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                <title>mismanagement - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कांग्रेस का केंद्र पर तीखा हमला: अर्थव्यवस्था पर सिर्फ नारे देती है आर्थिक कुप्रबंधन की सरकार, प्रचार के जरिए लोगों को कर रही गुमराह </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर देश को आर्थिक संकट में धकेलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत दावों के विपरीत है, जहां बेरोजगारी दर चरम पर है, रुपया कमजोर हो रहा है और पेपर लीक से युवा परेशान हैं। कांग्रेस ने मणिपुर संकट और रेल सुरक्षा पर भी सरकार की निष्क्रियता को घेरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-sharp-attack-on-the-center-accuses-the-government-of/article-156450"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/031.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने केद्र सरकार पर अर्थव्यवस्था को लेकर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह सिर्फ लुभावने नारे देती है, प्रचार के जरिए लोगों को गुमराह करती है, जबकि जमीनी हकीकत वादों और नारों के एकदम विपरीत है। कांग्रेस शोध विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर राजीव गौड़ा तथा शोध और निगरानी विभाग के प्रभारी अमिताभ दुबे ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार में आर्थिक स्तर पर देश के जो हालात कर दिए गए हैं, वह इस सरकार के रहते बदलने वाले नहीं हैं, इसलिए सरकार को बदलना आवश्यक हो गया है। उनका कहना था कि देश में आर्थिक कुप्रबंधन चरम पर है और आर्थिक विकास को पटरी पर लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने की बात करने वालों को यह भी मालूम होना चाहिए कि केंद्र सरकार के मंत्रियों की विदेश यात्राओं में 2021 से अब तक 500 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। उनका कहना था कि देश को विश्व गुरु बताने वाले सिर्फ नारे लगा रहे हैं, प्रचार कर रहे हैं और हकीकत से निपटने के लिए कोई प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। प्रो. गौड़ा ने कहा कि उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को दिये जाने वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार कर दी गई है। दस साल पहले घोषणा की गई थी कि महिलाओं को अब खाना पकाने के खतरनाक और हानिकारक तरीकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उज्ज्वला योजना के प्रत्येक लाभार्थी को 12 सिलेंडर देने का वादा किया गया था। पिछले साल यह संख्या घटाकर नौ कर दी गई और आज तीसरी बार महज चार कर दी गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार ने भारत को रोजगार का केंद्र बनाने की बात की थी लेकिन असलियत यह है कि बड़ी संख्या में देश के युवा रोजगार के लिए मोहताज बन गए हैं। हालात यह हैं कि लघु एवं मध्यम उद्योग रोजगार की रीढ़ होते हैं लेकिन पिछले साल देश में 40 हजार लघु एवं मध्यम उद्योग बंद हुए हैं। देश के 99 प्रतिशत लघु एवं मध्यम उद्योग बिना सरकार की मदद के चल रहे हैं। इसी तरह किसानों के लिए सरकार की कोई योजना नहीं है और किसान आत्महत्या कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार का प्रचार है कि भारत तेजी से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।</p>
