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                <title>Energy Security - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Energy Security RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान ने दिखाई दरियादिली: जापानी सुपरटैंकर ने पार किया होर्मुज जलडमरूमध्य, आवागमन निर्धारित समुद्री गलियारों और ईरानी अनुमति के तहत ही होगा संभव </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी अनुमति मिलने के बाद जापानी सुपरटैंकर 'इदेमित्सु मारू' 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरा। संघर्ष के बीच यह जापान के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि उसका 95% तेल आयात इसी मार्ग पर निर्भर है। ईरान ने अब इस रणनीतिक मार्ग के लिए पूर्व स्वीकृति अनिवार्य कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-showed-generosity-japanese-supertanker-crossed-the-strait-of-hormuz/article-152114"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/japan.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी अधिकारियों से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद जापानी स्वामित्व वाले एक सुपरटैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जापान से जुड़ा यह पहला प्रमुख तेल पारगमन माना जा रहा है। 'इदेमित्सु मारू' नामक इस पनामा-ध्वजित वीएलसीसी (वेरी लार्ज क्रूड कैरियर), जिसे जापान की ऊर्जा कंपनी इदेमित्सू कोसान की सहायक इकाई संचालित करती है, लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आगे बढ़ा है। </p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार जहाज अबू धाबी तट के पास एक सप्ताह से अधिक समय तक लंगर डाले रहा था। इसने मार्च की शुरुआत में सऊदी अरब के जुयमह टर्मिनल से कच्चा तेल लोड किया था। जहाज की ट्रैकिंग जानकारी के मुताबिक उसने ईरान के क़ेश्म और लारक द्वीपों के निकट अपने मार्ग में समायोजन किया, जिसके बाद वह पूर्व दिशा में आगे बढ़ा। इसे ईरानी प्राधिकरणों के साथ निकट समन्वय का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p>जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशियाई तेल पर अत्यधिक निर्भर है और उसके लगभग 95 प्रतिशत तेल आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। ऐसे में इस मार्ग की स्थिरता जापान की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए पूर्व स्वीकृति अनिवार्य कर दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अब इस मार्ग से आवागमन निर्धारित समुद्री गलियारों और ईरानी अनुमति के तहत ही संभव होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 18:20:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत को बड़ी सौगात : पीएम मोदी मंगलवार को करेंगे देश के पहले रिफायनरी एवं पेट्रोल रसायन परिसर का उद्घाटन, सामाजिक-आर्थिक विकास में मिलेगा योगदान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राजस्थान के पचपदरा (बालोतरा) में ₹79,450 करोड़ की लागत से बनी एकीकृत रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे। एचपीसीएल और राज्य सरकार के इस संयुक्त उद्यम से सालाना 90 लाख टन तेल शोधन होगा। यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-gift-to-india-pm-modi-will-inaugurate-the-countrys/article-151073"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi12.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को राजस्थान का दौरा करेंगे तथा हिंस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) और राज्य सरकार के सहयोग से स्थापित देश के पहले विशाल नये पेट्रोलियम रिफाइनरी एवं पेट्रोल केमिकल परिसर का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार यह कार्यक्रम पूर्वाह्न लगभग 11:30 बजे बालोतरा के पचपदरा में होगा, जहां वह देश का पहला एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर वह एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।</p>
<p>यह परियोजना भारत के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बतायी जा रही है। एचपीसीएल और राजस्थान सरकार के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित, 90 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता वाले इस ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स की स्थापना 79,450 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से की गयी है। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त यह परिसर शोधन और पेट्रोकेमिकल उत्पादन को एकीकृत करता है, जिसकी पेट्रोकेमिकल क्षमता 24 लाख टन प्रति वर्ष है। इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है और पेट्रोकेमिकल उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक है, जो दक्षता और स्थिरता के वैश्विक मानकों के अनुरूप है।</p>
