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                <title>कॉलेजों में इस बार दो माह पहले ही शुरू हो जाएगी पढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवेशित विद्यार्थियों की सूची 8 सितम्बर को जारी की जाएगी और 11 सितम्बर से कक्षाएं शुरू होंगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-time-studies-will-start-in-colleges-two-months-in-advance/article-55342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/collego-me-is-br-2-maah-phle-hi-shuru-ho-jayegi-pdhayi...kota-news-24-08-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के सरकारी कॉलेजों में इस बार पिछले साल के मुकाबले पीजी प्रिवियस की कक्षाएं ढाई माह पहले ही शुरू हो जाएंगी। जबकि, गत वर्ष नवम्बर माह तक एडमिशन प्रक्रिया ही चली थी। शैक्षणिक सत्र को पटरी पर लाने के लिए कॉलेज आयुक्तालय ने कवायद करते हुए ऑनलाइन प्रवेश का संशोधित शेड्यूल जारी कर दिया है। जिसके मुताबिक महाविद्यालयों में 11 सितम्बर से पीजी प्रिवियस की पढ़ाई शुरू करवा दी जाएगी। दरअसल, कोरोना के बाद से ही कॉलेजों में पीजी प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो रही  थी। कोविड का प्रभाव कम होेने पर कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय वापस सेशन को पटरी पर लाने का प्रयास कर रहा है। जिसके चलते आयुक्तालय ने शिक्षा सत्र 2023-24 में पीजी प्रिवियस में प्रवेश का विस्तृत शेड््यूल घोषित कर दिया है। समय पर पढ़ाई शुरू होने से विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी का र्प्याप्त समय मिल सकेगा। वहीं, शिक्षक भी समय पर सिलेबस पूरा करवा सकेंगे।</p>
<p><strong>यह रहेगा संशोधित शेड्यूल</strong><br />पीजी प्रिवियस में प्रवेश के लिए कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय द्वारा विस्तृत शेड्यूल जारी कर दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। प्रवेश के लिए अभ्यर्थी अब 25 अगस्त तक आवेदन कर सकते हैं। जबकि, पूर्व में आवेदन की अंतिम तिथि 21 अगस्त निर्धारित थी। ऑनलाइन आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन 28 अगस्त तक किया जाएगा। अंतिम वरियता व वेटिंग सूची 31 अगस्त को प्रकाशित होगी। 5 सितम्बर तक विद्यार्थियों को मूल दस्तावेजों की जांच करवाकर 6 सितम्बर तक शुल्क जमा करवाना होगा। प्रवेशित विद्यार्थियों की सूची 8 सितम्बर को जारी की जाएगी और 11 सितम्बर से कक्षाएं शुरू होंगी। </p>
<p><strong>श्रेणीवार रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया 8 सितम्बर से </strong><br />पीजी प्रिवियस की श्रेणीवार रिक्त रहने वाली सीटोें पर प्रवेश की प्रक्रिया 8 सितम्बर से शुरू की जाएगी। श्रेणीवार रिक्त सीटों पर 14 सितम्बर तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। प्रतीक्षा सूची का प्रकाशिन 18 सितम्बर को होगा। विद्यार्थियों को 23 सितम्बर तक ऑनलाइन शुल्क जमा करना होगा। प्रवेशित विद्यार्थियों की सूची 26 सितम्बर को घोषित की जाएगी।</p>
<p><strong>परीक्षा तैयारी को मिलेगा र्प्याप्त समय</strong><br />राजकीय कला महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष मनीष सामरिया ने बताया कि सेमेस्टर सिस्टम के तहत प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के लिए 180 दिन कक्षाएं लगना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को तैयारी का र्प्याप्त समय मिल सके।  आयुक्तालय द्वारा इस बार जल्दी ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाने से न केवल विद्यार्थियों की कक्षाएं समय पर लगेगी बल्कि बेपटरी हो रहा शैक्षणिक सत्र भी पटरी पर आ सकेगा। गत वर्ष सत्र में नवम्बर तक एडमिशन प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने से स्टूडेंट्स को परीक्षा तैयारी का समय नहीं मिल पाया था। जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों से गुजरना पड़ा था।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कॉलेज आयुक्तालय की ओर से पीजी प्रिवीयस में प्रवेश का विस्तृत शेड्यूल जारी कर दिया है। वहीं, पीजी प्रिवियस में प्रवेश के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 अगस्त तक बढ़ा दी है। इससे जो विद्यार्थी आवेदन करने से चूक गए थे, उन्हें दाखिले के लिए आवेदन करने का मौका मिल गया है। <br /><strong>- डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्य, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Aug 2023 14:29:17 +0530</pubDate>
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                <title>बीसीआई की अनुमति के फेर में अटकी राजकीय विधि महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया, उलझन में छात्र</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य के 18 राजकीय विधि महाविद्यालयों के प्रथम वर्ष में अभी तक एलएलबी फर्स्ट ईयर के प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/admission-process-in-government-law-colleges-stuck-due-to-bci-s-permission--students-confused/article-53970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/bci-ki-anumati-k-fer-me-atki-rajkye-vidhi-mahavidhyalayo-me-pravesh-prakriya,-uljhan-me-chatra...kota-news-07-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुमति नहीं मिलने से प्रदेश के 18 राजकीय विधि महाविद्यालयों में एडमिशन प्रक्रिया अटकी हुई है। एलएलबी प्रथम वर्ष में एडमिशन प्रोसेज शुरू नहीं हो पा रहा। जबकि, अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय ने फर्स्ट ईयर में एडमिशन की अंतिम तिथि 30 अगस्त निर्धारित की है। वहीं, कोटा विश्वविद्यालय द्वारा एक माह पूर्व ही यूजी व पीजी फाइनल ईयर के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी राजकीय विधि महाविद्यालय कोटा में एलएलबी प्रथम वर्ष में एडमिशन प्रोसेज शुरू होने के इंतजार में है। मोदी लॉ कॉलेज की प्राचार्य क्षिप्रा गुप्ता ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा प्रत्येक विधि महाविद्यालय में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या का निर्धारण किया जाता है। बीसीआई द्वारा मान्यता दिए जाते समय शिक्षको की संख्या व योग्यता, संसाधनों, पुस्तकालय व अन्य बिंदुओं पर विचार किया जाता है। डिपार्टमेंट ऑफ कॉलेज एजुकेशन द्वारा एनओसी,  विश्वविद्यालय द्वारा संबद्धता व बीसीआई से मान्यता प्राप्त कर लेने के बाद ही प्रतिवर्ष प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ की जाती है। </p>
