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                <title>report - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र की खौफनाक रिपोर्ट: 2025 में युद्ध क्षेत्रों में यौन हिंसा के मामले दोगुने से अधिक बढ़े, 10,000 मामले दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया के संघर्षग्रस्त देशों में यौन हिंसा के 9,788 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल से दोगुने से भी अधिक हैं। विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पट्टन ने बताया कि अफ्रीका, यूरोप और मध्य पूर्व में दुष्कर्म और यौन दासता को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/conflict-related-sexual-violence-cases-to-more-than-double-by/article-155503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/un.png" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि 2025 में दुनिया में संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के लगभग 10,000 मामले दर्ज किए गए जो 2024 के आंकड़े से दोगुने से भी अधिक हैं जिसमें दुष्कर्म, यौन दासता और अपहरण को अफ्रीका, मध्य पूर्व, यूरोप और कैरेबियाई देशों में युद्ध हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया गया। संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट शुक्रवार को जारी करते हुए, विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पट्टन ने कहा कि ये आंकड़े एक गंभीर वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं जिसमें बढ़ती असुरक्षा, विस्थापन एवं पीड़ितों के लिए घटते संसाधन सभी इस संकट को बढ़ावा दे रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से कहा, "2025 में युद्ध, यातना, आतंकवाद और राजनीतिक दमन की रणनीति के रूप में यौन हिंसा के मामलों में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई जिसमें मुख्य रूप से महिलाओं एवं लड़कियों को निशाना बनाया गया।" रिपोर्ट में 2025 के दौरान संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के 9,788 मामलों की पुष्टि की गई हालांकि प्रमिला ने इस बात पर बल दिया कि यह आंकड़ा क्रूर वास्तविकता को नहीं दर्शाता है।</p>
<p>इस रिपोर्ट में 21 संघर्षग्रस्त देशों में राज्य और गैर-राज्य दोनों ही पक्षों द्वारा किए गए बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दासता, जबरन विवाह, तस्करी एवं अपहरण के मामलों का दस्तावेजीकरण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं एवं लड़कियों को ही मुख्य रूप से निशाना बनाया गया, हालांकि पुरुषों एवं लड़कों को भी यौन हिंसा का शिकार होना पड़ा, अक्सर हिरासत में एवं यातना के रूप में। तीसरे जैंडर को भी लक्षित उत्पीड़न एवं दुर्व्यवहार का जोखिम झेलना पड़ा। पीड़ितों की उम्र एक से 70 वर्ष के बीच थी जिसमें दिव्यांगजनों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।</p>
<p>प्रमिला ने कहा कि हिंसा के साथ अत्यधिक शारीरिक दुर्व्यवहार भी होता था, जिसमें बलात्कार के बाद हत्याएं और पीड़ितों द्वारा की गई आत्महत्याएं शामिल हैं। उन्होंने कहा, "यह रिपोर्ट मूल रूप से युद्ध की छाया में रहने वाले इन सभी बचे हुए लोगों एवं समुदायों की मानवीय पीड़ा से संबंधित है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:16:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बाल विवाह पर SRS रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता: पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे ज्यादा नाबालिग लड़कियों की हो रही शादी</title>
                                    <description><![CDATA[‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में महिलाओं की औसत विवाह उम्र 23.1 वर्ष हो गई है। इसके बावजूद 2.1% लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो रही है। इस सामाजिक बुराई में पश्चिम बंगाल (6.3%) शीर्ष पर और झारखंड दूसरे स्थान पर है, जबकि दिल्ली में एक भी मामला नहीं आया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/srs-report-on-child-marriage-increases-concern-highest-number-of/article-155356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/baal-vivah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में बाल विवाह रोकने और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन कई राज्यों में यह सामाजिक बुराई अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। ‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2024’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे ज्यादा नाबालिग लड़कियों की शादी हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की औसत शादी की उम्र बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है और 73.5 प्रतिशत महिलाएं 21 साल के बाद विवाह कर रही हैं।</p>
