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                <title> असर खबर का : फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू, खेतों में उतरी टीमें</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश से फसलों में नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--survey-of-crop-damage-begins--teams-deployed-to-fields/article-147551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बाद अब प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलेभर में कृषि व राजस्व विभाग की टीमें सक्रिय होकर खेतों में पहुंचने लगी हैं और नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। शनिवार को कई गांवों में अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की और फसलों की स्थिति का आकलन किया। कृषि विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव जाकर कटी व खड़ी फसलों का निरीक्षण कर रही हैं। पटवारी, गिरदावर और कृषि पर्यवेक्षक किसानों के साथ खेतों में जाकर नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। कई जगहों पर टीमों ने फसल की नमी, गिरावट और पानी भराव की स्थिति का रिकॉर्ड भी तैयार किया।</p>
<p><strong>किसानों से ली विस्तृत जानकारी</strong><br />टीमों के अधिकारियों ने किसानों से फसल की बुवाई, कटाई और बारिश के समय की स्थिति के बारे में जानकारी ली। किसानों ने भी खुले तौर पर अपनी समस्या रखते हुए बताया कि कटाई के दौरान हुई बारिश से उन्हें भारी नुकसान का डर है। कई किसानों ने भीगी हुई गेहूं और सरसों की फसल दिखाकर नुकसान का अंदेशा जताया। कुछ टीमों द्वारा सर्वे के दौरान मोबाइल ऐप के जरिए फोटो और लोकेशन के साथ डेटा अपलोड किया जा रहा है, ताकि वास्तविक स्थिति का सही आकलन हो सके और रिपोर्ट शीघ्र तैयार की जा सके। प्रशासन की सक्रियता से किसानों में मुआवजे की उम्मीद जगी है। अधिकारियों का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही नुकसान का आंकलन कर सरकार को भेजा जाएगा।</p>
<p><strong>सर्वे करवाकर शीघ्र रिपोर्ट भेजने के दिए निर्देश</strong><br />मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान पर संज्ञान लेते हुए सभी जिला कलक्टर्स को सर्वे करवाकर शीघ्र रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की हर परिस्थिति में सहायता के लिए पूर्ण संवेदनशीलता के साथ तत्पर है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि किसानों की पीड़ा हमारी पीड़ा है। राजस्थान की समृद्धि का आधार हमारे अन्नदाता भाई-बहन हैं। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ किसान भाइयों के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ी है। प्रत्येक प्रभावित किसान को शीघ्र एवं समुचित सहायता उपलब्ध कराना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, इसके लिए सरकार पूर्णत: प्रतिबद्ध है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से फसलों में नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में शनिवार को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि इन दिनों जिले में रबी फसलों की कटाई का कार्य जोरों पर चल रहा है। खेतों में गेहूं, सरसों और अन्य फसलें कटी हुई पड़ी हैं। ऐसे में बारिश होने से कटी फसलों के भीगने और खराब होने की आशंका बढ़ गई है। कई किसानों ने अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल और अन्य साधनों का सहारा लिया, लेकिन तेज हवा और बारिश के कारण उन्हें पूरी तरह बचा पाना मुश्किल साबित हुआ। ऐसे में उत्पादन और भाव दोनों पर असर पड़ने की आशंका से किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।</p>
<p>सरकार के निर्देश पर बारिश से फसलों में हुए नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। कुछ स्थानों पर कटी फसलों में खराबे की संभावना है। अभी सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को सौंपी जाएगी।<br /><strong>- राजेन्द्र मीणा, कृषि पर्यवेक्षक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:41:58 +0530</pubDate>
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                <title>गिरदावरी में गड़बड़ी, मार झेल रहे किसान</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी केन्द्रों पर बेचने में हो रही परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/error-in-girdawari--farmers-are-suffering/article-111530"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में मेहनतकश किसानों की समस्याएं थमने का नाम नहीं ले रही है। धरतीपुत्रों ने कड़ी मेहनत कर खेतों में गेहूं फसल की बुवाई थी, लेकिन जब फसल कटाई के बाद बेचने का समय आया तो गिरदावरी में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही है। हालात यह है कि पटवारियों ने किसानों की गिरदावरी में गेहूं की जगह सरसों की फसल दर्ज कर दी है। इससे किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेत में जिस फसल की बुवाई की है, उसे गिरदावरी में बदल दिया है। इससे किसानों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने में परेशानी हो रही है। सरकारी केन्द्रों पर उपज बेचने के लिए गिरदावरी की जरूरत होती है। ऐसे में अब किसानों को इस समस्या के समाधान के लिए विभागों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। </p>
<p><strong>खरीद केन्द्रों पर पहुंचे तो सामने आया सच</strong><br />किसान रामजीलाल व हर्षवर्धन ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में गेहूं की बुवाई की थी। इस दौरान पटवारी की ओर से ऑनलाइन गिरदावरी की गई थी। जिसमें गेहूं की जगह सरसों की फसल दर्शा दी गई। जब वह समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए सरकारी केन्द्रों पर पहुंचे तो ऑनलाइन गिरदावरी में गलत फसल दर्ज होने की जानकारी मिली। गिरदावरी के बिना कोई भी किसान सरकारी केन्द्रों पर अपनी फसल नहीं बेच सकता है। ऐसे में सरकारी केन्द्रों पर मौजूद कर्मचािरयों ने उनकी गेहूं फसल की सरकारी कांंटे तुलाई नहीं की। जिससे उनकी निराश होकर लौटना पड़ा। इस सम्बंध में अब पटवार कार्यालय पर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। </p>
