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                <title>रूसी सेना अब काफी कमजोर: ब्रिटेन</title>
                                    <description><![CDATA[ ब्रिटेन सरकार ने दावा किया कि भविष्य में पारंपरिक सैन्य बल को तैनात करने की रूस की क्षमता प्रभावित होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/russian-army-now-very-weak--uk/article-9094"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/russian-army.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को दावा किया कि यूक्रेन पर आक्रमण के परिणामस्वरूप रूस की सेना अब भौतिक और वैचारिक रूप से काफी कमजोर हो चुकी है। ब्रिटेन सरकार ने दावा किया कि भविष्य में पारंपरिक सैन्य बल को तैनात करने की रूस की क्षमता प्रभावित होगी। उसने कहा कि रूस की सेना यूक्रेन पर आक्रमण के परिणामस्वरूप अब भौतिक और वैचारिक दोनों रूप से काफी कमजोर हो गयी है। प्रतिबंधों के कारण रूस इससे आसानी से नहीं उबर सकेगा। इसका पारंपरिक सैन्य बल तैनात करने की रूस की क्षमता पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।<br /><br />उसने कहा कि 2005 और 2018 के बीच रूस का रक्षा बजट लगभग दोगुना हो गया है। ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा, ''रूस का रक्षा बजट 2005 और 2018 के बीच लगभग दोगुना हो गया है, जिसमें कई उच्च-स्तरीय वायु, भूमि और समुद्री क्षमताओं में निवेश किया गया है। वर्ष 2008 से इसने व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम 'न्यू लुक'  शुरू किया है।'' ब्रिटेन ने कहा कि रूस तमाम प्रयासों के बावजूद यूक्रेन पर हावी होने में सक्षम नहीं हो सका है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 May 2022 18:39:55 +0530</pubDate>
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                <title>राजनेताओं की कमजोर पैरवी से प्यासा रह जाएगा मेवाड़</title>
                                    <description><![CDATA[पाली जिले के जवाई बांध को भरकर जोधपुर की जनता की प्यास बुझाने के लिए उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील में दो बांध बनाने की योजना के लिए क्षेत्रीय राजनेताओं की राजधानी जयपुर में कमजोर पैरवी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur--mewar-will-remain-thirsty-due-to-weak-lobbying-of-politicians/article-9064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/dam-new.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। पाली जिले के जवाई बांध को भरकर जोधपुर की जनता की प्यास बुझाने के लिए उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील में दो बांध बनाने की योजना के लिए क्षेत्रीय राजनेताओं की राजधानी जयपुर में कमजोर पैरवी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी नहीं टूटते देखकर कोटड़ा की जनता ने आवाज बुलंद करने का फैसला किया है और वह मैदान में उतर चुकी है। तकनीकी जानकार भी प्रस्तावित बांधों के निर्माण को मेवाड़ के हित में नहीं मान रहे हैं।</p>
<p><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट घोषणा 2022-23 में उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील के चाकमरिया और भात में दो बड़े बांध के निर्माण की घोषणा की। इन बांधों से 1000 एमसीएफटी पानी पाली जिले में स्थित जवाई बांध में पहुंचेगा। यह बांध जोधपुर शहर में पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। जल संरचनाओं के तकनीकी जानकारों का मानना है कि कोटड़ा तहसील में जहां दोनों बांधों का निर्माण प्रस्तावित है, वहां व आसपास गांवों में लोग आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। क्षेत्र के गांव-कस्बों में कई दिनों तक पेयजल नसीब नहीं होता। ऐसे में जोधपुर की जनता की प्यास बुझाने के लिए यहां से पानी ले जाने की योजना पर मेवाड़ के जननेताओं ने अब तक चुप्पी धारण कर रखी है जिसे क्षेत्रवासी जयपुर में मेवाड़ की कमजोर पैरवी के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p><br />जानकारों का मानना है कि कोटड़ा में बांध