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                <title>transport - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>सीएम रेड्डी ने जताया आरटीसी के चालक शंकर की मौत पर शोक : मदद का दिया आश्वासन, परिवार को शक्ति और साहस मिलने की प्रार्थना की</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आरटीसी चालक शंकर गौड़ के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन देते हुए आरटीसी कर्मचारियों की समस्याओं को ईमानदारी से सुलझाने की प्रतिबद्धता दोहराई। सीएम ने भावुक होते हुए लोगों से आवेश में आकर आत्मघाती कदम न उठाने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-reddy-expressed-grief-over-the-death-of-rtc-driver/article-151529"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/telengana-cm.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को सड़क परिवहन निगम (आरटीसी) के चालक शंकर गौड़ की मौत शोक व्यक्त किया। रेड्डी ने अपने शोक संदेश में शोक संतप्त परिवार को आश्वासन दिया कि वे उनके साथ खड़े हैं और सरकार उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने शंकर गौड़ की आत्मा की शांति के लिए और उनके परिवार के सदस्यों को इस क्षति का सामना करने के लिए शक्ति और साहस मिलने की प्रार्थना की।</p>
<p>मुख्यमंत्री कहा कि आवेश में लिया गया एक क्षणिक निर्णय परिवार को गहरे दुख में डुबो गया। उन्होंने दोहराया कि सरकार आरटीसी कर्मचारियों के साथ बातचीत कर रही है और उनकी समस्याओं को हल करने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास कर रही है। गौरतलब है कि आरटीसी कर्मचारियों ने गुरुवार को तेलंगाना में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान नरसंपेट आरटीसी डिपो के चालक शंकर गौड़ ने कथित तौर पर नरसंपेट बस स्टैंड के सामने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली थी, जिनका आज इलाज के दौरान मृत्यु हो गयी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 10:32:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मांगों को लेकर निजी बसों का चक्काजाम : परिवहन आयुक्त को सौंपा जाएगा ज्ञापन, यात्री रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[नावों में निजी बसों के किराए को पड़ोसी राज्यों के समान करने तथा चुनाव ड्यूटी में लगे वाहनों का टैक्स माफ  करने सहित 14 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/a-memorandum-will-be-submitted-to-the-transport-commissioner-regarding/article-140762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/bus.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। टूरिस्ट, पर्यटन वाहन एवं स्टेज कैरिज बसों से लगेज कैरियर नहीं हटाने, चुनावों में निजी बसों के किराए को पड़ोसी राज्यों के समान करने तथा चुनाव ड्यूटी में लगे वाहनों का टैक्स माफ<span>  </span>करने सहित 14 सूत्रीय मांगों को लेकर निजी बसों का प्रदेशभर में चक्का जाम रहा। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। राजस्थान में निजी बस आूपरेटरों ने परिवहन विभाग की नीतियों और कार्रवाई को लेकर रुख अपनाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी और शनिवार को निजी बसों का चक्का जाम रहा। प्रदेश बस ऑपरेटर एसोसिएशन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सत्य नारायण साहू ने कहा कि टूरिस्ट, पर्यटन वाहन एवं स्टेज कैरिज बसों से लगेज कैरियर नहीं हटाने, चुनावों में निजी बसों के किराए को पड़ोसी राज्यों के समान करने तथा चुनाव ड्यूटी में लगे वाहनों का टैक्स माफ<span>  </span>करने सहित 14 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखी। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बस ऑपरेटरों ने लोक परिवहन सेवा के परमिट की अवधि 10 वर्ष करने, नई परमिट प्रक्रिया में पुरानी बस की शर्त तय करने, स्लीपर कोच और टूरिस्ट बसों पर नया टैक्स लागू करने, टीपी की वैधता 24 घंटे करने तथा उपनगरीय क्षेत्रों में नए मार्ग जोड़ने की मांगें भी की है। उन्होंने बताया कि अब 28 जनवरी को प्रदेशभर के बस ऑपरेटर्स शहीद स्मारक पर पैदल मार्च करेंगे और परिवहन आयुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/a-memorandum-will-be-submitted-to-the-transport-commissioner-regarding/article-140762</link>
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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 12:08:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीडीपी वृद्धि दर दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत, सेवा और विनिर्माण का जोरदार प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[जुलाई–सितंबर 2025 तिमाही में भारत की GDP 8.2% बढ़ी, जो अनुमानों से अधिक है। सेवा और विनिर्माण क्षेत्र ने 9% से अधिक की वृद्धि दर्ज की। निजी खपत बढ़ी, जबकि सरकारी खर्च थोड़ा घटा। यह जनवरी–मार्च 2024 के बाद सबसे तेज आर्थिक विस्तार माना जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gdp-growth-rate-82-percent-in-second-quarter-strong-performance/article-134031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/gdp.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। इसमें सेवा क्षेत्र और विनिर्माण की वृद्धि दर नौ प्रतिशत से अधिक रही। इस दौरान निजी खपत में तेजी दर्ज की गयी जबकि सरकारी खपत में एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में हल्की गिरावट रही।</p>
<p>केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दूसरी तिमाही में स्थिर मूल्य पर आधारित जीडीपी 48.63 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की समान तिमाही के 44.94 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 8.2 प्रतिशत अधिक है। यह जनवरी-मार्च 2024 तिमाही के बाद सबसे तेज बढ़ोतरी है। इससे पहले, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही-अप्रैल-जून 2025 के दौरान जीडीपी 7.8 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 5.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा था।</p>
