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                <title>Global Peace - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत ने की काबुल में अस्पताल पर पाकिस्तान के हमले की कड़ी निंदा, बताया-कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य, समर्थन का किया ऐलान</title>
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                        <![CDATA[भारत ने काबुल के नशा मुक्ति अस्पताल पर पाकिस्तान के हवाई हमले को "कायरतापूर्ण और अमानवीय" बताया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नागरिकों और मरीजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता पर हमला और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा करार देते हुए दोषियों को जवाबदेह ठहराने की मांग की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-strongly-condemned-pakistans-attack-on-the-hospital-in-kabul/article-146821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/india-pakistan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक अस्पताल पर पाकिस्तान के हमले को कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि भारत सोमवार की रात काबुल के ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर पाकिस्तान के बर्बर हवाई हमले की कड़ी निंदा करता है। यह हिंसा का एक कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य है, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की जान चली गई। इस अस्पताल को किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता है।        </p>
<p>उन्होंने कहा, पाकिस्तान अब इस नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम देने की कोशिश कर रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा किया गया यह घृणित आक्रमण अफगानिस्तान की संप्रभुता पर एक स्पष्ट हमला है और क्षेत्रीय शांति तथा स्थिरता के लिए सीधा खतरा है। यह पाकिस्तान के लगातार लापरवाह व्यवहार और अपनी आंतरिक विफलताओं को सीमा पार हिंसा के बढ़ते हिंसक कृत्यों के माध्यम से छिपाने के बार-बार किए जाने वाले प्रयासों को दर्शाता है। </p>
<p>बयान में कहा गया है कि यह हमला रमजान के पवित्र महीने के दौरान किया गया, जो दुनिया भर के मुस्लिम समुदायों के लिए शांति, चिंतन और दया का समय होता है, जो इसे और भी निंदनीय बनाता है। ऐसा कोई धर्म, कोई कानून या कोई नैतिकता नहीं है जो किसी अस्पताल और उसके मरीजों को जानबूझकर निशाना बनाने को उचित ठहरा सके।    </p>
<p>उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस आपराधिक कृत्य के दोषियों को जवाबदेह ठहराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान द्वारा नागरिकों को निशाना बनाने का यह अंधाधुंध हमला तत्काल बंद हो। जायसवाल ने कहा कि भारत शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है और इस दुखद घड़ी में अफगानिस्तान के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने कहा, हम अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने अटूट समर्थन को भी दोहराते हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 14:37:05 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले को शशि थरूर ने ठहराया गलत, खामेनेई की मौत पर चुप्पी साधने पर केंद्र सरकार को घेरा</title>
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                        <![CDATA[सांसद शशि थरूर ने ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की निंदा करते हुए इसे "सैद्धांतिक रूप से गलत" बताया है। उन्होंने निर्दोष नागरिकों की मौत और भारतीय हितों पर खतरे पर चिंता जताई। थरूर ने कहा कि महात्मा गांधी की धरती होने के नाते भारत को इस वैश्विक अस्थिरता पर चुप रहने के बजाय अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shashi-tharoor-condemned-the-us-israeli-attack-on-iran-as-wrong/article-146365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/shashi-tharoor.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पार्टी के लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने कहा है कि अमेरिका तथा इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरना गलत था लेकिन ईरान ने भी उन देशों पर हमला कर गलत ही किया है जो युद्ध में शामिल ही नहीं हैं। शशि थरूर ने शुक्रवार को यहां संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान से खेलना ठीक नहीं है। उनका यह भी कहना था कि जो हालात अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले और फिर ईरान के पड़ोसी देशों में किए जा रहे हमले से बन रहे हैं वह गंभीर है। उनका कहना था कि इन सब स्थितियों के बीच भारत का चुप रहना भी ठीक नहीं है।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल के हमले को सैद्धांतिक रूप से गलत बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां आत्मरक्षा वाली बात को सही नहीं ठहराया जा सकता। उनका कहना कि जब बातचीत चल रही थी और ईरान बात मानने के लिए भी तैयार था तो इसमें आत्मरक्षा की बात कहां से आती है।</p>
<p>उन्होंने युद्ध में शामिल न होने वाले देशों पर ईरान के हमलों को भी गलत बताया और कहा कि निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है और इस कार्रवाई को कहीं से भी जायज नहीं कहा जा सकता है। हमलों में कुछ निर्दोष भारतीय नागरिकों की भी मृत्यु हुई है। ये सभी नागरिक निर्दोष थे और किसी के पक्ष में युद्ध नहीं लड़ रहे थे।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि अब हालात यह हो गये हैं कि कोई भी सुरक्षित नहीं है। यह भी खबर है कि एक टैंकर पर हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि यह टैंकर थाईलैंड के ध्वज वाला था। उनका कहना था कि इस तरह से हमले ठीक नहीं हैं। उन्होंने कहा "हम अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की धरती के लोग हैं। हम शांति चाहते हैं और हमारे विदेश मंत्री भी खाड़ी देशों के अपने समकक्षों से बात कर रहे हैं और मुझे लगता है कि भारत को और अधिक सक्रिय होना चाहिए। इस माहौल में हम चुप नहीं बैठ सकते हैं।"</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 16:40:05 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>खामेनेई की मौत पर चुप्पी को लेकर राहुल गांधी ने उठाए केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल, बोलें- ईरान संकट और &quot;लक्षित हत्या&quot; पर चुप्पी तोड़ें</title>
