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                <title>TMC vs BJP - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>TMC vs BJP RSS Feed</description>
                
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                <title>पीएम मोदी का दावा : बंगाल में चार मई के बाद घोषित विस चुनाव परिणाम के बाद होगी नए युग की शुरूआत, टीएमसी पर बोला हमला</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आसनसोल में हुंकार भरते हुए कहा कि 4 मई को चुनावी नतीजों के साथ बंगाल में 'नए युग' की शुरुआत होगी। उन्होंने टीएमसी पर 'माफिया राज' का आरोप लगाते हुए जनता से विकास के लिए मतदान करने की अपील की। पीएम ने दावा किया कि भाजपा ही राज्य को भ्रष्टाचार से मुक्त कर प्रगति की राह पर ले जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modis-claim-that-a-new-era-will-begin-in/article-149776"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi5.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस पर अपना हमला तेज करते हुए ऐलान किया कि चार मई के बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे घोषित होने के बाद एक 'नए युग' की शुरुआत होगी। पीएम मोदी ने हल्दिया से अपने अभियान को आगे बढ़ाते हुए औद्योगिक शहर आसनसोल में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, 'चार मई के बाद बंगाल में एक नया अध्याय शुरू होगा। तृणमूल कांग्रेस मुक्त बंगाल विकास की एक नयी दिशा दिखाएगा।' उन्होंने सत्तारुढ़ पार्टी पर 'माफिया राज' को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए इस इलाके में कोयला और रेत माफिया के कथित दबदबे को उजागर किया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के राज में कोयला और रेत माफिया लोगों पर बोझ बन गए हैं। जबकि पूरे देश में विकास दिख रहा है, बंगाल इस माफिया सिस्टम के कारण पिछड़ रहा है।</p>
<p>पीएम मोदी ने हाल ही में मालदा कालियाचक में हुई घटना का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस आने वाली हार को देखकर घबरा रही है। उन्होंने दावा किया कि यह पार्टी अपना दिमागी संतुलन खो चुकी है। मालदा में, उन्होंने डर के मारे बहुत बड़ी गलती की। यह घटना उनके जंगल राज के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी। पीएम मोदी ने केन्द्रीय बलों के खिलाफ कथित हमलों और टिप्पणियों की भी आलोचना करते हुए कहा,'तृणमूल कांग्रेस इतनी डरी हुई है कि वह देश के सुरक्षा बलों का गलत इस्तेमाल कर रही है। बंगाल के देशभक्त लोग अपने वोटों से इसका जवाब देंगे।' उन्होंने वाम मोर्चे के पतन से तुलना करते हुए कहा कि जैसे लोगों ने माकपा को सत्ता से हटाया था, वैसे ही वे अब तृणमूल कांग्रेस को भी हटा देंगे। उन्होंने भाजपा शासन के रिकॉर्ड पर ज़ोर देते हुए,कहा कि मतदाता अब वादों से ज़्यादा प्रदर्शन को आंकते हैं।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा,'सिर्फ़ भाजपा में ही विकास करने की काबिलियत है।'उन्होंने एक साफ़ राजनीतिक समयसीमा तय करते हुए दोहराया कि चार मई के बाद राज्य में 'विकास पर आधारित राजनीति' की ओर बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र के मतदाताओं से अपील की कि वे आसनसोल को 'माफिया-फ्री' बनाने और विकास को वापस लाने के लिए टीएमसी को सत्ता से हटाने को प्राथमिकता दें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 17:54:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मिशन वाम से राम: जमीनी नेताओं से संपर्क अभियान तेज, बंगाल में वामपंथी वोटों पर भाजपा की रणनीतिक घेराबंदी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा वामपंथी वोट बैंक को साधने के लिए 'बूथ स्तर' पर सक्रिय है। पार्टी असंतुष्ट वाम कार्यकर्ताओं को "विचारधारा दिल में, वोट भाजपा को" के मंत्र से जोड़ रही है। 2019 के बाद गिरे वाम वोट शेयर का लाभ उठाकर भाजपा, तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने की रणनीतिक योजना पर काम कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mission-left-to-ram-contact-campaign-with-grassroots-leaders-intensified/article-147911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bjp.