<p>इसके बावजूद 2.1 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले हो रही है। पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा 6.3 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि झारखंड दूसरे स्थान पर रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह के मामले शहरी इलाकों की तुलना में अधिक पाए गए। वहीं, दिल्ली में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ और केरल में इसकी दर सबसे कम रही। विशेषज्ञों ने कम उम्र में शादी को लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:47:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मरीज निजी अस्पताल में भर्ती, सरकारी मशीनरी रिपोर्ट में कह रही स्वस्थ</title>
                                    <description><![CDATA[गंभीर रूप से बीमार एक मरीज का कोटा के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patient-admitted-to-private-hospital--government-machinery-declares-him-healthy-in-report/article-155156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)62.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सुल्तानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आईवी फ्लूइड (ग्लूकोज की बोतलें) चढ़ाने से मरीजों की तबीयत बिगड़ने के मामले ने चिकित्सा विभाग में चल रही ढाँक-छुपी को फिर से उजागर कर दिया है। दरअसल सीएचसी प्रभारी डॉ. श्याम बिहारी मालव द्वारा जयपुर मुख्यालय और कोटा के उच्चाधिकारियों को भेजी गई आधिकारिक रिपोर्ट' में दावा किया है कि ग्लूकोज से प्रभावित हुए तीनों मरीज अब 'स्वस्थ' हैं। जबकि हकीकत यह है कि गंभीर रूप से बीमार एक मरीज दिनेश गोचर का कोटा के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। अभी तक इस रिपोर्ट पर विभाग के अधिकारियों की तरफ से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p>
<p><strong>रिपोर्ट का सच: रात को बिगड़ी हालत, आनन-फानन में किया रेफर</strong><br />सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, डोबरली निवासी दिनेश गोचर (45) को 23 मई की रात 08:20 बजे बुखार और उल्टी की शिकायत पर भर्ती किया गया था। रात 08:30 बजे ड्यूटी डॉक्टर कमल मालव ने उन्हें मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत कल्ल्न. फछ (ग्लूकोज) व अन्य इंजेक्शन लगाए। बोतल चढ़ने के महज आधा घंटे बाद रात 09:00 बजे दिनेश को तेज कंपकंपी, ठंड और खुजली के साथ उल्टियां शुरू हो गईं। हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने उन्हें एंटी-एलर्जिक और जीवन रक्षक इंजेक्शन दिए।<br />रिपोर्ट में मालव खुद स्कवीकार रहे हैं कि रात 10:15 बजे मरीज को 108 एम्बुलेंस से एमबीएस अस्पताल कोटा रेफर किया गया, लेकिन परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए जहां उनका इलाज जारी है। इसके बावजूद प्रभारी ने मुख्यालय को भेजे जवाब में मरीज को 'स्वस्थ' लिखा है।</p>
<p><strong>दो अन्य मरीजों की भी चढ़ाई बोतल, कांपने लगे शरीर</strong><br />रिपोर्ट में दो अन्य प्रभावित मरीजों का भी बिंदुवार ब्योरा दिया गया है जिसमें मरीज चिंटू (30), चम्पाखेड़ा निवासी है इन्हें 19 मई को दोपहर 01:00 बजे यूटीआई की शिकायत पर भर्ती किया गया। दोपहर 01:20 बजे डॉ. श्याम मालव ने इन्हें कल्ल्न. ऊठर चढ़ाया। ठीक 20 मिनट बाद मरीज को तेज ठंड, कंपकंपी और खुजली होने लगी। काउंटर ट्रीटमेंट देकर दोपहर 02:30 बजे डिस्चार्ज किया गया। वही दुसरी मरीज शबाना (34), नोताडा की है इन्हें 23 मई की रात 07:10 बजे दस्त की शिकायत पर भर्ती किया गया। रात 07:25 बजे चढ़ते ही रात 07:45 बजे शरीर कांपने लगा और उल्टियां शुरू हो गईं। इन्हें भी रात 09:00 बजे डिस्चार्ज किया गया। हालाकि इन दोनों के परिजनों से बात करने पर उन्होंने पुरी स्वस्थ होने की बात कही।</p>
<p><strong>बचाव की मुद्रा में विभाग: 'मरीजों ने लिखित में शिकायत नहीं की'</strong><br />इस पूरी रिपोर्ट में खास बात यह है कि प्रभारी ने तीनों मरीजों के कॉलम में नीचे एक जैसी लाईन लिखी है- मरीज द्वारा उक्त उपचार तथा दवा के संबंध में किसी भी प्रकार की लिखित में शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। जानकार इसे चिकित्सा विभाग का खुद को बचाने का पैंतरा मान रहे हैं, क्योंकि जब पूरे प्रदेश में इस बैच की दवाइयों को संदिग्ध मान कर सप्लाई रोकी जा चुकी है और बची दवाएं सील की गई हैं, तो विभाग जांच के लिये लिखित शिकायत का बहाना क्यों बना रहा है?</p>