<p>हकीकत यह है कि हम चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थे और अब छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और इसका कारण रुपये का कमजोर होना है तथा यह सब केंद्र के भारत की अर्थव्यवस्था के प्रबंधन का प्रमाण है। सरकार रुपये के कमजोर होते हालात को रोकने में निष्क्रिय बनी हुई है। उन्होंने सरकार पर सिर्फ वादे करने का आरोप लगाया और कहा कि प्रचार हो रहा है कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है लेकिन सच यह है कि निवेशक भारत से दूर भाग रहे हैं क्योंकि उन्होंने सरकार पर से भरोसा खो दिया है। अगर यही सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, तो निवेशक क्यों भाग रहे हैं। वे इस विकास की कहानी में और पैसा क्यों नहीं लगा रहे हैं। इन सब स्थितियों का कारण उन्होंने कमजोर होते रुपए को बताया और कहा कि दावा था कि डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है।</p>
<p>सरकार पर सिर्फ प्रचार करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार का प्रचार भारत को रोजगार सृजन का वैश्विक केंद्र बनाने का है, लेकिन असलियत यह है कि 10 में से चार स्नातक बेरोजगार हैं। शहरी युवाओं में बेरोजगारी दर 18.4 प्रतिशत है और बेरोजगार स्नातकों में से केवल सात प्रतिशत को ही एक वर्ष के भीतर स्थायी वेतनभोगी नौकरी मिल पाती है। सभी के लिए समान अवसर की बात होती है लेकिन असलियत यह है कि हम वैश्विक लैंगिक असमानता सूचकांक में 108वें स्थान पर थे। अब हम विश्व में 131वें स्थान पर आ गए हैं। इस प्रकार, हम अपनी आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए कार्यबल में प्रवेश के अवसर पैदा न करके उन्हें निराश कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में 89 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं और अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा में भी पेपर लीक हुआ है, इसलिए शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाया और कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में इसका खुलासा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किया है और उसके प्रमाण दिए हैं। पकड़े गए तो वोट चोरी का नया तरीका निकाला और मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। यह वोट चोरी का नया तरीका निकाला गया है।</p>
<p>पूर्वोत्तर को लेकर केंद्र सरकार के दावों को खोखला बताते हुए उन्होंने कहा कि मणिपुर में तीन साल से संकट चल रहा है लेकिन केद्र सरकार ने वहां स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। रेलवे को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार दावे तो बहुत करती है लेकिन सच यह है कि 67 हजार जगहों पर रेल सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:22:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कोटा विवि का मिस मैनेजमेंट : पिछला रिजल्ट तो आया नहीं, अगले सेमेस्टर की परीक्षा आ गई</title>
                                    <description><![CDATA[विद्यार्थियों में परिणाम को लेकर असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mismanagement-of-kota-university--previous-result-has-not-come--next-semester-s-exam-has-come/article-89586"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विश्वविद्यालय द्वारा पीजी-प्रथम व थर्ड सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम 4 माह बाद भी जारी नहीं किया गया। जबकि, पीजी-सैकंड और फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं बुधवार से शुरू हो गए हैं। ऐसे में विद्यार्थी असमंजस्य की स्थिति में हैं कि पहले सेमेस्टर का परिणाम जाने बिना अगली परीक्षा की तैयारी कैसे करें। वहीं, ओल्ड स्कीम में पीजी-प्रथम और थर्ड सेमेस्टर में जिन विद्यार्थियों के बैक आई, उनके भी रिजल्ट जारी नहीं किए गए। जिसकी वजह से वह प्रदेश की अन्य यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पा रहे। क्योंकि, वहां टीसी व चरित्र प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। इसी तरह बीएड फाइनल ईयर के रिजल्ट भी रुके हुए हैं।</p>
