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                <title>Electoral Roll - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: पहले चरण की मतदाता सूची फ्रीज; न्यायाधिकरण की पहुंच अभी भी अनिश्चित, 23 और 29 अप्रैल को होंगे मतदान</title>
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                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदाता सूची सोमवार मध्यरात्रि से फ्रीज कर दी गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल के अनुसार, 60 लाख विचाराधीन नामों में से लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। प्रभावित लोग न्यायाधिकरण में अपील कर सकेंगे, लेकिन इस चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-first-phase-voter-list-freeze-tribunals/article-149412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal-election-20261.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदाता सूची को सोमवार मध्यरात्रि से ‘फ्रीज’ कर दिया गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने आज ही कूछ घंटे पहले संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि राज्य विधानसभा चुनाव के पहले चरण की मतदाता सूची आज मध्य रात्रि को ‘फ्रीज’ कर दी जायेगी। यदि न्यायाधिकरण इस समय सीमा के बाद किसी मतदाता का नाम सूची में शामिल करने की मंजूरी देता है तो उसे सूची में शामिल किया जायेगा लेकिन वह इस चुनाव में मतदान नहीं कर पायेगा। यद्यपी ऐसे व्यक्ति को अगले चुनाव में मतदान करने की अनुमति होगी।</p>
<p>चुनाव आयोग के अनुसार, गहन मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम विचाराधीन थे। इनमें से न्यायिक अधिकारियों ने लगभग 58 लाख मामलों का निपटारा कर दिया है। हालांकि, अग्रवाल ने हटाए गए नामों की सटीक संख्या नहीं बताई, लेकिन उन्होंने कहा कि निपटाए गए लगभग 45 प्रतिशत मामलों में अंततः मतदाता सूची से नाम हटाए जा सकते हैं, जिससे संकेत मिलता है कि लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। हालांकि, प्रभावित व्यक्तियों के पास न्यायाधिकरणों के समक्ष अपील करने का विकल्प होगा। इसके बावजूद, आम जनता के लिए न्यायाधिकरण कब पूरी तरह से काम करना शुरू करेंगे, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 17:59:44 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>सीएम ममता ने लगाया एसआईआर प्रक्रिया में 10 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कम होने का आरोप, 28 फरवरी को प्रकाशित होगी अंतिम सूची</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल में विशेष पुनरीक्षण के दौरान 4 लाख से अधिक दस्तावेज अपात्र पाए गए हैं। सुनवाई में अनुपस्थित 7 लाख लोगों सहित कुल 10 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cm-mamata-alleges-that-names-of-more-than-10-lakh/article-143987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/bengal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चार लाख से ज्यादा मतदाताओं के दस्तावेजों को अपात्र बताने से अंतिम सूची में 10 लाख से ज्यादा नाम के कम होने की संभावना है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने 444970 मतदाताओं द्वारा जमा किये गये दस्तावेजों को अपात्र के तौर पर चिह्नित किया है। आगे की कार्रवाई के लिए जानकारी आयोग को भेज दी गयी हैं। इसके अलावा, 466323 मतदाताओं द्वारा जमा किये गये दस्तावेज जिला मजिस्ट्रेट के पास सत्यापन के लिए लंबित हैं।</p>
<p>इससे पहले, पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत हुई सुनवाई में लगभग सात लाख मतदाता शामिल नहीं हुए थे। जिन लोगों के दस्तावेज अपात्र घोषित किये गये हैं, उन्हें मिलाकर 10 लाख से ज्यादा मतदाता अंतिम सूची से हटाये जा सकते हैं। आयोग ने पहले करीब 58 लाख मतदाताओं की पहचान की थी, जिनका देहांत हो चुका है, मौजूद नहीं हैं, या लापता हैं, जिसकी वजह से उन्हें मसौदा सूची से बाहर कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान और 10 लाख मतदाताओं की पहचान की गयी। इनमें से करीब सात लाख मतदाता सुनवायी में शामिल नहीं हुए, जबकि बाकी मामले अयोग्य पाये गये दस्तावेजों से जुड़े हैं। </p>
<p>आयोग ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद कहा है कि पश्चिम बंगाल के लिए अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि अभी काफी काम बाकी है। दस्तावेज सत्यापन की समय सीमा 21 फरवरी है, और अगर तब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो अंतिम सूची के प्रकाशन में देरी हो सकती है। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि यदि लंबित मामलों का निपटारा समय पर पूरा नहीं हुआ, तो आयोग विस्तार की मांग कर सकता है। सुनवाई के दौरान मतदाताओं ने कई दस्तावेज जमा किये, जिनकी पर्यवेक्षक जांच कर रहे हैं।</p>
<p>आयोग के सूत्रों के मुताबिक, पर्यवेक्षक ने करीब 30 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों को दोबारा सत्यापन के लिए मतदाता पंजीकरण अधिकारी  (ईआरओ) और सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) को वापस भेज दिया है। करीब 20 लाख मतदाताओं के दस्तावेज अभी भी लंबित पड़े हैं, जिन पर अभी तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है। </p>