<p>आलोच्य तिमाही में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र की 9.1 प्रतिशत दर्ज की गयी। वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवा क्षेत्र में 10.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में अप्रैल-सितंबर 2025 के दौरान जीडीपी वृद्धि दर आठ प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गयी। पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 6.1 प्रतिशत और दूसरी छमाही में 6.9 प्रतिशत रही थी।</p>
<p>विशेषज्ञों ने बताया कि, पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की विकास दर देश की अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती को दिखाती है। उन्होंने कहा कि मांग की स्थिति मजबूत बनी हुई है। जीडीपी में तेज वृद्धि को पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारक द्वितीयक क्षेत्र का प्रदर्शन है जिसमें विनिर्माण भी शामिल है। इस क्षेत्र में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गयी जो पहली तिमाही में 7.0 प्रतिशत रही थी। इसमें विनिर्माण की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत से बढ़कर 9.1 प्रतिशत; बिजली, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य यूटिलिटी सेवाओं की 0.5 से बढ़कर 4.4 प्रतिशत; और निर्माण की 7.6 से घटकर 7.2 प्रतिशत रह गयी। </p>
<p>प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि दर पहली तिमाही के 2.8 फीसदी की तुलना में दूसरी तिमाही में 3.1 प्रतिशत दर्ज की गयी। इसमें कृषि, पशुधन, वानिकी और मत्स्यपालन में 3.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि पहली तिमाही में यह 3.7 प्रतिशत बढ़ा था। दूसरी तिमाही में सेवा क्षेत्र में वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा और यह 10.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा। पहली तिमाही में यह 9.5 प्रतिशत बढ़ा था। व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण सेवाओं की वृद्धि दर 8.6 फीसदी से घटकर 7.4 प्रतिशत रह गयी। लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाओं की वृद्धि दर भी 9.8 फीसदी से गिरकर 9.7 फीसदी हो गयी। सेवा क्षेत्र की कुल वृद्धि दर 9.3 फीसदी से घटकर 9.2 फीसदी रह गयी।</p>
<p>जीडीपी के तहत व्यय के कारकों में आयात सबसे अधिक 12.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा। निजी अंतिम उपभोग व्यय में 7.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि सरकारी अंतिम उपभोग व्यय में 2.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 7.3 प्रतिशत वृद्धि हुई। निर्यात भी 5.6 प्रतिशत बढ़ा। पहली छमाही के दौरान सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 9.3 प्रतिशत और विनिर्माण की 8.4 प्रतिशत रही। कृषि क्षेत्र में 3.6 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि खनन में 1.8 प्रतिशत की गिरावट रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:11:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सात साल से नहीं बना ढगारिया नहर मार्ग, फसल तैयार, खेतों से निकालना मुश्किल, किसानों की बढ़ी परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[मार्ग पर गहरे गड्ढे होने से कई बार उपज से भरी ट्रॉली पलटने से किसानों का होता है नुकसान ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-dhagaria-canal-road-has-not-been-constructed-for-seven-years--the-crops-are-ready-for-harvest--but-it-s-difficult-to-get-them-out-of-the-fields--increasing-the-problems-for-farmers/article-131315"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(10).png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के छप्पनपुरा, ढगारिया, रेबारपुरा, पापड़ली, खोता, लक्ष्मीपुर और पचीपला गांवों को जोड़ने वाला ढगारिया नहर मार्ग पिछले सात वर्षों से बदहाल हालात में है। सड़क पर वर्षों से ग्रेवल नहीं डाले जाने के कारण यह गड्ढों और कीचड़ से भरी पड़ी है। बरसात के बाद स्थिति और भी खराब हो गई है, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>फसल तैयार, पर रास्ता बना मुसीबत</strong><br />करीब 3000 बीघा जमीन के किसानों की आजीविका इस मार्ग पर निर्भर है, लेकिन सड़क की जर्जर हालत के चलते खेतों से फसल निकालना कठिन हो गया है। छप्पनपुरा निवासी गिरिराज मीणा, ढगारिया के विष्णु कुमार, रेबारपुरा के सुरेश रायका, पापड़ली के भंवरसिंह और खोता के लेखराज सैनी ने बताया कि मार्ग पर इतने गहरे गड्ढे हैं कि ट्रैक्टर-ट्रॉली तक निकालना जोखिमभरा हो गया है। कई बार उपज से भरी ट्रॉली पलटने से किसानों को नुकसान झेलना पड़ा है।</p>
<p><strong>प्रशासन से कई बार गुहार, पर सुनवाई नहीं</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि वे बार-बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवगत करा चुके हैं, पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र ग्रेवल निर्माण नहीं कराया गया तो फसल को मंडी तक पहुंचाना चुनौती बन जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ढगारिया नहर मार्ग का शीघ्र सुधार कार्य शुरू कराया जाए, ताकि किसानों और ग्रामीणों को राहत मिल सके।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यह मार्ग क्षेत्र के कई गांबो को जोड़ने के साथ साथ सैंकड़ों किसानों के खेतों में आवाजाही का एक मात्र रास्ता है प्रशासन को प्राथमिकता से यंहा सड़क निर्माण करवाना चाहिए सीएडी व सम्बंधित विभाग को प्रस्ताव भिजवा रखें है। <br /><strong>- के.सी. वर्मा, जिला परिषद सदस्य। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 17:08:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हे भगवान, जान की कीमत पैसों से ज्यादा कब होगी,कोटा शहर में  लगभग 80 बसें रजिस्टर्ड, सुरक्षा नियमों की नहीं कर रहे पालना</title>