<p><strong>पिछले साल भी देरी से शुरू हुई थी प्रवेश प्रक्रिया</strong><br />राज्य के 18 राजकीय विधि महाविद्यालयों के प्रथम वर्ष में अभी तक एलएलबी फर्स्ट ईयर के प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। कॉलेजों को बार काउंसिल आॅफ इंडिया की मंजूरी मिलने का इंतजार है। पिछले साल भी प्रवेश की अनुमति विलम्ब से मिलने के कारण एलएलबी फर्स्ट इयर का सेशन प्रभावित हुआ था। यही स्थिति इस साल भी बनी हुई है। गत वर्ष राजकीय विधि महाविद्यालयों में 16 अगस्त से प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई थी। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी में एडमिशन के इंतजार में हैं। </p>
<p><strong>मेरिट के आधार पर होगा एडमिशन</strong><br />जानकारी के अनुसार राजकीय विधि महाविद्यालय कोटा में एलएलबी फर्स्ट ईयर में 120 सीटें निर्धारित हैं। जिनमें 80 प्रतिशत सीटों पर दाखिला यजी व 20 प्रतिशत सीटों पर पीजी के आधार पर एडमिशन दिए जाते हैं। जनरल, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के विद्यार्थियों के लिए 45 प्रतिशत तथा एससी-एसटी वर्ग में 42 प्रतिशत अंक अर्जित करने वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे। एडमिशन मेरिट के आधार होगा। </p>
<p><strong>प्रथम वर्ष में बढ़े सीटें, खुले पीजी संकाय</strong><br />राजकीय विधि महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष गौरव मीणा ने बताया कि पहले कॉलेज में 2 कमरे थे, जिसकी वजह से प्रथम वर्ष में 120 सीटें ही मिल सकी थी। लेकिन, वर्तमान में 6 कक्षा-कक्ष हैं। ऐसे में कॉलेज प्रशासन को फर्स्ट ईयर की सीटें बढ़वाकर 240 करने और पीजी संकाय शुरू करने के प्रयास करने चाहिए। </p>
<p><strong>एडमिशन के इंतजार में विद्यार्थी </strong><br />राजकीय महाविद्यालयों में यूजी व फाइनल ईयर का परीक्षा परिणाम गत माह जारी हो चुका है। ऐसे में संभाग से बड़ी संख्या में विद्यार्थी एलएलबी फस्ट ईयर में एडमिशन लेना चाहते हैं लेकिन विधि महाविद्यालय को बीसीआई से मंजूरी नहीं मिलने के कारण प्रोसेज शुरू नहीं हो पा रहा। गवर्नमेंट कॉलेज आटर्स के छात्र अक्षत, प्रियांश व मेघा का कहना है, बीए फाइनल का परिणाम जारी होने के बाद से ही एलएलबी प्रथम वर्ष में दाखिला लेने का इंतजार कर रहे हैं। इसके लिए पांच से छह बार विधि महाविद्यालय भी गए लेकिन वहां पता लगा कि अभी तक बीसीआई से एडमिशन प्रोसेज शुरू करने की अनुमति नहीं मिली। दो माह से इंतजार कर रहे और कॉलेज आने जाने में समय खराब हो रहा है। कॉलेज प्रशासन को इसके लिए जल्द प्रयास करना चाहिए।</p>
<p><strong>हर साल 500 से 600 आते हैं आवेदन </strong><br />गौरव ने बताया कि गवर्नमेंट लॉ कॉलेज संभाग का एकमात्र महाविद्यालय होने से यहां हाड़ौतीभर से बड़ी संख्या में छात्र एलएलबी में दाखिले के लिए आवेदन करते हैं। हर वर्ष 500 से 600 छात्र आवेदन करते हैं। लेकिन, प्रथम वर्ष में 120 ही सीटें होने से बड़ी संख्या में छात्र एडमिशन से वंचित रह जाते हैं। </p>
<p>एलएलबी प्रथम वर्ष में एडमिशन की प्रक्रिया बीसीआई से अनुमति मिलने के बाद शुरू की जाएगी। अनुमति लेने के प्रयास जारी है। <br /><strong>-चंद्रजीत सिंह, प्राचार्य, राजकीय विधि महाविद्यालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 16:32:59 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी जांच प्रक्रिया के इंतजार में दब गई उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[ खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए जिले के करीब डेढ़ लाख से अधिक लाभार्थी तीन माह से इंतजार कर रहे हैं। नए लाभार्थियों ने ईमित्रों के माध्यम से नाम जुड़वाने के लिए आॅनलाइन आवेदन किया था। अब तक आवेदनों फॉर्मो की जांच नहीं हो पाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-government-investigation-process-buried-hope/article-19983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/uit-ki-zameen-par-atikraman..kota-news-22.8.20221.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए जिले के करीब डेढ़ लाख से अधिक लाभार्थी तीन माह से इंतजार कर रहे हैं। नए लाभार्थियों ने ईमित्रों के माध्यम से नाम जुड़वाने के लिए आॅनलाइन आवेदन किया था। अब तक आवेदनों फॉर्मो की जांच नहीं हो पाई है। इस कारण लाभार्थी सरकारी राशन के लिए तरस रहे हैं। कोटा जिले में काफी संख्या में लोग पात्र होने के बावजूद खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ वंचित हो रहे थे। ऐसे में लोगों को योजना का लाभ देने के लिए करीब दो साल बाद अप्रेल 2022 में खाद्य सुरक्षा का पोर्टल खोला गया था। इसकी अवधि केवल 12 दिन ही होने से हजारों लोग जानकारी के अभाव में पोर्टल के माध्यम से आवेदन नहीं कर पाए थे। इसके बाद 28 मई तक पोर्टल खोलकर आॅनलाइन आवेदन लिए गए। इस अवधि में कोटा जिले के लगभग डेढ़ लाख लोगों ने आॅनलाइन आवेदन किए थे। आवेदन फार्म जमा हुए तीन माह का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इनकी जांच नहीं हो पाई है। इस कारण लाभार्थी परिवारों को अभी तक सरकारी राशन नहीं मिल पाया है। रोजाना लगा रहे चक्कर आॅनलाइन आवेदन जमा करवाने के बाद प्राथी ईमित्र केन्द्रों पर रोजाना चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। कई लोग रसद विभाग कार्यालय में जानकारी करने पहुंचते हैं। इसके बावजूद नाम जुड़ने के सम्बंध में कोई जवाब नहीं मिल रहा है। इससे पात्र लोगों को बाजार