बनाने की योजना के अंतर्गत अध्ययन एवं परीक्षण के प्रारंभिक चरण में ही मेवाड़ के नेताओं को इसका विरोध शुरू कर देना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं किया। परिणामस्वरूप कोटड़ा में बरसने वाले पानी के मारवाड़ चले जाने और मेवाड़ के प्यासा रह जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार के उपक्रम वेबकोस संस्था द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के दौरान ही प्रस्तावित बांधों के डूब क्षेत्र के गांवों के आदिवासी ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। <br /><br /><strong>मेवाड़वासियों के हितों से खिलवाड़</strong><br />मोहनलाल सुखाड़िया जल अपवर्तन परियोजना देवास से सेवानिवृत्त सहायक अभियंता पीयूष जोशी का कहना है कि  देवास तृतीय व चतुर्थ चरण के बांधों के निर्माण की डीपीआर को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को दो बार प्रेषित की गई, तब इसकी बीएसआर रेट के अनुसार तत्कालीन लागत 1187 करोड़ थी जो अब रिवाइज होने पर काफी बढ़ जाएगी। वसुंधरा सरकार की बजट घोषणा में भी इसके लिए 1064 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब गहलोत सरकार भी मेवाड़वासियों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है। देवास तृतीय व चतुर्थ चरण को लेकर भी मेवाड़ के नेताओं की पैरवी कमजोर साबित हो रही है। इसका फायदा उठाते हुए मेवाड़ के पानी को मारवाड़ के जवाई बांध में पहुंचाने के लिए दो बड़े बांध का निर्माण प्रस्तावित किया गया है जिनसे करीब 1000 एमसीएफटी की जलापूर्ति जोधपुरवासियों को होगी जबकि कोटड़ा तहसील के ही सेई बांध, टनल के जरिए जवाई बांध से वर्ष 1975 से जोधपुर को जलापूर्ति हो रही है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 May 2022 12:33:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कम सैलरी, अधूरी ट्रेनिंग, कमजोर मनोबल, रूसी सैनिकों की बगावत का इतिहास पुराना, यूक्रेन में भी नहीं मान रहे ऑर्डर्स</title>
                                    <description><![CDATA[कमजोर मनोबल के साथ कब तक लड़ेंगे रूसी सैनिक?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/kyiv--moscow--low-salary--incomplete-training--weak-morale--history-of-uprising-of-russian-soldiers-is-old--orders-are-not-being-obeyed-even-in-ukraine/article-7319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/sainik.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव/मॉस्को। हाल के दिनों में ऐसी खबरें आई हैं कि यूक्रेन में आगे बढ़ने से रोक दी गई और कई सैन्य नाकामियों का सामना कर रही रूसी सेना ने अपने खुद के उपकरण नष्ट कर दिए हैं और उसने युद्ध लड़ने और आदेशों का पालन करने से इनकार कर दिया है। एक खबर में यहां तक कहा गया है कि उन्होंने अपने ही कमांडर पर हमला कर दिया। नाटो का अनुमान है कि दो महीने से भी कम वक्त में इस संघर्ष के दौरान करीब 15,000 रूसी सैनिक मारे गए है, जो अफगानिस्तान में नौ वर्षों में मारे गए सोवियत संघ (अब विघटित हो चुके) के सैनिकों के बराबर है। ऐसा बताया जा रहा है कि सैनिकों का मनोबल गिर गया है। ऐसी स्थिति में रूसी सैनिकों के विद्रोह करने की संभावना है। लड़ाई छोड़कर भागने से सेना का शारीरिक और मनोवैज्ञानिक उत्साह कम हो जाएगा, जबकि पाला बदलने या दुश्मन की सेना में शामिल होने से यूक्रेन को मदद मिल सकती है। यह पहली बार नहीं है जब रूसी या सोवियत सैनिकों ने किसी संघर्ष में आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है। रूस-जापान युद्ध के दौरान रूसी सैनिकों ने जून 1905 में विद्रोह कर दिया था जो इतिहास की प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है।<br /><br /><strong>पहले भी बगावत कर चुके हैं रूसी सैनिक</strong><br />सुशिमा की लड़ाई में रूसी नौसेना का ज्यादातर बेड़ा नष्ट हो गया था और उसके पास कुछ गैर-अनुभव वाले लड़ाके बचे थे। बांसा मांस परोसे जाने समेत काम करने की खराब स्थितियों का सामना कर रहे 700 नाविकों ने अपने अधिकारियों के खिलाफ ही विद्रोह कर दिया था। द्वितीय विश्वयुद्ध में जोसेफ स्टालिन ने आत्मसमर्पण करने की ओर बिल्कुल बर्दाश्त न करने वाली नीति लागू करते हुए सैनिकों के बीच आज्ञाकारिता सुनिश्चित करने की कोशिश की थी। चेचन्या के साथ रूस के पहले संघर्ष (1994-96) में बड़ी संख्या में सैनिक जंग का मैदान छोड़कर भाग गए थे।