                                    <description><![CDATA[परिवहन विभाग ने की पांच बसों पर कार्रवाई, मानक अनुरूप नहीं थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/oh-god--when-will-life-be-more-valuable-than-money--nearly-80-buses-are-registered-in-kota-city--yet-they-are-not-following-safety-rules/article-129846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/5246.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर एसी बस में शॉर्ट-सर्किट से लगी आग में 22 यात्रियों की मौत के बाद प्रशासन नींद से जागा है। वहीं, परिवहन विभाग ने कोटा सहित पूरे राजस्थान में सभी परमिटधारी बसों की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि  दैनिक नवज्योति ने कई प्रमुख खबरों का प्रकाशन कर ऐसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नकारा संसाधन निजी बसों की मनमानी को लेकर चेताया था। वहीं कोटा शहर में स्लीपर और एसी बसों की सुरक्षा हालात अभी भी चिंताजनक हैं। दैनिक नवज्योति ने जब जांच-पड़ताल की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई बसें बिना परमिट या अपूर्ण फिटनेस सर्टिफिकेट के सड़कों पर दौड़ रही थीं। फायर सेफ्टी उपकरण का अभाव, संकरी गैलरी और ठीक से न खुलने वाले शटर यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बता दें कि कोटा शहर में लगभग 80 बसें रजिस्टर्ड है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निजी बसों में जान-माल का सर्वाधिक खतरा बना रहता है। डीटीओ सुरेन्द्रसिंह राजपुरोहित ने बताया कि कोटा में जांच की गई बसों में इमरजेंसी गेट या निकासी द्वार पर अवरोध पाया गया। नाकाबंदी के दौरान ऐसे बसों पर कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को हुई नाकाबंदी में पांच बसों को यात्रियों की सुविधा के अनुरूप न पाए जाने पर कार्रवाई की गई।</p>
<p><strong> दैनिक नवज्योति लगातार चेता रहा, नहीं दिया जा रहा ध्यान</strong><br />दैनिक नवज्योति निजी स्लीपर बसों में दुर्घटना के खतरे को लेकर दो साल से लगातार चेता रहा है। स्थिति  यह है कि 8 जुलाई 2023 को ही दैनिक नवज्योति ने अलर्ट प्रकाशित किया था, एक पल में मौत की नींद सुला सकती हैं बसें शीर्षक से खबर प्रकाशित कर संभावित खतरे से आगाह किया था। इसके बाद 16 दिसम्बर को फिर स्लीपर बसों में मुसाफिरों की जान खतरे में शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इतना ही नहीं इसके बाद लगातार नवज्योति ने इस मुद्दे पर यातायात प्रशासन और बस मालिक, चालक, यात्री सभी की सुरक्षा को लेकर संभावित खतरा टालने को कई समाचार प्रकाशित किए।   </p>
<p><strong>बिना सेफ्टी दौड रही बसों को रोकने की जिम्मेदारी किस की? कैसे चल रही थी? </strong><br />राज्य में हाल ही में हुई बस दुर्घटनाओं के बाद सुरक्षा जांच और मानकों को लेकर बस संचालकों ने विरोध जताया है। बस संचालकों का कहना है कि उनकी सभी बसों में इमरजेंसी गेट और फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि जो भी कमी हो, उन्हें बताई जाए ताकि वे उसे सुधार सकें। बस यूनियन के सत्यनारायण शाहू ने नवज्योति से विशेष बातचीत में बताया कि वर्तमान में बीएस-6 और यूरो-6 इंजन की वायरिंग इतनी जटिल हो गई है कि स्पार्किंग से आग लग सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई बस मानक पर खरी नहीं उतरती, तो उसे पास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी गेट हटाकर सीट बढ़ाना गलत है और इसके विरोध में हैं। उन्होंने बताया कि एक दुर्घटना के कारण पूरे राजस्थान के बस संचालकों को परेशान किया जा रहा है, जबकि दीपावली के मौके पर यात्रियों को आवागमन में परेशानी हो रही है। बुधवार को जोधपुर, जैसलमेर और जयपुर की कई बसें रद्द हो चुकी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके विरोध को नहीं सुना गया तो पूरे राजस्थान में चक्का जाम किया जाएगा।</p>
<p><strong>फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी</strong><br />- बस में कम से कम दो अलग-अलग प्रकार के फायर एक्सटिंग्विशर अनिवार्य हैं।<br />- सभी फायर एक्सटिंग्विशरों की जांच हर छह महीने में जरूरी है।<br />- बस में धुआं और आग का अलार्म होना चाहिए।<br />- कम से कम दो आपातकालीन दरवाजे और खिड़कियां होनी चाहिए, जो आसानी से खुलने योग्य हों।<br />- दरवाजे और खिड़कियों के रास्ते में शटर या जंजीर जैसी बाधाएं नहीं होनी चाहिए। <br />- चालक और स्टाफ को फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकासी का प्रशिक्षण अनिवार्य है।<br />- आग बुझाने और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का नियमित अभ्यास होना चाहिए।<br />- आपातकालीन निकास के पास स्पष्ट संकेत और निर्देश होने चाहिए।<br />- दिव्यांग यात्रियों के लिए सर्विस गेट के पास आरक्षित सीट अनिवार्य है।</p>
<p><strong>स्लीपर बसों में खतरे के कई कारण</strong><br />- ड्राइवर की थकावट भी हादसों की बड़ी वजह है। रातभर 300-1000 किमी की दूरी तय करने वाले ड्राइवर अक्सर नींद में गायब हो जाते हैं।<br />- अधिकांश बसों में ड्राउजीनेस अलर्ट सिस्टम नहीं होता।<br />- स्लीपर बसें आरामदायक सोने की सुविधा देती हैं, लेकिन हिलने-डुलने की जगह बेहद कम होती है।<br />- बसों की ऊंचाई भी खतरे का कारण बनती है। अतिरिक्त लगेज डिग्गी लगने से ऊंचाई 10-12 फीट तक बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>इमरजेंसी गेट हटाकर लगाई अतिरिक्त सीटें</strong><br />नवज्योति ने बस के ड्राइवर से इमरजेंसी गेट के बारे में पूछा, तो बताया कि गेट पीछे की ओर है। लेकिन, कई बसों में इसे बंद करवाकर अतिरिक्त सीटें लगा दी गई हैं। दोनों तरफ सीटें होने से बस की गैलरी संकरी हो जाती है। आगजनी की स्थिति में यात्रियों के लिए खिड़कियों से कूदना ही एकमात्र विकल्प बचता है, जो जानलेवा हो सकता है।</p>
