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                <title>Oil Production - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Oil Production RSS Feed</description>
                
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                <title>केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का दावा: ईंधन की कोई कमी नहीं, पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की पैनी नजर; एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति में कमी की आशंकाओं को किया खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आश्वस्त किया कि खाड़ी युद्ध के बावजूद भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं होगी। रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन पर चर्चा अंतिम चरण में है, जिससे द्रमुक को सत्ता से बाहर करने का दावा किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/union-minister-piyush-goyal-claims-no-shortage-of-fuel-government/article-146116"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/piyuesh-goyal.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को देशवासियों को आश्वस्त किया कि खाड़ी देशों में अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल के उत्पादन पर पड़े असर के बावजूद भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है। तमिलनाडु के तिरूचिरापल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों से पहले पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक ऊर्जा व्यवधानों की बारीकी से निगरानी कर रही है। घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति में कमी की आशंकाओं को खारिज करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। </p>
<p>उनके इस बयान से उन होटल और रेस्तरां मालिकों को बड़ी राहत मिलने की आशा है, जिन्हें वाणिज्यिक एलपीजी की कमी के कारण अपना कारोबार बंद होने का डर सता रहा था। पीयूष गोयल ने तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप लगाते हुए तीखा हमला भी किया। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के साथ सीट बंटवारे पर औपचारिक बातचीत के बाद श्री गोयल ने विश्वास जताया कि श्री पलानीस्वामी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) आगामी चुनावों में द्रमुक को सत्ता से बाहर कर देगा। </p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन के सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कोई भ्रम या बाधा नहीं है और चर्चा अंतिम चरण में है। तमिलनाडु में राजग का नेतृत्व पलानीस्वामी कर रहे हैं, जिसमें पीएमके, एएमएमके और तमिल मानिला कांग्रेस जैसे दल शामिल हैं। दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम के लिए राजग के दरवाजे बंद होने के बाद उन्होंने राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए द्रमुक का रुख किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 18:44:08 +0530</pubDate>
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                <title>वेनेजुएला के तेल पर US का कंट्रोल : भारत के लिए बना चिंता का विषय, जानें कैसे ?</title>
                                    <description><![CDATA[नालिस्ट और इंडस्ट्री सूत्रों ने कहा कि वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर US के नेतृत्व में कब्ज़ा या रीस्ट्रक्चरिंग से भारत को सीधा फायदा हो सकता है, जिससे लंबे समय से अटके लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर के बकाए का रास्ता खुल सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-control-over-venezuelan-oil-has-become-a-matter-of/article-138353"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/us-oil.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वेनेजुएला के राजनीतिक घटनाक्रम और वहां के तेल क्षेत्र पर संभावित अमेरिकी नियंत्रण ने भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगा दी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के हटने के बाद अमेरिका वहां के तेल बुनियादी ढांचे का पुनर्गठन करता है, तो भारत को न केवल अपना बकाया $1 अरब (लगभग 8,400 करोड़ रुपये) वापस मिल सकता है, बल्कि कच्चे तेल की आपूर्ति में भी भारी उछाल आ सकता है।</p>
<p><strong>अटका हुआ लाभांश और उत्पादन में गिरावट</strong></p>
<p>ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) का सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में 40% हिस्सा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2014 से उसका करीब $536 मिलियन का लाभांश अटका हुआ है। कुल बकाया अब $1 अरब के करीब पहुंच चुका है। प्रतिबंधों की वजह से इस क्षेत्र का उत्पादन गिरकर महज 5,000-10,000 बैरल प्रति दिन (bpd) रह गया है।</p>
<p><strong>तकनीकी सहयोग और उत्पादन क्षमता</strong></p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, यदि प्रतिबंध हटते हैं, तो OVL गुजरात से अपने उन्नत रिग्स और उपकरण वेनेजुएला भेज सकता है। इससे सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र का उत्पादन बढ़कर 80,000 से 1,00,000 bpd तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, कैराबोबो-1 प्रोजेक्ट में भी इंडियन ऑयल (IOC) और ऑयल इंडिया (OIL) की हिस्सेदारी है, जिसे पुनर्जीवित किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>भारतीय रिफाइनरियों के लिए रणनीतिक लाभ</strong></p>
<p>रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी भारतीय रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई हैं। 2020 से पहले भारत 4,00,000 bpd तेल आयात करता था। अमेरिकी नियंत्रण के बाद, भारत को रूसी तेल पर निर्भरता कम करने और मध्य पूर्व के देशों के साथ कीमतों पर बेहतर सौदेबाजी करने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>भू-राजनीतिक बदलाव</strong></p>
<p>वेनेजुएला के पास 303 बिलियन बैरल का दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। अमेरिका का इस पर नियंत्रण चीन के प्रभाव को कम करेगा और वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर करने में मदद करेगा। भारत के लिए यह न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का मौका है, बल्कि लैटिन अमेरिका में अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने का भी द्वार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 17:40:26 +0530</pubDate>
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