से महंगी दर पर राशन सामग्री खरीदनी पड़ रही है। इस सम्बंध में ईमित्र संचालकों का कहना है कि उनके पास खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जोड़ने की कोई जानकारी रसद विभाग से नहीं मिल रही है। अभी तक आवेदन फॉर्मो की जांच नहीं हो पाई है। तो इनका नहीं बनेगा कार्ड नए आवेदनों में यदि किसी परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपए से ज्यादा है तो वह खाद्य सुरक्षा योजना में चयन के लिए अपात्र होगा। सरकार ने अपात्रता के लिए छह श्रेणियां निर्धारित की है। इसमें आवेदक परिवार का कोई भी सदस्य आयकरदाता होने, परिवार का सदस्य सरकारी, अर्द्धसरकारी, स्वायत्तशासी संस्था में नियमित कर्मचारी होने, एक लाख रुपए से ज्यादा पेंशन, चौपहिया वाहन, नगर परिषद क्षेत्र में एक हजार वर्ग फीट और नगर पालिका क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट पक्का आवासीय या व्यावसायिक परिसर और ग्रामीण क्षेत्र में 2000 वर्ग फीट से बड़ा मकान होने पर अपात्र माना जाएगा। यह है अधिनियम राज्य में राष्टÑीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2 अक्टूबर 2013 से लागू किया गया था। पात्र परिवारों का चयन राज्य सरकार करती है। राज्य में राष्टÑीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अधिसूचित मापदंडों के अनुरूप पात्र परिवारों का चयन 32 समावेशन श्रेणियों और 7 निष्कासन श्रेणियों के मापंदडों के आधार पर अपील प्रक्रिया से किया जाता है। राज्य सरकार के आवेदन फॉर्मो की जांच के सम्बंध में अभी तक कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने के बाद फॉर्मो की जांच का काम शुरू कर दिया जाएगा। - नीलकमल, प्रवर्तन निरीक्षक रसद विभाग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:45:52 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश के 450 सरकारी कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू, पहली बार ऑनलाइन आवेदन </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के करीब 450 सरकारी कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई है। पहली बार पूरी प्रक्रिया आॅनलाइन हो रही है। यही नहीं इस बार एडमिशन राजस्थान उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी नई एडमिशन पॉलिसी के आधार पर होंगे, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि इस बार एडमिशन परसेंटाइल फॉमूर्ला के बजाए परसेंटेज के आधार पर होंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/admission-process-started-in-450-government-colleges-of-the-state/article-13132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/onlinen.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> प्रदेश के करीब 450 सरकारी कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई है। पहली बार पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो रही है। यही नहीं इस बार एडमिशन राजस्थान उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी नई एडमिशन पॉलिसी के आधार पर होंगे, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि इस बार एडमिशन परसेंटाइल फॉमूर्ला के बजाए परसेंटेज के आधार पर होंगे। राज्य के सरकारी कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया से शुरू हो गई है। विद्यार्थी 9 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। सरकारी कॉलेजों की करीब 5 लाख 80 हजार सीटों पर ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।</p>
<p><br />यह होगी कवायद<br />वर्तमान में राजस्थान उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार 11 जुलाई तक आवेदन पत्रों का सत्यापन किया जाएगा। अंतिम वरीयता और प्रतीक्षा सूची का प्रकाशन 13 जुलाई को होगा। 18 जुलाई को कॉलेजों में दस्तावेजों का सत्यापन होगा। 19 जुलाई को विद्यार्थियों की प्रथम सूची जारी होगी। उसी दिन विद्यार्थियों का वर्ग निर्धारण और विषय आवंटन किया जाएगा। 20 जुलाई से महाविद्यालय में ऑफलाइन या फिर ऑनलाइन स्नातक प्रथम वर्ष का शिक्षण कार्य शुरू किया जाएगा।</p>
<p><br />आगे भी बढ़ सकती है तिथि<br />कोविड काल की ही तरह इस साल भी परसेंटेज के आधार पर ही कैंडिडेट्स को एडमिशन दिया जाएगा। इस बार कई बोर्ड के नतीजे देरी से घोषित हुए हैं और सेंट्रल बोर्ड के नतीजे अभी जारी नहीं हुए हैं, ऑनलाइन आवेदन की तिथि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 12:24:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>अलर्ट: हो न जाए शावकों को जन्म देने की प्रक्रिया प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[ मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की सल्तनत ढाई साल से अपने सुल्तान का इंतजार कर रही है।  सुल्तान की गैरमौजूदगी में आमा घाटी की रानी टाइग्रेस एमटी-4 ने जंगल की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। विशेषज्ञों के अनुसार  लगातार नर बाघ से दूर रहने के कारण टाइग्रेस की फर्र्टिलिटी प्रभावित हो सकती है। लम्बे समय से टाइग्रेस अकेली है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/do-not-affect-the-process-of-giving-birth-to-cubs/article-12988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/alert--ho-na-jaaaye-shavako-ko-janam-dene-ki-prakriya-prabhavit-kota-news-25.6.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की सल्तनत ढाई साल से अपने सुल्तान का इंतजार कर रही है।  सुल्तान की गैरमौजूदगी में आमा घाटी की रानी टाइग्रेस एमटी-4 ने जंगल की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। विशेषज्ञों के अनुसार  लगातार नर बाघ से दूर रहने के कारण टाइग्रेस की फर्र्टिलिटी प्रभावित हो सकती है। लम्बे समय से टाइग्रेस अकेली है। अकेले रहने से तनाव बढ़ रहा है। उग्रता हावी होने पर वह नर बाघ को स्वीकार करेगी अथवा नहीं यह भी बड़ा सवाल है।  बाधिन की प्रजन्न क्षमता पर विपरीत असर पड़ने से साल में एक बार होने वाली मदचक्र (एस्ट्रस सायकल) व्यर्थ जाने से गर्भ धारण पर  विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका बन रही है।  