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                <title>बंद रोडवेज बसों ने बढ़ाई यात्रियों की मुश्किल, निजी वाहनों का किराया मंहगा</title>
                                    <description><![CDATA[खानपुर में बारां-झालावाड़ मेगा हाइवे पर बस स्टैण्ड की दरकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/roadways-buses-have-been-suspended--increasing-passenger-hardship--and-private-vehicle-fares-have-become-more-expensive/article-129013"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/roadways1.png" alt=""></a><br /><p> खानपुर। खानपुर में कोरोना काल से रोडवेज की कुछ बसें बंद चल रही थी जिसके चलते राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी अनुसार खानपुर में बारां झालावाड़ मेगा हाइवे पर ना तो कोई बस स्टैंड बना हुआ है और ना ही यात्रियों को बसों की सुविधा मिल पा रही है। रोडवेज की कुछ बसें ऐसी है जो पहले चलती थी जैसे हिंडौन गाड़ी जो की खानपुर से सुबह 5 रवाना होती थी और उधर से कोटा से आते समय लगभग 6:30 बजे कोटा से रवाना होती थी।  इससे व्यापारी कृषक व विद्यार्थी भी सुबह से जाने वाला विद्यार्थी शाम को घर वापस आ जाता था उसके लिए हिंडौन गाड़ी बहुत ही अच्छी गाड़ी थी क्योंकि उसमें कोटा जाने वाला व्यापारी पूरा कार्य करके और 9 बजे भी तैयार होकर वहां से बैठ जाता था और खानपुर पहुंच जाता था। मजबूरन रोजाना झालावाड़ या कोटा जाने वालों को निजी वाहनों में सफर करना पड़ रहा है और निजी वाहनों का किराया भारी पड़ता है जो एक गरीब व्यक्ति उसका वहन नहीं कर सकता। निजी वाहन में सफर करना महंगा और असुरक्षित है परिवहन की बसों की गारंटी है निजी वाहनों की कोई सुरक्षा नहीं है। खानपुर कस्बे वासियों का कहना है की जो बसें बंद हुई है अगर वह बसे वापस चालू हो जाती है जैसे हिंडौन बस झालावाड़ से रात्रि सेवा सुविधा और भी कुछ बसे हैं जो पहले चलती थी तो यात्रियों को थोड़ी <br />राहत मिलेगी। </p>
<p>इधर से तो हम कोटा चले जाते हैं लेकिन कोटा से खरीदारी करने के बाद जब वापस आते हैं तो उधर से आने के लिए कोई बस नहीं है इसलिए हिंडौन गाड़ी वापस चालू की जाए।<br /><strong>-बंटी गौतम, कस्बेवासी </strong></p>
<p>अभी बीच में झालावाड़ जाने के लिए खानपुर से सुबह 7 बजे दो या तीन महीने पहले बस चल रही थी लेकिन वह बस बंद हो गई है उसे चालू किया जाए।<br /><strong>-मुकेश मालव, कस्बेवासी </strong></p>
<p>कोटा से रात को आने के लिए हिंडौन बस चलती थी वह बस खानपुर के लिए एक बहुत अच्छी सेवा थी उसे सेवा को वापस चालू की जाए।<br /><strong>-टोनी मीणा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>कोरोना काल के बाद कुछ बसें खानपुर से बंद हो गई है उन बंद बसों को चालू किया जाए ताकि यात्री परिवहन की बस में सफर कर सके।<br /><strong>-राजाराम गुर्जर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>बच्चों को खानपुर से झालावाड़ कॉलेज भी जाना पड़ता है और कोई आॅफिसर खानपुर से झालावाड़ डेली अप डाउन भी करता है तो उनको परेशानी का सामना करना पड़ता है अत: बंद बसों को चालू करने की कृपा करें।<br /><strong>-पपला गुर्जर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>कोरोना के बाद कुछ बसें बंद हो गई थी उन बसों को सुचारू रूप से चालू की जाए ताकि निजी वाहनों से बचकर परिवहन की बसों में यात्रा कर सके।<br /><strong>-नरेंद्र मालव, कस्बेवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रोडवेज बस जो कुछ समय पहले बंद हो गई थी, वह संसाधन तुरंत चालू किए जाएंगे और जहां तक हो सके तो फरवरी में स्थाई रूप से खानपुर में बस स्टैंड भी बन जाएगा।  खानपुर में हमें जमीन भी मिल गई है बाउंड्री को रोडवेज के नाम करवा लिया है इसलिए हो सके तो बस स्टैंड फरवरी में लगभग बन सकता है इसका पट्टा भी बन चुका है।<br /><strong>-पवन सैनी यातायात प्रबंधक, झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:27:37 +0530</pubDate>
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                <title>श्वानों के काटने के बढ़ते मामले से क्षेत्रवासी दहशत में</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन को इस गंभीर समस्या के लिए कई बार अवगत कराया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/area-residents-in-panic-due-to-increasing-cases-of-dog-bites/article-74804"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer-(1)14.png" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा। संपूर्ण रावतभाटा क्षेत्र में आवासीय परिसर कॉलोनी हो या बाहरी क्षेत्र सभी जगह श्वानों के लोगों के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे है। जिससे लोग अपने घरों से बाहर निकलने से डर रहे है। श्वानों की बढ़ रही जनसख्ंया भी चिंता का विषय है। शहर में 15 से 20 डॉग्स बाइट्स के मामले हर महीने अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिनमें डॉग बाइट्स के कुछ गंभीर मामले भी सामने आए। सालभर में 250 मामले डॉग बाइट्स के हो चुके है। अभिभावकों द्वारा छोटे बच्चों को लेकर चिंता और भय बना रहता है। बच्चों द्वारा बाहर स्कूल और खेलने जाने पर श्वानों द्वारा छोटे बच्चों पर कई बार हमला करके काट लिया गया। कुछ श्वानों में तो अत्यधिक क्रोध तक देखा गया। जिसमें उनके द्वारा गाय के बछड़े को पूरी तरह से नोच डाला गया प्रशासन को भी इस गंभीर समस्या के लिए कई बार अवगत कराया गया। </p>