<p>आयोग ने पहले एसआईआर प्रक्रिया के लिए मंजूर किये जाने वाले 13 दस्तावेजों की एक सूची प्रकाशित की थी और कहा था कि सूची के बाहर के दस्तावेज मंजूर नहीं किये जाएंगे, इसे बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी मंजूरी दी। सूत्रों ने हालांकि कहा कि कुछ मामलों में भ्रम हुआ, जहां सूची में शामिल नहीं किये गये दस्तावेज जमा किये गये और अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें मंजूर कर लिया। सूत्रों ने बताया कि संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। अधिकारियों के साथ आगे बातचीत के बाद इन मामलों के सुलझने की उम्मीद है। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:45:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मंंगलवार को चुनाव आयोग से करेंगे मुलाकात, विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की होगी औपचारिक घोषणा</title>
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                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल के सीईओ मनोज अग्रवाल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। मतदाता सूची की नई तारीख और विधानसभा चुनाव तैयारियों पर चर्चा हुई।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chief-electoral-officer-of-west-bengal-will-meet-the-election/article-142584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात करने वाले हैं। इस बैठक का उद्देश्य राज्य की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने के लिए एक संशोधित तारीख तय करना है, जिससे वर्तमान विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का समापन होगा।</p>
<p>यह चर्चा सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ की ओर से जारी निर्देश के मद्देनजर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। न्यायालय ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को दावों और आपत्तियों की जांच पूरी करने के लिए 14 फरवरी के बाद कम से कम एक सप्ताह का समय और दे।</p>
<p>मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूची के कार्यक्रम को संशोधित करने के अलावा, इस बैठक में राज्य में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें मतदान के चरणों की संख्या और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तैनाती शामिल है।</p>
<p>कार्यालय ने पहले ही चुनाव आयोग को एक ही चरण में चुनाव कराने की अपनी प्राथमिकता बता दी है, हालांकि अधिकारियों ने दोहराया है कि अंतिम निर्णय पूरी तरह से आयोग पर निर्भर करता है। इससे पहले, दावों और आपत्तियों पर सुनवाई सात फरवरी तक समाप्त होनी थी और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 14 फरवरी के लिए निर्धारित था।</p>
<p>हालांकि, उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद, अधिकारियों ने कहा कि अब यह सूची 21 फरवरी से पहले जारी नहीं की जाएगी और महीने के अंत से पहले प्रकाशित होने की उम्मीद है। एक बार अंतिम मतदाता सूची अधिसूचित हो जाने के बाद, चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ द्वारा जमीनी स्थिति की समीक्षा के लिए पश्चिम बंगाल का दौरा करने की संभावना है, जिसके बाद विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की जाएगी।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 13:22:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बंगाल एसआईआर मामला: सीएम ममता उच्चतम न्यायालय के सामने आज होंगी पेश, मानवीय हितों की अनदेखी का लगाया आरोप</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल में एसआईआर विवाद पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होंगी। याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ सुनवाई करेगी।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bengal-sir-case-cm-mamata-to-appear-before-supreme-court/article-141876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/mamta-banraji.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बुधवार को उच्चतम न्यायालय के कोर्ट रूम नंबर 1 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होंगी। यह पेशी पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका के संबंध में होगी।</p>
<p>सीएम बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति मांगने के लिए एक आवेदन दायर किया है। चूंकि उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है इसलिए उनकी उपस्थिति के लिए सुरक्षा मंजूरी मांगी गई है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के पास कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी विधि महाविद्यालय से कानून की डिग्री है और उन्होंने संक्षिप्त रूप से वकील के रूप में काम किया है। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि उन्होंने अंतिम बार कानूनी प्रैक्टिस 2003 में की थी। </p>