दरअसल, 23 जुलाई 2020 को बाघ एमटी-3 की मौत के बाद से जंगल की सरकार बिना राजा के चल रही है। हालांकि, वन विभाग द्वारा मुकुंदरा में टाइगर लाने के प्रयास जारी हैं। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। यहां प्री-बेस बढ़ाने के लिए हाल ही में घना नेशनल पार्क से 184 चीतल लाए गए हैं। साथ जोधपुर के माचिया व उयदपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से 64 प्री-बेस लाए जाएंगे, जिसके आदेश जारी हो चुके हैं। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के मुताबिक अभी प्री-मानसून चल रहा है। परिस्थितियां अनुकूल होते ही प्रीबेस मुकुंदरा में शिफ्ट किए जाएंगे। <br /><br /><strong>जंगल में 14 तो चिड़ियाघर में 18 साल रहती टाइगर की उम्र</strong><br />मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के सहायक वन संरक्षक आरएस भंडारी के अनुसार जंगल में बाघ की अधितम उम्र 13 से 14 साल रहती है, जबकि चिड़ियाघर में 18 से 20 वर्ष रहती है। जंगल में उन्हें कई तरह के संघर्षों का सामना करना पड़ता है। वहीं, चिड़ियाघरों में वे लगातार निगरानी में रहते हैं। मौसम के हिसाब से उनकी डाइट में बदलाव किया जाता है।     <br /><br /><strong>रणथम्भौर से मुकुंदरा आएंगे बाघ, प्रक्रिया जारी</strong><br />मुकुंदरा में बाघ लाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। विभाग ने इसके लिए जरूरी तैयारियां भी पूरी कर ली है। <br />अधिकारियों के मुताबिक परिस्थतियां अनुकूल होने पर संबंधित अधिकारियों के बीच सामंजस्य स्थापित कर जल्द ही बाघों को मुकुंदरा में शिफ्ट करने की कवायद शुरू की जाएगी। <br /><br /><strong>एमटी-3 ने खुद किया अपनी सल्तनत का फैसला</strong><br />टाइगर एमटी-3 की कहानी दूसरों से बिलकुल अलग है। मुकुंदरा में बसने का चुनाव खुद टी- 98 ने किया। यह बाघ रणथम्भौर से निकलकर सुल्तानपुर के रास्ते मुकुंदरा पहुंचा था। एनक्लोजर के बाहर भी बाघ के हलचल की आहट मिली तो टाइगर वॉच टीम ने एनक्लोजर के बाहर कैमरे लगा बाघ को ट्रैक व मॉनीटरिंग करना शुरू किया। आखिरकार 10 फरवरी 2019 को एनक्लोजर के बाहर लगे कैमरा ट्रैप में उसकी फोटो कैद हो गई। यह टाइगर मुकुंदरा और रणथम्भौर के बीच प्राकृतिक बाघ गलियारे से होते हुए कई दिन सुल्तानपुर के जंगलों में रुका। इसके बाद अपने आप यहां पहुंचा। बाद में उसे मुकुन्दरा के तीसरे बाघ के रूप में स्वीकार करते हुए एमटी-3 नाम दिया गया।<br /><br /><strong>मुकुंदरा में कब कौन कहां से आया</strong><br /><strong>मुकुंदरा का पहला राजा मुकुन्दराज उर्फ एमटी-1</strong><br />आज से पांच साल पहले मुकुंदरा की वादियों में बाघ-बाघिनों के आने का सिलसिला शुरू हुआ था।  वर्षों के इंतजार के बाद 3 अप्रेल 2018 को मुकुंदरा को पहला बाघ टी-91 के रूप में मिला। निर्धारित तारीख को वन विभाग की एक टीम ने बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में टी-91 को ट्रेंकुलाइज किया और गले में रेडियो कॉलर लगाकर दरा के एनक्लोजर में छोड़ दिया। बाघ को मुकुंदरा आने पर मुकुन्दराज नाम मिला, जिसे बाद में एमटी-1 के नाम से जाना गया। फिलहाल वर्तमान में बाघ लापता है। <br /><br /><strong>यूं हुई रानी टाइग्रेस एमटी-2 की एंट्री</strong><br />रणथम्भौर की चार बाघिनों टी-102, टी-104, टी-105 और टी-106 को मुकुंदरा के लिए चिन्हित किया गया था। ये वो बाघिनें थी जो अपना नया क्षेत्र बनाने की कोशिश कर रही थीं या रणथम्भौर से निकलने की कगार पर थीं।  जिनमें से टी-106 को पुनर्वास के लिए चुना गया और 18 दिसम्बर 2018 को ट्रेंकुलाइज कर मुकुंदरा लाया गया, जहां इसका नाम एमटी-2 रखा गया।  <br /><br /><strong>रणथम्भौर की आमा घाटी से आई थी टाइग्रेस एमटी-4</strong><br />एमटी-3 के बाद मुकुन्दरा को एक और बाघिन टी-83, 12 अप्रेल 2019  को मिली। इसे रणथम्भौर के आमा घाटी से लाकर मुकुंदरा के एनक्लोजर में छोड़ा गया था, जिसे बाद में एमटी-4 के नाम से जाना गया।<br /><br /><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br /><strong>प्रजन्न क्षमता व गर्भ धारण पर विपरीत असर</strong><br />मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बाघिन एमटी-4 करीब तीन साल से अकेली है। ऐसे में प्रतिरोधी या साथी न होने से उसके स्वभाव में बदलाव आएगा, जिससे उसका व्यवहार उग्र होगा। वहीं, बाधिन की प्रजन्न क्षमता पर विपरीत असर पड़ सकता है। साल में एक बार होने वाली मदचक्र (एस्ट्रस सायकल) व्यर्थ जाने से गर्भ धारण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहेगी। <br /><strong>- कृष्नेंद्र सिंह नामा, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट व रिसर्च सुपरवाइजर</strong><br /><br />मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में रणथम्भौर से बाघ लाए जाएंगे, इसकी प्रक्रिया जारी है। मौसम के मध्यनजर परिस्थितियां अनुकूल होने पर संबंधित अधिकारियों में सामांजस्य बिठाकर इसकी कवायद तेज की जाएगी। <br /><strong>- आरएस भंडारी, सहायक वन संरक्षक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 12:42:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टूटी आस,हजारों बेरोजगारों के मंसूबों पर फिरा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली शहरी रोजगार गारंटी योजना  में संविदा कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया को स्थगित किया गया। शुक्रवार को भी सुबह से शाम तक निगम कार्यालय में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की आस में आवेदन जमा करवाने आए। लेकिन वहां चस्पा आदेश देखकर निराश होकर लौट गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/broken-hope--the-plans-of-thousands-of-unemployed-turned-water/article-12659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tuti-aas-hazaro-logo-ke-mansubo-par-fira-pani.