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                <title>India-EU Relations - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>India-EU Relations RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर पहली परामर्श समिति की बैठक: देश के स्थायी हितों की रोशनी में तय होगी विदेश नीति, विदेश मंत्री ने दी भारत-ईयू के मजबूत होते सहयोग पर जानकारी</title>
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                        <![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2026 की पहली परामर्श समिति बैठक में भारत-ईयू के मजबूत रिश्तों की सराहना की। ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत व्यापार, तकनीक और सुरक्षा पर सहमति बनी है। $136 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार के साथ, यह सौदा 2 अरब उपभोक्ताओं को जोड़कर वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक-चौथाई हिस्से को नई गति देगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-consultation-committee-meeting-on-india-european-union-relations-will/article-145018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वर्ष 2026 की भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर पहली परामर्श समिति की बैठक आयोजित की। इस बैठक में भारत-ईयू के मजबूत होते सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में आपकी लाभकारी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विदेश मंत्री ने शुक्रवार देर शाम को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट करते हुए बताया, भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर 2026 की पहली परामर्श समिति की बैठक आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी की मजबूत गति और व्यापार, टेक्नोलॉजी, सुरक्षा और गतिशीलता सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसके पारस्परिक लाभकारी पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक के एक प्रतिभागी ने कहा कि अब विदेश नीति के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों में अपूर्व सहमति है। वे मानते हैं कि हमारी विदेश नीति देश के स्थायी हितों की रोशनी में तय होने चाहिए, न कि दबाव समूहों की ब्लैक मेलिंग से। </p>
<p>उन्होंने कहा कि अब तुष्टीकरण के लिए विदेश नीति तय नहीं की जाएगी। उसका पैमाना होगा देश का हित।  एस जयशंकर ने बैठक में सक्रिय भागीदारी के लिए सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया। साथ ही इस मीटिंग की फोटोज भी सोशल मीडिया पर शेयर की। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल में ही मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), जिसे मदर ऑफ ऑल डील्स हुआ है। यह व्यापार समझौता हाल ही में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उसुर्ला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किया गया। इस समझौते से लगभग 2 अरब उपभोक्ता और दुनिया की कुल जीडीपी के करीब एक-चौथाई हिस्से को एक साथ लाने का वादा किया गया है। यूरोपीय संघ और भारत ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पहली बार 2007 में शुरू की थी, लेकिन कुछ मुद्दों के कारण 2013 में बातचीत स्थगित कर दी गई थी। जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू की गई।</p>
<p>यूरोपीय संघ एक समूह के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर का था। इसमें निर्यात करीब 76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60 अरब अमेरिकी डॉलर का था। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:50:48 +0530</pubDate>
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर पर पश्चिमी देशों की दोहरी नीति पर जयशंकर ने उठाए सवाल, मजबूत साझेदारी पर आधारित संबंधों पर दिया जोर </title>
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                        <![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पश्चिमी देशों के पाखंड की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो देश भारत को क्षेत्रीय तनाव पर उपदेश देते हैं, वे अपने क्षेत्र की हिंसा और जोखिमों को नजरअंदाज करते हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jaishankar-raised-questions-on-the-dual-policy-of-western-countries/article-138784"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/s.-jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>लक्ज़मबर्ग। विदेश मंत्री डा. एस.जयशंकर ने लेटिन अमेरिका के घटनाक्रम का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी देशों के दोहरे मानदंडों की बुधवार को कड़ी आलोचना की। डा. जयशंकर ने भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत में भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच मजबूत साझेदारी पर आधारित संबंधों पर भी जोर दिया। बातचीत के दौरान विदेश मंत्री ने उन देशों पर निशाना साधा जो भारत को क्षेत्रीय तनावों पर उपदेश देते हैं लेकिन अपने ही क्षेत्रों में हो रही हिंसा और जोखिमों को नजरअंदाज करते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, कभी-कभी लोग कहते हैं, जैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कहा गया। अब अगर आप उनसे पूछें कि सच में आपको चिंता है, तो क्यों न आप अपने ही क्षेत्र को देखें? और खुद से पूछें कि वहां हिंसा का स्तर क्या है, कितने जोखिम उठाए गए हैं और हममें से बाकी लोग आपके कार्यों को लेकर कितने चिंतित हैं। लेकिन यही दुनिया की प्रकृति है। लोग जो कहते हैं, वह हमेशा वही नहीं होता जो वे करते हैं, और हमें इसे उसी भावना के साथ स्वीकार करना पड़ता है।</p>
<p>डा. जयशंकर की टिप्पणियों से उन देशों के प्रति उनकी नाराजगी झलकी जो ऐसे संघर्षों पर अनचाही सलाह देते हैं जिन्हें वे ठीक से समझते भी नहीं। उन्होंने कहा कि दूर बैठे देश अक्सर बिना जटिलताओं को समझे या अपने रणनीतिक हितों पर विचार किए बोलते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, अब दुनिया के बाकी हिस्सों में हो रहे घटनाक्रमों का इस पर कितना असर पड़ता है, यह कहना मुश्किल है। दूर बैठे लोग बातें करेंगे, कभी सोच-समझकर, कभी बिना सोचे, कभी अपने स्वार्थ में, तो कभी लापरवाही से। आज के समय में देश अधिक आत्मकेंद्रित हो रहे हैं और वही करेंगे जिससे उन्हें सीधा लाभ हो। वे आपको मुफ्त की सलाह देते रहेंगे। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का रुख इस बात पर निर्भर करता है कि वह किससे निपट रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, भारत उन देशों के साथ सकारात्मक और रचनात्मक रूप से जुडऩे को तैयार है जो नई दिल्ली के साथ सकारात्मक तरीके से काम करना चाहते हैं, लेकिन जो पाकिस्तान की तरह व्यवहार करते हैं, उनसे अलग ढंग से निपटना पड़ता है। पश्चिमी देशों की कथित दोहरी नीति की आलोचना से आगे बढ़ते हुए डा. जयशंकर ने भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच 78 वर्षों पुराने मजबूत और विकसित होते संबंधों को भी रेखांकित किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, हमने एक लंबा सफर तय किया है और हम लक्ज़मबर्ग को न केवल अपने आप में एक बहुत महत्वपूर्ण साझेदार मानते हैं, बल्कि यूरोपीय संघ के संदर्भ में भी, खासकर ऐसे समय में जब यूरोपीय संघ के साथ हमारे अपने संबंध भी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं।उन्होंने कहा, इस व्यापक रिश्ते को आकार देने में आपका जो प्रभाव है, जो समर्थन आप देते हैं, वह हमारे लिए बहुत मूल्यवान है। कई मायनों में आप भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को गहरा करने के समर्थक रहे हैं।</p>
<p>भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, आज लक्ज़मबर्ग में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मिलकर खुशी हुई। राजनीतिक, व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में लक्ज़मबर्ग के साथ हमारी साझेदारी के उल्लेखनीय विस्तार को रेखांकित किया। भारत-लक्ज़मबर्ग संबंधों को मजबूत करने में हमारे प्रवासी समुदाय के योगदान की सराहना करता हूँ। उन्होंने यूरोप के साथ भारत की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान जताया और इसे वैश्विक व्यवस्था में एक बार फिर से संतुलन का दौर बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, हर देश, हर क्षेत्र अपने हितों और गणनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है और यह देख रहा है कि हम क्या कर सकते हैं। भारत और यूरोपीय संघ को और करीब लाने की दिशा में मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूँ कि 2026 में यूरोप के साथ संबंधों में तेजी देखने को मिलेगी।</p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 18:58:21 +0530</pubDate>
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