<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/facilities/tag-6562" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>facilities - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/6562/rss</link>
                <description>facilities RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बेटियों का दर्द : बीए के बाद छूट रही पढ़ाई, ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी कॉलेजों में पीजी संकाय ही नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रामगंजमंडी में 27 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ पीजी संकाय ,उच्च शिक्षा के लिए 120 किमी सफर या पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-plight-of-daughters--studies-cut-short-after-ba--no-pg-faculty-in-rural-government-colleges/article-149857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के दावों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां उच्च शिक्षा से वंचित हो रही हैं। सरकारी कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन नहीं होने से बीए के बाद उनकी शिक्षा बीच में ही छूट रही है। ऐसे में छात्राओं के सामने सिर्फ दो ही विकल्प बचते हैं, या तो आगे की पढ़ाई छोड़ दें, या फिर पीजी करने के लिए शहरी कॉलेज आने-जाने के रोजाना 120 से 150 किमी का लंबा सफर तय करें। सुरक्षा, दूरी और पारिवारिक चिंताओं के कारण ज्यादातर बेटियों के सपने यहीं टूट जाते हैं।<br />कोटा जिले के रामगंजमंडी, इटावा, कनवास और सांगोद के राजकीय महाविद्यालयों में पीजी संकाय संचालित नहीं है। बीए के बाद छात्राएं आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, लेकिन पीजी संकाय नहीं होने के कारण उनका सपना अधूरा रह जाता है। हालांकि, सांगोद कॉलेज में केवल राजनीति विज्ञान विषय में पीजी की सुविधा है, जबकि क्षेत्र की डिमांड भूगोल, इतिहास, हिन्दी व संस्कृत जैसे विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं शुरू करने की है। नतीजन, छात्राओं को इन्हीं समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>27 साल बाद भी पोस्ट ग्रेजुएशन नहीं</strong><br />रामगंजमंडी कॉलेज में स्थापना के 27 साल बाद भी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू नहीं हो सके। ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के सामने सबसे बड़ी समस्या दूरी की है। पीजी की पढ़ाई के लिए उन्हें कोटा शहर के कॉलेजों में जाना पड़ता है, जो गांव-कस्बों से 60 से 75 किलोमीटर दूर हैं। आने-जाने में यह दूरी 120 से 150 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। सुरक्षा, समय और खर्च जैसे कारणों से अभिभावक भी बेटियों को इतनी दूर भेजने में हिचकते हैं। ऐसे में बीए के बाद ही पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी बन जाती है।</p>
<p><strong>80 से ज्यादा गांवों की बेटियों के टूट रहे सपने</strong><br />राजकीय महाविद्यालय कनवास की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, जिसे आज 9 साल हो गए। छात्र-छात्राओं की संख्या भी बड़ी लेकिन कॉलेज यूजी से पीजी नहीं हो सका। जबकि, यह महाविद्यालय 80 से ज्यादा गांवों को कवर करता है। ग्रामीणों का कहना है, ऊर्जा मंत्री से लेकर लोकसभा अध्यक्ष तक को ज्ञापन दे चुके हैं। आयुक्तालय को भी कई बार पत्रभेजे हैं। लेकिन, आश्वासन के सिवाए कुछ नहीं मिला।</p>
<p>कनवास कॉलेज में नामांकन अच्छा है। यहां पीजी संकाय होना ही चाहिए। यूजी के बाद पीजी करने के लिए मुझे 120 किमी का सफर तय करना पड़ता है। जेडीबी से हिन्दी में एमए कर रही थी, लेकिन दूरी अधिक होने व अन्य कारणों से बीच में छोड़ना पड़ा। लड़कियों के लिए इतनी दूर आना जाना आसान नहीं है।<br /><strong>-कुसुम राठौर, छात्रा कनवास</strong></p>
<p><br />बीए करने के बाद अधिकतर छात्राएं एमए नहीं कर पाती। शहरी कॉलेज जाने के लिए घंटों बसों का इंतजार और लंबी दूरी के कारण छात्राओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां हिन्दी, संस्कृत व ज्योग्राफी में पीजी खुलना चाहिए।<br /><strong>-श्रुति राठौर, छात्रा कनवास</strong></p>
<p>बीकॉम करने के बाद मुझे पीजी के लिए रामगंजमंडी से झालावाड़ आना-जाना पड़ा। प्रतिदिन 60 किमी के सफर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। यूजी में मेरी कई सहपाठी तो पीजी नहीं कर सकी। मजबूरन उन्हें आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। कॉलेज को 27 साल हो गए। अब तो सरकार पीजी संकाय शुरू करें।<br /><strong>-रुचि गुर्जर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रामगंजमंडी</strong></p>
<p>धरना, प्रदर्शन, भूख हड़ताल व अनशन तक सब कर लिए, शिक्षा मंत्री सहित आयुक्तालय को अनगिनत ज्ञापन दे दिए इसके बावजूद आज तक एमए व एमकॉम शुरू नहीं हुआ। छात्राओं की ही नहीं छात्रों की भी यूजी के बाद पढ़ाई छूट रही है।<br /><strong>-संस्कार मीणा, पूर्व छात्र रामगंजमंडी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं शिक्षक</strong></p>
<p>रामगंजमंडी कॉलेज 1999 में शुरू हुआ था, जिसे वर्तमान में 27 साल होने जा रहे हैं। इसके बावजूद यहां आर्ट्स व कॉमर्स में पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका। जबकि, क्षेत्र का यह सबसे बड़ा कॉलेज होने के नाते यहां पीजी संकाय खोले जाने की सख्त आवश्यकता है। विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए या तो 30 किमी दूर झालावाड़ या 75 किमी दूर कोटा जाने को मजबूर होते हैं। वहीं, अधिकांश छात्राएं तो पीजी कर नहीं पाती। कॉलेज में एमए व एमकॉम खुलना चाहिए।<br /><strong>-डॉ. संजय गुर्जर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी</strong></p>
<p>कनवास कॉलेज की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, जिसके बाद से अब तक पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका। जबकि, हिन्दी, संस्कृत, इतिहास व ज्योग्राफी में एमए शुरू किए जाने की सख्त आवश्यकता है। मजबूरन, विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए 60 किमी दूर कोटा शहर जाने का ही विकल्प बचता है। प्रतिदिन आने-जाने में 120 किमी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में कई छात्राएं तो पीजी कर ही नहीं पाती है। आयुक्तालय को कई बार प्रस्ताव भिजवा चुके हैं। लेकिन, अब तक पीजी नहीं खुला।<br /><strong>-डॉ. ललित नामा, सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर कनवास कॉलेज</strong></p>
