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                <title>अब गर्मियों की छुट्टियों में भी खुलेंगे कॉलेज, लगेंगी कक्षाएं </title>
                                    <description><![CDATA[समय पर पूरा होगा कोर्स, परीक्षा की हो सकेगी बेहतर तैयारी ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-colleges-will-open-even-during-summer-vacations--classes-will-be-held/article-110540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer58.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मियों की छुट्टियों में अब सरकारी कॉलेजों में सन्नाटा नहीं पसरेगा बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों से परिसर गुलजार रहेगा। इस बार दो महीने के समर विकेशन में कॉलेजों में यूजी व पीजी प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की सैकंड सेमेस्टर की कक्षाएं लगेंगी, ताकि समय पर कोर्स पूरा हो और परीक्षा की  बेहतर तैयारी हो सकेगी। वहीं, शिक्षकों को छुट्टियों में ड्यूटी करने की एवज में परिलाभ दिया जाएगा। इस संबंध में आयुक्तालय की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी हुए हैं।  दरअसल, राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों में ग्रीष्मावकाश दो महीने तक रहेगा। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और शैक्षणिक सत्र भी पटरी पर लाया जा सके। इसी उद्देश्य से आयुक्तालय ने यह दिशा निर्देश जारी किए हैं।  </p>
<p><strong>यूजी व पीजी सैकंड सेमेस्टर की लगेंगी कक्षाएं</strong><br />राजकीय महाविद्यालयों में 1 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश रहेगा। ऐसे में दो महीने तक विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए गर्मियों की छुट्टियों में यूजी प्रथम वर्ष व पीजी प्रिवियस की सैकंड सेमेस्टर की कक्षाएं लगाई जाएगी। इससे विद्यार्थियों का सिलेबस समय पर पूरा हो सकेगा और परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से हो सकेगी। क्योंकि, परीक्षा आयोजित करवाने के लिए 180 दिन कक्षाएं लगना जरूरी है। जबकि, प्रथम सेमेस्टर में कक्षाएं देरी से शुरू होने के कारण परीक्षा के एन वक्त पर भी सिलेबस पूरे नहीं हो सके थे। ऐसे में विद्यार्थियों को पेपर के दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। </p>
<p><strong>सेमेस्टर प्रणाली में नहीं ग्रीष्मावकाश </strong><br />आयुक्तालय के क्षेत्रीय सहायक निदेशक प्रो. विजय पंचौली ने बताया कि सेमेस्टर प्रणाली में ग्रीष्मावकाश नहीं रहा है। पहले वार्षिक प्रणाली हुआ करती थी तो कॉलेजों में दो माह का ग्रीष्मावकाश रहता था। लेकिन, सेमेस्टर होने से हर छह माह में पेपर होने हैं। ऐसे में दो माह छुट्टियां रहेंगी तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। ऐसे में आयुक्तालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार शिक्षकों को रोका जाएगा, ताकि विद्यार्थियों का सिलेबस समय पर पूरा हो सके। हालांकि, आवश्यक कार्य होने पर शिक्षक कुछ दिनों की छुट्टी लेकर जा सकते हैं।  लेकिन, दो महीने अवकाश नहीं ले सकते।  </p>
<p><strong>शिक्षकों को मिलेगा परिलाभ </strong><br />ग्रीष्मावकाश अवधि के दौरान सेमेस्टर कक्षाओं का अध्यापन कार्य, परीक्षा कार्य, वार्षिक परीक्षा व आगामी अकादमिक सत्र के प्रवेश संबंधित कार्यों के लिए प्राचार्य द्वारा आवश्यक कार्यों के लिए संकाय सदस्यों को गर्मी की छुट्टियों में रोक सकते हैं। जिसके लिए शिक्षकों को उपार्जित अवकाश व पीएल का लाभ दिया जाएगा।  हालांकि, संबंधित प्राचार्य को इसके लिए आयुक्तालय से स्वीकृति लेनी होगी। </p>
<p><strong>सेशन पटरी पर लाने की कवायद</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर राजकीय गवर्नमेंट कॉलेज कॉलेज के शिक्षक ने बताया कि वर्तमान में कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र निर्धारित समय से करीब दो माह देरी से चल रहा है, जो इस कवायद से पटरी पर लाया जा सकता है। बता दें, महाविद्यालयों का शैक्षणिक सत्र 1 जुलाई से शुरू होता है, जो अगले वर्ष की 30 अप्रेल तक रहता है। सत्र नियमित होने से समय पर पेपर होने व परीक्षा परिणाम जारी हो सकेंगे।  </p>
<p>कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा इस वर्ष नई शिक्षा नीति के तहत यूजी में प्रथम व द्वितीय वर्ष में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। हर 6-6 माह में पेपर होने हैं। जिसके तहत प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम अभी चल रहे हैं, लेकिन राजसेस के कई कॉलेजों में सिलेबस समय पर पूरे नहीं हो सके। इस तरह की परेशानी सैकंड सेमेस्टर में न हो, इस दिशा में आयुक्तालय का दो माह के ग्रीष्मावकाश में कक्षाएं लगाने का कदम छात्र हित में है। <br /><strong>- आशीष मीणा, निवृतमान छात्रसंघ अध्यक्ष, राजकीय महाविद्यालय </strong></p>
<p>ग्रीष्मावकाश में सैकंड सेमेस्टर की कक्षाएं लगने से सिलेबस समय पर पूरा हो सकेगा। परीक्षा की बेहतर तरीके से तैयारी भी हो सकेगी। ऐसे में सरकार का निर्णय सराहनीय है। <br /><strong>- सौरभ कुमार, प्रथम वर्ष, राजकीय कला महाविद्यालय</strong></p>
<p>विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन मिले, यह सरकार की पहली प्राथमिकता है। गर्मियों की छुट्टियों में कक्षाएं लगने से समय पर कोर्स पूरा हो सकेगा। वहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से परीक्षा की बेहतर तैयारी होगी। छुट्टियों में कक्षाएं लेने व अन्य कार्यों में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को नियमानुसार परिलाभ मिलेगा।  वर्तमान में एग्जाम चल रहे हैं, जो मई से पहले पूरे हो जाएंगे। इसके बाद फिर से सैकंड सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू होगी फिर जुलाई से एडमिशन प्रक्रिया भी प्रारंभ होगी। <br /><strong>- प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Apr 2025 15:58:29 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - प्रथम सेमेस्टर की फिर से लगेगी कक्षाएं, कोर्स अधूरा रहने से परेशान थे विद्यार्थी</title>
                                    <description><![CDATA[राजसेस कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए खुश खबरी है। परीक्षा से पहले बंद की गई फर्स्ट ईयर के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं डेढ़ माह बाद फिर से संचालित होंगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---classes-of-first-semester-will-be-held-again/article-104878"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजसेस कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए खुश खबरी है। परीक्षा से पहले बंद की गई फर्स्ट ईयर के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं डेढ़ माह बाद फिर से संचालित होंगी। जिससे न केवल अधूरे कोर्स पूरे हो सकेंगे बल्कि परीक्षा पैटर्न भी विद्यार्थी समझ सकेंगे। दरअसल, राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित सरकारी कॉलेजों में विद्या संबल शिक्षकों को 90 दिन का हवाला देते हुए गत 2 जनवरी से प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं लेने से मना कर दिया था। जबकि, 30 से 40 प्रतिशत कोर्स अधूरा था। परीक्षा से पहले क्लासें बंद होने से विद्यार्थी तनाव में  आ गए। इस पर दैनिक नवज्योति ने छात्र-छात्राओं की परेशानियों को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित आयुक्तालय का ध्यान आकर्षित किया। इस पर कॉलेज  शिक्षा आयुक्तालय ने 18 फरवरी को प्रदेश के समस्त कॉलेज प्राचार्यों को पत्र जारी कर प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं संचालित करवाकर परीक्षा से पहले कोर्स पूरा करवाने के निर्देश दिए। आदेश के बाद विद्यार्थियों ने दैनिक नवज्योति का आभार जताया। </p>
<p><strong>परीक्षा से पहले कोर्स पूरा कराने के निर्देश</strong><br />राजसेस कॉलेजों में बीच सत्र में ही प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद कर दी गई थी। इसके कुछ दिनों बाद तृतीय सेमेस्टर की क्लासें भी बंद कर दी गई। जबकि, 30 से 40 प्रतिशत कोर्स अधूरे थे। इस पर दैनिक नवज्योति में लगातार खबरें प्रकाशित होने पर आयुक्तालय ने मंगलवार को पत्र जारी कर रेस सेंटर से शिक्षक लगाकर संबंधित विषयों के अधूरे कोर्स पूरा करवाने के कालेज प्राचार्यों को निर्देश जारी किए। ऐसे में प्रथम सेमेस्टर के साथ तृतीय सेमेस्टर की कक्षाएं फिर से शुरू हो सकेगी।</p>
