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                <title>संवेदक की लापरवाही से अंडरपास की हो रही दुर्दशा</title>
                                    <description><![CDATA[पैदल वालों की तुलना में दो पहिला वाहन चालकों को उसमें अधिक परेशानी हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-plight-of-the-underpass-is-due-to-the-negligence-of-the-sensor/article-76958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/photo-size1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास की ओर से करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए अंडरपास में संवेदक की लापरवाही से उसकी दुर्दशा होने लगी है। अंडरपास के पाथवे की जाली क्षतिग्रस्त होने से कई दिन से रास्ता बंद है। नगर विकास न्यास ने करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से अंडरपास का निर्माण कराया है। जिससे चौराहे के यातायात को सुगम बनाया जा सके। साथ ही उसके सौन्दयीकरण पर भी अलग से खर्चा किया। इतना ही नहीं अंडरपास की देखभाल व मरम्मत के लिए(ओ एण्ड एम) भी किया। जिसके लिए संवेदक को एक निर्धारित समय तक अंडरपास का प्रबंधन व संचालन करना होगा। उसके लिए उसे न्यास की ओर से अलग से करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया है। लेकिन हालत यह है कि अभी अंडरपास को बने अधिक समय नहीं हुआ है। उससे पहले ही इसकी दुर्दशा होने लगी है। कभी अंडरपास से सीपेज का पानी सड़क पर आकर परेशानी का कारण बन रहा है तो कभी नाली की जाली टूटने से वाहन चालकों को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं अब हालत यह है कि अंडरपास के एक तरफ के पाथ वे की जाली ही क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे पिछले कई दिन से उसका रास्ता ही बंद किया हुआ है। </p>
<p><strong>संवेदक की जिम्मेदारी, जाली सही करवाए</strong><br />लोगों का कहना है कि अंडरपास बनाने में न्यास ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी संवेदक को दी है। ऐसे में संवेदक की जिम्मेदारी है कि उसे सही करवाए। यदि छोटी-छोटी कमियों को समय पर नहीं सुधारा तो वह बड़ी हो जाएंगी। कंसुआ निवासी दीपसिंह ने बताया कि वे पाथ वे से पैदल निकलकर सड़क पार करने के लिए आए थे। लेकिन बीच रास्ते में आकर जाली टूटी होने का पता चला। ऐसे में वापस घूमकर जाना पड़ा। अधिकािरयों को भी इस पर ध्यान देना होगा। </p>
<p><strong>पैदल सड़क पार करने वालों की सुविधा</strong><br />अंडरपास के दोनों तरफ साइड में पाथवे बनाया हुआ है। इसका मकसद पैदल सड़क पार करने वाले इस पाथ वे से नीचे उतरकर बिना चौराहे से घूमे सीधे नीचे होकर निकल सकते हैं। हालांकि उस रास्ते से कई बार दो पहिया वाहन चालक तक निकल जाते हैं। हालत यह है कि घोड़ा चौराहे  से धानमंडी वाली साइड के पाथवे की जाली बीच से क्षतिग्रस्त हो रही है। उसे क्षतिग्रस्त हुए कई दिन हो गए। संवेदक फर्म द्वारा उस जाली को सही करने की जगह बेरीकेडिंग लगाकर उस रास्ते को ही बंद कर दिया।  ऐसे में जैसे ही लोग पैदल या दो पहिया वाहन लेकर वहां से निकल रहे हैं तो बीच रास्ते में आकर उन्हें जाली टूटने व रास्ता बंद होने का पता चल रहा है। जिससे उन्हें वापस मुड़कर जाना पड़ रहा है। पैदल वालों की तुलना में दो पहिला वाहन चालकों को उसमें अधिक परेशानी हो रही है। जगह सकंरी होने से वापस बाइक मोड़कर जाने में गिरने का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>संवेदक से कहकर जल्दी ठीक करवाएंगे</strong><br />अंडरपास बनाने के बाद संवेदक को उसका ओ एण्ड एम किया हुआ है। ऐसे में संवेदक की जिम्मेदारी है कि वह समय-समय पर उसकी मरम्मत करे। पाथवे की जाली टूटने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो संवेदक से कहकर उसे जल्दी ही सही करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- रविन्द्र माथुर अतिरिक्त मुख्य अभियंता, नगर विकास न्यास </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 14:54:54 +0530</pubDate>
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                <title>बाढ़ ने बिगाड़ी रिवर फ्रंट के निचले हिस्से की दशा : अधिकतर पत्थर व छतरियां उखड़े और चंबल में बहे</title>
                                    <description><![CDATA[नगर विकास न्यास द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से बनाए जा रहे चम्बल रिवर फ्रंट के निचले हिस्से के उखड़े पत्थर उसकी दांस्तां बयां कर रहे हैं। घाटों से नीचे जाने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के  अधिकतर पत्थर उखड़ चुके हैं। साथ ही कई छतरियां पानी में बह गई। जिन्हें बनाने में फिर से मशक्कत करनी पड़ेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-uprooted-stones-are-telling-the-plight-of-the-river-front/article-21782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/river-front-durdasha-..kota-news-5.9.