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                <title>Supply Chain - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र की अपील : होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना जरूरी, गुटेरेस ने कहा-मौजूदा संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की अपील की है। उन्होंने कूटनीतिक समाधान पर जोर देते हुए कहा कि समुद्री व्यापार में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। यूएन ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के मध्यस्थता प्रयासों की सराहना करते हुए शांति वार्ता जारी रखने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/uns-appeal-amid-west-asia-crisis-it-is-necessary-to/article-150405"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(13).png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सभी पक्षों से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान बनाए रखने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में व्यवधान का असर क्षेत्र से बाहर भी पड़ा है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता तथा विभिन्न क्षेत्रों में असुरक्षा बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि मौजूदा संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखना जरूरी है। उन्होंने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता को "सकारात्मक कदम" बताते हुए कहा कि युद्धविराम बनाए रखना और उल्लंघनों को रोकना आवश्यक है।</p>
<p>एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि गहरे मतभेदों के कारण समझौता तुरंत संभव नहीं है, लेकिन रचनात्मक बातचीत जारी रहनी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये सहित मध्यस्थ देशों के प्रयासों की सराहना की। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान से लगभग 20,000 नाविक प्रभावित हुए हैं और वैश्विक व्यापार, खाद्य सुरक्षा तथा आपूर्ति शृंखलाओं पर गंभीर असर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियां सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए तंत्र विकसित करने में जुटी हैं, जबकि महासचिव के विशेष दूत क्षेत्र में बातचीत जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 18:26:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संघर्ष: पीएम मोदी मंत्रिमंड़ल की सुरक्षा संबंधी समिति की अहम बैठक, LPG और PNG की सप्लाई पर पूरा फोकस, जरूरी कदम उठाने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीसीएस बैठक की अध्यक्षता कर पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईंधन और उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सरकार ने जमाखोरी रोकने और एलपीजी-एलएनजी के स्रोतों में विविधता लाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। पीएम ने कोयले के पर्याप्त भंडार और आवश्यक वस्तुओं की स्थिर कीमतों का आश्वासन देते हुए अफवाहों से बचने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-asia-conflict-important-meeting-of-the-security-committee-of/article-148801"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/csc.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार शाम मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी मामलों की समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें कृषि, उर्वरक, जहाजरानी, विमानन, रसद एवं लघु एवं मध्यम उद्यमों में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, मोदी ने सीसीएस के सदस्यों के साथ आवश्यक आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एलपीजी एवं एलएनजी की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में कमी लाने और विद्युत क्षेत्र से जुड़े उपायों की समीक्षा की।</p>
<p>बैठक में बताया गया कि आवश्यक वस्तुओं की स्थिर कीमतों को सुनिश्चित करने और जमाखोरी एवं कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। कीमतों की निरंतर निगरानी और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रवर्तन पर बातचीत के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया है कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने गलत सूचना एवं अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक प्रामाणिक जानकारी का समय पर एवं सुचारू पहुंच की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त कोयले के भंडार मौजूद है जो आने वाले महीनों में बिजली की आवश्यकता पर्याप्त रूप से पूरी होगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक निवास सात लोक कल्याण मार्ग पर सीसीएस की इस विशेष बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में आगे की जाने वाली पहलों पर भी चर्चा की गई। इस मुद्दे पर सीसीएस की यह दूसरी विशेष बैठक थी। विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में कैबिनेट सचिव ने पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलएनजी तथा एलपीजी की आपूर्ति और पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। विभिन्न देशों से नए स्रोतों के आने से एलपीजी की खरीद के लिए स्रोतों का विविधीकरण किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि इसी प्रकार, एलएनजी भी विभिन्न देशों से प्राप्त की जा रही है।</p>