<p><strong>बीएड वाले पीजी में नहीं भर पा रहे फॉर्म</strong><br />बीएड फाइनल के पेपर भी मई-अप्रेल माह में हो चुके हैं। उनके परिणाम भी जारी नहीं हुए। ऐसे में बीएड स्टूडेंट्स कॉलेजों में आयुक्तालय द्वारा चल रही पीजी प्रवेश प्रक्रिया में फॉर्म नहीं भर पा रहे। इसके अलावा ओल्ड स्कीम में जिन विद्यार्थियों के एमए, एमएससी व एमकॉम के प्रथम व थर्ड सेमेस्टर में बैक आई है, उनके भी रिजल्ट घोषित नहीं किए गए। जिसकी वजह से वह प्रदेश की अन्य यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पा रहे। क्योंकि, वहां टीसी व सीसी मांगा जा रहा है। जब तक रिजल्ट पूरी तरह से कम्पलीट नहीं होता तब तक कॉलेज द्वारा टीसी व चरित्र प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता। ऐसे में विद्यार्थी परेशानियों से जूझ रहे हैं। </p>
<p><strong>पहले का पता नहीं और कल से दूसरी परीक्षा   </strong><br />गवर्नमेंट साइंस कॉलेज के  छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष मीणा ने बताया कि एमए, एमएससी व एमकॉम प्रथम व थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाएं 24 अप्रेल को समाप्त हुई थी। जिसके 4 माह बाद भी परिणाम जारी नहीं हुए और 4 सितम्बर से फोर्थ व 5 सितम्बर से सैकंड सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो रही है। इससे विद्यार्थी अगली परीक्षा तैयारी में रुची नहीं ले पा रहे। क्योंकि, मानसिक रूप से पहले सेमेस्टर के रिजल्ट के आधार पर ही दूसरे सेमेस्टर की तैयारी करते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों में परिणाम को लेकर असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है।  </p>
<p>पीजी प्रथम व थर्ड सेमेस्टर में विभिन्न विषयों के अधिकतर परिणाम जारी किए जा चुके हैं। शेष रहे सब्जेक्ट के पेपर भी जल्द जारी कर दिए जाएंगे। <br /><strong>- प्रवीण भार्गव, परीक्षा नियंत्रक, कोटा विवि</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कोटा विश्वविद्यालय द्वारा पीजी प्रथम व चतुर्थ सेमेस्टर और बीए प्रथम सेमेस्टर का परिणाम जारी नहीं किया गया। जिसकी वजह से स्टूडेंट्स अगले सेमेस्टर की तैयारी ठीक से नहीं कर पा रहे। परिणाम को लेकर असमंजस्य की स्थिति में है। 18 सितंबर को एसएससी सीजीएल व सेमेस्टर कक्षाओं के पेपर टकरा रहे हैं,ज्यादातर विद्यार्थियों का सेंटर दिल्ली आया है, विद्यार्थियों में असमंजस में हैं कि वे कौनसी परीक्षा दें। विवि की लेटलतीफी से विद्यार्थी मानसिक तनाव झेल रहे हैं।  <br /><strong>- आशीष मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>परीक्षा परिणामों में गड़बड़ियां व पीजी सेमेस्टर के रिजल्ट समय पर  जारी न करना कोटा विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। विवि प्रशासन की लेटलतीफी व लापरवाही से कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरने से वंचित हो गए तो कई अन्य कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पा रहे। पहले सेमेस्टर का परिणाम जारी होने से पहले ही दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा करवाना छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है। विवि प्रशासन को अपनी कार्यशैली में सुधार करना चाहिए। <br /><strong>- रोहिताश मीणा, छात्रसंघ महासचिव, कोटा विवि </strong></p>