<p>संबंधित कॉलेजों से विद्यार्थियों की डिमांड पर प्राचार्य की ओर से प्रस्ताव आते हैं, उन्हें आयुक्ताय भेज दिया जाता है। सरकार हर साल कहीं न कहीं पीजी संकाय खोल रही है। यह सतत प्रक्रिया है जो निरंतर जारी है। हां, यह बात भी सही है कि कोटा ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश कॉलेजों में पीजी संकाय नहीं होने से परेशानी है। हालांकि, समाधान के प्रयास लगातार जारी है।<br /><strong>-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-plight-of-daughters--studies-cut-short-after-ba--no-pg-faculty-in-rural-government-colleges/article-149857</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-plight-of-daughters--studies-cut-short-after-ba--no-pg-faculty-in-rural-government-colleges/article-149857</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:57:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/1200-x-600-px%29-%285%294.png"                         length="1948312"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विद्यालय में पेयजल, बिजली और स्वच्छता में हुआ सुधार </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में ख्रबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/improvements-made-to-drinking-water--electricity--and-sanitation-facilities-at-school/article-148238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)25.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal;color:#000000;background:#F6F6F6;" xml:lang="en-us">भंवरगढ़।<span>  </span>कस्बे के प्रकाशपुरा के उच्च माध्यमिक विद्यालय में पेयजल बिजली एवं स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओें में उल्लेखनीय सुधार किया गया है।<span>  </span>गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित कर इस मामले को उठाया था। व्यवस्थाओं में सुधार से विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को बड़ी राहत मिली है। विद्यालय में छात्रों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही बिजली आपूर्ति को सुचारू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। जिससे अब विद्यार्थियों की पढाई एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा नहीं आएगी। स्वच्छता के क्षेत्र में भी विशेष ध्यान दिया गया है। विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी और छात्रों को स्वस्थ बातावरण मिले सकेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/improvements-made-to-drinking-water--electricity--and-sanitation-facilities-at-school/article-148238</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/improvements-made-to-drinking-water--electricity--and-sanitation-facilities-at-school/article-148238</guid>
                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 14:52:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/1200-x-60-px%29-%285%2925.png"                         length="1137641"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यात्रीगण कृपया ध्यान दें, बस स्टैंड पर आने से पूर्व निवृत्त होकर आएं</title>
                                    <description><![CDATA[पेयजल और शौचालयों जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण कई यात्री बस स्टैंड आने से बच रहे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/passengers--please-note--please-relieve-yourself-before-coming-to-the-bus-stand/article-143651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संजय नगर स्थित रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रहीं। पेयजल का संकट, जर्जर और बंद पड़े शौचालय साफ-सफाई की कमी के कारण यहां आने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोग व्यंग्य में कहते नजर आते हैं— यात्रीगण कृपया ध्यान दें,आने से पूर्व घर से ही निवृत्त होकर आएं राजस्थान रोडवेज के मुख्य बस स्टैंड की बिगड़ती व्यवस्थाओं का असर अब यात्रियों की संख्या पर भी दिखने लगा है। पेयजल और शौचालयों जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण कई यात्री बस स्टैंड आने से बच रहे हैं। या सीधे नयापुरा बस स्टैण्ड़ जा रहे है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुविधाएं सुधरें तो इस परिसर में रोडवेज के यात्रियों की वापसी संभव है।</p>
<p><strong>जिम्मेदार बोले 3 लाख का खर्च ,बजट नहीं </strong><br />परिसर में ही बन्द पड़े सुलभ शौचालय पर किसी यात्री द्वारा लिखी गयी टिप्पणी प्रशासनिक बेपरवाही की पोल खोलकर रख रही है। वहीं जिम्मेदारों का कहना है कि दो ढ़ाई वर्ष पूर्व एक बिहारी परिवार यहां पर रहता था जब यह शौचालय बनाये गये तब से ही इसमे पानी जमा होने की समस्या थी ऐसे में इसका एस्टीमेंट बनाकर कॉम्पलैक्स के मैनेजर को बताया गया है यहा करीब 3 लाख का खर्चा है जिसके बाद ही यह चालू किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि निगम द्वारा इस परिसर के उपयोग लीज के 22 लाख किराया रकम के सामने यात्रियों की सुविधाओं के नाम पर 3 लाख रुपए तक का बजट नहीं ।</p>
<p><strong>महिला कार्मिकों को संक्रामक बिमारियों खतरा</strong><br />निगम कार्मिकों में आॅफिस स्टाफ के रूप में भी महिलाओं की संख्या काफी है यहां पर 24 महिलाएं अपनी सेवायें दे रही है, ऐसे में महिला कार्मिकों की जरूरी मूलभूत सुविधाओं का इतना बड़ा टंटा होना यहाँ के प्रशासनिक अधिकारी संवेदनशीलता पर भी सवाल है। महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार इस तरह के टायलेट के उपयोग से महिलाओं में संक्रामक बिमारियां तक फैलने का खतरा होता है।</p>
<p><strong>सुविधाएं केवल स्टाफ के लिए वो भी बिना पानी</strong><br />रोड़वेज परिसर में कुल तीन सुविधाघर बनें हुये हे जिनमें से एक प्रथम तल पर है जिसे स्टाफ के द्वारा प्रयोग में लिया जा रहा है। दुसरा ग्राउण्ड़ फ्लोर आईटीसी के पास बना हे जिस पर केवल स्टाफ के लिये लिखा है। हांलाकि इसकी हालात देखकर इसका प्रयोग कोई कर ही नहीं सकता । कमोड़ के चारों तरफ भरा कीचड़ पानी का कनेक्शन तक नहीं, र्दुगन्ध से महिलाओं द्वारा तो इसे कदापि यूज नहीं लिया जा सकता। वहीं तीसरा टॉयलेट सुलभ कॉम्पलेक्स का हे जिस पर पे एण्ड़ यूज तो लिखा है पर इस पर भी कई वर्षो से ताला जडा हुआ है जिसकी गवाही जंग लगा ताला दे रहा है।</p>
<p><strong>महिलाओं की बढ़ी दिक्कत</strong><br />हम बस पकड़ने के लिए समय से पांच मिनट पहले ही आते हैं। यहां सुविधाएं तो दूर, हाथ धोने तक का पानी नहीं मिलता। बच्चों के साथ आने में ज्यादा परेशानी होती है। अगर अचानक कोई जरूरी बात हो जाए तो बस छोड़कर वापस घर भागना पड़ सकता है।<br /><strong>-कमला बाई (55 वर्ष), कोटा-माधोपुर बस यात्री </strong></p>
<p>पे एण्ड़ यूज काफी समय से बन्द पड़ा है, नीचे वाले टायलेट को पिछले साल की ठीक करवाया था। यह गंदगी कबसे है और पानी की कमी की मेरे पास कोई शिकायत नहीं आयी अभी ठीक करवायेंगे।<br /><strong>- अजय मीणा प्रबंधक रोड़वेज कोटा आगार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/passengers--please-note--please-relieve-yourself-before-coming-to-the-bus-stand/article-143651</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/passengers--please-note--please-relieve-yourself-before-coming-to-the-bus-stand/article-143651</guid>