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                        <![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ईरानी नेता खामेनेई की हत्या को 'लक्षित हत्या' बताते हुए केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि खाड़ी में फंसे एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा दांव पर है। राहुल ने हिंसा की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता की रक्षा हेतु भारत को बोलने का साहस दिखाने का आह्वान किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-raised-questions-on-the-foreign-policy-of-the/article-145205"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि ईरान में लगातार गंभीर हो रहे हालात और उसके सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामेनेई की मौत लक्ष्य कर की गई हत्या है और हालात को देखते हुए केंद्र सरकार को इस पर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त करनी चाहिए।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि युद्ध के कारण जो हालात ईरान तथा अन्य खाड़ी देशों में बन रहे हैं उसे देखते हुए भारत को स्पष्ट नीति का पालन करना चाहिए। उनका कहना था कि ईरान और अमेरिका तथा इजरायल के बीच लगातार बढ़ रहे संघर्ष के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के सामने भी अनिश्चितता का संकट पैदा हो गया है।</p>
<p>राहुल गांधी ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक नाजुक क्षेत्र को व्यापक संघर्ष की तरफ धकेल रहा है। इस वजह से खाड़ी देशों में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों के साथ ही असंख्य लागों को अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को स्वाभाविक बताया लेकिन कहा कि संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले हमले संकट को और भी गंभीर बना देंगे। ईरान पर एकतरफा हमलों के साथ ही ईरान द्वारा पश्चिम एशिया के कई देशों पर किए जा रहे हमले, दोनों की निंदा की जानी चाहिए। उनका कहना था कि हिंसा ही हिंसा को जन्म देती है इसलिए संवाद और संयम ही शांति का एकमात्र मार्ग है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा, "भारत को नैतिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए। हमें अंतरराष्ट्रीय कानून और मानव जीवन की रक्षा में खुलकर बोलने का साहस होना चाहिए। हमारी विदेश नीति संप्रभुता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है और इसे सुसंगत रहना चाहिए। केंद्र सरकार को बोलना चाहिए। क्या वे विश्व व्यवस्था को परिभाषित करने के तरीके के रूप में किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या का समर्थन करते हैं। अब चुप्पी भारत की विश्व में प्रतिष्ठा को कम करती है।"</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:10:16 +0530</pubDate>
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                <title>शांति की अपील: पीएम मोदी ने की बेंजामिन नेतन्याहू से टेलीफोन पर बात, ताजा घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए युद्ध को जल्द खत्म करने पर दिया जोर</title>
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                        <![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई। मोदी ने युद्ध विराम की आवश्यकता पर जोर देते हुए आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया। ईरान पर हमलों के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली महत्वपूर्ण वार्ता है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modi-spoke-to-benjamin-netanyahu-on-telephone-expressed-concern/article-145108"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi-and-israel-pm.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए युद्ध को जल्द खत्म किए जाने की जरूरत पर बल दिया है। पीएम मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री के साथ रविवार रात हुई बातचीत के दौरान कहा कि आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। </p>
<p>ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद पीएम मोदी ने पहली बार नेतन्याहू से बात की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, इलाके के मौजूदा हालात पर बात करने के लिए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फ़ोन पर बात हुई। हाल के घटनाक्रम पर भारत की चिंताएं बताईं और आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। भारत ने लड़ाई जल्द खत्म करने की जरूरत दोहराई।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच इस टकराव के कारण पश्चिम एशिया में हालत चिंताजनक बने हुए हैं। पीएम मोदी ने रविवार रात केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में भी पश्चिम एशिया की स्थिति की समीक्षा की है </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 13:27:43 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों के बाद ग्रीनलैंड, डेनमार्क में भड़का विरोध प्रदर्शन, ग्रीनलैंडवासियों का है ग्रीनलैंड के नारे लगाए</title>