<p> सभी बसों की मानक अनुरूप मापदंड को लेकर चैकिंग की जा रही है। अब तक पांच बसों पर कार्रवाई की गई है। इन बसों की जांच में यह पाया गया कि ये मानक के अनुरूप नहीं हैं। इन बसों में इमरजेंसी गेट या निकासी द्वार पर अवरोध था। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। <br /><strong>    -सुरेन्द्रसिंह राजपुरोहित, डीटीओ, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Oct 2025 15:39:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - अन्य राज्यों में भेजने पर लगी पाबंदी 11 साल बाद हटाई, ऊंटों की घटती संख्या पर लगेगा ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[अब ऊंटों का अंतरराज्यीय परिवहन और निर्यात  (वध के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए) संभव। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---ban-on-transporting-camels-to-other-states-lifted-after-11-years--curbing-the-declining-number-of-camels/article-128723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले सहित पूरे प्रदेश में ऊंटों की लगातार घटती संख्या से चिंतित ऊंट पालकों को अब राहत मिली है। अब वे बिना किसी रोक-टोक के अपने ऊंटों को किसी भी मेले में लाकर बेच सकेंगे। सरकार ने ऊंटों को अन्य राज्यों में भेजने पर लगी पाबंदी 11 साल बाद हटा दी है और ऊंटों के परिवहन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार ऊंट पालकों को पशु कल्याण और देखभाल से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा। राजस्थान सरकार ने 2015 में पारित राजस्थान ऊंट अधिनियम के तहत ऊंटों के वध, व्यापार और राज्य से बाहर भेजने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसका उद्देश्य ऊंटों की घटती संख्या को बचाना था, लेकिन इससे ऊंट पालकों की आजीविका प्रभावित हुई और ऊंटों की संख्या में भी लगातार कमी आती गई। अब सरकार ने इस प्रतिबंध को हटा दिया है। अब ऊंटों का अंतरराज्यीय परिवहन और निर्यात  (वध के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए) संभव हो गया है।</p>
<p><strong>सशर्त निर्यात और प्रवासन की मिली अनुमति</strong><br />राज्य सरकार ने ऊंटों की घटती आबादी को आधार बनाकर अन्य राज्यों में अस्थायी प्रजनन और प्रवासन को अनुमति देने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का कहना है कि यह फैसला ऊंटों की गिरती संख्या और पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सशर्त निर्यात और प्रवासन की अनुमति से जहां ऊंटपालकों को राहत मिलेगी वहीं उनके संरक्षण को भी बढ़ावा मिल सकेगा। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऊंटों को राज्य से बाहर ले जाने के लिए अब कुछ जरूरी प्रक्रियाओं और शर्तो का पालन करना अनिवार्य होगा।</p>
<p><strong>इन शर्तो का करना होगा पालन</strong><br />- राज्य से ऊंटों को बाहर ले जाने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी होगी।<br />-पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा ऊंट का स्वास्थ्य परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। बिना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के ऊंट का परिवहन अवैध माना जाएगा। <br />-यदि ऊंट को अस्थायी प्रजनन या कृषि उद्देश्यों के लिए ले जाया जा रहा है तो उसका स्पष्ट उल्लेख करना होगा।<br />-शर्तो और नियमों का उल्लंघन करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />रेगिस्तानी जहाज के रूप में पहचाने वाले राज्य पशु ऊंट का खेती व दैनिक कामकाज में कम उपयोग से अब इनका अस्तित्व खतरे में है। प्रतिवर्ष इनकी संख्या में कमी हो रही है। दैनिक नवज्योति में 16 सितंबर को इस सम्बंध में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि बीते दो दशक में पूरे प्रदेश में खेती कार्य में ट्रैक्टर का प्रयोग बढ़ने, साधन में दुपहिया, चार पहिया वाहनों के अधिक उपयोग से आम आदमी के दैनिक जीवन में अब ऊंट का महत्व बहुत कम रह गया है। इससे इनकी संख्या हर वर्ष कम हो रही है। कोटा जिले की बात की जाए तो यहां पर ऊंट की संख्या घटकर केवल 1862 ही रह गई है। इसी तरह की स्थिति संभाग के अन्य जिलों की है।</p>
<p>सरकार ने ऊंटों को अन्य राज्यों में भेजने पर लगी पाबंदी 11 साल बाद हटा दी है और ऊंटों के परिवहन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार ऊंट पालकों को पशु कल्याण और देखभाल से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा। <br /><strong>- डॉ. गिरीश सालफले,उप निदेशक पशुपालन विभाग</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 15:32:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>परिवहन विभाग का विशेष प्रवर्तन अभियान : उड़नदस्तों ने की कार्रवाई, 25 ओवरलोड वाहन जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[अभियान के दौरान 25 ओवरलोड वाहनों को जब्त किया गया और करीब 8 लाख रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-enforcement-campagin--of-transport-department-flying-squads-took-action/article-99677"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/6688-copy8.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सड़क सुरक्षा माह के तहत परिवहन विभाग ने आरटीओ द्वितीय धर्मेंद्र कुमार के निर्देशन में जयपुर और आसपास के 4 प्रमुख मार्गों पर प्रवर्तन अभियान चलाया। जयपुर-शाहपुरा, जयपुर-चंदवाजी, जयपुर-चौमूं, और चौमूं-रेनवाल मार्गों पर दो डीटीओ के नेतृत्व में आधा दर्जन उड़नदस्तों ने कार्रवाई की। </p>