<p><strong>छात्राओं ने नवज्योति का जताया आभार</strong><br />शहर में राजकीय कन्या महाविद्यालय रामपुरा में गत 2 जनवरी से ही बीए प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद कर दी गई, जबकि, कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा अब एग्जाम तिथि भी घोषित नहीं की गई, इससे पहले ही बीच सत्र में कक्षाएं बंद होने से छात्राएं परेशान थी। रिजल्ट बिगड़ने का डर सताने लगा। इस पर छात्राओं ने कॉलेज परिसर में धरना प्रदर्शन कर फिर से कक्षाएं लगवाने की मांग की थी। लेकिन, ध्यान नहीं दिया गया। कॉलेज प्रशासन की बेरुखी पर दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर शिक्षा उच्चाधिकारियों को छात्राओं की समस्या से अवगत कराया। इस पर आयुक्तालय ने कक्षाएं लगातर कोर्स पूरा करवाने के निर्देश दिए जाने से छात्राओं को राहत मिली। इसके लिए छात्राओं ने दैनिक नवज्योति का आभार जताया। </p>
<p><strong>रेस सेंटर से लगाए जाएंगे शिक्षक</strong><br />कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय जयपुर के संयुक्त निर्देश  एचआरडी ने प्राचार्यों के नाम पत्र जारी कर निर्देश दिए कि जिन राजकीय महाविद्यालयों  में गेस्ट फैकल्टी द्वारा प्रथम व तृतीय सेमेस्टर का पाठ्यक्रम पूरा नहीं करवाया गया है, उन महाविद्यालयों में संबंधित विषयों का कोर्स परीक्षा से पहले पूरा करवाने के लिए जिले में संचालित रेस सेंटर से शिक्षकों की व्यवस्था कर शेष पाठ्यक्रम परीक्षा से पहले पूर्ण करवाए जाए। इस पर कॉलेज प्राचार्यों ने रेस सेंटर को शिक्षक उपलब्ध करवाने के लिए पत्र भी भेज दिए हैं। </p>
<p><strong>परीक्षा पैटर्न समझने का मिलेगा मौका </strong><br />छात्रा प्रतिनिधि अनसुईया मीणा, दिव्यांशी का कहना है, आखिरकार आयुक्तालय के निर्णय से छात्राओं में  खुशी की लहर है। डेढ़ माह बाद फिर से कक्षाएं शुरू होने से न केवल सिलेबस पूरा हो सकेगा बल्कि पहली बार सेमेस्टर एग्जाम देने विद्यार्थियों को परीक्षा पैटर्न समझने का मौका मिलेगा। एग्जाम की तैयारी होने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और परिणाम में सुधार होगा। </p>
<p>विद्यार्थियों के हित में आयुक्तालय ने कॉलेज प्राचार्यों  को रेस सेंटर से शिक्षक लगाकर संबंधित विषयों के अधूरे कोर्स पूरा करवाने के निर्देश दिए हैं। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय</strong></p>
<p>रेस सेंटर से शिक्षक लगाकर प्रथम व तृतीय सेमेस्टर  के विद्यार्थियों का अधूरा कोर्स पूरा करवाने से संबधित आयुक्तालय के निर्देश मिले हैं। जिसकी शत-प्रतिशत पालना की जा रही है। वहीं, नोड़ल महाविद्यालय को भी पत्र लिखा जा चुका है। आगे की कार्यवाही उन्हीं के द्वारा की जाएगी। <br /><strong>- डॉ. राजेश चौहान, प्राचार्य रामपुरा कला कन्या महाविद्यालय </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Feb 2025 12:56:45 +0530</pubDate>
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                <title>आयुक्तालय का दोहरा मापदंड असमंजस के भंवर में फंसी उच्च शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के राजसेस कॉलेजों में प्रथम सेमेस्टर में 30 से 40% कोर्स अधूरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/higher-education-stuck-in-confusion-due-to-double-standards-of-commissionerate/article-101400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/555466.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के दोहरे मापदंड के भंवर में उच्च शिक्षा ऐसी फंसी कि क्वालिटी एजुकेशन के सारे दावे हवा हो गए। असमंजस से भरी नीतियों ने विद्यार्थियों व शिक्षकों को मझघार में लाकर छोड़ दिया। हाड़ौती के राजसेस कॉलेजों में एक तरफ 90 कलांश पूरे होने पर फर्स्ट इयर के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं कोर्स पूरा होने से पहले ही बंद करवा दी गई। जिसके पीछे  कॉलेज प्राचार्यों द्वारा आयुक्तालय के आदेश की पालना का हवाला दिया गया। जबकि, आरटीआई में पूछे सवाल के जवाब में आयुक्तालय ने कोर्स पूरा होने या विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा तिथि घोषित होने तक कक्षाएं जारी रखने की बात कही है। ऐसे में राजसेस कॉलेजों में न तो अभी तक कोर्स पूरा हुआ और न ही कोटा विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा तिथि घोषित की गई। इसके बावजूद प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद कर दी गई। सेमेस्टर कक्षाओं के संचालन में आयुक्तालय के दोहरे रवैये से विद्यार्थी व शिक्षक दोनों का ही भविष्य दांव पर लग गया। </p>
<p><strong>परीक्षा सिर पर + कोर्स अधूरा = तनाव में विद्यार्थी</strong><br />हाड़ौती के कई राजसेस कॉलेजों में यूजी प्रथम सेमेस्टर में 30 से 40 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। वहीं, फरवरी के प्रथम सप्ताह में सेमेस्टर के एग्जाम होने हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले ही कक्षाएं बंद करवा देने से विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सताने लगा है। विद्यार्थियों का कहना है कि 5 में अभी तक 3 यूनिट ही पूरी हो सकी है। दो यूनिट अभी भी अधूरी है, ऐसी स्थिति में विद्या संबल शिक्षकों को कक्षाएं लेने से मना कर दिया। परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे। यदि, अधूरे कोर्स में से ही परीक्षा में प्रश्न आ गए तो क्या लिखेंगे। इन दिनों विद्यार्थी इन्हीं सवालों के चलते तनाव से गुजर रहे हैं। </p>
<p><strong>असमंजस का पटाक्षेप करे आयुक्तालय</strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा में कार्यरत विद्या संबल के सहायक आचार्य डॉ. हनीफ कहते हैं  एक तरफ तो आरटीआई के जवाब में आयुक्तालय द्वारा सेमेस्टर प्रणाली के तहत कोर्स पूरा होने या विवि द्वारा एग्जाम शेड्यूल जारी होने तक अध्यापन जारी रखने की बात कही जा रही है। वहीं, दूसरी ओर राजसेस कॉलेजों के प्राचार्यों को 90 कलांश पूरे होने का हवाला देकर प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद करवाई जा रही। जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। सेमेस्टर कक्षाओं के संचालन में आयुक्तालय के दोहरे नजरिए से असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में सभी राजसेस कॉलेजों के प्राचार्यों को कॉमन आदेश जारी कर छात्रहित में असमंजस का पटाक्षेप करना चाहिए। </p>
<p><strong>90 कलांश का प्रावधान नहीं, मनमर्जी चल रही</strong><br />राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी शैक्षिक महासंघ की प्रदेशाध्यक्ष डॉ. शर्मिला कुमारी ने बताया कि राजसेस कॉलेजों में 90 घंटे कक्षाएं संचालित किए जाने का कोई नियम नहीं है। बल्कि 24 सप्ताह या 28 फरवरी दोनों में से जो भी पहले हो, तब तक कक्षाएं संचालित किए जाने का प्रावधान है। आरटीआई में दिए सवाल के जवाब में आयुक्तालय ने 26 जून 2024 के नियमों का ही हवाला दिया है। जिसके तहत कोर्स पूरा होने अथवा विवि द्वारा परीक्षा तिथि घोषित होने तक कक्षाएं संचालित करने की बात कही गई है। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन अपनी मनमर्जी चला रहे हैं और विद्या संबल शिक्षकों को प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं न लेने के निर्देश दिए हैं। जब आयुक्तालय परीक्षा शुरू होने तक अध्यापन करवाने की बात कह रहा है तो कॉलेज प्राचार्य किस आदेश पर प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद करवा रहे हैं, यह समझ से परे हैं। आयुक्तालय को विद्यार्थी हित में उचित निर्णय लेना चाहिए। </p>
<p><strong>आयुक्तालय के संयुक्त निदेशक ने आरटीआई में यह दिया जवाब </strong><br />राजकीय कन्या महाविद्यालय दतवास टोंक में विद्या संबल के सहायक आचार्य देवनारायण ने 20 दिसम्बर 2024 को आरटीआई लगाकर दो सवालों के जवाब मांगे थे। जिसमें दूसरा सवाल- सेमेस्टर प्रणाली में अध्यापन कब तक और किस आधार पर करवाया जाएगा? जिसके जवाब में कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के संयुक्त निदेशक प्रो. केशव शर्मा ने कहा, सेमेस्टर प्रणाली के तहत प्रत्येक सेमेस्टर की परीक्षा प्रारंभ होने अथवा पाठ्यक्रम पूर्ण होने तक ही अध्यापन कार्य करवाया जाना सुनिश्चित किए जाने के निर्देश है। इसके बावजूद कॉलेजों में प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद करवा दी गई। शिक्षक देव नारायण का कहना है कि आयुक्तालय के नियमों की कहीं भी पालना नहीं हो रही है। 90 कलांश का आयुक्तालय में कोई प्रावधान नहीं है। प्राचार्यों की मनमर्जी से विद्यार्थियों व शिक्षकों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। </p>