<p><strong>नसबंदी करवा कर किया जा सकता है नियंत्रण</strong><br />गैर सरकारी सेवा संस्थान और पशु प्रेमी फरी फ्रेंड्स रेस्क्यू की प्रभारी प्रीति मलिक और उनकी टीम ने बताया कि श्वानों की बढ़ती जनसंख्या को वेटरिनरी विभाग और एनजीओ द्वारा स्टेरलाइजेशन या नसबंदी करवा कर नियंत्रित किया जा सकता है। जिससे डॉग्स बाइट के मामलों में भी कमी आएगी और सही इलाज के चलते भी नियंत्रित रहेगी।<br /><strong>- प्रीति मलिक</strong> </p>
<p>मेरे परिचित व्यक्ति पर श्वानों ने हमला किया। जिसे बाद में अस्पताल इलाज के लिए ले जाया गया। <br /><strong>- पवन टांक, नगर वासी</strong></p>
<p>मेरे मित्र मयंक को श्वानों ने काट लिया और उसके उपचार के लिए चार इंजेक्शन तक लगे। <br /><strong>- प्रथम कुमार, स्कूली छात्र </strong></p>
<p>छोटे बच्चों को घर से बाहर निकालने में भी डर लगता है कि क्या पता कौन सा श्वान बच्चों पर हमला कर दे।<br /><strong>- हेमेंद्र परिहार, पुलिसकर्मी </strong></p>
<p>हर महीने 15 से 20 डॉग बाइट्स के मामले निरंतर अस्पताल में आ रहे हैं। जिनमें कुछ <br />गंभीर स्थिति में भी देखे गए। श्वानों की बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए वेटरिनरी विभाग और प्रशासन द्वारा स्टेरलाइजेशन या नसबंदी करके रोकथाम की जा सकती है।<br /><strong>- डॉक्टर अनिल जाटव, मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी </strong></p>
<p>दो साल से निरंतर इस समस्या को उठाते हुए पालिका प्रशासन को दर्जनों शिकायत दी गई। परंतु आज तक प्रशासन और वेटरनरी विभाग द्वारा किसी भी तरह की कोई भी व्यवस्था नहीं की गई। <br /><strong>- मनीष गिरी, पार्षद</strong></p>
<p>पशु प्रेमी प्रीति मालिक द्वारा ज्ञापन दिया गया है। सरकार द्वारा जारी आदेशों के अंतर्गत सभी विभागों को बुलाकर बैठक कर समस्या का समाधान निकाला जाएगा। <br /><strong>- महेश गगोरिया, उपखंड अधिकारी </strong></p>
<p>स्टेरलाइजेशन करके श्वानों की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए विभाग द्वारा हर प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>- डॉ. सुनील साल्वे, मुख्य ब्लॉक पशु चिकित्सक  </strong></p>
<p>उपखंड अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार नगर पालिका प्रशासन हर संभव प्रयास करेगा। जिससे श्वानों की समस्या का समाधान हो सके।<br /><strong>- महेश नागर, नगर पालिका अधिशासी अभियंता  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Apr 2024 19:11:50 +0530</pubDate>
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                <title>वायु में ट्रेप प्रदूषक, कोटा में जहरीली हवा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शनिवार को प्रदेश में सबसे खराब स्थिति भिवाड़ी की रही। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trap-pollutants-in-the-air--poisonous-air-in-kota/article-61452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/vayu-me-trap-pradushan,-kota-me-zehrili-hawa...kota-news-06-11-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मौसम में उतार-चढ़ाव का दौर वायु प्रदूषण को भी प्रभावित कर रहा है। कोटा समेत प्रदेश के कई शहरों में हवा में बढ़ते प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। वायु प्रदूषण के चलते सांस लेना मुश्किल होने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक शनिवार को कोटा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 215 के स्तर पर पहुंच गया। यानी कोटा की हवा का स्तर काफी खराब हो चुका है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वेस्टर्न डिस्टरबेंस होने से छाए बादलों से आसमान के अपर लेवल पर हवा की स्पीड बहुत कम है। इस कारण प्रदूषक और कार्बन पार्टिकल्स हवा में ऊपर जाकर ट्रैप (फंस) गए हैं। इससे अधिकांश शहरों में वायु प्रदूषण का लेवल बढ़ गया है। </p>
<p><strong>बचाव के उपाय</strong><br />- निजी वाहनों की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दें।<br />- कम भीड़ वाले रास्तों का चुनाव करें।<br />- अपने वाहन के एयर फिल्टर को मेंटेन रखें।<br />- डस्ट फैलाने वाली कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर रोक जरूरी।<br />- खुले में कचरा और बॉयो ईंधन कतई न जलाएं।</p>
<p><strong>एक्यूआई यह देता है संकेत</strong><br />अच्छा यानि कोई दिक्कत नहीं    0-50<br />संतोषजनक हवा    51-100<br />बाहर जाने से बचें    101-200<br />श्वसन के मरीजों को तकलीफ    201-300<br />लम्बे बीमार रोगियों को दिक्कत    301-400<br />बाहर बिलकुल नहीं निकलें    401-500</p>
<p><strong>प्रदूषित शहरों के टॉप टेन में कोटा भी</strong><br />प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शनिवार को प्रदेश में सबसे खराब स्थिति भिवाड़ी की रही। यहां पर एक्यूआई लेवल 388 पर पहुंच गया है। भिवाड़ी एरिया एनसीआर क्षेत्र में आता है और दिल्ली से जुड़ा हुआ है। इस कारण यहां पर प्रदूषण का स्तर ज्यादा है। इसके अलावा प्रदेश के भरतपुर में 367, धौलपुर में 337, चूरू में 335, टोंक में 268, जयपुर में 271, सीकर में 245, कोटा में 215, बूंदी में 191 और झालावाड़ में 183 एक्यूआई लेवल हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर बढ़ने के कारण हवा का स्तर खराब होता जा रहा है। सर्दी के मौसम में हवा और जहरीली हो जाती है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, प्रदूषण का स्तर बढ़ता जाएगा।  </p>