<p>एमएससी थर्ड सेमेस्टर बैक का रिजल्ट जारी नहीं होने से मेरा बीएड में एडमिशन नहीं हो पा रहा है। क्योंकि बीएड कॉलेज वाले माइग्रेशन व टीसी मांग रहे जो रिजल्ट जारी होने के बाद मिल पाएगा। ऐसे में साल बर्बाद होने का अंदेशा बना हुआ है। विवि को सभी रुके हुए परिणाम जल्द से जल्द जारी किए जाने चाहिए। <br /><strong>- रोहित मेरोठा, छात्र गवर्नमेंट कॉलेज कोटा </strong></p>
<p>मैं, बीएससी बीएड चतुर्थ वर्ष की एक्स छात्रा हूं।  मेरा चतुर्थ वर्ष का परिणाम जारी नहीं होने के कारण मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में एमएससी प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं ले पा रही हूं। यदि, समय पर परिणाम जारी नहीं हुआ तो मेरा एडमिशन नहीं हो पाएगा और साल बर्बाद हो जाएगा। विवि की लेटलतीफी के कारण परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। <br /><strong>- रोशनी मीना, छात्रा गवर्नमेंट कॉलेज </strong></p>
<p>एमए चित्रकला थर्ड सेमेस्टर का रिजल्ट जारी नहीं होने से मैं यूजीसी नेट का एग्जाम फॉर्म नहीं भर पा रहा। दिसम्बर 2022 में फर्स्ट सेमेस्टर का पेपर दिया था। जिसमें बैक आई। जून 2023 में सैकंड सेमेस्टर का एग्जाम देने के बाद दिसम्बर में हुए थर्ड सेमेस्टर के साथ पहले सेमेस्टर के बैक का पेपर दिया था। अब तक न तो बैक का परिणाम आया और न ही थर्ड सेमेस्टर का। नतीजन, यूजीसी नेट का फॉर्म भरने से वंचित रह गया। <strong>- दीपक गौड़, छात्र कोटा विवि </strong></p>
<p>मैंने एमए लोकप्रशासन प्रथम सेमेस्टर का पेपर दिया था, जिसका परिणाम तो अब तक नहीं आया लेकिन 4 सितम्बर से सैकंड सेमेस्टर की परीक्षाएं आ गई। असमंजस्य की स्थिति बनी हुई है कि प्रथम सेमेस्टर का परिणाम क्या रहेगा। पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पा रहा हूं। <br /><strong>- आशिक मंसूरी, छात्र, कोटा विवि </strong></p>
<p>परीक्षा परिणाम में देरी के कई कारण हो सकते हैं। सेमेस्टर प्रणाली में इसका कोई फर्क नहीं पड़ता। विद्यार्थियों को पिछले परिणाम के बारे में न सोचते हुए अगले सेमेस्टर के एग्जाम की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।<br /><strong>- प्रो. अजय विक्रम, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Sep 2024 16:14:08 +0530</pubDate>
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                <title>जंगल से घिरा रामपुरा कॉलेज, खतरे में बेटियों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[सांप-बिच्छुओं का मंडराया खतरा, कक्षाओं में आ चुके कोबरा व गोयरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rampura-college-surrounded-by-jungle--lives-of-girls-in-danger/article-88230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। करोड़ों की लागत से बना राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा जंगल से घिरा हुआ है। कॉलेज की 4 एकड़ जमीन पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई है। जिसमें जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी से छात्राओं की जान संकट में रहती है। गत वर्ष क्लासरूम में कोबरा दस्तक दे चुका है। उस वक्त कक्षा में छात्राओें के नहीं होने से हादसा टल गया। वहीं, महाविद्यालय के एंट्री गेट पर गोयरा आने से छात्राओं में हड़कम्प मच गया था। ऐसे में अनहोनी का खतरा बना रहता है। दरअसल, रामपुरा कॉलेज को सवा 6 एकड़ जमीन आवंटित हुई थी। जिसमें से सवा 2 एकड़ भूमि पर दो मंजिला भवन बना। इसमें 8 कक्षा कक्ष हैं। भवन के पीछे शेष 4 एकड़ भूमि पर जंगल उगा हुआ है। जिसमें जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी बनी रहती है।</p>