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से बनाए जा रहे चम्बल रिवर फ्रंट के निचले हिस्से के उखड़े पत्थर उसकी दांस्तां बयां कर रहे हैं। घाटों से नीचे जाने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के  अधिकतर पत्थर उखड़ चुके हैं। साथ ही कई छतरियां पानी में बह गई। जिन्हें बनाने में फिर से मशक्कत करनी पड़ेगी। अगस्त के अंतिम सप्ताह में कोटा बैराज से छोड़े गए लाखों लीटर पानी का दबाव जैसे ही रिवर फ्रंट के निचले हिस्से में बनाई गई सीढ़ियों पर पड़ा वैसे ही उसने यहां हो रहे काम की पोल तो खोली ही। साथ ही इंजीनियरों व श्रमिकों के काम पर भी पानी फेर दिया। पिछले करीब दो साल से यहां सैकड़ों श्रमिक व इंजीनियर दिन रात काम कर रहे हैं। बड़ी-बड़ी और भारी भरकम मशीनें लगी हुई हैं। करीेब 250 मीटर ऊंचाई तक रिवर फ्रंट को पहुंचाने में जो मेहनत लगी उस मेहनत पर कोटा बैराज के पानी से आई बाढ़ ने दशा ही बिगाड़ दी। हालत यह है कि कोटा  बैराज के 16 गेट खोलकर सवा पांच लाख क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया। यदि वर्ष 2019 की तरह सभी 19 गेट खोलकर 7 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जाता तो उस समय 250 मीटर ऊंचाई तक पानी पहुंचने से इससे भी बुरी दशा देखने को मिलती। कोटा बैराज से लेकर नयापुरा स्थित रियासतकालीन पुलिया तक निचले हिस्से की न केवल सीढ़ियों के ही बड़े-बड़े पत्थरों को उखाड़ कर फेक दिया। वरन् कारीगरों की मेहनत से तैयार कर रिवर फ्रंट का सौन्दर्य बढ़ाने के लिए लगाई गई कई छतरियां तक नदी के पानी में बह गई। </p>
<p>पानी के तेज बहाव व थपेड़ों के कारण उखड़े भारी भरकम पत्थरों में से अधिकतर तो बिखरकर वहीं पड़े हुए हैं। जबकि कई पत्थर नदी में पानी के  साथ बह गए। वहीं कई जगह की छतरियां भी पानी में बह गई। यह स्थिति किसी एक जगह विशेष की नहीं है। चम्बल माता की मूृर्ति के पास का हिस्सा हो या शिवदास घाट के पास का । नयापुरा स्थित रियासतकालीन पुलिया के पास का हिस्सा हो या मध्य में बनी दुकानों के पास का हिस्सा। हर जगह की दुर्दशा आंसू बहा रही है। रिवर फ्रंट के दोनों तरफ अधिकतर हिस्से की है। नदी के इस पार और नदी के उस पार कुन्हाड़ी साइड पर दोनों तरफ की हालत इतनी अधिक खराब हो गई कि उसे देखकर लगता है हर साल बरसात के मौसम में  कोटा बैराज के अधिक गेट खुलने व बाढ़ आने पर इसीे तरह के दृश्य देखने को मिलेंगे। एक तरफ बाढ़ से रिवर फ्रंट की दुर्दशा दिखाई दे रही है। वहीं दूसरी तरफ न्यास अधिकारी व आर्किटेक्ट का कहना है कि बाढ़ से रिवर फ्रंट को कोई नुकसान नही हुआ है। वह पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि न्यास के कुछ अधिकािरयों का कहना है कि अभी काम चल रहा है । निचले हिस्से में जो नुकसान हुआ है वह संवेदक पूरा करेगा।   वहीं संवेदक फर्म के कर्मचारियों का कहना है कि नयापुरा पुलिया की तरफ से रिवर फ्रंट के काम के लिए कंटेनर में बनाया गया आॅफिस व कई मशीनरी तक बाढ़ के पानी में बहने से लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। </p>
<p><strong>क्रेनों से पत्थर सेट करने में लगे महीनों</strong><br />रिवर फ्रंट पर काम कर रहे श्रमिकों व कारीगरों  का कहना है कि बाढ़ का पानी तेज बहाव से आने पर उसक टक्कर से नदी किनारे के निचले हिस्से के पत्थर उखड़कर बिखर गए। जबकि काफी पत्थर पानीे में बह गए। उनका कहना है कि ये पत्थर काफी बड़े और भारी हैं। उन्हें क्रेनों की सहायता से सैट किया गया था। जिसमें काफी समय लगा था। बाढ़ में बहने से अब फिर से दोबारा पत्थरों को सैट करना भारी काम है। </p>
<p><strong>800 करोड़ से हो रहा काम</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट पर कोटा बैराज से नयापुरा सिथत रियासतकालीन पुलिया तक 6 किलों के क्षेत्र में काम  किया जा रहा है। फस्ट फेज के इस काम पर करीब 800 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसका काम पूरा होने के बाद करीब एक हजार करोड़ रुपए से 13 किलों में सैकंड फेज का काम किया जाएगा। </p>
<p><strong>दिसम्बर तक काम पूरा होना मुश्किल</strong><br />नगर विकास न्यास के अधिकारियों व आर्किटेक्ट द्वारा रिवर फ्रंट के फस्ट फेज के काम को दिसम्बर तक पूरा होने की संभावना तो जता जा रही है। लेकिन वर्तमान में रिवर फ्रंट पर जिस तरह की हालत है उसे देखकर लगता नहीं कि यह काम दिसम्बर तक पूरा हो पाएगा। </p>
<p><strong>पूरे ऊंट लगे ना मूर्तियां</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट के सिंह घाट पर जहां शेरों को स्थापित किया गया है। वहीं आमने-सामने 6 ऊंट लगाए जाने हैं। जिनमें से अभी तक मात्र एक ही ऊंट लगा है। वहीं म्यूजिकल घाट और साहित्य घाट पर मूर्तियां लगाई जानी हैं। ये मूर्तियां आए हुए 6 माह से अधिक का समय हो गया है। लेकिन बरसात व बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अभी तक भी उन्हें नहीं लगाया गया है। </p>
<p><strong>जवाब देने से बचते रहे न्यास सचिव</strong><br />बाढ़ के कारण रिवर फ्रंट के निचलते हिस्से को हुए नुकसान के बारे में जानने के लिए जब नगर विकास न्यास के सचिव राजेश जोशी को फोन किया तो उनहोंने फोन रिसीव नहीं किया। वाट्सअप मैसेज किया तो उस पर भी वे जवाब देने से बचते रहे। </p>
<p><strong>जनता के धन की बर्बादी</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट बनाया तो जा रहा है। लेकिन उसका लाभ कोटा वासियों को नहीं होगा। विदेशी पर्यटक आएंगे। जिससे इसके ठेकेदारों व व्यापारियों को लाभ होगा। रिवर फ्रंट में न तो ठेकेदार और न ही श्रमिक व कारीगर कोटा के हैं। पत्थर से लेकर सभी काम बाहर से हो रहा है। मूर्तियां तक जयपुर से बनकर आ रही हैं। बाढ़ में हुए नुकसान को देखकर लगता है कि नगर विकास न्यास द्वारा जनता के करोड़ों रुपए की बर्बादीे की जा रही है। <br /><strong>- मनीष सक्सेना, नयापुरा</strong></p>