<p><strong>सरकारी केन्द्रों पर गेहूं बेचने की होड़</strong><br />कोटा जिले सहित हाड़ौती में इस साल गेहूं का बम्पर उत्पादन हुआ है। वहीं सरकार ने भी किसानों को राहत देने के लिए इस बार समर्थन मूल्य और बोनस को बढ़ा दिया है। इस कारण किसानों में सरकारी केन्द्रों पर गेहूं बेचने की होड़ मची हुई है। जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थित सरकारी केन्द्रों पर इन दिनों में काफी संख्या में किसान गिरदावरी लेकर गेहूं बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। इसी दौरान कई किसानों की गिरदावरी में फसलों के सॅम्बंध में गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। खरीद केन्द्र के कर्मचारी उन्हें संशोधित गिरदावरी लाने के बाद ही बाद ही फसलों की तुलाई करवाने के बारे में समझाइश कर  भेज रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ऑनलाइन गिरदावरी में गलत फसल दर्ज होने के कारण समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऑनलाइन गिरदावरी में संशोधन के लिए चक्कर लगाना पड़ता है।<br /><strong>- नेमीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>खरीद केन्द्रों पर गिरदावरी में गेहूं की जगह सरसों की फसल दर्ज करने के कई मामले हमारे सामने आ रहे है। सही गिरदावरी लाने के बाद किसानों की फसल की तुलाई करवाई जा रही है। <br /><strong>- विष्णुदत्त शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, राजफैड</strong></p>
<p>अगर किसी किसान की गिरदावरी में गलत फसल दर्ज हो गई तो वह तहसील परिसर में आकर संशोधन करवा सकता है। गिरदावरी में गेहूं की जगह सरसों की गलत फसल दर्ज होने को सुधारा जाएगा।<br /><strong>- रामनिवास, नायब तहसीलदार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Apr 2025 17:07:57 +0530</pubDate>
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                <title>फसल अवशेषों में आग से बढ़ा प्रदूषण</title>
                                    <description><![CDATA[जागरूकता के अभाव में किसान नहीं अपना पा रहे वैकल्पिक निपटान के तरीके।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/pollution-increased-due-to-burning-of-crop-residues/article-110742"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(3)27.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबडौद। तहसील क्षेत्र के कई ग्रामीण अंचलों में किसान फसल अवशेषों में आग लगाने की परंपरा को जारी रखते हुए पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। इस प्रथा में फसल कटाई के बाद बची-खुची अवशेषों को जला दिया जाता है। जिससे आस-पास के इलाकों में धुएं का जाल बिछ जाता है। इससे न केवल वायु गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस प्रथा पर समय पर और कठोर कारवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और भी खतरनाक हो सकता है। प्रशासन हर साल इस पर प्रतिबंध लगा कर भी प्रभावी और कठोर कार्रवाई न करने के कारण किसान वैकल्पिक निपटान विधियों को अपनाने से कतराते हैं। सरकार द्वारा निर्धारित प्रतिबंधों और दंडों का पालन न होने के कारण किसान पुरानी प्रथा में अड़े हुए हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या स्थायी रूप से पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ सकती है।</p>
<p><strong>तकनीकों का नहीं हो पा रहा प्रचार-प्रसार</strong><br />किसानों के बीच जागरूकता की कमी भी इस समस्या को और बढ़ावा दे रही है। वैकल्पिक निपटान विधियों जैसे कि जैविक कम्पोस्ट निर्माण, मशीनरी आधारित अवशेष निपटान, या फिर प्राकृतिक खाद बनाने की तकनीकों का प्रचार-प्रसार नहीं हो पा रहा है। किसान अक्सर तात्कालिक और सरल उपायों की ओर रुख करते हैं, जिससे दीर्घकालिक पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित जागरूकता अभियानों की कमी ने भी इस प्रथा को जड़ जमाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p><strong>किसानों ने बताई अपनी समस्या</strong><br />इस मुद्दे पर स्थानीय किसानों की प्रतिक्रिया भी चिंता का विषय है। कई किसान बताते हैं कि वे नई तकनीकों के बारे में जागरूक नहीं हैं और पारंपरिक तरीकों से ही अवशेषों का निपटान करते हैं। उनका मानना है कि अगर प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान और तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है तो वे भी आसानी से वैकल्पिक उपाय अपना सकते हैं। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस प्रथा के कारण होने वाले प्रदूषण के दीर्घकालिक प्रभावों पर चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि बढ़ता प्रदूषण स्थानीय समुदायों में सांस संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। जिससे आम जनता पर भारी बोझ पड़ सकता है।</p>
<p><strong>नियमों का हो सख्ती से पालन </strong><br />स्थानीय प्रशासन की ओर से इस दिशा में तत्काल और ठोस कदम उठाने की अपील की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक है कि किसानों को वैकल्पिक निपटान विधियों के प्रशिक्षण और सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। इसके साथ ही नियमों का सख्ती से पालन करने और दंडों को कड़ाई से लागू करने से भी इस प्रथा में कमी आएगी। कई विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार और कृषि विभाग को मिलकर एक व्यापक योजना तैयार करनी चाहिए। जिससे किसान न केवल पर्यावरण के अनुकूल उपाय अपना सकें, बल्कि उन्हें इसके आर्थिक लाभ भी प्राप्त हों।</p>
<p>किसान फसल अवशेष नहीं जलाना चाहते। लेकिन उनके पास विकल्प नहीं हैं। सरकार सिर्फ रोक लगाती है, पर वैकल्पिक साधन, सब्सिडी या तकनीकी मदद नहीं देती। अगर मशीनें और जागरूकता मुहैया कराई जाए तो किसान भी पर्यावरण के हित में कदम उठाने को तैयार हैं। समस्या का हल दंड नहीं सहयोग है। <br /><strong>- प्रेम सिंह मीणा, जिला अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन </strong></p>
<p><br />हम मजबूरी में नरवाई जलाते हैं। सरकार जुर्माना लगाने से पहले विकल्प दे। छोटे किसानों के पास न मशीन है, न मजदूरी के पैसे। बिना मदद के ये नियम सिर्फ सजा बनकर रह जाएगा। <br /><strong>- उपेन्द्र मालव, किसान</strong></p>