<p><strong>क्लास में कोबरा, बाहर गोयरे ने मचाई दहशत</strong><br />छात्रा सेविका अनसुईया मीणा ने बताया कि कक्षा-कक्षा के पीछे कॉलेज की 4 एकड़ जमीन देखरेख के अभाव में दुर्दशा का शिकार हो रही है। यहां झाड़-झंकाड उगे हैं, जिनमें जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी होने से जान का खतरा बना रहता है। गत वर्ष कॉलेज के रूम नंबर-25 में कोबरा आ गया था। गनीमत रही की क्लास में लड़कियां नहीं थी, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। वहीं, गत माह महाविद्यालय के चैनल गेट के पास  गोयरा आने से छात्राओं में दहशत मच गई थी।  सरकार को बजट जारी कर खेल मैदान विकसित करना चाहिए।</p>
<p><strong>तलाई बनी करोड़ों की जमीन, मच्छरों का आतंक</strong><br />छात्रा सेविका देवयन्ती कहार ने बताया कि कैम्पस में महाविद्यालय की 4 एकड़ जमीन है, जो बरसाती पानी भरने से तलाई बन गई। इसमें खतरनाक बीमारियों का लार्वा पनप रहा है। क्लारूम में मच्छरों का प्रकोप बना रहता है। खिड़ियों में जालियां नहीं होने से सांप, बिच्छु, गोयरा सहित अन्य जहरीले कीड़े कक्षा कक्ष में घुस आते हैं। जिससे जान का खतरा बना रहता है। सरकार को इस भूमि पर बास्केट बॉल व हैंड बॉल का ग्राउंड विकसित करना चाहिए। ताकि, छात्राओं को खेल सुविधाएं मिल सके। </p>
<p><strong>टंकियों का पानी पी रही छात्राएं</strong><br />छात्रा प्रतिनिधि दिव्यांशी मुराड़िया ने बताया कि कॉलेज में दो वाटरकूलर लगे हैं,जिसमें से एक खराब है। दूसरी मंजिल पर ज्योग्राफी की छात्राओं को पानी पीने के लिए ग्राउंड फ्लोर पर आना पड़ता है। लेकिन, यहां के वाटरकूलर में भी आरओ नहीं लगा होने से छात्राओं को टंकी का पानी पीना पड़ रहा है। जिससे छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरओ सिस्टम लगाने के लिए भी कॉलेज प्रशासन के पास बजट नहीं है। कॉलेज परिसर में आउट डोर के अलावा इनडोर गेम की भी सुविधा नहीं है। जिससे छात्राओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>गंदगी व दुर्गंघ से सांस लेना हो रहा मुश्किल</strong><br />छात्रा महिमा चौहान व प्रियंका ने बताया कि कैम्पस में क्लासरूम के पीछे गंदगी का ढेर लगा हुआ है। जिससे उठती दुर्गंध से छात्राओं का सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। झाड़ियों की सफाई और मिट्टी डलवाकर जगह समतल करवाकर ट्रैक बनाना चाहिए।  वहीं, कॉलेज भवन के दायी व बायी ओर हैंडबॉल व बास्केट बॉल के ग्राउंड बनाए जाना चाहिए। </p>
<p>कॉलेज की 4 एकड़ भूमि पर खेल मैदान विकसित किया जाना है। इसके लिए आयुक्तालय को पत्र लिख बजट की मांग की है, जो अब तक नहीं मिला। जैसे ही बजट जारी होगा, जमीन की सफाई करवाकर स्पोर्ट्स ग्राउंड विकसित किया जाएगा। महाविद्यालय में छात्राओं को क्वालिटी एजुकेशन दी जा रही है। साथ ही समस्याओं के समाधान के प्रयास लगातार जारी हैं। <br /><strong>- डॉ. राजेश चौहान, प्राचार्य रामपुरा कॉलेज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Aug 2024 16:07:09 +0530</pubDate>
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                <title>वर्ल्ड टाईगर-डे - वन विभाग के कुप्रबंध से बर्बाद हो रहा मुकुंदरा </title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारियों की मिली भगत से जंगल को षड़यंत्रपूर्वक बर्बाद किया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-tiger-day---mukundara-getting-ruined-due-to-mismanagement-of-forest-department/article-53055"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/news-(4)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कहते