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                <title>Conflict Resolution - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Conflict Resolution RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का आरोप : इस्लामाबाद में 'सहमति' के बहुत करीब होने के बावजूद नई शर्तों और प्रतिबंधों का करना पड़ा सामना, वार्ता विफल के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि 'सहमति' के करीब होने के बावजूद अमेरिका ने नई शर्तें और प्रतिबंध थोप दिए। अराघची ने चेतावनी दी कि शत्रुता से केवल शत्रुता ही पैदा होती है और अमेरिका ने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-abbas-araghchi-alleged-that-despite-being-very/article-150221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/abbas-araghchi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा है कि 'बदलती शर्तों और प्रतिबंधों' को हमारे सामने रखा गया। अब्बास अराघची ने सोमवार को 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में कहा, "वार्ता के दौरान सहमति के बहुत करीब होने के बावजूद बदलती शर्तों और प्रतिबंधों को हमारे समक्ष लाया गया।" अब्बास अराघची ने एक अन्य पोस्ट में कहा, "कोई सबक नहीं सीखा गया। सद्भावना से सद्भावना पैदा होती है और शत्रुता से शत्रुता।"</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि 47 वर्षों में उच्चतम स्तर की गंभीर वार्ता में, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए नेक नीयत के साथ अमेरिका के साथ बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद सहमति पत्र' से केवल कुछ ही दूर थे, तो हमें बदलती शर्तों और प्रतिबंधों सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:42:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>युद्धविराम शुरू होने के बाद से किसी भी देश पर कोई मिसाइल हमला नहीं, ड्रोन हमलों के लिए अमेरिका जिम्मेदार : आईआरजीसी</title>
                                    <description><![CDATA[IRGC ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम शुरू होने के बाद से उन्होंने कोई मिसाइल हमला नहीं किया। ईरान ने हालिया ड्रोन हमलों के लिए इजरायल और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। इस्लामाबाद वार्ता से पहले तेहरान ने शांति की प्रतिबद्धता दोहराई है, हालांकि लेबनान पर इजरायली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/no-missile-attack-on-any-country-since-the-ceasefire-started/article-149923"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/irgc2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम शुरू होने के बाद से किसी भी देश पर मिसाइलें नहीं दागी गईं। अल जजीरा ने यह जानकारी दी। आईआरजीसी ने कहा कि उसकी सेनाओं ने "युद्धविराम के बाद अब तक किसी भी देश पर कोई मिसाइल नहीं दागी है।" बयान में कहा गया कि ड्रोन हमलों की जो भी खबरें आ रही हैं, वे 'निस्संदेह यहूदी दुश्मन या अमेरिका का काम हैं।'</p>
<p>मंगलवार रात को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ दो सप्ताह के द्विपक्षीय युद्धविराम की घोषणा की थी और इस बात की पुष्टि की थी कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत हो गया है। ईरानी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इसके बाद संकेत दिया कि ईरान शुक्रवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करेगा। ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कहा कि तेहरान पाकिस्तान में अमेरिका के साथ बातचीत को आगे बढ़ा रहा है और उम्मीद करता है कि अमेरिका भी वैसा ही करेगा।</p>
<p>इजरायली लड़ाकू विमानों और तोपखाने ने दक्षिणी लेबनान में एक दर्जन से अधिक बस्तियों को निशाना बनाया, जिसमें टायर शहर भी शामिल था। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि लेबनान पर इजरायली हमलों को रोकना अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं है। ईरान ने हालांकि इन हमलों को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन माना।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:16:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का ऐलान : इज़रायल जल्द शुरू करेगा लेबनान के साथ सीधी शांति वार्ता, लेबनानी हमले में 300 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ जल्द सीधी शांति वार्ता शुरू करने की घोषणा की है। भीषण हवाई हमलों और 300 मौतों के बाद उपजे तनाव के बीच, इस कदम को अमेरिका-ईरान युद्धविराम बचाने की कोशिश माना जा रहा है। इज़रायल ने स्पष्ट किया कि शांति प्रक्रिया को कायम रखने के लिए कूटनीतिक रास्ते खुले हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-benjamin-netanyahu-announces-israel-will-soon-start-direct-peace/article-149814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/natnahu.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इज़रायल लेबनान के साथ "जितनी जल्दी हो सके" सीधी शांति वार्ता शुरू करेगा, जिससे अमेरिका-ईरान के बीच हुई नाज़ुक युद्धविराम संधि को कायम रहने का मौका मिलेगा। इज़रायली मीडिया के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को यह घोषणा की। इज़रायली वायु सेना द्वारा लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर हमला किए जाने के बाद यह नाज़ुक शांति प्रक्रिया अधर में लटक गई थी। अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार इज़रायली हमले में लगभग 300 लोग मारे गए थे। हिज़्बुल्लाह पर इज़रायली हमलों के बाद ईरान ने चेतावनी दी थी कि इन हमलों ने बातचीत को "बेमानी" बना दिया है।</p>