<p>अभियान के दौरान 25 ओवरलोड वाहनों को जब्त किया गया और करीब 8 लाख रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। साथ ही 5 वाहनों के फिटनेस प्रमाण-पत्र मौके पर रद्द किए गए। यह अभियान सड़क सुरक्षा नियमों के पालन को सुनिश्चित करने और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से चलाया गया। परिवहन विभाग की यह कार्रवाई यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jan 2025 15:28:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>300 किमी दायरे में ई बसें चलाने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[निगम अध्यक्ष ने बताया कि नई बसों को सर्विस मॉडल पर शामिल किया जाएगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparation-to-run-e-buses-within-300-km-radius/article-96664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आमजन को रोडवेज बसों में बेहतर सुविधा के साथ आरामदायक सफर के लिए राजस्थान पथ परिवहन निगम ने कई आवश्यक कदम उठाए है। रोडवेज को घाटे उभारने के साथ ही अगले दो साल में 500 डीजल और 300 इलेक्ट्रिक बसें बेड़ें में लाने का फैसला लिया गया। वहीं सभी डिपो मैनेजर को तीन सौ किमी क्षेत्र में ई बसें चलाने के लिए रूट चार्ट मांगे है। कौन कौन से बड़े शहर तीन सौ किमी आ रहे उनकी सूची भी मांगी गई है। कोटा रोडवेज के मुख्य प्रबंधक अजय कुमार मीणा ने बताया कि मुख्यालय से ई बसे चलाने के लिए संभावित रूट व शहर जो तीन सौ किमी तक क्षेत्र में आते उनकी सूची मांगी है। ई बसें एक बार में तीन सौ किमी चल सकती है। ऐसे में उन शहरों की सूची मांगी जिसमें आना जाना तीन सौ किमी के अंदर होता है। उन शहरों की सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि  राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम ने अपने बस बेड़े को मजबूत करने का बड़ा फैसला लिया है। निगम की बैठक में अगले दो साल में 500 डीजल और 300 इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने पर सहमति बनी। इससे यात्रियों को अधिक आरामदायक और सुविधाजनक सफर का अनुभव मिलेगा।</p>
<p><strong>बेडें को मजबूत करने की शुरू की कवायद</strong><br />निगम अध्यक्ष शुभ्रा सिंह ने बताया कि नई बसों को सर्विस मॉडल पर शामिल किया जाएगा। खासतौर पर इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस फैसले से राजस्थान रोडवेज का बस बेड़ा मजबूत होगा। यात्रियों के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। नई बसों के जुड़ने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच यातायात की स्थिति में भी सुधार होगा।</p>
<p><strong>छह दशक में बसें बढ़ने की बजाए लगातार घट रही</strong><br />पिछले साठ साल में राजस्थान पथ परिवहन निगम ने तीन बस स्टैंड का सफर तय किया । लेकिन जिस प्रकार से शहर की आबादी बढ़ी उसके अनुसार ना तो बस स्टैंड का विस्तार हुआ ना ही बसों का। आज कोटा देश में शिक्षा नगरी के नाम से अपनी अलग पहचान बनाए हुए है । लेकिन यहां आज भी परिवहन के संसाधन सीमित ही हैं। आमजन के लिए रोडवेज सस्ता व सुगम साधन है  लेकिन कोटा का दुर्भाग्य ही कहें ही यहां के बस स्टैंड में 157 बसें हुआ करती थी वह अब घटकर महज 68 रह गई है। यह कोटा की आबादी के हिसाब से बहुत कम है। संजय नगर में बना नया रोडवेज बस स्टैंड तो विशाल बन गया लेकिन अभी यहां से बसें कम ही संचालित होती है। जिससे लोगों को नयापुरा जाना मजबूरी बना हुआ है। बूंदी, जयपुर, नैनवां, टौंक, उनियारा, झालावाड़, बारां की बसें अभी नयापुरा बस स्टैंड की सवारियों से पूरी बस भरती है। </p>
<p><strong>कोटा से इन रूट पर चल सकती ई रोडवेज बस</strong><br />कोटा डिपो से ई बसों को चलाने के लिए तीन सौ किमी की दायरे में झालावाड़, बूंदी, बारां, देवली, टोंक उनियार, रामगंजमंडी सहित कई रूट ऐसे जो तीन सौ किमी के अंदर आ रहे है।</p>
<p><strong>भर्तियों में बदलाव और नए अवसर</strong><br /> हाल ही में बैठक में निगम अध्यक्ष शुभ्रा सिंह ने बताया कि भर्तियों के नियमों में बदलाव करते हुए कनिष्ठ सहायक, चालक, विधि अधिकारी, अभियंता और आर्टिजन ग्रेड 3 जैसे पदों पर प्रक्रिया आसान बनाने पर चर्चा हुई। साथ ही आर्टिजन ग्रेड 3 पद पर अप्रेंटिसशिप की अनिवार्यता खत्म करने का निर्णय लिया गया। इससे नई भर्तियों के अवसर बढ़ेंगे। बैठक में निगम की आर्थिक स्थिति सुधारने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए योजना तैयार करने का फैसला लिया गया। साथ ही अगले वित्तीय साल के बजट को लेकर भी कई अहम निर्णय लिए गए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ई बसों के संचालन को लेकर मुख्यालय से रूट और तीन सौ किमी के अंदर आने वाले शहरों की सूची मांगी है। रूट चार्ट तैयार किया जा रहा है। अभी कितनी ई बसे मिलेगी यह रूट तय होने के बाद तय होगा।<br /><strong>- अजय कुमार मीणा, मुख्य आगार प्रबंधक कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Dec 2024 16:00:31 +0530</pubDate>
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                <title>ताने सहकर भी नहीं टूटी पूजा, ट्रांसपोर्ट बिजनेस में जमाई धाक</title>
                                    <description><![CDATA[पहली बार मैं और छोटी बहन घर की चौखट पार कर पिता का बिजनेस संभालने छोटी सी दुकान में पहुंचे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-after-facing-taunts--puja-did-not-give-up--made-her-mark-in-the-transport-business/article-92209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  ‘<strong>‘त्वं हि सा परमा शक्तिरनन्ता परमेष्ठिनी। सर्वभेदविनिर्मुक्ता सर्वभेदविनाशिनी॥’’</strong><br /><strong>(हिन्दी अर्थ - तुम ही वह परम शक्ति हो, जो अनंत और परम स्थान की अधिष्ठात्री है। </strong><br /><strong>तुम सभी भेदों से मुक्त हो और सभी भेदों का नाश करने वाली हो।)