<p>कैबिनेट सचिव ने बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और एलपीजी की जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए नियमित रूप से अवैध बिक्री विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं। प्राकृतिक गैस पाइपलाइन कनेक्शनों के विस्तार के लिए भी पहल की गई है। गर्मी के चरम महीनों के दौरान बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 7-8 गीगावाट क्षमता वाले गैस आधारित बिजली संयंत्रों को गैस पूलिंग तंत्र से छूट देना और थर्मल पावर स्टेशनों पर अधिक कोयले की आपूर्ति के लिए रेक बढ़ाना जैसे उपाय भी किए गए हैं। इसके अलावा, कृषि, नागरिक उड्डयन, जहाजरानी और रसद जैसे विभिन्न अन्य क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों के लिए प्रस्तावित उपायों पर भी चर्चा की गई।</p>
<p>उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यूरिया उत्पादन को आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने, डीएपी, एनपीकेएस आपूर्तिकर्ताओं के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने जैसे विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकारों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे दैनिक निगरानी, छापेमारी और सख्त कार्रवाई के माध्यम से उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और हेराफेरी पर अंकुश लगाएं। विज्ञप्ति के अनुसार, देश में पिछले एक महीने से खाद्य पदार्थों के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं। कीमतों की निरंतर निगरानी और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रवर्तन पर बातचीत के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। कृषि उत्पादों, सब्जियों और फलों के दामों पर भी नजर रखी जा रही है।</p>
<p>ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए वैश्विक स्तर पर हमारे स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पहल और चल रहे राजनयिक प्रयास भी किए जा रहे हैं। मौजूदा संकट के बीच प्रभावी सूचना प्रसार और जन जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय, वास्तविक समय संचार सहित सक्रिय उपाय किए जा रहे हैं।</p>
<p>विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने आम जनता की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का जायजा लिया। उन्होंने देश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ एवं रबी ऋतुओं में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने गलत सूचना एवं अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक सही जानकारी के सुचारू प्रवाह पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हरसंभव उपाय करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 13:24:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट: रिपोर्ट में हुआ खुलासा; ईरान युद्ध लंबा चला तो महंगे हो सकते हैं मोबाइल फोन और कंप्यूटर, मेमोरी और चिपसेट की आपूर्ति भी प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[नोकिया इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट से चिपसेट और मेमोरी की सप्लाई चेन बाधित हो गई है। वर्तमान में स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन युद्ध खिंचने पर स्मार्टफोन और कंप्यूटर के दाम बढ़ सकते हैं। भारत में 5G FWA के कारण डेटा खपत 31.1 GB प्रति यूजर पहुंच गई है, जिससे स्पेक्ट्रम आवंटन में बदलाव की जरूरत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-report-revealed-that-if-the-iran-war/article-148566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/tech.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के कारण मेमोरी और चिपसेट की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने लगी है और युद्ध लंबा चलने की स्थिति में मोबाइल फोन, कंप्यूटर और हर उस डिवास के दाम बढ़ सकते हैं, जिनमें इनका इस्तेमाल होता है। भारत में नोकिया इंडिया की प्रबंधक विभा मेहरा ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी करने के बाद संवाददाताओं के प्रश्नों के उत्तर में बताया कि युद्ध के कारण दूसरी चीजों के साथ मेमोरी और चिपसेट की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। अभी डिवाइसों की आपूर्ति को लेकर कोई समस्या नहीं है, क्योंकि पर्याप्त इनवेंटरी उपलब्ध है, लेकिन युद्ध जारी रहा तो मध्यम अवधि (छह महीने से दो साल) में असर दिखने लगेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि फिलहाल मेमोरी