<p><strong>जल्दी ठीक नहीं हो रही बच्चों की खांसी-जुकाम</strong><br />पीडियाट्रिक डॉ. प्रियांशु बताते हैं कि इन दिनों प्रदूषण के कारण बच्चों में खांसी-जुकाम के केस बहुत ज्यादा हो रहे हैं। जिन बच्चों को अस्थमा हैं या वे एलर्जिक हैं उन्हें ज्यादा दिक्कत हो रही है। खास बात यह है कि इस बार  प्रदूषण के कारण हो रही सर्दी-खांसी जल्दी ठीक नहीं हो रही है। इसलिए बच्चों को प्रदूषण बचाना सबसे बेहतर उपाय है। </p>
<p><strong>आंखों पर भी प्रदूषण का वार</strong><br />चिकित्सकों के अनुसार हल्की स्मॉग व धूल कणों की वजह से अस्पतालों में भी आंखों में एलर्जी व सांस के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। अस्पतालों की आंखों की ओपीडी में 10 प्रतिशत मरीज आंखों में जलन और खुजली की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। हवा की गुणवत्ता खराब होने और स्मॉग की वजह से खांसी, सांस फुलना, आंखों में खुजली जलन और अस्थमा अटैक जैसे मामले बढ़ गए हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर अभी दो-तीन दिन और रहेगा। जिससे यहां पर हवा की स्पीड कम होगी। इस कारण वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहेगा।   पिछले कुछ दिनों से मौसम में उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ है। दिन में तापमान तेज रहता है तो रात को हल्की सर्दी का असर बना हुआ है। इससे वायु प्रदूषण का स्तर काफी प्रभावित होता है।<br /><strong>- एसके मीणा, मौसम वैज्ञानिक</strong></p>
<p>हवा में धूल व कार्बन के महीन कणों के अलावा दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषक कार्बन मोनोआॅक्साइड है। शहर में लगातार बढ़ रहे वाहनों की वजह से कार्बन मोनोआॅक्साइड का उत्सर्जन बढ़ रहा है। साथ ही हवा की गति भी धीमी हो गई। जिसकी वजह से संबंधित क्षेत्र के प्रदूषक उसी वायुमंडल में बने हुए हैं।<br /><strong>- अमित सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Nov 2023 16:07:47 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदूषण से बिगड़ने लगा कोटा की हवा का स्वास्थ्य</title>
                                    <description><![CDATA[वायुमंडल में कार्बन मोनोआॅक्साइड का सर्वाधिक उत्सर्जन गाड़ियों के धुएं और जंगलों की आग से होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-health-of-kota-s-air-started-deteriorating-due-to-pollution/article-59768"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/pradushan-s-bigadne-lga-kota-ki-hawa-ka-svasthya...kota-news-17-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बारिश का दौर समाप्त होने के बाद अक्टूबर माह में गर्मी के तेवर गर्म होते जा रहे हैं। इस कारण कोटा शहर में हवा में धूल कणों (पार्टिकुलेट मैटर) के साथ कार्बन मोनोआॅक्साइड का प्रदूषण बढ़ने लगा है। अक्टूबर माह में शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 110 के पास पहुंच गया है। हवा में धूल व कार्बन के महीन कणों के अलावा दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषक कार्बन मोनोआॅक्साइड है। शहर में लगातार बढ़ रहे वाहनों की वजह से कार्बन मोनोआॅक्साइड का उत्सर्जन बढ़ रहा है। </p>
<p><strong>धीमी हो गई हवा की गति</strong><br />सितंबर के अंतिम सप्ताह से एंटी साइक्लोनिक सरकुलेशन बनने की वजह से कुछ हिस्सों में मानसून की विदाई हो गई थी। उसके बाद 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से मानसून के विदाई की घोषणा कर दी गई। मानसून जाने के साथ ही हवा में नमी कम होने लग गई। साथ ही हवा की गति भी धीमी हो गई। जिसकी वजह से संबंधित क्षेत्र के प्रदूषक उसी वायुमंडल में बने हुए हैं। इससे वायु की गुणवत्ता खराब हो रही है। चिकित्सकों के अनुसार हृदय रोग से ग्रसित व्यक्तियों के लिए अत्यधिक कार्बन मोनोआॅक्साइड हानिकारक है।</p>
<p><strong>कार्बन मोनोआॅक्साइड क्यों है हानिकारक</strong><br />मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वायुमंडल में कार्बन मोनोआॅक्साइड का सर्वाधिक उत्सर्जन गाड़ियों के धुएं और जंगलों की आग से होता है। कार्बन मोनोआॅक्साइड शरीर में आॅक्सीजन के परिवहन को बाधित करती है, जिससे शरीर की कोशिकाओं और उत्तकों को आॅक्सीजन नहीं मिलने की वजह से सांस लेने में परेशानी होती है। हृदय रोग से ग्रसित लोगों को सर्वाधिक परेशानी होती है, उन्हें छाती में दर्द सहित अन्य दिक्कत पैदा हो सकती है।</p>
<p><strong>छह प्रदूषक का होता है मापन</strong><br />केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से वायु की गुणवत्ता के लिए छह प्रदूषक का मापन करता है। इसमें हवा के महीन कण यानी पार्टिकुलर मैटर पीएम 10, पीएम 2.5, कार्बन मोनोआॅक्साइड, नाइट्रोजन डाइआॅक्साइड, सल्फर डाइआॅक्साइड और ओजोन शामिल है। वर्तमान में पीएम कणों और कार्बन मोनोआॅक्साइड को छोड़कर सभी प्रदूषक का एक्यूआई 50 के भीतर बना हुआ है।</p>