<p>इस बात को लेकर युद्धविराम संधि संकट में थी कि क्या लेबनान भी इन वार्ताओं का एक विषय है। जहाँ ईरान ने कहा कि वह इन वार्ताओं का हिस्सा है, वहीं इज़रायल और अमेरिका ने इससे इनकार कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:31:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान के तीन-सूत्री उल्लंघन के दावों पर वेंस का बड़ा बयान : हमेशा पेचीदा होते हैं युद्धविराम, लेबनान हवाई हमलों में 254 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के आरोपों पर कहा कि युद्धविराम की प्रक्रिया अक्सर अव्यवस्थित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों का लक्ष्य बमबारी रोकना है। वेंस ने ईरान के यूरेनियम भंडार पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका दावों के बजाय ईरान के वास्तविक कार्यों पर ध्यान देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/vances-big-statement-on-irans-three-point-violation-claims-ceasefire-is/article-149782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jd-vance1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते के तीन बिंदुओं के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "युद्धविराम हमेशा पेचीदा होते हैं।" जेडी वेंस ने हंगरी से प्रस्थान से पहले संवाददाताओं से बातचीत में ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ के उस बयान पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने वॉशिंगटन पर युद्धविराम के तीन प्रावधानों के जानबूझकर उल्लंघन का आरोप लगाया था। वेंस ने कहा कि यदि ग़ालिबाफ़ के पास केवल तीन असहमति के बिंदु हैं, तो इसका अर्थ है कि काफी हद तक सहमति भी है।</p>
<p>जेडी वेंस ने कहा, "युद्धविराम हमेशा थोड़ा अव्यवस्थित होता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा के एक घंटे के भीतर ही ईरान ने पड़ोसी देशों पर कई मिसाइलें दागीं, जिसके बाद इज़रायल और कुछ खाड़ी अरब देशों ने जवाबी कार्रवाई की।" उन्होंने कहा, "यही युद्धविराम की प्रकृति है। कोई भी युद्धविराम बिना कुछ उतार-चढ़ाव के नहीं होता। हम स्पष्ट रूप से यह चाहते हैं कि बमबारी रुके। हम अपने सहयोगियों से भी बमबारी रोकने को कहते हैं और ईरान से भी यही अपेक्षा रखते हैं। हमें संकेत मिल रहे हैं कि स्थिति सही दिशा में जा रही है, लेकिन इसमें थोड़ा समय लगेगा।"</p>
<p>जेडी वेंस ने यह भी कहा कि उन्हें यह "दिलचस्प" लगा कि श्री ग़ालिबफ़ ने कहा कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के बड़े भंडार को छोड़ने के अपने "अधिकार" से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा, "हम इस बात की चिंता नहीं करते कि वे क्या करने का अधिकार होने का दावा करते हैं, बल्कि इस बात पर ध्यान देते हैं कि वे वास्तव में क्या करते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:26:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का किया स्वागत : पश्चिम एशिया में स्थाई शांति की जताई उम्मीद, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने का आग्रह</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का पुरजोर समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संवाद और कूटनीति ही स्थायी शांति का एकमात्र मार्ग है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक सुगमता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की बहाली पर विशेष बल दिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-welcomed-the-ceasefire-between-america-and-iran-expressed-hope/article-149542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुये युद्धविराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थाई शांति स्थापित होगी। विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम पर बुधवार को एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि भारत पहले से ही इस विवाद के संवाद और कूटनीति से समाधान पर जोर देता रहा है। मंत्रालय ने कहा है, "हम संघर्ष विराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हम पहले भी लगातार कहते रहे हैं, तनाव में कमी, संवाद और कूटनीति ही संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के लिए आवश्यक हैं। इस संघर्ष ने पहले ही लोगों को अत्यधिक कष्ट पहुँचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापारिक नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की निर्वाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह बना रहेगा।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान ने बुधवार तड़के दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिका और इजरायल ने गत 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ हमलों की शुरुआत की थी। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में पश्चिम एशियाई देशों में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर हमले किए थे। इन हमलों में जान और माल का व्यापक नुकसान हुआ है। ईरान ने इन हमलों के विरोध में और होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाले तेल और गैस टैंकरों के संचालन को बाधित कर दिया था जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल एवं गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 16:39:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>क्या 48 घंटों में अमेरिका-ईरान में होने जा रहा सीजफायर? 45-दिनों के संभावित संघर्ष-विराम की शर्तों पर होगी चर्चा, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग तेज </title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच संघर्ष टालने के लिए दो-चरणीय योजना पर बातचीत जारी है। इसके तहत 45 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव है, ताकि 'होर्मुज जलडमरूमध्य' और परमाणु मुद्दों पर स्थायी समाधान निकल सके। हालांकि तनाव बरकरार है, लेकिन मध्यस्थों के जरिए विश्वास बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि युद्ध को समाप्त किया जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-there-going-to-be-a-ceasefire-between-america-and/article-149225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-casefire.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ संघर्ष को सुलझाने के लिए बनाई गयी दो-चरणों वाली योजना के पहले चरण के तौर पर 45 दिनों के संभावित युद्धविराम की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं।अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ट्रंप प्रशासन ने हाल के दिनों में ईरान के सामने कई प्रस्ताव रखे थे, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने अभी तक उनमें से किसी को भी स्वीकार नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक अगले 48 घंटों के भीतर दोनों पक्षों के बीच किसी समझौते की संभावना कम है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले सोशल मीडिया पर ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पुलों को मंगलवार को नष्ट करने की धमकी दी है और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक दो-चरणों वाले समझौते पर फिलहाल चर्चा चल रही है। पहले चरण में 45 दिनों का युद्धविराम शामिल है, जिसके दौरान अंतिम शांति की शर्तों पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों ने कहा कि यदि पक्षों को बातचीत के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है, तो इस युद्धविराम को बढ़ाया भी जा सकता है। दूसरे चरण में युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप देना शामिल है।</p>