</strong><br />यह पंक्ति नारी शक्ति की असीम और उच्चतम स्वरूप का वर्णन करती है। यह पद्य  महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में बहुत प्रासंगिक है। पद्य में कहा गया है कि महिला हर प्रकार के भेदभाव से मुक्त है और समाज में व्याप्त इन भेदों को समाप्त करने की शक्ति भी रखती है। महिला शक्ति न केवल दिव्य और अनन्त है, बल्कि वह समस्त भेदों को समाप्त कर समाज को एक नए और बेहतर भविष्य की ओर ले जा रही है। इसी सोच को लेकर दैनिक नवज्योति नवरात्र के नौ दिन तक समाज के  विभिन्न क्षेत्रों में  विशेष कार्य करने वाली  महिलाओं को पाठकों को रूबरू कराएगा।  पिता का ट्रांसपोर्ट व्यवसाय था। 12वीं कक्षा में पढ़ती थी, तब उनकी अचानक हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। बड़े भाई ने घर की जिम्मेदारी उठाई और पिता का बिजनेस संभाला। जिंदगी ठीक कट रही थी। हम तीनों बहनें भाई की छत्रछाया में सिविल सर्विसेज में जाने के ख्वाब देखने लगे। लेकिन, कू्रर नियति ने हमारा इकलौता भाई भी छीन लिया। परिवार बिखर गया।  खुद को व मां को संभालना मुश्किल हो गया। अब घर की जिम्मेदारी हम तीनोें बहनों पर थी। परिवार पर आर्थिक तंगी के बादल मंडराने लगे। बड़ी बहन की शादी भी नजदीक थी।   </p>
<p>पहली बार मैं और छोटी बहन घर की चौखट पार कर पिता का बिजनेस संभालने छोटी सी दुकान में पहुंचे। लेकिन, पुरूष प्रधान व्यवसाय होने के चलते लोगों को हमारा हमारा ट्रांसपोर्ट  क्षेत्र में आना पसंद नहीं था। तुम लड़कियों से यह काम नहीं होगा..., दिन-रात पुरूषों के बीच रहना होता है..., आधी रात को भी दौड़ना पड़ता है... कोई सनकी तो कोई सिरफिरा भी टकराएगा, तुम नहीं संभाल पाओगी....,तरह-तरह के ताने सहने पड़ते थे, आंसू आते पर छिपा लेते, गुस्सा आता, पी जाते। हालांकि, कुछ ट्रांसपोटर्स ने काम सीखने में हमारी मदद की।  संघर्ष की यह कहानी है, रामपुरा निवासी पूजा धमीजा की। पूजा, कोटा संभाग की एकमात्र महिला ट्रांसपोर्टर हैं, 24 सालों में उन्होंने अजमेर से हाड़ौती तक बिजनेस जमाकर अपना वर्चस्व कायम किया। </p>
<p><strong>जुनून ऐसा की पुरूष भी पीछे रहें</strong><br />24 साल से ट्रांसपोर्ट का बिजनेस कर रही पूजा 49 साल की हो चुकी है। काम के प्रति जूनून देख  पुरूष ट्रांसपोर्टर भी दंग रह जाते हैं। कई बार माल अनलोडिंग करने के लिए लेबर नहीं होती तो वह खुद ट्रक, मिनीडोर में चढ़ भारी-भरकम कार्टून कंधों पर उठा गोदाम तक पहुंचाती है। वहीं, डिलीवरी के दौरान गाड़ी खराब हो जाती तो तुरंत दूसरे वाहन का इंतजाम करने, नो-एंट्री में फंसे वाहनों को निकलवाने, समय पर बुकिंग पहुंचाने सहित कई चुनौतियां सामना आसानी से निपटा देती है। ट्रांसपोर्ट के काम में पूजा का कई बार शराबी व उत्पाती ड्राइवरों से भी पाला पड़ता है। लेकिन वह  उनकी दबंगता के कारण पंगा लेने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते।  </p>
<p><strong>आईपीएस बनना था, ट्रांसपोर्टर बन गई</strong><br />पूजा बतातीं हैं, आईपीएस बनना चाहती थी। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पिता व भाई की मृत्यु के बाद  घर चलाने की जद्दोजहद में आईपीएस ख्वाब ही बनकर रह गया। शुरुआती दौर में पुराने कर्मचारियों ने बिलों में फर्जीवाड़ा कर लाखों का नुकसान पहुंचा दिया। गलतियों से सबक लिया और बिजनेस को आगे बढ़ाने में जुट गई। इसी तरह से मैं ट्रांसपोर्टर बनकर रह गई।</p>
<p><strong>बहन मां को संभालतीऔर मैं बिजनेस</strong><br />पूजा ने मां और बिजनेस की जिम्मेदारी के चलते शादी नहीं की। जबकि, उन्होंने अपने दम पर बड़ी और छोटी बहनों की शादी की और अकेले बिजनेस भी संभाल रही हैं। उन्होंने बताया कि बड़ी बहन की दिल्ली में शादी हुई थी, जो अब कोटा ही शिफ्ट हो गई है। ऐसे में दिन में वह मां के पास रहती है और में दुकान व गोदाम पर रहती हूं। बहनों के सहयोग से मैं इतना कुछ कर पा रही हूं। सुबह 11.30 बजे से दिनचर्या शुरू होती है। रात 12 बजे तक अजमेर, जयपुर व सोजत से आने वाली गाड़ियों को खाली करवाती हूं। इसी बीच बुकिंग भी जारी रहती है।  <br /> <br /><strong>चुनौतियां अपार, भरोसे पर टिका बिजनेस</strong><br />पूजा कहतीं हैं,  बुकिंग करवाने वाले को निर्धारित समय पर काम पहुंचाना, नोएंट्री से पहले लोडिंग वाहन गोदाम तक पहुंचना सहित कई चुनौतियां हैं। गत मंगलवार रात अचानक ड्राइवर भाग गया, वहीं, बाहर से आई गाड़ियों को अनलोडिंग करने के लिए स्टाफ भी गायब हो गया। ऐसे में रात 12 बजे घर से गोदाम पहुंची और दूसरी गाड़ी की व्यवस्था कर जिसको माल पहुंचाना था, वहां के लिए गाड़ी रवाना की। वहीं, लेबर के लिए हमारे सहयोगी ट्रांसपोर्टर से मदद मांग आधी रात तक माल खाली करवाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2024 15:32:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>परिवहन विभाग अन्य राज्यों के ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन का करेगा अध्ययन</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा शासित राज्यों में अपनाई जा रही नीति का अध्ययन कर प्रदेश में एटीएस के लाइसेंस जारी करने पर फैसला होगा। फिलहाल प्रदेश में दो ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन संचालित हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/transport-department-will-study-automatic-testing-stations-of-other-state/article-81477"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/transport-department-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए परिवहन विभाग ने अन्य राज्यों की पॉलिसी का अध्ययन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए विभाग ने डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा के निर्देश पर एक टीम भी गठित की है।कमेटी के सदस्य प्रदेश में एटीएस खोलने के लिए दूसरे राज्यों की नीति का अध्ययन करेंगे। विभाग ने अतिरिक्त आयुक्त कुसुम राठौड़ के नेतृत्व में कमेटी गठित की है। कमेटी गुजरात, यूपी, मध्य प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों में अध्ययन करेगी। भाजपा शासित राज्यों में अपनाई जा रही नीति का अध्ययन कर प्रदेश में एटीएस के लाइसेंस जारी करने पर फैसला होगा। फिलहाल प्रदेश में दो ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन संचालित हैं। </p>
