<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/tourists/tag-6567" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>tourists - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/6567/rss</link>
                <description>tourists RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मौसम का साथ मिला तो बायलॉजिकल पार्क में खिला ट्यूरिज्म, 20 लाख राजस्व</title>
                                    <description><![CDATA[जिन्हें कहानी -  किताबों में देखा उन्हें नजदीक से देख रोमांचित हुए बच्चे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/favorable-weather-boosts-tourism-at-the-biological-park--%E2%82%B920-lakh-in-revenue-generated/article-162937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। काली संग गणेश की उछलकूद, राजा बाबू की लुकाछुपी, कदमों की आहट के बीच सुहासिनी की दहाड़ से भेड़ियों में मची हलचल तो एनक्लोजर में चक्कर लगाती महक की झलक और अठखेलियां करते वन्यजीवों के खूबसूरत लम्हों का साक्षी रहा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क सुहाने मौसम के बीच पर्यटकों से गुलजार रहा।<br />बच्चों के लिए पार्क में वन्यजीवों का दीदार किसी कहानी की किताब के पन्नों से निकलकर हकीकत में सामने आने जैसा रहा। किड्स प्ले जोन में झूलों पर मस्ती और दूसरी ओर एनक्लोजर में वन्यजीवों की उछल कूद के बीच परिवारों ने बुधवार को पिकनिक और जंगल सफारी जैसा अनुभव लिया। सुबह से शाम तक गो-कार्ट भी दौड़ती रही।</p>
<p><strong>221 दिनों में 50 हजार पर्यटकों ने देखा वन्यजीवों का संसार</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से 9 अगस्त तक 221 दिनों में करीब 50 हजार पर्यटक पार्क पहुंचे। इनसे सरकार को 20 लाख 68 हजार 700 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। पार्क में बढ़ती पर्यटकों की आवाजाही से पार्क शहरवासियों के लिए वन्यजीवों के दीदार के साथ परिवार के साथ समय बिताने का पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है।</p>
<p><strong>जनवरी में सर्वाधिक पहुंचे पर्यटक</strong><br />साल की शुरुआत पार्क के लिए सबसे अच्छी रही। जनवरी में करीब 17 हजार पर्यटक अभेड़ा पहुंचे, जो इस अवधि में किसी एक महीने में सबसे अधिक संख्या रही। इन पर्यटकों से सरकार को 6 लाख 85 हजार 500 रुपए का राजस्व मिला।</p>
<p><strong>जुलाई में 3.63 लाख की आय</strong><br />जनवरी के बाद जुलाई में पार्क को सबसे अधिक राजस्व मिला। इस माह में करीब 6200 पर्यटक पार्क पहुंचे और उनसे 3 लाख 63 हजार 450 रुपए की आय हुई। वहीं, फरवरी में 7400 पर्यटक आने के बावजूद राजस्व 2 लाख 56 हजार रुपए रहा। हालांकि, इसका कारण जून से प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी रही।</p>
<p><strong>टाइग्रेस-लॉयनेस को देख रोमांचित हुए बच्चे</strong><br />जिन्हें कहानियों-किताबों में देखा-सुना, उन्हें खुली आंखों से अपने सामने देख बच्चे रोमांच से रोमांचित हो उठे। तार फेंसिंग पर चढ़ते फिर ऊंचाई से छलांग लगाते भालू गणेश के करतब ने पर्यटकों को आनंदित कर दिया। बच्चों को नील गाय व हिरणों का झूंड खूब भा रहाहै। बुधवार को बारिश के बीच बड़ी संख्या में शहरवासी परिवार संग बायोलॉजिकल पार्क पहुंचे और जंगल की खामोशी के बीच चहकता जानवरों के संसार में सुकून महसूस किया।</p>
<p><strong>किड्स प्ले जोन ने बढ़ाई परिवारों की खुशी</strong><br />विज्ञान नगर निवासी अशफाक अहमद और फुरकान अंसारी ने बताया कि वे पहली बार अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क आए हैं। बच्चों के लिए बनाए गए किड्स प्ले जोन में नए झूले आकर्षण का केंद्र हैं। बजरंग नगर से आए मुकेश, कुमकुम, कुलवंती और अभिलाषा तथा संजय नगर निवासी राकेश नामा, प्रियंक और आशा ने बताया कि टाइग्रेस, लॉयनेस, पैंथर, भालू और हिरणों को नजदीक से देखकर बच्चों को काफी रोमांच हुआ।</p>
<p><strong>रविवार को लगा मेला, 1400 से ज्यादा पर्यटक पहुंचे</strong><br />अवकाश के दिन रविवार को भी पार्क पर्यटकों से गुलजार रहा। सुबह से शाम तक शहरवासी परिवारों के साथ बायोलॉजिकल पार्क पहुंचे। एक ही दिन में 1400 से अधिक पर्यटकों ने पार्क का भ्रमण किया, जिससे करीब 75 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। बारिश और सुहाने मौसम ने पार्क की रौनक को और बढ़ा दिया।</p>
<p>बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर का नया जोड़ा लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क प्रशासन को पत्र लिखा है। जल्द ही टाइगर जोड़ा आने की उम्मीद है। बच्चों के मनोरंजन के लिए किड्स प्ले जोन विकसित किया गया है, जिसमें आकर्षक झूले लगाए गए हैं। पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने पर विशेष ध्यान है। आगामी दिनों में पार्क के विस्तार के साथ पर्यटक सुविधाओं में और भी इजाफा किया जाएगा।<br /><strong>-प्रमोद कुमार धाकड़, डीएफओ, वन्यजीव विभाग, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/favorable-weather-boosts-tourism-at-the-biological-park--%E2%82%B920-lakh-in-revenue-generated/article-162937</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/favorable-weather-boosts-tourism-at-the-biological-park--%E2%82%B920-lakh-in-revenue-generated/article-162937</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 15:10:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/111200-x-600-px%29-%283%2934.png"                         length="1896375"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाड़ौती का ‘मिनी गोवा’ बेजार, बारिश की आस में पिकनिक स्पॉट</title>
                                    <description><![CDATA[सूखे कुंड और झरनों से पर्यटन स्थलों पर पसरा सन्नाटा ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadauti%E2%80%99s-%E2%80%98mini-goa%E2%80%99-wears-a-desolate-look--picnic-spot-awaits-rain/article-162534"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)31.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  हाड़ौती अंचल में इस बार मानसून की रफ्तार धीमी रहने और इंद्रदेव की मेहरबानी न होने से कोटा और आसपास के प्रसिद्ध लोकल पिकनिक स्थल वीरान नजर आ रहे हैं। जिन पर्यटन स्थलों पर अगस्त के इन दिनों में सैलानियों का जमावड़ा रहता था और पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती थी, वे स्थल अब पर्यटकों की राह तक रहे हैं । जिन रास्तों और चट्टानों पर कभी सैलानियों की आवाजाही से रौनक बनी रहती थी, वहाँ अब सन्नाटा पसरा है। कर्णेश्वर महादेव के शांत परिसर से लेकर आलनिया के प्रागैतिहासिक शैलचित्रों वाले क्षेत्र तक, मानसून का वह जादुई अहसास गायब है जो हर साल हजारों लोगों को अपनी ओर खींच लाता था। स्थानीय लोगों से लेकर दूर से आने वाले पर्यटकों तक, हर किसी की निगाहें अब केवल आसमान की ओर हैं कि मेघ मेहरबान हों तों ये खूबसूरत ठिकाने फिर से खिल उठें।</p>
