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                <title>Strategic Stability - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Strategic Stability RSS Feed</description>
                
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                <title>एन.पी.टी. के आसपास की स्थिति चिंताजनक, पश्चिमी देश इस संधि का कर रहा राजनीतिकरण : रूसी दूत</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा में रूसी राजदूत गेनेडी गैतिलोव ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के राजनीतिकरण पर चिंता जताई है। उन्होंने फ्रांस द्वारा "रूसी खतरे" के बहाने परमाणु हथियारों के संचय को वैश्विक स्थिरता के लिए जोखिम बताया। रूस ने स्पष्ट किया कि नाटो की शत्रुतापूर्ण योजनाओं का जवाब देने के लिए उनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-situation-around-npt-is-worrying-western-countries-are-politicizing/article-151953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/russia2.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिये रूस के स्थायी प्रतिनिधि गेनेडी गैतिलोव ने 'आर.आई.ए. नोवोस्ती' को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि परमाणु अप्रसार संधि (एन.पी.टी.) के आसपास की स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि पश्चिमी देश "संधि के मंच पर" कार्यों का राजनीतिकरण करना चाहते हैं। परमाणु अप्रसार संधि का 11वां समीक्षा सम्मेलन सोमवार को न्यूयॉर्क में शुरू हुआ। रूसी राजनयिक ने कहा, "सच कहूं तो, संधि के आसपास की स्थिति चिंताजनक है। पश्चिमी देश एन.पी.टी. मंच पर कार्यों का राजनीतिकरण करना जारी रखे हुए हैं, और संधि से असंबद्ध राष्ट्रीय मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला रहे हैं।"</p>
<p>गैतिलोव ने कहा कि "रूसी खतरे" के बहाने पेरिस परमाणु हथियारों का संचय कर रहा है, जो रूस की सुरक्षा के लिये तत्काल जोखिम पैदा करता है। राजनयिक ने कहा, "फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 'परमाणु' आकांक्षाओं का हमारे लिये एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्हें एक काल्पनिक रूसी खतरे के माध्यम से उचित ठहराया जा रहा है। हमारा मानना है कि ऐसा घटनाक्रम न केवल रूस की सुरक्षा के लिये तत्काल जोखिम पैदा करता है, बल्कि रणनीतिक स्थिरता पर भी बहुत नकारात्मक प्रभाव डालता है।"</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यह "हमारे देश के प्रति फ्रांस और पूरे नाटो सैन्य-राजनीतिक गुट के शत्रुतापूर्ण इरादों की भी पुष्टि करता है।" रूसी राजदूत ने दावा किया कि रूस ने पेरिस द्वारा परमाणु हथियारों के संचय का जवाब देने के लिये पर्याप्त उपाय तैयार किये हैं। राजनयिक ने कहा, "रूसी संघ स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है। हम एक जिम्मेदार और संयमित दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, यदि फ्रांस और अन्य नाटो देशों की उपरोक्त योजनाओं को पूरी तरह से लागू किया जाता है, तो निस्संदेह हमारे पास रूस और उसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये पर्याप्त उपाय मौजूद हैं।"</p>
<p>मैक्रों ने मार्च में घोषणा की थी कि फ्रांस अपनी परमाणु निवारण नीति को मजबूत कर रहा है और उन्होंने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि फ्रांस को पूरे यूरोप को कवर करने के लिये अपनी परमाणु रणनीति का विस्तार करने पर विचार करना चाहिए। डेनमार्क ने पहले ही फ्रांस के साथ एक रणनीतिक परमाणु निवारण समझौता कर लिया है, जिसका उद्देश्य नाटो के निवारण तंत्र को पूरक बनाना है। पोलैंड भी इस पहल में शामिल होने के लिये पेरिस के साथ बातचीत कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 16:02:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शी जिनपिंग ने रखा चार-सूत्री योजना का प्रस्ताव : दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का करना चाहिए सम्मान, विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए चार-सूत्री सुरक्षा प्रस्ताव पेश किया है। अबू धाबी के युवराज के साथ बैठक में उन्होंने संप्रभुता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर जोर दिया। अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने और तेल की कीमतों में उछाल के बीच चीन अब इस संकट में मध्यस्थ बनने की तैयारी में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-the-increasing-tension-in-west-asia-xi-jinping-proposed/article-150367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/shi-jinpin.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका में दिलचस्पी दिखाते हुए कहा है कि उन्होंने क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए यहां अबू धाबी के युवराज ज़ायेद अल नहयान के साथ बैठक में चार-सूत्री प्रस्ताव रखा है। शी जिनपिंग ने शांति पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के लिए एक साझा, विस्तृत, सहयोगपूर्ण और टिकाऊ सुरक्षा व्यवस्था बनायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का भी पूरी तरह सम्मान होना चाहिए। साथ ही नागरिकों एवं अवसंरचनाओं की भी सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।</p>