<p><strong>इन कॉलेजों में प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद</strong><br />विद्या संबल शिक्षकों के अनुसार, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा कोटा, राजकीय कला महाविद्यालय तालेड़ा एवं हिंडोली में प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर की  कक्षाएं परीक्षा तिथि घोषित होने से पहले ही बंद करवा दी गई है। जबकि, सभी कॉलेजों में कोर्स अधूरे हैं। </p>
<p><strong>क्या कहतीं हैं छात्राएं</strong><br />प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं फरवरी में होनी है। अभी 20 से 25 दिन का समय है, ऐसे में अधूरे कोर्स पूरे करवाए जा सकते हैं। प्राचार्य को लिखित में शिकायत दी है। 90 कलांश पूरे होने का हवाला देकर कक्षाएं बंद करवा दी गई है, जबकि इन दिनों में कॉलेज में कई एक्टिविटियां हुई हैं, जिसकी वजह से क्लासें नहीं लगी हैं। छात्राएं आखिरी दो यूनिट अधूरी होने से परेशान हैं। ज्योग्राफी व ड्रॉइंग की फाइलें भी नहीं बनी हैं। ऐसे में कक्षाएं लगवाकर कोर्स पूरा करवाया जाए।  <br /><strong>- द्विवयांशी मुराड़िया, यूनिट प्रेसिडेंट एबीवीपी रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>हमारा आधा सिलेबस अभी बाकी है। कक्षाएं नहीं लगने से एग्जाम की तैयारी नहीं हो पा रही। यदि,अधूरी ईकाइयों से पेपर में प्रश्न आ गए तो क्या लिखेंगे। कॉलेज प्रशासन को छात्राओं के हित को देखते हुए कक्षाएं संचालित करवाई जानी चाहिए।<br /><strong>- लक्षमी मीणा, छात्रा बीए प्रथम सेमेस्टर, रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />विद्या संबल पर शिक्षक लगाने, हटाने या कक्षाएं संचालित किए जाने से संबंधित निर्णय के लिए सर्वोधिकार निदेशालय कॉलेज शिक्षा को प्राप्त है लेकिन जिले स्तर पर नोडल प्राचार्य को यह अधिकार दिए गए हैं कि वह इन नियमों को राजसेस कॉलेजों की समयकाल परिस्थितियों के अनुसार लागू कर सकते हैं या करवा सकते हैं।  <br /><strong>- डॉ. राजेश चौहान, प्राचार्य रामपुरा कॉलेज </strong></p>
<p>21 जून 2024 के आयुक्तालय के दिशा-निर्देशानुसार  ही कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>- प्रो. सीमा चौहान, नोडल प्राचार्य जेडीबी आर्ट्स कॉलेज </strong></p>
<p>आयुक्तालय से सीधे ही प्राचार्यों को दिशा -  जारी किए जाते हैं। सहायक निदेशक कार्यालय को इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। आयुक्तालय से बात कर विद्यार्थियों के हित में असमंजस की स्थिति को स्पष्ट किया जाएगा।<br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jan 2025 14:46:08 +0530</pubDate>
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                <title>परीक्षा से पहले ही बंद कर दी फर्स्ट सेमेस्टर की कक्षाएं</title>
                                    <description><![CDATA[90 घंटे ही कक्षाएं संचालित करने के नियमों का हवाला देकर बंद की क्लासें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/first-semester-classes-were-closed-before-the-examination/article-100008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित राजकीय महाविद्यालयों में परीक्षा से पहले ही बीए प्रथम वर्ष की कक्षाएं बंद कर दी गई हैं। जबकि, सेमेस्टर परीक्षाएं सिर पर हैं और 30 से 40 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। इसके बावजूद कक्षाएं संचालित नहीं करवाई जा रही है। विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सताने लगा है। दरअसल, राजसेस कॉलेजों में बीए फर्स्ट इयर के प्रथम सेमेस्टर में कॉलेज प्रशासन द्वारा 90 दिन ही कक्षाएं संचालित किए जाने के नियमों का  हवाला देकर शिक्षकों को कक्षाएं न लेने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में विद्या संबल शिक्षकों द्वारा कक्षाएं नहीं लेने से शिक्षण व्यवस्था डगमगा गई है। </p>
<p><strong>एग्जाम तिथि घोषित होने तक चलती हैं कक्षाएं</strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा के सहायक आचार्य डॉ. मोहम्मद हनीफ खान बताते हैं, सेमेस्टर प्रणाली के तहत परीक्षा तिथि घोषित होने से पहले तक कक्षाएं संचालित किए जाने और परीक्षा समाप्त होने के अगले दिन से ही दूसरे सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू करने का प्रावधान है। गत वर्ष सत्र 2023-24 में भी इसी प्रणाली के तहत कक्षाएं संचालित की गई थी। इस बार 90 घंटे ही क्लासें लगाने का  हवाला देते हुए परीक्षा की तिथि घोषित होने से पूर्व ही कक्षाएं लेने से मना कर दिया गया।  जबकि, अभी 30 प्रतिशत से ज्यादा कोर्स अधूरे हैं।  </p>
<p><strong>24 सप्ताह या 28 फरवरी तक संचालित का नियम</strong><br />राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी शैक्षिक महासंघ की प्रदेशाध्यक्ष डॉ. शर्मिला कुमारी व शाहबाद कॉलेज की सहायक आचार्य डॉ. ज्योति कुमारी ने बताया कि राजसेस कॉलेजों में 90 घंटे कक्षाएं संचालित किए जाने का कोई नियम नहीं है। बल्कि 24 सप्ताह या 28 फरवरी दोनों में से जो भी पहले हो, तब तक कक्षाएं संचालित किए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन अपनी मनमर्जी चला रहे हैं और विद्या संबल शिक्षकों को प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं न लेने के निर्देश दिए गए हैं। जबकि, सिलेबस ही नहीं, प्रेक्टिकल व मिड टर्म भी अधूरे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>परीक्षा परिणाम बिगड़ने का सता रहा डर </strong><br />हाड़ौती के कई राजसेस कॉलेजों में यूजी प्रथम सेमेस्टर में तीस से चालीस प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। वहीं, जनवरी के आखिरी या फरवरी के प्रथम सप्ताह में सेमेस्टर के एग्जाम होने हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले ही कक्षाएं बंद करवा देने से विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सताने लगा है। विद्यार्थियों का कहना है कि 5 में अभी तक 3 यूनिट ही पूरी हो सकी है। दो यूनिट अभी भी अधूरी है, ऐसी स्थिति में विद्या संबल शिक्षकों को कक्षाएं लेने से मना कर दिया। ऐसे में परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे। </p>
<p>बीए प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं 2 जनवरी से ही बंद करवा दी गई है। जबकि, 30 से 40% कोर्स अधूरा हैं। परीक्षा की तिथियां घोषित होने तक कक्षाएं संचालित करवाई जानी चाहिए, ताकि एग्जाम से पहले तक सिलेबस पूरा हो सके। <br /><strong>- अनसुईया मीणा, छात्रा प्रतिनिधि रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>हमारा आधा सिलेबस अभी बाकी है। कक्षाएं नहीं लगने से एग्जाम की तैयारी नहीं हो पा रही। यदि,अधूरी ईकाइयों से पेपर में प्रश्न आ गए तो क्या लिखेंगे। कॉलेज प्रशासन को छात्राओं के हित को देखते हुए कक्षाएं संचालित करवाई जानी चाहिए।<br /><strong>- लक्ष्मी मीणा, छात्रा बीए प्रथम सेमेस्टर, रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>कोटा विवि द्वारा इन दिनों एग्जाम फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। अभी परीक्षा की तिथियां घोषित नहीं हुई है, फिर कक्षाएं कैसे बंद करवा सकते हैं। छात्राएं फीस देकर कॉलेज में अध्ययनरत हैं, ऐसे में कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह समय पर कोर्स पूरा करवाए। नियमित कक्षाएं लगवाई जाए।<br /><strong>- देवंती कहार, छात्रा प्रतिनिधि रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>अचानक से कक्षाएं बंद कर देना, कहां का इंसाफ है। स्टूडेंट्स पढ़ना चाहते हैं और टीचर पढ़ाना, इसके बावजूद कक्षाएं नहीं लगवाई जा रही। कई टॉपिक ऐसे हैं समझ में नहीं आ रहे, कक्षाएं नहीं लगने से कोई समझाने वाला भी नहीं है। <br /><strong>- खुशबू खत्री, छात्रा प्रथम सेमेस्टर </strong></p>
<p>हमारे यहां आॅफिशियली 11 दिसम्बर से ही प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं बंद करवा दी गई है। राजसेस कॉलेजों में परमानेंट फैकल्टी नहीं होने से हर साल ऐसी समस्याओं से विद्यार्थियों को जूझना पड़ता है। <br /><strong>- हरिप्रकाश कुमार, तालेड़ा कॉलेज </strong></p>