<p><strong>बरधा डेम : 'मिनी गोवा' में छाया सन्नाटा</strong><br />सवा सौ साल पुराना बरधा बांध, जिसे 'हाड़ौती का मिनी गोवा' भी कहा जाता है, इस समय पानी की आवक कम होने से खाली पड़ा है। ब्रिटिश गवर्नर रॉबर्टसन द्वारा निर्मित 21 फीट भराव क्षमता वाले इस बांध पर सामान्य दिनों में अब तक पानी की चादर (ओवरफ्लो) चलने लगती थी। कोटा से मात्र 25 किलोमीटर की दुरी पर होने के कारण यहां हर वर्ष यहाँ वीकेंड पर हजारों लोगों का आना रहता है। पिछले साल इन दिनो यहां रोजाना हजारों लोग पहुंच रहे थे जबकि विकेण्ड पर यहां 5 हजार से अधिक पर्यटक जलक्रीड़ा करते नजर आये थे।</p>
<p><strong>16 फीट के उपर मुसलाधार बारिश जरूरी</strong><br />21 फीट भराव क्षमता वाले इस बांध में अभी केवल 13 फीट ही पानी भरा है। स्थानीय निवासीयों ने बताय कि इसे 17 फीट से ज्यादा भरने के लिए मुसलाधार बारिश की जरूरत रहती है। </p>
<p><strong>धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों पर भी कम रौनक</strong><br />कर्णेश्वर महादेव: अपनी प्राचीनता, दिव्यता और मानसूनी हरियाली के लिए मशहूर कर्णेश्वर महादेव मंदिर में आध्यात्मिक शांति तो है, लेकिन बारिश के अभाव में यहां बहने वाले प्राकृतिक झरना और हरियाली में वैसी रंगत नजर नहीं आ रही है। यहां के प्राकृतिक बहाव के उपर बनाए गए एनीकट के उपर से बहता पानी लोगो के लिए वाटर फाल का आनन्द देता है। कोटा के समीप व होने के कारण यहां पर इन दिनों खासी भीड़ रहती थी। यहां पास ही बसी बस्ती के लोगों के लिए भी अस्थाई रोजगार का साधन बन जाता है। ऐसे में क्षेत्र के लोग और ठेले के उपर व्यापार करने वाले स्थानीय लोग अब केवल तेज बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि नदियां-बांध लबालब हों और हाड़ौती के ये खूबसूरत मुकाम फिर से गुलजार हो सकें।</p>
<p><strong>चट्टानेश्वर महादेव आलनिया</strong><br />आलनिया बांध के पास पहाड़ों के बीच स्थित यह स्थल अपने 3600 साल पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और मानसूनी झरनों के लिए जाना जाता है। बारिश न होने के कारण यहाँ भी सैलानियों की आवाजाही थम सी गई है। आलनिया डेम में पानी की आवक नही होने से यहां बहने वाला पानी अभी बंद है। ऐसे में पिकनिक स्पॉट पर जलक्रीड़ा का आनंद लेने वाले लोग अच्छे मानसून होने का इंतजार कर रहे है। महावीर नगर निवासी गोविन्द बताते है कि अगस्त के पहले तक तो हर बार दो तीन बार बाहर पिकनीक हो जाती थी इस बार बाहर जाने की तो हिम्मत ही नहीं हो रही।</p>
<p><strong>मौसम की बेरुखी और खाली पड़े पिकनिक स्पॉट</strong><br />आषाढ़ बीतकर सावन का महीना आधा ढल चुका है, लेकिन कोटा और आसपास के इलाकों में बदरा झूमकर नहीं बरसे। आसमान में घुमड़ते काले बादलों को देख चेहरे खिलते तो हैं, लेकिन बिन बरसे गुजर जाने से आस टूट जाती है। मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर स्थानीय पर्यटन पर पड़ा है। बरधा बांध की पथरीली चट्टानों से लेकर चट्टानेश्वर के प्राकृतिक झरनों तक—जहाँ पानी की छलांग और कलकल बहती धाराएं देखने को मिलती थीं, वहाँ अब सिर्फ सन्नाटा पसरा हुआ है।</p>
<p><strong>पिछले साल मनाई थी पिकनिक इस बार मायूसी</strong><br />वीकेंड पर दूर-दराज और शहर से आने वाले सैलानी जब पूरे उत्साह के साथ पिकनिक मनाने पहुँचते हैं, तो पानी न मिलने पर उनकी उम्मीदें अधूरी रह जाती हैं। कर्नेश्वर पहुंचे श्रीनाथपुरम-सी निवासी रविन्द्र बताते है कि पिछले साल पुरे परिवार के साथ यहां जमकर पिकनिक मनाई थी आज यहां आया तो मन में मायूसी आई है। साथ आई पुजा ने बताया कि गर्मी के कारण केवल भोलेनाथ के दर्शन करके वापस जा रहे है। जो पानी में उतरकर नहाने और मस्ती करने का मन बनाकर आते हैं, सूखे पड़े कुंड और खाली बांध देखकर मायूस हो जाते हैं। हरियाली और छांव के अभाव में सैलानियों को मानसून के मौसम में भी गर्मी और उमस से दो-चार होना पड़ रहा है।</p>
<p> यहां स्थित प्राचीन कुण्ड़ लगभग खाली ही पड़ा है आस-पास से चलने वाले सारे झरने पूरी तरह सुखे है। सावन के महीने में बाबा कनेश्वर के दर्शन करने वाले भक्तों की अपार भीड़ इस बार नदारद है हांलाकि बाबा के लिए सोमवार को फिर भी भक्त आ रहे है लकिन पहले वाला माहौल नही बन पा रहा।<br /><strong>-ब्रजेश आसोपा,सेवादार समिति कर्णेश्वर महादेव मंदिर</strong></p>
<p> इस बार बरधा बांध में पानी की आवक ज्यादा नहीं होने के कारण यहां पर पर्यटकों का आना न के बराबर है। पिछले साल यहां इन दिनों सैकडों गाडियां प्रतिदिन आया करती थी। यहां का सड़क केवल 15 फीट की हाेने के कारण यातायात व सुरक्षा के लिए तालेडा थाने से अतिरिक्त जाप्ता लगाना पड़ता था। अभी केवल सामान्य गस्त से ही काम हो रहा है। आसपास के ग्रामीणाे को छोटा-मोटा रोजगार मिलने के कारण उनमें भी पर्यटकों के प्रति रूझान रहता है।<br /><strong>-राजेश रायपुरिया प्रधान तालेडा</strong></p>
<p>बरसात की स्थितियों को देखते हुए सभी संभावित स्थनों पर अतिरिक्त जाप्ता लगाया जाता है। डूब क्षेत्रों में सभी थाना क्षेत्रों में हमारी गाडियां रूटीन गस्त कर रही है। हांलाकि अभी तक किसी भी पिकनिक स्थल पर भारी भीड नहीं जुटने के कारण अलग से जाप्ता नहीं लगाया गया है ।<br /><strong>-मनीष शर्मा वृत्ताधिकारी चतुर्थ  कोटा पुलिस</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadauti%E2%80%99s-%E2%80%98mini-goa%E2%80%99-wears-a-desolate-look--picnic-spot-awaits-rain/article-162534</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadauti%E2%80%99s-%E2%80%98mini-goa%E2%80%99-wears-a-desolate-look--picnic-spot-awaits-rain/article-162534</guid>
                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:07:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/111200-x-600-px%29-%282%2931.png"                         length="1973583"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मुकुंदरा के बोराबास में इसी माह शुरू होगी नई जंगल सफारी, पर्यटकों को ऐतिहासिक धरोहरों व वन्यजीवों का मिलेगा रोमांच</title>
                                    <description><![CDATA[एंट्री गेट, साइन बोर्ड और सफारी ट्रैक तैयार, सुरक्षा रेलिंग व वॉच टावर का काम अंतिम चरण में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-new-jungle-safari-will-launch-this-month-at-borabas-in-mukundara--offering-tourists-the-thrill-of-exploring-historical-heritage-sites-and-wildlife/article-161671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहरवासियों को अब जल्द ही मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में एक ओर जंगल सफारी की सौगात मिलने जा रही है। एमएचटीआर प्रशासन अगस्त माह से बोराबांस रेंज में सफारी शुरू करने की तैयारी में जुटा है। अब पर्यटकों को शहर से 48 किमी दूर दरा सेंचुरी के लिए लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। यहां दौलतगंज स्थित चौकी में पर्यटकों के लिए 10 लाख की लागत से एंट्री गेट व 16 मीटर लंबा सफारी रुट बनकर तैयार कर लिया गया है। हालांकि, कुछेक काम बाकी है, जिसे इसी माह में पूरे करवाकर सफारी शुरू किया जाना है। सफारी शुरू होने पर पर्यटकों को कोटा की ऐतिहासिक विरासत, चंबल घाटियों और वन्यजीवों के अद्भुत नजारों के साथ वाइल्ड लाइफ ट्यूरिज्म को भी नई पहचान मिलेगी।</p>
