाबारी में एक इजरायली की मौत हो गई। नवंबर 2024 के युद्धविराम के बावजूद दोनों देशों के बीच संघर्ष और संप्रभुता का उल्लंघन जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/israel-wreaks-havoc-on-southern-lebanon-attacks-with-phosphorus-laden/article-148074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/lebnan.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। इजरायली तोपखाने ने दक्षिणी लेबनान की आठ बस्तियों पर फास्फोरस युक्त गोला-बारूद से हमला किया। यह जानकारी लेबनानी राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (एनएएनए) ने शुक्रवार को दी। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध क्षेत्रों में फास्फोरस युक्त गोला-बारूद का उपयोग निषिद्ध है। संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस के मानकों के अनुसार, नागरिकों या आबादी वाले क्षेत्रों के खिलाफ ज्वलनशील हथियारों का उपयोग प्रतिबंधित है। यह विशिष्ट पारंपरिक हथियारों पर सम्मेलन में निहित है, जो ऐसे हमलों पर प्रतिबंध लगाता है जिनसे अत्यधिक पीड़ा होने की आशंका हो। फॉस्फोरस का उपयोग गंभीर जलन और आग का कारण बन सकता है, इसलिए नागरिकों के खिलाफ इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन और संभावित युद्ध अपराध माना जाता है।</p>
<p>इजरायल की राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा यानी मैगन डेविड एडोम (एमडीए) ने कहा कि लेबनानी हिजबुल्लाह आंदोलन की गोलाबारी के परिणामस्वरूप उत्तरी इजरायल में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। नवंबर 2024 के युद्धविराम समझौते के बावजूद, लेबनान ने बार-बार इजरायल पर अपनी संप्रभुता के उल्लंघन करने का आरोप लगाता रहा है। इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के पांच रणनीतिक बिंदुओं पर मौजूद है, जिनमें ग़जार गांव का उत्तरी भाग भी शामिल है, जिसे लेबनानी अधिकारी निरंतर कब्ज़ा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का उल्लंघन मानते हैं।</p>
<p>इजरायली सेना का दावा है कि वह हमलों में हिज़्बुल्लाह के सैन्य संरचनाओं को निशाना बना रहे हैं। इजरायल ने बार-बार इस बात पर बल दिया है कि वह हिज़्बुल्लाह के सैन्य विंग के नेताओं को खत्म करने और शिया आंदोलन से उत्पन्न खतरे को समाप्त करने के लिए लेबनान पर हमले जारी रखेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 16:12:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>एंटोनियो गुटेरेस ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर जताई चिंता: तत्काल युद्ध रोकने का किया आग्रह, युद्ध से वैश्विक बाजार अस्त-व्यस्त</title>
                                    <description><![CDATA[यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पश्चिम एशिया संघर्ष को "बेकाबू" बताते हुए तत्काल युद्धविराम की अपील की है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से तेल, गैस और उर्वरक आपूर्ति बाधित होने पर गहरी चिंता जताई। शांति बहाली हेतु जीन अर्नोल्ट को निजी दूत नियुक्त किया गया है ताकि कूटनीति के जरिए वैश्विक आर्थिक आपदा को रोका जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-expressed-concern-over-the-west-asia-conflict-and/article-147992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/antonio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध बेकाबू हो गया है, जिससे युद्ध का विस्तार हो जाने से नागरिकों की पीड़ा और वैश्विक आर्थिक संकट गहरा गया है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए गुटेरेस ने कहा कि युद्ध शुरू होने के तीन सप्ताह से अधिक समय बाद, लड़ाई सबसे खराब आशंकाओं से भी आगे निकल गयी है। गुटेरेस ने कहा कि दुनिया एक व्यापक युद्ध के कगार पर खड़ी है। उन्होंने संबधित पक्षों से युद्ध को तत्काल रोकने और कूटनीति एवं अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने का आह्वान किया।</p>
<p>महासचिव ने कहा कि उन्होंने जीन अर्नोल्ट को अपना निजी दूत नियुक्त किया है, ताकि जमीनी स्तर पर दोनों पक्षों के साथ सीधे तौर पर जुड़ने और चल रही शांति पहलों का समर्थन करने सहित मध्यस्थता प्रयासों में तेजी लायी जा सके। उन्होंने हताहतों की बढ़ती संख्या और आर्थिक दुष्परिणामों का हवाला देते हुए अमेरिका और इज़रायल से युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने ईरान से भी युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल न होने वाले पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का आह्वान किया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ऐसे कृत्यों की निंदा की है।</p>