हैं, अपनों की बर्बादी में अपनों का ही हाथ होता है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के साथ भी कुछ ऐसा ही है। जंगल और जंगल के प्राणियों की रक्षा का दायित्व वन विभाग का है लेकिन रक्षक ही भक्षक बनने पर तुला है। मुकुंदरा की सुरक्षा की कमान अब तक जिन हाथों को सौंपी गई, उसने ही जंगल का गला घोंटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालात यह हैं, पिछले साढ़े दस सालों से मुकुंदरा लापरवाहों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद से अब तक 4 टाइगर और 6 शावक मौत के हत्थे चढ़ चुके हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण जंगल में खुलेआम हो रहा अवैध खनन, पेड़ों की कटाई, अवैध चराई, संदिग्ध घुसपैठ और कोर एरिया में ड्रोन उड़ने की तस्वीरें खुद दे रही है। इतना ही नहीं अब तो दरा सैंचुरी में टाइगर एमटी-1 और एमटी-3 की जबरदस्त फाइट के वीडियो भी वायरल हो गए। हालांकि, यह वीडियो 5 जुलाई 2020 का है, लेकिन वायरल कुछ दिनों पहले ही हुआ है। जंगल के रखवाले भले ही इन मामलों में कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन  वन्यजीव एक्सपर्ट का मानना है, मुकुंदरा में अवैध गतिविधियां वन विभाग के कु-प्रबंधन का नतीजा है। अधिकारियों की मिली भगत से जंगल को षड़यंत्रपूर्वक बर्बाद किया जा रहा है।  </p>
<p><strong>3 करोड़ का सर्विलांस और 16 कैमरा टावर </strong><br />मुकुंदरा टाइगर रिर्जव पर निगरानी के लिए 3 करोड़ की लागत से एक ई-सर्विलांस एंड एंटी पोचिंग सिस्टम, 16 कैमरा टावर और 200 से ज्यादा कैमरा ट्रैप लगे हैं।  जिससे 24 घंटे जंगल की एक-एक गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। सभी कैमरे टावर नाइट विजन हैं। अत्याघुनिक तकनीक से लैस होने के बावजूद टाइगर एमटी-1 को खोज नहीं पाना वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठता है। </p>
<p><strong>मुकुंदरा का सीना चीर रहे माफिया</strong><br />मुकुंदरा की बोराबांस रैंज में नयागांव से लेकर बोराबांस गांव तक कई जगहों पर खुलेआम अवैध खनन हो रहा है। इनमें नयागांव में पटवार घर के पीछे, दौलतगंज में बालाजी मंदिर के पीछे, मोदी लॉ कॉलेज के सामने वाला क्षेत्र, डायवर्जन चैनल से सटा इलाका, भंवरकुंज के आसपास का क्षेत्र तथा बोराबांस में नृहसिंह माता मंदिर सहित कई इलाके शामिल हैं। इस रैंज में कई जगहों पर माफिया जंगल का सीना चीरकर पत्थर निकाल रहे हैं। माइनिंग रात 11 से अलसुबह 5 बजे तक जारी रहती है। </p>
<p><strong>10 साल में 4 टाइगर और 6 शावकों की मौत</strong><br />मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रेल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इसके बाद से अब तक तीन बाघ एमटी-2, एमटी-3 और एमटी-4 की मौत हो चुकी है और वर्ष 2020 में बाघ एमटी-1 अचानक गायब हो गया, विभाग इसे लापता बता रहा है। जबकि, विशेषज्ञों का मत है कि एमटी-1 भी मर चुका है।  3 अगस्त 2020 को बाघिन एमटी-2 का एक शावक लापता हो गया। इसके अगले ही महीने 22 मई को एमटी-4 का एक शावक भी गायब हो गया। इसके बाद बाघिन-4 की मौत के साथ गर्भ में पल रहे तीनों शावकों की भी मौत हो गई।  </p>
