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                <title>बजट की कमी से जूझ रहा कोटा का शाला क्रीड़ा संगम, खिलाड़ियों से शुल्क वसूली पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[बैडमिंटन हॉल में 800 रुपये शुल्क को लेकर पारदर्शिता पर सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota%E2%80%99s-shala-krida-sangam--school-sports-centre--grapples-with-budget-crunch--fee-collection-from-players-sparks-debate/article-162178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/budget-ki.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। खेल प्रतिभाओं के लिए पहचाने जाने वाले शहर का शाला क्रीड़ा संगम महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (मल्टीपरपज), गुमानपुरा इन दिनों संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। शिक्षा विभाग के अधीन संचालित इस खेल केंद्र में दस खेलों के लिए 18 प्रशिक्षक कार्यरत हैं और सुबह-शाम करीब 330 खिलाड़ी नियमित अभ्यास करने पहुंचते हैं। मैदान हैं, कोच हैं और खिलाड़ियों का जुनून भी है, लेकिन पर्याप्त बजट के अभाव में खेल व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है।</p>
<p><strong>बिजली, रखरखाव और सुरक्षा... दो लाख में आखिर कैसे चलेगा काम</strong><br />शाला क्रीड़ा संगम के प्रभारी एवं विद्यालय के उपप्रधानाचार्य का कहना है कि पूरे वर्ष के लिए मात्र दो लाख रुपये का बजट मिलता है। इसी राशि से बिजली बिल, मैदानों का रखरखाव, भवनों की मरम्मत, सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य खर्च पूरे करने पड़ते हैं। उनका कहना है कि इतनी कम राशि में गुणवत्तापूर्ण खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद कठिन है। कई बार बजट समय पर नहीं मिलने से आवश्यक कार्य भी अटक जाते हैं। उनका कहना है कि खेल गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन बजट वर्षों से लगभग नाममात्र का ही है। ऐसे में खिलाड़ियों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराना चुनौती बन गया है।</p>
<p><strong>बैडमिंटन हॉल पर विरोधाभासी दावे, शुल्क वसूली पर उठ रहे सवाल</strong><br />विद्यालय के प्राचार्य आशुतोष मथुरिया का कहना है कि खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। फुटबॉल मैदान का विकास किया जा रहा है, एथलेटिक्स ट्रैक बनाया जा रहा है तथा हॉकी और बैडमिंटन के लिए इंडोर हॉल भी तैयार किए गए हैं। दूसरी ओर प्रभारी का कहना है कि बैडमिंटन के लिए प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण हॉल बंद है।</p>
<p>हालांकि स्थानीय निवासियों का दावा इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि बैडमिंटन हॉल नियमित रूप से संचालित हो रहा है और इसकी व्यवस्था प्रभारी सुनील गुप्ता संभालते हैं। खिलाड़ियों से प्रति सदस्य 800 रुपये शुल्क लिया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि शुल्क लिया जा रहा है तो वह राशि किस मद में खर्च हो रही है। जब बजट की कमी का हवाला दिया जा रहा है तो खिलाड़ियों से मिलने वाली इस आय का उपयोग कहां हो रहा है, इसे लेकर पारदर्शिता की मांग उठने लगी है।</p>
<p><strong>800 रुपये देकर खेलते हैं', खिलाड़ियों ने सुनाई अपनी बात</strong><br />बैडमिंटन खिलाड़ी रुद्रांश और निश्चित ने बताया कि वे नियमित रूप से यहां अभ्यास करने आते हैं। उनके अनुसार प्रत्येक सदस्य से 800 रुपये लिए जाते हैं और प्रतिदिन करीब एक घंटे का समय खेलने के लिए दिया जाता है। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि शुल्क लिया जा रहा है तो उसके अनुरूप सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। वहीं कई खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का कहना है कि विद्यालय प्रशासन यदि खेल परिसरों की देखरेख पर थोड़ा और ध्यान दे तो सीमित संसाधनों में भी काफी सुधार संभव है। उनका मानना है कि सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, ताकि खिलाड़ी बिना किसी डर और असुविधा के अभ्यास कर सकें।</p>
<p><strong>तीन साल से जंगल बना कबड्डी मैदान, खिलाड़ी बोले—ऐसे कैसे बनेंगे चैंपियन</strong><br />कबड्डी खिलाड़ियों की पीड़ा भी कम नहीं है। एक खिलाड़ी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से कबड्डी का मैदान उपेक्षा का शिकार है। मैदान में झाड़ियां और घास उग चुकी हैं, जिससे वहां नियमित अभ्यास करना मुश्किल हो गया है। खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशिक्षक मैदान ठीक कराने की बात कहते हैं, जबकि प्रभारी बजट की कमी का हवाला देते हैं। इस खींचतान का सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों को उठाना पड़ रहा है।</p>
<p>स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का कहना है कि शहर से अच्छे खिलाड़ी निकलें, यह हर किसी की इच्छा है। लेकिन इसके लिए केवल बड़े दावे पर्याप्त नहीं हैं। खेल मैदानों का रखरखाव, पर्याप्त बजट, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो खेल प्रतिभाएं सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ती रहेंगी। वहीं यदि प्रशासन गंभीरता से पहल करे तो यही शाला क्रीड़ा संगम भविष्य में हाड़ौती के खेल मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 14:57:55 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का ... कोटा स्टेडियम में बनेंगे दो नए एथलेटिक्स ट्रैक</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा अध्यक्ष बिरला की खेल मंत्री के साथ हुई बैठक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news-report--two-new-athletics-tracks-to-be-built-at-kota-stadium/article-162183"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/kota-std.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोटा-बूंदी क्षेत्र में खेल सुविधाओं के विस्तार और खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बुधवार को संसद भवन में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में कोटा स्टेडियम में दो नए एथलेटिक्स ट्रैक के निर्माण सहित खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में बिरला ने कहा कि हाल ही में कोटा के खिलाड़ियों से संवाद के दौरान आधुनिक खेल सुविधाओं की आवश्यकता सामने आई है। उन्होंने कहा कि कोटा को खेल प्रतिभाओं का मजबूत केंद्र बनाने के लिए आधुनिक खेल परिसरों का निर्माण, मौजूदा सुविधाओं का उन्नयन और विभिन्न खेलों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। </p>