<p><strong>नियमानुसार ही बंद की कक्षाएं</strong><br />बीए प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं 90 घंटे संचालित किए जाने का ही प्रावधान है। आयुक्तालय के निर्देशानुसार ही कार्य किया जा रहा है। यह केवल रामपुरा कॉलेज में ही नहीं संभाग से सभी राजसेस कॉलेजों में 90 कलाशं पूरे होने पर नियमानुसार कक्षाओं का संचालन बंद किया गया है। ताकि, बच्चे घर पर परीक्षा की तैयारी कर सके। <br /><strong>- प्रो. राजेश चौहान, प्राचार्य राज. कन्या महाविद्यालय रामपुरा</strong></p>
<p>आयुक्तालय के निर्देशानुसार ही कार्य किया जा रहा है। हमारे यहां प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं संचालित की जा रही है। <br /><strong>- प्रो. बीके शर्मा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय तालेड़ा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर के लिए लगाए गए विद्या संबल शिक्षकों से 90 कलांश में ही निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करवाने के निर्देश आयुक्तालय द्वारा प्राचार्यों को दिए गए हैं। यदि, पाठ्यक्रम अधूरे रहने की शिकायत पूरी कक्षा द्वारा की जाती है तो आयुक्तालय से निर्देश प्राप्त कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।<br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, सहायक क्षेत्रिय निदेशक, कॉलेज आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2025 14:38:20 +0530</pubDate>
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                <title>डेढ़ माह में परीक्षा, कक्षाएं खाली, बढ़ी धड़कनें</title>
                                    <description><![CDATA[विद्या संबल पर भी नहीं लगा पा रहे फैकल्टी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exams-in-one-and-a-half-month--classes-empty--heartbeats-increased/article-94951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>क ोटा। स्नातक प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का काउंट-डाउन शुरू हो गया है। इसी के साथ विद्यार्थियों की धड़कनें भी तेज हो गई है। क्योंकि, डेढ़ माह बाद सेमेस्टर एग्जाम शुरू होने हैं लेकिन संभाग के दस राजकीय महाविद्यालयों में आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं नहीं लग रही। ऐसे में परीक्षा से पहले सिलेबस पूरे नहीं होने की चिंता से विद्यार्थी तनाव से गुजर रही है।  दरअसल, हाड़ौती के चारों जिलों में करीब 44 सरकारी महाविद्यालय हैं। जिनमें से 10 ऐसे हैं जहां आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं है। मजबूरन, विद्यार्थियों को महंगे दामों पर टयूशन का सहारा लेना पड़ता है। सरकार की अनदेखी का खामियाजा हर साल विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>भूगोल से अर्थशास्त्र तक पढ़ाने वाला कोई नहीं</strong><br />संभाग के 10 राजकीय महाविद्यालयों में आधा दर्जन विषयों के शिक्षक नहीं है। जिसकी वजह से उनकी कक्षाएं नहीं लगती है। जबकि, कॉलेज प्रशासन  द्वारा छात्रों से एडमिशन व एग्जाम फीस पूरी वसूली जाती है।  हालात यह हैं, प्रायोगिक विषयों के प्रेक्टिल करवाने से लेकर पेपर पैटर्न समझाने वाला तक कोई नहीं है। भूगोल से लेकर अर्थशास्त्र तक जैसे कठिन विषयों को पढ़ाने वाला नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सता रहा है।</p>
<p><strong>यहां इन विषयों की नहीं लगती कक्षाएं </strong><br />कोटा जिले के राजकीय महाविद्यालय इटावा में राजनेतिक राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी, संस्कृत, सांगोद में राजनेतिक विज्ञान, ज्योग्राफी, रामगंजमंडी में अंगे्रजी, अटरू में भूगोल, अंगे्रजी, बारां गवर्नमेंट कॉलेज में इतिहास, केलवाड़ा में अंग्रेजी, शाहबाद में अर्थशास्त्र,गवर्नमेंट कॉलेज बारां में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन व इतिहास, अटरू व शाहबाद कन्या महाविद्यालय में अंगे्रजी तथा राजकीय कला महाविद्यालय मांगरोल में भी अंगे्रजी के शिक्षक नहीं होने से कक्षाएं नहीं लग पाती।</p>
<p><strong>नियमों की पेचीदगी ने बिगाड़ा शिक्षा का गणित</strong><br />राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों का कहना है, अधिकतर महाविद्यालयों में उन्हीं विषयों के पद खाली हैं, जिनके शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर कहीं दूसरे जिलों के कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में संकट यह है कि उनकी जगह पर संबंधित महाविद्यालय विद्या संबल पर शिक्षक भी नहीं लगा सकते। क्योंकि, प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों की जगह खाली होती हुई भी सरकार की नजरों में खाली नहीं है। ऐसे में आयुक्तालय से उनकी जगहों पर विद्या संबल पर शिक्षक लगाने का भी मंजूरी नहीं मिल रही। ऐसे में संभाग के इन दस कॉलेजों में राजनेतिक विज्ञान से लेकर संस्कृत तक की कक्षाएं खाली रहती हैं, यहां विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला कोई नहीं है। </p>
<p><strong>एक माह में 6 दिन ही मिलती उधार की फैकल्टी</strong><br />राजकीय महाविद्यालय इटावा के प्राचार्य डॉ. रामदेव मीणा ने बताया कि गवर्नमेंट कॉलेज कोटा को आयुक्तालय द्वारा रेस-सेंटर का नोडल बनाया गया है। जिन महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी होती है, वहां उस कॉलेज की डिमांड पर रेस-सेंटर से मात्र 6 दिन के लिए फैकल्टी भेजी जाती है। इसके बाद उस कॉलेज का दोबारा से नम्बर आने में करीब दो से तीन माह तक लग जाते हैं। ऐसे में एक कॉलेज को एक माह में एक बार ही 6 दिन के लिए फैकल्टी मिल पाती है। क्योंकि, रेस-सेंटर को रोटेशन के आधार पर दूसरे कॉलेजों में भी फैकल्टी भेजनी होती है। </p>
<p><strong>हर स्तर पर शिकायत, समाधान कहीं नहीं</strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज बारां के प्राचार्य भगवान कुमार ने बताया कि यहां शिक्षकों के 60 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 12 ही कार्यरत हैं। वहीं, कॉमर्स में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन व इतिहास के शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर होने से उनकी जगह विद्या संबल पर भी शिक्षक नहीं लगा सकते। वहीं, कार्यरत शिक्षकों को जिले के अन्य कॉलेजों की व्यवस्था का भी चार्ज है।  शिक्षकों के अभाव से सेमेस्टर स्कीम में और परेशानी हो गई है। समाधान के लिए आयुक्तालय, उच्च शिक्षा विभाग,  जिला कलक्टर तक पत्र भेज गुहार लगाई लेकिन समाधान  कहीं से नहीं मिला। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />राजकीय महाविद्यालय सांगोद की प्राचार्य अनिता वर्मा का कहना है, करीब 7-8 माह से हमारे यहां से दो शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर बाहर हैं, जिनकी खाली जगहों पर हम चाहकर भी विद्या संबल पर शिक्षक नहीं लगा सकते। हालांकि, आयुक्तालय को इस संबंध में लिखा भी है। ऐसे में रेस-सेंटर से फैकल्टी मांगनी पड़ती है। वहीं, अटरू कॉलेज के प्राचार्य बुद्धि प्रकाश मीणा ने बताया कि अटरू ब्यॉय में ज्योग्राफी व अंग्रेजी के शिक्षक नहीं है। ऐसे में राजसेस के अधीन अटरू गर्ल्स कॉलेज में अंगे्रजी के शिक्षक हैं, ऐसे में दोनों कॉलेजों के विद्यार्थियों की संयुक्त कक्षाएं लगानी पड़ती है लेकिन इसमें काफी परेशानी होती है। इधर, भूगोल की तो कक्षाएं लगाना ही चुनौतिपूर्ण है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br />महाविद्यालय में राजनीति विज्ञान और भूगोल के शिक्षक नहीं हैं। कक्षाएं खाली रहती हैं, सिलेबस पूरा नहीं हो पाने से परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सताता है। वहीं, प्रेक्टिकल विषय के मिडटर्म करने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।  <br /><strong>- हिमांशु कुमार, छात्र सांगोद</strong></p>
<p>रेस-सेंटर कोटा से कभी कबार 6 दिन के लिए टीचर आते हैं लेकिन 6 दिन में कोर्स पूरा होना  एक तिहाई सिलेबस भी पूरा नहीं हो पाता। इसके बाद अगली बार नंबर आने में ही 3 से 4 माह लग जाते हैं, जब तक तो एग्जाम ही शुरू हो जाते हैं। पूर्व में भी बिना पढ़े ही परीक्षा देनी पड़ी थी। <br /><strong>- अंजलि, छात्रा </strong></p>