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                        <![CDATA[ग्रीनलैंड की संप्रभुता के समर्थन में कोपेनहेगन और नूक में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रधानमंत्री निल्सन ने ट्रंप की आयात शुल्क और अधिग्रहण की धमकी को सिरे से खारिज किया।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/protests-broke-out-in-denmark-after-us-president-trumps-statements/article-140011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/hands-off-greenland-demonstration-in-copenhagen.webp" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगन। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने के अमेरिकी प्रयासों और बयानों के विरोध में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के कई शहरों में विशाल विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। </p>
<p>डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के 'सिटी हॉल स्क्वायर' पर शनिवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 12 बजे (भारतीय समयानुसार अपराह्न 4:30 बजे) भारी भीड़ जमा हुई, जिसने अमेरिकी दूतावास तक मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों देशों के नागरिक शामिल हुए, जो अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे हुए थे। </p>
<p>इस बीच ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में भी दोपहर से ही लोग जुटना शुरू हो गए और ग्रीनलैंडवासियों का है ग्रीनलैंड के नारे लगाए। इस प्रदर्शन में ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक इनुइट गीत गाए और कई लोग मेक अमेरिका गो अवे (अमेरिका को वापस भेजो) लिखी हुई टोपियां पहने नजर आये। </p>
<p>प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि अमेरिका एक फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाएगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ग्रीनलैंड की खरीद को लेकर कोई समझौता नहीं होता है, तो एक जून से इस शुल्क को बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य के भीतर एक स्वशासी क्षेत्र है, जिसकी रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क सरकार के नियंत्रण में है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी इस द्वीप को खरीदने की इच्छा जतायी थी, लेकिन अब वे इसे हासिल करने के लिए अमेरिकी सेना के उपयोग सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। </p>
<p>इससे पहले बुधवार को वॉशिगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी, जिसमें ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर मौलिक असहमति बनी रही। इस बीच, ट्रंप की आयात शुल्क लगाने की धमकियों पर नॉर्डिक देशों और यूरोपीय संघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। डेनमार्क सहित कई यूरोपीय देशों ने ब्लैकमेल और अस्वीकार्य करार देते हुए एकजुट होकर जवाब देने की चेतावनी दी है। </p>
<p>डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने इस धमकी पर हैरानी जताते हुए कहा कि वे यूरोपीय आयोग के संपर्क में हैं। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने स्पष्ट किया कि सहयोगियों के बीच विवादों का समाधान दबाव के बजाय बातचीत से होना चाहिए। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने इसे सीधे तौर पर ब्लैकमेल बताते हुए कहा कि स्वीडन ऐसी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। </p>
<p>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी ट्रंप के कदम की आलोचना की है। मैक्रों ने कहा कि यूरोपीय देश इस पर समन्वित प्रतिक्रिया देंगे, जबकि स्टार्मर ने ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला डेनमार्क और वहां के लोगों द्वारा किए जाने की वकालत की। </p>
<p>यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम से ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में गिरावट आएगी। इस बीच, यूरोपीय संसद में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों को स्थगित करने और दबाव विरोधी रणनीति जैसे सख्त व्यापारिक हथियारों के इस्तेमाल की मांग तेज हो गयी है। साइप्रस की अध्यक्षता में रविवार को यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के राजदूतों की आपात बैठक बुलाई गयी है। </p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 18:54:08 +0530</pubDate>
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                <title>चीन का बड़ा दावा, जापान के पास इतना प्लूटोनियम कि रातो-रात बना ले परमाणु बम </title>
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                        <![CDATA[चीन ने एक रिपोर्ट जारी कर दावा किया कि जापान ने सैन्य महत्वाकांक्षाओं के चलते गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित किए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinas-big-claim-is-that-japan-has-enough-plutonium-to/article-139751"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cbina.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए थे। उसके बाद जापान ने प्रण लिया था कि वो अपनी सेना नहीं रखेगा। कई दशक बीतने के बाद अब जापान ना सिर्फ अपनी सेना बना रहा है, बल्कि चीन ने दावा किया है कि जापान, गुप्त तरीके से परमाणु बम का निर्माण कर रहा है।</p>
<p>हालांकि, परमाणु हथियारों को लेकर जापान का हमेशा से सख्त रूख रहा है और उसने फरवरी 1970 में क्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी पर साइन कर दिए थे। इसके अलावा जापान तीन नॉन-न्यूक्लियर सिद्धांतों का भी पालन करता है। ये तीन सिद्धांत हैं 1- न्यूक्लियर हथियार न रखना, 2- न्यूक्लियर हथियार ना बनाना, 3- जापानी इलाके में न्यूक्लियर हथियारों को आने की इजाजत न देना। जापान का ये सिद्धांत ऐतिहासिक था, लेकिन नये जियो-पॉलिटिकल हालातों और चीन के बढ़ते खतरों ने जापान को परमाणु हथियार बनाने के लिए मजबूर कर दिया है।</p>