<p>यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पेट्रोकेमिकल आत्मनिर्भरता बढ़ाने और औद्योगिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। यह क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक पार्क के विकास के लिए एक आधार उद्योग के रूप में कार्य करेगी, जिससे संबंधित उद्योगों और सहायक क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, यह रिफाइनरी रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा करने के लिए तैयार है, जिससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:56:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>टिबोर गास्पर का दावा : रूस से ऊर्जा आपूर्ति बंद होने से यूरोप छोड़ रहे हैं उद्योग; रूसी तेल की वापसी पीछे जाने का कदम नहीं, ऊर्जा नीति की दिशा में अहम कदम होगा</title>
                                    <description><![CDATA[स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने चेतावनी दी है कि सस्ती रूसी ऊर्जा के बिना यूरोपीय उद्योग ईयू से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने आर्थिक स्थिरता के लिए रूसी ऊर्जा की वापसी को 'यथार्थवादी नीति' बताया। गास्पर के अनुसार, केवल अमेरिकी एलएनजी पर निर्भरता के बजाय रूस को एक विकल्प के रूप में रखना अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tibor-gaspar-claims-that-industries-are-leaving-europe-due-to/article-151035"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tibor.png" alt=""></a><br /><p>ब्रातिस्लावा। स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने कहा है कि पूर्व से मिलने वाली स्थिर ऊर्जा आपूर्ति पर आधारित यूरोपीय उद्योग अब उसके अभाव में यूरोपीय संघ से बाहर स्थानांतरित हो रहे हैं। टिबोर गास्पर ने कहा कि रूस के ऊर्जा संसाधन लंबे समय तक अन्य विकल्पों की तुलना में सस्ते रहे हैं और उनकी वापसी से उद्योग, महंगाई और आम उपभोक्ताओं पर दबाव कम होगा। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जर्मनी और मध्य यूरोप का औद्योगिक ढांचा पूर्व से मिलने वाली ऊर्जा पर टिका रहा है। उन्होंने कहा कि सस्ती ऊर्जा के बिना कोई भी अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धी नहीं रह सकती और इसी कारण उत्पादन अब यूरोपीय संघ से बाहर जा रहा है।</p>
<p>टिबोर गास्पर के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति का विविधीकरण किसी एक आपूर्तिकर्ता को स्थायी रूप से बाहर करना नहीं है, बल्कि विकल्पों को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि रूस एक विकल्प हो सकता है, न कि एकमात्र, लेकिन उसे पूरी तरह प्रतिबंधित करना भी उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल एलएनजी, विशेषकर अमेरिका से, पर निर्भरता के बजाय अधिक आपूर्तिकर्ता होने से बेहतर कीमतें और अधिक स्वतंत्रता मिलती है।</p>
<p>टिबोर गास्पर ने कहा कि रूसी तेल की वापसी ‘पीछे जाने का कदम नहीं, बल्कि यथार्थवादी ऊर्जा नीति की दिशा में कदम’ होगा और विचारधारा को आर्थिक स्थिरता व नागरिकों के जीवन स्तर पर हावी नहीं होना चाहिए। इस बीच, यूरोपीय संघ परिषद ने पहले ही एक जनवरी 2027 से रूसी एलएनजी आयात और 30 सितंबर 2027 से रूसी पाइपलाइन गैस पर प्रतिबंध को अंतिम मंजूरी दे दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रूस का तुर्की से आग्रह : यूक्रेन से गैस पाइपलाइनों पर हमला नहीं करने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[रूस ने तुर्की से 'तुर्कस्ट्रीम' और 'ब्लू स्ट्रीम' पाइपलाइनों पर यूक्रेनी हमलों को रोकने की गारंटी मांगी है। रूसी उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर ग्रुश्को ने इन ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। मॉस्को ने अंकारा से आग्रह किया है कि वह यूक्रेन को सख्त चेतावनी दे ताकि क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-urges-turkey-not-to-attack-ukraines-gas-pipelines/article-150995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/russia.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को । रूस ने तुर्की से बार-बार यह अपील की है कि वह यूक्रेन से इस बात की गारंटी ले कि 'तुर्कस्ट्रीम' और 'ब्लू स्ट्रीम' गैस पाइपलाइन बुनियादी ढांचे पर कोई हमला नहीं किया जाएगा। रूसी उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर ग्रुश्को ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, "काला सागर के नीचे तुर्की को गैस आपूर्ति करने वाली पाइपलाइनों पर यूक्रेन द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों को देखते हुए, हमने अपने तुर्की भागीदारों से बार-बार आग्रह किया है। हमने उनसे कहा है कि वे यूक्रेनी पक्ष को स्पष्ट और कड़े संकेत भेजें और मांग करें कि वे इस तरह के आक्रामक कृत्यों को तुरंत रोकें तथा भविष्य में भी ऐसा न होने की गारंटी दें।"</p>
<p>इससे पहले, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी स्पष्ट किया था कि रूस इन गैस पाइपलाइनों पर बढ़ते खतरे को लेकर तुर्की के साथ लगातार अपनी चिंताएं साझा कर रहा है। वहीं, तुर्की सरकार के सूत्रों के अनुसार, तुर्की इन पाइपलाइनों पर होने वाले हमलों और खतरों की खबरों पर बारीकी से नजर रख रहा है और इस मामले में रूस के साथ निरंतर समन्वय बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 13:33:07 +0530</pubDate>