<p><strong>अभी यह हालत तो बाद में क्या होगी</strong><br />रिवर फ्रंट का काम अभी तो चल ही रहा है। बैराज के पूरे गेट भी नहीं खुले हैं। उस समय में हीे यह स्थिति है तो आने वाले वर्षों में जब पानी अधिक छोड़ा जाएगा और इसकी देखभाल व मेंटेनेंस सही नहीं हुई तो कुछ ही समय में इसकी हालत भी अन्य विकास कार्यों की तरह हो जाएगाी। न्यास द्वारा यदि इतने रुपए में किसी को रोजगार दिया जाता तो काम भी आता।<br /><strong>- गोविंद खत्री, दादाबाड़ी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Sep 2022 16:57:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>यूआईटी अधिकारियों की अनदेखी से करणी माता मंदिर पार्क की हो रही दुर्दशा   </title>
                                    <description><![CDATA[नगर विकास न्यास द्वारा एक तरफ तो नए कोटा में करोड़ों रुपए खर्च कर आॅक्सोजोन पार्क का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पुराने कोटा शहर में बने करणीे माता मंदिर पार्क की अनदेखी की जा रही है। जिससे वह दुर्दशा का शिकार हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/plight-of-karni-mata-mandir-park-due-to-neglect-of-uit-officials/article-13720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/uit-andekhi-karni-mata-park---copy---copy.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास द्वारा एक तरफ तो नए कोटा में करोड़ों रुपए खर्च कर आॅक्सोजोन पार्क का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पुराने कोटा शहर में बने करणीे माता मंदिर पार्क की अनदेखी की जा रही है। जिससे वह दुर्दशा का शिकार हो रहा है। नदी पार नांता क्षेत्र में प्राचीन मंदिर है करणी माता का। वहां मंदिर परिसर के साथ ही नगर विकास न्यास का पार्क भी बना हुआ है। वैसे तो इस मंदिर और पार्क में दर्शन करने व घूमने वाले पूरे साल ही जाते रहते हैं। बरसात का मौसम शुरू हो गया है। वहां घूमने जाने वाले लोग बढेंंगे। लेकिन हालत यह है कि  मंदिर के उस पार्क में अभी जाने पर लोगों को उसकी दुर्दशा नजर आ रही है। ऐसे में दूर दराज से आने वाले लोगों व पर्यटकों को वहां जाने पर निराशा ही होने वाली है। इसका कारण है पार्क की दुर्दशा। शहर से दूर अभेड़ा महल घूमने जाने वाले अधिकतर लोग करणी माता मंदिर पार्क भी जाते हैंÞ। इतनी दूर जाने के बाद भी लोगों को वहां जो कुछ भी देखने को मिलेगा उसे देखकर वे स्वयं को कोसने वाले हैं। <br /><br /><strong>तालाब किनारे की रैलिंग चोरी</strong><br />पार्क में ऊपर चढ़ने पर अंतिम छोर में तालाब आता है। उस तालाब पर सुरक्षा के लिए लोहे की रैलिंग लगाई गई है। लेकिन हालत यह है कि वहां से अधिकतर रैलिंग चोरी हो चुकी है। स्मैकची वहां बीच-बीच से रैलिंग को इस तरह से काटकर ले गए कि यूआईटी के अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। जिससे वहां घूमने आने वाले विशेष रूप से बच्चों के गिरने का खतरा बना हुआ है।  <br /><br /><strong>पार्क की दीवारों में दरार, नालियां जाम</strong><br />इतना ही नहीं पार्क की सीढ़ियां चढ़ने पर उसके दोनों तरफ और उपर तालाब के किनारे की दीवार में बड़ी-बड़ी दरारें हो रही हैं। जिससे बरसात में वे दीवार कभी भी ढह सकती है। जिससे कोई बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है।  साथ ही पार्क की नालियां जाम हो रही है। पार्क में यूआईटी ने ठेके के कर्मचारी लगा रखे हैं लेकिन वे सफाई तक नहीं कर रहे। जिसका खामियाजा गंदगी के रूप में लोगों को भुगतना पड़ रहा है।<br /><br /><strong>पैदल चलने वालों के लिए बनाए ट्रेक का टूट रहा  फर्श</strong> <br />पार्क में जाने वाले रास्ते में पैदल चलने वालों के लिए फर्श तो बनाया हुआ है। लेकिन वह पूरा टूटा हुआ है। बीच-बीच में से फर्श के पत्थर व टाइल्स गायब हो रही हैं। जिससे बुजुर्गों व महिलाओं के गिरने का खतरा बना हुआ है। बच्चे वहां भाग व खेल तक नहीं पा रहे हैं। पार्क में बरसात से बचने के लिए बनी छतरी का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा है।  <br /><br /><strong>न्यास अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान</strong><br />मंदिर में दर्शन करने के साथ ही बरसात में लोग पार्क में भी घूमते हैं। साथ ही यहां पिकनिक मनाने भी लोग आते हैं। लेकिन  न्यास अधिकारियों द्वारा पार्क के विकास पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे यहां घास बढ़ रही है। कचरा पात्र टूटे हुए हैं। पानी की मोटर खराब पड़ी है। फर्श टूट रहा है। साथ ही शहर से दूर होने के कारण यहां सीसीटीवी भी लगे होने चाहिए। जिन्हें अभय कमांड सेंटर से जोड़ा जाए। जिससे यहां की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। <br /><strong>-सुरेश शर्मा, पुजारी करनी माता मंदिर</strong><br /><br /><strong>न्यास सचिव ने नहीं किया फोन रिसीव</strong><br />इस संबंध में जानकारी के लिए नगर विकास न्यास के सचिव राजेश जोशी को फोन किया। लेकिन उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br /> करनी माता मंदिर का पार्क मेरे न्यास अध्यक्ष रहते पहले कार्यकाल में विकसित किया गया था। पार्क लोगों के घूमने के लिए बनाया गया था। न्यास का पार्क है तो उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी न्यास अधिकारियों की है। बरसात में घास कटने से लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। पार्क को सही करवाने के लिए न्यास सचिव से बात करेंगे। <br /><strong>-रविन्द्र त्यागी, पूर्व अध्यक्ष, नगर विकास न्यास</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 15:13:47 +0530</pubDate>