और चिपसेट के दाम बढ़ने लगे हैं। कुछ लोगों ने इनका भंडारण शुरू कर दिया है और दाम बढ़ा दिये हैं। ऐसे में तुरंत नहीं तो आने वाले कुछ समय में इसका असर जरूर दिखेगा। इंडिया मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडेक्स 2026 जारी करते हुए मेहरा ने कहा कि भारत में डाटा उपभोग तेजी से बढ़ रहा है। पिछले पांच साल में 21.7 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ता हुआ कुल डाटा ट्रैफिक साल 2025 में 27.6 एग्जाबाइट मासिक पर पहुंच गया। वहीं प्रति यूजर औसत मासिक डाटा खपत 18.2 प्रतिशत की औसत वृद्धि के साथ पिछले साल 31.1 जीबी पर रहा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस वृद्धि में 5जी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए)का सबसे बड़ा योगदान रहा। कुल 5जी डाटा उपभोग में इसकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से अधिक रही। मोबाइल डाटा यूजरों की तुलना में एफडब्ल्यूए यूजरों ने 10 गुना डाटा की खपत की। साल दर साल 5जी एफडब्ल्यूए यूजरों की संख्या में दुगुनी हो गयी है। मेहरा ने बताया कि एक बड़ा बदलाव अपलोड और डाउनलोड के अनुपात में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अपलोड तेजी से बढ़ रहा है। इसके लिए दूरसंचार कंपनियों को अपने स्पेक्ट्रम आवंटन में बदलाव करना होगा। साथ ही उन्होंने डिवाइसों समेत उन तकनीकों पर भी काम करना होगा जिससे डाटा अपलोड ज्यादा सहज हो सके।</p>
<p>उन्होंने बताया कि फिलहाल, औसतन 90 प्रतिशत स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल डाउनलोड के लिए और 10 प्रतिशत का अपलोड के लिए किया जा रहा है। यह आवंटन यूजरों के पारंपरिक इस्तेमाल के पैटर्न के आधार पर किया गया है। हालांकि बदलते पैटर्न के अनुरूप उन्हें अपलोड स्पीड बढ़ानी होगी, लेकिन डाउनलोड से समझौता किये बिना। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 के अंत में देश में कुल 89.2 करोड़ सक्रिय 4जी डिवाइस हैं जिनमें से 38.3 करोड़ 5जी के लिए सक्षम हैं यानी नेटवर्क उपलब्ध रहने पर उन पर 5जी का की सुविधा मिल सकती है। देश में बेचे गये हर 10 में से नौ स्मार्टफोन 5जी वाले थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य अगले एक महीने तक बंद : आसमान छू सकती है तेल की कीमतें; 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना, अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन ने जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने और बंद रहा, तो तेल $150 प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा। ईरान-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला ठप है। इससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और औद्योगिक उत्पादन पर गहरा संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/strait-of-hormuz-closed-for-the-next-one-month-oil/article-148506"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक और महीने के लिए बंद रहता है, तो तेल की कीमतें आसमान छूने के साथ 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्री कासमैन के बयान के हवाले से कहा, "ऐसी स्थिति में, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक और महीने तक बंद रहता है, तो तेल की कीमतें लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं और ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर औद्योगिक उपभोक्ताओं को कमी का सामना करना पड़ सकता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान की राजधानी तेहरान सहित देश के विभिन्न ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिससे भारी क्षति हुई और नागरिक हताहत हुए थे। ईरान पे इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है।</p>
<p>इस बीच, फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों में तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग - होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला नौपरिवहन प्रभावी रूप से ठप हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 11:34:44 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-ईरान युद्ध ने बढ़ाई वैश्विक खाद्य सुरक्षा की चिंता: कृषि व्यापार नियमों को बदलने की कवायद तेज, विश्वजीत धर ने कहा-होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान युद्ध ने वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ती लागत को देखते हुए विशेषज्ञ अब WTO के पुराने नियमों को बदलने की वकालत कर रहे हैं। भारत सब्सिडी और नए विदेशी स्रोतों के जरिए यूरिया व डीएपी की आपूर्ति सुनिश्चित कर खाद्य सुरक्षा बचाने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/america-iran-war-increased-the-concern-about-global-food-security-efforts/article-147996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका -इजरायल और ईरान के बीच हाल ही के युद्ध ने न केवल तेल बाजारों को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी बाधाएं उत्पन्न कर भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। इस संकट को देखते हुए अर्थशास्त्री और विभिन्न सरकारें अब वैश्विक कृषि व्यापार नियमों को फिर से लिखने का प्रस्ताव तैयार कर रही हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के झटकों से निपटा जा सके।</p>