                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 15:42:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/12200-x-600-px%29-%285%291.png"                         length="767217"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पशु चिकित्सालय बदहाली का शिकार, एक कर्मी के भरोसे चल रहा अस्पताल, सुविधाओं का अभाव</title>
                                    <description><![CDATA[पशु चिकित्सालय मर्ज हो चुके  विद्यालय के भवन में अस्थायी रूप से संचालित किया जा रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/veterinary-hospital-in-a-dilapidated-state--running-on-the-strength-of-a-single-employee--lacking-facilities/article-137297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के देईखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। स्थापना के करीब डेढ़ दशक बाद भी चिकित्सालय को न तो स्थायी भवन मिल पाया है और न ही पर्याप्त स्टाफ व संसाधन उपलब्ध कराए जा सके हैं। स्थिति यह है कि पूरा अस्पताल वर्तमान में केवल एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) के भरोसे संचालित हो रहा है, जबकि इस चिकित्सालय से एक दर्जन से अधिक गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं। सूत्रों के अनुसार पशु चिकित्सालय पूर्व में मर्ज हो चुके राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में अस्थायी रूप से संचालित किया जा रहा है। अब पंचायत प्रशासन द्वारा नए भवन में शिफ्ट होने के बाद खाली पड़े राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में अस्पताल को स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। यह भवन लगभग तीन दशक पुराना और जर्जर अवस्था में बताया जा रहा है।</p>
<p>विभागीय सूत्रों का कहना है कि नए पशु चिकित्सालय भवन के निर्माण के लिए न्यूनतम 100*100 फीट भूमि का पट्टा आवश्यक है, लेकिन स्थानीय पंचायत द्वारा भूमि पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है। इसके स्थान पर जर्जर भवन में शिफ्ट करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। गौरतलब है कि चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक, एक पशुधन निरीक्षक और एक पशु परिचर के पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल एक कर्मी तैनात है। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि स्थायी भवन और संसाधनों के अभाव में पशुओं के इलाज, सर्जरी एवं गंभीर बीमारियों में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन और पशुपालन विभाग से शीघ्र भूमि पट्टा जारी कर भवन निर्माण तथा रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की है, ताकि क्षेत्र के पशुपालकों को समुचित चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।<br /> <br />अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों  के साथ बीमार मवेशियों का हर सम्भव  उपचार किया जा रहा है  भूमि आवंटन के लिये पँचायत को लिखा जा चुका है पँचायत द्वारा भवन के स्थानांतरित करने के लिये मौखिक तोर बोला गया  है समस्त स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है <br /><strong>-ओमप्रकाश नागर पशुधन निरीक्षक देईखेड़ा</strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय के अहाते में ही संचालित राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय में कमरों की कमी के कारण उसकी कुछ कक्षाओं को वँहा संचालित करने के लिये व्य्वस्था की निर्देश दिए गए है राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन में शिफ्ट होने से पुराना  भवन खाली है पशु चिकित्सालय को वँहा संचालित करने के लिये लिखा है जल्द ही भूमि आवंटन कर दिया जाएगा <br /><strong>- राहुल पारीक ग्राम विकास अधिकारी देईखेड़ा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/veterinary-hospital-in-a-dilapidated-state--running-on-the-strength-of-a-single-employee--lacking-facilities/article-137297</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/veterinary-hospital-in-a-dilapidated-state--running-on-the-strength-of-a-single-employee--lacking-facilities/article-137297</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 16:01:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/500-px%29-%281%293.png"                         length="1952423"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार साल से गड्ढों में दबा फुटबॉल मैदान, अभ्यास के लिए भटकते खिलाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[बजट मिला, फिर भी मैदान बदहाल,रोज प्रैक्टिस से पहले ग्राउंड की तलाश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/football-field-buried-in-potholes-for-four-years--players-wander-in-search-of-practice-grounds/article-137296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती संभाग का एकमात्र राजकीय फुटबॉल छात्रावास नयापुरा स्थित वोकेशनल स्कूल इन दिनों बदहाली की तस्वीर बना हुआ है। यहां का फुटबॉल मैदान पिछले चार वर्षों से गड्ढों, झाड़-झंकाड़ और गंदगी के ढेर में तब्दील है। हालत यह है कि खेलना तो दूर, मैदान पर चलना भी मुश्किल हो गया है। विडंबना यह है कि मैदान के विकास के लिए 2022 में मिला एक करोंड से ज्यादा का बजट उपलब्ध होने के बावजूद आज तक कार्य पूरा नहीं कराया गया। नतीजतन, प्रदेशभर से यहां आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी अभ्यास के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। मैदान के अभाव में फुटबॉल गतिविधियां ठप होती जा रही हैं। यदि समय रहते मैदान का विकास कराया जाए, तो कोटा से और भी बेहतर खिलाड़ी निकल सकते हैं। अब सवाल यह है कि आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार और कब इन खिलाड़ियों को उनका हक ओर खेलने लायक मैदान मिलेगा।</p>
<p><strong>बजट के बावजूद नहीं हुआ विकास</strong><br />छात्रावास के विकास के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा एक करोंड रुपये से ज्यादा का बजट केडीए को उपलब्ध कराया गया था। गत वर्ष हॉस्टल में नए कमरों का निर्माण तो हो गया, लेकिन मैदान में मिट्टी भराव और समतलीकरण का काम अधूरा रह गया। मैदान में केवल सीढ़ियां बन पाई हैं, जबकि खेलने योग्य सतह आज तक तैयार नहीं हो सकी। ठेकेदार का तर्क है कि ह्लबजट ओवर हो गया, काम भी ओवरह्व, लेकिन खिलाड़ियों के लिए समस्या जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>प्रैक्टिस के लिए रोज जद्दोजहद</strong><br />पिछले तीन साल से खिलाड़ी अपने ही मैदान में अभ्यास नहीं कर पा रहे। मजबूरी में उन्हें करीब 500 मीटर दूर स्टेडियम तक पैदल जाना पड़ता है। वहां भी पहले से कई अकादमियों की टीमें अभ्यास करती रहती हैं, ऐसे में कई बार बिना खेले लौटना पड़ता है। रोजाना दो से ढाई घंटे की आवश्यक प्रैक्टिस ग्राउंड के अभाव में पूरी नहीं हो पाती।</p>