<p>महासचिव ने प्रमुख नौवहन मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों पर चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि लंबे समय तक बंद रहने से विश्व भर में कृषि के लिए महत्वपूर्ण समय में तेल, गैस एवं उर्वरकों का प्रवाह बाधित हो सकता है। गुटेरेस ने लेबनान की स्थिति की भी चर्चा की, जहां उन्होंने हाल ही में दौरा किया था और हिजबुल्लाह से इजरायल पर हमले रोकने का आग्रह किया। उन्होंने इजरायल से उन सैन्य अभियानों को रोकने का आह्वान किया, जो नागरिकों को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाजा मॉडल को लेबनान में नहीं दोहराया जाना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस युद्ध से वैश्विक बाजार अस्त-व्यस्त हो गये हैं, जबकि मानवीय सहायता अभियान गंभीर बाधाओं का सामना कर रहे हैं और इस संकट का सबसे अधिक खामियाजा सबसे गरीब एवं सबसे कमजोर लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सवालों का जवाब देते हुए गुटेरेस ने कहा कि आगे तनाव बढ़ने के संकेतों के बावजूद, जिसमें कथित सैन्य तैनाती और अमेरिका और ईरान के बीच अस्वीकृत प्रस्ताव शामिल हैं, कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यवहार्य तरीका है। उन्होंने कहा, “ मेरा संदेश यह है कि कूटनीति को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हमें इस आपदा से निकलने का रास्ता चाहिए और शांति ही एकमात्र रास्ता है। ”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 17:06:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूएन रिपोर्ट में खौफनाक सच हुआ बेनकाब: इजरायली जेलें फिलीस्तीनियों के लिए सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला, अब तक 100 से ज्यादा कैदियों की हिरासत में मौत </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने इजरायली हिरासत केंद्रों को 'बर्बरता की प्रयोगशाला' करार दिया है। अक्टूबर 2023 से 1,500 बच्चों सहित 18,500 फिलिस्तीनियों को कैद किया गया है। रिपोर्ट में यौन शोषण, भुखमरी और अमानवीय यातनाओं का खुलासा करते हुए इसे 'राजकीय नीति' और नरसंहार का हथियार बताया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-dreadful-truth-has-been-exposed-in-the-un-report/article-147740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jail.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने इजरायली हिरासत केंद्रों के भीतर छिपे उस खौफनाक सच को बेनकाब कर दिया है, जिसे अब 'राज्य के सिद्धांत' के रूप में अपनाया जा चुका है। अक्टूबर 2023 से अब तक जुल्म की यह शृंखला 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को अपनी चपेट में ले चुकी है, जिनमें 1,500 से ज्यादा मासूम बच्चे शामिल हैं।</p>
<p>ये आंकड़े महज संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों जिंदगियों की दास्तान हैं, जिन्हें बिना किसी आरोप या मुकदमे के सलाखों के पीछे धकेल दिया गया है। करीब 100 कैदियों की हिरासत में हुई मौतें इस व्यवस्था की भयावहता की गवाही देती हैं। इजरायली जेलें अब सुधार गृह नहीं, बल्कि 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' बन चुकी हैं। जहां कैदियों के साथ ऐसी अमानवीय और घिनौनी हरकतें की जा रही हैं, जो इंसानियत को शर्मसार कर दें। लोहे की छड़ों और चाकुओं से यौन शोषण, हड्डियों और दांतों को बेरहमी से तोड़ना, भूखा रखना और कैदियों पर कुत्तों से हमला करवाकर उन पर पेशाब करना— ये वे अकल्पनीय प्रताड़नाएं हैं, जिनका उद्देश्य फिलिस्तीनियों को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक तौर पर भी पूरी तरह तोड़ देना है। यह संगठित बर्बरता अब अंधेरे में नहीं, बल्कि सत्ता के ऊंचे गलियारों की शह पर खुलेआम अंजाम दी जा रही है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि दशकों से मिल रही छूट और राजनीतिक संरक्षण के चलते, फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की व्यवस्थित प्रताड़ना अब कब्जे वाले फिलीस्तीनी क्षेत्र में जारी 'नरसंहार' का परिभाषित हथियार बन गयी है। 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने मानवाधिकार परिषद को सौंपी अपनी नयी रिपोर्ट में कहा, "नरसंहार की शुरुआत के बाद से, इजरायली जेल प्रणाली 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' में बदल गयी है।" </p>
<p>अल्बानीज के अनुसार, "जो कभी अंधेरे और साये में किया जाता था, वह अब खुलेआम हो रहा है। संगठित अपमान, पीड़ा और अधोगति का यह शासन अब उच्चतम राजनीतिक स्तरों से स्वीकृत है।" यानी, जो दर्द पहले छिपाया जाता था, अब उसे सत्ता की शह पर सरेआम अंजाम दिया जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर सहित वरिष्ठ अधिकारियों की लागू की गयी नीतियों ने प्रताड़ना, सामूहिक दंड और हिरासत की अमानवीय स्थितियों को एक संस्थानिक रूप दे दिया है। यह फिलिस्तीनियों को इंसान न समझने की एक सोची-समझी नीति है।</p>
<p>विशेष दूत ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों के इन जघन्य उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जांच और न्याय का सामना करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध के समय भी इन अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता और अपराधियों को 'अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय' (आईसीसी) के कटघरे में खड़ा होना होगा। अल्बानीज की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अक्टूबर 2023 से अब तक पूरे कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें कम से कम 1,500 बच्चे शामिल हैं। हजारों लोग बिना किसी आरोप या मुकदमे के कैद हैं, कई 'जबरन गायब' कर दिये गये हैं और लगभग 100 कैदियों की हिरासत में मौत हो चुकी है।</p>
<p>कैदियों के साथ ऐसी दरिंदगी की गयी है जो कल्पना से परे है। रिपोर्ट में बोतलों, लोहे की छड़ों और चाकुओं से बलात्कार, भुखमरी, हड्डियां और दांत तोड़ना, शरीर को जलाना, थूकना और कुत्तों से हमला करवाना व उन पर पेशाब करवाने जैसी भयानक प्रताड़नाओं का जिक्र है।<br />वर्ष 2025 में प्रताड़ना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समिति ने भी 'संगठित और व्यापक प्रताड़ना की एक वास्तविक 'राज्य की नीति' की निंदा की थी, जो 7 अक्टूबर 2023 के बाद से बेहद गंभीर हो गयी है।</p>