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                <title>शहर के बीच से निकल रही बाईं मुख्य नहर दुर्दशा का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[ शहर में इस समय करोड़ों रुपए के विकास कार्य चल रहे हैं। सौंदर्यीकरण के तहत शहर के प्रमुख चौराहों को चमकाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर शहर के बीच से गुजरने वाली बाईं मुख्य नहर बेकद्री का शिकार हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-left-main-canal-coming-out-of-the-middle-of-the-city-is-a-victim-of-plight/article-13669"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/1231.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में इस समय करोड़ों रुपए के विकास कार्य चल रहे हैं। सौंदर्यीकरण के तहत शहर के प्रमुख चौराहों को चमकाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर शहर के बीच से गुजरने वाली बाईं मुख्य नहर बेकद्री का शिकार हो रही है। नहर की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। <br /><br />कोटा बैराज से जुड़ी बाईं मुख्य नहर काफी समय से दुर्दशा का शिकार हो रही है। बाईं मुख्य नहर में चारों तरफ बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है वही इसकी दोनों तरफ की सुरक्षा दीवारें भी टूटी हुई है। इस नहर की बरसों से साफ सफाई नहीं हो पाई जिससे नहर में पूरा जंगल उग आया है। नहर की सुरक्षा दीवार कई जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है वही कुछ स्थानों पर तो वह गायब भी हो गई है। सुरक्षा दीवारें जर्जर होने के कारण यहां पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सीएडी विभाग द्वारा न तो जर्जर नहर की मरम्मत करवाई जा रही है और न ही इसकी साफ-सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। इस संबंध में सीएडी के अधीक्षण अभियंता हरित लाल मीणा ने बताया कि इस समय नहर से जुड़ी ड्रेनों की साफ सफाई की जा रही है। बजट आने पर नहर की भी मरम्मत करवा दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-left-main-canal-coming-out-of-the-middle-of-the-city-is-a-victim-of-plight/article-13669</link>
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                <pubDate>Tue, 05 Jul 2022 18:57:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्मार्ट दशहरा मैदान हुआ दुर्दशा का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[दशहरा मैदान में वाहनों का इतना अधिक अम्बार है कि वह दो साल से नगर निगम का गैराज बना हुआ है। कोरोना काल के दौरान दशहरा मेला नहीं भरने से मैदान की देखभाल भी नहीं हुई। जिससे यह स्मार्ट मैदान दुर्दशा का शिकार हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/smart-dussehra-ground-became-a-victim-of-plight/article-12764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/smart-dussehara-maidan-hua-durdasha-ka-shikar-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दशहरा मैदान में वाहनों का इतना अधिक अम्बार है कि वह दो साल से नगर निगम का गैराज बना हुआ है। कोरोना काल के दौरान दशहरा मेला नहीं भरने से मैदान की देखभाल भी नहीं हुई। जिससे यह स्मार्ट मैदान दुर्दशा का शिकार हो रहा है। इस बार दशहरा मेला भरने पर वाहनों को यहां से हटाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।  दशहरा मैदान में मुख्य द्वार के बांयी तरफ से लेकर झूला मार्केट तक, फूड कोर्ट से लेकर विजयश्री रंगमंच के सामने तक और श्रीराम रंगमंच के दोनों तरफ निगम के वाहन ही वाहन खड़े हुए हैं। यहां तक कि मैदान में किशोरपुरा ईदगाह की तरफ बनी पार्किंग में टिपरों का अम्बार लगा हुआ है। मैदान में चारों तरफ जहां देखो वहां निगम के सफाई संसाधन,नए और पुराने वाहन, कंडम वाहन और कचरा पात्रों का ढेर लगा हुआ नजर आ रहा है। जिस तरह के हालात मैदान में उन्हें देखकर लगता ही नहीं कि यह दशहरा मैदान है। वरन् नगर निगम का गैराज अधिक लगता है। <br /><br /><strong>मलबे का ढेर, मृत मवेशी</strong><br />दशहरा मैदान में तुलसी माता मंंदिर कीे तरफ इतना अधिक मलबा पड़ा हुआ है कि वहां काफी ऊंचा ढेर लगा हुआ है। जबकि मैदान में कोई काम नहीं हुआ है। न जाने कहां का मलबा वहां लाकर पटका हुआ है। इतना ही नहीं उस मलब के पास मृत जानवर तक पड़े हुए हैं। जिससे वहां दुर्गंध फेल रही है। उसे देखने वाला वहां कोई नहीं है। पूरा मैदान सडांध मार रहा है। इसके अलावा मैदान के चारों तरफ कुछ लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। जिससे उस मैदान की सूरत ही बिगड़ रही है। अतिक्रमण करने वालों ने मैदान की चार दीवारी की रैलिंग पर कपड़े डाले हुए हैं। जिससे मैदान की दुर्दशा बयां हो रही है। <br /><br /><strong>न्यास के विकास कार्यों की प्रदर्शनी</strong><br />दशहरा मैदान कहने को तो नगर निगम का है। लेकिन हालत यह है कि उस मैदान के श्रीराम रंगमंच के चारों तरफ दीवार पर बने खांचों में स्मार्ट सिटी व नगर विकास न्यास द्वारा करवाए गए शहर के विकास कार्यों की प्रदर्शनी लगी हुई है। हर खांसे में विकास कार्यों को लगाया हुआ है। उसे देखकर लगता है कि सारी उपलब्धी न्यास की है नगर निगम का शहर के विकास में कोई योगदान ही नहीं है।