<p>भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के पूर्व डब्ल्यूटीओ चेयरमैन प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा ने यह उजागर कर दिया है कि ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य प्रणालियां एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं। एलएनजी के प्रवाह में रुकावट और बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण भारत जैसे देशों में उर्वरक उत्पादन और कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। प्रमुख अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रस्तावित 'मॉडल ट्रीटी ऑन एग्रीकल्चरल ट्रेड' में तर्क दिया गया है कि विश्व व्यापार संगठन का मौजूदा ढांचा जलवायु परिवर्तन, महामारी और युद्ध जैसे झटकों से निपटने में अक्षम साबित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ढांचा शुरू से ही दोषपूर्ण था और अब इसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के तनाव परीक्षण में विफल पाया गया है।</p>
<p>भारत अपनी जरूरत का लगभग पांचवां हिस्सा यूरिया, आधा हिस्सा डीएपी और लगभग पूरी पोटाश मात्रा आयात करता है। खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति और समुद्री मार्गों में बढ़ते जोखिमों के कारण बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उर्वरकों की कीमतों में उछाल आया है। अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार ने फिलहाल इस झटके को किसानों तक पहुँचने से रोकने के लिए उच्च सब्सिडी के माध्यम से अवशोषित करने का निर्णय लिया है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती, तो कृषि उत्पादन घटने और खाद्य कीमतों के बढ़ने का गंभीर जोखिम पैदा हो सकता था, जो एक बड़ा वित्तीय संकट बन सकता है।</p>
<p>प्रस्तावित नई संधि का उद्देश्य व्यापार के बजाय खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और समानता को प्राथमिकता देना है। प्रोफेसर धर के अनुसार, यह संधि सरकारों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार देने की वकालत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्षविराम होने के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार में युद्ध जोखिम प्रीमियम स्थायी रूप से जुड़ सकता है। इसका मतलब है कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा और उर्वरक की लागत संरचनात्मक रूप से हमेशा के लिए ऊंची बनी रह सकती है।</p>
<p>बदलते हालातों को देखते हुए भारत अब पोटाश और फॉस्फेट के लिए नए स्रोतों की तलाश कर रहा है और विदेशी खनिज संपत्तियों में निवेश बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, घरेलू यूरिया उत्पादन विस्तार और खाड़ी क्षेत्र के बाहर से लंबी अवधि के एलएनजी अनुबंधों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि बाहरी झटकों को कम किया जा सके। वर्तमान संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब आपूर्ति श्रृंखलाएं अत्यधिक केंद्रित होती हैं, तो झटके केवल स्थानीय नहीं रहते बल्कि वैश्विक स्तर पर फैल जाते हैं। नई संधि इन संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करने और बड़े कृषि व्यवसायों पर लगाम लगाने का आह्वान करती है ताकि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।</p>
<p>प्रस्ताव में खाद्य सुरक्षा को "मानवता की साझा चिंता" के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके तहत राज्यों को यह अधिकार और दायित्व होगा कि वे व्यापार को प्रतिबंधित करके भी अपने नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें, जो मौजूदा उदारीकरण समर्थक डब्ल्यूटीओ नियमों से एक बड़ा बदलाव होगा। अमेरिका-ईरान युद्ध ने साबित कर दिया है कि वैश्विक व्यापार की वर्तमान संरचना अब पुरानी पड़ चुकी मान्यताओं पर टिकी है। बर्लिन और बर्न विश्वविद्यालय जैसे वैश्विक संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा समर्थित यह पहल आने वाली डब्ल्यूटीओ मंत्रीस्तरीय वार्ता में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/america-iran-war-increased-the-concern-about-global-food-security-efforts/article-147996</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई 20 फीसदी बढ़ाई: होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों समेत अन्य सेक्टर के लोगों को उपलब्ध होगी गैस</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने राजस्थान सहित सभी राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी कोटा 20% बढ़ा दिया है। इससे होटल, ढाबा और औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत मिलेगी। पश्चिम एशिया संकट के बीच आपूर्ति सामान्य करने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं को तेल कंपनियों के साथ पंजीकरण और डेटा साझा करने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/supply-of-commercial-gas-cylinders-increased-by-20-percent-gas/article-147397"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/lpg.jpg-2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केन्द्र सरकार ने राजस्थान समेत देश के तमाम राज्यों में कॉमर्शियल वर्ग के लिए एलपीजी गैस के आवंटित कोटे में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों समेत अन्य वर्ग राहत मिलेगी। साथ ही औद्योगिक ईकाइयों और बड़े वाणिज्यिक संस्थाओं को भी एलपीजी लेने के लिए तेल कंपनियों के यहां रजिस्ट्रेशन करवाने और अपनी खपत का डेटाबेस शेयर करने के लिए कहा है।</p>
<p>ईरान-इजरायल औरअमेरिका युद्ध के बीच गैस, तेल की आपूर्ति खाड़ी देशों से बंद हो गई, जिसके सर्वाधिक असर रसोई गैस पर रहा। तेल कंपनियों ने कम एलपीजी होने की स्थिति को देखते हुए कॉमर्शियल उपयोग के सिलेंडर की बिक्री को सीमित करते हुए घरेलु आपूर्ति को सामान्य रखा।</p>
<p>कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने से रेस्टोरेंट, ढ़ाबा, होटल, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, डेयरी समेत बड़ी औद्योगिक ईकाइयों पर इसका प्रभाव दिखने लगा। ऐसे में अब जब धीरे-धीरे देश में गैस का उत्पादन बढ़ रहा है। आपूर्ति शुरू हो रही है तो केन्द्र सरकार ने राज्यों की गैस आपूर्ति के कोटे में 20 फीसदी निर्धारित आपूर्ति के अतिरिक्त बढ़ा दी है।  केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ  से लिखे एक पत्र में बताया कि आपूर्ति के लिए अब सरकार रेस्तरां, ढाबे, होटल, औद्योगिक कैंटीन, राज्य सरकारों या स्थानीय निकायों की संचालित सब्सिडी युक्त कैंटीन और प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलोग्राम एफटीएल में वितरित करे। ताकि इस क्षेत्र में गैस संकट से आई समस्याओं को कम या खत्म किया जा सके।</p>
<p>रजिस्ट्रेशन करवाने के निर्देश</p>
<p>इसके अलावा अब सरकार ने राज्यों में सभी वाणिज्यिक या औद्योगिक इकाइयों जो एलपीजी के बड़े उपभोक्ता हैं, उनको तेल कंपनियों के साथ रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए कहा है। इस रजिस्ट्रेशन के साथ उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में उपयोग हो रही एलपीजी का वार्षिक डेटा शेयर करना होता। इसी के आधार पर कंपनियां आगामी चरण में इन औद्योगिक ईकाइयों को एलपीजी का वितरण करेगी। इसके साथ ही इन बड़े उपभोक्ताओं को अपने शहर में लागू सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन इकाई के साथ पीएनजी के लिए आवेदन करने को कहा है, ताकि पीएनजी की सप्लाई शुरू होने से पहले कंपनियों के पास डेटा सुनिश्चित हो सके कि कितनी आपूर्ति की जानी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/supply-of-commercial-gas-cylinders-increased-by-20-percent-gas/article-147397</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 09:53:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट संकट: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को तेल बिक्री की दी छूट, होर्मुज़ तनाव के बीच 14 करोड़ बैरल बाजार में उतारने की तैयारी, </title>
                                    <description><![CDATA[ग्लोबल मार्केट में स्थिरता के लिए ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 14 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेचने की अस्थायी छूट दी है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करने का दावा किया। हालांकि, डिएगो गार्सिया पर हमलों और क्षेत्रीय धमकियों ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताओं को बरकरार रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-gives-permission-to-iran-to-sell-oil/article-147368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता कम करने के लिए ईरान को अस्थायी रूप से लगभग 14 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेचने की अनुमति दे दी है। शुक्रवार देर रात जारी इस छूट के तहत तेहरान टैंकरों में संग्रहित तेल को बाजार में उतार सकेगा, जो वैश्विक मांग के करीब डेढ़ दिन के बराबर है। यह फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण पैदा हुई आपूर्ति चिंताओं को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।</p>