<p><strong>दौलतगंज से मिलेगी एंट्री और एग्जिट</strong><br />मुकुंदरा प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, पर्यटकों को दौलतगंज स्थित डायवर्जन चैनल के पास चौकी से ही पर्यटकों को एंट्री मिलेगी। यहां से चंबल नदी के किनारे होते हुए कोटिया भील महल, अकेलगढ़ का पुराना किला, चंबल व्यू प्वाइंट, गरड़िया व्यू प्वाइंट, न्यू गरड़िया प्वाइंट होते हुए वापस दौलतगंज से ही एग्जिट दी जाएगी। यह रुट्स गत वर्ष अक्टूबर माह में ही तय किया गया था।</p>
<p><strong>10 लाख से बनेगा वॉच टावर, दिखेगा विहंग्म नजारा</strong><br />बोराबास के घने जंगलों के बीच सफारी रुट्स पर मुकुंदरा प्रशासन 10 लाख की लागत से तीन वॉच टावर बनाएगा। वन अधिकारियों ने बताया कि सफारी रूट पर कुछ जगहों पर सेल्फी प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। जिसका कार्य किया जा रहा है। पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए चंबल किनारे चट्टानों पर सुरक्षा रेलिंग लगाई जाएगी। यह काम भी अगले सप्ताह तक पूरा हो जाएगा।वहीं, जगह-जगह साइन बोर्ड लगा दिए गए हैं।</p>
<p><strong>सफारी के रूट में यह मिलेंगे व्यू प्वाइंट</strong><br />16 किमी लंबे सफारी रूट में पर्यटकों को कोट्या भील फोर्ट, न्यू चंबल प्वाइंट, न्यू गरड़िया प्वाइंट, भंवरकुंज, अकेलगढ़ फोर्ट, चंबल किनारे दो मंजिला वॉच टावर, सेल्फी प्वाइंट, प्रकृति का विहंग्म नजारा, वन्यजीवों की साइटिंग सहित प्रकृति के अद्भुद नजारें देखने को मिलेंगे।</p>
<p><strong>बोराबास में पैंथर व भालू की संख्या अधिक</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बोराबांस के जंगल में टाइगर को छोड़कर सभी वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। यहां लैपर्ड व भालूओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी है। इसके अलावा भेडिए, हायना, लोमड़ी, सियार, हिरण, नीलगाय, जंगली बिल्ली सहित कई एनिमल शामिल हैं।</p>
<p>मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की बोराबास रेंज में इसी माह पर्यटकों के लिए जंगल सफारी शुरू कर दी जाएगी। अभी तक यहां चौकी, सफारी एंट्री गेट, सफारी रूट्स व साइन बोर्ड सहित कई सौंदर्यीकरण कार्य पूरे हो गए हैं। हालांकि, कुछेक कार्य ही बाकी हैं, जो जल्द ही पूरे हो जाएंगे।<br /><strong>-मूथु एस, उप वन संरक्षक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-new-jungle-safari-will-launch-this-month-at-borabas-in-mukundara--offering-tourists-the-thrill-of-exploring-historical-heritage-sites-and-wildlife/article-161671</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-new-jungle-safari-will-launch-this-month-at-borabas-in-mukundara--offering-tourists-the-thrill-of-exploring-historical-heritage-sites-and-wildlife/article-161671</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 14:26:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/111200-x-600-px%29-%281%292.png"                         length="1791360"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पौंड्रिक उद्यान : बदहाली का शिकार, सुविधाओं के अभाव में परेशान हो रहे सैर करने वाले</title>
                                    <description><![CDATA[शहरवासियों के सैर, योग और मनोरंजन के इस प्रमुख केंद्र में फव्वारे बंद हैं, दीवारों की टाइल्स टूटी पड़ी हैं और आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। खुले बिजली बॉक्स व चूहों के बिल सुरक्षा और सौंदर्य दोनों के लिए खतरा हैं। नागरिकों ने उद्यान के त्वरित रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pondrick-park-is-in-poor-condition-and-tourists-are-facing/article-156712"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। शहर के प्रमुख उद्यानों में शामिल पौंड्रिक उद्यान इन दिनों बदहाली का शिकार नजर आ रहा है। शहरवासियों के लिए सुबह-शाम सैर योग और मनोरंजन का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला यह उद्यान रखरखाव के अभाव में अपनी चमक खोता जा रहा है। उद्यान में लगे फव्वारे लंबे समय से बंद पड़े हैं, जिससे इसकी सुंदरता प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर दीवारों की टाइल्स टूटकर बिखरी पड़ी हैं, जो उद्यान की खराब स्थिति को दर्शाती हैं। उद्यान में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं। सुबह और शाम टहलने आने वाले लोगों बच्चों तथा लोगों को इससे असुविधा और भय का सामना करना पड़ता है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इसके अलावा पार्क परिसर में कई जगह बिजली के बॉक्स खुले पड़े हैं, जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है। उद्यान की जमीन पर चूहों ने कई स्थानों पर बिल बना रखे हैं, जिससे<span>  </span>हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंच रहा है। संबंधित विभाग को उद्यान की नियमित देख रेख मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि शहर के इस प्रमुख उद्यान की गरिमा बनी रहे और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pondrick-park-is-in-poor-condition-and-tourists-are-facing/article-156712</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pondrick-park-is-in-poor-condition-and-tourists-are-facing/article-156712</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 10:27:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-06/111200-x-600-px%29-%283%296.png"                         length="2010289"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : लौटेगा लक्खी बुर्ज का पुराना वैभव, नगर निगम करवाएगा सौंदर्यीकरण कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यटकों के आकर्षण के लिए कई प्रकार की व्यवस्थाएं और सुविधाएं की जाएंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--lakhi-burj%E2%80%99s-former-glory-to-return--municipal-corporation-to-undertake-beautification-work/article-151935"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/asar-khabar-ka---lautega-lakhi-burj’-ka-purana-vaibhav,-nagar-nigam-karavaega-saundaryekaran-kary...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के प्रमुख पर्यटक स्थलों में शामिल लक्खी बुर्ज का पुराना वैभव पुन: नजर आएगा। नगर निगम लक्खी बुर्ज के सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना बना रहा है। इसको लेकर आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने सोमवार को लक्खी बुर्ज का निरीक्षण भी किया।आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि कोटा के पर्यटक स्थलों में लक्खी बुर्ज की प्रमुखता से गिनती होती है। पूर्व में इसका वैभव बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निर्देश पर अब लक्खी बुर्ज के सौंदर्यीकरण की योजना नए सिरे से तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि लक्खी बुर्ज में नाइट ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए फसाड लाइट्स लगाने के कार्यादेश पूर्व में ही जारी किए जा चुके हैं। लेकिन दोपहर और शाम के समय भी यहां पर्यटकों के आकर्षण के लिए कई प्रकार की व्यवस्थाएं और सुविधाएं की जाएंगी।</p>