<p>कॉलेज में इतिहास व इंग्लिश साहित्य विषय नहीं है। जबकि, विद्यार्थी इन विषयों लेना चाहते हैं। पूर्व में इसकी मांग भी कर चुके हैं, फिर भी यह विषय आवंटित नहीं हो रहे। रिक्त पदों को भरने की व्यवस्था करनी चाहिए। <br /><strong>- खुशी मीणा, छात्रा </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />महाविद्यालयों में जिन विषयों के शिक्षक नहीं है, वहां रेस-सेंटर से शिक्षक की व्यवस्था कर शिक्षण व्यवस्था सुचारू करवा रहे हैं। विद्यार्थियों का कोर्स समय पर पूरा करवाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, प्रनियुक्ति निरस्त करने या इनकी खाली जगहों पर विद्या संबल शिक्षक लगाने का मामला सरकार के स्तर का है। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Nov 2024 14:58:36 +0530</pubDate>
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                <title>बीबीए औंधे मुंह गिरा तो बीसीए सरपट दौड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[कॉमर्स में एमबीए व साइंस कॉलेज में एमसीए नहीं हुआ शुरू। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bba-fell-flat-on-its-face--bca-ran-fast/article-94651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के दो सरकारी कॉलेजों में एक ही समय शुरू हुए प्रोफेशनल कोर्सेज की तस्वीर भी अलग-अलग नजर आ रही है। गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज में खुला बीबीए जहां शुरू होने से पहले ही दम तोड़ता नजर आ रहा है वहीं गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में बीसीए सरपट दौड़ रहा है। वाणिज्य महाविद्यालय बीबीए में एडमिशन को तरस रहा है, तीन बार आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने के बावजूद विद्यार्थियों ने दाखिले में रुचि नहीं दिखाई। जबकि, राजकीय महाविद्यालय कोटा में बीसीए का एक चौथाई कोर्स पूरा हो चुका है। शिक्षाविदें का तर्क है, प्रोफेशनल कोर्सेज  के हालात के लिए प्रवेश प्रक्रिया  में अनावश्यक देरी जिम्मेदार है। वहीं, कॉलेज प्रशासन सामूहिक प्रयास में कमी भी बड़ा कारण हो सकती है। </p>
<p><strong>बीबीए : 3 बार अंतिम तिथि बढ़ी, रुझान नहीं </strong><br />राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में बीबीए कोर्स  अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में खुला था, लेकिन दाखिले में विद्यार्थियों ने रुचि नहीं दिखाई और अंतिम तिथि समाप्त हो गई। इसके बाद आयुक्तालय ने फिर से अंतिम तिथि बढ़ाई, काफी जद्दोहजद के बाद 3 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। तीसरी बार फिर से अंतिम तिथि बढ़ाने के बावजूद 14 विद्यार्थियों ने ही आवेदन किए। जिसमें से मात्र 9 ही विद्यार्थियों ने फीस जमा करवाई। </p>
<p><strong>60 सीटों पर नौ ही दाखिले, कोर्स शुरू नहीं</strong><br />बीबीए में 60 सीटें निर्धारित हैं, जिसके मुकाबले अब तक मात्र 9 ही सीट भरी है। कोर्स चलाने के लिए कम से कम 10 विद्यार्थियों का एडमिशन होना जरूरी है लेकिन अंतिम तिथि गुजरने के एक माह बाद भी दस का कोटा पूरा नहीं हुआ।  हालांकि, कॉलेज प्रशासन द्वारा आवेदन करने वाले छात्रों से सम्पर्क कर फीस जमा करवाने के लिए काउंसलिंग की जा रही है। हालांकि, कक्षाएं शुरू करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>बीसीए : एक चौथाई कोर्स पूरा, नियमित क्लासें</strong><br />गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में बीसीए कम्प्यूटर डिग्री कोर्स के प्रति विद्यार्थियों में जबरदस्त उत्साह नजर आया। 21 स्टूडेंट्स एडमिशन ले चुके हैं। एक अक्टूबर से ही कक्षाओं के साथ कोर्स शुरू हो गया। विद्या संबल पर शिक्षक भी लगा दिए गए। नियमित कक्षाएं चल रही हैं, दिसम्बर-जनवरी के बीच प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम होने हैं। अब तक एक चौथाई से ज्यादा कोर्स पूरा हो चुका है। लैब में प्रेक्टिकल भी करवाए जा रहे हैं। हालांकि, कॉलेज प्रशासन के व्यक्तिगत प्रयासों से कम समय व विपरीत परिस्थितियों में सफलतापूर्वक बीसीए संचालित हो सका। </p>
<p><strong>शिक्षकों के व्यक्तिगत प्रयासों से दौड़ा बीसीए</strong><br />राजकीय महाविद्यालय कोटा की प्राचार्य प्रतिमा श्रीवास्तव का कहना है,  बीसीए के सफलतापूर्वक संचालन में कॉलेज प्रशासन के व्यक्तिगत प्रयास अहम भूमिका में रहे। शिक्षकों ने प्रचार-प्रसार करने के साथ वन टू वन विद्यार्थियों से सम्पर्क किया। उन्हें कोर्सेज से संबंधित जानकारी व सुविधाओं से अवगत किया। उनकी समस्याओं व शंकाओं का संतोषजनक निवारण किया। इससे उत्साहित विद्यार्थियों ने बीसीए में एडमिशन लिए। वर्तमान में बीसीए की नियमित कक्षाएं व प्रेक्टिल करवाए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>विद्यार्थियों का कहना है</strong><br />बीबीए में एडमिशन तब शुरू हुए जब बीकॉम प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। ऐसे में हम बीकॉम छोड़ बीबीए में कैसे दाखिला  लेते। प्रोफेशनल कोर्स के बुरे हाल के लिए जिम्मेदार सरकार की लेटलतीफी जिम्मेदार है। अभी हमारे साथियों ने बीबीए की फीस जमा करवा दी है लेकिन कोर्स अब तक शुरू नहीं हुआ। ऐसे में दिसम्बर-जनवरी तक प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम होने हैं। ऐसे में कोर्स कब शुरू होगा, फेकल्टी कब आएगी और कब सिलेबस पूरा होगा। असमंजस की स्थिति बनी हुई है। <br /><strong>- योगेंद्र चंद, ज्ञानदेव कुमार, आशिष शृंगी, छात्र </strong></p>
<p>बीसीए में एडमिशन लेकर उत्साहित हैं। नियमित कक्षाएं लग रही हैं। लैब में 15 से ज्यादा कम्प्यूटर हैं, जहां फेकल्टी द्वारा सब्जेक्ट क्लास के बाद प्रेक्टिकल करवाते हैं। कॉलेज प्रशासन द्वारा साधन संसाधनों की उपलब्धता के साथ छात्रहित का ख्याल रखा जा रहा। अब तक प्रथम सेमेस्टर का एक चौथाई सिलेबस भी पूरा हो चुका है। परीक्षा से पहले कोर्स पूरा होने की उम्मीद है। <br /><strong>- सत्येंद्र कुमार, हर्ष गौतम</strong></p>
<p><strong>इनका का कहना है</strong><br />बीसीए की नियमित कक्षाएं लग रही हैं। 21 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है। अभी भी विद्यार्थी एडमिशन ले सकते हैं, उनका कोर्स एस्ट्रा क्लासें लगवाकर पूरा करवाएंगे। यूजीसी के मापदंडों के अनुसार वेल क्वालिफाइड शिक्षक विद्या संबल पर रखे हैं। कम्प्यूटर लैब में 15 से ज्यादा कम्प्यूटर हैं, जहां फेकल्टी नियमित विद्यार्थियों को प्रेक्टिल करवा रहे हैं। नई लैब बनाने व सुविधाओं में विस्तार के लिए प्रस्ताव बनाकर आयुक्तालय को भेजा है। विद्यार्थियों की सुविधाओं का ख्याल रखा जा रहा है। <br /><strong>- प्रतिमा श्रीवास्तव, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय</strong></p>
<p>बीबीए में अभी तक 9 विद्यार्थियों ने फीस जमा करवाई है। जबकि, आवेदन 14 जनों ने किया था। इनमें से तीन छात्रों ने कहीं ओर एडमिशन ले लिया है। हालांकि,  सरकार ने 10 छात्रों के दाखिला लेने पर कोर्स शुरू करने की राहत दी है। ऐसे में विद्यार्थियों को कन्वेंस किया जा रहा है। जल्द ही कोर्स शुरू करवाए जाने का प्रयास है। <br /><strong>- हितेंद्र कुमार, प्राचार्य राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Nov 2024 15:12:57 +0530</pubDate>
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                <title>जमीन पर उच्च शिक्षा : कॉलेजों में फर्श पर चल रही कक्षाएं</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं दरी पट्टी पर तो कहीं जमीन पर चल रही कक्षाएं । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/higher-education-on-the-ground--classes-are-being-conducted-on-the-floor-in-colleges/article-93026"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(7)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के नवीन राजकीय महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा का स्तर जमीन पर पहुंच गया। सरकारी मशीनरी की लचरता व लापरवाही से 372 विद्यार्थी जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कॉलेजों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए टेबल कुर्सियां नहीं हैं। कहीं, दरी पट्टियों पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा तो कहीं जमीन पर बिछाने के लिए दरी पट्टी तक नहीं है। ऐसी अव्यवस्थाओं के बीच  छात्र-छात्राओं को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। दरअसल, मुख्यमंत्री बजट घोषणा में सत्र 2024-25 में कोटा, बूंदी झालावाड़ में चार नए राजकीय कला महाविद्यालय खोले हैं। जिनमें करीब 447 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जिन्हें बिठाने के लिए कॉलेज प्रशासन के पास टेबल कुर्सियां तक नहीं हैं। उन्हें कक्षाओं में जमीन पर बिठाया जाता है। </p>