<p>उन्होंने केंद्रीय खेल मंत्री से कोटा में खेल सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया। बैठक में खिलाड़ियों के बेहतर प्रशिक्षण, अत्याधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षकों की उपलब्धता तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। बिरला ने कहा कि कोटा में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यदि उन्हें आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिले। तो वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।<br /> <br />बैठक के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कोटा में खेलों के विकास के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि केंद्र सरकार देशभर में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचना विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक के दौरान बिरला ने कोटा के ईएसआई अस्पताल में आधुनिक मशीनें और हाईटेक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया। इस पर केंद्रीय मंत्री ने आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया खेल स्टेडियमों का मामला</strong><br />कोटा शहर में खेल मैदानों और स्टेडियमों की दुर्दशा के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में श्रंखलाबद्ध समाचार प्रकाशित किए जा रहे हैं। समाचारों में बताया गया कि शहर के विभिन्न स्थानों पर स्थित खेल स्टेडियमों में पर्याप्त सुविधाओं का अभाव होने से खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि यहां पर सुविधाओं का विस्तार हो जाए तो खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 14:56:12 +0530</pubDate>
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                <title>25 साल पुराने खेल परिसर में टूटी सुविधाएं, विकास की राह देख रहा स्टेडियम</title>
                                    <description><![CDATA[वीर दुर्गादास राठौड़ स्टेडियम: चोरी और असुरक्षा से खिलाड़ियों का टूट रहा हौसला
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/facilities-in-the-25-year-old-sports-complex-in-disrepair/article-162062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक ओर शहर में खेलों को बढ़ावा देने और आधुनिक स्टेडियम विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ङऊअ के अधीन आने वाला वीर दुर्गादास राठौड़ स्टेडियम बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जो सरकारी व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े करता है। करीब 25 वर्ष पुराने इस स्टेडियम की हालत आज इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां खेल सुविधाओं से अधिक अव्यवस्थाएं नजर आती हैं। अव्यवस्थित मैदान, बदहाल शौचालय, खराब लाइटें, चोरी हो चुके उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था का अभाव खिलाड़ियों के उत्साह पर भारी पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी यह स्टेडियम क्षेत्र के युवाओं के लिए खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था, लेकिन वर्षों से रखरखाव नहीं होने के कारण इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। आज हालत यह है कि यहां आने वाले खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।</p>
<p><strong>सुरक्षा के अभाव में बढ़ रही चोरी की घटनाएं</strong><br />स्टेडियम में सुरक्षा व्यवस्था लगभग नदारद है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां आए दिन चोरी की घटनाएं होती रहती हैं। स्टेडियम में लगाया गया वाटर कूलर भी चोरों के निशाने से नहीं बच सका। कुछ माह पहले खिलाड़ियों की सुविधा के लिए बनाए गए ओपन जिम से भी अधिकांश उपकरण चोरी हो चुके हैं। स्टेडियम में मौजूद शौचालयों की स्थिति भी चिंताजनक है। कई स्थानों पर दीवारें जर्जर हो चुकी हैं और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। साफ-सफाई के अभाव में खिलाड़ियों और यहां आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं परिसर में लगी कई लाइटें टूटी हुई हैं, जिससे शाम के समय अभ्यास करना लगभग असंभव हो जाता है।</p>
<p><strong>नाम का फुटबॉल मैदान, बदहाल बास्केटबॉल कोर्ट</strong><br />खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम में फुटबॉल मैदान तो बना हुआ है, लेकिन उसकी स्थिति किसी पेशेवर खेल मैदान जैसी नहीं है। बास्केटबॉल कोर्ट भी रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुका है। कई स्थानों पर फर्श खराब है और खेल के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि मैदानों का नियमित रखरखाव हो और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो यहां से भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों का टूट रहा मनोबल</strong><br />क्षेत्र के खिलाड़ियों का कहना है कि वे सीमित संसाधनों में अभ्यास करने को मजबूर हैं। आधुनिक खेल सुविधाओं के अभाव में उनकी प्रतिभा पूरी तरह निखर नहीं पा रही। उनका मानना है कि यदि अभ्यास के लिए बेहतर मैदान, सुरक्षित वातावरण, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छ शौचालय और खेल उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तो क्षेत्र के कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।<br /><strong>-सरमन लबान, फुटबॉल खिलाड़ी</strong></p>