<p><strong>ट्रांसफर पॉलिसी भिजवाई</strong><br />विभाग ने एसीएस श्रेया गुहा को ट्रांसफर पॉलिसी का तैयार ड्राफ्ट भिजवा दिया है। पॉलिसी में तीन साल से अधिक एक जिले में पदस्थापित नहीं रहने, दुबारा जिले में पांच साल बाद पदस्थापित होने, परफॉर्मेंस आधार पर ट्रांसफर किए जाने, गंभीर बीमारियों के आधार पर ट्रांसफर में प्राथमिकता, पति-पत्नी को राज्य सेवा में होने पर प्राथमिकता आदि शामिल हैं। </p>
<p><strong>कमिश्नर के निरीक्षण के बाद कार्रवाई</strong><br />मुख्यालय में परिवहन आयुक्त डॉ. मनीषा अरोडा के निरीक्षण के बाद प्रशासनिक शाखा के श्याम सिंह राजपुरोहित को फाइलों की पेंडेंसी पर नोटिस दिया गया है। अरोड़ा ने सभी कार्मिकों को फाइलों की पेंडेंसी कम करने के निर्देश दिए हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Jun 2024 11:06:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सार्वजनिक परिवहन सेवा को मिलेगी मजबूती, खरीदी जाएंगी 150 नई ई-बसें</title>
                                    <description><![CDATA[चारदीवारी में वाहनों को आवागमन कम करने के लिए रामनिवास बाग में भूमिगत पार्किंग से चारदीवारी में आने जाने के लिए शटल बस सर्विस शुरू की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/public-transport-service-will-be-strengthened-150-new-e-buses-will-bought/article-81088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy211rer-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर की सार्वजनिक परिवहन सेवा को सुव्यवस्थित कर आमजन को लाभांवित करने के लिए जेसीटीएसएल करीब 150 नई ई-बसों की खरीद करेगा। बसों के आने के बाद उनको शहर के विभिन्न स्थानों के लिए संचालित किया जाएगा। इसमें नए मार्ग भी निर्धारित करने का काम किया जा रहा है। इससे ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी फायदा मिलेगा जहां अभी सार्वजनिक परिवहन सेवा संचालित नहीं हो रही है। जेडीए के मंथन सभागार में आयोजित ट्रेफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जेडीए आयुक्त मंजू राजपाल ने बताया कि चारदीवारी में वाहनों को आवागमन कम करने के लिए रामनिवास बाग में भूमिगत पार्किंग से चारदीवारी में आने जाने के लिए शटल बस सर्विस शुरू की जाएगी इसके लिए जेसीटीएसएल को निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि प्रमुख सड़कों व फुटपाथों पर अतिक्रमण, अवैध पार्किग स्थलों पर जयपुर विकास प्राधिकरण नगर निगम जयपुर ग्रेटर/हैरिटेज एवं यातायात पुलिस की संयुक्त टीमें गठित कर निगरानी व कार्रवाई की जाएगी।  </p>
<p>जेडीए आयुक्त मंजू ने बताया कि शहर में चौराहों एवं तिराहों पर फ्री लेफ्ट सुविधा नहीं होने से ट्रेफिक रुका रहता है, ऐसे में शहर में लगभग 101 चौराहों/तिराहों पर पीयू रोड फेंस स्थापित करवाए जाएंगे। इसके उपयोग से वाहन चालकों को फ्री लेफ्ट सुविधा उपलब्ध करवाने से यातायात जाम की स्थिति नहीं होगी। बैठक में निर्णय लिया गया प्रथम चरण में 10 स्थानों पर पीयू रोड फेंस स्थापित किए जाएंगे। बैठक में यातायात पुलिस द्वारा अभय कमांड एवं यातायात नियंत्रण कक्ष के लिए जमीन आवंटन एवं जब्तशुदा वाहनों को रखने के लिए जमीन आवंटन का प्रस्ताव जेडीए को देगा। कलेक्ट्री सर्किल पर अण्डरग्राउण्ड पार्किग के लिए भी तकनीकि परीक्षण कराया जाएगा। नौ स्थानों पर ट्रेफिक सिग्नल लगाने, 9 स्थानों से अस्थाई/स्थाई अतिक्रमणों को हटाने के साथ ही 14 स्थानों पर नो पार्किग के बोर्ड लगवाने एवं 29 स्थानों पर जेब्रा व स्टॉप लाइन व सफेद पट्टी डलवाने के बैठक में निर्देश दिए हंै। मानसरोवर के मध्यम मार्ग एवं शिप्रापथ पर ट्रेफिक सिग्नल लगाए जाएंगे। जेडीए आयुक्त ने बताया कि बीआरटीएस कॉरिडोर की उपयोगिता के लिए कन्सलटेंट एजेंसी से परीक्षण करवाकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jun 2024 10:02:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेज रफ्तार वाहन आए दिन उजाड़ रहे घरों के चिराग</title>
                                    <description><![CDATA[कई घटनाओं में सैंकड़ों घरों के चिराग बुझ चुके हैं लेकिन इन हादसों पर किसी तरह की लगाम नहीं लग पाई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fast-moving-vehicles-are-destroying-the-lamps-of-houses-every-day/article-75720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/tez-raftaar-vahan-aye-din-ujad-rhe-ghro-k-chirag...kota-news-23-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस 1 -</strong> कोटा में आरएसी की सेकंड बटालियन में पोस्टेड आरपीएस राजेंद्र गुर्जर और बेंगू डीएसपी अंजलि सिंह 29 मार्च को कोटा से चित्तौड़गड़ जा रहे थे। जहां राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर धनेश्वर के पास तेज रफ्तार से जाते ट्रोले ने उनकी गाड़ी को टक्कर मारते हुए कुचल दिया था। जिसमें प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन के दोनों गेट बुरी तरह से फंस गए थे, जिन्हें तोड़ कर दोनों को घायल को बाहर निकाला गया। हादसे में आरपीएस राजेंद्र गुर्जर की मौके पर ही मौत हो गई थी वहीं डीएसपी अंजलि मीणा बुरी तरह घायल हो गई थी।</p>
<p><strong>केस 2 -</strong> कोटा के देवली मांझी थाना क्षेत्र में 28 नवंबर 2022 को शादी से लौट रहे दोस्तों की कार को र्इंटों से भरे ट्रक ने टक्कर मार दी थी जिसमें दो जनों की मौके पर ही मौत हो गई थी और तीन जने गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसा तब हुआ जब बोरखेड़ा निवासी राधेश्याम और महावीर नगर निवासी पुनीत सक्सेना सहित पांच जन कार में सवार थे। पांचों सांगोद से अपने दोस्त की शादी में शामिल होकर लौट रहे थे। जहां देवली मांझी थाने से कुछ ही दूरी पर र्इंटों से भरे ट्रक ने उन्हें पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि राधेश्याम पीछे की सीट पर बैठे थे जो टक्कर के बाद कार के सामने का शीशा तोड़ कर बाहर निकल गए। जहां राधेश्याम और पुनीत की मौके पर ही मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।</p>