<p>प्रदेश कृषि आयुक्तालय के निर्देशानुसार 19 नवंबर 2024 से फसल अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। भूमि स्वामित्व के अनुसार जुर्माने की राशि तय की गई है। 2 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों पर 5 हजार रुपए, 2 से 5 एकड़ के बीच वाले पर 10 हजार रुपए तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 30 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह निर्देश किसानों और पर्यावरण दोनों के हित में लिया गया है। मैं सभी किसानों से अपील करता हूं कि वे फसल अवशेष जलाने की बजाय वैज्ञानिक तरीकों से निपटान करें। ग्राम पंचायतें, कृषि विभाग और प्रशासन मिलकर किसानों को वैकल्पिक समाधान उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं पुलिस थानों के थानाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में इस निर्देश की सख्ती से पालना सुनिश्चित करें। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हमारा उद्देश्य किसानों को दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक कर पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। प्रशासन इस दिशा में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। <br /><strong>- सुरेन्द्र सिंह गुर्जर, तहसीलदार एवं विकास अधिकारी, छीपाबड़ौद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 16:11:18 +0530</pubDate>
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                <title>बीबीएफ पद्धति अपनाकर भारी बरसात में फसलें तबाह होने से बचाएं</title>
                                    <description><![CDATA[नाले को गहरा करने और साफ सफाई समय पर होती तो बच सकती भी फसलें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/save-crops-from-being-destroyed-in-heavy-rains-by-adopting-bbf-method/article-90378"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। दुगारी बांध के ओवरफ्लो की वजह से बांसी सहित आसपास के गांवों में खेतों में पानी भर गया और अन्नदाताओं की करोड़ों की फसल तबाह हो गई। कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का कहना है कि भारी बरसात से फसलों को बचाने के लिए किसानों को बीबीएफ पद्धति से (नाली व मेड विधि) सोयाबीन व उड़द की फसलों की बुवाई करनी चाहिए। जिससे अतिवृष्टि में ज्यादा बरसात होने की स्थिति में बरसात का पानी नालियों से बाहर निकल जाता है। फसले खराब होने से बच सकती है। इस पद्धति से फसलों की बुवाई करने से मध्यप्रदेश में बहुत उपयोगी साबित हो रही है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र में  दुगारी बांध का ओवरफ्लो का पानी की निकासी मोरी के सहारे बांसी के तालाब में पहुंच रहा है। बांसी के तालाब का ओवरफ्लो का पानी तीन जगह के नालों के सहारे निचले क्षेत्र मेज नदी में पहुंच रहा है। इस समय नालों की हालात देखी जाए तो लगता है कि यह नाले नही खेत नजर आते है। नाममात्र की जगह पर ही नाले नजर आ रहे है। क्षेत्र में इस समय लंबे समय से ही बारिश चल रही है। जिसका पानी, डैम व तालाब के ओवरफ्लो का पानी एक साथ नाले में बहाव होने से नालों में पानी ऊफान लेकर धरतीपुत्रों के खेतों में लबालब भरे हुए होने से यह पानी नालों में भी धीरे-धीरे निकलने से पानी खेतों की फसलों में अधिक समय तक रहने से हजारों बीघा फसलें बर्बाद हो गई है। संबंधित विभाग पानी निकासी की जगहों पर नालों का समय रहते नालों को अतिक्रमण से मुक्त करवाकर नालों की चौड़ाई व गहराई करवा देते तो तीन से चार गांव के धरतीपुत्रों की हजारों बीघा भूमि में धरतीपुत्रों की फसलें बच जाती तो धरतीपुत्रों को इसका नुकसान नहीं उठाना पड़ता। नालों की गहराई व चौड़ाई होने से बारिश का पानी खेतों का भी नाले मे पहुंच जाता व नाले ऊफान नही लेते व नुकसान की जगह फायदा मिलता। परिवार के भरण-पोषण में भी बाधाएं नही आती। </p>
<p> फसलें बर्बाद की एक वजह यह भी कि क्षेत्र में तालाबों के पानी निकासी के सभी जगहों पर नाले है। जिन पर नालों के दोनों तरफ के ही किसानों ने दोनों तरफ से अतिक्रमण भी कर लिया है। जो किसी जगह पर खेत बना दिया। किसी जगह पर संबंधित विभाग ने पट्टे जारी कर दिए। जिसमें मकान व बाड़े बना लिए। आबादी के अंदर संबंधित विभाग ने सड़कें बना दी। सड़कों की ऊंचाई होने से गांव के बाजारों में पानी अधिक ऊंचाई तक पहुंच गया। वही नालों को खेत का रूप देने से पानी ऊपरी क्षेत्र तक के खेतों तक पानी पहुंच गया। जो क्षेत्र में फसलें बर्बाद होने की यह वजह भी बताई जा रही है।  </p>
<p>बांसी के धरतीपुत्रों के खेतो में पानी भरने की समस्या का समाधान तीन जगह पर हो रहा है। तालाब की पानी निकासी के नाले की दस फीट गहरी व राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज नाले की चौड़ाई तक खुदाई हो जाए तो पूरे क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा नही होगें। पानी की निकासी बढे नालों तक पहुंचने से खेतों में जो पानी बारिश का होगा। वह भी इन्हीं में निकल जाएगा। इसका एक जगह का प्रयास मैंने किया था। नाले की गहराई हेतु स्वीकृति भी ली थी। पर कार्य शुरू करते ही खेत वालों ने आपत्ति जताते है। ऐसी स्थिति पास के खेत वालों ने नालों का मात्र नमूना रख रखा है। खेतों में मिलाने से नाले संकडे होते जा रहे है। तालाबों का ओवरफ्लो का पानी बारिश के साथ ही शुरू हो जाता है, जो पानी की निकासी में रूकावट पैदा हो जाती है।  बाढ़ जैसे हालत बन जाने से खेतों में फसलें लंबे समय तक जलमग्न हो जाती है। फसलें बर्बाद हो जाती है। संबंधित विभाग समय रहते सीमा ज्ञान करके नालों की गहराई व चौड़ाई बनाए तो समस्या का समाधान संभव है। <br /><strong>- सत्यप्रकाश शर्मा, सरपंच</strong></p>
<p><strong>ग्राम पंचायत बांसी </strong><br />दुगारी बांध का पानी जहां निचाई है, वही पर अधिक निकासी होती है। संबंधित विभाग ने गांव में सीसी सड़कों का निर्माण भी करवा दिया। जिससे पानी ऊंचाई तक पहुंच जाता है। नाले के आसपास की जगहों में भी विभाग ने पट्टे जारी करने से मकान बनने से चौड़ाई कम हो गई। गांव में पानी भरने की समस्या अधिक होती जा रही है। पानी निकासी के नालों की गहराई नही हुई, जो पानी फैलकर निकलने से खेतों की फसलें तक भरा रहता है। नाले में जितनी-सी जगह है, उसी आधार पर निकासी हो रही है। नालों का रिकॉर्ड राजस्व विभाग के पास है। नालों की गहराई होती तो तीनों गांव के किसानों की फसलें बर्बाद होने से बच जाती।<br /><strong>- पीसी मीणा, एईएन जलसंसाधन विभाग नैनवां</strong></p>