<p><strong>धूल के कण शरीर को दे रहे रोग</strong><br />वाहनों की रेलमपेल से उड़ते धूल के कण लोगों को श्वांस, चर्म एवं अस्थमा जैसे रोग परोसती दिखाई पड़ती है। यही कारण है कि हर महीने सैंकडों लोग प्रदूषणजनित रोगों के शिकार हो रहे हैं। बारिश के दिनों में सड़कों पर धूल जम जाती है तो वायु गुणवत्ता 50 से नीचे पहुंच जाती है, लेकिन बारिश नहीं होती है तो यही धूल उड़कर एक्यूआई को 100 के पार पहुंचा देती हैं, जो खराब श्रेणी होती है।  वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों की चिमनी से निकलने वाला धुआं भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने वाला रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वायु प्रदूषण से अस्थमा, श्वांस रोग, दम भरना, एलर्जी, त्वचा जैसे रोग होते हैं। वाहन गुजरते हैं तो धूल उड़ती है। लोगों के फेंफड़ों तक श्वास के माध्यम से पहुंचती है। इस समय शहर में तीन से चार प्रतिशत लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। अस्पताल में रोज 15 से 20 मरीज पहुंचते हैं।<br /><strong>- डॉ. विष्णु गोयल, श्वसन रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>हवा में धूल व कार्बन के महीन कणों के अलावा दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषक कार्बन मोनोआॅक्साइड है। शहर में लगातार बढ़ रहे वाहनों की वजह से कार्बन मोनोआॅक्साइड का उत्सर्जन बढ़ रहा है। साथ ही हवा की गति भी धीमी हो गई। जिसकी वजह से संबंधित क्षेत्र के प्रदूषक उसी वायुमंडल में बने हुए हैं।<br /><strong>- अमित सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 20:35:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वार के व्यवहार से मंदिरों में बढ़ रही भिखारियों की कतार</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा समेत पूरे राजस्थान को भिक्षावृत्ति मुक्त करने का अभियान सरकार की ओर से चलाया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/queues-of-beggars-are-increasing-in-temples-due-to-war-behavior/article-52284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/vaar-k-vyavhar-s-badh-rhi-mandiro-me-bhikariyo-ki-kataar...kota-news-20-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । <strong>दृश्य 1-</strong> शहर में मंगलवार व शनिवार को हनुमान मंदिरों के बाहर कतार से हाथ फैलाए लोग भीख मांगते हुए देखे जा सकते हैं। सामान्य दिनों में यहां ऐसे लोग या तो नजर ही नहीं आएंगे या उनकी संख्या इक्का-दुक्का ही रहेगी।</p>
<p><strong>दृश्य 2-</strong> बुधवार को खड़े गणेशजी मंदिर तो गुरुवार को गढ़ पैलेस स्थित साई बाबा मंदिर के बाहर ऐसे लोगों को सड़क किनारे बैठे देखा जा सकता है। ये मंदिर आने वाले हर व्यक्ति के आगे हाथ फेलाए नजर आ जाएंगे। </p>
<p><strong>दृश्य 3-</strong> जुमे रात और जुमे के दिन दोपहर की नवाज के समय शहर की अधिकतर मस्जिदों के बाहर भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों को बड़ी संख्या में देखा जा सकता है। यहां नमाज अता करने आने वालों के आगे हाथ फै लाए ये लोग खाने की वस्तु से लेकर नकद राशि तक मांगते हुए देखे जा सकते हैं। </p>
<p>यह स्थिति है शिक्षा नगरी कोटा की। जहां भिक्षावृत्ति करने वालों की संख्या कम होने की जगह लगातार बढ़ती ही जा रही है। हालत यह है कि भिक्षावृत्ति एक तरह का पेशा सा बन गया है। जिनमें कई लोग तो परिवार समेत ही भीख मांगते हुए देखे जा सकते हैं। दिव्यांग व बुजुर्ग लोगों के अलावा युवा और महिलाएं यहां तक की छोटे बच्चों तक को भीख मांगने के काम में लगाया हुआ है। मंदिरों में दर्शन करने वाले लोग इस तरह के लोगों से खासे परेशान हैं। जब तक इन्हें प्रसाद या नकदी नहीं मिल जाती तब तक ये उनका पीछा ही नहीं छोड़ते। </p>
<p><strong>तालाब की पाल व गीता भवन के बाहर भी</strong><br />भिक्षावृत्ति करने वाले वैसे तो पूरे शहर में ही नजर आते हैं। चाहे होटल हो या चाय-जलपान की दुकान। सब्जीमंडी हो या किराने की दुकान। जहां लोग नजर आए वहीं इस तरह के लोग हाथ फैलाकर भीख मांगने के लिए आ जाते हैं। मंदिरों के बाहर तो ऐसे लोग वार के हिसाब से आते ही हैं। वहीं सामान्य तौर पर किशोर सागर तालाब की पाल हो या गीता भवन के बाहर भी इस तरह के लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। लक्खी बुर्ज के बाहर हो या जैन दिवाकर के बाहर। बबूल वाले बाबा की दरगाह हो या छावनी व विज्ञान नगर की मस्जिद। इन लोगों को हर समय देखा जा सकता है। गीता भवन में तो सुबह-शाम नि:शुल्क भोजन कराया जा रहा है। जहां ये लोग भोजन भी करते हैं और वहीं पड़े रहते हैं। इसी तरह तालाब की पाल पर दिनभर लोग आकर इन्हें कुछ न कुछ खाने-पीने की चीजे दे जाते हैं।</p>
<p><strong>कॉलोनियों तक में आने लगे ये लोग</strong><br />पहले जहां अधिकतर भिक्षावृत्ति करने वाले लोग चौराहों पर नजर आते थे। कोटड़ी चौराहा हो या एरोड्राम। अंटाघर चौराहा हो या नयापुरा चौराहा। सिग् नल होते ही वाहन रूकने पर ये लोग झपट पड़ते थे। विशेष रूप से महिलाओं व बच्चों वालों को पकड़ते थे। लेकिन इन चौराहों का विकास व सौन्दर्यीकरण होने और यहां से ट्रैफिक सिग्नल लाइटें हटने के बाद अब यहां वाहन चालक नहीं रुकते हैं। ऐसे में अब भिक्षावृत्ति करने वाले भी यहां से अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो गए हैं। ऐसे में अब ये लोग शहर की कॉलोनियों और घरों में भीख मांगने के लिए दिनभर देखे जा सकते हैं। </p>
<p><strong>भिक्षावृत्ति करने वालों पर लगे रोक</strong><br />महावीर नगर निवासी अरुणा शर्मा का कहना है कि मंदिर में जाने पर भिखारी पीछे पड़ जाते हैं। जिससे उनसे बचना मुश्किल हो जाता है। इन पर रोक लगनी चाहिए। कैथूनीपोल निवासी निधी शर्मा का कहना है कि चाहे किसी भी धार्मिक स्थल पर चले जाओ और किसीभी शहर में। हर जगह पर भिखारी पीछे पड़ जाते हैं। हालत यह है कि अब तो एक दो रुपए से नहीं कम से कम 5 से 10 रुपए लिए बिना पीछा ही नहीं छोड़ते। कोटा से ऐसे लोगों को खत्म करना चाहिए। ये कोटा के लिए किसी कलंक से कम नहीं है। </p>