<p><strong>केस 3 - </strong>दो दिन पहले भी झालावाड़ जिले के अकलेरा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में एक साथ 9 दोस्तों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया। अकलेरा के रहने वाले 10 जने रविवार को मध्यप्रदेश के खिचलीपुर से शादी समारोह में भाग लेकर वापस अकलेरा लौट रहे थे। इसी दौरान अकलेरा से पास पचोला गांव में हाइवे पर चढ़ते समय एक तेज रफ्तार से ला रहे ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। जिसमें 10 में से 9 दोस्तों की मौके पर ही जान चली गई वहीं एक गंभीर रूप से घायल हो गया। एक इलाके से एक साथ 9 जनों की अर्थी उठने से पूरे इलाके में मातम पसर गया। हादसे में घायल सभी खास दोस्त थे जो अपने ही मित्र की शादी से लौट रहे थे।</p>
<p>झालावाड़ जिले के अकलेरा कस्बे में पचोला गांव के पास रविवार को शादी से लौट रहे दस युवकों की वैन तेज रफ्तार ट्रक के साथ हुई भिड़ंत में 9 दोस्तों की मौत हो गई और एक घायल अभी भी गंभीर अवस्था में है। झालावाड़ के अलावा हाड़ौती में कई शहरी ईलाकें ऐसे हैं जहां अभी भी भारी वाहनों का आवागमन रहता है। इन भारी वाहनों के आवागमन से आए दिन हादसों की खबरें आती रहती जिनमें वाहन चालक के गंभीर घायल होने से लेकर उनकी मौत तक हो जाती है। इन भारी वाहनों में कई बार चालक क्षमता से अधिक माल की ढुलाई करते हैं। जो इनसे होनी वाली दुर्घटनाओं को और घातक बना देते हैं। शहर में कई इलाके ऐसे हैं जहां ये भारी वाहन आज भी तेज रफ्तार के साथ गुजरते हैं, जो खुद के साथ साथ दूसरों की जिंदगी को भी खतरे में डाल रहे हैं।</p>
<p><strong>तेज रफ्तार वाहन ने छीनी कई जिंदगियां</strong><br />कोटा सहित आसपास के कई इलाकों में आए दिन कहीं न कहीं से ट्रक या डंपर द्वारा वाहनों के कुचलने जाने की खबरें आना आम बात हो गई है। ऐसे ही कई घटनाओं में सैंकड़ों घरों के चिराग बुझ चुके हैं लेकिन इन हादसों पर किसी तरह की लगाम नहीं लग पाई है। </p>
<p><strong>घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरते हैं भारी वाहन</strong><br />कोटा शहर में भी कई इलाके ऐसे हैं जहां आज भी भारी वाहनों का आवागमन होता है। प्रतिबंध के बाद भी शहर के नांता क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, नया नोहरा और रायपुरा में आज भी दिन भर भारी वाहनों का आवागमन रहता है। औद्योगिक क्षेत्र में प्रेम नगर, कंसुआ, डीसीएम इलाकों में करीब एक लाख की आबादी रहती है। इस इलाके में अनंतपुरा से डीसीएम चौराहे तक कोटा स्टोन की फैक्ट्रियों और भामाशाह मंडी में आने वाले ट्रक दिन भर दौड़ते रहते हैं। इस इलाके में कई बाद हादसे हो चुके हैं लेकिन स्थिति अभी भी वही है। वहीं नांता क्षेत्र में भी पत्थर और कोयले की राख से भरे ट्रक तेज रफ्तार से चलते नजर आ जाएंगे जो हर वक्त हादसों को न्यौता दे रहे हैं। यही कहानी रापुरा और नया नोहरा इलाके की है जहां भी भारी वाहन तेज रफ्तार से दौड़ते नजर आ जाएंगे।</p>
<p><strong>बायपास और लिंक बने तो घटे संख्या</strong><br />कोटा शहर से उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर दो राष्ट्रीय राजमार्ग 27 और 52 गुजरते हैं। इनमें बूंदी की ओर से आने वाहनों को झालावाड़ की ओर जाने के लिए तो बाई मौजूद है लेकिन बूंदी से बारां की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के अंदर से होकर जाना पड़ता है। वहीं बारां से केशोराय पाटन की ओर तथा केशवराय पाटन से झालावाड़ की और जाने वाले वाहनों को शहर के अंदर से गुजरना पड़ता है जिससे शहर की सड़कों पर भारी वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। वहीं औद्योगिक क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए कोई बेहतर कनेक्टीविटी नहीं होने से उन्हें भी शहर के अंदर आना पड़ता है। शहर के नॉर्दन बाई पास, भामाशाह मंडी और श्रीराम नगर से एनएच 27 तक लिंक रोड बन जाए तो इन वाहनों को शहर के भीतर नहीं आना होगा।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />भारी वाहन तेज रफ्तार में अचानक ब्रेक लगाने पर संतुलन में नहीं आ पाते और अन्य वाहनों से टकरा जाते हैं। घनी आबादी वाले इलाकों में तेज रफ्तार से वाहन चलान वालों के खिलाफ सख्त कारवाई जरूरी है। भारी वाहन की टक्कर से नुकसान भी बहुत होता है।<br /><strong>- जितेंद्र योगी, श्रीराम नगर चालक</strong></p>
<p>चार साल पहले मेरे चाचा की मृत्यु भी ट्रक की टक्कर के कारण हुई थी। जहां झालावाड़ से वापस आते समय जगपुरा के समीप उन्हें तेज रफ्तार ट्रÑक ने टक्कर मार दी थी जिसमें इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था। तेज रेफ्तार पर वाहनों के खिलाफ कारवाई करनी चाहए और समय होने पर हर शहर के अंदर घुसने देना चाहिए।<br /><strong>- आशीष बसवाल, प्रेम नगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />परिवहन विभाग की ओर से तेज रफ्तार से भारी वाहन चलाने वालों के खिलाफ नियमित कारवाई की जाती है। साथ ही नियमित रूप से भारी वाहनों की चैकिंग का कार्य किया जाता है। कोई भी समय से पूर्व शहरी सीमा में आता है तो उस पर कारवाई करने के साथ आवश्यकता होने पर जब्त भी किया जाता है।<br /><strong>- दिनेशसिंह सागर, आरटीओ</strong></p>
<p>भारी वाहनों का शहर में सुबह 6 से रात 9 बजे के बीच आना सख्त निषेद्ध है कोई अगर लाता है तो उसके विरूद्ध रेगुलर कारवाई की जाती है। वहीं ट्रक चालकों को तेज रफ्तार से वाहन न चलाने की समझाइश भी की जाती है। <br /><strong>- पूरण सिंह मीणा, यातायात प्रभारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Apr 2024 15:49:00 +0530</pubDate>
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