<p>पानी की समस्या से जो हालात पैदा हो रहे है। इस समस्या का समाधान व उचित जानकारी जल संसाधन विभाग को है। हमारे राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के नाले है। उनमें पानी निकासी में बाधा नजर आती है, तो बारिश रूकने पर समाधान के लिए देखा जाएगा। <br /><strong>- रामराय मीणा, तहसीलदार राजस्व विभाग नैनवां </strong></p>
<p>क्षेत्र में बारिश शुरू होने पर बारिश का बरसाती पानी फसल के खेत में इकट्ठा नही होना चाहिए है। बारिश जारी रहे, ऐसी स्थिति में बारिश का पानी खेत से निकलता रहे। प्रथम प्राथमिकता खेत की फसल के पानी निकासी की समुचित व्यवस्था हो तो फसल को बारिश से बचाया जा सकता है। बारिश के समय नालों का पानी भी खेतों में नही आए अगर पानी आता है, तो खेत की फसल में रहने से फसल की जड़े गलने लगेगी। धीरे-धीरे फसल सुखने लगेगी। फसल नष्ट हो जाती है, आसपास के नालों का पानी खेतों में फैलेगा तो पानी के साथ आने वाले कीटाणु भी सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचाता है, तो अन्य पानी भी पहले वाले खेतों में नही आना चाहिए। यही भारी बारिश से बचाव का उपचार है। <br /><strong>- प्रेमराज गौचर, सहायक कृषि अधिकारी बांसी  </strong></p>
<p>काश्तकारों को लंबी अवधी में तैयार होने वाली फसलों को तैयार करना चाहिए। जिससे अतिवृष्टि  होने पर भी फसल बच जाती है। वर्तमान में खेतों में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग ज्यादा हो रहा है।  जिससे मिट्टी कठोर हो हाती है। इस वजह से वह पानी को कम अवशोषित करती है।  किसानों को जैविद खाद का उपयोग करना चाहिए  जिससे मिट्टी में जल धारण बढ़ जाती है। जिससे खेतों में मिट्टी अधिक से अधिक पानी को अवशोषित करती है। अन्नदाताओं को मौसम विभाग की भारी बरसात की भविष्यावाणी को देखते हुए फसल बोने का चयन करना चाहिए। वर्तमान में काफी पहले ही भारी बरसात की चेतावनी आ जाती है। ऐसे में सीधी बुवाई वाली धान की फसल को बढ़ावा दे सकते है। अतिवृष्टि ज्यादा बरसात से सोयाबीन और उड़द की फसल को बचाने के लिए बीबीएफ पद्धति (नाली व मेड विधि) से बुवाई करे। इस पद्धति से बरसात का पानी नालियों से बाहर निकल जाता है। यह पद्धति मध्य प्रदेश में उपयोग में ली जाती है। जो काफी सफल साबित हो रही है। <br /><strong>- डॉ. नरेश कुमार शर्मा, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Sep 2024 14:34:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - अतिवृष्टि से फसल खराबे की विशेष गिरदावरी कराने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[ नवज्योति ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर किसानों की पीड़ा उजागर की थी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---instructions-to-get-special-girdawari-of-crop-damage-due-to-excessive-rain/article-90228"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिला कलक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी ने मंगलवार को सभी उपखंड अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक ली। इस दौरान जिले में अतिवृष्टि से फसल खराबा होने के सम्बंध में अधिकारियों से व्यापक चर्चा की गई। जिला कलक्टर ने उपखंड अधिकारियों और तहसीलदारों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि अतिवृष्टि से फसल खराबे की अविलम्ब विशेष गिरदावरी कराई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सोयाबीन, उड़द जैसी फसलों पर जहां नुकसान का अनुमान है उसे संवेदनशीलता से देखें। साथ ही उन्होंने किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या न होने देने पर जोर दिया।</p>
<p><strong>इन मामलों में भी दिए निर्देश</strong><br />जिला कलक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि 2 अक्टूबर तक सभी घुमंतु और अर्ध घुमंतु जातियों को पट्टे देने का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने वर्तमान में चल रहे पट्टा अभियान की समीक्षा करते हुए सभी अधिकारियों को समय पर आवेदन प्राप्त करने और आबादी विस्तार के प्रस्ताव जल्द तैयार करने के निर्देश दिए। डॉ. गोस्वामी ने एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) के तहत पात्र लेकिन वंचित परिवारों की सूची जल्द तैयार करने और उन्हें योजना से जोड़ने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के अंतर्गत नए मतदाताओं और वंचित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएं और इसके बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उजागर की थी किसानों की पीड़ा</strong><br />जिले में पिछले कुछ दिनों से बरसात का दौर जारी रहने से खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचने लगा था। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति के 10 सितम्बर के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर किसानों की पीड़ा उजागर की थी। इसमें बताया था कि बरसात के लगातार आने से फसलों की देखभाल नहीं हो पा रही। इससे फसलों में गलन रोग लग गया है। लगातार बरसात के चलते पानी खेतों में भर गया है। सोयाबीन, उड़द और मक्का की फसलों में अभी दाना पड़ने लगा है। लगातार बरसात के चलते अभी दाना पूर्ण अवस्था में नहीं आया। अगर फसलों को अभी कुछ दिनों तक तेज धूप नहीं मिली तो दाना पकेगा नहीं और फसलों का उत्पादन कमजोर रह जाएगा। कृषि विभाग ने जिले में बारिश के कारण कई स्थानों पर फसलों में 30 फीसदी नुकसान का आकलन किया था। इसके बाद जिला कलक्टर ने अधिकारियों को विशेष गिरदावरी करने के निर्देश दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Sep 2024 14:27:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बाढ़ और अतिवृष्टि से खराब फसल की होगी गिरदावरी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्व विभाग ने सभी जिला कलक्टर्स को पत्र जारी कर अपने अपने जिलों में अतिवृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान का आंकलन करने के आदेश दिए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/girdawari-will-be-done-for-crops-damaged-due-to-floods/article-89127"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/crops.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारी बारिश के कारण कई इलाकों में फसलें खराब होने के बाद किसानों को राहत देने के लिए राजस्व विभाग ने सीएम भजनलाल शर्मा के निर्देश पर अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों में गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के बाद किसानों को मुआवजा मिलने की उम्मीद बंधी है। सीएम के निर्देश के बाद राजस्व विभाग ने सभी जिला कलक्टर्स को पत्र जारी कर अपने अपने जिलों में अतिवृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान का आंकलन करने के आदेश दिए हैं। </p>