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । राज्य के बेरोजगारों के मंसूबों पर एक बार फिर उस समय पानी फिर गया जब राज्य  सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली शहरी रोजगार गारंटी योजना  में संविदा कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया को स्थगित किया गया। शुक्रवार को भी सुबह से शाम तक निगम कार्यालय में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की आस में आवेदन जमा करवाने आए। लेकिन वहां चस्पा आदेश देखकर निराश होकर लौट गए। राज्य सरकार द्वारा शहरी बेरोजगारों व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को 100 दिन का रोजगार दिया जाना है। मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना में इसी माह के शुरुआत में लागू करने की योजना था। सरकार व नगर निगम और जिला प्रशासन के स्तर पर इसकी सभी तैयारियां भी कर ली गई। <br /><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में जहां बेरोजगार व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग मजदूरी के लिए आवेदन कर रहे हैं। वहीं संविदा पर आधारित विभिन्न वर्गों के 75 पदों के लिए भी आॅफलाइन आवेदन करने वालों की संख्या काफीे अधिक रही। निगम कार्यालय में श्रमिक तो जॉब कार्ड बनवाने के लिए और युवा नौकरी के आवेदन  जमा करवाने के लिए जुटे रहे। लेकिन गुरुवार शाम को सरकार ने आदेश जारी कर संविदा भर्ती पर रोक लगा दी। इससे अब तक आवेदन चुके एक हजार से अधिक और आवेदन जमा करवाने के इंतजार में हजारों युवाओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया।  युवाओं ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि निगम में नीकरी के लिए आवेदन किया है तो उनका नम्बर आ जाएगा। लेकिन सरकार ने आवेदन की निर्धारित तिथि पूरी होने से पहले ही भर्ती स्थगित कर दी। इससे उनकी आस अधूरी रह गई। इधर नगर निगम कर्मचारियों ने बताया कि गुरुवार देर शाम को उन्हें आदेश मिला था। शुक्ववार को सुबह से ही जब लोग आवेदन फार्म लेने व जमा करवाने पहुंचे तो उन्हें मना करना पड़ा। बाद में  जिस खिड़की पर फार्म जमा हो रहे थे वहां आदेश की प्रति चस्पा की गई। उसके अलावा कई अन्य जगह पर आदेश चस्पा किया। उसके बाद भी लोगों को दिनभर मना करना पड़ा कि भर्ती प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है। <br /><br /><strong>योजना व भर्ती को लेकर असमंजस बना रहा</strong><br />इधर इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना व संविदा कर्मी भर्ती स्थगित को लेकर शुक्रवार को लोगों व निगम अधिकारियों में ही असमंजस बना रहा। निगम के कई अधिकारियों ने तो यहां तक कह दिया कि यह योजना ही स्थगित कर दी गई है। जबकि कई अधिकारियों का कहना है कि योजना में श्रमिको के आॅनलाइन आवेदन लेने व जॉब कार्ड बनाने का काम जारी रहेगा। वहीं संविदा कर्मी भर्ती प्रक्रिया स्घगित की है। हालत यह थी कि कोटा उत्तर निगम में जॉब कार्ड बनवाने आए लोगों को भी बैरग लौटा दिया। <br /><br /><strong>एक महीने से तैयारियों में जुटे थे निगम अधिकारी</strong><br />योजना को लागू करने का जैसे ही सरकार से आदेश आया। उसके बाद से ही निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस योजना की तैयारी में जुट गए। निगम अधिकारियों ने बताया कि श्रमिकों को रोजगार देने के लिए कार्य के तखमीने बनाने में जुटे रहे। उसके बाद मोहल्लों में जाकर लोगों को योजना में आवेदन करने के लिए प्रेरित किया।  इस कारण से दूसरा कोई काम ही नहीं कर सके। गौरतलब है कि योजना के तहत कोटा उत्तर में 18 करोड़ व कोटा दक्षिण में 20 करोड़ रुपए स्वीेकृत हुए हैं। <br /><br /><strong>राज्य में कोटा दक्षिण जॉब कार्ड बनाने में अव्वल</strong><br />इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना में श्रमिकों के जॉब कार्ड बनाने में कोटा दक्षिण नगर निगम राज्य में अव्वल है। अब तक कोटा दक्षिण निगम में सबसे अधिक 2764 जॉब कार्ड बना जा चुके हैं। जबकि मुख्यमंत्री के गृह जिले जोधपुर में 2433, जयपुर में 1721 और स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के विधानसभा वाले नगर निगम कोटा उत्तर में 1089 जॉब कार्ड बनाए गए हैं। <br /><br /><strong>भर्ती में कमियों के चलते की स्थगित</strong><br />सूत्रों के अनुसार संविदा कर्मी भर्ती प्रक्रिया में कई तरह की कमियां होने से उसे स्थगित किया गया है। एक तो सीधे पद पर संविदा के आधार पर भर्ती की जा रही थी। जिससे निर्धारित सय बाद संविदा कर्मी स्थायी नौकरी के लिए अदालत की शरण में जा सकते थे। साथ ही अग्निपथ का विरोध हो रहा है। ऐसे में उसी तर्ज पर इस योजना में भर्ती होना विवाद उत्पन्न कर सकती थी। सूत्रों के अनुसार अब सरकार इस योजना में प्लेसमेट एजेंसी के माध्यम से कर्मचारी लगा सकती है। <br /><br />शहरी रोजगार गारंटी योजना स्थगित नहीं हुई है। योजना में श्रमिकों का आॅनलाइन आवेदन व जॉब कार्ड बनाने का काम यथावत जारी है। जबकि संविदा पर आधारित भर्ती प्रक्रिया स्थगित की है। उसमें कुछ कमियां होने से ऐसा किया है। वहीं जॉब कार्ड बनाने में कोटा दक्षिण निगम रा’य में सबसे अव्वल है। अब तक प्राप्त आवेदन 3860 में से 2764 जॉब कार्ड बनाए जा चुके हैं। <br /><strong>- राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 15:42:16 +0530</pubDate>