<p><strong>झाड़ियों में तब्दील मैदान, जहरीले जीवों का डर</strong><br />करीब 100़100 साइज के इस मैदान में झाड़-झंकाड़ उग आए हैं, जिससे जहरीले जीव-जंतुओं की आशंका बनी रहती है। जगह-जगह गंदगी के ढेर हैं। यह स्थिति न केवल खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि खेल के प्रति प्रशासनिक उदासीनता को भी उजागर करती है।</p>
<p><strong>अभावों में भी चमकी प्रतिभा</strong><br />इन तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद छात्रावास की टीमों ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उपविजेता स्थान हासिल किया। एक खिलाड़ी का राष्ट्रीय टीम में चयन भी हुआ है। राज्य स्तरीय टूनार्मेंट में भी अधिकांश खिलाड़ी इसी छात्रावास के हैं, लेकिन नियमित अभ्यास के बिना प्रदर्शन पर असर पड़ना तय है।</p>
<p>यह कोटा के खेल जगत के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति है कि जिस वोकेशनल हॉस्टल से देश को कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मिले, आज उसी संस्थान का खेल मैदान बदहाली का शिकार है। मैदान की जर्जर हालत के कारण खिलाड़ी लंबे समय से अभ्यास और प्रतियोगिता की तैयारी में गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। यह न केवल खिलाड़ियों के भविष्य के साथ अन्याय है, बल्कि कोटा की खेल परंपरा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। इस गंभीर समस्या का शीघ्र और स्थायी समाधान किया जाना अत्यंत आवश्यक है।<br /><strong>- तीरथ सांगा, सचिव जिला फुटबॉल संघ, कोटा</strong></p>
<p>मैदान की बदहाल स्थिति को लेकर खिलाड़ी और मैने पहले भी अपने स्तर पर कई बार प्रयास करें हैं और आज भी लगातार आवाज उठा रहे हैं। संबंधित अधिकारियों को बार-बार अवगत करवाने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। नतीजा यह है कि अभ्यास के अभाव में खिलाड़ियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और उन्हें रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आखिर कब खिलाड़ियों को उनका हक मिलेगा<br /><strong>- प्रवीण विजय, फुटबॉल कोच</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मामला संज्ञान में आया है। यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता या चूक पाई जाती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। कोशिश रहेगी की कोटा के खिलाडियों को खेलने के लिए अच्छा मैदान उपल्बध हो सके।<br /><strong>-मुकेश चौधरी, सचिव केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/football-field-buried-in-potholes-for-four-years--players-wander-in-search-of-practice-grounds/article-137296</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/football-field-buried-in-potholes-for-four-years--players-wander-in-search-of-practice-grounds/article-137296</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 15:30:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/500-px%29-%285%291.png"                         length="1725803"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नयापुरा उम्मेद सिंह स्टेडियम में 14 करोड़ की लागत से बना खेल हॉस्टल कर रहा लोकार्पण का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[स्टेडियम परिसर में बने इस आधुनिक हॉस्टल में 52 कमरे व 256 खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-the-sports-hostel-built-at-a-cost-of-rs-14-crore-at-nayapura-ummed-singh-stadium-is-awaiting-inauguration/article-135318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के खेल बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ने जा रही है। नयापुरा स्थित उम्मेद सिंह स्टेडियम परिसर में लगभग 14 करोड़ रुपए की लागत से बनकर खेल हॉस्टल का कार्य पूरा हो चुका है और अब इसका औपचारिक लोकार्पण शेष है। राज्य सरकार की घोषणा के बाद तैयार हुआ यह हॉस्टल शहर के उभरते खिलाड़ियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं प्रदान करेगा। बता दें कि कोटा लंबे समय से शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहा है। यहां अलग-अलग खेलों में प्रतिभाएं उभरकर सामने आती रही हैं, लेकिन आवासीय सुविधाओं की कमी अक्सर खिलाड़ियों के विकास में बाधा बनती थी। ऐसे में यह हॉस्टल कोटा के खेल इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 2023 में इसका टेंडर हुआ था। जानकारी के अनुसार 25 नवंबर 2025 को इसका उद्घाटन होना था, लेकिन किसी कारणों की वजह से इसका उद्घाटन नहीं हो सका। बता दे कि कोटा में हाल ही में कई बड़ी प्रतियोगिताएं हुई हैं। हर प्रतियोगिता में नेशनल-इंटरनेशनल खिलाड़ियों ने भाग लिया था।</p>
<p><strong>ये है हॉस्टल की क्षमता</strong><br />स्टेडियम परिसर में बने इस आधुनिक हॉस्टल में 52 कमरे व 256 खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। कमरों के साथ-साथ खिलाड़ियों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं, स्वच्छता, भोजन व्यवस्था और सुरक्षा के प्रावधानों को भी प्राथमिकता दी गई है। हॉस्टल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां रहने वाले खिलाड़ी बेफिक्र होकर अपने खेल प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इसमें जी+3 (चार मंजिला) इमारत में लिफ्ट, खाने के लिए अलग से मैस, 4 गेस्ट रूम, एक मीटिंग हॉल, हर मंजिल पर 11 सुविधाघर, चारों तरफ कैमरे तथा अलग-अलग कैटेगरी वाले कमरे जिसमें 4, 6 व 10 खिलाड़ी एक साथ ठहर सकते है। यहां आने वाले खिलाड़ियों को एक दूसरे की संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलेगा।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों के लिए जल्द खुलेगा हॉस्टल</strong><br />हॉस्टल का पूरा निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है और यह अब पूरी तरह उपयोग के लिए तैयार है। अधिकारियों के अनुसार इसका लोकार्पण जल्द ही किया जाएगा, जिसके बाद यह आधिकारिक रूप से खिलाड़ियों के लिए खोल दिया जाएगा। खेल विभाग और जिला प्रशासन का मानना है कि इस हॉस्टल के शुरू होने से कोटा में प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों को बहुत राहत मिलेगी। दूर-दराज से आने वाले युवा खेल प्रतिभाओं को अब आवास की चिंता नहीं करनी होगी और वे स्टेडियम के ही निकट रहकर अपनी प्रैक्टिस बढ़ा सकेंगे।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद</strong><br />हॉस्टल के शुरू होते ही एथलेटिक्स, हॉकी, फुटबॉल, खो-खो, कबड्डी समेत विभिन्न खेलों से जुड़े युवा खिलाड़ियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह सुविधा उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, अनुशासित दिनचर्या और उन्नत खेल वातावरण उपलब्ध कराएगी। उम्मीद की जा रही है कि यह हॉस्टल आगामी वर्षों में कोटा को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नई खेल प्रतिभाएं देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस हॉस्टल से स्थानीय खिलाड़ियों को न केवल रहने की सुविधा मिलेगी, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और अनुकूल माहौल भी प्राप्त होगा। इससे जिले में खेल संस्कृति के और मजबूत होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />छात्रावास का लोकार्पण शीघ्र ही प्रस्तावित है। भवन निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है, केवल फर्नीचर की स्थापना का अंतिम चरण शेष है, जो जल्द ही पूरा करवा दिया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि छात्रावास का भव्य लोकार्पण इसी वर्ष सम्पन्न किया जाए।<br /><strong>- वाई बी सिंह, खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-the-sports-hostel-built-at-a-cost-of-rs-14-crore-at-nayapura-ummed-singh-stadium-is-awaiting-inauguration/article-135318</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-the-sports-hostel-built-at-a-cost-of-rs-14-crore-at-nayapura-ummed-singh-stadium-is-awaiting-inauguration/article-135318</guid>