<p><strong>विकास की राह देख रहा स्टेडियम</strong><br />शहर के कई स्टेडियमों में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ऐसे में वीर दुर्गादास स्टेडियम भी विकास का हकदार है। खेल संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो यह स्टेडियम एक बार फिर क्षेत्र की खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है। परिसर में सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं, सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, फुटबॉल मैदान और बास्केटबॉल कोर्ट का नवीनीकरण हो, पेयजल और शौचालय की समुचित व्यवस्था की जाए तथा चोरी हुए ओपन जिम उपकरणों को पुनः स्थापित किया जाए।<br /><strong>-मयंक राज जेठी, स्थानीय खेल प्रेमी</strong></p>
<p>स्टेडियम के रखरखाव एवं आवश्यक मरम्मत कार्यों के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे खिलाड़ियों और स्थानीय नागरिकों को बेहतर एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके।<br /><strong>-अंकित अग्रवाल, अधिशासी अभियंता केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:33:11 +0530</pubDate>
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                <title>28 लाख लगे, उद्घाटन भी नहीं हुआ, अब बंद होने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[ चार्जिंग सुविधा के अभाव में नई ई-बसों का ठहराव भी असंभव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/%E2%82%B928-lakh-spent--yet-no-inauguration--now-facing-closure/article-160023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)43.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक तरफ जहाँ पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 'पीएम ई-बस सेवा' के तहत 100 नई इलेक्ट्रिक एसी (AC) बसों के साथ एक नई क्रांति की शुरुआत होने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम कोटा की पुरानी लचर प्लानिंग का एक बड़ा खामियाजा सामने आ रहा है। अगस्त महीने से शहर की सड़कों पर 40 नई ई-बसें दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन इस बड़े बदलाव के बीच रामचंद्रपुरा- संजय नगर(80 फीट रोड) रोड़ स्थित सिटी बस स्टैंड अब पूरी तरह वीरान होने की कगार पर पहुँच गया है।</p>
<p><strong>28 लाख की लागत बेकार, उद्घाटन से पहले ही खस्ताहाल</strong><br />लगभग तीन साल पहले, पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 28 लाख रुपए की लागत से इस सिटी बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था। लेकिन विभागीय उदासीनता और तत्कालीन कारणों के चलते आज तक इस बस स्टैंड का उद्घाटन तक नहीं नसीब हो सका। स्थानीय पार्षद किशन प्रजापति ने बताया कि 2022 में तैयार हाेने के बाद से ही इसका उद्घाटन ही नहीं हुआ,वर्तमान में इस स्टैंड के मुख्य गेट के पास की दीवार भी टूटी हुई है, जिसे ठीक कराने की जहमत तक नहीं उठाई गई है।</p>
<p><strong>क्यों खत्म हो जाएगी उपयोगिता?</strong><br />इस डिपो की बस क्षमता 30 है जहां नगर निगम के बेड़े में शामिल 28 लो-फ्लोर बसें आराम से खड़ी हुआ करती है। लेकिन उनके हटने के बाद यह स्टैंड पूरी तरह अनुपयोगी हो जायेगा । शहर में आने वाली नई आधुनिक ई-बसों के संचालन और उनके रात्रि ठहराव के लिए सबसे पहली जरूरत 'बेसिक चार्जिंग स्टेशन' का होना है। चूंकि नई बसों को खड़े रहने के दौरान ही चार्ज करने का प्रावधान होता है,जबकि 80 फीट रोड स्थित इस बस स्टैंड पर चार्जिंग की कोई सुविधा विकसित ही नहीं की गई है। इसलिए यहाँ नई ई-बसों का ठहराव संभव ही नहीं है।</p>
<p><strong>28 लाख लगाए थे, 3 साल बाद अनुपयोगी</strong><br />स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता का कहना है कि जब सरकार प्रदूषण मुक्त शहर बनाने के लिए 28 पुरानी डीजल बसों को हटाकर नई बसें ला रही है, तो ऐसे में पुराने बस स्टैंड पर भी ई-बसों के लिए चार्जिंग सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए थीं, ताकि हाल ही विकास के लिए खर्च किए गये 28 लाख रूपये का सही उपयोग हो सके और यह जगह वीरान होने से बच सके। फिलहाल, बिना चार्जिंग पॉइंट के यह बस स्टैंड महज़ एक सफेद हाथी बनकर रह जायेगा।<br /> </p>
<p>प्राइमरी स्टेज में सुभाष नगर में बनायें गए ई बस चार्जिंग स्टेशन पर ही बसों का ठहराव रखने के लिए इसे तैयार किया गया है। 80 फीट रोड़ वाले स्टॉप के बारे में फिलहाल में कोई नई योजना पर काम नहीं चल रहा है। इसके बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं है।<br /><strong>- एक्यू कुरैशी, अधिशासी अभियंता नगर निगम कोटा</strong></p>
<p>14 साल पहले यूआईटी द्वारा तैयार किया गया यह सिटी बस स्टैण्ड़ शहर के बीचो बीच स्थित है,साथ ही यहां सामने चौड़ा सडक मार्ग है। पास ही नया रोडवेज का बस स्टैण्ड़ है ऐसे में इसे भी नई आवश्यकताओं के रूप में विकसित करना चाहिए।<br /><strong>-इसरार मोहम्मद पाषर्द वार्ड़ 43</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:08:39 +0530</pubDate>
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                <title>नेत्र विभाग को मोतियाबिंद, धूल फांक रही ग्रीन लेज़र मशीन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर या निजी में जाएं, संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में रेटिना सर्जरी विशेषज्ञ ही नहीं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ophthalmology-department--green-laser-machine-gathering-dust/article-158384"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती संभाग के सबसे बड़े महाराव भीमसिंह अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में सुविधाओं और डॉक्टरों की भारी कमी के कारण चिकित्सा व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। आलम यह है कि अस्पताल में वर्ष 2019 में लाखों रुपये की लागत से खरीदी गई आधुनिक 'ग्रीन लेजर' मशीन पिछले कई वर्षों से धूल फांक रही है क्योंकि इसे चलाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता ही नहीं हो पाई। जिला मुख्यालय तथा संभाग के इस सबसे बड़े केंद्र पर रेटिना (आंख के पर्दे) की सर्जरी तक की सुविधा नहीं है, जिससे रोजाना ओपीडी में आने वाले दर्जनों गंभीर मरीजों को मायूस लौटना पड़ता है।</p>
