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                <title>महबूबा मुफ्ती ने ब्रिक्स में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा का किया स्वागत, भारत से गाजा-ईरान पर स्पष्ट रुख की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा का स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि भारत ने गाजा और ईरान में हुई हिंसा के खिलाफ मजबूत रुख क्यों नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और नागरिक सुरक्षा में दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mehbooba-mufti-welcomes-condemnation-of-pahalgam-terror-attack-in-brics/article-165519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/mehbooba-mufti-1.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पहलगाम आतंकी हमले की ब्रिक्स की ओर से निंदा किये जाने का स्वागत किया है। इसके साथ ही महबूबा ने सवाल उठाया कि समूह की अध्यक्षता कर रहे भारत ने वैश्विक स्तर पर हिंसा और मानवीय पीड़ा के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने के लिए इस मंच का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। राष्ट्रीय राजधानी में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नयी दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया गया। इसमें अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गयी, आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति की पुष्टि की गयी और आतंकवाद के वित्तपोषण तथा सुरक्षित ठिकानों सहित इसके सभी रूपों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया गया।</p>
<p>महबूबा कहा कि भारत को ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए 'साहस और वास्तविक नेतृत्व' का परिचय देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि साझा घोषणापत्र में गाजा के विनाश और ईरान पर अमेरिकी-इजरायल के सैन्य हमलों का भी खुलकर उल्लेख किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, "आतंकवाद की चयनात्मक निंदा नहीं की जा सकती। नागरिकों के खून की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती और अंतरराष्ट्रीय न्याय में दोहरा मापदंड नहीं हो सकता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आम नागरिकों पर हमलों की निंदा करने का सिद्धांत सार्वभौमिक होना चाहिए और यह प्रभावित लोगों की राष्ट्रीयता, धर्म या भू-राजनीतिक जुड़ाव पर निर्भर नहीं हो सकता। ब्रिक्स घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी है, अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया गया है और बातचीत, परामर्श एवं कूटनीति के माध्यम से विवादों को सुलझाने का आग्रह किया गया है। इसमें नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं से जुड़े हमलों पर चिंता जतायी गयी।</p>
<p>महबूबा ने कहा कि इन प्रतिबद्धताओं पर बिना किसी भेदभाव के अमल होना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के खात्मे और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो पीड़ितों के बीच कोई फर्क नहीं किया जा सकता और न ही सुविधा के हिसाब से विरोध जताया जा सकता है।" उन्होंने गाजा को मानवीय सहायता देने के ब्रिक्स के आह्वान का भी स्वागत किया और कहा कि केवल मानवीय राहत जवाबदेही तय करने और हिंसा को समाप्त करने का विकल्प नहीं हो सकती। गाजा पर घोषणापत्र के रुख में मानवीय सहायता का समर्थन शामिल है, जबकि पश्चिम एशिया पर इसकी व्यापक भाषा में संयम, नागरिक सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पालन का आह्वान किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "पहलगाम, गाजा या ईरान में आम नागरिकों की पीड़ा को अलग-अलग नैतिक या राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता। हर मानव जीवन पर एक ही मानक लागू होना चाहिए। बहुपक्षीय संस्थानों की विश्वसनीयता बिना किसी डर या पक्षपात के इस सिद्धांत को बनाये रखने की उनकी क्षमता पर निर्भर करती है।" उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में भारत का नेतृत्व एक सुसंगत, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत कर ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जिसमें आतंकवाद, नागरिकों पर हमलों और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा की जाती है, चाहे उन्हें कोई भी अंजाम दे। महबूबा ने कहा, "भारत को एक मिसाल कायम करनी चाहिए। अगर नागरिकों के खून की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती, तो न्याय में भी दोहरा मापदंड नहीं हो सकता।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 16:02:45 +0530</pubDate>