<br /><br /><strong>फायर बाक्स खाली, लाइटें टूटी</strong><br />दशहरा मैदान में फायर उपकरण तो लगे हुए हैं। लेकिन उन फायर उपकरणों का उपयोग करने के लिए बने बॉक्स खाली हैं। उनमें रखे पाइप ही नहीं है। इमरजेंसी में आग लगने पर उन फायर उपकरणों के होने के बाद भी उनका उपयोग नहीं किया जा सकता।  इतना ही नहीं श्रीराम रंगमंच के चारों तरफ लगी लाइटें टूटी हुई हैं। जिससे उनका उपयोग भी नहीं हो रहा है। <br /><br /><strong>टूट फूट हुई अधिक</strong><br />दशहरा मैदान में हर साल मेला भरने से पहले उसकी देखभाल होती रहती थी। जिससे वह सही बना हुआ था। लेकिन एक तो कोरोना काल के दो साल में मेला नहीं भरने से मैदान की देखभाल पर किसी का ध्यान ही नहीं गया। साथ ही निगम के भारी भरकम वाहनों को खड़ा करने व रोजाना वाहनों का आना-जाना लगा रहने से वहां काफी टूटफूट हो गई है। जिससे स्मार्ट मैदान दुर्दशा का शिकार हो गया है। मैदान में मार्केट के बीच बड़े वाहनों को जाने से रोकने के लिए लगे छोटे पिलर टूटे पड़े हैं। सीमेंट के कचरा पात्र टूट रहे हैं। ट्रीगार्ड टूटकर जगह-जगह पर बिखरे पड़े हैं। श्रीराम रंगमंच के सिक्योरिटी गार्ड के कक्ष का शीशा टूटा हुआ है। दुकानों की टाइल्स टूटकर बिखरी हुई हैं। कई जगह से फर्श उखड़ चुका है। विजयश्री रंगमंच के सामने के मैदान की नालियों के ढकान टूटे हुए हैं। नालियां जाम हो रही हैं। यहां तक कि मैदान में नहीं केबल डालने के लिए उसे बीच-बीच में से कई जगह पर खोदकर पटका हुआ है। पूरे मैदान की स्थिति बयां कर रही है कि इसकी देखभाल ही नहीं हुई है। <br /><br />दो साल के बाद इस बार दशहरा मेले का आयोजन होगा। वह भी भवयता के साथ। कोरोना के दो साल तक मेला नहीं भरने से हो सकता है मैदान में कोई टूटफूट हो गई होगी। उसे दिखवाकर शीघ्र ही ठीक करवा दिया जाऐगा। साथ ही निगम के वाहनों मेंसे कंडव वाहनों को तो नीलामी प्रक्रिया के तहत निस्तारण किया जाएगा। शेष को गैराज में ही एरजेस्ट किया जाएगा। <br /><strong>-राजपाल सिंह, आयुक्त , नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/smart-dussehra-ground-became-a-victim-of-plight/article-12764</link>
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                <pubDate>Wed, 22 Jun 2022 17:05:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टूटे झूलों पर झूलता बचपन</title>
                                    <description><![CDATA[नए कोटा में कहीं अगर सबसे ज्यादा पार्क हैं तो वह विज्ञान नगर इलाके में हैं। जितनी तेजी से यहां पार्कों का निर्माण हुआ उतनी तेजी से दुर्दशा का शिकार भी हुए। हालात यह है, कहीं, झूले पूरी तरह से टूट गए तो कहीं आधे-अधूरे टूटे हुए हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/childhood-swinging-on-broken-swings/article-11618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/vigyan-nagar-park-durdasha.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नए कोटा में कहीं अगर सबसे ज्यादा पार्क हैं तो वह विज्ञान नगर इलाके में हैं। जितनी तेजी से यहां पार्कों का निर्माण हुआ उतनी तेजी से दुर्दशा का शिकार भी हुए। हालात यह है, कहीं, झूले पूरी तरह से टूट गए तो कहीं आधे-अधूरे टूटे हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा रिपसनी झूले बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं। लोहे की चददर वाली रिपसनी जगह-जगह से कटी हुई है। झूलने के दौरान बच्चे जख्मी हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों ने कई बार पार्षदों से लेकर नगर निगम के अफसरों तक चक्कर काटे लेकिन झूलों को दुरूस्त करवाने में किसी ने भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीजन, बच्चे टूटे झूलों पर झूलने को मजबूर हैं। <br /><br /><strong>10 साल से टूटे हैं झूले</strong><br />माहात्मा गांधी पार्क विकास समिति के सचिव हरीश सोनी ने बताया कि छत्रपुरा तालाब से गांधीगृह तक तीन पार्कों की देखरेख समिति करती है। इन पार्कों में करीब 10 साल से झूले टूटे हैं। वहीं लोहे की रिपसनी कई जगहों से कटी पड़ी है। झूलने के दौरान बच्चे जख्मी हो जाते हैं। पार्षद से संबंधित अधिकारियों से शिकायत की लेकिन समाधान नहीं हुआ।<br /><br /><strong> टूटे झूलों की मरम्मत और दीवारों पर लगेगी रेलिंग</strong><br /> वार्ड 57 के पार्षद कपिल शर्मा ने बताया कि नगर निगम से वार्ड में जरूरी कार्यों के लिए 1 करोड़ का बजट मिला है। इससे पार्कों की दीवारों पर लोहे की रेंलिग लगवाई जाएगी। साथ ही टूटे झूलों की मरम्मत करवाने के साथ बंद पड़ी बोरिंग व खुले में पड़े बिजली के तारों को सही करवाएंगे। इसके अलावा पार्कों का जीर्णोंद्धार भी करवाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/childhood-swinging-on-broken-swings/article-11618</link>
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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 14:29:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>NH11 B हाईवे बना दुर्दशा का शिकार अब तक सैकड़ों लोगोँ ‌ने गवाई जानेँ </title>