                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 15:14:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/1200-x-600-px%29-%281200-x-600-px%29-%286%291.png"                         length="880946"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी स्कूल में बड़ा बदलाव : पीएमश्री स्कूल अपग्रेड, मिलेगी आधुनिक सुविधाओं की सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[ विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के लिए महीने में एक बार एक घंटे की वर्कशॉप का आयोजन होता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/major-change-in-government-school--pm-shri-school-upgraded--will-get-modern-facilities/article-132944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पीएमश्री राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय श्रीपुरा के रास्ते से यदि आप गुजर रहे हैं तो वहां मौजूद विद्यार्थी आपको ड्रेस व गले में पहने आईडी कार्ड को देखकर यह लगेगा कि ये किसी प्राइवेट स्कूल के नहीं, बल्कि ये विद्यार्थी सरकारी स्कूल पीएमश्री विद्यालय श्रीपुरा के हैं। प्रिंसिपल आभा शर्मा ने बताया कि मेरी स्कूल में पोस्टिंग सन 2021 में हुई थी, उस समय स्कूल में घास-फूंस उगी हुई थी और कमरों की छत क्षतिग्रस्त हो रही थी, जिससे बच्चों को बारिश के दौरान बैठने में परेशानी का सामना करना पड़ता था। वहीं कमरों के फर्श जगह-जगह से क्षतिगस्त हो रहा था। इसके बाद स्टाफ के प्रयासों से विभिन्न अधिकारियों को स्कूल की स्थिति से अवगत कराया गया। अधिकारियों द्वारा स्कूल का मुआयना किया गया। इसके बाद स्कूल में विभिन्न मदों से कार्य करवाकर स्कूल का कायाकल्प करवाया गया। सन 2020-2023 में सरकार के मापदंडों को पूरा करके स्कूल को पीएम श्री स्कूल घोषित किया गया।</p>
<p><strong>विशेष वर्कशॉप का होता है आयोजन</strong><br />स्कूल की प्रिंसिपल शर्मा ने बताया कि विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के लिए महीने में एक बार एक घंटे की वर्कशॉप का आयोजन होता है। इसमें शहर के विभिन्न डॉक्टर,अर्थशास्त्री, फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी, सर्प विशेषज्ञ और विभिन्न सरकारी पदों पर कार्यरत अधिकारियों सहित कई विशेषज्ञों को बुलाया जाता है। इनमें बच्चों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें रूबरू करवाया जाता है और उनकी शंकाओं का समाधान किया जाता है।</p>
<p><strong>स्कूल में ये हैं आधुनिक सुविधाएं</strong><br />कक्षा एक से बारहवीं तक चलने वाले स्कूल में कॉमर्स और इतिहास विषय हैं। स्कूल में अभी करीब कुल 412 विद्यार्थी हैं। बच्चों के लिए गणित की आधुनिक व सुसज्जित लैब है। साथ ही बाल वाटिका में बच्चों के लिए विभिन्न खेलकूद के सामान और एलई टीवी है, जिस पर बच्चों को विभिन्न शिक्षाप्रद वीडियो द्वारा टीचर पढ़ाई करवाते हैं। विद्यालय में हर्बल गार्डन स्थित है, जिसमें तुलसी, गिलोय, नीम, चंपा, गुलाब सहित विभिन्न पौधे लगाए हुए हैं। इन पौधों के माध्यम से बच्चों को इनके गुण व उपयोगिता बताई जाती है। स्कूल के व्याख्याता महावीर बघेरवाल ने बताया कि इसके साथ ही स्कूल परिसर में एक बालक वाटिका भी निर्माण किया गया है, जिसमें बच्चों को खेलकूद से संबंधित गतिविधियां करवाई जाती हैं। साथ ही बच्चों के लिए स्मार्ट क्लासरूम बनाया हुआ है, जिसकी दीवारों पर बच्चों के लिए गिनती, पहाड़े, फल व सब्जियों के नामों की आकृतियां बनाई गई हैं। क्लासरूम में विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर की अच्छी व्यवस्था है, जिस पर बैठकर बच्चे पढ़ाई करते हैं। अभी यह है स्कूल में अध्यापक पदों की स्थिति : पी.एम.श्री स्कूल श्रीपुरा में अभी 26 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 9 पद खाली हैं। इनमें हिंदी अध्यापक के 2, इंग्लिश के 2, उर्दू के 1, कॉमर्स अध्यापक के 3 और प्रैक्टिकल संकाय के 1 पद खाली हैं। साथ ही स्कूल में एक भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत नहीं है।</p>
<p><strong>स्कूल की दीवारें देती हैं विभिन्न संदेश</strong><br />पहले स्कूल की दीवारें पूरी तरह से बदरंग थीं। अब स्कूल की दीवारों पर बच्चों के लिए महीनों के नाम अंग्रेजी में, विभिन्न वेजिटेबल व फलों की आकृतियां, राजस्थान का नक्शा, अंक ट्री, सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले फ्रॉड से बचाव के संदेश सहित विभिन्न जागरूक संदेश चित्रित किए गए हैं। इन दीवारों के माध्यम से बच्चों को अलग-अलग रचनात्मक ढंग से समझाया जाता है।</p>
<p>स्कूल ज्वाइन करने से पहले स्कूल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त अवस्था में था। उसके बाद स्कूल स्टाफ के प्रयासों से स्कूल का कायाकल्प करवाकर स्थिति में सुधार हुआ। स्कूल परिसर पूरी तरह से सीसीटीवी से लैस है। स्कूल में अभी आरओ व वाटर कूलर लगे हुए हैं।<br /><strong>- आभा शर्मा, प्रिंसिपल, पीएमश्री विद्यालय, श्रीपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/major-change-in-government-school--pm-shri-school-upgraded--will-get-modern-facilities/article-132944</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/major-change-in-government-school--pm-shri-school-upgraded--will-get-modern-facilities/article-132944</guid>
                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 17:31:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/11-%28700-x-400-px%29-%287%291.png"                         length="446532"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 36 - राजनीतिक भेदभाव का शिकार हो रहे वार्डवासी, सुलभ कॉम्पलेक्स की नहीं मिल रही सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[कई बार अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-36---residents-facing-political-discrimination--denied-access-to-sulabh-complex-facilities/article-127570"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(1)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर के वार्ड 36 की स्थिति सही नहीं हैं। वार्डवासी राजनीतिक भेदभाव का खामियाजा भुगतने को मजबूर हैं। जहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं स्थानीय समस्याओं का वर्षों से समाधान न होने के कारण लोगों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। वार्ड में बने सिवरेज जाम होने के कारण उसका गंदा पानी  लोगों के घरो में जा रहा है। जिससे रहवासी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्डवासी कहते हैं कि समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। </p>