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव एक बार फिर राम बनाम वाम के दिलचस्प राजनीतिक समीकरण की ओर बढ़ रहा है। भाजपा ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है कि तृणमूल को सत्ता से बेदखल करने के लिए वह वामपंथी वोट बैंक खासतौर पर जमीनी स्तर के निष्क्रिय कार्यकर्ताओं और समर्थकों को अपने पक्ष में लाने के लिए संगठित प्रयास कर रही है। इसके तहत बूथ स्तर तक पर्सनल कालिंग और घर-घर संपर्क जैसे अभियान तेज किए गए हैं। पार्टी रणनीतिकारों के अनुसार, वामपंथी समर्थकों का भाजपा को मौन समर्थन इस चुनाव में एक्स-फैक्टर साबित हो सकता है। भाजपा के लिए वाम वोट केवल संख्या नहीं, बल्कि सत्ता तक पहुंचने की रणनीतिक कुंजी साबित हो सकती है। भाजपा ने ऐसे वामपंथी कार्यकर्ताओं की पहचान शुरू की है, जो या तो सक्रिय राजनीति से दूर हैं या अपनी पार्टी से असंतुष्ट या निराश हैं। स्थानीय कार्यकतार्ओं को निर्देश दिया गया है कि वे इन मतदाताओं से सीधे संवाद स्थापित करें और उन्हें भाजपा के पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करें। मतदाता सूची के विश्लेषण के आधार पर चल रहा यह अभियान सामान्य प्रचार से आगे बढ़कर व्यक्तिगत संपर्क पर केंद्रित हो गया है।</p>
<p><strong>विचारधारा दिल में, वोट भाजपा को : प्रदेश अध्यक्ष</strong></p>
<p>शमिक भट्टाचार्य ने परिवर्तन यात्रा के दौरान वाम समर्थकों से अपील की थी कि वे अपनी विचारधारा को कायम रखते हुए राज्यहित में भाजपा का साथ दें। पार्टी का तर्क है कि विपक्षी वोटों का बिखराव सत्ताधारी दल को सीधा फायदा पहुंचा सकता है। बंगाल में लाल से भगवा का यह झुकाव 2011 के बाद धीरे-धीरे उभरा। 2014 में वाम मोर्चा का वोट शेयर जहां करीब 30 प्रतिशत था, वहीं 2019 में यह घटकर लगभग 7.5 प्रतिशत रह गया। इसी दौरान भाजपा का वोट शेयर बढ़कर करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2021 के विधानसभा चुनाव में वाम दल खाता नहीं खोल सके, जबकि भाजपा 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बनकर उभरी। निचले स्तर पर एक नारा भी प्रचलित हुआ था, आगे राम, पोरे वाम, जो यह दर्शाता है कि तृणमूल के खिलाफ भाजपा को एक प्रभावी विकल्प के रूप में देखा गया।</p>
<p><strong>कैडर ट्रांसफर का असर: </strong>वाम दलों की ताकत उनका संगठित कैडर रहा है। संगठन कमजोर होने के साथ ही इसका बड़ा हिस्सा या तो निष्क्रिय हुआ या भाजपा में शामिल हो गया। भाजपा अब उसी कैडर क्षमता का उपयोग कर रही है। खगेन मुर्मू और शंकर घोष जैसे नेताओं के उदाहरण को पार्टी निचले स्तर तक लागू करने की कोशिश कर रही है। चुनौती भी बरकरार: हालांकि, हालिया उपचुनावों और निकाय चुनावों में वाम वोटों की आंशिक वापसी के संकेत मिले हैं। वाम दल भी अपने आधार को पुनर्जीवित करने में जुटे हैं। ऐसे में भाजपा के लिए इस वोट बैंक को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। भाजपा के लिए वाम वोट केवल संख्या नहीं, बल्कि सत्ता तक पहुंचने की रणनीतिक कुंजी हैं। 2026 का चुनाव तय करेगा कि यह लाल से भगवा का रुझान स्थायी बदलाव बनता है या वामपंथ वापसी कर पाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 09:34:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : भाजपा और टीएमसी ने 70 प्रतिशत से अधिक सीटों पर युवाओं को दिया टिकट; युवाओं पर दांव लगा रही पार्टियां, पूर्व सैनिक से लेकर पत्रकार तक मैदान में</title>
                                    <description><![CDATA[बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी ने युवाओं पर बड़ा दांव खेला है। टीएमसी ने 60 वर्ष से कम उम्र के 219 उम्मीदवारों को उतारकर 'न्यू तृणमूल' विजन पेश किया, वहीं भाजपा के 196 प्रत्याशी 55 वर्ष से कम आयु के हैं। यह बदलाव दशकों पुरानी 'सीनियरिटी' की राजनीति को पीछे छोड़ युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-bjp-and-tmc-gave-tickets-to/article-147779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)20.png" alt=""></a><br /><div>कोलकाता। बंगाल की राजनीति इस बार केवल विचारधारा और