<p>सूत्रों के हवाले से कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने और ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होने जैसे मुद्दों को केवल एक अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ही सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा मध्यस्थ अमेरिका के लिए विश्वास-बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं और उन कदमों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें अमेरिका ईरान की कुछ मांगों को पूरा करने के लिए उठा सकता है। उधर, ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत कर रहा है और मंगलवार तक कोई समझौता हो सकता है। उन्होंने पहले कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक बातचीत हुई है।</p>
<p>वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने सीधे बातचीत से इनकार कर दिया था, लेकिन कहा था कि ईरान को मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका की ओर से संदेश मिले हैं कि वह संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करना चाहता है। गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में कई ठिकानों पर हमले शुरू किये थे, जिसमें तेहरान भी शामिल है। वहीं जवाबी कार्रवाई में ईरान इज़रायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 14:29:10 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम एशिया तनाव के बीच पाकिस्तानी पीएम ने की ईरानी राष्ट्रपति से टेलिफोन पर बात: अमेरिका-ईरान की मेजबानी का रखा प्रस्ताव, युद्ध समाप्त करने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की औपचारिक पेशकश की है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से वार्ता के बाद, पाकिस्तान ने निर्णायक संवाद के लिए मेजबान बनने को 'सम्मान' बताया। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-west-asia-tension-pakistani-pm-spoke-to-iranian-president/article-147795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pakistan3.png" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान। पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की है, ताकि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को समाप्त किया जा सके।</p>
<p>पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, अमेरिका और ईरान की सहमति के अधीन, पाकिस्तान सार्थक और निर्णायक बातचीत को सुगम बनाने तथा जारी संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए मेजबान बनने के लिए तैयार है और इसे अपने लिए सम्मान की बात मानता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र और उससे आगे शांति और स्थिरता के हित में पश्चिम एशिया के युद्ध को समाप्त करने के लिए जारी संवाद के प्रयासों का स्वागत करता है और उनका पूर्ण समर्थन करता है।  </p>
<p>पीएम शरीफ का यह प्रस्ताव उनके मंगलवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ हुई टेलीफोन और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक दार की उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ एक दिन पहले हुई बातचीत के बाद आया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 14:18:10 +0530</pubDate>
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                <title>यूक्रेन में शांति सेना: राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों का ऐलान, संघर्ष विराम के बाद अपने सैनिकों को भेजेंगे यूक्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन-रूस संघर्ष विराम के बाद शांति बनाए रखने हेतु हजारों सैनिक तैनात करने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सैनिक केवल निगरानी और पुनर्निर्माण में सहयोग करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/president-emmanuel-macron-announces-that-ukraine-will-send-its-troops/article-138740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/emmanuel-macron.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम होने के बाद वह यूक्रेन में शांति बरकरार रखने के लिये 'हजारों फ्रांसिसी सैनिक' तैनात कर सकते हैं। उन्होंने यहां मंगलवार को पश्चिमी और यूरोपीय देशों की एक बैठक के दौरान फ्रांस-2 टीवी चैनल के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि फ्रांस संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर होने के बाद रूस-यूक्रेन सीमा की देखरेख के लिये'अभियानों में हिस्सा लेगा।</p>
<p>उन्होंने यह भी साफ किया कि फ्रांसिसी सैनिक यूक्रेन में युद्ध के लिये नहीं जायेंगे। फ्रांस की भूमिका यूक्रेनी सेना के पुनर्निमाण तक ही सीमित होगी। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन, यूरोपीय देशों और अमेरिका के बीच बातचीत हुई है और यही देश फैसला करेंगे कि सीमा का उल्लंघन हुआ है या नहीं। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, 30 पश्चिमी और यूरोपीय देशों ने मंगलवार को यहां एक बैठक में इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य का कोई भी शांति समझौता यूक्रेन के लिये मजबूत और बाध्य सुरक्षा गारंटियों के बिना नहीं होगा। सभी देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे संघर्ष विराम होने के बाद वे एक राजनीतिक और कानूनी तौर पर बाध्य गारंटियों की व्यवस्था लागू करने के लिये तैयार हैं। इसमें अमेरिका के नेतृत्व वाले संघर्ष विराम की निगरानी व्यवस्था में हिस्सा लेना, यूक्रेन को सैन्य समर्थन देना और दीर्घकालिक रक्षा सहयोग शामिल होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 15:21:23 +0530</pubDate>
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