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                <title> ग्राम पंचायत भंग, नगर पालिका गठन की कार्रवाई शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[यहां सरकार ने ग्राम पंचायत मण्डावर को भंग करते हुए नवगठित नगर पालिका की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने एक आदेश जारी किया गया। जिसमें स्वायत्त शासन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/village-panchayat-dissolved-process-of-formation-of-municipality-started/article-12223"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/14dausa-mnd01.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> मण्डावर।</strong> यहां सरकार ने ग्राम पंचायत मण्डावर को भंग करते हुए नवगठित नगर पालिका की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने एक आदेश जारी किया गया। जिसमें स्वायत्त शासन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई। जिसमें 20 मई 2022 के द्वारा भारत संविधान के अनु छेद 243 के खण्ड (2) एवं राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009, (2009 का अधिनियम संख्या 18) की धारा 3 की उप -धारा (1) के खण्ड (क) एवं उप-धारा (8) के खण्ड (ग) सपठित धारा 329 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एवं मानको को दृष्टिगत रखते हुए ग्राम पंचायत मण्डावर सम्पूर्ण क्षेत्र (जिला-दौसा) को चतुर्थ श्रेणी की नगर पालिका घोषित किया गया है। ग्राम पंचायत मण्डावर की विद्यमान सीमार्य ही नवगठित नगर पालिका मण्डावर (जिला-दौसा) की स्थानीय सीमायें रहेगी। अत:राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (1994 की अधिनियम संख्या 13) की धारा-101 में वर्णित प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्वायत्त शासन विभाग की अधिसूचना 20 मई 2022 की तारीख से ही नवगठित नगर पालिका मण्डावर में सम्मिलित ग्राम पंचायत मण्डावर पंचायत समिति महुवा जिला दौसा के सम्पूर्ण क्षेत्र को पंचायती राज संस्थाओं की सीमाओं से पृथक किया जाता है यानि ग्राम पंचायत मण्डावर को पंचायती राज विभाग ने भंग कर दिया गया है। जिसके बाद से नवगठित नगर पालिका की कार्रवाई शुरू हो गई है। जल्द ही नगर पालिका के चेयरमैन बनने के साथ ही नवगठित नगर पालिका के बोर्ड का गठन होगा। <br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 15:25:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सदन में सरकार का जवाब: जम्मू कश्मीर में 610 कश्मीरी प्रवासियों की संपत्तियां वापस मिली, बाकी की प्रक्रिया में</title>
                                    <description><![CDATA[कश्मीरी प्रवासियों की वापसी के लिए एक पोर्टल बनाया ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/government-s-reply-in-the-house--properties-of-610-kashmiri-migrants-got-back-in-jammu-and-kashmir--rest-in-process/article-7506"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/parliament-new-3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि जम्मू कश्मीर में 610 कश्मीरी प्रवासियों की परिसंपत्तियां वापस कर दी गयी है और बाकी की प्रक्रिया चल रही है। सदन में प्रश्नकाल के दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि राज्य में कश्मीरी प्रवासियों की वापसी के लिए एक पोर्टल बनाया गया है। इस पर कोई कश्मीरी प्रवासी अपनी छीनी गयी संपदा का ब्यौरा दर्ज करा सकता है। इस पर दर्ज मामलों की विस्तृत जांच की जाती है और परिसंपत्तियां वापस कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि अभी तक 610 कश्मीरी प्रवासियों की संपदायें वापस की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीरी प्रवासियों की परिसंपतियों का संरक्षक जिला मजिस्ट्रेट होता है और ये संपदा उसी की अधीन है।<br /><br />एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में बुनियादी ढ़ांचे का तेजी से विकास किया जा रहा। वर्ष 2023 तक 500 से अधिक आबादी वाली सभी बस्तियों को सड़क से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़कें बन जाने के कारण दूर दराज के इलाकों में जाना सुगम हुआ है। इसके अलावा यात्रा समय में कटौती हुई है। राय ने कहा कि राज्य में 51 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिलें हैं जिनसे 4.50 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का ब्यौरा देते हुए कहा कि इन्हें नियत समय सीमा के भीतर पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार के अवसर सृजित किये जा रहे हैं। सरकारी क्षेत्र में रिक्त पदों को भरा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 18:18:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान एक नजर में</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान दिवस विशेष]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--rajasthan-day-special--rajasthan-at-a-glance--the-formation-of-rajasthan-was-completed-in-seven-phases--this-process-lasted-from-1948-to-1956/article-6992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/rajasthan-diwas.jpg" alt=""></a><br /><p>राजस्थान का गठन सात चरणों में पूरा हुआ। यह प्रक्रिया 1948 से 1956 तक चली।</p>
<table style="width:655px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:131.133px;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>पहला चरण</strong> <strong>:</strong></span></td>
<td style="height:41px;width:519.867px;">मत्स्य संघ का गठन 17 मार्च, 1948 में अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली को मिलाकर हुआ।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:131.133px;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>दूसरा चरण :</strong> </span></td>
<td style="height:41px;width:519.867px;">राजस्थान संघ का गठन 25 मार्च, 1948 को बांसवाड़ा, बूंदी, डूंगरपुर, झालावाड़, किशनगढ़, कोटा, प्रतापगढ़ , शाहपुरा और टोंक को मिलाकर हुआ।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:131.133px;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>तीसरा चरण : </strong></span></td>
<td style="height:41px;width:519.867px;">राजस्थान संयुक्त राज्य का गठन 18 अप्रैल, 1948 को उदयपुर राजस्थान के अन्य संघ के साथ शामिल हो गए।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:131.133px;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>चौथा चरण :</strong></span></td>
<td style="height:41px;width:519.867px;">ग्रेटर राजस्थान का गठन 30 मार्च, 1949 को बीकानेर, जयपुर, जैसलमेर और जोधपुर में भी राजस्थान संयुक्त राज्य के साथ शामिल हो गए।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:131.133px;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>पांचवां चरण :</strong></span></td>