<p><strong>कैफेटेरिया भी होगा शुरु</strong><br />लक्खी बुर्ज पर जल्द ही कैफेटेरिया प्रारंभ किया जाएगा। जिससे यहां आने वाले पर्यटक किशोर सागर और आसपास की खूबसूरती को निहारते हुए खाने-पीने का आंनद भी ले सकेंगे। इसके अलावा यहां एक भव्य फ व्वारा और बच्चों के लिए झूले भी लगाए जाएंगे। रात के समय लक्खी बुर्ज पर पर्याप्त रोशनी रहे इसके लिए एलईडी लाइट्स लगाई जाएंगी। लक्खी बुर्ज की मरम्मत और रंगरोगन भी किया जाएगा।</p>
<p><strong>दूरबीन भी बनेगी आकर्षण का केन्द्र</strong><br />काफी वर्षो पहले लक्खी बुर्ज पर आने वाले पर्यटकों के लिए दूरबीन भी बड़ा आकर्षण होती थी। विशेष प्रकार की इस दूरबीन से काफी दूर तक नजारा देखा जा सकता था। सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया में लक्खी बुर्ज पर फि र से दूरबीन लगाने का भी निर्णय लिया गया है। यह दूरबीन पर्यटकों के अनुभव को और अधिक आनंदित बनाएगी। लक्खी बुर्ज में टेलीस्कोप लगाने की भी संभावनाएं तलाशी जाएंगी। निरीक्षण के दौरान उनके साथ अधिशाषी अभियंता कुलदीप प्रेमी, राजस्व अधिकारी विजय अग्निहोत्री और स्वास्थ्य अधिकारी मौतीलाल चौधरी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि लक् खी बुर्ज की दुर्दशा का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 27 अप्रैल को पेज दो पर' एक लाख में बना इसलिए नाम रखा लक्खी बुर्ज, 100 फीट ऊंचा साथ ही देखरेख के अभाव में दुर्दशा का शिकार हो रहा लक्खी बुर्ज शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें इस पुराने एतिसाहिक पर्यटन स्थल के बारे में बताया गया है। समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर निगम आयुक्त स्वयं मौके पर पहुंचे और वहां की स्थिति को देखा। इसके बाद उन्होंने कहा कि नगर निगम इसका सौन्दर्यीकरण करवाकर इसके पुराने वैभव को लौटाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--lakhi-burj%E2%80%99s-former-glory-to-return--municipal-corporation-to-undertake-beautification-work/article-151935</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--lakhi-burj%E2%80%99s-former-glory-to-return--municipal-corporation-to-undertake-beautification-work/article-151935</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:29:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/asar-khabar-ka---lautega-lakhi-burj%E2%80%99-ka-purana-vaibhav%2C-nagar-nigam-karavaega-saundaryekaran-kary...kota-news-28.04.2026.jpg"                         length="2247638"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरिस्का में एक साथ 5 बाघों को देखकर विदेशी पर्यटक रोमांचित : दृश्य को कैमरे में किया कैद, पानी के बीच अठखेलियां करते दिखे शावक</title>
                                    <description><![CDATA[सरिस्का टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान विदेशी पर्यटकों को रोमांचक नजारा। बफर क्षेत्र के लिवारी ट्रैक पर बाघिन ST-19 अपने चार बड़े हो चुके शावकों के साथ जलस्रोत पर दिखाई दी। शावक पानी में अठखेलियां करते रहे, जबकि बाघिन बाहर बैठी रही। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/foreign-tourists-were-thrilled-to-see-5-tigers-together-in/article-145614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sariska-tiger.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का में सफारी के दौरान एक साथ 5 बाघों को देखकर विदेशी पर्यटक रोमांचित हो गये। पर्यटकों ने इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया और उसका वीडियो भी बनाया। सफारी में मौजूद गाइड आकाश पारीक ने बताया का बफर क्षेत्र के लिवारी ट्रैक पर चार विदेशी पर्यटक सफारी के लिए आए थे, जिन्हें बाघिन एसटी-19 अपने चार शावकों के साथ जलस्रोत पर नजर आई। पर्यटकों ने गाइड आकाश को बताया कि पहली बार बाघ देखने आए ओर एक, दो नहीं पांच बाघ उन्हें दिखे, जो काफी रोमांचक पल रहा। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बाघिन के शावक अब काफी बड़े हो चुके हैं। जो अब वयस्क बाघ की तरह नजर आ रहे हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही जल स्रोतों पर बाघ अब नजर आने लगे है। गाइड ने बताया कि शावक पानी में उतर गए, जबकि बाघिन बाहर बैठ गई। शावक पानी के बीच अठखेलियां करते भी दिखे। करीब 30 मिनट से ज्यादा समय तक बाघ परिवार<span>  </span>को पर्यटकों ने देखा। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/foreign-tourists-were-thrilled-to-see-5-tigers-together-in/article-145614</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/foreign-tourists-were-thrilled-to-see-5-tigers-together-in/article-145614</guid>
                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 16:17:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/sariska-tiger.png"                         length="843754"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यटकों के लिए राहत की खबर : 5 मार्च को खुलेगा आमेर महल, पूर्व आदेश निरस्त</title>
                                    <description><![CDATA[आमेर महल को 5 मार्च दोपहर 12 बजे से बंद रखने का आदेश रद्द। BRICS FMCBG मीटिंग के तहत प्रस्तावित एक्सकर्शन और गाला डिनर कार्यक्रम स्थगित होने के बाद फैसला। पुरातत्व निदेशक डॉ. पंकज धरेन्द्र के अनुसार महल अब पूरे दिन पर्यटकों के लिए सामान्य रूप से खुला रहेगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/relief-news-for-tourists-amer-palace-will-open-on-march/article-145272"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/amer-palace.