<p>शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर जोर देते हुए सभी पक्षों से साथ आकर क्षेत्रीय विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने अनुरोध किया। चीन का कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम चल रहा है। इस दौरान दोनों देशों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में बैठकर शांति वार्ता भी की। यह शांति वार्ता 21 घंटे तक चली लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला, जिससे युद्धविराम पर संकट के बादल मंडराने लगे। इस बीच, अमेरिका ने राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान के बंदरगाहों को बाधित कर दिया है, जिससे तेल के दामों में उछाल देखने को मिला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत का बड़ा कूटनीतिक कदम: खामेनेई की मौत पर जताया दुख, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 4 दिन बाद शोक पुस्तिका में दर्ज किया संवेदना संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर औपचारिक दुख प्रकट किया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी राजदूत से मुलाकात कर शोक पुस्तिका में संदेश लिखा। तेहरान में तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच हुए इस निधन पर भारत ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की कामना करते हुए ईरान के साथ अपनी एकजुटता जताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indias-big-diplomatic-step-expressed-grief-over-khameneis-death-foreign/article-145381"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/khamnei.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली में ईरान के राजदूत से मुलाकात की और शोक संवेदना प्रकट की। इस दौरान उन्होंने भारतीय दूतावास में रखी शोक पुस्तिका में संदेश लिखकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>गौरतलब है कि खामेनेई का निधन रविवार को तेहरान में उस समय हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हवाई हमलों के कुछ ही घंटों बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। भारत ने ईरान के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता की कामना की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 17:03:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को अपने सदाबहार दोस्त चीन से झटका, नागरिकों के कल्याण पर दें ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग में आयोजित 7वीं रणनीतिक वार्ता के बाद चीन ने कश्मीर विवाद को 'इतिहास की देन' बताते हुए इसे भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौतों और शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए सुलझाने पर जोर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistan-faces-blow-from-its-all-time-friend-china-on-kashmir/article-138662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kashmir-case-paksitan.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को अपने सदाबहार दोस्त चीन से झटका लगा है। चीन ने इस मुद्दे को द्विपक्षीय समझौतों के आधार पर सुलझाने की बात कही है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार के बीच आयोजित 7वीं रणनीतिक वार्ता के समापन पर जारी संयुक्त बयान में कश्मीर का भी जिक्र है। लेकिन पाकिस्तान के पक्ष में चीन ने कोई एकतरफा बात नहीं कही।</p>
<p>जम्मू और कश्मीर का विवाद इतिहास की देन: इस बयान में कहा गया है कि पाकिस्तानी पक्ष ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी स्थिति और नवीनतम घटनाक्रमों के बारे में चीनी पक्ष को जानकारी दी। इस पर चीन ने अपना रुख दोहराया कि जम्मू और कश्मीर का विवाद इतिहास की देन है। उसने कहा कि संघर्ष की सियासत छोड़ कर दोनों देशों को जनता की समृद्धि और आर्थिक विकास पर ध्यान देना चाहिए। इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार उचित और शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए। संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने समानता और पारस्परिक लाभ के सिद्धांत के तहत सीमा पार जल संसाधन सहयोग करने की जरूरत बताई। अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों को पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।</p>
<p><strong>सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना जरूरी</strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के महत्व को दोहराया गया है। लेकिन भारत की ओर से सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के निर्णय का कोई जिक्र नहीं किया गया है। पहलगाम हमले के भारत ने इस जल संधि को स्थगित कर दिया था। कुल मिलाकर, चीन ने संतुलित रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को कश्मीर पर द्विपक्षीय समाधान का संदेश दिया। चीन ने इस मसले पर पाकिस्तान को समर्थन देने से साफ इनकार कर उस का मनोबल तोड़ा है। चीन ने कहा कि भारत पाकिस्तान के सम्बंध ऐतिहासिक है। इसी तरह कश्मीर समस्या भी इतिहास की देन है। इसे ये दोनों देश ही मिल कर सुलझा सकते हैं। इसमें किसी तीसरे पक्ष की दखलंदाजी का कोई मतलब नहीं है। </p>
<p><strong>सैनिक होड़ से आर्थिक प्रगति बाधित</strong></p>
<p>उसने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों उसके मित्र हैं और वह चाहता है कि ये देश अपनी क्षमता और संसाधन का उपयोग अपनी जनता की आर्थिक उन्नति एवं आधारभूत ढांचे के विकास पर करें। सैनिक होड़ में अंधाधुंध संसाधन झोंकने से कई बार आर्थिक प्रगति बाधित होती है। अत: उन्हें शांतिपूर्ण उपायों से वार्ता के द्वारा कश्मीर समस्या का हल ढूंढ़ना चाहिए और विवाद एवं संघर्ष से दूर हो जाना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 11:23:59 +0530</pubDate>
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