<p><strong>4 डॉक्टरों के भरोसे पूरा संभाग, प्रमाण पत्र बनाने में ही बीत रहा समय</strong><br />एमबीएस का नेत्र विभाग वर्तमान में मात्र 4 डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है, जिससे काम का अत्यधिक दबाव रहता है। विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार मीणा ने बताया कि विभाग का अधिकांश समय रोजाना आने वाले दिव्यांग प्रमाण पत्र, बनाने व मेडिकल जांच में ही बीत जाता है। क्योंकि एक मरीज की गहन जांच में करीब एक घंटा लगता है। यहां जिले से आने वाले सामान्य पेशेन्ट भी ज्यादा रहते है।</p>
<p><strong>ओसीटी एंजियोग्राफी' मशीन का इंतजार</strong><br />डॉ. मीणा ने बताया कि विभाग के पास वर्तमान एडवांस चिकित्सा पद्धति के अनुसार आवश्यक अत्याधुनिक 'ओसीटी विद एंजियोग्राफी' (डउळअ) मशीन उपलब्ध नहीं है। इसके अभाव में आंख के पर्दे की जटिल बीमारियों से ग्रसित मरीजों का सटीक डायग्नोसिस और पूर्ण इलाज संभव नहीं हो पाता। इसके अलावा विट्रोक्टोमी मशीन, एडवांस्ड माइक्रोस्कोप और इनडायरेक्ट ऑप्थैल्मोस्कोप जैसे आवश्यक उपकरणों की भी अनुपलब्धता है। फिलहाल विभाग के एक सीनियर डॉक्टर तीन महीने की विशेष रेटिना ट्रेनिंग पर गए हुए हैं, जिनकी वापसी अगस्त माह में संभावित है, जिससे भविष्य में कुछ राहत की उम्मीद है।</p>
<p><strong>आखिर क्यों जरूरी है यह इलाज कोटा में?</strong><br />कोटा संभाग में मधुमेह (शुगर), उच्च रक्तचाप (बीपी) और जेके लोन अस्पताल में होने वाली समय पूर्व (प्रीमच्योर) डिलीवरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिसके कारण इस इलाज की महत्ता बढ़ गई है।</p>
<p><strong>प्रीमच्योर बच्चों के लिये जरूरी</strong><br />जेके लोन अस्पताल में सबसे ज्यादा डिलीवरी होती हैं। जन्म के बाद कई नवजात शिशुओं, विशेषकर समय पूर्व पैदा होने वाले बच्चों की आंखों के पर्दे में 'रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमच्योरिटी' (फडढ) नामक गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। प्रति माह करीब 100 से 150 बच्चों की फंडस स्क्रीनिंग की जाती है। यदि शुरुआती दिनों में ग्रीन लेजर थेरेपी न मिले, तो बच्चा हमेशा के लिए दृष्टिहीन हो सकता है। मुकम्मल व्यवस्था न होने से इन मासूमों और उनकी प्रसूता मां को तुरंत जयपुर के एसएमएस अस्पताल (चरक भवन) रैफर करना पड़ता है, जिससे उन्हें सफर की भारी प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>शुगर व बीपी के मरीजों की रोशनी बचाना</strong><br />लंबे समय तक शुगर रहने से 'डायबिटिक रेटिनोपैथी' और बीपी के कारण 'हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी' की बीमारी हो जाती है। इसमें आंख के पर्दे की नसें कमजोर होकर फटने लगती हैं और खून उतर आता है। इस स्थिति में अंधापन रोकने के लिए ग्रीन लेजर मशीन से पर्दे की सिकाई की जाती है, जो फिलहाल बंद है। स्थानीय स्तर पर इस अव्यवस्था से मरीजों में भारी आक्रोश है और उन्हें निजी अस्पतालों के महंगे इलाज का शिकार होना पड़ रहा है।</p>
<p> हमारे यहां दैनिक ओपीडी के अलावा ऑपरेशन व मेडिकल सर्टिफिकेशन के भी काम होते है। विशेषज्ञ मिलने पर यह सुविधा यहां शुरू हो सकेगी।<br /><strong>-डॉ अशोक मीणा , विभागाध्यक्ष , नेत्र रोग विभाग एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:03:18 +0530</pubDate>
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                <title>महाकाल मंदिर की अनूठी पहल, परीक्षार्थियों एवं अभिभावकों के लिए महाकालेश्वर मंदिर द्वारा जलपान की व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा नीट-2026 परीक्षा के 4,171 परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए विशेष व्यवस्था की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप जिले के सभी 8 परीक्षा केंद्रों पर निःशुल्क अन्नक्षेत्र के माध्यम से सुबह का जलपान और अल्पाहार वितरित किया गया ताकि छात्र सकारात्मक माहौल में परीक्षा दे सकें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/arrangement-of-refreshments-by-mahakaleshwar-temple-for-neet-2026-candidates-and/article-157652"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/neet-2026.png" alt=""></a><br /><p>उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित भगवान महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा आज आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा- 2026 (नीट) में सम्मिलित होने वाले परीक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों की सुविधा हेतु विशेष जलपान एवं अल्पाहार व्यवस्था की गई है। प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप उज्जैन जिले के आठ परीक्षा केन्द्रों, जिनमें सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज सांवेर रोड, पीएम श्री केवी इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज, सरकारी गर्ल्स पीजी कॉलेज, उत्कृष्ट विद्यालय माधव नगर, कालिदास गर्ल्स कॉलेज, महाराजवाड़ा क्रमांक-2 स्कूल एवं गर्ल्स स्कूल सराफा आदि पर आयोजित इस परीक्षा में लगभग 4,171 परीक्षार्थी सम्मिलित होंगे। सभी परीक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों को श्री महाकालेश्वर मंदिर के निःशुल्क अन्नक्षेत्र के माध्यम से जलपान एवं अल्पाहार उपलब्ध कराया जा रहा है।</p>