<p>पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से मतदाताओं को बड़े पैमाने पर बाहर किए जाने के आरोपों और एसआईआर प्रक्रिया की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह को आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। ये याचिकाएं राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित हैं।</p>
<p>सीएम बनर्जी एसआईआर प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रही हैं और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के उन परिवारों के साथ नयी दिल्ली में हैं जो इस प्रक्रिया से प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं। यह मामला सीएम बनर्जी की अनुच्छेद 32 याचिका से जुड़ा है जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा संचालित एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी है। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया से लोगों को अत्यधिक असुविधा हुई है और याचिका में इसके कार्यान्वयन से संबंधित प्रक्रियात्मक एवं कानूनी चिंताओं को उठाया है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के सांसदों डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन द्वारा दायर एक याचिका भी मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, साथ ही सीएम बनर्जी द्वारा स्वयं दायर एक अन्य याचिका भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ शीर्ष अदालत में एक मामला भी दायर किया है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और चुनाव आयोग के बीच विवाद सोमवार को उस समय और बढ़ गया जब उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ बैठक से यह आरोप लगाते हुए बाहर वॉकआउट कर दिया कि उन्होंने उनके साथ दुव्र्यवहार किया है। सीएम बनर्जी के साथ-साथ तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी भी बैठक में मौजूद थे, साथ ही एसआईआर प्रक्रिया से कथित रूप से प्रभावित परिवारों के 12 सदस्य भी उपस्थित थे।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि मानवीय हितों की अनदेखी करते हुए तथआ कानूनों एवं नियमों का उल्लंघन करते हुए एसआईआर लागू किया गया है। सूत्रों के अनुसार, वह बुधवार को होने वाली सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय के समक्ष इस मामले पर बहस करेंगी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 12:05:41 +0530</pubDate>
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                <title>चुनाव आयोग ने जारी की उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची , 2.89 करोड़ वोटर्स के कटे नाम </title>
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                        <![CDATA[चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है, जिसमें 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के तहत 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं। अब कुल मतदाताओं की संख्या 12.56 करोड़ रह गई है। बेहतर व्यवस्था हेतु 15,030 नए पोलिंग बूथ भी जोड़े गए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/election-commission-released-the-draft-voter-list-of-uttar-pradesh/article-138606"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/up-sir.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जिसमें लगभग 28.9 मिलियन (2.89 करोड़) नाम हटा दिये गये हैं। अब एसआईआर ड्राफ्ट लिस्ट में कुल मतदाताओं की संख्या 15.44 करोड़ से घटकर 12.56 करोड़ हो गई है, जो लगभग 18.70 प्रतिशत की कमी है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मंगलवार को घोषणा की कि प्रति बूथ 1500 से 1200 वोटर्स के हिसाब से पोङ्क्षलग बूथ को तर्कसंगत बनाने के बाद, अब राज्य में 15030 नए बूथ जोड़े गए हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में पोलिंग स्टेशनों की संख्या 1,62,486 से बढ़कर 1,77,516 हो जाएगी। 23 दिसंबर को ईसीआई ने प्रदेश के 75 जिलों में 403 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्येक 1,200 मतदाताओं के आधार पर पोङ्क्षलग स्टेशनों के आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। 11 दिसंबर के डेटा के अनुसार, जब गिनती के दूसरे दौर का समापन हुआ था, तो राज्य में ऐसे वोटर्स की संख्या 2.96 करोड़ थी, जिनका पता नहीं चल पाया था। गिनती के तीसरे दौर के बाद 26 दिसंबर के डेटा के अनुसार, यह आंकड़ा घटकर 2.89 करोड़ वोटर्स हो गया।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, 28.9 मिलियन ऐसे वोटर्स में से जिनका पता नहीं चल पाया था, उनके 12.9 मिलियन (8.40 प्रतिशत) को स्थायी रूप से स्थानांतरित, 4.6 मिलियन (2.99 प्रतिशत) को मृत, 2.54 मिलियन (1.65 प्रतिशत) को डुप्लीकेट और 7.95 मिलियन (5.15 प्रतिशत) को लापता के रूप में वर्गीकृत किया गया था। 774,472 अन्य वोटर्स (0.50 प्रतिशत) ने बूथ-स्तरीय अधिकारियों से फॉर्म लेने के बाद भी गिनती के फॉर्म वापस नहीं किए थे।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 16:36:24 +0530</pubDate>
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