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                <title>राहत की खबर : मुंबई पहुंचा ‘ग्रीन आशा’ एलपीजी जहाज, होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सुरक्षित लाया 15,400 टन गैस</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई के जेएनपीए बंदरगाह पर भारतीय एलपीजी जहाज 'ग्रीन आशा' का शानदार स्वागत हुआ। रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर यह जहाज 15,400 टन एलपीजी लेकर सुरक्षित भारत पहुँचा। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच चालक दल और कार्गो की सुरक्षित वापसी भारत की सामरिक सफलता को दर्शाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/news-of-relief-green-asha-arrived-with-15400-tons-of/article-149808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/green-asha.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। मुंबई के पास स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) ने गुरुवार को ‘ग्रीन आशा’ नाम का एक भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाज का स्वागत किया। इस जहाज़ ने रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया है। यह जहाज़ बीपीसीएल-आईओसीएल द्वारा संचालित लिक्विड बर्थ पर लंगर डाल चुका है। इस जहाज में 15,400 टन एलपीजी लदी हुई थी। जहाज, उसमें लदा माल और चालक दल का प्रत्येक सदस्य पूरी तरह सुरक्षित है।</p>
<p>ऑनलाइन सामने आए दृश्यों में जहाज को बंदरगाह पर लंगर डाले हुए दिखाया गया है, जहां चालक दल के सदस्य हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे हैं। यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में लागू एक नाजुक संघर्षविराम के दौरान सामने आया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 11:05:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का किया स्वागत : पश्चिम एशिया में स्थाई शांति की जताई उम्मीद, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने का आग्रह</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का पुरजोर समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संवाद और कूटनीति ही स्थायी शांति का एकमात्र मार्ग है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक सुगमता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की बहाली पर विशेष बल दिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-welcomed-the-ceasefire-between-america-and-iran-expressed-hope/article-149542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुये युद्धविराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थाई शांति स्थापित होगी। विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम पर बुधवार को एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि भारत पहले से ही इस विवाद के संवाद और कूटनीति से समाधान पर जोर देता रहा है। मंत्रालय ने कहा है, "हम संघर्ष विराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हम पहले भी लगातार कहते रहे हैं, तनाव में कमी, संवाद और कूटनीति ही संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के लिए आवश्यक हैं। इस संघर्ष ने पहले ही लोगों को अत्यधिक कष्ट पहुँचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापारिक नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की निर्वाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह बना रहेगा।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान ने बुधवार तड़के दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिका और इजरायल ने गत 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ हमलों की शुरुआत की थी। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में पश्चिम एशियाई देशों में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर हमले किए थे। इन हमलों में जान और माल का व्यापक नुकसान हुआ है। ईरान ने इन हमलों के विरोध में और होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाले तेल और गैस टैंकरों के संचालन को बाधित कर दिया था जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल एवं गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 16:39:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जॉर्जिया मेलोनी का दावा : पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया तनाव से इटली में ऊर्जा संकट गहरा सकता है। खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण जेट ईंधन पर प्रतिबंध शुरू हो गए हैं। मेलोनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने और तेल आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/georgia-meloni-claims-fear-of-energy-crisis-increased-due-to/article-149268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pm-giorgia-meloni.png" alt=""></a><br /><p>रोम। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्वीकार किया है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति और बिगड़ती है तो देश को ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ सकता है। 'कोरिरे डेला सेरा' अखबार ने शनिवार को इटली के चार हवाई अड्डों—मिलान, वेनिस, ट्रेविसो और बोलोग्ना में जेट ईंधन पर लागू किये गये पहले प्रतिबंध की जानकारी दी। पीएम मेलोनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, " जब खाड़ी देशों में अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका सीधा असर ऊर्जा की लागत, व्यवसायों, नौकरियों और अंततः परिवारों की क्रय शक्ति पर पड़ता है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री मेलोनी का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में फारस की खाड़ी के देश प्रमुख भूमिका निभाते हैं। अगर वहां उत्पादन कम या बंद होता है, तो ऊर्जा की कीमतें हर किसी के लिए बढ़ जायेंगी। मेलोनी ने आगाह किया, "अगर स्थिति और खराब होती है तो हम ऐसी स्थिति में पहुंच सकते हैं, जहां हमारे पास जरूरत भर ऊर्जा उपलब्ध न हो, यहां तक कि इटली में भी।" शुक्रवार और शनिवार को सुश्री मेलोनी ने फारस की खाड़ी के देशों का दौरा किया। उनके अनुसार, ये देश इटली की तेल आवश्यकताओं का 15 प्रतिशत हिस्सा पूरा करते हैं।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया, "मैंने उनके साथ चर्चा की कि कैसे सहयोग मजबूत किया जाये, तनाव रोकने में मदद की जाये और उन रास्तों पर नौवहन की स्वतंत्रता को तेजी से बहाल किया जाये, जिन पर ऊर्जा, व्यापार और स्थिरता निर्भर करती है, जिसकी शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है।” अट्ठाइस फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने तेहरान सहित ईरान में लक्ष्यों पर हमले शुरू किये थे, जिससे काफी नुकसान हुआ और नागरिक हताहत हुए। ईरान इसके जवाब में इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक तेल और एलएनजी के लिए प्रमुख आपूर्ति मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाले शिपिंग को लगभग रोक दिया है। इसके परिणामस्वरूप अधिकतर देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:30:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के मद्देनज़र सरकार की अपील : ऑनलाइन ही बुक कराएं सिलेंडर, जरूरत पड़ने पर ही जाएं वितरक के पास</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है। सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए 50,000 सिलेंडर जब्त किए और 36 वितरकों को निलंबित किया। 95% ऑनलाइन बुकिंग के साथ आपूर्ति सुचारू है। मंत्रालय ने नागरिकों से पैनिक बुकिंग न करने और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-view-of-the-west-asia-crisis-the-governments-appeal/article-149191"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/cyclender-book.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ऑनलाइन बुकिंग के बढ़ने के बावजूद रसोई गैस वितरण एजेन्सियों के बाहर लंबी-लंबी लाइनों को देखते हुए सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन माध्यम से ही एलपीजी सिलेंडर बुक करायें और आवश्यक होने पर ही वितरकों के पास जायें। पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर सरकार ने रविवार को एक बार फिर दोहराया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति के प्रभावित होने के घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय पूरे देश में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की सुचारु और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर आवश्यक कदम उठा रहा है और फिलहाल देश में इनका पर्याप्त भंडार है।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा है कि एलपीजी वितरकों के पास गैस समाप्त होने की कोई सूचना नहीं है और ऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर बुकिंग बढ़कर 95 प्रतिशत हो गई है। शनिवार को 51 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी की गई। डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) आधारित एलपीजी डिलीवरी फरवरी में 53 प्रतिशत से बढ़कर शनिवार को 90 प्रतिशत हो गई है ताकि हेराफेरी को रोका जा सके। प्रवासी श्रमिकों और छात्रों को शनिवार को 5 किलोग्राम के 90,000 से अधिक सिलेंडर बेचे गए।देश में पीएनजी विस्तार तेज़ी से बढ़ रहा है और  मार्च से 3.6 लाख कनेक्शन को गैस आपूर्ति शुरू की गयी है और 3.9 लाख से अधिक नए पंजीकरण हुए हैं।</p>
<p>पश्चिम एशिया में फंसे सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले जहाजों से जुड़ी कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई। विदेश मंत्रालय खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में विकसित हो रही स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और 28 फरवरी से अब तक 7 लाख दो हजार से अधिक भारतीय स्वदेश लौटे हैं। सरकार ने कहा है कि वह पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और घबराहट में खरीदारी तथा अनावश्यक बुकिंग से बचें।</p>