<p><strong>जमीन पर बैठने को मजबूर 372 विद्यार्थी </strong><br />कोटा के चेचट, बूंदी के लाखेरी तथा झालावाड़ के डग राजकीय कला महाविद्यालय को मिलाकर कुल 372 विद्यार्थियों ने सत्र 2024-25 में बीए प्रथम वर्ष में एडमिशन लिए हैं। जिन्हें कक्षाओं में जमीन पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। जबकि, कॉलेजों में टेबल-कुर्सियों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी आयुक्तालय द्वारा संबंधित नोडल महाविद्यालय को दी गई है। इसके बावजूद इन तीन कॉलेजों के नोडल प्राचार्यों ने अपने अधीन नवीन महाविद्यालयों के लिए टेबल-कुर्सियां खरीदने में कोई रुची नहीं दिखाई। विद्यार्थी जमीन पर बैठने में असहज महसूस कर रहे हैं लेकिन उनकी मजबूरी  समझने वाला कोई नहीं। </p>
<p><strong>लाखेरी महाविद्यालय में बिछाने को दरी पट्टियां तक नहीं</strong><br />बूंदी जिले के राजकीय महाविद्यालय लाखेरी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां फर्नीचर तो दूर स्टूडेंट्स के बैठने के लिए दरी पट्टियां तक नहीं है। 132 छात्र-छात्राओं को जमीन पर बैठना पड़ता है। कई बार छात्राओं को लेने अभिभावक आते हैं तो बच्चों को जमीन पर बैठा देख नाराजगी जताते हैं। न तो आयुक्तालय ने फर्नीचर खरीद के लिए बजट दिया और न ही नोडल महाविद्यालय बूंदी ने विकास समिति फंड से फर्नीचर खरीदे। </p>
<p><strong>सर्दियों में गलेंगे फर्श, कैसे चलेंगी क्लासें</strong><br />सरकार नए कॉलेज खोल वाहवाही लूट रही है लेकिन संसाधन नहीं दे रही। कोई सामुदायिक अस्पताल के खस्ताहाल भवन में तो स्कूलों की पुरानी बिल्डिंगों में चल रहे हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से सर्दियां प्रारंभ हो जाएंगी। सर्दी से फर्श गलेंगे तो छात्र-छात्राएं जमीन पर कैसे बैठ पाएंगे। ऐसे में कक्षाएं प्रभावित होंगी, नियमित कक्षाएं नहीं लगने से कोर्स पूरा नहीं हो पाएगा, जिसका असर परीक्षा परिणामों में नजर आएगा। </p>
<p><strong>स्कूलों से मांग रहे दरी पट्टियां </strong><br />डग महाविद्यालय में फर्नीचर तो दूर बिछाने के लिए दरी पट्टियां तक नहीं हैं। कॉलेज भी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहा है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन को विद्यार्थियों को बिठाने के लिए स्कूल से दरी पट्टियां मांगनी पड़ रही है। नोडल प्राचार्य ओम प्रकाश के अनुसार, फर्नीचर खरीद के लिए आयुक्तालय से बजट नहीं मिला है। ऐसे में फर्श या दरी पट्टियों का इंतजाम करना पड़ रहा है।</p>
<p>कॉलेज में अभी टेबल-कुर्सियों की खरीद में वक्त लगेग। क्योंकि, इसके लिए बजट की उपलब्धता व टेंडर प्रक्रिया से गुजरना होगा। अभी तो नल-बिजली की व्यवस्था कर रहे हैं। जिसकी संबंधित विभागोें में फाइल लगा रखी है। फिलहाल दरी पट्टियों पर ही बिठाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।<br /><strong>- डॉ. पवन शर्मा, नोडल प्रभारी, राजकीय महाविद्यालय, चेचट </strong></p>
<p>कॉलेज में फर्नीचर व्यवस्था के लिए कई बार नोडल राजकीय महाविद्यालय बूंदी को लिख चुके हैं। लेकिन,  बजट नहीं आने की बात कही जाती है। आयुक्तालय ने 34 कोएड तथा 27 गर्ल्स कॉलेज को फर्नीचर खरीद के लिए बजट मुहैया करवाया है लेकिन सूची में लाखेरी महाविद्यालय का नाम नहीं है। बच्चों को जमीन पर बिठाकर ही कक्षाएं लगा रहे हैं। <br /><strong>- डॉ. दिनेश कुमार शुक्ल, नोडल प्रभारी राजकीय महाविद्यालय, लाखेरी </strong></p>
<p>राजकीय महाविद्यालय डग चौमेहला कॉलेज के अधीन है और यहां रेगुलर फैकल्टी के रूप में मैं अकेला हूं। इसलिए सभी आॅफिशियल काम मुझे ही करना है। 5 अक्टूबर तक तो विद्या संबल शिक्षकों के आवेदन निकाले हैं। क्योंकि, इससे पहले तक चौमेहला कॉलेज में सेमेस्टर परीक्षाएं सम्पन्न करवा रहे थे। टेबल कुर्सियां नहीं है। आयुक्तालय से 10 लाख का बजट मांगा है, जिसके प्रस्ताव भेज चुके हैं। सोमवार से कक्षाएं शुरू होंगी। विद्या संबल फैकल्टी भी आ चुकी है। अब दरी पट्टियों की व्यवस्था कर रहे हैं। <br /><strong>- ओम प्रकाश, नोडल प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय डग</strong></p>
<p>सभी नोडल कॉलेजों के प्राचार्यो को अपने स्तर पर उनके अधीन नवीन महाविद्यालयों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, लाखेरी कॉलेज में बिना दरी पट्टियों के जमीन पर विद्यार्थियों को बिठाए जाने की जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी लेकर उचित व्यवस्था करवाएंगे। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय कोटा</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कस्बे में कॉलेज खुला तो बहुत खुशी हुई थी। क्योंकि, घर से मुख्यालय की दूरी करीब 70 किमी है। ऐसे में  यहां एडमिशन लिया लेकिन पहले दिन कक्षा में गए तो वहां टेबल-कुर्सियां नहीं थी, विद्यार्थी जमीन पर बैठे हुए थे। बिछाने के लिए दरी पट्टियां तक नहीं थी। ऐसे में जमीन पर बैठना असहज लगा। कम से कम सरकार को बैठने की व्यवस्था तो करनी चाहिए। <br /><strong>- जोगेंद्र कुमार, छात्र राजकीय महाविद्यालय, लाखेरी </strong></p>
<p>अभी तक कॉलेज में कक्षाएं तक नहीं लगी है। लेकिन, यहां टेबल कुर्सियां नहीं है। कॉलेज स्तर के विद्यार्थियों को प्राथमिक विद्यालय के बच्चों की तरह जमीन पर ही बिठाया जाएगा। सरकार को जब संसाधन मुहैया नहीं करवाने थे तो कॉलेज भी नहीं खोलने चाहिए थे।<br /><strong>- सीमा कराड़िया (परिवर्तित नाम) छात्रा, राजकीय महाविद्यालय, डग </strong></p>
<p>टेबल-कुर्सियां तो छोड़िए कॉलेज में बिजली तक नहीं है। कक्षाओं में अंधेरा रहता है। पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है। दरी पट्टियां बिछाकर ही क्लासों में बिठाया  जाता है। कॉलेज की बहुत बूरी स्थिति है। अव्यवस्थाओं के कारण कई विद्यार्थियों ने तो कॉलेज आना ही छोड़ दिया। पहले 70 से 80 छात्र-छात्राएं नियमित आते थे लेकिन अब यह संख्या घटकर 40 से 50 रह गई। जबकि, यहां 153 विद्यार्थियों का नामांकन है। <br /><strong>- हेमंत नागर (परिवर्तित नाम) छात्र प्रथम वर्ष, राजकीय महाविद्यालय, चेचट </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Oct 2024 16:34:06 +0530</pubDate>
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                <title>दिसम्बर में एग्जाम, अब तक कक्षाएं शुरू तक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[राहत की जगह बोझ बना सेमेस्टर सिस्टम ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exams-in-december--classes-have-not-started-yet/article-91623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय महाविद्यालयों में सेमेस्टर प्रणाली राहत की जगह विद्यार्थियों के लिए बोझ बन गई। 6 माह के एग्जाम ढाई से तीन माह में हो रहे हैं। परीक्षाओं से पहले न तो सिलेबस पूरा हो पा रहा और न ही प्रेक्टिकल व असाइनमेंट समय पर पूरे हो पा रहे। नतीजन, आधी-अधूरी तैयारियों के बीच परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं, जिससे विद्यार्थियों का रिजल्ट बिगड़ रहा है। हालात यह हैं, एमए, एमएसी व एमकॉम के सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम हो चुके हैं, इसके बावजूद कॉलेजों में अभी तक थर्ड सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू तक नहीं हो सकी। जबकि, कोटा विश्वविद्यालय द्वारा थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाएं दिसम्बर में प्रस्तावित है। ऐसे में परीक्षा की तैयारी के लिए तीन माह का समय मिलेगा लेकिन इन माह में साप्ताहिक अवकाश, राजकीय अवकाश, दीपावली सहित 20 से 25 दिन का अवकाश रहेगा। ऐसे में छात्रों को मात्र ढाई माह का ही समय मिल पाएगा। इस समय में सिलेबस पूरा होना संभव नहीं होगा।</p>
<p><strong>6 माह की परीक्षा ढाई माह में</strong><br />राष्टÑीय शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक सेमेस्टर की परीक्षा 6 माह में होनी चाहिए। लेकिन, कॉलेजों में ढाई से तीन माह में ही एग्जाम हो रहे हैं। हाल ही में पीजी सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम सितम्बर माह में सम्पन्न हुए हैं, जबकि यह परीक्षाएं जून 2024 में होनी चाहिए थी। वहीं, यूजी की बात करें तो प्रथम वर्ष के सैकंड सेमेस्टर की परीक्षाएं गत जून में होनी थी, जो आगामी 8 अक्टूबर को सम्पन्न होगी। </p>