<p><strong>सवाल कागजों में 'स्वस्थ', अस्पताल के बेड पर मरीज!</strong><br />सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता देखिए कि सुल्तानपुर सीएचसी के अधिकारी ने जयपुर मुख्यालय (नोडल अधिकारी), संयुक्त निदेशक कोटा और सीएमएचओ कोटा को भेजी रिपोर्ट में यह लिख दिया कि 'मरीज वर्तमान में स्वस्थ है'। सवाल यह उठता है कि अगर मरीज पूरी तरह स्वस्थ था, तो उसे रात के 10:15 बजे सरकारी 108 एम्बुलेंस बुलाकर कोटा के हायर सेंटर क्यों रेफर करना पड़ा? और अगर वह स्वस्थ है तो आज भी निजी अस्पताल के बेड पर उसका इलाज क्यों चल रहा है? विभागीय आंकड़ों की बाजीगरी मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है।</p>
<p> आज मिटिंग की व्यस्तता के चलते मुझे इस मामले की ज्यादा अपडेट नहीं है। हाँलाकि फेक्चुअल रिपोर्ट हमें मिल गयी है मैने अभी नहीं देखी।<br /><strong>- डॉ. घनश्याम मीणा , डिप्टी सीएमएचओ कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 13:05:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हर शहर में बनेंगे डॉग शेल्टर : निकायवार तैयार होगी रिपोर्ट, प्रदेश के सभी शहरों में चरणबद्ध कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार आवारा श्वानों के लिए बड़े स्तर पर योजना बना रही है। सभी शहरों में चरणबद्ध डॉग शेल्टर बनेंगे। 2026-27 बजट में प्रावधान। निकायों से संख्या, क्षमता व स्टाफ रिपोर्ट ली जाएगी। डॉग हॉटस्पॉट चिन्हित होंगे, नसबंदी व निगरानी बढ़ेगी। उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों से श्वानों को व्यवस्थित रूप से हटाना है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dog-shelters-will-be-built-in-every-city-body-wise-report/article-154629"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(9)5.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। आवारा श्वानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार अब बड़े स्तर पर तैयारी में जुट गई है। राज्य के सभी शहरों में चरणबद्ध तरीके से डॉग शेल्टर बनाए जाएंगे, ताकि सार्वजनिक स्थानों से हटाए जाने वाले आवारा श्वानों को वहां रखा जा सके। स्वायत्त शासन विभाग इसे लेकर निकायों से विस्तृत रिपोर्ट तैयार करवा रहा है। स्वायत्त शासन सचिव रवि जैन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में डॉग शेल्टर निर्माण के लिए राशि का प्रावधान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर के निकाय अधिकारियों की बैठक जल्द बुलाई जाएगी। इसमें शहरवार आवारा श्वानों की संख्या, मौजूदा शेल्टरों की स्थिति, नए शेल्टरों की जरूरत, पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की उपलब्धता पर रिपोर्ट ली जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निकाय कर सकेंगी डॉग हॉटस्पॉट चिह्नित: पशु कल्याण से जुड़े संगठनों के अनुसार केवल शेल्टर बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके संचालन, भोजन, टीकाकरण और नसबंदी व्यवस्था के लिए स्थायी मॉडल भी जरूरी होगा। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार जिला कलेक्टरों की बैठक बुलाने पर भी विचार कर रही है। निकायों को शहरों में डॉग हॉटस्पॉट चिह्नित करने और आक्रामक श्वानों की मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शहरों में डॉग शेल्टर को लेकर सरकार की तैयारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>   <strong> </strong></span><strong>बिंदु<span>   </span><span>                                     </span>स्थिति</strong></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शेल्टर निर्माण<span>                        </span>सभी शहरों में चरणबद्ध निर्माण</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बजट प्रावधान<span>                       </span>वित्तीय वर्ष 2026-27 में राशि स्वीकृत</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निकायों से रिपोर्ट<span>                  </span>श्वानों की संख्या, शेल्टर क्षमता, स्टाफ<span>  </span>विवरण</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रस्तावित बैठक<span>                   </span>निकाय अधिकारियों व जिला कलेक्टरों की</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुख्य