<p><strong>मानव तस्करी विरोधी यूनिट ने की कार्रवाई</strong><br />शहर में भिक्षावूृत्ति करने वालों से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए पूर्व में मानव तस्करी विरोधी यूनिट ने कार्रवाई की थी। जिसमें ऐसे लोगों को पकड़कर उन्हें शैल्टर होम में भेजा था। लेकिन वहां से छूटने के बाद ये फिर से वही काम करने लगे थे। लेकिन उस समय यूनिट का खौफ नजर आता था। जबकि पिछले काफी समय से इस यूनिट ने भी भिक्षावृत्ति करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। </p>
<p><strong>कोटा को भिक्षावृत्ति मुक्त करने का अभियान</strong><br />कोटा समेत पूरे राजस्थान को भिक्षावृत्ति मुक्त करने का अभियान सरकार की ओर से चलाया जा रहा है। जिसके तहत कोटा में भी समाज कल्याण विभाग व अन्य विभाग मिलकर ऐसे लोगों का सर्वे कर रहे हैं। उनकी वास्तविक संख्या का पता लगाया जा रहा है। सर्वे के बाद ऐसे लोगों को नगर निगम के माध्यम से पुनर्वास किया जाएगा। जिसमें उन्हें निगम के आश्रय स्थलों में ठहरने की सुविधा और इंदिरा रसोई से नि:शुल्क भोजन कराया जाएगा। इसका मकसद उनके खाने और रहने की व्यवस्था करने से ये लोग इस तरह का काम नहीं कर सकें। <br /><strong>- ओम प्रकाश तोषनीवाल, उप निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2023 16:13:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>देश में बढ़ने लगे कोरोना के मामले, एक ही स्कूल में 37 छात्राएं संक्रमित</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र, गुजरात और केरल में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। जहां क्रमशः 397, 303 और 299 केस सामने आए हैं। वहीं कार्नाटक में दो मौतें हुईं है। यूपी, गुजरात हिमाचल प्रदेश और चंड़ीगढ़ में एक एक मौत हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/corona-cases-started-increasing-in-the-country-37-girl-students/article-40957"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/site-photo-size-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ साथ कोरोना एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब तक देश में कोरोना के कुल 4.47 करोड़ मामले सामने आ चुके है। बीते 24 घंटे में देश में कुल 1805 मामले सामने आए हैं और 6 लोगों की मौत भी हो चुकी है। 3.19 पाजिटिविटी रेट रहने का साथ देश में एक्टिव मामलों की संख्या 10300 पहुंच गई है। </p>
<p>महाराष्ट्र, गुजरात और केरल में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। जहां क्रमशः 397, 303 और 299 केस सामने आए हैं। वहीं कार्नाटक में दो मौतें हुईं है। यूपी, गुजरात हिमाचल प्रदेश और चंड़ीगढ़ में एक एक मौत हुई है। </p>
<p>उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के एक स्कूल में हड़कंप मच गया जब एक ही स्कूल से 37 छात्राओं के कोविड पॉजिटिव होने की खबर आई। जबकि पूरे जिले में कोविड के 38 मामले हैं जबकि एक ही स्कूल से 37 पॉजिटिव मिले हैं। </p>
<p>कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर सरकार भी अलर्ट पर है। 10 और 11 अप्रैल को देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में मॉक ड्रिल की जाएगी। देश में बढ़ते कोविड़ मामलों के बीच ओमिक्रान के सब वैरिएंट को इसका जिम्मेदार माना जा रहा है। एक्सबीबी 1.16 वैरिएंप पहली बार जनवरी में पाया गया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 14:35:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बैंक ऑफ बड़ौदा ने दिया कारोबार में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने पर बल </title>
                                    <description><![CDATA[ महाप्रबंधक एवं अंचल प्रमुख कमलेश कुमार चौधरी ने स्टाफ सदस्यों को संबोधित करते हुए हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं दी एवं व्यक्तिगत एवं कारोबार जीवन में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने पर बल दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bank-of-baroda-increasing-the-bussiness/article-22859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/q-4-copy5.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बैंक ऑफ बड़ौदा जयपुर अंचल एवं क्षेत्र की ओर से हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। युवा साहित्यकार नितिन यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महाप्रबंधक एवं अंचल प्रमुख कमलेश कुमार चौधरी ने स्टाफ सदस्यों को संबोधित करते हुए हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं दी एवं व्यक्तिगत एवं कारोबार जीवन में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने पर बल दिया। हिन्दी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्टाफ  सदस्यों को सम्मानित किया गया। उप अंचल प्रमुख सुधांशु शेखर खमारी ने फिजी सहित विश्व के अन्य देशों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार व अध्ययन, अध्यापन पर अपने विचार रखे।</p>
<p>क्षेत्रीय प्रमुख जयपुर मनोज गुप्ता ने बैंक के व्यवसाय वृद्धि में हिन्दी एवं क्षेत्रीय भाषाओं के योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन सोमेन्द्र यादव, मुख्य प्रबन्धक (राजभाषा) एवं जयपाल शेखावत (वरिष्ठ प्रबन्धक राजभाषा) ने किया। इस कार्यक्रम में अंचल एवं क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर एवं शाखाओं से आए विभिन्न स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bank-of-baroda-increasing-the-bussiness/article-22859</link>