<p>एलपीजी की जमाखोरी और काला बाज़ारी की जांच के लिए कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छापेमारी जारी है। मार्च से अब तक राज्यों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की संयुक्त टीमों द्वारा 50,000 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए हैं। कंपनियों के अधिकारियों को अचानक निरीक्षण की प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जमाखोरी और काला बाज़ारी की किसी भी घटना को रोका जा सके। अब तक एलपीजी वितरकों को 1400 से अधिक कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा, अब तक 36 एलपीजी वितरकों को निलंबित किया जा चुका है। उपभोक्ताओं को डी-पीएनजी और सीएनजी-परिवहन के लिए 100 प्रतिशत आपूर्ति के साथ प्राथमिकता दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 17:54:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज बंद... तेल की नो टेंशन! ऑयल इंडिया लिमिटेड ने उत्पादन में दर्ज की रिकॉर्ड बढ़ोतरी, ऊर्जा सुरक्षा को मिला बल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के थार रेगिस्तान में ऑयल इंडिया लिमिटेड ने रिकॉर्ड 1,202 बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का उत्पादन कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। CSS और फिशबोन ड्रिलिंग जैसी उन्नत तकनीकों से उत्पादन में 70% की वृद्धि हुई है। जैसलमेर के बाघेवाला फील्ड की यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में मील का पत्थर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/no-tension-of-oil-off-hormuz-oil-india-limited-recorded/article-149198"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच देश के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ऑयल इंडिया लिमिटेड ने राजस्थान के थार रेगिस्तान में कच्चे तेल के उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। कंपनी ने जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन से प्रतिदिन 1,202 बैरल उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 70 प्रतिशत अधिक है। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जैसलमेर स्थित बाघेवाला फील्ड से निकला कच्चा तेल टैंकरों के जरिए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन की मेहसाणा इकाई तक पहुंचाया जाता है, जहां से पाइपलाइन के माध्यम से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की कोयली रिफाइनरी भेजा जाता है।</p>
<p>वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्थान फील्ड से कुल 43,773 मीट्रिक टन कच्चे तेल का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल के 32,787 मीट्रिक टन से काफी ज्यादा है। इस बढ़ोतरी के पीछे उन्नत तकनीकों और बेहतर संचालन की अहम भूमिका रही है। विशेष रूप से साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) तकनीक ने भारी और गाढ़े तेल को निकालने में सफलता दिलाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि थार क्षेत्र की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यह उपलब्धि हासिल करना बड़ी बात है। बाघेवाला फील्ड, जो बीकानेर-नागौर बेसिन का हिस्सा है, देश के प्रमुख ऑनशोर भारी तेल क्षेत्रों में शामिल है। यहां नई ड्रिलिंग तकनीकों जैसे फिशबोन ड्रिलिंग और बेयरफुट कम्प्लीशन का भी सफल प्रयोग किया गया है। कंपनी का मानना है कि यह सफलता भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगी और लंबे समय में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 17:46:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर हमला, ईरान ने कहा-रेडिएशन से खाड़ी देश ही तबाह होंगे, महशहर पेट्रोकेमिकल स्पेशल इकोनॉमिक जोन पर भी हमला</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर अमेरिका और इज़रायल के हमले से तनाव चरम पर है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे, तो रेडिएशन का रुख सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों की ओर होगा। रूस समर्थित यह प्लांट ईरान की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/attack-on-irans-nuclear-plant-iran-said-that-only-gulf/article-149147"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के दक्षिण-पश् िचमी इलाके में स्थित बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर अमेरिका और इजरायल ने हमला किया है। हमले से प्लांट के पास एक प्रोजेक्टाइल गिर गया, जिससे एक सुरक्षा कर्मी की जान चली गई। वहीं इजराइल ने ईरान के दक्षिणी खुजेस्तान प्रांत में महशहर पेट्रोकेमिकल स्पेशल इकोनॉमिक जोन पर हमला किया है। इस इलाके में कई विस्फोट हुए, जिसके बाद घटनास्थल से धुआं उठता हुआ देखा गया। प्लांट पर हमले से ईरान भड़क गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका और इजरायल ने अब तक बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर चार बार हमला किया है। अगर यह हमले जारी रहे तो इस प्लांट से निकलने वाला रेडिएशन तेहरान नहीं बल्कि खाड़ी के देशों के शहरों में पहुंचेगा। यानी सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन जैसे देशों के शहर तबाह होंगे। उनका कहना था कि हवा का रुख ऐसा है कि खतरा ईरान को नहीं, बल्कि पड़ोसी खाड़ी देशों को होगा।</p>