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर पर पश्चिमी देशों की दोहरी नीति पर जयशंकर ने उठाए सवाल, मजबूत साझेदारी पर आधारित संबंधों पर दिया जोर </title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पश्चिमी देशों के पाखंड की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो देश भारत को क्षेत्रीय तनाव पर उपदेश देते हैं, वे अपने क्षेत्र की हिंसा और जोखिमों को नजरअंदाज करते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jaishankar-raised-questions-on-the-dual-policy-of-western-countries/article-138784"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/s.-jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>लक्ज़मबर्ग। विदेश मंत्री डा. एस.जयशंकर ने लेटिन अमेरिका के घटनाक्रम का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी देशों के दोहरे मानदंडों की बुधवार को कड़ी आलोचना की। डा. जयशंकर ने भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत में भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच मजबूत साझेदारी पर आधारित संबंधों पर भी जोर दिया। बातचीत के दौरान विदेश मंत्री ने उन देशों पर निशाना साधा जो भारत को क्षेत्रीय तनावों पर उपदेश देते हैं लेकिन अपने ही क्षेत्रों में हो रही हिंसा और जोखिमों को नजरअंदाज करते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, कभी-कभी लोग कहते हैं, जैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कहा गया। अब अगर आप उनसे पूछें कि सच में आपको चिंता है, तो क्यों न आप अपने ही क्षेत्र को देखें? और खुद से पूछें कि वहां हिंसा का स्तर क्या है, कितने जोखिम उठाए गए हैं और हममें से बाकी लोग आपके कार्यों को लेकर कितने चिंतित हैं। लेकिन यही दुनिया की प्रकृति है। लोग जो कहते हैं, वह हमेशा वही नहीं होता जो वे करते हैं, और हमें इसे उसी भावना के साथ स्वीकार करना पड़ता है।</p>
<p>डा. जयशंकर की टिप्पणियों से उन देशों के प्रति उनकी नाराजगी झलकी जो ऐसे संघर्षों पर अनचाही सलाह देते हैं जिन्हें वे ठीक से समझते भी नहीं। उन्होंने कहा कि दूर बैठे देश अक्सर बिना जटिलताओं को समझे या अपने रणनीतिक हितों पर विचार किए बोलते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, अब दुनिया के बाकी हिस्सों में हो रहे घटनाक्रमों का इस पर कितना असर पड़ता है, यह कहना मुश्किल है। दूर बैठे लोग बातें करेंगे, कभी सोच-समझकर, कभी बिना सोचे, कभी अपने स्वार्थ में, तो कभी लापरवाही से। आज के समय में देश अधिक आत्मकेंद्रित हो रहे हैं और वही करेंगे जिससे उन्हें सीधा लाभ हो। वे आपको मुफ्त की सलाह देते रहेंगे। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का रुख इस बात पर निर्भर करता है कि वह किससे निपट रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, भारत उन देशों के साथ सकारात्मक और रचनात्मक रूप से जुडऩे को तैयार है जो नई दिल्ली के साथ सकारात्मक तरीके से काम करना चाहते हैं, लेकिन जो पाकिस्तान की तरह व्यवहार करते हैं, उनसे अलग ढंग से निपटना पड़ता है। पश्चिमी देशों की कथित दोहरी नीति की आलोचना से आगे बढ़ते हुए डा. जयशंकर ने भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच 78 वर्षों पुराने मजबूत और विकसित होते संबंधों को भी रेखांकित किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, हमने एक लंबा सफर तय किया है और हम लक्ज़मबर्ग को न केवल अपने आप में एक बहुत महत्वपूर्ण साझेदार मानते हैं, बल्कि यूरोपीय संघ के संदर्भ में भी, खासकर ऐसे समय में जब यूरोपीय संघ के साथ हमारे अपने संबंध भी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं।उन्होंने कहा, इस व्यापक रिश्ते को आकार देने में आपका जो प्रभाव है, जो समर्थन आप देते हैं, वह हमारे लिए बहुत मूल्यवान है। कई मायनों में आप भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को गहरा करने के समर्थक रहे हैं।</p>
<p>भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, आज लक्ज़मबर्ग में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मिलकर खुशी हुई। राजनीतिक, व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में लक्ज़मबर्ग के साथ हमारी साझेदारी के उल्लेखनीय विस्तार को रेखांकित किया। भारत-लक्ज़मबर्ग संबंधों को मजबूत करने में हमारे प्रवासी समुदाय के योगदान की सराहना करता हूँ। उन्होंने यूरोप के साथ भारत की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान जताया और इसे वैश्विक व्यवस्था में एक बार फिर से संतुलन का दौर बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, हर देश, हर क्षेत्र अपने हितों और गणनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है और यह देख रहा है कि हम क्या कर सकते हैं। भारत और यूरोपीय संघ को और करीब लाने की दिशा में मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूँ कि 2026 में यूरोप के साथ संबंधों में तेजी देखने को मिलेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 18:58:21 +0530</pubDate>
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