उद्देश्य<span>                      </span>सार्वजनिक स्थानों से आवारा श्वानों को हटाना</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की फटकार, 31 जुलाई तक कराएं पंचायत और निकाय चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है। अदालत ने ओबीसी आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट सौंपने और चुनाव आयोग को उसके बाद शेड्यूल जारी करने को कहा है। महाधिवक्ता ने 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' का हवाला देते हुए समय मांगा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/high-courts-rebuke-regarding-panchayat-elections-conduct-panchayat-and-civic/article-154645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajasthan-high-court.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को कहा है कि वह 31 जुलाई तक प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव कराए। इसके साथ ही अदालत ने ओबीसी आयोग को भी कहा है कि वह 20 जून तक अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है। अदालत ने राज्य चुनाव आयोग को कहा है कि वह 20 जून के बाद अपना चुनाव शेड्यूल जारी करे। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह आदेश पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा की याचिका में राज्य सरकार की ओर से दायर प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए दिए। खंडपीठ ने गत 11 मई को सभी पक्षों को सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<p>प्रार्थना पत्र में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि अक्टूबर-दिसंबर में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा और इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा। इसके अलावा कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी है कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं हो सका। चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी, मौसम, कृषि और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर चुनाव आगे खिसकाने की अनुमति मांगी गई। जिसका विरोध करते हुए अधिवक्ता प्रेमचंद देवदा ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। </p>
<p>इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सुरेश महाजन के मामले में दिए फैसले के तहत ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना भी पंचायत चुनाव हो सकते हैं।<br />अदालत ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का पर्याप्त समय दिया था, लेकिन इस अवधि तक निकायों के लिए अंतिम मतदाता सूची ही जारी नहीं की गई। इसके अलावा हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी। इसलिए यह आदेश अंतिम हो गया है और इसकी पालना की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:46:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी चुनाव 2027 की तैयारी : भाजपा का विधायकों पर 'परफॉर्मेंस टेस्ट' शुरू, सर्वे में खराब निकले तो कटेगा टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने मौजूदा विधायकों का 'रिपोर्ट कार्ड' बनाना शुरू कर दिया है। दो बाहरी एजेंसियों द्वारा कराए जा रहे इस सर्वे में जनता की नाराजगी झेल रहे विधायकों की जगह नए और जिताऊ चेहरों की तलाश की जा रही है। मुरादाबाद मंडल पर पार्टी का विशेष ध्यान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mission-2027-bjps-performance-test-on-mlas-begins-if-they/article-154532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bjp-kerala.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने 2022 में जीते अपने विधायकों का 'रिपोर्ट कार्ड' तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी यह परख रही है कि क्षेत्र में विधायक की जमीनी पकड़ कैसी है और जनता के बीच उनकी सक्रियता कितनी है। जिन विधायकों से जनता नाराज है, उनकी जगह नए और जिताऊ चेहरों की तलाश तेज कर दी गई है।</p>
<p>पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि, “हाईकमान ने पूरे सर्वे की जिम्मेदारी दो बाहरी एजेंसियों को दी है जिनकी टीमें पिछले कई दिनों से शहरी और ग्रामीण इलाकों में घूमकर लोगों से सीधा संवाद कर रही हैं। विधायकों के काम, व्यवहार और क्षेत्र में मौजूदगी पर जनता की राय ली जा रही है। इसके अलावा संभावित नए दावेदारों की लोकप्रियता और जातीय-सामाजिक प्रभाव का भी आकलन किया जा रहा है। भाजपा यह तय करना चाहती है कि 2027 में किस चेहरे पर दांव लगाने से जीत की गारंटी मिलेगी।”</p>