<p>इस बर्बरता को दुनियाभर के राजनेताओं से बचाव मिल रहा है। कानूनी संस्थाएं इसे तर्कसंगत बता रही हैं। मीडिया इसे साफ-सुथरा कर पेश कर रहा है। दुनिया की वे सरकारें इसे सहन कर रही हैं, जो इजरायल को हथियार और सुरक्षा देना जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रताड़ना केवल जेल की दीवारों तक सीमित नहीं है। निरंतर बमबारी, जबरन विस्थापन, भुखमरी, घरों-अस्पतालों की तबाही और सैन्य व बसने वाले आतंकी समूहों के खौफ ने पूरे फिलिस्तीनी क्षेत्र को एक 'प्रताड़नाकारी माहौल' में बदल दिया है।</p>
<p>अल्बानीज ने भावुक होकर कहा, "गाज़ा, वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुसलेम में फिलीस्तीनी पीड़ा की अटूट शृंखला से गुजर रहे हैं। वहां कोई शरण नहीं है, कोई सुरक्षित कोना नहीं है, जीने के लिए कोई महफूज जगह नहीं बची है।" अल्बानीज़ ने इजरायल से प्रताड़ना के सभी कृत्यों को तुरंत रोकने, अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को प्रवेश देने और कब्जे को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू होने तक दोषियों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया और सदस्य देशों से नरसंहार और प्रताड़ना को रोकने के अपने कानूनी दायित्वों को निभाने की अपील की। इनमें इतामार बेन-ग्वीर, बेजालेल स्मोट्रिच और इजरायल काट्ज जैसे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी वारंट जारी करना शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 18:00:31 +0530</pubDate>
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                <title>जी-7 के छह सदस्यों सहित 7 देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में दिखाई तत्परता, ईरानी हमलों की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[जापान और ब्रिटेन सहित G7 के सात देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन किया। इन देशों ने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पालन करने का संकल्प लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/seven-countries-including-six-g-7-members-showed-readiness-to-ensure/article-147215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/harmoz.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जी7 के छह सदस्य देशों जापान, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी तथा इटली और नीदरलैंड ने वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों की निंदा की है और कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में योगदान देने के लिए तैयार हैं। </p>
<p>सात देशों के नेताओं ने गुरुवार रात जारी एक संयुक्त बयान में कहा, हम खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों, तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों और ईरानी बलों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कड़ी निंदा करते हैं। इन देशों ने बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की और ईरान से जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए अवरुद्ध करने के प्रयासों, धमकियों, बारूदी सुरंगों को बिछाने, ड्रोन एवं मिसाइल हमलों को तुरंत रोकने का आह्वान किया। उन्होंने ईरान से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने का भी आग्रह किया।</p>
<p>उन्होंने तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों पर तत्काल व्यापक रोक लगाने की मांग की। बयान में कहा गया कि नौवहन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है जिसमें संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौता भी शामिल है। इसमें कहा गया कि ईरान की कार्रवाइयों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों पर पड़ेगा, खासकर सबसे कमजोर वर्गों पर। उन्होंने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देने के लिए तत्पर हैं और हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी संबंधी योजना बना रहे हैं।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की समन्वित निकासी को अधिकृत करने के निर्णय का स्वागत करते हुए उन्होंने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए अन्य कदम उठाने का संकल्प लिया जिसमें कुछ तेल एवं गैस उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने पर काम करना शामिल है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के माध्यम से सबसे अधिक प्रभावित देशों को सहायता करने के लिए भी काम करेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया, समुद्री सुरक्षा एवं नौवहन की स्वतंत्रता सभी देशों के लिए लाभकारी है। हम सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय समृद्धि एवं सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान करते हैं। इस संयुक्त बयान के लिए हालांकि किसी विशिष्ट भौतिक बैठक की जानकारी नहीं है लेकिन यह 11 मार्च को हुई, जी7 नेताओं की वर्चुआल बैठक में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर चर्चा की गयी और नागरिक अवसंरचना पर हमलों की निंदा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 17:19:09 +0530</pubDate>
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