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                <title>Administrative Negligence - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सातलखेड़ी में खुले नाले बने हादसों की वजह, जानें पूरा मामला </title>
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                        <![CDATA[ बरसात  में नाले पानी से भर जाते हैं जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/open-drains-in-satalkhedi-become-a-cause-of-accidents/article-142476"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। कस्बे में करीब एक वर्ष पूर्व बनाई गई सड़क अब आमजन के लिए सुविधा कम और परेशानी का कारण अधिक बनती जा रही है। सड़क निर्माण के दौरान पानी निकासी के लिए किनारे नालों का निर्माण तो किया गया। लेकिन उन पर आज तक ढक्कन नहीं लगाए गए। खुले नालों के कारण आए दिन हादसों की आशंका बनी रहती है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि नालों के खुले होने से राहगीरों, बच्चों एवं मवेशियों को हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बरसात के मौसम में नाले पानी से भर जाते हैं और दिखाई नहीं देते, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग एवं प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसी लापरवाही का परिणाम शुक्रवार को उस समय सामने आया, जब एक सांड अचानक खुले नाले में गिर गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। </p>
<p><strong>सांड को निकाला सुरक्षित बाहर</strong><br />सूचना मिलते ही युवा शक्ति गौ सेवा समिति के कार्यकर्ता एवं ग्रामीण मौके पर पहुंचे और सांड को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। नाला गहरा होने और ढक्कन नहीं होने के कारण रेस्क्यू में काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन सामूहिक प्रयास से सांड को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।</p>
<p><strong> ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी</strong><br />घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालों पर ढक्कन लगाए जाते तो इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही नालों को ढकने एवं सड़क किनारे सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p>सड़क पर कई स्थानों पर नाले खुले पड़े हैं, जिनमें मवेशी गिरते रहते हैं और उन्हें निकालने में काफी परेशानी होती है। प्रशासन से नालों को पूरी का तरह ढकने की मांग की है।<br /><strong>- अजय वाडिया, गौसेवक</strong></p>
<p>समस्या को गंभीरता से लेते हुए नालों पर ढक्कन लगवाने की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-आकांक्षा बैरवा,एईएन,पीडब्लूडी। </strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 16:33:56 +0530</pubDate>
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                <title>चंबल नदी उफान पर: पालीघाट पर 22 सेमी बढ़ा जलस्तर, झरेल बालाजी पुलिया पर आधा फीट पानी, राहगीर जान जोखिम में डालकर कर रहे आवागमन।</title>
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                        <![CDATA[कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण चंबल नदी का जलस्तर 22 सेंटीमीटर बढ़ गया है। झरेल बालाजी पुलिया डूबने के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/water-level-rises-by-22-cm-at-palighat-due-to/article-138911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/sawai-madhopur.png" alt=""></a><br /><p>सवाईमाधोपुर। कस्बे से करीब 8 किलोमीटर दूर पालीघाट पर चंबल नदी का जलस्तर बीते दो दिनों में 22 सेंटीमीटर तक बढ़ गया है। इसके चलते झरेल बालाजी की निचले स्तर की पुलिया पूरी तरह पानी में डूब गई है और पुलिया के ऊपर से करीब आधा फीट से अधिक पानी की चादर बह रही है। इसके बावजूद राहगीर, श्रद्धालु और वाहन चालक जान जोखिम में डालकर इस पुलिया को पार कर रहे हैं।</p>
<p>बुधवार देर रात चंबल नदी में 10 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा, जबकि गुरुवार को इसमें 12 सेंटीमीटर की और बढ़ोतरी दर्ज की गई। जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण कोटा बैराज से करीब 5 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाना तथा कोटा की नहरों का अतिरिक्त पानी चंबल नदी में आना बताया जा रहा है। हालांकि 5 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है, लेकिन नहरों से आ रहे पानी के कारण चंबल का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।</p>
<p>झरेल बालाजी पुलिया के क्षतिग्रस्त और ऊबड़-खाबड़ होने के कारण वाहनों के फिसलने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद खंडार प्रशासन एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस की ओर से न तो किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई है और न ही राहगीरों को रोकने के लिए मौके पर कोई तैनाती की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि खंडार प्रशासन इस गंभीर स्थिति में भी मूकदर्शक बना हुआ है।</p>
<p>पुलिया डूबने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए करीब 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। वहीं झरेल बालाजी के दर्शनार्थियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में जलस्तर और बढ़ने की संभावना को देखते हुए किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p>इनका कहना...पहले चंबल नदी का जलस्तर करीब 6 मीटर था, जो नहरों का पानी आने से बढ़कर 6.22 मीटर हो गया है। यानी 22 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आने वाले समय में जलस्तर और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 17:50:29 +0530</pubDate>
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