<p>सर्वे पूरे प्रदेश में मंडलवार कराया जा रहा है। ज्यादातर मंडलों में भाजपा की स्थिति मजबूत है, लेकिन मुरादाबाद मंडल पार्टी के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। 2017 के चुनाव में भाजपा को यहां 27 में से 14 सीटें मिली थीं, जो 2022 में घटकर सिर्फ 10 रह गईं। इसी नुकसान की भरपाई के लिए पार्टी इस मंडल में खास सतर्कता बरत रही है और हर सीट पर मजबूत उम्मीदवार खोज रही है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक संगठन अपने स्तर पर जिला और क्षेत्रवार संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट बना रहा है। इसमें स्थानीय सांसदों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राय को भी महत्व दिया जाएगा। बाहरी एजेंसियों की रिपोर्ट और संगठन की सूची का मिलान किया जाएगा।</p>
<p>भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि जो नाम दोनों जगह कॉमन होंगे और जिन पर सहमति बनेगी, उनका टिकट लगभग पक्का माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एजेंसियों की रिपोर्ट जल्द ही दिल्ली हाईकमान को सौंप दी जाएगी। सूत्रों ने बताया कि इस सर्वे में सिर्फ विधायकों का ही नहीं, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं और नौ साल के कामकाज को लेकर भी जनता का मूड भांपा जा रहा है। पार्टी यह जानना चाहती है कि किस इलाके में सरकार की ब्रांडिंग मजबूत है और कहां एंटी-इनकंबेंसी है। नेतृत्व का मानना है कि अभी से मिली जमीनी फीडबैक से 2027 की रणनीति को धार दी जा सकेगी। साफ संकेत हैं कि जो विधायक काम में फिसड्डी साबित हुए, उनका पत्ता अगले चुनाव में कटना तय है।</p>
<p>गौरतलब है कि इसी तरह कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी की सीटों पर प्राइवेट एजेंसियों से संभावित चेहरों की लिस्ट बनवानी शुरू कर दी है। सपा भी अंदरखाने सर्वे के जरिए उम्मीदवार छांट रही है। मायावती की बसपा कई सीटों पर प्रभारी और संभावित प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। आजाद की आजाद समाज पार्टी दूसरे दलों के मजबूत नेताओं को तोड़कर अपने पाले में लाने में जुटी है। कुल मिलाकर 2027 का चुनावी दंगल शुरू होने से पहले ही सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। टिकट का गणित, जातीय समीकरण और सर्वे रिपोर्ट ही तय करेंगे कि अगली बार लखनऊ की सत्ता किसके हाथ आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:03:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नीति आयोग की रिपोर्ट में राजस्थान का डंका, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[नीति आयोग ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में राजस्थान के 'शाला स्वास्थ्य परीक्षण अभियान' और एआई-आधारित मूल्यांकन प्रणाली को 'गुड स्टेट प्रैक्टिसेज' के रूप में सराहा है। तकनीक-आधारित इस मॉडल के तहत प्रदेश के 75 लाख से अधिक विद्यार्थियों की 70 स्वास्थ्य मानकों पर स्क्रीनिंग कर रिकॉर्ड बनाया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/niti-aayogs-latest-report-on-school-education-system-in-india/article-154488"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/secratrait1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में किए गए स्वास्थ्य निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। नीति आयोग ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट ‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया-टेम्पोरल एनालिसिस एण्ड पॉलिसी रौडमेप फॉर क्वालिटी इन्हेंसमेंट’ में राजस्थान के ‘शाला स्वास्थ्य परीक्षण अभियान’ एवं मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान के एआई आधारित मूल्यांकन प्रणाली को ‘गुड स्टेट प्रैक्टिसेज’ के रूप में उल्लेखित किया गया है। नीति आयोग ने इस रिपोर्ट में राजस्थान द्वारा विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण, फिटनेस एवं स्वास्थ्य निगरानी के लिए विकसित तकनीक आधारित मॉडल की सराहना की है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 75 लाख से अधिक विद्यार्थियों की 70 से अधिक स्वास्थ्य मानकों पर स्क्रीनिंग की गई। इसके तहत विद्यार्थियों की दृष्टि, श्रवण क्षमता, पोषण स्तर, दंत स्वास्थ्य व शारीरिक फिटनेस सहित विभिन्न पहलुओं की जांच एवं मोबाइल ऐप आधारित फॉलो-अप प्रणाली विकसित की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:40:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डब्ल्यूएचओ का दावा: वैश्विक कोरोना मौतों का आंकड़ा आधिकारिक संख्या से तीन गुना अधिक, रिपोर्ट जारी  </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026' रिपोर्ट के अनुसार, महामारी से वास्तविक मौतें 2.2 करोड़ के पार पहुंच गई हैं। यह सरकारी आंकड़ों से तीन गुना ज्यादा है। कम रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान के कारण जीवन प्रत्याशा में हुई एक दशक की प्रगति भी समाप्त हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/who-claims-global-corona-death-toll-three-times-higher-than/article-153780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/who.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में मौतों की वास्तविक संख्या 2.2 करोड़ से अधिक पहुंच गई है, जो आधिकारिक तौर पर दर्ज 70 लाख मौतों से करीब तीन गुना ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ की बुधवार को जारी "वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026" रिपोर्ट में कहा गया, "वर्ष 2020 से 2023 के बीच सभी कारणों से वैश्विक अतिरिक्त मौतों (एक्सेस डेथ्स) का अनुमान 2.21 करोड़ लगाया गया, जबकि कोविड-19 से आधिकारिक तौर पर 70 लाख मौतें दर्ज की गईं। </p>
<p>इसका मतलब है कि कोविड से दर्ज हर एक मौत के मुकाबले महामारी से जुड़ी लगभग दो अतिरिक्त मौतें हुईं।"संगठन के अनुसार, इसका मुख्य कारण कई देशों द्वारा मौतों की कम रिपोर्टिंग करना है। इसके अलावा, 2022 के बाद अनेक देशों ने बड़े पैमाने पर कोविड-19 जांच अभियान बंद कर दिये, जिससे वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ सके। रिपोर्ट में कहा गया, "यह निष्कर्ष न केवल वायरस से सीधे हुई मौतों की कम रिपोर्टिंग को दर्शाता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान, आर्थिक चुनौतियों और अन्य सामाजिक कारणों से हुई अप्रत्यक्ष मौतों को भी उजागर करता है।"</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि महामारी ने वैश्विक स्तर पर जीवन प्रत्याशा में एक दशक की प्रगति को खत्म कर दिया और विभिन्न क्षेत्रों में इसकी भरपाई अब भी असमान बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:11:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिपोर्ट में दावा: हमास ने अक्टूबर 2023 में यौन उत्पीड़न को दिया अंजाम, पीड़ितों में 52 देशों के नागरिक शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[सिविल कमीशन की 300 पन्नों की रिपोर्ट "साइलेंस्ड नो मोर" ने 7 अक्टूबर के हमलों और गाजा में बंधकों के खिलाफ योजनाबद्ध यौन हिंसा का पर्दाफाश किया है। 10,000 साक्ष्यों के आधार पर इसे 'युद्ध का हथियार' और नरसंहार बताया गया है। रिपोर्ट में अपराधियों पर अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत मुकदमा चलाने की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/israeli-civil-commission-report-claims-hamas-committed-sexual-assault-in/article-153733"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/11-(630-x-400-px)1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। आज सिविल कमीशन ने महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध की अपनी 300 पेज की जाँच रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, इज़रायल में 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमले के दौरान तथा गाज़ा में बंधक बनाकर ले जाए गए लोगों के खिलाफ ‘‘योजनाबद्ध और व्यापक’’ एसजीबीवी को अंजाम दिया गया। ‘‘साइलेंस्ड नो मोरः सेक्सुअल टेरर अनवील्ड’’ नाम की इस रिपोर्ट में जाँचकर्ताओं ने व्यापक प्रमाण और रिकॉर्ड पेश किए हैं, जिनसे यह खुलासा होता है कि ये जघन्य अत्याचार हिंसा की आकस्मिक घटनाओं की बजाय युद्ध के सोचे-समझे हथियार थे।</p>
<p>ये नतीजे डॉ. कोचाव एल्कायम-लेवी के नेतृत्व में की गई दो साल की तहकीकात के बाद मिले हैं। जाँचकर्ताओं द्वारा 10,000 से अधिक फोटो, वीडियो तथा 1,800 घंटे से अधिक के विज़्युअल प्रमाणों की समीक्षा की गई। पीड़ितों, गवाहों, वापस आए बंधकों, विशेषज्ञों और उनके परिवार के सदस्यों के 430 से अधिक साक्षात्कार लिए गए, उनके बयान दर्ज किए गए तथा उनके साथ बैठकें की गईं। कमीशन के अनुसार, पीड़ितों में 52 देशों के नागरिक शामिल थे, जिससे स्पष्ट होता है कि इन अपराधों का दायरा अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक फैला था। कमीशन के मुताबिक उत्पीड़न एक पैटर्न में बार-बार दोहराया गया, जिसमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अंगों को काटना, जबरदस्ती नंगा करना, यौन उत्पीड़न करना, जान से मारकर शव को अपमानित करना और आतंक फैलाने के लिए हिंसा का वीडियो बनाकर उसका प्रसार करना शामिल था।</p>