नारों की जंग नहीं है, बल्कि यह एक बड़े जनरेशन चेंज (पीढ़ीगत बदलाव) की भी गवाह बन रही है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल और भाजपा दोनों ने टिकट बंटवारे में युवाओं पर बड़ा दांव खेलकर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाला दौर नई पीढ़ी का हो सकता है। दोनों दलों के उम्मीदवारों की सूचियों का विश्लेषण करें तो साफ झलकता है कि अनुभव के साथ युवा ऊर्जा का संतुलन बिठाने की पुरजोर कोशिश की गई है। तृणमूल ने एक व्यक्ति, एक पद और उम्र की अनौपचारिक सीमा को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>टीएमसी के 219 उम्मीदवार 60 वर्ष से कम उम्र के</strong></div>
<div> </div>
<div>मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच लंबे मंथन के बाद, तृणमूल ने इस बार केवल 25 प्रतिशत वरिष्ठ उम्मीदवारों (60 वर्ष से ऊपर) को मैदान में उतारा है। 2021 में यह आंकड़ा 42.4 प्रतिशत था। तृणमूल की रणनीति अब उन 219 उम्मीदवारों पर टिकी है जिनकी उम्र 60 वर्ष से कम है। हालांकि, पार्टी ने समर मुखर्जी (83) और शोभनदेव चट्टोपाध्याय (82) जैसे दिग्गजों को बरकरार रखकर यह भी स्पष्ट किया है कि अनुभव और विरासत को पूरी तरह दरकिनार नहीं किया जा सकता। </div>
<div> </div>
<div><strong>नई पीढ़ी का नया विजन</strong></div>
<div> </div>
<div>भाजपा में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखती है। उदाहरण के तौर पर नितिन नवीन जैसे अपेक्षाकृत युवा नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर पार्टी ने संकेत दिया है कि संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की नीति केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण है। वहीं, तृणमूल में ममता बनर्जी के साथ-साथ अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका भी इसी बदलाव का प्रतीक है। अभिषेक का संगठनात्मक विस्तार और युवा कार्यकतार्ओं के बीच उनकी पकड़, पार्टी के भविष्य की दिशा को इंगित करती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>बदलता राजनीतिक मिजाज</strong></div>
<div> </div>
<div>दशकों तक बंगाल की राजनीति पर काबिज वामपंथी दल अपनी सीनियरिटी के लिए जाने जाते थे, जहां नेतृत्व की सीढ़ी चढ़ने में उम्र बीत जाती थी। आज भाजपा और तृणमूल ने इस परिपाटी को तोड़ दिया है। तृणमूल के लिए यह बदलाव अभिषेक बनर्जी के न्यू तृणमूल विजन को मजबूती देता है, वहीं भाजपा के लिए यह जेन-जेड और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से जुड़ने का जरिया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>आंकड़ों में युवा झुकाव</strong></div>
<div> </div>
<div>भाजपा: 255 में से 196 उम्मीदवार 55 वर्ष से कम आयु के।</div>
<div>भाजपा: 65 उम्मीदवार हैं 40 वर्ष से कम उम्र के।</div>
<div>तृणमूल: 291 में से 176 उम्मीदवार 31 से 50 वर्ष आयु वर्ग के।</div>
<div>तृणमूल: 60 से अधिक आयु वर्ग की हिस्सेदारी घटकर लगभग 25 प्रतिशत हुई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:23:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल चुनाव: अपनों के विरोध से बेहाल तृणमूल और भाजपा, कहीं भूमिपुत्र की मांग तो कहीं चरित्र पर वार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और टीएमसी दोनों ही आंतरिक कलह से जूझ रही हैं। टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं ने बांकुड़ा से हावड़ा तक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। टीएमसी ने 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे हैं, जिससे बागी नेताओं के निर्दलीय चुनाव लड़ने का खतरा बढ़ गया है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamool-and-bjp-are-troubled-by-the-opposition-of-their/article-147631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kalyan.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनावों की रणभेरी बजते ही राज्य की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियों तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के लिए बाहरी शत्रुओं से ज्यादा घर के विभीषण चुनौती बन गए हैं। टिकट बंटवारे से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर पोस्टर, नारेबाजी और सामूहिक इस्तीफे के रूप में फूट रहा है। बांकुड़ा से लेकर हावड़ा तक, दोनों ही दल उम्मीदवार-कांटे से लहूलुहान नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>तृणमूल: भीतरघात और पुराने चेहरों पर अविश्वास</strong></p>
<p>सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष की ज्वाला भड़क रही है। पूर्व बर्द्धमान जिले के खंडघोष और मंतेश्वर में पुराने बनाम नए की लड़ाई सड़क पर आ गई है। कई क्षेत्रों में नेताओं के करीबियों को टिकट मिलने से स्थानीय नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उत्तर 24 परगना और हुगली के कुछ क्षेत्रों में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया है। कार्यकतार्ओं का तर्क है कि जो नेता पिछले पांच वर्षों में जमीन पर सक्रिय नहीं थे, उन्हें फिर से थोपना हार को निमंत्रण देना है। </p>
<p>हालांकि, पार्टी के कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी ने दावा किया है कि ये छोटे-मोटे मतभेद हैं और पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। तृणमूल ने इस बार पिछले चुनाव में जीते 74 विधायकों को टिकट नहीं दिया है। वे लोग अब निर्दलीय या फिर अन्य किसी दल से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। बांकुड़ा जिले की छातना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान विधायक सत्यनारायण मुखोपाध्याय को दोबारा टिकट दिए जाने से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:11:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीजेपी ने बंगाल में जारी की 111 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट: रूपा गांगुली-निशीथ प्रमाणिक को टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 111 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में रूपा गांगुली, निशीथ प्रमाणिक और प्रियंका तिबरेवाल जैसे दिग्गज चेहरों के साथ पूर्व आईपीएस अधिकारियों और टॉलीवुड सितारों को भी मौका मिला है। टीएमसी को कड़ी टक्कर देने के लिए पार्टी ने अनुभवी और ग्लैमरस चेहरों का संतुलित दांव खेला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-released-second-list-of-111-candidates-in-bengal-ticket/article-147140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-bjp.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है। बीजेपी ने अपनी दूसरी लिस्ट जारी कर दी है और इस बार चुनावी मैदान में 111 उम्मीदवारों के नाम फाइनल किए गए हैं। इस लिस्ट को देखकर साफ लग रहा है कि पार्टी ने जीत के लिए पूरी जान झोंक दी है। लिस्ट में सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि नामी चेहरे, पूर्व सरकारी अफसर और बंगाली सिनेमा के सितारे भी शामिल हैं। बीजेपी का यह दांव बंगाल की सत्ता में सेंध लगाने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।</p>
<p>इस बार की लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व लोकसभा सांसद रूपा गांगुली और निशीथ प्रमाणिक जैसे बड़े नामों की हो रही है। रूपा गांगुली को सोनारपुर दक्षिण से टिकट दिया गया है, जो वहां की राजनीति में एक बड़ा चेहरा मानी जाती हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय निशीथ प्रमाणिक को माथाभांगा सीट से चुनावी दंगल में उतारा गया है। इन चेहरों को उतारकर बीजेपी ने यह संदेश दे दिया है कि वह बंगाल के हर कोने में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और टीएमसी को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है।</p>
<p>दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को भी मौका: दिलचस्प बात यह है कि इस लिस्ट में सिर्फ पुराने बीजेपी नेता ही नहीं, बल्कि हाल ही में दूसरी पार्टियों से आए चेहरों को भी जगह मिली है। पूर्व टीएमसी नेता तापस रॉय को मानिकतला से टिकट मिला है, तो वहीं बैरकपुर से कौस्तव बागची पर भरोसा जताया गया है। आईपीएस अधिकारी रहे डॉ. राजेश कुमार को जगतदल सीट से मैदान में उतारा गया है, जो बताता है कि पार्टी अनुभवी और पढ़े-लिखे चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है।</p>