<p><strong>वार्ड का एरिया </strong><br />करबला मस्जिद, मदरसे के आस-पास का एरिया, शबाना मंजिल, शीतला माता मन्दिर, सलीम पूर्व पार्षद, मेग्जीन स्कूल, सुलभ कॉम्पलेक्स, तम्बोली पाडा, देश की धरती कार्यालय, लक्की बुर्ज से कोट के उपर का एरिया, नन्दू जमादार इत्यादि </p>
<p><strong>सीवरेज जाम, गंदा पानी घरों में</strong><br />पर कोटा एरिये की सबसे बड़ी समस्या सिवरेज लाइन जाम होना है। जाम होने की स्थिति में उसका गंदा पानी सीधे लोगों के घरों में घुस जाता है। यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है।</p>
<p>वार्ड में खुले नाले और टूटी-फूटी नालियों से वार्डवासी परेशान हैं। जगह-जगह गंदा पानी भरने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम से शीघ्र मरम्मत व सफाई की मांग की है। वहीं करबला मस्जिद के बाहर नालियों का गंदा पानी बहने से गंदगी फैल रही है।<br /><strong>- कासिम खान, वार्डवासी </strong></p>
<p>मैगजीन रोड और शीतला माता चौक पर बने कॉम्प्लेक्स कई सालों से बंद पड़े हुए हैं। इनका उपयोग न होने से न केवल परेशानी हो रही है, बल्कि आसपास का इलाका भी बदहाल होता जा रहा है। लोग रोजाना इन भवनों को बंद पड़ा देखकर जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी पर सवाल उठाते हैं।<br /><strong>- मिशरू निशा, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड की गलियों और सड़कों पर खंभों से लटकते हुए बिजली के तार घरों को टच कर रहे हैं। लोग भय बना रहता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।<br /><strong>- कल्याणी बाई, वार्डवासी</strong></p>
<p>क्षेत्र में रोजाना सफाई करवाई जाती है, सुलभ कांप्लेक्स खोलने के लिए कई बार अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके साथ राजनीतिक भेदभाव किया जा रहा है, जिस कारण वार्ड की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा।<br /><strong>- राशिद खान, पार्षद </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-36---residents-facing-political-discrimination--denied-access-to-sulabh-complex-facilities/article-127570</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-36---residents-facing-political-discrimination--denied-access-to-sulabh-complex-facilities/article-127570</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 18:27:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/_4500-px%29-%281%2921.png"                         length="710713"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लैब टेक्नीशियन घर में बैठा : मरीज अस्पताल में तड़प रहे, मरीजों को जाना पड़ता है खानपुर, बारां</title>
                                    <description><![CDATA[सात दिन में केवल एक बार हस्ताक्षर करने आता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-lab-technician-sits-at-home--while-patients-suffer-in-the-hospital/article-127429"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(3)10.png" alt=""></a><br /><p>मोईकलां। स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जांच सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है।  आवश्यक जांच के लिए मरीजों को खानपुर या बारां जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार चिकित्सा विभाग की ओर से यहां पर जांच सुविधा के लिए एक लैब टेक्नीशियन नियुक्त है। लेकिन उसके समय पर मौजूद नहीं रहने से मरीजों को परेशान होना पड़ता है। शुक्रवार को मौके पर मौजूद कस्बेवासियों ने बताया कि लैब टेक्नीशियन सात दिन में केवल एक बार हस्ताक्षर करने आता है।</p>
<p><strong>कई बार कर चुके समझाइश</strong><br />पीएचसी प्रभारी कम्पाउडर सुमेर सिंह तंवर ने बताया कि बार-बार समझाने के बाद भी लैब टेक्नीशियन के व्यवहार में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है। </p>
<p><strong>जारी कर चुके हैं नोटिस</strong><br />खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि पहले भी लैब टेक्नीशियन को नोटिस जारी किया जा चुका है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समस्या को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।<br /><strong>-कम्पाउडर सुमेर सिंह तंवर, पीएचसी प्रभारी </strong></p>
<p>लगातार शिकायतें मिलने पर उसका वेतन रोकने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने पर एक बार पहले भी उसका वेतन रोका जा चुका है।<br /><strong>-डॉ. नरेंद्र कुमार मीणा, खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-lab-technician-sits-at-home--while-patients-suffer-in-the-hospital/article-127429</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-lab-technician-sits-at-home--while-patients-suffer-in-the-hospital/article-127429</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Sep 2025 17:03:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/_4500-px%29-%283%2910.png"                         length="451978"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गौशाला में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव</title>
                                    <description><![CDATA[कम्पाउंडरों के भरोसे ही बीमार व कमजोर पशुओं का उपचार किया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-medical-facilities-in-the-cowshed/article-125574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(630-x-400-px)-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। यहां हजारों की संख्या में लावारिस हालत में पकड़कर लाए गए पशु रखे गए हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इतनी बड़ी संख्या में गौवंश के लिए गौशाला में अब तक पशु चिकित्सालय तक संचालित नहीं हो पाया है। कम्पाउंडरों के भरोसे ही बीमार व कमजोर पशुओं का उपचार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>ग्रीनबेल्ट पर खर्च, जरूरी काम अधूरे</strong><br />सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि निगम की ओर से गौशाला में जो आवश्यक निर्माण कार्य हैं, वे तो अधूरे पड़े हैं। इसके उलट लाखों रुपए खर्च कर ग्रीनबेल्ट विकसित की गई है। लेकिन बीमार पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा और रहने के लिए शेड जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हुई हैं।</p>