<p>राजस्व विभाग ने पत्र में लिखा है कि भारी बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने से किसानों की खरीफ की फसलें खराब हो गर्इं। जिन जिलों में ज्यादा बारिश हुई या ज्यादा खराबा हुआ। उन जिलों से जल्द से जल्द आॅनलाइन रिपोर्ट तैयार कराकर आपदा राहत प्रबंधन विभाग को भिजवाएं। गौरतलब है कि फसल खराबे के बाद किसानों की समस्या देखते हुए कई जनप्रतिनिधियों, विधायकों और सांसदों ने राज्य सरकार से गिरदावरी रिपोर्ट करने के लिए पत्र लिखे। </p>
<p>जनप्रतिनिधियों के साथ साथ मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सहकारिता विभाग और नाबार्ड के अफसरों की रिपोर्ट के आधार पर खरीफ की फसलों के खराबे का आंकलन कर किसानों को राहत पहुंचाने की जरूरत मानी गई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Aug 2024 10:24:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> भामाशाहमंडी में कृषि जिंसों की बम्पर आवक से बिगड़ी व्यवस्थाएं</title>
                                    <description><![CDATA[मंडी में भारी आवक के कारण कतार में खड़े जिंसों से भरे वाहनों को तीन से चार दिन में भी मंडी में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/arrangements-deteriorated-due-to-bumper-arrival-of-agricultural-commodities-in-bhamashahmandi/article-61627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/gan-(7).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दीपावली का त्यौहार नजदीक आने से कोटा संभाग की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी में कृषि जिंसों की आवक बढ़ती जा रही है। बम्पर आवक से मंडी परिसर फुल हो गया। इस कारण व्यवस्थाएं गड़बड़ाने लगी है। भामाशाहमंडी में मंगलवार को करीब 2 लाख 20 हजार कट्टे जिन्स की आवक हुई। कृषि जिन्स की भारी आवक से मंडी ठसाठस भर गई है। लगातार आवक होने से मंडी से अनाज का उठाव नहीं हो रहा है। ऐसे में किसानों को अपनी जिंस बेचने के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। दिनों-दिन धरतीपुत्रों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।</p>
<p><strong>फिर कैसे मनाएंगे दिवाली का त्यौहार</strong><br />दीपावली का त्यौहार कुछ दिन बाद है। इस कारण कोटा, बारां व झालावाड़ जिले सहित मध्यप्रदेश के किसान काफी संख्या में अपनी कृषि जिंस बेचने के लिए भामाशाहमंडी आ रहे हैं। कई किसान कृषि जिन्स से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व ट्रक लेकर कई दिन से मंडी के बाहर खड़े हैं, लेकिन उनका नम्बर नहीं आ पा रहा है। दीपावली की खरीदारी के लिए किसान जल्द से जल्द मंडी में अपनी कृषि जिन्स बेचना चाहते हैं। इसके बावजूद मंडी में प्रवेश नहीं मिलने के कारण परेशानी हो रही है। ऐसे में किसानों को चिंता सता रही है कि वे इस बार दीपावली की खुशियां कैसे मनाएंगे।</p>
<p><strong>मंडी में केवल रात में ही प्रवेश</strong><br />कृषि जिंस की बम्पर आवक के कारण मंडी प्रशासन ने वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित कर रखा है। माल का उठाव करने के लिए मंडी में कृषि जिंसों से भरे वाहनों की एंट्री केवल देर रात 3 से 6 बजे तक ही दी जा रही है। मंडी में भारी आवक के कारण कतार में खड़े जिंसों से भरे वाहनों को तीन से चार दिन में भी मंडी में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। इस समय सबसे ज्यादा धान की आवक हो रही है। मंगलवार को मंडी में करीब 1.75 लाख बोरी धान की नीलामी हुई। इतना ही धान मंडी के बाहर ट्रकों व ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भरा हुआ था। वर्तमान में 70 प्रतिशत धान मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आ रहा है। हाड़ौती अंचल से अभी मात्र 30 प्रतिशत ही आवक हो रही है।</p>
<p><strong>किसानों ने यूं बताई पीड़ा</strong><br />पांच दिन पहले भामाशाहमंडी से करीब एक किमी दूर वाहनों के पीछे कतार में अपना ट्रक खड़ा किया था। इसके बाद रोजाना रेंग-रेंग कर ही आगे बढ़ रहे हैं। मंगलवार को मंडी गेट से कुछ दूरी पर ही पहुंच पाए हैं। इतने दिन में भी केवल एक किमी की खिसक पाए हैं। अब मंडी मेें प्रवेश कब मिलेगा यह तो भगवान ही जाने। <br /><strong>- जौहरीलाल, किसान नीमच</strong></p>
<p>देर रात को मंडी गेट खोलते है और 5.30 व 6 बजे ही बंद कर देते है। कुछ गाडियां ही अन्दर लेते है। 5-6 दिन से ज्यादा हो गया कतार में लगे हुए। चालक व किसान परेशान हो रहा है। जब गेट खोलते है तो गाड़ी आगे लेने के चक्कर में झगड़े हो रहे और गाडिय़ों में भी नुकसान हो रहा है। भूखे प्यासे यहां बैठे हैं।  <br /><strong>-भरोसी जाटव, किसान मंदसौर</strong></p>
<p>वर्तमान में भामाशाहमंडी में कृषि जिंसों की ज्यादा आवक हो रही है। इससे मंडी की व्यवस्थाएं प्रभावित हो जाती है। सबसे ज्यादा आवक धान की हो रही है। वहीं मध्यप्रदेश से भी काफी माल आ रहा है। इसलिए माल के ज्यादा से ज्यादा उठाव करने के लिए वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित किया है। किसानों की समस्या के समाधान का प्रयास करेंगे। <br /><strong>- महेश खंडेलवाल, महासचिव, कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेन्ट एसोसिएशन </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Nov 2023 16:53:27 +0530</pubDate>