<p>एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप ने तनाव कम करने के संकेत देते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों को समेटने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपने सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने के "काफी करीब" पहुंच गया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, लॉन्चर और रक्षा औद्योगिक ढांचे को "पूरी तरह कमजोर" कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना और क्षेत्र में सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि अमेरिका इज़राइल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे सहयोगियों की सुरक्षा बहाल करने के करीब पहुंच गया है।</p>
<p>होर्मुज़ जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रबंधन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इसका नियंत्रण और निगरानी उन देशों को करनी चाहिए जो इसका उपयोग करते हैं। उन्होंने जोड़ा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सहयोग करेगा। हालांकि, क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। हजारों अतिरिक्त अमेरिकी मरीन और नौसैनिक कर्मियों की तैनाती की जा रही है, जो सैन्य तैयारी को दर्शाता है। इस बीच, ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया में अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला किया, जिसे अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार विफल कर दिया गया।</p>
<p>बहरीन होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों का समर्थन करने वाला पहला क्षेत्रीय देश बन गया है, जबकि यूरोपीय देशों, जापान और कनाडा ने भी समर्थन जताया है। हालांकि, अब तक किसी देश ने नौसैनिक तैनाती को लेकर ठोस प्रतिबद्धता नहीं दी है।<br />ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात को चेतावनी दी है कि यदि खाड़ी में उसके कब्जे वाले द्वीपों पर हमला हुआ तो वह रस अल-खैमाह जैसे बंदरगाह शहरों को निशाना बना सकता है। वहीं, कुवैत और सऊदी अरब ने मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम करने की जानकारी दी है।<br />ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों से हमले किये हैं जिसके जवाब में इजरायल ने बेरूत में हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-gives-permission-to-iran-to-sell-oil/article-147368</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 18:51:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गैस सप्लाई पर सियासी संग्राम: बघेल के सवाल पर साय सरकार के सलाहकार का पलटवार, आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गैस सिलेंडर की उपलब्धता पर किए गए पोस्ट ने छत्तीसगढ़ में राजनीतिक युद्ध छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री के सलाहकार पंकज झा ने इसे जनता को भड़काने और भ्रम फैलाने की कोशिश करार दिया। भाजपा इसे दुष्प्रचार बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे जनहित से जुड़ा विपक्ष का दायित्व मान रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-struggle-on-gas-supply-sai-governments-advisor-hits-back/article-147365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/chattisgarh1.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एक पोस्ट पर शनिवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सलाहकार पंकज झा ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिससे कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।</p>
<p>दरअसल, बघेल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आम जनता से सवाल करते हुए पूछा था कि "क्या आपको सामान्य रूप से गैस सिलेंडर मिल रहा है?" इस पोस्ट को लेकर भाजपा खेमे ने इसे व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने और जनता में असंतोष फैलाने की कोशिश बताया है। मुख्यमंत्री के सलाहकार झा ने फेसबुक पर लंबा पोस्ट लिखते हुए कांग्रेस और उसके नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी कांग्रेस देश के पक्ष में खड़े होने के बजाय जनता को भड़काने और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से न केवल दहशत का माहौल बन सकता है, बल्कि आपूर्ति व्यवस्था पर भी अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।</p>
<p>झा ने अपने बयान में कांग्रेस पर देशहित के खिलाफ काम करने, झूठ फैलाने और राजनीतिक लाभ के लिए अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब जागरूक है और ऐसे दुष्प्रचार में आने वाली नहीं है। वहीं, कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले को जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने की सामान्य प्रक्रिया बताया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि आम लोगों की समस्याओं और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर सवाल उठाना विपक्ष का दायित्व है।</p>