                                    <description><![CDATA[जिला प्रशासन व एनएचएआई की अनदेखी के चलते नेशनल हाईवे 11 B क्षतिग्रस्त सड़कों व वन विभाग द्वारा की गई तारबंदी के चलते दुर्दशा का शिकार हो रहा है, जिसके कारण आवागमन करने वाले वाहन रोजमर्रा दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/nh11-b-highway-became-a-victim-of-plight-so-far-hundreds-of-people-lost-their-lives/article-11529"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bari-photo-file1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बाड़ी।</strong>  जिला प्रशासन व एनएचएआई की अनदेखी के चलते नेशनल हाईवे 11 B क्षतिग्रस्त सड़कों व वन विभाग द्वारा की गई तारबंदी के चलते दुर्दशा का शिकार हो रहा है, जिसके कारण आवागमन करने वाले वाहन रोजमर्रा दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। लोगों के लिए सुलभ आगमन हेतु कुछ वर्ष पूर्व एनएचएआई ने करौली-धोलपुर हाईवे का निर्माण लगभग 400 करोड़ की लागत से कराया था.</p>
<p>जिसकी चौड़ाई के लिए भूमि भी अवाप्त की गई गई थी, लेकिन निर्माण कंपनी द्वारा की कई निर्माण कार्य मे कमियों के चलते यह हाईवे दुर्घटनाओं का कारण बना है। हाईवे निर्माण से लेकर अब तक सैकड़ों जाने जा चुकी है, जिसमे सर्वाधिक दुर्घटनाएं धोलपुर, बाड़ी, सरमथुरा के मध्य हुई है। इन दुर्घटनाओं के कारणों की आज तक जांच ना तो एनएचएआई द्वारा की गई है और ना ही जिला प्रशाशन समेत जनप्रतिनिधियों ने भी कोई ध्यान नहीं दिया है।</p>
<p>इस हाईवे पर मोड़ होना, रिफ्लेक्टर ना लगना, जगह-जगह सांकेतिक बोर्डों का अभाव के साथ निर्माण में काम मे आने वाली घटिया सामग्री, खासकर जिन गिट्टियों का  प्रयोग होना चाहिए था, वह नहीं हुआ। उसी का परिणाम है कि तीन लेयर सड़क होने के बावजूद लगभग पूरी सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।सड़क निर्माण के दौरान दोनों साइडों को कंकरीट डालकर ही छोड़ दिया गया, जिसके चलते कई जगह खरंजे में  कटाव की स्थिति के साथ खरपतवारों ने दोनों साइडों पर अतिक्रमण कर लिया।जिसके चलते पैदल आवागमन करने वाले लोग भी परेशान होने लगे।</p>
<p>हाईवे निर्माण की टेंडर प्रक्रिया में जिन हरे-भरे पेड़ों को काटा गया, उनकी जगह दोनों साइडों में पेड़ लगाना भी अनिवार्य था, लेकिन उनकी भी कम्पनी ने औपचारिकता कर इतिश्री कर ली, नतीजा ना पेड़ लगे, बल्कि जो थे वह निर्माण के नाम पर काट लिये गये।प्रतिदिन आवागमन करने वाले अनिक आरटीआई, संदीप गर्ग, रमाकांत शर्मा आदि ने आक्रोशित होते हुए बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग की यूँ तो एक नियत चौड़ाई होती है पर 11 राष्ट्रीय राजमार्ग की चौड़ाई सड़क के दौनों तरफ सीमेंटेड पिलर लगा कर सीमित कर दी गई है। इसका क्या प्रयोजन है अभी तक ना जनता समझ पाई ना अफसर समझा पाए हैं। हां इन्हें देख भ्रष्टाचार की गंध अवश्य आती है। आज निभी के ताल पर भूंसे से भरा ट्रक पलट गया और ऐसे पलटा कि पूरी सड़क पर आड़ा ही पसर गया, जिससे दोनों तरफ का यातायात बन्द हो गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 15:20:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इस तरफ नजरें इनायत, उस तरफ हो रही बेकद्री</title>
                                    <description><![CDATA[ संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर शहर में दो जगह बनी हुई हैं। इन दोनों जगहों  के रूप अलग-अलग देखने को मिल रहे हैं। उनमें से एक की तो दुर्दशा हो रही है जबकि दूसरी जगह चमक  रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/eyes-on-this-side-with-gracefully--the-plight-on-that-side/article-10419"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/nazre-inayat-ambedkar-bhawan.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर शहर में दो जगह बनी हुई हैं। इन दोनों जगहों  के रूप अलग-अलग देखने को मिल रहे हैं। उनमें से एक की तो दुर्दशा हो रही है जबकि दूसरी जगह चमक  रही है। नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में निगम कार्यालय के पास सीएडी चौराहे पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर भवन बना हुआ है। इस भवन का संचालन नगर निगम के अधीन है। इस भवन में पहले जहां निगम बोर्ड की बैठकें हुआ करती थी। उसके बाद निगम के कार्यक्रम, शिविर और बाद में अन्य आयोजनों के लिए भी इसे किराए पर दिया जाता था। इसमें बड़ा हॉल से लेकर कई कमरे बने हुए हैं। पीछे खुला परिसर भी है। जन सुविधा भी बनी हुई हैं। लेकिन हालत यह है कि निगम की अनदेखी के चलते वह भवन पूरा जर्जर हो रहा है। यहां हॉल से लेकर जन सुुविधा तक खराब हो गए हैं। कमरों में निगम के कार्यालय संचालित हो रहे हैं। लेकिन उन कमरों की हालत भी बेकार हो चुकी है। इतना ही नहीं अम्बेडकर भवन में प्रवेश करने वाले मुख्य द्वार से लेकर साइड वाले चैनल गेट तक पर अतिक्रमण हो रहा है। कुछ जाति विशेष के लोगों ने यहां डेरा डाला हुआ है। पूरे परिसर में सूअर, मवेशी व श्वानों का बसेरा है। पीछे की तरफ लगा हैंडपम्प उपयोग में नहीं होने से पूरा खत्म हो चुका है। साथ ही परिसर में कंडम टिपर खड़े हुए हैं। मेन रोड पर होने के बावजूद अनदेखी के चलते इस भवन की दुर्दशा हो रही है। <br /><br /><strong>महापौर ने देखा था मौका, यूओ नोट भी लिखा</strong><br />अम्बेडकर भवन की दुर्दशा सुधारने के लिए कुछ समय पहले नगर निगम कोटा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल ने अधिशासी अभियंता ए.