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                <pubDate>Thu, 15 Sep 2022 11:24:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> 18+ को मुफ्त लगेगी बूस्टर डोज, गहलोत ने कोरोना के बढ़ते मामलों पर जताई थी चिंता,  कहा, 'भारत सरकार को 18 से 45 वर्ष आयुवर्ग के लिए भी प्रिकॉशन डोज निशुल्क करनी चाहिए'    </title>
                                    <description><![CDATA[ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि देशभर में पिछले दिनों में कोविड के मामले बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी एक वजह समय के साथ वैक्सीन की इम्युनिटी कम होना एवं समय पर प्रिकॉशन (बूस्टर) डोज नहीं लगवाना है। भारत सरकार ने 60 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लोगों के लिए ही प्रिकॉशन डोज निशुल्क की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-expressing-concern-over-the-increasing-cases-of-corona--gehlot-said-that-the-government-of-india-should-also-make-precaution-dose-free-for-the-age-group-of-18-to-45-years/article-14359"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/booster.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p>जयपुर।  18 वर्ष से ज्यादा को कोविड को मुफ्त बूस्टर डोज लगेगी। केंद्र सरकार ने इसकों लेकर बड़ा फैसला  किया है।  15 जुलाई से 75 दिन तक  मुफ्त बूस्टर डोज 18 साल की उम्र से ज्यादा लोगों को लगेगी। सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने इसकी जानकारी दी।<br /><br />हालांकि इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा था कि देशभर में पिछले दिनों में कोविड के मामले बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी एक वजह समय के साथ वैक्सीन की इम्युनिटी कम होना एवं समय पर प्रिकॉशन (बूस्टर) डोज नहीं लगवाना है। भारत सरकार ने 60 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लोगों के लिए ही प्रिकॉशन डोज निशुल्क की है।<br /><br />गहलोत ने कहा कि 18 से 45 वर्ष आयुवर्ग में 10% लोगों ने भी प्रिकॉशन डोज नहीं लगवाई है। भारत सरकार को 18 से 45 वर्ष आयुवर्ग के लिए भी प्रिकॉशन डोज निशुल्क करनी चाहिए, जिससे अधिक से अधिक संख्या में लोग प्रिकॉशन डोज लगवाएं। कोविड इन्फेक्शन की चेन तोड़ने के लिए आवश्यक है कि सभी को वैक्सीन लगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के कई इलाकों में बाढ़ से चिंताजनक हालात बने हुए हैं । मैं सभी बाढ़ पीड़ितों के सुरक्षित होने की कामना करता हूं। मैं गुजरात के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं कि बाढ़ में फंसे लोगों की अधिक से अधिक मदद करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 16:17:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खुद से शादी : क्यों बढ़ रहा है सोलोगैमी का चलन</title>
                                    <description><![CDATA[ भारत के गुजरात राज्य की एक महिला ने सोलोगैमी की राह अपनाई है और इस तरह उन्होंने खुद से ही शादी की हैं। इतना ही नहीं शादी के बाद उन्होंने हनीमून पर जाने का प्लॉन भी बनाया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/-marrying-yourself--why-is-the-trend-of-sologamy-increasing/article-12029"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/new2.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff6600;"><strong>सोलोगैमी एक ऐसा शब्द है,</strong></span> जो शायद बहुत से लोगों के लिए नया हो। आपने पॉलिगामी अर्थात बहु विवाह के बारे में सुना होगा, लेकिन कोई इंसान जब खुद से ही शादी करता है, तो उसे सोलोगैमी कहा जाता है। भारत के गुजरात राज्य की एक महिला ने सोलोगैमी की राह अपनाई है और इस तरह उन्होंने खुद से ही शादी की हैं। इतना ही नहीं शादी के बाद उन्होंने हनीमून पर जाने का प्लॉन भी बनाया है।</p>
<p><br /><span style="color:#ff6600;">   <strong> देश की पहली शादी</strong></span> उनकी शादी देश की अपनी तरह की पहली शादी है। उनकी शादी से दूल्हा ही गायब है,उन्होंने खुद से शादी की है। उन्होंने शादी करने के लिए पार्टनर के रूप में खुद को ही चुना है। <br />    शादी में सभी परंपराओं का पालन भी किया हैउन्होंने इंटरनेट पर सर्च किया कि भारत में किसी ने यह राह अपनाई है या नहीं। लेकिन उन्हें ऐसा कोई भी केस नही मिला। एक निजी फर्म में काम करने वाली क्षमा बिन्दु ने कहा कि उनकी शादी देश में सेल्फ.लव की पहली मिसाल हो गई   है। सेल्फमैरिज का अर्थ समझाते हुए बिंदु ने कहा कि यह अपने लिए कमिटमेंट और स्वयं के लिए बिना शर्त प्यार था। <br /><span style="color:#ff6600;">   <strong> क्या है सोलोगैमी</strong></span> <br />तो अब चलिए सोलोगैमी के बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं। सोलोगैमी को सेल्फ मैरिज या स्व-विवाह भी कहा जाता सकता है। यह एक तरह से सिम्बॉलिक सेरेमनी है जहां व्यक्ति खुद के साथ ही प्रेमपूर्ण संबंध स्थापित करने के लिए कमिटमेंट करता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि इसका मतलब सिंगलडम या ब्रह्मचर्य हो। इस विचार को पहली बार 2003 में प्रसारित एक शो के एपिसोड में पेश किया गया था, जहां शो का मुख्य पात्र खुद से शादी करने के बारे में सोचता है। भारत में यह अपनी तरह का पहला मामला है, लेकिन ब्रिटेन, आॅस्ट्रेलिया, जापान, ताइवान और अमेरिका में अधिक से अधिक महिलाओं ने सोलोगैमी की राह अपनाई है। <br /><span style="color:#ff6600;">  <strong>  क्या है कानून</strong></span><br />सोलोगैमी को लेकर क्या है कानून अब तक एकल विवाह को किसी भी देश के कानून द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। आमतौर पर एक सेल्फ मैरिज सेरेमनी समारोह ज्यादातर प्रतीकात्मक होती है और कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती है। जिसका सीधा सा अर्थ यह है कि किसी को किसी कानूनी दस्तावेज पर अपनी वैवाहिक स्थिति को बदलने की जरूरत नहीं है। <br /><span style="color:#ff6600;">   <strong> कानूनी समर्थन नहीं</strong></span><br />जहां तक बात भारत की है, तो यहां पर एकल विवाह को कोई कानूनी समर्थन या मान्यता प्राप्त नहीं है। भारतीय कानूनों के अनुसार आप खुद से शादी नहीं कर सकते। शादी में दो व्यक्ति होने चाहिए। सोलोगैमी कानूनी नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 16:07:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>गैस की कीमत बढ़ाने पर कांग्रेस ने की सरकार की आलोचना</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस में रसोई गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाने पर सरकार की आलोचना करते हुए इसकी बड़ी कीमत तत्काल वापस लेने और लोगों को राहत देने की मांग की है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार आम आदमी के साथ अन्याय कर रही है और उसे सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम को तत्काल वर्ष 2014 के स्तर पर लाना चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-criticism-of-government-for-increasing-rate-of-gas/article-9282"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/congress2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस में रसोई गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाने पर सरकार की आलोचना करते हुए इसकी बड़ी कीमत तत्काल वापस लेने और लोगों को राहत देने की मांग की है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार आम आदमी के साथ अन्याय कर रही है और उसे सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम को तत्काल वर्ष 2014 के स्तर पर लाना चाहिए। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी पार्टी मुख्यालय में कहा कि रसोई गैस के घरेलू सिलेंडर के दाम 50 रुपए बढ़ा दिए हैं और दिल्ली में इसकी कीमत 1000 रुपए से महज 50 पैसे कम रह गई है। उनका कहना था कि अब सिलेंडर को सरेंडर करने का वक्त आ गया है, क्योंकि आम आदमी की पहुंच से इसकी कीमतें बाहर हो गई है। सुरजेवाला ने इससे पहले कहा कि भाजपा मालामाल, जनता बेहाल। भाजपा राज में सब्सिडी वाला रसोई गैस सिलेंडर ढाई गुणा हो चुका है, रसोई गैस की मध्यम और गरीब की पहुंच से बाहर हो चुकी है। एलपीजी की दर मई 2014  में 414 रुपये, 999.50 रुपए, बढ़ौतरी -585.5 रुपये की गई। प्रवक्ता ने कहा कि हमारी मांग है की सब्सिडी वाली रसोई गैस की कीमतों को वर्ष  2014 के स्तर पर लाया जाए।</p>
<p>मोदी सरकार ने गैस सब्सिडी को खत्म करके गरीब तथा मध्यम वर्ग पर कुठाराघात किया है। वर्ष 2012-13 में कांग्रेस सरकार में एलपीजी सब्सिडी 39,558 करोड़ रुपएथी,2013-14 में कांग्रेस सरकार ने 46,458 करोड़ रुपये गैस सब्सिडी दी, जिसे मोदी सरकार ने 2015-16 में 18 करोड़ रुपये और 2016-17 से जीरो कर दिया।<br />मोदी सरकार में रसोई आग से जल रही है। सुबह महंगाई की एक और क़स्ति-घरेलू गैस सिलेंडर एलपीजी के दाम भी 50 रुपये बढ़ गए। पहले 22 मार्च को भी  50 रुपए बढ़ाए थे। 45 दिन में एलपीजी सिलेंडर के दाम 100 रुपए हो गयी। कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी 60 दिन में  457.50 रुपए बढ़ गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 May 2022 14:17:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिलाओं में बढ़ रहे अर्थराइटिस की हो सकती हैं ये वजहें</title>
                                    <description><![CDATA[पहले जहां कुछ बीमारियां बढ़ती उम्र के साथ होती थी वहीं अब ये कम उम्र में ही अटैक करने लगी हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/these-reasons-may-be-due-to-increasing-arthritis-in-women/article-7417"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/k5.jpg" alt=""></a><br /><p>बिगड़ती लाइफस्टाइल ने सेहत को कई तरीकों से प्रभावित किया है। पहले जहां कुछ बीमारियां बढ़ती उम्र के साथ होती थी वहीं अब ये कम उम्र में ही अटैक करने लगी हैं जिनमें से एक अर्थराइटिस है।पिछले करीब 10 सालों में यह कम उम्र की महिलाओं  को भी अपनी चपेट में लेने लगी है। आंकड़े बताते हैं कि 30 से 35 साल की महिलाएं आसानी से इस बीमारी के चपेट में आ रही हैं। जिसकी एक बड़ी वजह बिगड़ती लाइफस्टाइल है। इससे उनकी मसल्स समय से पहले कमजोर होती जा रही है जिसका नतीजा अर्थराइटिस के रूप में सामने आ रहा है। बच्चों में होने वाली अर्थराइटिस  जुवेनाइल अर्थराइटिस  के नाम से जाना जाता है। वहींए कोरोना पैनेडेमिक की वजह से भी लोगों में अर्थराइटिस की समस्या में इजाफा देखने को मिला है। एक रिसर्च के मुताबिक पोस्ट कोरोना और प्रोलॉन्ग्ड कोविड केसेस में लोगों को अर्थराइटिस के रिस्क का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><br /><strong>कैसे होता है:</strong></p>