<p>गौरतलब है कि, सोशल मीडिया के माध्यम से उठे इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां भाजपा इसे दुष्प्रचार बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे जनहित से जुड़ा सवाल करार दे रही है। गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर उठे सवाल ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई तकरार को जन्म दे दिया है। अब यह देखना होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है और इसका असर आम जनता पर कितना पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 18:03:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ युद्धविराम की संभावना को नकारा, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से गहराया ईंधन संकट</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि ईरान किसी अस्थायी समझौते के बजाय "युद्ध की पूर्ण और स्थायी समाप्ति" चाहता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से वैश्विक ईंधन कीमतों में भारी उछाल आया है। इस कड़े रुख ने तनाव कम करने और तेल बाजार को स्थिर करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को बड़ा झटका दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-rejects-possibility-of-ceasefire-with-america-and-israel-fuel/article-147324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/maztab.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अमेरिका और इजरायल के साथ किसी अस्थायी युद्धविराम के लिए सहमत नहीं होगा। जापान की समाचार एजेंसी 'क्योडो' को दिए एक साक्षात्कार में श्री अराघची ने कहा कि ईरान केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि "युद्ध की पूर्ण, व्यापक और स्थायी समाप्ति" चाहता है।</p>
<p>विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला चरमरा गई है। ईरानी नाकाबंदी के कारण फारस की खाड़ी से वैश्विक बाजारों तक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने वाला सबसे महत्वपूर्ण मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इस मार्ग से शिपिंग रुकने के सीधे परिणाम के रूप में दुनिया भर के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है।</p>
<p>अब्बास अराघची के कड़े रुख ने उन कूटनीतिक प्रयासों को झटका दिया है जो तनाव कम करने और वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने की कोशिश कर रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:03:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 118 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान पर सैन्य हमलों और आपूर्ति में बाधा के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $118 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है, जिससे भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई का खतरा मंडरा रहा है। तेल संयंत्रों पर हमलों से बाजार में भारी अस्थिरता देखी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/huge-jump-in-crude-oil-prices-amid-west-asia-crisis/article-147208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil2.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। पश्चिम एशिया में संकट गहराने और कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में जारी बाधाओं से शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 118 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। पिछले कारोबारी दिवस में भारतीय कच्चे तेल की कीमत 156.29 डॉलर प्रति बैरल थी। एक तरफ शाम तक कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के आसपास थी लेकिन आज सुबह 118 डॉलर के आसपास पहुंच गई।</p>
<p>पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की सप्लाई रिस्क और मजबूत डिमांड ने मिलकर क्रूड को हाई-वोलेटिलिटी मोड में रखा है, जिसका सीधा असर भारत पर दिखाई दे रहा है।</p>
<p>अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान में 28 फरवरी से ईरान पर हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया में संकट गहरा गया है। तेल एवं गैस उत्पादन संयंत्रों को भी निशाना बनाया गया है। साथ ही आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हुई है। इस सबसे कच्चा तेल तथा अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। एक सप्ताह बाद ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 14:22:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान, तुर्की के बाद दुनिया में एक और ड्रोन सेना के सुपर पावर का जन्म: ड्रोन इंडस्ट्री में बहुत तेजी से पैर पसार रहा ताइवान, हर साल लाखों ड्रोन बनाने का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी ड्रोन की तबाही के बीच ताइवान चुपचाप दुनिया का नया ड्रोन हब बन रहा है। चीन के खतरे को देखते हुए ताइपे ने 1 लाख से अधिक स्वदेशी ड्रोन यूक्रेन भेजे हैं। 2030 तक सालाना 1.80 लाख ड्रोन बनाने का लक्ष्य रखने वाला ताइवान अब अमेरिका और भारत जैसे देशों के लिए सप्लाई चेन का सुरक्षित विकल्प बन गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-iran-and-turkey-the-birth-of-another-drone-army/article-147162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trukey.png" alt=""></a><br /><p>ताइपे। ईरान और अमेरिका की जंग में विस्फोटक ड्रोन विमानों की ताकत देखकर दुनिया हैरान है। ईरान सऊदी अरब से लेकर कतर तक में तबाही मचा रहा है और सुपरपावर अमेरिका तथा इजरायली सेना इसे पूरी तरह से रोकने में नाकाम साबित हो रही है। अमेरिका के थॉड और पेट्रियट तथा इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी शाहेद ड्रोन के आगे फेल हो गए हैं। इससे खाड़ी देशों में भारी नुकसान पहुंचा है। दुनियाभर के सैन्य रणनीतिकार विस्फोटक ड्रोन को लेकर अब बड़ी चेतावनी दे रहे हैं। इससे पहले यूक्रेन युद्ध में भी रूस ने ईरानी शाहेद ड्रोन की मदद से यूक्रेन में भारी तबाही मचाई थी। </p>