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                <title>फसल अवशेषों में लगाई जा रही आग, खेत हो रहे बंजर</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों को फसलों के अवशेषों में आग लगाने के नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/crop-residues-are-being-set-on-fire--fields-are-becoming-barren/article-59874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/fasal-avshesho-me-lgayi-ja-rhi-aag,-khet-ho-rhe-banjar...rajpur,-baran-news...18-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>राजपुर। क्षेत्र में किसान खेतों में पड़े फसल के अवशेषों में आग लगा रहे है। जिससे निकलने वाले धुएं से वातावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है एवं किसानों के खेत की उर्वरक शक्ति कम हो रही है। आदिवासी अंचल क्षेत्र में इस साल कम बारिश हुई है। इससे नदी तालाब तो खाली पड़े हुए हैं। वहीं जानवरों के लिए भी चारे की किल्लत बनी हुई है। ऐसे में मक्का, तेली सोयाबीन उड़द की फसल की कटाई कर जींस को मंडी में बेच दिया है और खेतों में पड़े फसलों के अवशेषों में अब किसान आग लगाकर अगली फसल की तैयारी करने में लगा हुआ है। ऐसे में कई किसानों को आगजनी की घटना से नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। प्रकाशचंद, शिवकुमार, खुश रंजन सहित कई पशुपालकों का कहना है कि इस बार बारिश कम होने के कारण चारे की पहले से ही जानवरों को किल्लत है। ऐसे में अब किसान खेतों में पड़े फसल के अवशेषों में आग लगाने में जुटा हुआ है। इससे आसमान में हर तरफ धुंआ ही धुंआ नजर आ रहा है तथा इससे निकलने वाले धुएं से वातावरण प्रदूषित हो रहा है एवं किसानों के खेत की उर्वरक शक्ति कम हो रही है। फसल मित्र कीट भी जलकर नष्ट हो रहे हैं और धुएं से सांस के मरीजों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। </p>
<p>ऐसे किसानों के खिलाफ प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके चलते इनके हौसले बुलंद हो रहे हैं और फसलों के अवशेषों में आग लगाने में लगे हुए हैं अगर इनके खिलाफ कोई उचित कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जाए तो कहीं ना कहीं किसान फसलों के अवशेषों में आग नहीं लगाएंगे और क्षेत्र में आगजनी की घटना भी नहीं होगी। रविवार को ही कुशियारा गांव के पास एक किसान की मक्का की फसल जलकर आग से नष्ट हो गई थी जिसमें करीब दो ढाई लाख रुपए का नुकसान किसान को झेलना पड़ा था। जिला प्रशासन ऐसे लापरवाह किसानों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को दिशा निर्देश भी दे रखे हैं कि कोई भी किसान खेतों में फसलों के अवशेषों में आग लगाता पाया जाता है तो उसके खिलाफ फिर कर जुर्माना किया जाए। किसानों को फसलों के अवशेषों में आग लगाने के नुकसान के बारे में कोई जानकारी दी जा रही है। ऐसे में आदिवासी अंचल क्षेत्र के कई किसानों को फसलों के अवशेषों में खेत में आग लगाने के नफा और नुकसान की भी जानकारी नहीं मिल पा रही है और किसान फसल के अवशेषों में आए दिन आग लगाकर खेतों की सफाई कर दूसरी फसल की बुवाई की तैयारी में जुटा हुआ है।</p>
<p>फसलों के अवशेषों में जो किसान आग लगाकर नष्ट करते हैं। ऐसे किसानों के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए ताकि अवशेषों में आग नहीं लगाई जाए। जानवरों को पर्याप्त मात्रा में चार मिल सके, इसलिए किसानों को चारा अपने खेतों से बाहर डालना चाहिए।<br /><strong>- बसंत कुमार खंगार, पशुपालक।</strong></p>
<p>किसान फसलों के अवशेषों में आग लगाकर खुद को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। जमीन की उर्वरा शक्ति कम होती है। साथ ही किट मित्र जमीन के होते हैं वह भी मर जाते हैं और उक्त किसने की भूमि में फिर उत्पादन की कमी भी आती है। ऐसे में किसान भाइयों को खेतों में आग नहीं लगना चाहिए।<br /><strong>- नंदकुमार भार्गव, जिला महामंत्री, किसान महापंचायत।</strong></p>
<p>फसलों के अवशेषों में लोगों को आग नहीं लगना चाहिए। इससे क्षेत्र में चारे की कमी आएगी। मवेशी परेशान रहेंगे। जमीन को भी नुकसान होगा जमीन का उपजाऊ खत्म हो जाएगा। लोगों को इसके प्रति जागरूक होना चाहिए।<br /><strong>- सुरेश ओझा,  किसान।</strong></p>
<p>खेतों में पड़े फसलों के अवशेषों में अगर कोई भी किसान आग लगाता पाया जाता है और सूचना मिलती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही सजा और जुर्मानें का भी प्रावधान है। क्षेत्र में सुपरवाइजरों को निगरानी रखने के निर्देश दे रखे हैं ताकि कोई किसान खेतों में पड़े फसलों के अवशेषों में आग नहीं लगाए।<br /><strong>- नीरज शर्मा, सहायक कृषि अधिकारी, शाहाबाद।    </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Oct 2023 15:31:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बरसात से कटाई के बाद रखी फसल खराब होने पर मिल सकेगा बीमा क्लेम, 72 घण्टे में देनी होगी सूचना</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि आयुक्त गौरव अग्रवाल ने विभागीय अधिकारियों एवं बीमा कम्पनियों को तत्काल फील्ड में पहुंचकर फसल खराबे का सर्वे प्रारंभ करने के निर्देश दिये है, ताकि प्रभावित किसानों को बीमित फसलों के नुकसान का क्लेम दिलवाकर राहत प्रदान की जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/insurance-claim-will-be-available-if-the-crop-stored-after/article-57450"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/crops.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में वर्तमान में हो रही बरसात से कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत नुकसान की भरपाई हो सकेगी, जिसके लिए प्रभावित बीमित फसल के काश्तकार को 72 घण्टे के भीतर खराबे की सूचना सम्बन्धित जिले में कार्यरत बीमा कम्पनी को देनी होगी। कृषि विभाग नेें बीमा कम्पनियों को तत्काल सर्वे कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं।</p>