<p>जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने पिछले दिनों कहा था कि चीन अगर ताइवान पर सशस्त्र हमला करता है, तो इससे जापान के लिए अस्तित्व का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे ऐसे हालात में जापानी सेना की जवाबी कार्रवाई की संभावना खुल जाती है। चीन के अलावा जापान को उत्तर कोरिया के हमले की भी आशंका रहती है, जिसके पास पहले से ही परमाणु हथियार हैं। रिपोर्ट है कि जापान ने चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों के खतरों को देखते हुए दूसरे देशों को जानलेवा हथियार एक्सपोर्ट करने पर खुद लगाई गई पाबंदियों में ढील दी है। </p>
<p>क्या जापान चोरी से बना रहा परमाणु बम?</p>
<p>चीन ने इस हफ्ते की शुरूआत में 30 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें उसने इंटरनेशनल कम्युनिटी से जापान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ ठोस और कड़े कदम उठाने की अपील की है। चीन के रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान ने शायद पहले ही गुपचुप तरीके से हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम बना लिया है और उसके पास कम समय में न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की टेक्नोलॉजिकल और आर्थिक क्षमताएं हैं। इसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की एक टिप्पणी का भी जिक्र किया गया है कि जापान के पास लगभग रातों-रात न्यूक्लियर हथियार बनाने की क्षमता है। बाइडेन ने यह जानकारी सबसे पहले जून 2016 में दिए एक इंटरव्यू में दी थी।</p>
<p>शी जिनपिंग के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए बाइडेन ने कहा था कि क्या होगा अगर जापान, जो कल न्यूक्लियर पावर बन सकता है, कल ही न्यूक्लियर हथियार बना ले? उनके पास लगभग रातों-रात ऐसा करने की क्षमता है। चीन ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसका शीर्षक जापान के दक्षिणपंथी ताकतों की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाएं: विश्व शांति के लिए एक गंभीर खतरा नाम से है, जो करीब 30 पन्नों का है।</p>
<p>यह रिपोर्ट चाइना आर्म्स कंट्रोल एंड डिसआमार्मेंट एसोसिएशन और न्यूक्लियर स्ट्रेटेजिक प्लानिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, जो चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉपोर्रेशन से जुड़ा एक थिंक टैंक है, उसने मिलकर तैयार किया है। इस डील में कहा गया है कि एनपीटी संधि के तहत जापान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं, कि वो परमाणु हथियारों का निर्माण नहीं करेगा, लेकिन उसने गुपचुप तरीके से न्यूक्लियर हथियारों पर रिसर्च और डवलपमेंट किया है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 11:39:44 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-इजरायल वार्ता: पीएम मोदी और नेतन्याहू ने की फोन पर बात, रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और गाजा शांति योजना के मुद्दों पर हुई चर्चा</title>
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                        <![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर नए साल की बधाई दी। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प और गाजा शांति योजना के कार्यान्वयन पर चर्चा की।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modi-and-netanyahu-spoke-on-phone-discussed-issues-related/article-138777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/india-israel.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भारत- इजरायल रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों और गाजा शांति योजना पर चर्चा की। बातचीत के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, मुझे अपने मित्र, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करके और उन्हें तथा इजराइल के लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं देकर प्रसन्नता हुई। हमने आने वाले वर्ष में भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।</p>
<p>हमने क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और आतंकवाद के खिलाफ और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ लडऩे के अपने साझा संकल्प की एक बार फिर पुष्टि की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि नेतन्याहू ने पीएम मोदी के साथ बातचीत के लिए टेलीफोन किया था। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ नववर्ष की शुभकामनाओं का आदान प्रदान किया और दोनों देशों के लोगों के लिए शांति और समृद्धि की कामना की।</p>
<p>उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, गहरे आपसी विश्वास और दूरदर्शी दृष्टिकोण के मार्गदर्शन में आने वाले वर्ष में भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के लिए साझा प्राथमिकताओं की पहचान की। उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति को दोहराया और इस खतरे के खिलाफ लडऩे की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।</p>
<p>प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पीएम मोदी को गाजा शांति योजना के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी दी। पीएम मोदी ने क्षेत्र में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में प्रयासों के लिए भारत के निरंतर समर्थन की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने संपर्क में बने रहने पर भी सहमति व्यक्त की।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 17:59:28 +0530</pubDate>
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