<p>परीक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों को परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व आवश्यक अल्पाहार उपलब्ध हो सके तथा परीक्षार्थी सकारात्मक एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में अपनी परीक्षा दे सकें, इस उद्देश्य से मंदिर प्रबंध समिति द्वारा यह विशेष व्यवस्था की गई है। व्यवस्था के सुचारु संचालन हेतु प्रत्येक परीक्षा केन्द्र पर सहायक प्रशासक, प्रभारी, सह-प्रभारी एवं आउटसोर्स कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित की गई है। संपूर्ण व्यवस्था का प्रभारी उप प्रशासक एवं डिप्टी कलेक्टर सुश्री सिम्मी यादव को बनाया गया है, जिनके मार्गदर्शन में सभी परीक्षा केन्द्रों पर व्यवस्थाओं का संचालन किया गया। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा यह पहल विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को परीक्षा के दौरान आवश्यक सहयोग एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 16:38:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ऑक्सीजोन व रिवर फ्रंट पर भी मिले मॉर्निंग वॉक की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[ सुबह घूमने वालो को 100 रुपये का टिकट पड़ रहा भारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/morning-walk-facilities-sought-at-oxyzone-and-river-front/article-157348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मध्य हरियाली से आच्छादित ऑक्सीजोन पार्क में सुबह के समय ताजी हवा लेने और चम्बल नदी के किनारे बने विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल पर नदी की सुंदरता को निहारने की सुविधा सुबह के समय शहर में मॉर्निंमग वॉकर को भी मिलनी चाहिए। यह मांग है शहर के उन लोगों की जो सुबह के समय आस-पास के गार्डन में मॉर्निंग वॉक के लिए जाते हैं। विज्ञान नगर निवासी एडवोकेट अमजद खान ने बताया कि शहर के बीच पहले जहां आई एल कॉलोनी थी। वहां हरियाली व मोर अधिक थे। उसकी जगह पर अब ऑक्सीजोन सिटी पार्क बनाया गया है। यह नए कोटा में रहने वालों के लिए एक तरह से वरदान है। लेकिन यहां प्रवेश के लिए सौ रुपए का टिकट लगाया गया है। जिससे इस पार्क में मॉर्निंग वॉक करने जाने वालों को नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा नहीं दी गई है। ऐसे में इसके आस-पास रहने वाले लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि सुबह दो से तीन घंटे यहां जो लोग मॉर्निंग वॉक करना चाहते हैं उन्हें सुविधा दी जानी चाहिए।</p>
<p>तलवंडी निवासी अजय कुशवाह का कहना है कि शहर में जिस तरह से चम्बल गार्डन व नयापुरा स्थित सीबी गार्डन में सुबह 9 बजे तक मॉर्निंग वॉक को नि:शुल्क प्रवेश देकर सैर करने की सुविधा दी हुई है। उसी तरह की सुविधा ऑक्सीजोन पार्क में भी दी जानी चाहिए। यह शहर के लिए ऑक्सीजोन के रूप में वरदान है लेकिन स्थानीय लोगों को इसमें जाने के लिए टिकट लेना पड़ रहा है। जबकि सुबह कुछ समय के लिए यहां नि:शुल्क सैर की सुविधा दी जानी चाहिए।</p>
<p><strong>नदी के किनारे व गार्डन का लाभ मिले</strong><br />वहीं पुराने शहर में रहने वाले लोगों का कहना है कि पहले लोग चम्बल नदी के किनारे घूम सकते थे। लेकिन रिवर फ्रंट बनने से वहां आमजन का प्रवेश बंद कर दिया गया है। रिवर फ्रंट पर गार्डन भी बनाए गए हैं। ऐसे में सुबह के समय दो से तीन घंटे के लिए जो लोग सैर करने जाना चाहते हैं उन्हें नि:शुल्क प्रवेश दिया जाए।</p>
<p>पाटनपोल निवासी अजय सक्सेना का कहना है कि शहर में रिवर फ्रंट जैसा पर्यटन स्थल कहीं नहीं है। लेकिन लोगों को सुबह के समय इसका नि:शुल्क लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि मॉर्निंग वॉकर के लिए भले ही मासिक पास जारी कर दिया जाए जिससे ही प्रवेश मिले लेकिन यह सुविधा शुरु की जानी चाहिए। कैथूनीपोल निवासी विवेक पाल का कहना है कि सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग सैर के लिए गार्डन जाते हैं। लेकिन रिवर फ्रंट के भीतर बने गार्डन का लाभ मार्निंग वॉकर को नहीं मिल पा रहा है। जबकि केडीए को यहां सुबह के समय नि:शुल्क सुविधा दी जानी चाहिए।</p>
<p><strong>पौधों को पानी व सफाई में 4 घंटे का समय लगता</strong><br />ऑक्सीजोन पार्क का संचालन करने वालों का कहना है कि यह पार्क पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहां लाखों छोटे-बड़े पौधे लगाए गए हैं। ऐसे में इन पौधों को नियमत पानी देने व इनकी सार संभाल में सुबह 4 घंटे का समय लगता है। सुबह 6 से 10 बजे तक यह काम होता है। इस दौरान पूरा गा र्डन व इसके भीत की सड़कें गीली व मिट्टी से सनी रहती है़। ऐसे में वहां इस समय में लोगों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। सुबह 10 बजे बाद यह लोगों के लिए खोल दिया जाता है। यदि इसकी नियमित देखभाल नहीं होगी तो दिन में फिर नहीं हो सकती। उस समय गार्डन में लोग आने लगते हैं।</p>
<p><strong>निर्माण के समय प्रावधान ही नहीं किया</strong><br />इधर केडीए आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल का कहना है कि लोगों की मांग तो जायज है। लेकिन इन दोनों ही स्थलों के निर्माण के समय यहां मॉर्निंग वॉकर के लिए नि:शुल्क प्रवेश का प्रावधान ही नहीं किया गया। जिससे अब ऐसा कर पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि शहर में कई अन्य बड़े गार्डन हैं जहां हरियाली के साथ ही नदी के किनारे का भी नि:शुल्क आनंद लिया जा सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:15:27 +0530</pubDate>