क्यू कुरैशी के साथ भवन का मौका देखा था। उस समय उन्होंने इसकी हालत सुधारने के लिए तत्कालीन आयुक्त को यूओ नोट भी लिखा था। उसे काफी समय बीतने के बाद भी अभी तक अधिकारियों ने इस भवन की सुध नहीं ली है। <br /><br /><strong>अम्बेडकर सर्किल को चमकाया</strong><br />वहीं नगर निगम कोटा उत्तर क्षेत्र में अदालत चौराहा  स्थित अम्बेडकर सर्किल की दशा को नगर विकास न्यास द्वारा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत चमकाया है। करीब 13 करोड़ रुपए की लागत से सर्किल का विकास व सौन्दर्यीकरण किया गया है। उसके साथ ही डॉ. भीमराव अम्बेडकर की आदमकद प्रतिमा स्थल का भी सौन्दर्यीकरण किया गया है। मूर्ति का पैडेस्टल नया बनाया है। मूर्ति तक जाने की सीढ़ियां उसके आस-पास खड़े रहने की जगह और पीछे की जगह को बेहतर बनाया है। साथ ही मूर्ति स्थल पर लोहे की नई रैलिंग लगाई गई है। जिससे यह सर्किल व मूर्ति अलग ही रूप में नजर आ रहा है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />अम्बेडकर भवन की दुर्दशा की जानकारी लेकर संबंधित अधिशासी अभियंता से रिपोर्ट ली जाएगी। उसके बाद उस भवन को सुधारने का पूरा प्रयास किया जाएगा। पूर्व में इस बारे में क्या प्रयास हुए हैं उसकी मुझे जानकारी नहीं है। <br /><strong>- राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 May 2022 15:54:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खेल मैदान दुर्दशा के शिकार फिर कैसे निखरेगी प्रतिभाएं ?</title>
                                    <description><![CDATA[खेल मैदानों में किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते यह खेल मैदान कागजी रिकॉर्ड में मात्र सिमट कर रह गए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-playing-field-plight-of--how-will-the-talents-shine/article-7008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/untitled-1.jpg" alt=""></a><br /><p>राजपुर।  एक और तो सरकार ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं में निखार लाने के लिए तरह तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने और खेल मैदान आवंटित कर रखे हैं लेकिन खेल मैदान दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। खेल मैदानों में किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते यह खेल मैदान कागजी रिकॉर्ड में मात्र सिमट कर रह गए हैं। वही जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव बनाकर भेज रखा है जैसे ही बजट आ जाएगा तो खेल मैदान में सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी लेकिन लंबे समय से यह खेल मैदान अपनी दुर्दशा के आंसू रो रहा है और ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं आगे बढ़ने के लिए तरस रही है। <br /><br />राजपुर गणेशपुरा ग्राम पंचायत के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए खेल मैदान की भूमि आवंटित कर संकेत बोर्ड तो लगा दिये है लेकिन खेल मैदान में सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं में निखार नहीं आ पा रहा है। खेल मैदान में कांटेदार झाड़ियां उगी हुई है। मैदान समतलीकरण नहीं है। बाउंड्रीवाल और पानी की व्यवस्था भी नहीं है।  ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों में रोष बना हुआ है। क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों ने खेल मैदान को दुरुस्त और सर्व सुविधा युक्त करने की मांग की है ताकि ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं में निखार आए।<br /><br /><strong> उगी हुई है कांटेदार झाड़ियां, साफ सफाई का अभाव....</strong><br /> आदिवासी अंचल क्षेत्र के अधिकांश स्थानों पर खेल मैदान बने हुए हैं इन खेल मैदानों में किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं है। सिर्फ संकेत बोर्ड लगे हुए हैं जो खेल मैदान होने की गवाही देते हैं बाकी कहीं खेल मैदानों पर अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया गया है या फिर कांटेदार झाड़ियों और गंदगी अटी पड़ी है तो कई खेल मैदानों में मिट्टी की खदान बन चुकी है। ऐसे में गांव के ग्रामीण खिलाड़ियों को काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। खेल मैदान की जगह तो है लेकिन खेल मैदान में सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों को इधर-उधर खेलना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से खेल प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं अगर खेल मैदानों की प्रशासन सुध ले तो ग्रामीण क्षेत्रों से खेल प्रतिभाएं आगे बढ़ सकती हैं।<br /><br />खेल मैदान में किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं है। काटेदार झाड़ियां उगी भी हैं। बाउंड्रीवाल नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं में निराशा है जिम्मेदारो को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं में निखार आए।- नीलेश ओझा, खेल प्रेमी।     <br /><br />खेल मैदान बदहाली के आंसू रो रहे हैं। कागजी रिकॉर्ड में खेल मैदान दर्शा रखे हैं, लेकिन खेल मैदान की स्थिति बदहाल है। खेल मैदानों में सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहिए ताकि खिलाड़ियों को परेशानी ना हो।  - सागर सोनी, क्रिकेट खिलाड़ी।