<td style="height:41px;width:519.867px;">ग्रेटर राजस्थान संयुक्त राज्य का गठन 15 मई, 1949 को मत्स्य संघ ने भी ग्रेटर राजस्थान में विलय कर दिया।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:131.133px;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>छठा चरण :</strong></span></td>
<td style="height:41px;width:519.867px;">यूनाइटेड राजस्थान का गठन 26 जनवरी, 1950 को यूनाइटेड राजस्थान के 18 राज्यों आबू और दिलवाड़ा छोड़कर रियासत सिरोही के साथ विलय कर दिया।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:131.133px;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>सांतवा चरण :</strong></span></td>
<td style="height:41px;width:519.867px;">राजस्थान का पुर्नगठन स्टेट रि-आॅगनाइजेशन एक्ट, 1956 के तहत राजस्थान राज्य अस्तित्व में आया।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:599px;" colspan="2"><span style="background-color:#99ccff;color:#ff9900;"><strong>राजस्थान के विकास का चरण कुछ इस तरह चला</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:126.983px;"><span style="background-color:#ffcc99;color:#993300;"><strong>प्रथम राजप्रमुख</strong></span></td>
<td style="width:472.017px;">सवाई मानसिंह 30 मार्च, 1949 से 31 अक्टूबर, 1956</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:126.983px;"><span style="background-color:#ffcc99;color:#993300;"><strong>प्रथम राज्यपाल</strong></span></td>
<td style="width:472.017px;">सरदार गुरुमुख निहाल सिंह 1 जनवरी, 1956 से 15 अप्रैल, 1962</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:126.983px;"><span style="background-color:#ffcc99;color:#993300;"><strong>प्रथम मुख्यमंत्री</strong></span></td>
<td style="width:472.017px;">हीरालाल शास्त्री 7 अप्रैल, 1949 से 5 जनवरी, 1951</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:126.983px;"><span style="background-color:#ffcc99;color:#993300;"><strong>प्रथम प्रोटेम स्पीकर</strong></span></td>
<td style="width:472.017px;">महाराव संग्राम सिंह 24 मार्च, 1952 से 27 मार्च, 1952</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:126.983px;"><span style="background-color:#ffcc99;color:#993300;"><strong>विधानसभा प्रथम अध्यक्ष</strong></span></td>
<td style="width:472.017px;">नरोत्तमलाल जोशी 31 मार्च, 1952 से 25 अप्रैल, 1957</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:126.983px;"><span style="background-color:#ffcc99;color:#993300;"><strong>विधानसभा के गठन का दिन</strong></span></td>
<td style="width:472.017px;">23 फरवरी, 1952</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:126.983px;"><span style="background-color:#ffcc99;color:#993300;"><strong>प्रथम राजस्थान विधानसभा सदस्य</strong></span></td>
<td style="width:472.017px;">कुल 160, कांग्रेस के विधायक 82, विपक्ष के विधायक 78 जिसमें आरआरपी सहित अन्य दल शामिल हैं।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:126.983px;"><span style="background-color:#ffcc99;color:#993300;"><strong>प्रथम विधानसभा के विपक्ष के नेता</strong></span></td>
<td style="width:472.017px;">जसवंत सिंह निर्दलीय</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>सबसे अधिक प्रिविपर्स जयपुर राजघराने को 18 लाख वार्षिक</strong></span><br />देशी रियासतों के राजस्थान में विलय के बाद सबसे अधिक प्रिविपर्स जयपुर राजपरिवार को 18 लाख रुपए वार्षिक दी जाती थी। इसके बाद बीकानेर, जोधपुर और उदयपुर को दस-दस लाख रुपए दिए जाते थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Mar 2022 14:24:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अभी किराए पर ही उड़ान, डेढ़ साल बाद मिलेंगे हेलिकॉप्टर-विमान</title>
                                    <description><![CDATA[मल्टी टरबाइन जेट और चार सीटर हेलिकॉप्टर अगली सरकार में ही उपयोग आएंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--flying-on-rent-now--helicopter-aircraft-will-be-available-after-one-and-a-half-year--long-process-of-company-selection--modification-and-training-from-tender--multi-turbine-jet-and-four-seater-helicopter-will-be-used-only-in-the-next-government/article-6928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/helicopter.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकार का हवाई बेड़ा अभी पूरी तरह से खाली है। एक विमान और हेलिकॉप्टर खरीद के टेंडर हो चुके हैं, लेकिन अभी डेढ़ साल सरकार को इनके आने का इंतजार करना ही पड़ेगा। ऐसे में फिलहाल सरकार की वीवीआईपी उड़ान के लिए किराए के विमान-हेलिकॉप्टर ही काम में लेने होंगे। प्रदेश के सिविल एविएशन विभाग वीवीआईपी उड़ान के लिए गुजरात की तर्ज पर 200 करोड़ का एक 10 सीटर मल्टी-टरबाइन अत्याधुनिक सुविधाओं से लबरेज जेट विमान और चार सीटर 30 करोड़ का हेलिकॉप्टर खरीद रहा है। टेंडर गत दो मार्च को हो गए हैं, अप्रैल में कंपनियों का चयन तो हो जाएगा, लेकिन इनके हवाई-बेड़े में लैंड होने में करीब डेढ़ साल का समय लगेगा यानी डिलेवरी चुनावों के वक्त तक ही हो पाएगी। ऐसे में इनका उपयोग अगली सरकार के वक्त ही हो पाएगा।