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                <title>आमेर महल के संरक्षण और सुविधाओं पर फोकस : मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने किया निरीक्षण, पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दिए विकास के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने आमेर महल का निरीक्षण कर चल रहे ₹25.5 करोड़ के संरक्षण कार्यों का जायजा लिया। महल में सालाना रिकॉर्ड 22.82 लाख पर्यटक (2.70 लाख विदेशी) पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए मुख्य सचिव ने पार्किंग, रास्तों और मूल ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखते हुए बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने के निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/focus-on-conservation-and-facilities-of-amer-palace/article-154143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/srinavas.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थल आमेर महल में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने सुविधाओं और संरक्षण कार्यों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रविवार को आमेर महल का भ्रमण कर चल रहे विकास एवं संरक्षण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने सबसे पहले आमेर की आराध्य देवी शिला माता के दर्शन किए और इसके बाद महल परिसर का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वर्षभर में आमेर महल में करीब 22.82 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 2.70 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे। प्रतिदिन औसतन 6,270 पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए मुख्य सचिव ने पार्किंग, शौचालय और आमेर तक पहुंचने वाले रास्तों को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।</p>
<p>उन्होंने 25.5 करोड़ रुपए की लागत से चल रहे पार्किंग विकास, खेड़ी गेट रोड और अन्य संरक्षण कार्यों का निरीक्षण कर संतोष जताया। मानसिंह महल और शीशमहल में चल रहे संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए मूल स्वरूप बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। साथ ही डिजिटल संग्रहालय और गाइड प्रशिक्षण को लेकर भी आवश्यक निर्देश प्रदान किए। इस दौरान पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ पंकज धरेंद्र, पर्यटन विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर राकेश शर्मा, आमेर महल अधीक्षक डॉ राकेश छोलक, आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक (कार्य) एवं गाइड महेश शर्मा मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:02:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>नाम का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, सूखे खिलाड़ियों के कंठ</title>
                                    <description><![CDATA[खिलाड़ी व कोच करीब एक दर्जन खेलों का अभ्यास करने के लिए आते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/an--international-stadium--in-name-only--players--throats-run-dry/article-153128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में पिछले कई दिन से जिस तरह की भीषण गर्मी पड़ रही है उस समय में प्रशासन द्वारा एक तरफ तो आमजन के लिए पीने के पानी और छाया की व्यवस्था करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम में जहां अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी आ रहे हैं। वहां उनके पीने के लिए पानी की सुविधा तक नहीं है। यह हालत है नयापुरा स्थित अंतरराष्ट्रीय इनडोर स्टेडियम की। जे.के. पवेलियन स्थित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में बने इस स्टेडियम में सुबह-शाम बड़ी संख्या में खिलाड़ी व कोच करीब एक दर्जन तरह के खेलों का अभ्यास करने के लिए आ रहे हैं। सामान्य दिनों में ही थोड़ी देर में खेलते समय पसीना आने पर बार-बार पानी की प्यास लगने लगती है। ऐसे में वर्तमान में 45 डिग्री से अधिक तापमान बना हुआ है। उसमें तो बार-बार गला सूख रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से बने इस अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भीषण गर्मी में भी खिलाडिय़ों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा है।</p>
<p><strong>घर से ला रहे वह भी पर्याप्त नहीं</strong><br />खिलाडिय़ों ने बताया कि सर्दी और बरसात के समय तो पानी की इतनी जरूरत नहीं पड़ती जितनी इस भीषण गर्मी में पड़ रही है। स्टेडियम में न तो नल है और न ही वाटर कूलर। ऐसे में घर से बोतल में जितना पानी ला रहे हैं वह पर्याप्त नहीं हो रहा। कुछ ही देर में बोतल खाली हो रही है।</p>
<p><strong>तरणताल व क्लब में जाना पड़ रहा</strong><br />खिलाड़ी जय वर्धन व पुप्पेन्द्र ने बताया कि पानी की प्यास लगने पर पानी ही नहीं मिल रहा। ऐसे में या तो तरणताल या उम्मेद क्लब में वाटर कृूलर की तरफ जाना पड़ रहा है। लेकिन कई बार क्लब में भी बार-बार जाने से रोक दिया जाता है। जिससे खिलाडिय़ों के लिए पीने के पानी की समस्या बनी हुई है।</p>
<p><strong>पानी की सुविधा तो होनी ही चाहिए</strong><br />स्टेडियम में आने वाले खिलाड़ी श्याम नाहर ने बताया कि स्टेडियम जैसी जगह जहां रोजाना बड़ी संख्या में खिलाड़ी आ रहे हैं वहां पानी की व्यवस्था तो होनी ही चाहिए। लेकिन स्टेडियम में टंकी का गर्म उबलता हुआ पानी आ रहा है। जिसे पीना तो दूर हाथ लगाना तक मुश्किल हो रहा है। ऐसे में खिलाड़ी व कोच परेशान हो रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />स्टेडियम में जितनी संख्या में सुबह-शाम खिलाड़ी आ रहे हैं। उनके लिए फिलहाल पीने के पानी की सुविधा नहीं है। जे.के. पवेलियन में वाटर कूलर है लेकिन वह काम नहीं कर रहा है। जिससे ठंडा पानी नहीं मिल रहा। नल दूर है जिसमें भी गर्म पानी आ रहा है। इस संबंध में पूर्व में जिला प्रशासन व केडीए अषिकारियों से बात की थी। उन्होंने पानी की व्यवस्था करवाने का आश्वासन तो दिया था लेकिन अभी तक सुविधा नहीं हुई है। जिससे इस भीषण गर्मी में खिलाडिय़ों को परेशान होना पड़ रहा है।<br /><strong>- वाई.