<p>कृृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि राज्य में कुछ स्थानों पर असामयिक वर्षा के कारण खरीफ की फसलों में नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत असामयिक वर्षा के कारण फसल कटाई उपरान्त खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को 14 दिन की अवधि में नुकसान होने पर व्यक्तिगत आधार पर बीमा आवरण उपलब्ध है। कटारिया ने बताया कि असामयिक वर्षा से प्रभावित काश्तकारों के लिए बीमित फसल के नुकसान की सूचना 72 घण्टे के भीतर जिले में कार्यरत बीमा कम्पनी को देना जरूरी है, ताकि नुकसान का आंकलन कर बीमा क्लेम देने की कार्यवाही की जा सके। उन्होंने बताया कि फसल में हुए नुकसान की सूचना बीमा कम्पनी के टॉल फ्री नम्बर या क्रॉप इंश्योरेन्स ऐप के माध्यम से दी जा सकती है। इसके अलावा प्रभावित किसान जिले में कार्यरत बीमा कम्पनी, कृृषि कार्यालय अथवा सम्बन्धित बैंक को भी हानि प्रपत्र भरकर सूचना दे सकते है। </p>
<p>कृषि आयुक्त गौरव अग्रवाल ने विभागीय अधिकारियों एवं बीमा कम्पनियों को तत्काल फील्ड में पहुंचकर फसल खराबे का सर्वे प्रारंभ करने के निर्देश दिये है, ताकि प्रभावित किसानों को बीमित फसलों के नुकसान का क्लेम दिलवाकर राहत प्रदान की जा सके।</p>
<p><strong>किसान इन टॉल फ्री नम्बरों पर दे सकते हैं सूचना</strong><br />कृषि मंत्री कटारिया ने राज्य में कार्यरत बीमा कम्पनियों की जानकारी देते हुए बताया कि अलवर, बूंदी और श्रीगंगानगर जिले के किसान क्षेमा जनरल इंश्योरेन्स कम्पनी के टॉल फ्री नम्बर 18005723013 पर सूचना दे सकते है। इसी प्रकार भरतपुर, चूरू, डूंगरपुर, जालौर, करौली, राजसंमद और टोंक जिले के किसान रिलाइन्स जनरल इंश्योरेन्स कम्पनी के टॉल फ्री नम्बर 18001024088 पर तथा अजमेर, बांसवाडा, बांरा, बाडमेर, भीलवाडा, बीकानेर चित्तौडगढ, दौसा, धौलपुर, हनुमानगढ, जयपुर, जैसलमेर, झालावाड, जोधपुर, झुन्झूनू, कोटा, नागौर, पाली, प्रतापगढ, सवाईमाधोपुर, सीकर, सिरोही एवं उदयपुर जिले के किसान एग्रीकल्चर इंश्योरेन्स कम्पनी ऑफ इण्डिया लि0 के टॉल फ्री नम्बर 18001809519 पर सूचना दे सकते है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Sep 2023 20:38:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेब महंगाई से लाल, अनार के दाम में भी उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[देश के सबसे बड़े सेब उत्पादक राज्य हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस बार बारिश और बर्फबारी के कारण सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/apple-red-due-to-inflation--price-of-pomegranate-also-increased/article-54948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/seb-mehngayi-s-laal,-anaar-k-daam-me-bhi-uchaal...kota-news-photo-19-08-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बारिश की मार सिर्फ टमाटर और हरी सब्जियों पर ही नहीं पड़ी है, बल्कि सेब उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान हुआ है। हिमाचल प्रदेश में बारिश की वजह से 30 प्रतिशत से अधिक सेब की फसल बर्बाद हो गई है। इस कारण कोटा जिले में सेब के दाम में भारी उछाल आ गया है। शहर की प्रमुख मंडी में सेब के दाम 100 से 140 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं। वहीं अनार के दाम में भी तेजी बनी हुई है। इसके दाम भी 140 रुपए किलो हो गए हैं।</p>
<p><strong>फल व सब्जी के दाम</strong><br />सेब    100-140<br />अनार    80-140<br />केला    30-40<br />टमाटर    60-70 <br />भिंडी    40-60<br />अदरक    130-140 <br />बैंगन    40-60<br />मिर्च     40-60<br />फूल गोभ    60-80<br />टिंडा    40-60<br />अरबी    40-60<br />मूली    50-60<br />(भाव रुपए प्रति किलो)</p>
<p><strong>सेब की आपूर्ति प्रभावित</strong><br />देश के सबसे बड़े सेब उत्पादक राज्य हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस बार बारिश और बर्फबारी के कारण सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इस कारण उत्पादन में कमी आने से बाजार में सेब की आपूर्ति पर प्रभाव पड़ा है। जिससे सेब की कीमतें में भारी उछाल आया है। इससे आमजन को महंगे सेब खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय फल व्यापारियों ने बताया कि कोटा में सेब की सबसे ज्यादा आवक हिमाचल प्रदेश से होती है। गत दिनों वहां हुई भारी बारिश के कारण सेब के बाग नष्ट हो गए हैं। जिससे  कोटा में सेब की आवक कम होने लगी है। इस कारण दाम में तेजी आई है। </p>
<p><strong>मंडी में तेजी से बढ़े दाम</strong><br />धानमंडी स्थित फल व्यापारी अशोक कुमार ने बताया कि मंडी में कुछ दिन पहले सेब 70 से 90 रुपए किलो बिक रहा था। पूर्व में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से सेब आ रहा था। इस कारण सेब के दाम स्थिर थे। कुछ दिनों पहले हिमाचल प्रदेश में बारिश से सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इस कारण वहां से सेब की आवक बंद हो गई है। इस समय केवल उत्तराखंड से सेब आ रहा है। इसलिए सेब के दाम 100 से 140 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं। इसके साथ अनार के दाम में भी उछाल बना हुआ है। फल मंडी में अच्छी किस्म का अनार 90 से 140 रुपए किलो के बीच मिल रहा है।</p>
<p><strong>इधर किचन में होने लगी टमाटर की एंट्री</strong><br />इधर स्थानीय सब्जीमंडी में टमाटर के दामों में निरन्तर गिरावट हो रही है। कोटा शहर में जो टमाटर 200 रुपए प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया था उसके दाम शुक्रवार को थोक फल सब्जी मण्डी में 60 से 70 रुपए प्रतिकिलो पर आ गए। भावों में आई नरमी से अब मंडी में हर सब्जी की दुकान में टमाटर दिखाई देने लगा है।  बारिश के चलते टमाटर की फसल को खासा नुकसान पहुंचने से मार्केट में कमी हो गई थी और दाम चार गुना महंगे हो गए थे।अब टमाटर के दामों में गिरावट हो रही है। मंडी में टमाटर के प्रमुख व्यापारी शब्बीर वारसी ने बताया कि एक सप्ताह पहले टमाटर की आवक 1300 से 1500 कैरेट प्रतिदिन हो रही थी। वहीं अब बैंगलुरु व शिमला से करीब 2000 कैरेट टमाटर की आवक हो रही है। आवक बढ़ऩे से दाम कम हुए हैं। </p>
<p><strong>चाय में आया अदरक का स्वाद </strong><br />महंगाई के दौर में अदरक ने भी चाय से दूरी बना ली थी। अदरक के दाम 250 रुपए प्रतिकिलो पर पहुंच गए थे। जिससे चाय से अदरक का स्वाद चला गया था। घर से लेकर चाय की दुकान तक अदरक दूर हो गई थी। लेकिन अब महंगाई कम हुई तो स्वाद वापस दिखने लगा है। शुक्रवार को मंडी में अदरक 140 रुपए प्रति किलो बिक रहा था। हालांकि अभी भी ग्राहक ज्यादा अदरक नहीं ले रहे हैं। कोटा की मंडी में इन दिनों जयपुर व दिल्ली से नई अदरक की आवक शुरू हो गई है। इसके कारण अदरक के भाव में कमी आई है।</p>