<p>वहीं, यूक्रेन तुर्की के बायरकतार सीरिज के ड्रोन पर भरोसा करता है। तुर्की एवं ईरान के बाद अब एक और देश है जो अगला ड्रोन सुपरपावर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस देश का नाम ताइवान है जिसे चीन अपना हिस्सा कहता है। दुनिया में ड्रोन सेना की बढ़ती मांग के बीच ताइवान बहुत चुपचाप तरीके से बहुत बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक की मदद से ड्रोन बना रहा है। यही नहीं ताइवान इन हमलावर ड्रोन को यूक्रेन को निर्यात कर रहा है जो रूस के साथ जंग लड़ रहा है। इससे अब ताइवान में यह ड्रोन इंडस्ट्री बहुत तेजी से पैर पसार रही है। ताइवान में ड्रोन निर्माण को एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया था लेकिन ताइपे ने पिछले एक साल में ही 1 लाख ड्रोन का यूक्रेन को निर्यात किया है। यह बिक्री पोलैंड और चेक रिपब्लिक की मदद से की गई है।</p>
<p>चीन की धमकियों का सामना कर रहे ताइवान के लिए हमलावर ड्रोन उसके अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए भी बहुत ही जरूरी हैं। ताइवान ने ड्रोन बनाया है जो मध्यम ऊंचाई तक लंबे समय तक उड़ान भर सकता है। इसके अलावा ताइवान ने Chien Hsiang कामीकाजी ड्रोन बनाया है जो ईरान के शाहेद की तरह से ही निगरानी करने, इलेक्ट्रानिक हमले और हाई वैल्यू टारगेट पर लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम है। ताइवान न केवल खुद से ड्रोन बना रहा है, बल्कि अमेरिका से भी ड्रोन खरीद रहा है। ताइवान का इरादा साल 2030 तक हर साल 1 लाख 80 हजार ड्रोन बनाने का है। ताइवान अपने साथ राजनयिक संबंध रखने वाले देशों को ड्रोन की सप्लाई कर रहा है जिसका नागरिक और सैन्य दोनों ही तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। </p>
<p><strong>चीन के हमले का खतरा</strong></p>
<p>असल में ताइवान उन देशों को विकल्प मुहैया करा रहा है जो चीनी उपकरणों से मुक्त ड्रोन चाहते हैं। यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों जैसे जापान, भारत, यूरोपीय देशों के लिए मददगार है जो अपने सप्लाई चेन में विविधता लाना चाहते हैं। ताइवान पर चीन के हमले का खतरा मंडरा रहा है, इसी वजह से ताइपे बहुत तेजी से घरेलू ड्रोन उद्योग को खड़ा करना चाहता है। आज ताइवान में 260 कंपनियां ड्रोन के पूरे सिस्टम को खुद से बना रही हैं और एकीकृत कर रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 12:08:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चा तेल में भारी गिरावट, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 116 डॉलर पर पहुंचा </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान पर हमलों के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो गई है। ब्रेंट क्रूड 8.47% की भारी उछाल के साथ $116.48 प्रति बैरल पर पहुंच गया। ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में आग लग गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/heavy-fall-in-crude-oil-amid-west-asia-crisis-brent/article-147085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में संकट गहराने और कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में जारी बाधाओं से गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। </p>
<p>लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा फिलहाल 8.47 प्रतिशत चढ़कर 116.48 डॉलर प्रति बैरल पर है। अमेरिकी क्रूड वायदा 1.46 डॉलर की बढ़त में 97.73 डॉलर प्रति बैरल बोला गया। </p>
<p>अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान में 28 फरवरी से ईरान पर हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया में संकट गहरा गया है। तेल एवं गैस उत्पादन संयंत्रों को भी निशाना बनाया गया है। साथ ही आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हुई है। इस सबसे कच्चा तेल तथा अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। एक सप्ताह बाद ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/heavy-fall-in-crude-oil-amid-west-asia-crisis-brent/article-147085</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:29:17 +0530</pubDate>
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