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आमेर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> 5 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मार्च</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दोपहर</span> 12 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बजे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर्यटकों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बंद</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रखने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संबंधी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आदेश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तत्काल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रभाव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निरस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्णय</span> First BRICS FMCBG Meeting in Jaipur – Excursion and Gala Dinner at Amber Fort <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यक्रम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्थगित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बाद</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुरातत्व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विभाग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निदेशक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉ</span>. <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पंकज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">धरेन्द्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आदेश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्पष्ट</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> 5 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मार्च</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आमेर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सामान्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रूप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर्यटकों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अवलोकन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खुला</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहेगा।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्णय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर्यटकों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर्यटन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उद्योग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जुड़े</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लोगों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बड़ी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राहत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मिली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/relief-news-for-tourists-amer-palace-will-open-on-march/article-145272</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/relief-news-for-tourists-amer-palace-will-open-on-march/article-145272</guid>
                <pubDate>Wed, 04 Mar 2026 17:00:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/amer-palace.png"                         length="531369"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामगढ़ से पिछड़ा मुकुंदरा, 1 जिप्सी के भरोसे जंगल सफारी, 100 किमी चक्कर काटकर भी निराश लौट रहे पर्यटक </title>
                                    <description><![CDATA[दो साल बाद भी मुकुंदरा की बोराबांस में शुरू नहीं हुई सफारी, दरा जाकर भी शहरवासियों को नहीं मिल रही सफारी की बुकिंग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-lags-behind-ramgarh--jungle-safari-relies-on-only-1-jeep--tourists-return-disappointed-after-traveling-100-km/article-137745"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू हुए करीब दो साल बीत चुके हैं, इसके बावजूद सफारी परवान नहीं चढ़ी। जबकि, रामगढ़ टाइगर रिजर्व हाउस फुल चल रहा है। नतीजन, राजस्व और पर्यटकों की संख्या में मुकुंदरा, रामगढ़ टाइगर रिजर्व से पिछड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह मुकुंदरा की सफारी 1 ही जिप्सी के भरोसे चल रही है। जबकि, रामगढ़ में 6 जिप्सी पर्यटकों को जंगल की सैर करवा रही है। दरअसल, मुकुंदरा में एक ही रेंज दरा में जंगल सफारी करवाई जा रही है, जो कोटा शहर से करीब 48 किमी दूर है और टिकट बुकिंग भी आॅफलाइन है। ऐसे में पर्यटक दरा जाता है तो जिप्सी पहले से ही बुक रहती है। ऐसे में उन्हें 48 किमी जाना और वापस आने में करीब 100 किमी का चक्कर काट बैरंग लौटना पड़ता है।</p>
<p><strong>रुट्स बने फिर से शहर से सटे बोराबास में शुरू नहीं हुई सफारी</strong><br />शहरी सीमा से सटे रावतभाटा रोड स्थित मुकुंदरा की बोराबास रेंज में जंगल सफारी शुरू किए जाना प्रस्तावित है। इसके रुट्स भी बन चुके हैं। हाल ही में रुट्स संशोधित भी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यहां 2 साल बाद भी सफारी शुरू नहीं हो सकी। जबकि, यह जंगल शहर के नजदीक होने से पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो सकता है। इसके बावजूद मुकुंदरा प्रशासन द्वारा यहां सफारी शुरू नहीं की जा रही। पर्यटकों को शहर से 48 किमी दूर दरा जाना पड़ता है, जहां भी एक ही जिप्सी होने से बुकिंग नहीं मिल पाती। ऐसे में उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।</p>
<p><strong>बोराबास में है चम्बल व जंगल का विहंगम व्यू प्वाइंट्स</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी का कहना है कि शहर से सटी बोराबास रेंज का जंगल काफी घना है। यहां चंबल व जंगल के कई विहंग्म व्यू प्वाइंट है। इसके अलावा पैंथर, भेड़िया, भालू, जरख, फॉक्स सहित अन्य बड़े वन्यजीवों का हैबीटाट है, जिनकी सफारी के दौरान साइटिंग होने से पर्यटकों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा। इधर, पर्यटकों का कहना है कि मुकुंदरा प्रशासन यदि, रावतभाटा रोड स्थित बोराबांस रैंज में स्वीकृत रुट्स पर सफारी शुरू करें तो हमें दरा जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। समय की बचत होगी और ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p><strong>यह रहेगा 15 किमी का सफारी रुट्स</strong><br />बोराबास रेंजर राजपाल शर्मा ने बताया कि यहां दौलतगंज स्थित डायवर्जन चैनल के पास चौकी से सफारी के लिए पर्यटकों को एंट्री मिलेगी। यहां से चंबल नदी के किनारे कोटिया भील महल, चंबल व्यू प्वाइंट, गरड़िया व्यू प्वाइंट होते हुए रथकांकरा तक रुट रहेगा। यह रुट्स गत अक्टूबर माह में ही तय किया गया था। जल्द ही सफारी शुरू किए जाने की तैयारी है।</p>
<p><strong>दरा में एक जिप्सी के भरोसे सफारी</strong><br />दरा सेंचुरी में जंगल सफारी के लिए मात्र एक ही जिप्सी है, जो सुबह की पारी में 6 से 9 बजे तथा दोपहर 3 से 6 बजे तक रहती है। पर्यटकों को एंट्री व टिकट दरा रेंज कार्यालय से लेना होता है। यहीं से बुकिंग आॅफलाइन की जाती है। कोटा शहर से जाने वाले पर्यटकों को वहां जाकर पता लगता है कि जिप्सी एडवांस बुक हैं, ऐसे में उन्हें सफारी का मौका अगले दिन मिल पाएगा या फिर दोपहर की पारी तक इंतजार करना होगा। दोनों ही सूरत में पर्यटकों का समय व्यर्थ हो जाता है। मजबूरन उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। यदि, यहां जिप्सियों की संख्या बढ़ाई जाए तो भी लोगों को राहत मिल सकती है।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों से झलकता प्राचीन वैभव</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि प्राकृतिक छटा के साथ मुकुन्दरा विरासत से भरा पड़ा है। रिजर्व में 12वीं शताब्दी का गागरोन किला, 17वीं शताब्दी का अबली मीणी का महल, पुरातात्विक सर्वे के अनुसार 8वीं-9वीं शताब्दी का बाडोली मंदिर समूह, भैंसरोडगढ़ फोर्ट, 19वीं शताब्दी का रावठा महल, शिकारगाह समेत कई ऐतिहासिक व रियासतकालीन इमारतें, गेपरनाथ, गरड़िया महादेव मंदिर भी है, जो कला-संस्कृति व प्राचीन वैभव को दशार्ते हैं। ऐसे में इन रुट्स पर सफारी शुरू होने से पर्यटक विरासत से रुबरू हो सकेंगे।</p>