<p>शरीर में कैल्शियम की कमी होने या मसल्स के कमजोर होने पर।<br /> जोड़ों में जब यूरिक एसिड जमा होने लगता है वो वहां सूजन की समस्या हो जाती है। इससे जोड़ों के टिश्यू नष्ट होने लगते हैं, जिससे उनमें अकड़न और दर्द रहती है। इसे ही अर्थराइटिस का दर्द कहते हैं।<br />अर्थराइटिस के लक्षण<br /> जोड़ों में दर्द रहना  सर्दियों में दर्द बढ़ जाना। दर्द की वजह से मूवमेंट्स में दिक्कत होना।<br /> सीढ़ियां चढ़ने या उतरने में ज्यादा पेन होना।<br /> शरीर में थकान और टूटने का एहसास होता है।<br />ये तरीके अपनाएं<br /> लगातार बैठे नहीं रहें, हर 30 से 45 मिनट के बाद उठकर कुछ मिनट टहलें।<br /> रोजाना तीन से पांच किमी साइकिल चलाएं।<br /> शुगर के साथ वजन भी कंट्रोल में रखें, रोजाना आधा घंटा टहलें।  कुर्सी आरामदायक हो और सीधे बैठकर काम करें।  दर्द निवारक गोली का उपयोग खुद से न करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 15:44:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व कोरोना की चपेट में, संक्रमितों की संख्या 34.64 करोड़ के पार, कोरोना के बढ़ते मामलों में अमेरिका पहले पायदान पर</title>
                                    <description><![CDATA[महामारी से 1,86,787 लोगों की मौत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82--%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-34-64-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0/article-4112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/america-corona.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। देश-विदेश में कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ रहा है। कोरोना के आंकड़ों के साथ इस महामारी से मरने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। विश्व में कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के मामले जहां 34.64 करोड़ से पार पहुंच गए हैं,  वहीं कई देशों में कोरोना का नया स्वरूप ओमिक्रॉन भी तेजी से फैल रहा है। दुनिया में पिछले 28 दिनों में कोरोना संक्रमण 6.43 करोड़ नए मामले सामने आये हैं और इस महामारी से 1,86,787 लोगों की मौत हो गई है। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के कोरोना वायरस रिसोर्स सेंटर के शनिवार के आंकड़ों के अनुसार कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 34,64,14,295 है और मृतकों के आंकड़े बढ़कर 55,84,890 तक पहुंच गए है। दुनिया भर में अभी तक कुल 9,77,25,98,635 लोगों को कोरेाना का टीका लगाया जा चुका है।<br /> <br /> विश्व भर में कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक मामले के साथ अमेरिका शीर्ष पर है। जहां इस महामारी से अभी तक 7.02 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं और 8,64,553 लोग काल के गाल में समा गए हैं।भारत इस महामारी के संक्रमण के मामले में दूसरे स्थान पर है, जहां कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर तीन करोड़ 89 लाख तीन हजार 731 हो गयी है। सक्रिय मामलों की संख्या 21 लाख 13 हजार 365 हो गयी है और मृतकों के आंकड़े 4,88,884  हो गए हैं। देश में अभी तक कुल तीन करोड़ 63 लाख एक हजार 482 लोग कोराना मुक्त हो गए हैं। संक्रमण के मामले में ब्राजील तीसरे स्थान पर आ गया है। देश में कोरोना वायरस की जद में अभी तक  2.37 करोड़ से अधिक लोग आ चुके है और यह वायरस अभी तक 6,22,875 लोगों की जान ले चुका है। फ्रांस संक्रमण के मामले में चौथे पायदान पर है। देश में अभी तक अभी तक 1.61 करोड से ज्यादा लोग इस जानलेवा वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और 1,29,338 लोगों की मौत हो गई है। कोरोना संक्रमण के मामले में ब्रिटेन पांचवें स्थान पर है। जहां अभी तक 1.58 करोड़ से अधिक लोग इस महामारी से संक्रमित हो चुके है जबकि मृतकों का आंकड़ा 1,54,001 तक पहुंच गया है। रूस कोरोना संक्रमण के मामले में छठे पायदान में आ चुका है। देश में अभी तक कोरोना संक्रमण से 1.08 करोड़ लोग प्रभावित हो चुके हैं और इस महामारी से अभी तक  3,18,200 लोग जान गंवा चुके हैं। तुर्की कोरोना संक्रमण के मामले में सातवें स्थान पर है जहां अभी तक 1,08,08,770 लोग संक्रमित हो गये हैं और इस महामारी से 85,600 लोगों की जान जा चुकी है। इटली 96.03 लाख से अधिक लोगों के संक्रमित होने के साथ आठवें स्थान पर है। देश में मृतकों का आंकड़ा 1,42,963 तक पहुंच गया है। स्पेन संक्रमितों के मामले में नौवें पायदान में पहुंच गया है जहां इस महामारी से अभी तक  89.75 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और इस महामारी से 91,741 लोगों को जान से हाथ धोने पड़े हैं। जर्मनी में वैश्विक महामारी से अभी तक  86.35 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने से यह दसवें पायदान पर है। देश में मृतकों को आंकड़ा 1,16,668 तक पहुंच गया है।<br /> <br /> भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में कुल 13.60 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं व 29,077 लोगों की मौत हो गई है। नेपाल में कुल संक्रमण 8.96 के पार जा चुके हैं व महामारी के कारण 11,635 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। बंगलादेश में कोरोना से 16.64 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा इस महमारी से 28,192 लोग जान गंवा चुके हैं। भारत के दक्षिण में स्थित देश श्रीलंका में छह लाख से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं जबकि 15,272 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा विश्व के बाकी देश कोरोना संक्रमण से प्रभावित हैं। महामारी का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jan 2022 14:37:44 +0530</pubDate>
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