बी. सिंह, खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:29:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रहा देईखेड़ा राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एक चिकित्सक के भरोसे अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[हाईवे किनारे स्थित होने से यहां सेमी ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/deikheda-government-community-health-center-crumbling-under-a-shortage-of-resources/article-150789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)15.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा । कोटा-दौसा मेगा हाईवे के किनारे स्थित देईखेड़ा राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों के अभाव के चलते गंभीर घायलों का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है। हालात यह हैं कि सड़क हादसों में घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल रेफर करना पड़ता है। अस्पताल में छह चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल दो ही कार्यरत हैं, जबकि चार पद रिक्त हैं। इनमें से एक महिला चिकित्सक लंबे समय से अवकाश पर हैं और दूसरे चिकित्सक अस्पताल प्रभारी होने के कारण प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं। मेगा हाईवे एवं दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बढ़ते यातायात के कारण दुर्घटनाओं की संख्या अधिक है, लेकिन अस्पताल में ईसीजी मशीन का ऑपरेटर नहीं है तथा फ्रैक्चर के उपचार हेतु प्लास्टर की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में मरीजों को अन्यन्त्र रेफर करना मजबूरी बनी हुई है।</p>
<p><strong>सेमी ट्रॉमा सेंटर की जरूरत </strong><br />हाईवे किनारे स्थित होने के कारण यहां सेमी ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि हादसों में घायलों को त्वरित उपचार मिल सके। इस संबंध में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ओ पी सामर ने अस्पताल का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>मोर्चरी का अभाव</strong><br />अस्पताल में मोर्चरी सुविधा नहीं होने से दुर्घटनाओं में मृत व्यक्तियों के शवों को सुरक्षित रखने में दिक्कत आती है। कई बार शवों को लाखेरी अस्पताल भेजना पड़ता है, जिससे परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>रिक्त पदों की स्थिति</strong><br />इस अस्चापताल में चार चिकित्सकों के पद रिक्त, एक एलएचवी का पद रिक्त और तीन वार्ड बॉय के पद खाली है।</p>
<p><strong>पेयजल संकट</strong><br />अस्पताल में उपलब्ध बोरिंग का पानी पीने योग्य नहीं है। पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।</p>
<p>अस्पताल की स्थिति से लोकसभा अध्यक्ष को अवगत करवा कर क्षेत्र के दो दर्जन गांवों की इलाज के लिये निर्भरता को देखते हुए जल्द समाधान की मांग की है।<br /><strong>- दिनेश व्यास, अध्यक्ष, देईखेड़ा व्यापार मंडल</strong></p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों व कर्मिको के साथ बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास रहता है। स्वयं विगत चार महीनों से 24 घण्टे उपलब्ध रहता हूं। सड़क हादसों में गम्भीर घायलों के लिये ईसीजी मशीन ऑपरेटर व हड्डियों के चिकित्सक ओर सन्साधन उपलब्ध करवाने के लिये समय समय बैठकों में उच्चाधिकारियों को अवगत रखा है और अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार के लिये उच्चाधिकारियों को पस्ताव भी भिजवा रखे है.<br /><strong>- नरेंद्र गुर्जर, कार्यवाहक प्रभारी, राजकीय अस्पताल, देईखेड़ा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 14:56:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बेटियों का दर्द : बीए के बाद छूट रही पढ़ाई, ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी कॉलेजों में पीजी संकाय ही नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रामगंजमंडी में 27 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ पीजी संकाय ,उच्च शिक्षा के लिए 120 किमी सफर या पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-plight-of-daughters--studies-cut-short-after-ba--no-pg-faculty-in-rural-government-colleges/article-149857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के दावों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां उच्च शिक्षा से वंचित हो रही हैं। सरकारी कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन नहीं होने से बीए के बाद उनकी शिक्षा बीच में ही छूट रही है। ऐसे में छात्राओं के सामने सिर्फ दो ही विकल्प बचते हैं, या तो आगे की पढ़ाई छोड़ दें, या फिर पीजी करने के लिए शहरी कॉलेज आने-जाने के रोजाना 120 से 150 किमी का लंबा सफर तय करें। सुरक्षा, दूरी और पारिवारिक चिंताओं के कारण ज्यादातर बेटियों के सपने यहीं टूट जाते हैं।<br />कोटा जिले के रामगंजमंडी, इटावा, कनवास और सांगोद के राजकीय महाविद्यालयों में पीजी संकाय संचालित नहीं है। बीए के बाद छात्राएं आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, लेकिन पीजी संकाय नहीं होने के कारण उनका सपना अधूरा रह जाता है। हालांकि, सांगोद कॉलेज में केवल राजनीति विज्ञान विषय में पीजी की सुविधा है, जबकि क्षेत्र की डिमांड भूगोल, इतिहास, हिन्दी व संस्कृत जैसे विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं शुरू करने की है। नतीजन, छात्राओं को इन्हीं समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>27 साल बाद भी पोस्ट ग्रेजुएशन नहीं</strong><br />रामगंजमंडी कॉलेज में स्थापना के 27 साल बाद भी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू नहीं हो सके। ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के सामने सबसे बड़ी समस्या दूरी की है। पीजी की पढ़ाई के लिए उन्हें कोटा शहर के कॉलेजों में जाना पड़ता है, जो गांव-कस्बों से 60 से 75 किलोमीटर दूर हैं। आने-जाने में यह दूरी 120 से 150 किलोमीटर तक पहुंच जाती है। सुरक्षा, समय और खर्च जैसे कारणों से अभिभावक भी बेटियों को इतनी दूर भेजने में हिचकते हैं। ऐसे में बीए के बाद ही पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी बन जाती है।</p>