<p><strong>चुनावी दंगल में उतरे फिल्मी सितारे और फायरब्रांड नेता</strong></p>
<p>बात करें ग्लैमर और तेवर की, तो टॉलीगंज सीट से अभिनेता पापिया अधिकारी को टिकट दिया गया है, जिससे वहां मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। इसके अलावा, बीजेपी की फायरब्रांड नेता प्रियंका तिबरेवाल को एंटाली से मैदान में उतारा गया है। प्रियंका हमेशा से अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जानी जाती हैं। वहीं अर्जुन सिंह को नोआपारा से टिकट देकर पार्टी ने अपने पुराने गढ़ को बचाने की कोशिश की है। बीजेपी की इस दूसरी लिस्ट ने बंगाल चुनाव के माहौल को और भी गरमा दिया है। एक तरफ जहां टीएमसी अपनी जीत का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी के इन 111 नामों ने विपक्ष के खेमे में भी खलबली मचा दी है। लोगों के बीच अब बस यही चर्चा है कि क्या ये बड़े चेहरे और पूर्व आईपीएस अधिकारी बंगाल की जनता का दिल जीत पाएंगे? या फिर ममता बनर्जी का किला भेदन इतना आसान नहीं होगा? </p>
<p>अब मुकाबला दिलचस्प हो गया है क्योंकि टिकट मिलने के बाद अब असली जंग जमीन पर शुरू होगी। कार्यकर्ताओं में उत्साह है और उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी सीटों पर घेराबंदी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में बंगाल की सड़कों पर चुनावी रैलियों और नारों का शोर और तेज होने वाला है। देखना होगा कि 111 उम्मीदवारों की ये फौज बीजेपी की नैया पार लगा पाती है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 12:01:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>SIR को लेकर सीएम ममता ने चुनाव आयोग पर लगाया आरोप, कहा-अदालत में ले जाएंगे मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) में एआई और व्हाट्सएप के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। उन्होंने इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-mamata-accused-the-election-commission-regarding-sir-and-said/article-138521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cm-mamta-on-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया बिना किसी उचित तैयारी के की जा रही है, जिससे जनता को बड़े पैमाने पर परेशानी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। बनर्जी की यह आलोचना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे उनके उस पत्र के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने इस अभ्यास के संचालन में गंभीर खामियों का आरोप लगाया था और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उाए थे। </p>
<p>मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि तृणमूल कांग्रेस एसआईआर के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा, हम कानून की मदद ले रहे हैं। कल अदालत खुलेगी और हम अदालत जाएंगे। यदि आवश्यक हुआ, तो मैं उच्चतम न्यायालय जाने की अनुमति भी मांगूंगी और जनता की ओर से पक्ष रखूंगी। बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस संशोधन प्रक्रिया ने मतदाताओं के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है और दावा किया कि इस प्रक्रिया से जुड़ी घबराहट के कारण कई लोगों की मौत हो गई है। </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की मौत तो तब हुई जब वे संशोधन से जुड़ी सुनवाई के लिए कतारों में खड़े थे। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह सुनवाई के नाम पर बुजुर्गों और बीमारों सहित आम नागरिकों को अनावश्यक कष्ट दे रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची से नाम मनमाने ढंग से हटाए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि लगभग 54 लाख नाम हटा दिए गए हैं, जबकि मतदाताओं के पास फॉर्म सात और आठ जमा करने का अधिकार था। बनर्जी ने अधिकारियों पर नाम हटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और दावा किया कि यह प्रक्रिया व्हाट्सएप के जरिए चलाई जा रही है, जो नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 11:25:14 +0530</pubDate>
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