<p><strong>ढाई माह में कोर्स पूरा  करवाना संभव नहीं</strong><br />पीजी थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाएं दिसम्बर में होनी है, लेकिन अभी तक कक्षाएं शुरू नहीं हुई। अक्टूबर से दिसम्बर तक तीन माह में 20 से 25 दिनों की सरकारी छुट्टियां हैं। ऐसे में परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों के पास मात्र ढाई माह का समय मिलेगा। जिसमें न तो सिलेबस पूरा हो पाएगा और न ही प्रेक्टिकल व असाइनमेंट हो पाएंगे। आधी-अधूरी तैयारियों के बीच पेपर देना पड़ रहा है, जिसका असर परीक्षा परिणामों में देखने को मिल रहा है। सेमेस्टर सिस्टम को पटरी पर लाने के प्रयास अब तक नाकाफी साबित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />अभी एमएससी सैकंड सेमेस्टर के प्रेक्टिकल व असाइनमेंट करवाए जाने हैं, जिसकी सूचना विद्यार्थियों को दे दी गई है। दशहरे  की छुट्टी से पहले ही प्रेक्टिकल व असाइनमेंट करवा दिए जाएंगे। इसके बाद थर्ड सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी। हालांकि, थोड़ा समय लग रहा है लेकिन एक बार सेमेस्टर रेगुलाइज हो जाएगातो यह विद्यार्थियों के लिए कारगर साबित होगा।<br /><strong>- प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, प्राचार्य गनर्वमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>कॉलेज में अभी यूजी सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम चल रहे हैं। जिसमें स्टाफ व भौतिक संसाधन लगा है। संसाधनों की कमी होने के बावजूद हमने थर्ड सेमेस्टर की कक्षाएं लगवा दी हैं। रहीं बात, आगामी परीक्षा से पहले कोर्स पूरा करवाने की तो छुट्टियों में भी एक्स्ट्रा क्लासें लगवाकर कोर्स पूरा करवा देंगे। छात्रहित में व्यवस्थाएं बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं।<br /><strong>- प्रो. रोशन भारती, प्राचार्य, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज </strong></p>
<p>पीजी थर्ड सेमेस्टर के एग्जाम दिसम्बर व जनवरी के मध्य करवाए जाएंगे। वहीं, प्रथम सेमेस्टर के अधिकतर विषयों के परीक्षा परिणाम जारी किए जा चुके हैं। शेष रहे सब्जेक्ट के रिजल्ट जल्द ही जारी किए जाएंगे।<br /><strong>- प्रवीण भार्गव, परीक्षा नियंत्रक कोटा यूनिवर्सिटी</strong></p>
<p><strong>विद्यार्थी बोले- ढाई महीने में कोर्स पूरा होना तो दूर प्रेक्टिकल व असाइमेंट भी नहीं हो पाएंगे</strong><br /><strong>वर्ष 2020 से पटरी पर नहीं आया शैक्षणिक सत्र</strong><br />सत्र 2024-25 के एमएससी थर्ड सेमेस्टर की अब तक कक्षाएं नहीं लगाई  गई। जबकि, दिसम्बर में परीक्षाएं होनी है। दीपावली व अन्य राजकीय अवकाश आने से विद्यार्थियों को परीक्षा तैयारी के लिए मात्र 2 माह का ही समय मिलेगा। जिसमें सिलेबस तक पूरा नहीं हो पाएगा। वहीं, सत्र 2023-24 के थर्ड सेमेस्टर के परिणाम अब तक जारी नहीं हुए। जबकि, फोर्थ ईयर की परीक्षाएं सम्पन्न हो चुकी हैं। ऐसे में विद्यार्थी दूसरे प्रोफेशनल कोर्सेज में एडमिशन नहीं ले पा रहे। कोरोना के बाद से ही शैक्षणिक सत्र पटरी पर नहीं आ सका। जिसका नतीजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। <br /><strong>- आशीष मीणा, निर्वमान छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>5 महीने बाद भी नहीं जारी किया रिजल्ट</strong><br />सत्र 2023-24 की एमएससी फाइनल ईयर के फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं हो चुकी है लेकिन थर्ड सेमेस्टर का परिणाम अब तक कोटा विवि ने जारी नहीं किया। जबकि, पेपर अप्रेल में ही समाप्त हो गए थे। पांच महीने से रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। हालात यह हैं, बिना रिजल्ट देखे ही फाइनल ईयर की परीक्षाएं दे चुके हैं। जिससे परिणाम को लेकर अमंजस की स्थिति बनी हुई है। <br /><strong>- मयंक सोनी, छात्र गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>आधी-अधूरी तैयारी से बिगड़ रहा परिणाम</strong><br /> एमकॉम सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम 14 सितम्बर को समाप्त हो चुके हैं इसके बावजूद अभी तक थर्ड सेमेस्टर  की कक्षाएं शुरू नहीं हुई है। कॉलेज प्रशासन द्वारा गु्रप पर इस संबंध में कोई सूचना भी नहीं दी गई है। दिसम्बर तक सिलेबस पूरा नहीं हो पाएगा। हर बार की तरह इस बार भी विद्यार्थियों को आधी-अधूरी तैयारियों के साथ पेपर देना पड़ेगा। आयुक्तालय व कोटा विवि की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।<br /><strong>- अर्पित जैन, निर्वमान छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p><strong>छात्रों में असमंजस की स्थिति </strong><br />एमएससी द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा 18 सितम्बर को खत्म हो गई थी। जिसके 8 दिन बाद भी थर्ड सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू नहीं की गई। वहीं, एमएससी प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम अप्रेल 2024 में हुआ था, जिसका परिणाम अब तक जारी नहीं हुआ। परिणाम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है, ऐसे में आगामी सेमेस्टर की भी पढ़ाई प्रभावित होती है। विवि व कॉलेज प्रशासन को व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए।<br /><strong>- रविकांत सैनी, छात्र थर्ड सेमेस्टर, गवर्नमेंट कॉलेज</strong></p>
<p><strong>दूसरे कॉलेजो में नहीं ले पा रहे एडमिशन</strong><br />कोटा विवि कैम्पस में एमएससी थर्ड व फोर्थ सेमेस्टर के एग्जाम हो चुके हैं। प्रेक्टिकल भी हो गए। इसके बावजूद दोनों ही रिजल्ट नहीं आए। जिसकी वजह से अन्य कोर्सेज में एडमिशन नहीं ले पा रहे, क्योंकि दूसरे कॉलेज थर्ड सेमेस्टर में पास होने का सबूत मांग रहे हैं। विश्वविद्यालय में भी सम्पर्क किया लेकिन रिजल्ट कब जारी होंगे, इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। पिछले कई माह से परेशान हो रहे हैं। यूनिवर्सिटी को जल्द से जल्द परिणाम जारी करना चाहिए। <br /><strong>- निरंजना चंदेल, छात्रा एमएससी बॉटनी, कोटा विवि</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Sep 2024 17:18:28 +0530</pubDate>
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                <title>सीएमए की क्लासेज का उद्घाटन समारोह, कोर्स की दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[चैयरमेन ने बताया की सीएमए विद्यार्थियों को पढ़ाई के लीए उचित माहौल प्रदान करने के लिए सीएमए जयपुर चैप्टर निःशुल्क लाइब्रेरी की सुविधा भी विद्यार्थियों को उपलब्ध करा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/inauguration-ceremony-of-the-cma-classes/article-54815"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/222-copy110.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। द इन्स्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउन्टेन्ट्स ऑफ इंडिया के जयपुर चैप्टर द्वारा सीएमए फाउन्डेशन इन्टरमीडिएट व फाइनल की क्लासेज का उद्घाटन समारोह हुआ। समारोह के मुख्य अतिथी आईएएस कृष्ण कांत पाठक थे। उद्घाटन समारोह के प्रारम्भ में चैयरमेन सीएमए हरेन्द्र कुमार पारीक ने मुख्य अतिथी, फैकल्टी, सीएमए सदस्यों व विद्यार्थियों का अभिनंदन किया तथा सीएमए कोर्स करने के उपरान्त उपलब्ध अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर चैयरमेन ने बताया की सीएमए विद्यार्थियों को पढ़ाई के लीए उचित माहौल प्रदान करने के लिए सीएमए जयपुर चैप्टर निःशुल्क लाइब्रेरी की सुविधा भी विद्यार्थियों को उपलब्ध करा रहा है।</p>