<p><strong>80 से ज्यादा गांवों की बेटियों के टूट रहे सपने</strong><br />राजकीय महाविद्यालय कनवास की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, जिसे आज 9 साल हो गए। छात्र-छात्राओं की संख्या भी बड़ी लेकिन कॉलेज यूजी से पीजी नहीं हो सका। जबकि, यह महाविद्यालय 80 से ज्यादा गांवों को कवर करता है। ग्रामीणों का कहना है, ऊर्जा मंत्री से लेकर लोकसभा अध्यक्ष तक को ज्ञापन दे चुके हैं। आयुक्तालय को भी कई बार पत्रभेजे हैं। लेकिन, आश्वासन के सिवाए कुछ नहीं मिला।</p>
<p>कनवास कॉलेज में नामांकन अच्छा है। यहां पीजी संकाय होना ही चाहिए। यूजी के बाद पीजी करने के लिए मुझे 120 किमी का सफर तय करना पड़ता है। जेडीबी से हिन्दी में एमए कर रही थी, लेकिन दूरी अधिक होने व अन्य कारणों से बीच में छोड़ना पड़ा। लड़कियों के लिए इतनी दूर आना जाना आसान नहीं है।<br /><strong>-कुसुम राठौर, छात्रा कनवास</strong></p>
<p><br />बीए करने के बाद अधिकतर छात्राएं एमए नहीं कर पाती। शहरी कॉलेज जाने के लिए घंटों बसों का इंतजार और लंबी दूरी के कारण छात्राओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां हिन्दी, संस्कृत व ज्योग्राफी में पीजी खुलना चाहिए।<br /><strong>-श्रुति राठौर, छात्रा कनवास</strong></p>
<p>बीकॉम करने के बाद मुझे पीजी के लिए रामगंजमंडी से झालावाड़ आना-जाना पड़ा। प्रतिदिन 60 किमी के सफर में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। यूजी में मेरी कई सहपाठी तो पीजी नहीं कर सकी। मजबूरन उन्हें आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। कॉलेज को 27 साल हो गए। अब तो सरकार पीजी संकाय शुरू करें।<br /><strong>-रुचि गुर्जर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रामगंजमंडी</strong></p>
<p>धरना, प्रदर्शन, भूख हड़ताल व अनशन तक सब कर लिए, शिक्षा मंत्री सहित आयुक्तालय को अनगिनत ज्ञापन दे दिए इसके बावजूद आज तक एमए व एमकॉम शुरू नहीं हुआ। छात्राओं की ही नहीं छात्रों की भी यूजी के बाद पढ़ाई छूट रही है।<br /><strong>-संस्कार मीणा, पूर्व छात्र रामगंजमंडी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं शिक्षक</strong></p>
<p>रामगंजमंडी कॉलेज 1999 में शुरू हुआ था, जिसे वर्तमान में 27 साल होने जा रहे हैं। इसके बावजूद यहां आर्ट्स व कॉमर्स में पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका। जबकि, क्षेत्र का यह सबसे बड़ा कॉलेज होने के नाते यहां पीजी संकाय खोले जाने की सख्त आवश्यकता है। विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए या तो 30 किमी दूर झालावाड़ या 75 किमी दूर कोटा जाने को मजबूर होते हैं। वहीं, अधिकांश छात्राएं तो पीजी कर नहीं पाती। कॉलेज में एमए व एमकॉम खुलना चाहिए।<br /><strong>-डॉ. संजय गुर्जर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी</strong></p>
<p>कनवास कॉलेज की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, जिसके बाद से अब तक पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका। जबकि, हिन्दी, संस्कृत, इतिहास व ज्योग्राफी में एमए शुरू किए जाने की सख्त आवश्यकता है। मजबूरन, विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए 60 किमी दूर कोटा शहर जाने का ही विकल्प बचता है। प्रतिदिन आने-जाने में 120 किमी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में कई छात्राएं तो पीजी कर ही नहीं पाती है। आयुक्तालय को कई बार प्रस्ताव भिजवा चुके हैं। लेकिन, अब तक पीजी नहीं खुला।<br /><strong>-डॉ. ललित नामा, सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर कनवास कॉलेज</strong></p>
<p>संबंधित कॉलेजों से विद्यार्थियों की डिमांड पर प्राचार्य की ओर से प्रस्ताव आते हैं, उन्हें आयुक्ताय भेज दिया जाता है। सरकार हर साल कहीं न कहीं पीजी संकाय खोल रही है। यह सतत प्रक्रिया है जो निरंतर जारी है। हां, यह बात भी सही है कि कोटा ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश कॉलेजों में पीजी संकाय नहीं होने से परेशानी है। हालांकि, समाधान के प्रयास लगातार जारी है।<br /><strong>-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:57:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विद्यालय में पेयजल, बिजली और स्वच्छता में हुआ सुधार </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में ख्रबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/improvements-made-to-drinking-water--electricity--and-sanitation-facilities-at-school/article-148238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)25.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal;color:#000000;background:#F6F6F6;" xml:lang="en-us">भंवरगढ़।<span>  </span>कस्बे के प्रकाशपुरा के उच्च माध्यमिक विद्यालय में पेयजल बिजली एवं स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओें में उल्लेखनीय सुधार किया गया है।<span>  </span>गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित कर इस मामले को उठाया था। व्यवस्थाओं में सुधार से विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को बड़ी राहत मिली है। विद्यालय में छात्रों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही बिजली आपूर्ति को सुचारू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। जिससे अब विद्यार्थियों की पढाई एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा नहीं आएगी। स्वच्छता के क्षेत्र में भी विशेष ध्यान दिया गया है। विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी और छात्रों को स्वस्थ बातावरण मिले सकेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 14:52:22 +0530</pubDate>
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