<p>इस रिपोर्ट के मुताबिक ये अपराध किनसाईडल यौन हिंसा पर केंद्रित थे। इस रिपोर्ट में आतंक के डिजिटल थिएटर का विस्तार से जिक्र किया गया है। यानी इन दुष्कृत्यों का वीडियो बनाया गया और उन्हें पीड़ितों के अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से हाथों-हाथ प्रसारित किया गया। यह रिपोर्ट यूनाईटेड नेशंस की विशेष प्रतिनिधि, प्रमिला पाटन द्वारा पहले दिए गए नतीजों की पुष्टि करती है, जिनके मुताबिक हमलों के दौरान और बाद में इस तरह की हिंसक घटनाएं हुई थीं, इस पर यकीन करने के ठोस आधार मौजूद हैं।</p>
<p>कमीशन के अनुसार ये अपराध अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार की श्रेणी में आते हैं। कमीशन ने निष्कर्ष दिया कि इन अपराधों के खिलाफ तुरंत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। सार्वभौम न्यायक्षेत्र का उपयोग करके अपराधियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए तथा युद्ध के समय हुई यौन हिंसा के लिए विशेष ज्यूडिशियल चैंबर स्थापित किए जाने चाहिए। डॉ. एल्कायम-लेवी ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय के लिए इन अपराधों को औपचारिक पहचान दिया जाना सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन घटनाओं को स्थायी ऐतिहासिक रिकॉर्ड में सही-सही दर्ज किया जाए।</p>
<p>सिविल कमीशन एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी संगठन है, जिसमें युद्ध अपराधों को दर्ज करने के लिए समर्पित कानूनी विशेषज्ञ और मानव अधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं। इस रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय कानूनी अधिकारियों, जैसे माननीय इरविन कोटलर और प्रोफेसर डेविड क्रेन ने अपना योगदान दिया है। यह रिपोर्ट सार्वजनिक और न्यायिक समीक्षा के लिए कमीशन की आधिकारिक वेबसाईट पर उपलब्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:32:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्या फिर होने वाली हैं जंग? अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच यूएई ने किए ईरान पर हवाई हमले, ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव</title>
                                    <description><![CDATA[एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की वायु सेना ने अप्रैल में ईरान के लावान द्वीप पर स्थित तेल रिफाइनरी पर हमले किए थे। यह कार्रवाई अमेरिकी संघर्ष विराम के दौरान हुई। हालांकि यूएई ने चुप्पी साधी है, लेकिन उसने सैन्य बल के इस्तेमाल का अधिकार सुरक्षित रखा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/is-war-going-to-happen-again-amid-us-iran-conflict-uae/article-153522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/iran1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के सक्रिय चरण के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। यह दावा सोमवार को एक रिपोर्ट में किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई की वायु सेना ने अप्रैल की शुरुआत में हवाई हमलों की एक श्रृंखला को अंजाम दिया। यह ठीक उसी समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष विराम की घोषणा की थी। इन हमलों का निशाना फारस की खाड़ी में स्थित लावान द्वीप पर मौजूद एक रिफाइनरी थी।</p>
<p>उस समय, हालांकि न तो ईरान ने इन हवाई हमलों के पीछे किसका हाथ था, इसका खुलासा किया और न ही यूएई ने इसकी जिम्मेदारी ली लेकिन राष्ट्रीय ईरानी तेल शोधन और वितरण कंपनी ने आठ अप्रैल को कहा कि द्वीप पर मौजूद तेल रिफाइनिंग सुविधाओं पर "दुश्मन" द्वारा हमला हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया है कि खाड़ी देश के विदेश मंत्रालय ने इन कथित हमलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। मंत्रालय ने केवल इतना याद दिलाया कि यूएई के पास किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित है, जिसमें सैन्य बल का उपयोग भी शामिल है।</p>