<p><strong>निगम का पक्ष</strong><br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के अधिकारियों का कहना है कि गौशाला में निर्माण कार्यों की टेंडर प्रक्रिया जारी है। जल्द ही पशुओं के लिए शेड व अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा।</p>
<p><strong>कायन हाउस की स्थिति और खराब </strong><br />सिंह ने बताया कि किशोरपुरा स्थित कायन हाउस की स्थिति तो और भी खराब है। वहां तो चिकित्सा केन्द्र तक मौजूद नहीं है। कम्पाउंडरों से ही काम चलाया जा रहा है। शहर में निजी स्तर पर करीब दो दर्जन पशु चिकित्सा केन्द्र संचालित हो रहे हैं, लेकिन निगम की गौशालाओं में मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल रही है। इससे बीमार पशुओं की देखभाल में कठिनाई आती है।</p>
<p><strong>डॉक्टर आते हैं सप्ताह में एक-दो बार</strong><br />गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि यहां लाए जाने वाले अधिकांश गौवंश बीमार और कमजोर स्थिति में होते हैं। उन्हें लगातार चिकित्सा सुविधा की जरूरत रहती है। लेकिन निगम की ओर से यहां स्थायी पशु चिकित्सक तैनात नहीं है। बोरावास व मंडाना से सप्ताह में केवल एक-दो बार ही डॉक्टर आते हैं। ऐसे में आपात स्थिति में समय पर उपचार न मिल पाने से कई बार गंभीर परेशानी खड़ी हो जाती है। फिलहाल एक रिटायर्ड डॉक्टर को निगम की ओर से नियुक्त किया गया है, जिनसे काम चल रहा है।</p>
<p><strong>टेंडर तक नहीं हुए</strong><br />समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि निगम अधिकारियों को कई बार कहा गया, लेकिन अब तक शेड लगाने का काम शुरू नहीं हुआ। कई कार्यों के तो टेंडर तक जारी नहीं हुए हैं। इससे गौवंश की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर लगातार खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong> बरसात व धूप में खुले में रहने को मजबूर पशु</strong><br />गौशाला परिसर में एक और बड़ी समस्या टीनशेड की कमी है। मानसून में भारी बारिश और गर्मी में तेज धूप से बचाने के लिए शेड जरूरी है, लेकिन निगम अभी तक यह काम भी शुरू नहीं कर पाया है। इस कारण अधिकतर पशु खुले में ही खड़े रहने को मजबूर हैं। बारिश में गीली जमीन पर खड़े रहने और धूप में तपते रहने से उनकी सेहत और बिगड़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-medical-facilities-in-the-cowshed/article-125574</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-medical-facilities-in-the-cowshed/article-125574</guid>
                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 16:38:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/1ne1ws-%28630-x-400-px%29-%283%291.png"                         length="557213"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार साल से 25 करोड़ का इंतजार, न कैफेटेरिया बना, न एनक्लोजर</title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का अब तक शुरू नहीं हुआ द्वितीय चरण का काम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-25-crores-since-four-years--neither-cafeteria-nor-enclosure/article-121875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news74.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान का सबसे बड़ा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क 4 साल से बजट को तरस रहा है। 25 करोड़ के बजट के अभाव में सुविधाएं विकसित नहीं हो पा रही। वहीं, रियासतकालीन चिड़ियाघर से वन्यजीवों की शिफ्टिंग भी अटकी पड़ी है। यहां न तो कैफेटेरिया है और न ही बड़े वन्यजीवों को रखनेके लिए एनक्लोजर। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटकों को टिकट का पैसा अखर रहा है और वन विभाग को कोसते हुए मायूस लौट रहे हैं।  दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के विकास कार्यों के लिए तत्कालीन सरकार में जायका प्रोजेक्ट के तहत 25 करोड़ रुपए दिए जाने थे,जो अब तक नहीं मिले। इसके बाद वर्तमान सरकार में हाल ही में मुख्यमंत्री बजट घोषणा में 25 करोड़ बजट दिए जाने की घोषणा हुई लेकिन राशि नहीं मिला। हालांकि, कार्य की डीपीआर तैयार करने के लिए मात्र 20 लाख रुपए की राशि मिली है। जिसमें से वन्यजीव प्रशासन ने 5 लाख टेंडर कर 11 एनक्लोजर की डिजाइन ड्राइंग बनवा ली है। अब काम शुरू करने के लिए बजट राशि मिलने का इंतजार हो रहा है।  </p>
<p><strong>30 करोड़ से बना था बायोलॉजिकल पार्क </strong><br />वन्यजीव विभाग के उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि वर्ष 2017 में 30 करोड़ की लागत से बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। जिसे 2019 में पूरा किया जाना था लेकिन कोविड के 2 साल के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके बाद 21 नवंबर 2021 को प्रथम चरण का काम पूरा हुआ था। </p>
<p><strong>प्रथम चरण में यह हुए कार्य </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में कुल 35 एनक्लोजर बनने थे। जिसमें से प्रथम चरण में 8 मांसाहारी, 5 शाकाहारी तथा 5 पक्षियों के बनाए गए हैं। शेष एनक्लोजर बजट के अभाव में नहीं बन पाए। जिसकी वजह से चिड़ियाघर   के दो दर्जन से अधिक वन्यजीव शिफ्ट नहीं हो सके। </p>
<p><strong>आॅपरेशन या पोस्टमार्टम के लिए 16 किमी का चक्कर</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में तैनात वनकर्मियों ने बताया कि वेटनरी हॉस्पिटल नहीं होने से वन्यजीवों के इलाज में परेशानी होती है। इलाज के संबंधित कुछ उपकरण बायोलॉजिकल पार्क में तो कुछ चिड़ियाघर में हैं। वन्यजीवों को यदि दवाइयां देनी हो तो यहां से दे देते हैं लेकिन आॅपरेशन या पोस्टमार्टम करना हो तो उसे करीब 16 किमी दूर चिड़ियाघर लाना होता है। ऐसे में कई बार वन्यजीवों को समय पर इलाज मुहैया करवाना काफी चुनौतिपूर्ण हो जाता है। </p>
<p><strong>द्वितीय चरण में यह होने हैं कार्य </strong><br />पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से करीब 17 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं। </p>
<p><strong>चिड़ियाघर से नहीं हो पा रही शिफ्टिंग  </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, घड़ियाल, मगरमच्छ, बंदर व कछुए सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे।</p>
<p><strong>पर्यटकों में नाराजगी, अखर रहा टिकट का पैसा </strong><br />वर्तमान में बायोलॉजिलक पार्क में शाकाहारी व मांसाहारी मिलाकर करीब 70 से ज्यादा वन्यजीव हैं। यहां आने वाले पर्यटक 55 रुपए खर्च करने के बावजूद बब्बर शेर, टाइगर, लोमड़ी, मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर सहित अन्य बड़े वन्यजीव का दीदार नहीं कर पाने से निराश होकर लौट रहे हैं। वहीं, कैफेटेरिया सुविधा नहीं होने से लोगों को चाय-नाश्ते के लिए परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा र्प्यटकों के बैठने के लिए छायादार शेड भी र्प्याप्त नहीं हैं।  </p>