<p><strong>प्लांट में इस्तेमाल होता है रूस का यूरेनियम</strong></p>
<p>बुशहर न्यूक्लियर प्लांट में रूस का यूरेनियम इस्तेमाल होता है और रूसी तकनीशियन वहां काम करते हैं। यह प्लांट ईरान को करीब 1000 मेगावाट बिजली देता है। इस पर हमला में मतलब ईरान में बड़े स्तर पर ऊर्जा संकट का खतरा तेजी से मंडरा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 10:57:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संघर्ष: पीएम मोदी मंत्रिमंड़ल की सुरक्षा संबंधी समिति की अहम बैठक, LPG और PNG की सप्लाई पर पूरा फोकस, जरूरी कदम उठाने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीसीएस बैठक की अध्यक्षता कर पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईंधन और उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सरकार ने जमाखोरी रोकने और एलपीजी-एलएनजी के स्रोतों में विविधता लाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। पीएम ने कोयले के पर्याप्त भंडार और आवश्यक वस्तुओं की स्थिर कीमतों का आश्वासन देते हुए अफवाहों से बचने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-asia-conflict-important-meeting-of-the-security-committee-of/article-148801"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/csc.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार शाम मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी मामलों की समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें कृषि, उर्वरक, जहाजरानी, विमानन, रसद एवं लघु एवं मध्यम उद्यमों में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, मोदी ने सीसीएस के सदस्यों के साथ आवश्यक आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एलपीजी एवं एलएनजी की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में कमी लाने और विद्युत क्षेत्र से जुड़े उपायों की समीक्षा की।</p>
<p>बैठक में बताया गया कि आवश्यक वस्तुओं की स्थिर कीमतों को सुनिश्चित करने और जमाखोरी एवं कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। कीमतों की निरंतर निगरानी और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रवर्तन पर बातचीत के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया है कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने गलत सूचना एवं अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक प्रामाणिक जानकारी का समय पर एवं सुचारू पहुंच की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त कोयले के भंडार मौजूद है जो आने वाले महीनों में बिजली की आवश्यकता पर्याप्त रूप से पूरी होगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक निवास सात लोक कल्याण मार्ग पर सीसीएस की इस विशेष बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में आगे की जाने वाली पहलों पर भी चर्चा की गई। इस मुद्दे पर सीसीएस की यह दूसरी विशेष बैठक थी। विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में कैबिनेट सचिव ने पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलएनजी तथा एलपीजी की आपूर्ति और पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। विभिन्न देशों से नए स्रोतों के आने से एलपीजी की खरीद के लिए स्रोतों का विविधीकरण किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि इसी प्रकार, एलएनजी भी विभिन्न देशों से प्राप्त की जा रही है।</p>
<p>कैबिनेट सचिव ने बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और एलपीजी की जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए नियमित रूप से अवैध बिक्री विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं। प्राकृतिक गैस पाइपलाइन कनेक्शनों के विस्तार के लिए भी पहल की गई है। गर्मी के चरम महीनों के दौरान बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 7-8 गीगावाट क्षमता वाले गैस आधारित बिजली संयंत्रों को गैस पूलिंग तंत्र से छूट देना और थर्मल पावर स्टेशनों पर अधिक कोयले की आपूर्ति के लिए रेक बढ़ाना जैसे उपाय भी किए गए हैं। इसके अलावा, कृषि, नागरिक उड्डयन, जहाजरानी और रसद जैसे विभिन्न अन्य क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों के लिए प्रस्तावित उपायों पर भी चर्चा की गई।</p>
<p>उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यूरिया उत्पादन को आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने, डीएपी, एनपीकेएस आपूर्तिकर्ताओं के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने जैसे विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकारों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे दैनिक निगरानी, छापेमारी और सख्त कार्रवाई के माध्यम से उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और हेराफेरी पर अंकुश लगाएं। विज्ञप्ति के अनुसार, देश में पिछले एक महीने से खाद्य पदार्थों के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं। कीमतों की निरंतर निगरानी और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रवर्तन पर बातचीत के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। कृषि उत्पादों, सब्जियों और फलों के दामों पर भी नजर रखी जा रही है।</p>