<p>मुख्य अतिथी ने अपने उद्बोधन में कैरियर में सफलता को लेकर बातें साझा करते हुए बताया कि स्थिरता व निरन्तरता सफलता का सूत्र है। चैप्टर के ट्रेजरार सीएमए दीप्तांषू पारीक, कार्यकारिणी के सदस्य सीएमए संदीप चैहान, सीएमए गोविन्द शर्मा, सीएमए श्यामलाल स्वामी, सीएमए अवनेश जैन तथा उपस्थित फैकल्टी नें भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2023 16:12:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोनाकाल में हैडफोन और ईयर बड्स के जरूरत से ज्यादा उपयोग ने बढ़ाई बहरेपन की समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[ कोरोना के चलते बदलती जीवनशैली में सामान्य से अधिक लोगों में बहरेपन या कम सुनने के मामले पहले की अपेक्षा बढ़ते जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/excessive-use-of-headphones-and-earbuds-during-the-corona-period-increased-the-problem-of-deafness--special-on-world-hearing-day-today--children-and-youth-are-seeing-more-trouble-while-taking-online-classes/article-5423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/world-hearing-day.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोरोना के चलते बदलती जीवनशैली में सामान्य से अधिक लोगों में बहरेपन या कम सुनने के मामले पहले की अपेक्षा बढ़ते जा रहे हैं। यह समस्या बच्चे, युवा और बुजुर्ग वर्ग में सबसे अधिक देखी जा रही है। कोरोना काल में बच्चों और युवाओं में यह समस्या ज्यादा बढ़ गई है। अधिकतर शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थी हैड फोन या इयर बड्स लगाकार आनॅलाइन कक्षाएं ले रहे हैं। वहीं जो लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, वे भी इस समस्या से प्रभावित है।  एसएमएस अस्पताल के ईएनटी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि सुनने की समस्या पहले या तो जन्मजात होती थी या जो लोग तेज धमाकों या तेज आवाज के साथ काम करते थे उन्हें इसका सामना करना पड़ता था, लेकिन अब कोरोना काल में आनॅलाइन कक्षाओं के कारण स्टूडेंट्स को भी इससे दो चार होना पड़ रहा है। हमारे कान की सुनने की क्षमता 80 डेसिबल होती है, लेकिन आज के मॉडर्न लाइस्टाइल में लोग अपनी सुनने की क्षमता को ही खो बैठते हैं। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>प्रति एक हजार बच्चों में से चार से ज्यादा को करना पड़ रहा है बहरेपन का सामना</strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>नवजात बच्चों की जन्म के समय सुनने की क्षमता की जांच होना भी विशेषज्ञों ने बताया बेहद जरूरी</strong></span><br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>प्रदेश में भी ऐसे मामलों में हुई बढ़ोतरी</strong></span><br />डॉ. सिंघल ने बताया कि राज्य में सुनने की क्षमता प्रभावित होने के मामले पहले से काफी बढ़ गए हैं। एसएमएस अस्पताल में भी बहरेपन के मामले कोरोना काल के बाद ज्यादा बढ़ गए हैं। अधिक समय तक मोबाइल पर बात करना, तेज आवाज में संगीत सुनने या गेम खेलना सबसे अधिक नुकसानदायक है। अकेले एसएमएस की बात करें तो यहां रोजाना 70-80 मरीज सुनने की क्षमता से प्रभावित होने के कारण ओपीडी में इलाज के लिए आ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की जारी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा बहरेपन की समस्या विकासशील और कम विकसित देशों में देखने को मिलती है। नवजात शिशु की जन्म के समय ही सुनने की जांच की जाए और अगर उसे दिक्कत है तो एक से दो साल के बीच ही कॉकलियर इंप्लांट किया जाए।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान का हिस्सा बनें</strong></span><br />देशभर में प्रति एक हजार बच्चों में से 4 से अधिक बच्चों को बहरेपन का सामना करना पड़ रहा है। इनको समय पर सुनने की जांच न मिल पाने के कारण ये आवाज से वंचित रह जाते है। ना सुन पाते हैं और ना ही बोल पाते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि इसके लिए नवजात शिशु की सुनने की जांच अनिवार्य हो। इसे राष्टÑीय टीकाकरण अभियान का हिस्सा बना दिया जाए, जिसमें सुनने की जांच हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 16:05:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आमजन का सहयोग, सरकारी स्कूल का कायाकल्प, चलती रेल के लुक वाले विद्यालय में बच्चे कर रहे पढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[आमेर का  प्रतापपुरा कला गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय इन दिनों अपने लुक के कारण चर्चा में है। 1995 में स्थापित स्कूल कुछ दिन पहले तक बदरंग और बेहाल था, लेकिन आज यहां स्मार्ट कक्षाओं में पढ़ाई करवाई जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/public-support--rejuvenation-of-government-school--children-studying-in-a-school-with-the-look-of-a-moving-train--by-taking-donations-from-bhamashahs/article-5231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/rail.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। आमेर का  प्रतापपुरा कला गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय इन दिनों अपने लुक के कारण चर्चा में है। 1995 में स्थापित स्कूल कुछ दिन पहले तक बदरंग और बेहाल था, लेकिन आज यहां स्मार्ट कक्षाओं में पढ़ाई करवाई जा रही है।  प्रधानाध्यापक रामावतार जांगिड़ ने बताया, विद्यालय को एक ट्रेन और स्टेशन के रूप में विकसित करने का प्लान बनाया। कमरों को ट्रेन के डिब्बों का और बरामदे को प्लेटफॉर्म का लुक देते हुए रंग रोगन करवाने के लिए स्टाफ व ग्रामीणों से बातचीत कर कार्य प्रारंभ करवाया तो विद्यालय परिसर एक अलग ही रूप में निखर कर सामने आया। अध्यापिका अंजू बसल ने कहा कि विद्यालय भवन के रंग-रोगन का काम पूरा होने पर अब बच्चों को कक्षा कक्ष के दरवाजे में खड़ा किया गया, तो यूं लगा जैसे वे एक ट्रेन में सफर करने का आनंद ले रहे हो। <br /><br /><strong>रंग-रोगन में खर्च हुए 50 हजार रुपए</strong><br />भवन का रंग-रोगन करवाने में लगभग 50 हजार रुपए का खर्चा आया है, जो ग्रामवासियों और स्टाफ के सहयोग से पूरा हुआ है। पास के गांव देवगुड़ा के पेंटर ओमप्रकाश बुनकर ने भी विद्यालय भवन को 15 दिन में ट्रेन का रूप दे दिया। ग्रामवासी रुडमल जाट व माधव सिंह शेखावत ने कहा कि इस स्कूल को देखकर ऐसा लगता है, अब सरकार द्वारा राजकीय विद्यालयों में भी बच्चों के कॅरिअर को लेकर पढ़ाई को बहुत ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूलों को आगे बढ़ाया जाएगा। ग्रामवासी मालीराम वर्मा ने कहा कि विद्यालय अभी आठवीं तक है, लेकिन अब इसको आगे बढ़ाया जाएगा।<br /><br /><strong>अगले स्टेशन तक पढ़ाई</strong><br />जब घर से स्कूल आता हूं तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं ट्रेन में बैठकर पढ़ रहा हूं और अध्यापक मुझे अगले स्टेशन तक पढ़ाएंगे, आज ट्रेन के द्वारा शिक्षा के लिए आगे बढ़ रहा हूं। कल इसी शिक्षा से मैं आगे बढूंगा। <br />- <strong>गणेश, कक्षा 6 का छात्र</strong></p>
<p><br /><strong>और कहीं पढ़ने का नहीं है मन</strong> <br />मैं पहली क्लास से यहां पढ़ रही हूं, इस वर्ष मेरा यह लास्ट है। स्कूल का रंग-रोगन करके कक्षाओं को ट्रेन में बदला है। बहुत अच्छा लग रहा है। मन नहीं करता की अगली कक्षा कहीं और जा कर पढूं। <br />-<strong>प्रिया बिलोनिया, कक्षा 8 की छात्रा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Mar 2022 14:13:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री कल विभागों की करेंगे समीक्षा, अफसरों की लगेगी क्लास</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे होने पर सभी विभागों की प्रगति रिपोर्ट को लेकर समीक्षा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE--%E0%A4%85%E0%A4%AB%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B8/article-3264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/ashok_gehlot_630x400.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे होने पर सभी विभागों की प्रगति रिपोर्ट को लेकर समीक्षा करेंगे। सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में शुक्रवार को शाम 5 बजे सभी विभागों के अधिकारियों को रिपोर्ट के साथ तलब किया है। इसके लिए प्रशासनिक सुधार विभाग ने सभी विभागों को मीटिंग नोटिस जारी कर आवश्यक रूप से मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। <br /> <br /> मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक के लिए एजेंडा बिंदु भी तय किए गए हैं। जिसमें विभागीय समीक्षा एवं 3 वर्ष की प्रगति व उपलब्धि रिपोर्ट, बजट, जन घोषणा की क्रियान्विति रिपोर्ट के साथ विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रमुख सचिव, सचिव स्तर के अधिकारियों को प्रगति रिपोर्ट के साथ मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। <br /> <br /> मुख्यमंत्री यह बैठक विभागों के अधिकारियों के साथ में करेंगे। विभागों के मंत्री जिलों में जनता के बीच दो दिन तक अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे। विभागों की इस समीक्षा बैठक में मंत्रियों की परफॉर्मेंस भी सामने आ सकेगी कि कौनसे विभाग में बेहतर काम हुआ है। इस तीसरी वर्षगांठ के प्रगति एवं उपलब्धियों की विभागवार समीक्षा रिपोर्ट के लिए स्टेट कॉर्डिनेटर एसीएस सुधांश पंत को बनाया गया है। जो गुरूवार को विभागवार प्रजेंटेशन के जरिए समीक्षा करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Dec 2021 15:18:21 +0530</pubDate>
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