<br />     <br />अगर खेल मैदान सुविधा युक्त हो तो ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को भी प्रतिभा में निखार लाने के लिए परेशानी ना हो खेलने के लिए खिलाड़ियों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़े। खेल मैदानों पर ध्यान देना चाहिए। - शत्रुघ्न भार्गव, युवा खिलाड़ी।<br />     <br />खेल मैदानों की स्थिति को दुरुस्त करना चाहिए ताकि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को खेलने में असुविधा ना हो और खेल प्रतिभाओं में निखार आए और युवा पीढ़ी स्वस्थ रहे। मैदानों की स्थिति को लेकर जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए। - विकास बंसल, अग्रवाल समाज अध्यक्ष, राजपुर।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Mar 2022 16:24:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पापियों ने नवरात्र में भी नहीं छोड़ी हैवानियत : जिंदा रावणों की दरिंदगी देख जलता दशानन भी शर्मसार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश पुलिस की क्राइम रिपोर्ट से हुआ खुलासा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%9B%E0%A5%8B%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%A4---%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A3%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%96-%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-1723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/23.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff0000;"><strong> जयपुर</strong></span>। नवरात्रा के नौ दिन सबसे पवित्र माने जाते हैं। इस दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। लेकिन इन दिनों में भी दुष्कर्मी दरिंदगी करने से बाज नहीं आते और प्रदेशभर में दर्जनों महिलाएं इनका शिकार होती हैं। ऐसे लोग समाज के लिए कलंक हैं। इन हैवानों ने हर दिन 50 से अधिक महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बनाया है। वर्ष 2021 में सात सितम्बर से शुरू हुए नवरात्रा के दिनों की बात करें तो महिला थानों को छोड़कर अन्य थानों में महिलाओं के साथ 35 वारदात हुई हैं, जिनमें छेड़छाड़, दुष्कर्म और अभद्र व्यवहार के मामले दर्ज हुए हैं। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>शौच के लिए गई युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म</strong></span></span><br /> सवाई माधोपुर के मलारना डूंगर थाना इलाके में शौच के लिए गई युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि तीन युवकों ने उसके साथ सामूहिक  दुष्कर्म किया, वह किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को सूचना दी। अब रिपोर्ट पर पुलिस आरोपियों को तलाश कर रही है।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>सरकारी टीचर ने किया नाबालिग के साथ दुष्कर्म </strong></span></span><br /> झुंझुनूं जिले के सिंघाना इलाके में सरकारी टीचर ने 11 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म किया और डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने टीचर को गिरफ्तार कर लिया है। नाबालिग ने किताब में लिखे चाइल्ड हेल्पलाइन नम्बरों पर जानकारी दी।  उसके बाद बाल कल्याण समिति की टीम उससे मिली और परिजनों से मिलकर रिपोर्ट दर्ज कराई। <br /> <br /> <br /> माह    सितम्बर 2017    अक्टूबर 2018    सित.-अक्टूबर 2019    अक्टूबर 2020<br /> नवरात्रा    ( 21 से 30 सितम्बर)    (10 से 19 अक्टूबर)    (29 सित.-8 अक्टू.)    (17 से 25 अक्टूबर)<br /> वारदात    30 दिन    10 दिन    30 दिन    10 दिन    30 दिन    10 दिन    30 दिन    10 दिन<br /> दहेज मृत्यु    49    16    36    11    35    11    41    13<br /> दहेज आत्महत्या दुष्पे्ररण    11    3    12    3    19    6    18    5<br /> महिला उत्पीड़न    967    319    1801    594    1674    552    1368    451<br /> बलात्कार    341    112    328    108    533    175    470    155<br /> छेड़छाड़    494    163    417    137    802    264    855    282<br /> अपहरण    303    100    350    115    535    176    411    135<br /> अन्य    99    32    72    23    145    47    133    43<br /> कुल    2264    747    3016    995    3743    1235    3296    1087<br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> रेलवे अधिकारी ने किया यौन शोषण</strong></span></span><br /> जोधपुर रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारी ने अपनी बेटी की उम्र की कर्मचारी का सेक्सुअल हरेसमेंट किया। इन आरोपों के बाद अधिकारी को छुट्टी पर भेज दिया है। <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> भाई ने लूटी बहन की अस्मत</strong></span></span><br /> पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में भाई ने अपनी चचेरी बहन के साथ शराब के नशे में दुष्कर्म किया और किसी को नहीं बताने की धमकी दी। बहन नहीं मानी तो आरोपी ने उसे  कुएं में धकेल दिया, गिरते वक्त उसने दीवार का एक पत्थर पकड़ लिया और करीब तीन घंटे तक उस पर बैठी रही। सुबह किसी चरवाहे ने उसकी चीख सुन कर उसे बाहर निकाला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Oct 2021 12:37:25 +0530</pubDate>
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