<p><strong>इधर, रामगढ़ में दोनों स्लॉट की सफारी हाउस फुल</strong><br />रामगढ़ टाइगर रिजर्व के रेंजर सुमीत कुमार ने बताया कि नवम्बर व दिसम्बर माह से जंगल सफारी हाउस फुल चल रही है। सफारी के लिए यहां 6 जिप्सी संचालित की जा रही है। सुबह की 6 से 9 और शाम की 3 से 6 बजे की दोनों पारी में पर्यटकों को जबरदस्त रुझान देखने को मिल रहा है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं पर्यटक</strong><br />दरा में जंगल सफारी के लिए बुकिंग आॅफलाइन है, जो पर्यटन के लिहाज से सही नहीं है। शहर से 48 किमी का सफर कर दरा पहुंचते हैं तो वहां जाकर जिप्सी एडवांस बुक होने की बात पता चलती है, जिससे आना-जाना मिलाकर 100 किमी का चक्कर व्यर्थ हो जाता है। मुकुंदरा प्रशासन को बोराबास रैंज में सफारी शुरू करनी चाहिए।<br /><strong>-अशोक कुमार, महावीर नगर तृतीय</strong></p>
<p>दरा बहुत दूर पड़ता है। ऐसे में रावतभाटा रोड स्थित बोराबास या कोलीपुरा रेंज में प्रस्तावित रुट पर जंगल सफारी शुरू की जानी चाहिए। ताकि, पर्यटकों का समय व पेट्रोल का पैसा बच सके। साथ ही बुकिंग प्रणाली भी आॅनलाइन होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति सफारी से पहले बुकिंग की करंट स्टेटस को देख ट्रैवलिंग प्लान बना सके।<br /><strong>-राम नारायण माहेश्वरी, दादाबाड़ी छोटा चौराहा</strong></p>
<p>मैं अपने साथियों के साथ कुछ दिनों पहले सफारी के लिए दरा गया था। वहां जाकर पता लगा कि जिप्सी एडवांस में ही बुक हो चुकी है। ऐसे में शाम का स्लॉट मिलने पर सफारी मिल सकती थी। जिसके लिए दोपहर 3 बजे तक का इंतजार करना पड़ता। ऐसे में वापस बैरंग लौटना पड़ा। यदि, बुकिंग व्यवस्था आॅनलाइन होती या फिर जिप्सी की संख्या अधिक होती तो उसी दिन सफारी का मौका मिल जाता। विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और शहरी सीमा में स्थित रावतभाटा रोड के जंगलों में सफारी शुरू की जानी चाहिए।<br /><strong>-चेतन सैन, प्रहलाद मीणा कैशवपुरा</strong></p>
<p>बोराबास रेंज में जंगल सफारी शुरू की जानी है। यहां के रुट्स भी तय कर दिए हैं, अब यहां रास्ते, वाच टावर, एंट्री गेट सहित पब्लिक फेसेलिटी डवलपमेंट के लिए कार्य किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश वित्तिय वर्ष की समाप्ती से पहले सफारी शुरू किए जाने की कोशिश है। पर्यटन बढ़ाने के लिए हमारी तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><strong>-सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-lags-behind-ramgarh--jungle-safari-relies-on-only-1-jeep--tourists-return-disappointed-after-traveling-100-km/article-137745</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-lags-behind-ramgarh--jungle-safari-relies-on-only-1-jeep--tourists-return-disappointed-after-traveling-100-km/article-137745</guid>
                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 14:58:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/500-px%29-%282%2910.png"                         length="1715612"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दृष्टिबाधित पर्यटकों ने स्पर्श से महसूस की आमेर महल की शान, 13 राज्यों से आए 300 सैलानियों ने जानी राजस्थान की गौरवशाली धरोहर</title>
                                    <description><![CDATA[दृष्टिबाधित पर्यटकों के लिए यह भ्रमण एक अनुभव आधारित यात्रा रहा, जहां उन्होंने राजस्थान की गौरवशाली विरासत को केवल सुना ही नहीं, बल्कि महसूस भी किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/visually-impaired-tourists-felt-the-glory-of-amer-palace-by/article-137477"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/6622-copy85.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पर्यटन सीजन और शीतकालीन छुट्टियों के चलते विश्व प्रसिद्ध आमेर महल इन दिनों सैलानियों से गुलजार है। देश विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक ऐतिहासिक आमेर किला, महल और संग्रहालय देखने पहुंच रहे हैं। जिससे पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों में भी खासा उत्साह नजर आ रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को आमेर महल में एक विशेष और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब देश के 13 राज्यों से आए 300 दृष्टिबाधित पर्यटकों ने आमेर महल का भ्रमण किया। दृष्टिबाधित पर्यटकों के लिए यह भ्रमण एक अनुभव आधारित यात्रा रहा, जहां उन्होंने राजस्थान की गौरवशाली विरासत को केवल सुना ही नहीं, बल्कि महसूस भी किया। </p>
<p>पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से इनके लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, ताकि वे बिना किसी कठिनाई के महल का भ्रमण कर सकें। भ्रमण के दौरान आमेर महल के वरिष्ठ टूरिस्ट गाइड महेश कुमार शर्मा ने पर्यटकों को महल के इतिहास स्थापत्य कला और राजसी परंपराओं की विस्तृत जानकारी दी। पर्यटकों ने आमेर महल के प्रांगण, दीवारों और स्थापत्य की बनावट को स्पर्श के माध्यम से समझा और इसके ऐतिहासिक महत्व को विवरणों के जरिए जाना। यह अनुभव उनके लिए अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा। अजमेर से आए पर्यटक संदीप कुमार त्रिवेदी ने बताया कि आमेर महल जैसी विश्व धरोहर को इस रूप में महसूस करना उनके जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/visually-impaired-tourists-felt-the-glory-of-amer-palace-by/article-137477</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/visually-impaired-tourists-felt-the-glory-of-amer-palace-by/article-137477</guid>
                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 18:51:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/6622-copy85.jpg"                         length="148833"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंधेरे में डूबे 7 अजूबे, सेवन वंडर्स गार्डन से पर्यटक लौट रहे निराश : एक माह से लाइटें बंद, चोरी हुईं 25-30 लाइटें</title>