<p>ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए वैश्विक स्तर पर हमारे स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पहल और चल रहे राजनयिक प्रयास भी किए जा रहे हैं। मौजूदा संकट के बीच प्रभावी सूचना प्रसार और जन जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय, वास्तविक समय संचार सहित सक्रिय उपाय किए जा रहे हैं।</p>
<p>विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने आम जनता की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का जायजा लिया। उन्होंने देश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ एवं रबी ऋतुओं में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने गलत सूचना एवं अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक सही जानकारी के सुचारू प्रवाह पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हरसंभव उपाय करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 13:24:00 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम एशिया युद्ध से उत्पन्न संकट में स्वार्थी राजनीति न करें, एकजुट रहें और अफवाह न फैलाएं : पीएम मोदी </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' में पश्चिम एशिया युद्ध से उपजे ईंधन संकट पर चिंता जताई। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों से अफवाहों से बचने और स्वार्थी राजनीति न करने की अपील की। पीएम ने खाड़ी देशों का आभार जताते हुए बताया कि 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित लौटे हैं और सरकार पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/do-not-do-selfish-politics-in-the-crisis-arising-from/article-148330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi-maan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस समय पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ईंधन का संकट पैदा हो गया है। इसलिए देशवासियों से आग्रह है कि वे संकट के इस दौर में एकजुट हों, स्वार्थी राजनीति न करें और किसी तरह की अफवाह न फैलाएं। पीएम मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ''मन की बात'' की 132वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के कारण उत्पन्न संकट से पूरी दुनिया की तरह भारत भी अछूता नहीं है। लेकिन इस संकट के दौर में सभी देशवासियों से अपील की कि जो लोग इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं, उन्हें स्वार्थी राजनीति नहीं करनी चाहिए। संकट के समय किसी को ऐसा नहीं करना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा, ''यह 140 करोड़ नागरिकों के हितों से जुड़ा मुद्दा है। इसमें स्वार्थी राजनीति की कोई जगह नहीं है। जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं, वे देश को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। मैं सभी से अपील करता हूं कि सतर्क रहें, अफवाहों से भ्रमित न हों। सरकार लगातार सही जानकारी दे रही है। उसी पर भरोसा करें और उसी के आधार पर कदम उठाएं।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मार्च का महीना वैश्विक स्तर पर बेहद घटनापूर्ण रहा है। हम सब याद करते हैं कि कोविड के कारण पूरी दुनिया को लंबे समय तक अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। हम सबकी उम्मीद थी कि कोविड संकट से उबरने के बाद दुनिया एक नयी शुरुआत के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगी, लेकिन उसके बाद दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष की स्थितियां लगातार उभरती रहीं। अब वहां बेहद नाजुक स्थिति बनी हुई है और भारत के करोड़ों परिवारों के सदस्य वहां रहते हैं और खासकर खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने भारतीयों की मदद करने के लिए खाड़ी देशों का आभार जताते हुए कहा, ''खाड़ी देशों का बहुत आभार। उन्होंने एक करोड़ से अधिक भारतीयों को हर प्रकार की सहायता दी। अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीय सुरक्षित भारत वापस लाए जा चुके हैं। ईरान से लगभग 1000 भारतीय, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं, सकुशल भारत पहुंच चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हमारे ऊर्जा जरूरतों, कच्चा तेल, गैस आदि ईंधन का प्रमुख केंद्र है। इस क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस का संकट बन रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही मुश्किल हो गई है, जिससे व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। देश में स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व 5.3 मिलियन टन से ज्यादा है और इसे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस संकट में राष्ट्र को एकजुट रहना चाहिए और अफवाहों से बचना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 16:00:08 +0530</pubDate>
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