<p><strong>खैर और औषधीय पौधों पर चली कुल्हाड़ियां</strong><br />जवाहर सागर रेंज के धनेश्वर वनक्षेत्र में तस्करों ने खैर के पेड़ काट दिए। जबकि, इस इलाके में टाइगर एमटी-5 चंबल नदी पार कर अपना ठिकाना बनाता है। वहीं, बोराबास रैंज के जंगल में भी विल्ब पत्र, तेंदू, अर्जुन सहित अन्य गुणकारी पेड़ों को वन माफियाओं ने कुल्हाड़ी चलाकर काट दिए। यहां बड़ी संख्या में अवैध कटान हो रहा है।  स्टाफ की तैनाती के बावजूद कटान होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं एक्सपर्ट</strong><br />बड़े शर्म की बात है, मुकुंदरा ने पिछले साढ़े दस सालों में 4 टाइगर और 6 शावक खो दिए। रिजर्व की बर्बादी के लिए वन विभाग का मिस मैनेजमेंट और अधिकारियों में इच्छा शक्ति का अभाव है। बाहरी व्यक्तियों की कोर एरिया में पहुंच शिकारियों को रास्ता दिखा रही है। वहीं, रामगढ़ रिजर्व घोषित होने के एक साल में ही आबाद हो गया। जबकि, मुकुंदरा 9 अप्रेल 2013 के बाद से अब भी बर्बादी की कगार पर खड़ा है।<br /><strong>- तपेशवर सिंह भाटी, अध्यक्ष मुकुंदरा वन्यजीव एवं पर्यावरण समिति</strong></p>
<p>मुकुंदरा में अवैध गतिविधियां मिलीभगत के बगैर संभव नहीं है। कभी ड्रोन उड़ रहे तो कभी टाइगर फाइट के वीडियो वायरल हो रहे। कोर एरिया तक संदिग्ध घुसपैठ बढ़ना, चार टाइगर और शावकों की मौत। मुकुंदरा प्रशासन की कू-प्रबंधन का नतीजा है। लापरवाह अधिकारियों के कारण न जंगल सुरक्षित है, न ही वन्यजीव। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। <br /><strong>- मान सिंह, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>दुर्भाग्य की बात है कि करोड़ों के ई-सर्विलांस, एंटी पोचिंग सिस्टम व कैमरें होने के बाद भी गायब हुए टाइगर एमटी-1 को खोज नहीं पाए। बाघ के जीवित होने की संभावना नहीं है, वन विभाग वन्यजीव प्रेमियों व जनता को गुमराह कर रहा है। यदि, एमटी-1 जिंदा है तो वन विभाग उसके सबूत पेश करें। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />स्टाफ की कमी के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। सरकार द्वारा कोशिश की जा रही है। वहीं, हमारी तरफ से वनरक्षक और बोर्डर होमगार्ड की मदद से स्टाफ की कमी का इफेक्ट कम कर रहे हैं। टाइग्रेस लाने का प्रयास जारी है।<br /><strong>- बीजो जॉय, डीएफओ, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 15:50:43 +0530</pubDate>
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                <title>डेंगू का डक रोकने में सरकार नाकाम : राजेंद्र राठौड़</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश का चिकित्सा महकमा भगवान भरोसे हैं, क्योंकि विभाग के मंत्री रघु शर्मा मरीजों को अपने हाल में छोड़कर मुखिया अशोक गहलोत के साथ 'पॉलिटिकल टूरिज्म' में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं- राठौड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AE---%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A0%E0%A5%8C%E0%A4%A1%E0%A4%BC/article-1728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/rajendra-rathor3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि राजस्थान में कोरोना कुप्रबंधन के बाद अब डेंगू के बढ़ते प्रकोप को रोकने में राज्य सरकार विफल साबित हो रही है। प्रदेश का चिकित्सा महकमा भगवान भरोसे हैं, क्योंकि विभाग के मंत्री रघु शर्मा मरीजों को अपने हाल में छोड़कर मुखिया अशोक गहलोत के साथ 'पॉलिटिकल टूरिज्म' में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं।<br /> <br /> राठौड़ ने ट्वीट में कहा कि प्रदेश में डेंगू लगातार अपने पांव पसार रहा है तथा सरकारी व निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने से चिकित्सा विभाग का सिस्टम हांफ रहा है। ना तो प्रभावी मॉनिटरिंग की जा रही है और ना ही मरीजों के सही आकंडे़ रखे जा रहे हैं। मंत्री जी महज सामान्य सी अपील करके खानापूर्ति में लगे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Oct 2021 14:32:31 +0530</pubDate>
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