<p><strong>पर्यटक बोले-न टाइगर न लॉयन, समय होता बर्बाद </strong><br />बोरखेड़ा निवासी अजय कुश्वाह ने बताया कि गत गुरुवार को परिवार के साथ बायोलॉजिकल पार्क गए  थे। यहां प्रत्येक सदस्य के 55 रुपए टिकट लेने के बावजूद अंदर कोई बड़ा वन्यजीव नहीं दिखा। लॉयन व टाइगर नहीं होने से बच्चे मायूस हो गए। पैंथर है लेकिन वह भी पेड़ की आड़ में ही बैठा रहता है।बड़े एनिमल नहीं होने से पैसे और समय की बर्बादी है। वहीं, कुन्हाड़ी निवासी हरमित सांखला व प्रमोद कुमार कहना है कि पार्क के नाम पर वन विभाग पर्यटकों की जेब काट रहा है। पैसा खर्च करने के बावजूद बब्बर शेर, टाइगर, मगरमच्छ, घड़ियाल, अजगर सहित अन्य बडेÞ वन्यजीव देखने को नहीं मिले।  दादाबाड़ी निवासी कैशव दत्ता, रामगोपाल शर्मा, हेमलता कंवर, प्रियंका नंदवाना का कहना था कि यहां गिनती  के जानवर हैं और बैठने के लिए पर्याप्त बैंच भी नहीं है। कुछ झूले लगे हैं, उनमें से भी कुछ खराब हो रहे। एनीमल के साथ प्ले जॉन में सुविधाएं बढ़ानी चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के द्वितीय चरण के विकास कार्य के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा में 25 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। डीपीआर तैयार करवाने के लिए ही 20 लाख रुपए की राशि मिली है। जिसमें से 5 लाख रुपए का टेंडर कर 11 एनक्लोजर की ड्रॉइंन डिजाइन बनवा ली है लेकिन कार्य बजट राशि प्राप्त होने पर हो सकेंगे। हालांकि बजट राशि के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। जल्द बजट मिलने की उम्मीद है। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-25-crores-since-four-years--neither-cafeteria-nor-enclosure/article-121875</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-25-crores-since-four-years--neither-cafeteria-nor-enclosure/article-121875</guid>
                <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 15:21:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-07/news74.png"                         length="547653"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आय के स्रोत बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं विकसित करने पर रहेगा फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात में आमजन को परेशानी से बचाना पहली प्राथमिकता ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/focus-will-be-on-increasing-the-sources-of-income-and-developing-basic-facilities-in-rural-areas/article-119526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt1124roer.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा विकास प्राधिकरण नवसृजित संस्था है।  इसमें आय के स्रोत बढ़ाने की आवश्यकता है। साथ ही नगर विकास न्यास से केडीए का गठन होने के बाद इसमें शामिल ग्रामीण क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह कहना है कि केडीए के नवनियुक्त आयुक्त हरफूल सिंह यादव का। भारतीय प्रशासनिक  सेवा के वरिष्ठ अधिकारी व सीएडी कोटा में अतिरिक्त आयुक्त यादव को सरकार ने केडीए आयुक्त का अतिरिक्त चार्ज दिया है। मूल रूप से सीकर निवासी यादव पाली, जयपुर, धोलपुर, अजमेयर, जालौर, झुंझुनू, राजसमंद, बारां व दौसा में विभिन्न पदों पर पद स्थापित रह चुके हैं।   तत्कालीन केडीए आयुक्त रिषभ मंडल का स्थानांतरण होने के बाद से यह पद रिक्त था।   उनके स्थान पर आईएएस यादव  को केडीए आयुक्त का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। यादव ने शुक्रवार को आयुक्त पद पर कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर यादव ने नवज्योति से विशेष बातचीत की। </p>
<p><strong>सवाल:</strong> केडीए आयुक्त के रूप में आपकी क्या प्राथमिकता रहेगी।<br /><strong>आयुक्त:</strong> केडीए आयुक्त के रूप में अभी चार्ज संभाला ही है। यहां के बारे में जानकारी कर जितना बेहतर हो सकेगा करने का प्रयास करेंगे। अभी मानसून का सीजन है। इस सीजन में शहर वासियों को किसी तरह की समस्या नहीं हो उसकी व्यवस्था करना पहली प्राथमिकता है। </p>
<p><strong>सवाल:</strong> केडीए बनने के बाद इसकी आर्थिक स्थिति में सुधार के क्या प्रयास रहेंगे।<br /><strong>आयुक्त:</strong> केडीए नवसृजित संस्था है। पहले नगर विकास न्यास का दायरा शहर तक ही सीमित था। अब केडीए बनने के बाद दायरा बढ़ा है। ऐसे में केडीए की आवासीय व व्यवसायिक योजनाएं लाौंच कर अधिक से अधिक लोगों को उनका लाभ पहुंचाया जाएगा। जिससे केडीए की आय के स्रोत भी विकसित होंगे। आय के स्रोत विकसित होने पर ही इसकी आर्थिक स्थिति सुढृढ़ होगी।<br /> <br /><strong>सवाल:</strong> कैथून समेत कई नगर पालिकाएं निगम में शामिल हो गई हैं। वहीं केडीए में भी कई इलाके शामिल होने के बाद भी वहां विकास नहीं हो पाया है। उनके लिए क्या योजना है।<br /><strong>आयुक्त:</strong> केडीए बनने के बाद आस-पास के 289 गांवों को इसमें शामिल किया गया है। पहले जहां शहरी क्षेत्र का ही विकास किया जाता था। वहीं अब केडीए द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों का भी विकास किया जा सकेगा। केडीए में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं विकसित करना, सड़क, बिजली, पानी और साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिससे वहां रहने वालों को अहसास हो कि वे भी शहरी क्षेत्र का हिस्सा बन चुके हैं।</p>
<p><strong>सवाल:</strong> शहर का विकास किस तरह से किया जाएगा।<br /><strong>आयुक्त:</strong> केडीए द्वारा शहर में विभिन्न विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। कई योजनाएं व कार्य पूर्व में स्वीकृत हो चुके हैं और प्रगतिरत भी हैं। उन कायोरं को गति देने व समय पर और गुणवत्तापृूर्ण कार्य करवाने का प्रयास रहेगा। फिर चाहे ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का काम हो या अन्य विकास कार्य। उन सभी को समय पर पूरा करवाने का प्रयास किया जाएगा। </p>
<p><strong>सवाल:</strong> केडीए की योजनाओं का आमजन को लाभ दिलाने की क्या योजना है।<br /><strong>आयुक्त: </strong>राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं हैं। उन योजनाओं का आमजन को लाभ दिलाने के लिए उनका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही लोकसभा अध्यक्ष की मंशाअनुसार आवासहीन लोगों को अफोर्डेबल योजनाओं में दस हजार आवास उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा।  निम्न व अल्प आय वर्ग के लोगों के  लिए सस्ती व सुलभ योजनाएं निकाली जाएंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/focus-will-be-on-increasing-the-sources-of-income-and-developing-basic-facilities-in-rural-areas/article-119526</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/focus-will-be-on-increasing-the-sources-of-income-and-developing-basic-facilities-in-rural-areas/article-119526</guid>
                <pubDate>Sat, 05 Jul 2025 15:17:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-07/rt1124roer.png"                         length="420038"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        