<p>अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया, जबकि व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप के पास सभी विकल्प खुले हुए हैं। उल्लेखनीय है कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भीतर स्थित ठिकानों पर हमले किए, जिससे काफी जान माल का नुकसान हुआ। सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा की। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी। बाद में, राष्ट्रपति ट्रंप ने संघर्ष विराम की अवधि को और बढ़ा दिया, ताकि ईरान को शांति प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यह नाकेबंदी अभी भी जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:02:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विदेश मंत्रालय का दावा: यूएई से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए किसी समझौते पर न​हीं हुई बात, फुजैरा के रास्ते भारतीय नागरिकों को निकालने की खबरों का किया खंड़न</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालय ने संयुक्त अरब अमीरात से लाखों भारतीयों को निकालने की खबरों का खंडन किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 'फुजैरा मार्ग' वाले समझौते की रिपोर्ट पूरी तरह निराधार है और वर्तमान में ऐसी कोई योजना नहीं है। सरकार ने नागरिकों से भ्रामक सूचनाओं से बचने और आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/foreign-ministry-claims-no-agreement-has-been-reached-to-evacuate/article-153392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/india-vs-uae.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने मीडिया में आई इन खबरों का खंडन किया है जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लाखों भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए एक समझौते पर विचार विमर्श का दावा किया गया है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अपने फैक्ट चैक हैंडल पर कहा है कि इस तरह की रिपोर्ट निराधार है और अभी भारतीय नागरिकों को यूएई से निकालने की कोई योजना नहीं है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि भारत और यूएई फुजैरा के रास्ते लाखों भारतीय नागरिकों को निकालने के समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूरोप की अपनी चार देशों की यात्रा से पहले यूएई जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NITI आयोग रिपोर्ट: देश में हर 10 में से 1 छात्र छोड़ रहा स्कूल, माध्यमिक शिक्षा पर बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[नीति आयोग की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 11.5% छात्र माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ रहे हैं। चंडीगढ़ 2% के साथ सबसे बेहतर, जबकि गुजरात और एमपी में यह दर 16% से अधिक है। आर्थिक तंगी प्रमुख कारण है। हालांकि, राजस्थान ने अपनी दर 18.8% से घटाकर 7.7% कर सराहनीय सुधार दिखाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/niti-commission-report-1-out-of-every-10-students-in/article-153283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नीति आयोग की मई 2026 में जारी रिपोर्ट ‘भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली’ ने माध्यमिक शिक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर दस में से एक छात्र सेकेंडरी स्तर पर पढ़ाई बीच में छोड़ रहा है। हालांकि पिछले एक दशक में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन माध्यमिक स्तर अब भी सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट वाला चरण बना हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024-25 में माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की राष्ट्रीय औसत दर 11.5 प्रतिशत रही। आर्थिक तंगी, कम उम्र में कामकाज में लग जाना और संस्थागत सहयोग की कमी इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।</p>
<p>राज्यों के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला। चंडीगढ़ में ड्रॉप आउट दर सबसे कम 2 प्रतिशत रही, जबकि झारखंड 3.5 प्रतिशत, उत्तराखंड 4.6 प्रतिशत और केरल 4.8 प्रतिशत के साथ बेहतर स्थिति में रहे। दूसरी ओर गुजरात में 16.9 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 16.8 प्रतिशत और लद्दाख में 16.2 प्रतिशत छात्र माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ रहे हैं। रिपोर्ट में ओडिशा, झारखंड, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में सुधार को भी रेखांकित किया गया है। राजस्थान में ड्रॉप आउट दर 18.8 प्रतिशत से घटकर 7.7 प्रतिशत पहुंच गई है। नीति आयोग ने माना कि प्रगति के बावजूद माध्यमिक शिक्षा में छात्रों को स्कूल से जोड़े रखना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:36:52 +0530</pubDate>
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