                                    <description><![CDATA[परिणामस्वरूप गार्डन का बड़ा हिस्सा अंधकारमय हो गया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/7-wonders-plunged-into-darkness--tourists-returning-from-the-seven-wonders-garden-disappointed--lights-out-for-a-month--25-30-lights-stolen/article-128897"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर का मशहूर सेवन वंडर्स गार्डन, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, इन दिनों अंधेरे में डूबा हुआ है। किशोर सागर तालाब किनारे स्थित इस गार्डन में दुनिया के सात अजूबों की प्रतिकृतियां बनी हुई हैं, जिन्हें देखने हजारों पर्यटक आते हैं। लेकिन एक माह पहले अज्ञात चोर यहां से 25 से 30 लाइटें चोरी कर ले गए। तब से अब तक गार्डन के बड़े हिस्से में अंधेरा पसरा हुआ है। हालात यह हैं कि शाम ढलते ही पर्यटक अंधेरे के कारण निराश होकर लौट जाते हैं। सेवन वंडर्स गार्डन का आकर्षण इसकी खूबसूरती और विश्व प्रसिद्ध अजूबों की प्रतिकृतियां हैं। यहां ताजमहल, एफिल टॉवर, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी, चीन की दीवार, पीसा की मीनार, क्राइस्ट द रिडीमर और मिस्र के पिरामिड जैसी सातों प्रतिकृतियां तैयार की गई हैं। दिन के समय ये प्रतिमाएं शानदार नजर आती हैं, लेकिन गार्डन की असली खूबसूरती रात में रंगीन रोशनी के बीच निखरती है। लाइटें चोरी होने और मरम्मत न होने के कारण अब रात में ये अजूबे अंधेरे में गुम हो रखे हैं। रोशनी के बिना पर्यटक प्रतिकृतियों को ठीक से निहार नहीं पाते। इससे यहां आने वाले पर्यटकों का अनुभव फीका पड़ गया है।</p>
<p><strong>गुमानपुरा में दर्ज है रिपोर्ट</strong><br />गार्डन से जुड़े लोगों ने बताया कि करीब एक माह पहले अज्ञात चोरों ने यहां से 25 से 30 लाइटें उखाड़कर चुरा लीं। गुम होने की रिपोर्ट गुमानपुरा थाने में दर्ज करवा रखी है। चोरी की घटना के बाद न तो नई लाइटें लगाई गईं और न ही मरम्मत हुई। परिणामस्वरूप गार्डन का बड़ा हिस्सा अंधकारमय हो गया। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात को यहां टहलने या सैर के लिए आने वाले परिवार भी अब कम हो गए हैं। बच्चों और महिलाओं के लिए यह जगह असुरक्षित सी लगने लगी है।</p>
<p>- हर सप्ताह सैकड़ों परिवार और स्कूल के बच्चे यहां भ्रमण के लिए आते हैं।<br />- सप्ताहांत और छुट्टियों में यहां बड़ी भीड़ उमड़ती है।<br />- स्थानीय होटल और टैक्सी कारोबार को भी इससे फायदा होता है।</p>
<p><strong>पर्यटक हो रहे निराश</strong><br />जयपुर से आए पर्यटक अमित अग्रवाल कहते हैं कि हमने कोटा आने पर सबसे पहले सेवन वंडर्स गार्डन घूमने की योजना बनाई थी। दिन में तो सब ठीक था, लेकिन शाम ढलते ही गार्डन में अंधेरे के कारण कुछ भी साफ दिखाई नहीं दिया। बच्चे भी निराश हो गए। इसी तरह रतलाम से आए कॉलेज छात्रों ने कहा कि उन्होंने इंस्टाग्राम और इंटरनेट पर यहां की रात की रंगीन तस्वीरें देखी थीं। लेकिन अंधेरा होने की वजह से निराशा ही हाथ लगी।</p>
<p><strong>सुरक्षा पर भी सवाल</strong><br />अंधेरे के कारण गार्डन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब पर्यटक ही अंधेरे में रास्ता नहीं देख पाते तो चोर-उचक्कों के लिए माहौल अनुकूल हो जाता है। रात में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। गार्डन में आए घूमने आए कुछ युवाओं ने कहा कि प्रशासन बड़े-बड़े आयोजनों और उद्घाटनों में पैसा खर्च करता है, लेकिन पर्यटन स्थलों की मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान नहीं देता। अगर यहां की लाइटें सही नहीं होंगी तो पर्यटक सोशल मीडिया पर नकारात्मक बातें लिखेंगे, जिससे कोटा का नाम खराब होगा।</p>
<p><strong>केडीए के अधीन है देखरेख का जिम्मा</strong><br />गार्डन की देखरेख केडीए के जिम्मे है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी चोरी की घटना के बाद सिर्फ कागजी कार्रवाई में लगे हुए हैं, जमीनी स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया गया। एक माह बाद भी यहां नई लाइटें नहीं लगाई गई हैं। इस लोकप्रिय पर्यटन स्थल की देखरेख के लिए अधिकारी गंभीर नहीं है। सेवन वंडर्स गार्डन कोटा के पर्यटन नक्शे पर विशेष पहचान रखता है। बाहर से आने वाले अधिकांश सैलानी यहां जरूर आते हैं। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से यहां की स्थिति देखकर पर्यटन को सीधा नुकसान हो रहा है। पर्यटक निराश होकर लौटते हैं।</p>
<p><strong>जल्द लगवाएंगे नई लाइटें</strong><br />सेवन गार्डन से लाइटें चोरी होने का मामला सामने आया है। संबंधित विभाग ने इस संबंध में थाने से कई बार पत्राचार किया, लेकिन अब तक चोरी हुई लाइटें बरामद नहीं हो पाई हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नई लाइटें लगाने के लिए शीघ्र ही टेंडर जारी किया जाएगा। फिलहाल सीवी और सेवन गार्डन में लाइट से संबंधित समस्या है, जिसे जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।<br /><strong>- ललित मीणा, एईन, केडीए, कोटा</strong></p>
<p><strong>गेट के पास रहता है अंधेरा... </strong><br />सेवन वंडर्स पार्क के मुख्य गेट के पास अंधेरा पसरा रहता है। यहां लगी लाइटें अज्ञात चोर चुरा ले गए हैं। देसी और विदेशी पर्यटकों ने कई बार अंधेरे की शिकायत की है। शाम के समय पार्क में आने वाले लोगों को रोशनी की कमी से परेशानी होती है।<br /><strong>- उर्मिला, सेवन वंडर्स</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/7-wonders-plunged-into-darkness--tourists-returning-from-the-seven-wonders-garden-disappointed--lights-out-for-a-month--25-30-lights-stolen/article-128897</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/7-wonders-plunged-into-darkness--tourists-returning-from-the-seven-wonders-garden-disappointed--lights-out-for-a-month--25-30-lights-stolen/article-128897</guid>
                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:31:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-10/111-%283%295.png"                         length="198233"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> विश्व पर्यटन दिवस आज : टूर ऑपरेटर्स के प्लान में शामिल नहीं होने से नहीं बढ़ पा रहा विदेशी पर्यटकों का ग्राफ</title>
                                    <description><![CDATA[2025 में अभी तक साढ़े छह लाख पर्यटक शहर में आए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-tourism-day-today--foreign-tourists-are-not-increasing-due-to-tour-operators-not-being-included-in-their-plans/article-128059"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी के किनारे व प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर शहर में चंबल रिवर फ्रंट, ऑक्सीजोन सिटी पार्क, आच्छादित दुर्लभ भीतरिया कुंड, अनोखी अधर शिला, किशोर सागर के गहरे तालाब में खड़ा जगमंदिर, चंबल की कराइयों के बीच बसा गरड़िया महादेव, और शहर के बीच स्थित राजकीय संग्रहालय व मुकुंदरा हिल्स नेशनल पार्क तथा रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व सहित शहर में एक दर्जन से अधिक ऐतिहासिक व सौन्दर्य स्थल होने के बावजूद भी शहर में विदेशी पर्यटकों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर तरह से सौन्दर्यीकरण किया गया। जिसमें मुकुंदरा को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया गया। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए चंबल रिवर फ्रंट और आॅक्सीजोन सिटी पार्क विकसित किए गए। इनको बने करीब दो वर्ष हो चुके हैं, पर अभी तक शहर में विदेशी पर्यटकों की संख्या के ग्राफ को हम नहीं बढ़ा पाए। शहर में वर्ष 2023 में विदेशी पर्यटक 705, वर्ष 2024 में 1107 व 2025 में अगस्त तक 499 पर्यटक आए। वहीं देशी पर्यटकों में वर्ष 2023 में करीब साढ़े नौ लाख, 2024 में दस लाख व 2025 में अभी तक साढ़े छह लाख पर्यटक शहर में आए। कोटा में जब भी पर्यटकों की संभावना की बात होती है तो कहा जाता है एयरपोर्ट नहीं होना सबसे बड़ी कमी है। कोटा पर्यटन विभाग के अधिकारियों से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से लेकर अगस्त 2025 तक कोटा में कुल 2311 विदेशी पर्यटक आए।</p>