<p>पहले टमाटर महंगा होने के कारण घर की रसोई से टमाटर का स्वाद गायब हो गया था। अब सेब के दाम में तेजी आने लगी है। हर माह कोई न कोई सब्जी या फल में तेजी आती रहती है। खाने की चीजों में अब लगातार महंगाई होती जा रही है। <br /><strong>- उमा तोमर, गृहिणी</strong></p>
<p>पिछले एक महीने से घर की रसोई से टमाटर और अदरक का स्वाद ही फीका हो गया था, लेकिन अब इनके दाम में कमी आई है। अब सेब व अनार के दाम बढ़ने लगे हैं। फिलहाल सेब व अनार खरीदने से दूरी बना रखी है।<br /><strong>- पारुल वर्मा, गृहिणी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2023 15:37:35 +0530</pubDate>
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                <title>एक साल से कागजों में ही घूम रही राहत</title>
                                    <description><![CDATA[अभी तक बीमा कंपनियों ने किसानों के बीमे की राशि नहीं दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/relief-roaming-on-paper-for-one-year/article-50376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/ek-saal-se-kaagazo-mei-hi-ghoom-rahi-rahat..itawa-news-kota-..29.6.2023.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। पीपल्दा तहसील क्षेत्र में पिछले वर्ष 2022 की खरीफ की फसल के खराबे के लिए सरकार द्वारा किसानों को दी जाने वाली आदान-अनुदान की राशि लगभग एक वर्ष करीब होने का आया, लेकिन कागजों में ही घूम रही है।  इटावा नगर में खरीफ फसल अतिवृष्टि के चलते पूरी तरह खराब हो गई थी। किसानों को 33 प्रतिशत से अधिक फसल खराब होने के बाद किसानों को राहत राशि दी जाती है। लेकिन इटावा सहित क्षेत्र के कई स्थानों के किसानों को अभी तक यह राशि नहीं मिल सकी है। </p>
<p><strong>फसल बीमा के नाम पर भी छलावा</strong><br />दूसरी तरफ फसल बीमा के नाम पर किसानों से बैंकों व अन्य माध्यमों से बीमा प्रीमियम वसूल की जाती है। लेकिन फसल खराब होने के बाद भी किसानों को पर्याप्त क्लैम राशि नहीं मिल पाती। जबकि इस बार जहां अतिवृष्टि से खरीफ की फसलें खराब हुर्इं, वहीं मौसम के साथ नहीं देने के कारण रबी की फसलों में भी पर्याप्त उत्पादन नहीं हुआ। लेकिन अभी तक बीमा कंपनियों ने किसानों के बीमे की राशि नहीं दी है। </p>
<p><strong>इटावा के किसानों को पहले भी नहीं मिली राशि</strong><br />किसानों ने बताया कि वर्ष 2019 के फसल खराबे के बाद भी किसानों के कागज जमा होने के बाद भी कोई अभी तक कोई राशि नहंी मिल पाई। इसी तरह 2022 में भी खरीफ की फसलें पूरी तरह खराब हुई थीं। उसके बाद हल्का पटवारी के यहां किसान अपने दस्तावेज जमा करा चुके हैं। लेकिन उसके बाद भी किसानों को सरकार से मिलने वाली यह राहत राशि नही मिल पाई। </p>
<p><strong>किसान संगठन कई बार उठा चुके हैं मांग</strong><br />किसानों को अभी तक यह राशि नहीं मिलने को लेकर कई बार भारतीय किसान संघ व किसान सभा संगठन अधिकारियों के सामने मांग उठा चुके हैं। जल्द राशि दिलाने का आश्वासन तो मिलता है, लेकिन अभी तक राशि तक नहीं मिली।</p>
<p>आदान-अनुदान की राशि के लिए जो पात्र किसान हैं, उनके लिए दस्तावेज हल्का पटवारी व पीपल्दा तहसील से जिला कलक्टर की आईडी पर भेज दी गई है। कुछ किसानों को मिल गई है। जिनको नहीं मिली है, उनकी कार्यवाही जारी है। <br /><strong>-रामकिशोर मीना, तहसीलदार, पीपल्दा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2023 16:37:05 +0530</pubDate>
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                <title>तेज अंधड़ से ककड़ी, तुरई, खीरा, कद्दू की फसलों को नुकसान </title>
                                    <description><![CDATA[ वर्तमान समय में सिर्फ सब्जियां और जानवरों का चारा ही खेतों में लगा हुआ है। बरसात से अब तक सब्जियों को काफी नुकसान का अनुमान है, लेकिन जानवरों के चारे को बरसात से काफी फायदा होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/damage-to-the-crops-of-cucumber-ridge-gourd-and-pumpkin/article-46583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/x-3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में बिन मौसम बरसात से ककड़ी, खीरा, कद्दू, टिंडा, प्याज, टिमाटर-मिर्ची की फसल को काफी नुकसान का अनुमान है। तेज अंधड़ से पेड़ों पर लगी कैरी झड़ गई। टमाटर-मिर्ची की फसल में भी कीड़ा लगने की आशंका बनी हुई है। प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ से हो रही बरसात से किसान को काफी नुकसान का अनुमान है। प्याज की फसल अभी पूरी तरह भूमि से बाहर नहीं निकली है, लेकिन अब बारिश से प्याज की गुणवक्ता पर काफी विपरीत असर पड़ने के साथ ही फसल खराब हो जाएगी। </p>
<p><strong>जानवरों के चारे को हुआ फायदा</strong><br />वर्तमान समय में सिर्फ सब्जियां और जानवरों का चारा ही खेतों में लगा हुआ है। बरसात से अब तक सब्जियों को काफी नुकसान का अनुमान है, लेकिन जानवरों के चारे को बरसात से काफी फायदा होगा। प्रगतिशील किसान नन्दकिशोर चौधरी ने बताया कि बरसात से सभी सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचा हैं।</p>
<p><strong>बारिश से कचरा फिर नालों में पहुंचा</strong><br />शहर में मानसून से पूर्व नालों की सफाई का कार्य किया जा रहा है, लेकिन कचरा समय पर नहीं उठ पा रहा है। इसके चलते बुधवार को शहर में हुई बारिश के चलते नालों से निकाला गया कचरा फिर से नालों में चला गया और नाले फिर से जाम हो गए। नगर निगम जयपुर ग्रेटर एवं हेरिटेज में 1300 से अधिक छोटे बड़े नाले है और इन नालों की सफाई के लिए दोनों निगमों में टेंडर जारी कर सफाई कार्य तो शुरू करवा दिया, लेकिन नालों की सफाई के बाद समय पर कचरा मौके से नहीं उठ पा रहा है। इसके चलते अचानक हुई बारिश के बाद फिर से कचरा नालों में पहुंच गया। इसके लेकर निगम अधिकारियों ने संबंधित फर्मो को समय पर कचरे के उठाव के निर्देश दिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 10:04:30 +0530</pubDate>
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