<br /><br /><strong>7 साल में 100 करोड़ सेवाओं पर खर्च</strong><br />हवाई बेड़े में वीवीआईपी उड़ान के लिए सात साल से विमान-हेलिकॉप्टर नहीं है। इस समयावधि में किराए के विमान-हेलिकॉप्टर से ही वीवीआईपी उड़ान का काम चल रहा है। हर साल औसतन 18-20 करोड़ रुपए विमान सेवाओं पर खर्च होते हैं। पिछले दो साल महामारी के चलते राशि काफी कम खर्च हुई है। इस हिसाब से करीब सौ करोड़ रुपए अब तक किराए की उड़ान पर खजाने से खर्च हुए हैं। अभी डेढ़ साल और किराए पर ही विमान सेवा चलेगी। ऐसे में 27-30 करोड़ और खर्च होने का आंकलन है। <br /><br /><strong>खुद के सरकारी बेड़े में समय यूं लगेगा</strong><br />टेंडर की अंतिम तारीख के बाद कंपनियों से प्रजेंटेशन लिया जाएगा। फिर तकनीकी और फाइनेंशियल बिड़ खोली जाएगी, जिस कंपनी के हेलिकॉप्टर-विमान पर बात बनेगी, उनमें अत्याधुनिक सेवाओं के लिए सिविल एविएशन की तकनीकी कमेटी मैन्यूफेक्चरिंग कराएगी। इसके बाद मेंटिनेंस के लिए इंजीनियरों की टीम को और पायलटों को उड़ान के लिए विक्रेता कंपनी तीन माह की ट्रेनिंग देगी। इसके बाद डायरेक्टर जनरल आॅफ सिविल एविएशन की उड़ान को हरी झंडी मिलने की प्रक्रिया होगी। तब प्रदेश में वीवीआईपी उड़ान के लिए विमान मिलेंगे। <br /><br /><strong>महामारी ने रोकी थी पिछली खरीद</strong><br />गहलोत सरकार ने कोरोना महामारी शुरू होने से ठीक पहले फ्रांस की डेशो एविएशन कंपनी से मिड साइज 12 सीटर जेड विमान खरीद का निर्णय लिया था, लेकिन प्रस्ताव को महामारी के चलते सीएम ने मंजूर नहीं किया था। <br /><br />18 अप्रैल तक कंपनियों से टेंडर मांगे हैं। कंपनी चयन के बाद मोडिफिकेशन, ट्रेनिंग सहित अन्य कार्यों के बाद प्रदेश को मिलने में समय लगेगा।<br />-<strong>जितेन्द्र कुमार उपाध्याय, शासन सचिव, सिविल एविएशन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 12:07:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू : जिला स्तरीय 20 सूत्रीय कार्यक्रम समिति के दस उपाध्यक्ष नियुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[आयोजना विभाग ने आदेश जारी कर दिए। इसमें कांग्रेस के जिलाध्यक्षों को प्राथमिकता दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82---%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-20-%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B8-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4/article-3708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/ashok-gehlot.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू कर दिया है। इस कड़ी में शुक्रवार को जिला स्तरीय 20 सूत्रीय कार्यक्रम समिति के दस उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिए। इस संबंध में आयोजना विभाग ने आदेश जारी कर दिए। इसमें कांग्रेस के जिलाध्यक्षों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें योगेश मिश्रा को अलवर, रामचरण मीणा को बारां, फतेहखान को बाड़मेर, रामजीलाल ओढ़ को दौसा, उमेश सिंह तंवर को जैसलमेर, वीरेन्द्र सिंह गुर्जर को झालावाड़, सलीम खान को जोधपुर, जाकिर गैसावत को नागौर, हरी सिंह राठौड़ को राजसमंद और सुनीता गठाला को सीकर जिले की बीस सूत्रीय कार्यक्रम समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jan 2022 12:28:05 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार ने आरयू के शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया पर लगाई रोक</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61c019c4c7ed8/article-3358"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/ru_khabar-ka-asar.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। राज्य सरकार ने राजस्थान विश्वविद्यालय में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के विरुद्ध यह पदोन्नति प्रक्रिया की थी, जिस पर दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रमुखता से खबरों का प्रकाशन किया था। नवज्योति की खबरों को प्रमुखता से लेते हुए राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त सहित विश्वविद्यालय के कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर को प्रोफेसर बनाने के मामले पर अब आदेश जारी करके रोक लगा दी है। विश्वविद्यालय ने सेवानिवृत्त सहित 100 से अधिक एसोसिएट प्रोफेसर को पदोन्नति कर प्रोफेसर बना दिया था। इसके बाद सिंडिकेट की बैठक करके इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए थे। जबकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इस प्रक्रिया को नियम विरुद्ध मानते हुए रोकने के लिए विश्वविद्यालय को तीन बार कड़े आदेश जारी किए थे।<br /> <strong><br /> विश्वविद्यालय को बड़ा झटका</strong><br /> राजस्थान विश्वविद्यालय ने हाल ही में सीएएस के तहत शिक्षकों की पदोन्नति की थी, उसको सरकार से बड़ा झटका लगा है। सरकार ने इसमें रिटायर्ड शिक्षकों की पदोन्नति के आदेश की क्रियान्विती पर रोक लगा दी है। सूत्रों के अनुसार यह रोक जांच कमेटी की रिपोर्ट आने तक है। उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश में लिखा है कि राजस्थान यूनिवर्सिटी को यूजीसी के पत्रों के संदर्भ में प्रदत्त निर्देशों के अनुरूप ही शिक्षकों को सीएएस के तहत पदोन्नति देने की अनुशंषा की है। जबकि राजस्थान यूनिवर्सिटी ने सिंडिकेट की विशेष बैठक कर सेवानिवृत शिक्षकों सहित सभी शिक्षकों के पदोन्नति आदेश जारी कर दिए। प्रथमदृष्टया राजस्थान यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट ने सेवानिवृत शिक्षकों के प्रकरण में यूजीसी के प्रावधानों और सरकार की सलाह के विपरीत कार्रवाई की है, जो किसी भी दृष्टि से वैध नहीं कही जा सकती। उच्च शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को सीएएस का लाभ देने के लिए सशर्त अनुमति प्रदान की थी, जिसमें लिखा था कि शिक्षकों को सीएएस के लिए चयन के संबंध में स्किनिंग कमेटी ने यूजीसी रेगूलेशन 2010 और समय-समय पर बनाए गए नियमों के आधार पर स्क्रीनिंग करके नियमानुसार पात्रता तय की जाएगी। यूनिवर्सिटी ने इसकी पूर्णत: पालना नहीं की। <br /> <br /> <strong>विश्वविद्यालय पर सालाना आएगा चार करोड़ का भार </strong><br /> इस निर्णय से यूनिवर्सिटी पर करीब 4 करोड़ रुपए सालाना का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Dec 2021 11:36:50 +0530</pubDate>
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