<p>मैं हिन्दुस्तान को पसन्द करती हूं, इंडिया आ चुकी हूं, काफी सुन्दर है। पुष्कर और वृन्दावन तो मैं कई कई दिन रुकी हूं। कोटा नहीं देखा है। मौका मिला तो आउंगी। आई लाइक इंडिया। <br /><strong>- स्टेला मेकरूफ, फ्रांसिसी पर्यटक नाइस </strong></p>
<p>टूर आॅपरेटर्स ने अपने टूर प्लान में बूंदी व जयपुर को शामिल कर रखा है, जिसके चलते शहर में खूबसूरत इमारतें होने के बावजूद भी बहुत ही कम तादाद में विदेशी पर्यटक आते हैं।<br /><strong>- अख्तर हुसैन रेलवे कॉलोनी कोटा </strong></p>
<p>शहर में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए आगामी जनवरी में हाड़ौती ट्रैवल मार्ट का आयोजन किया जा रहा है, जिसके लिए अभी से ही टूर आॅपरेटर्स सहित अन्य लोगों से संपर्क किया जा रहा है।<br /><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव व्यापार संघ</strong></p>
<p>शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हमने दशहरा मेले को विभिन्न आॅनलाइन प्लेटफार्म पर लाया है। साथ ही गरड़िया महादेव को जापान व फ्रांस के ट्रैवल मार्ट में प्रदर्शित किया है। साथ ही विभाग के सोशल मीडिया पेज पर समय-समय पर शहर की ऐतिहासिक जानकारी अपडेट करते हैं।<br /><strong>- संदीप श्रीवास्तव, सहायक निदेशक पर्यटन, कोटा</strong></p>
<p>शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शहर में सिटी पार्क, आॅक्सीजोन पार्क सहित अन्य विभिन्न स्थान हैं। साथ ही शहर में ट्रैवल मार्ट का आयोजन किया जा रहा है, जिससे शहर में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विश्व पर्यटन दिवस पर विभिन्न आयोजन आयोजित होंगे। साथ ही हमारा मार्केटिंग विभाग भी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए काम कर रहा है।<br /><strong>-विकास पांड्या, डायरेक्टर टूरिज्म विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-tourism-day-today--foreign-tourists-are-not-increasing-due-to-tour-operators-not-being-included-in-their-plans/article-128059</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-tourism-day-today--foreign-tourists-are-not-increasing-due-to-tour-operators-not-being-included-in-their-plans/article-128059</guid>
                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 17:00:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/copy-of-news45.png"                         length="649459"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - सेवन वंडर पार्क की लौटेगी रौनक, केडीए अधिकारियों ने ली सुध</title>
                                    <description><![CDATA[पार्क की सुंदरता और व्यवस्थाओं का ठीक होना बेहद जरूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---seven-wonder-park-will-regain-its-beauty--kda-officials-took-notice/article-124146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर की पहचान बन चुका सेवन वंडर पार्क एक बार फिर नई रौनक के साथ सजने को तैयार है। दैनिक नवज्योति में  सेवन वंडर की खूबसूरती पर अब बदहाली की छाया शीर्षक से प्रकाशित समाचार के बाद कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) हरकत में आया है। सेवन वंडर पार्क की स्थिति को सुधारने के लिए कई कदम तेजी से उठाए गए हैं। केडीए एक्सईन आरके लोधा ने बताया कि सेवन वंडर पार्क की खूबसूरती के लिए हम बढ़ी हुई घास की कटिंग करवा रहे हैं। नियमित रूप से इस खूबसूरत पार्क देखरेख की जाएगी। सेवन वंडर कार्मिकों ने बताया कि किशोर सागर तालाब में रोजाना मशीन से सफाई की जा रही है। </p>
<p><strong>बड़ी घास होने से जहरीले जीवों का था डर</strong><br />पार्क की नियमित सफाई, घास की कटाई और पेड़-पौधों की देखभाल का कार्य अब प्राथमिकता पर किया जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी घास में चलने तथा जहरीले जीवों का डर बना हुआ था। इस कारण सात अजूबों के नजदीक जाने से भी डर रहे थे। अब घास कटिंग होने के बाद पास जाकर भी इसकी खूबियों को देख सकेंगे तथा इसके बारे में बोर्ड पर अंकित जानकारी पढ़ सकेंगे।</p>
<p><strong>पर्यटकों की पसंदीदा जगह है सेवन वंडर पार्क</strong><br />सेवन वंडर पार्क न केवल कोटा के लोगों के लिए, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण है। ताजमहल, एफिल टावर, पिसा की मीनार जैसे विश्व प्रसिद्ध स्मारकों की प्रतिकृतियाँ देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। ऐसे में पार्क की सुंदरता और व्यवस्थाओं का ठीक होना बेहद जरूरी है।</p>
<p><strong>स्वीच बॉक्स की देखभाल शुरू</strong><br />केडीए अधिकारी ललित मीणा ने बताया कि  कॉन्ट्रेक्टर को बोल दिया है। पिछले दो दिन से कार्य कर रहा है। सेवन वंडर पार्क में खराब पड़े स्वीच बॉक्स को ठीक कर रहे हैं। अंडरग्राउण्ड केबलों को भी चेक किया जा रहा है। जल्द ही सही कर दी जाएगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए इलेक्ट्रिल पोलो, लाइटों व स्वीच बॉक्स की व्यवस्थाएं जांची जा रही है।</p>
<p>सेवन वंडर पार्क में खराब पड़े स्वीच बॉक्स ठीक करने के लिए कांन्ट्रेक्टर को बोल दिया है। वो दो दिन से लगा हुआ है। अंडरग्राउण्ड केबल भी चेक की जा रही है। जल्द ही सब ठीक कर दिया जाएगा।<br /><strong>- ललित मीणा, एईन, केडीए, कोटा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सेवन वंडर पार्क की बढ़ी घास की कटिंग करवा दी है। पार्क की नियमित देखभाल की जा रही है। सेवन वंडर पार्क देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। सेवन वंडर पार्क में 7 अजूबों की प्रतिकृतियां है तथा चारों तरफ हरियाली है। यहां आने वाले पर्यटकों की सुविधाओ ंका ध्यान भी रखा जा रहा है।<br /><strong>- केआर लोधा, एक्सईन केडीए, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---seven-wonder-park-will-regain-its-beauty--kda-officials-took-notice/article-124146</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---seven-wonder-park-will-regain-its-beauty--kda-officials-took-notice/article-124146</guid>
                <pubDate>Wed, 20 Aug 2025 16:01:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-08/oer-%281%2916.png"                         length="525771"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        