<br /><br /><strong>कमजोर मनोबल के साथ कब तक लड़ेंगे रूसी सैनिक?</strong><br />युद्ध में पाला बदलना और मैदान छोड़कर भागना आम है। युद्ध की मुश्किलें, लड़ाई में खराब प्रदर्शन और युद्ध की वजह की वैचारिक प्रतिबद्धता के कम होने से सैनिक जंग का मैदान छोड़कर भाग सकते हैं। लेकिन रूसी सैनिक पहले ही मनोबल गिरने और सहयोग न मिलने की स्थिति को महसूस कर रहे हैं। अध्ययन से पता चलता है कि सैनिकों का मनोबल कम है, खासतौर से जिन्हें आधुनिक तकनीक नहीं आती हैं।<br /><br /><strong>अमेरिका की तुलना में 200 फीसदी कम वेतन पाते हैं रूसी सैनिक</strong><br />ऐसी खबरें हैं कि रूसी सेना अपनी संरचना में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है लेकिन इसके बावजूद रूस की अपनी सेना ने 2014 में बताया कि उसके 25 प्रतिशत से अधिक कर्मी अपनी इंफेंट्री के उपकरण नहीं चला पाए। हालांकि, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बदलावों के नतीजन सेना का बजट बढ़ गया लेकिन सैनिकों की तनख्वाह नहीं बढ़ी। अनुबंधित सैनिकों को उनके अमेरिकी समकक्षों के मुकाबले 200 प्रतिशत कम वेतन दिया जाता है।<br /><br /><strong>अपने सैनिकों का दिल नहीं जीत पा रहा रूस</strong><br />इन सभी कारणों से सैनिकों का मनोबल गिरा है और पाला बदलने तथा मैदान छोड़कर भागने की आशंका भी बढ़ी है। इससे निपटने के लिए रूसी जनरल अग्रिम मोर्चे पर जाकर लड़ रहे हैं ताकि सैनिकों को प्रोत्साहित किया जाए। इसके कारण कम से कम सात जनरल की मौत हो गई है, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से रूसी सेना में जनरलों की सबसे अधिक मृत्यु दर है। रूस न केवल यूक्रेन के लोगों के दिल और दिमाग जीतने में नाकाम रहा है, बल्कि अब वह अपने सैनिकों का मन जीतने के लिए संघर्ष करता प्रतीत हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 13:09:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सोनिया का तंज : मोदी सरकार की कमजोर विदेश नीति के कारण घिर गया है देश</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष को साथ नहीं लेकर चलने पर अड़े हुए है - सोनिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%9C---%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%98%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-1729"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/whatsapp-image-2021-10-16-at-11.22.11.jpeg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विदेश नीति को लेकर कड़ा हमला करते हुए शनिवार कहा कि मोदी सरकार की कमजोर नीति के कारण सीमा पर खतरा पैदा हो गया है और  मोदी महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष को साथ नहीं लेकर चलने पर अड़े हुए है। गांधी ने शनिवार को यहां कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि विदेश नीति के मामले में देश की हमेशा मजबूत स्थिति रही है लेकिन मोदी सरकार ने उसे कमजोर कर दिया है और हमारी इस कमजोरी का फायदा उठाते हुए चीन सीमा पर घुसपैठ कर रहा है।</p>
<p><br /> कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसमें आश्चर्य की बात यह है कि चीन हमारी सीमा में घुस चुका है और प्रधानमंत्री ने देश की जनता से असत्य बोला है कि सीमा पर कोई घुसपैठ नहीं हुई है। गांधी ने किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के किसान तथा किसान संगठन लगातार कृषि विरोधी तीन काले कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन सरकार अपने कुछ चुने हुए पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए उनकी मांग नहीं मान रही है। उन्होंने कहा कि सबसे घृणित कृत्य हाल के दिनों में लखीमपुर खीरी में हुआ जहां किसानों को गाड़ी से कुचला गया है।</p>
<p><br /> उन्होंने जम्मू कश्मीर का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार की जम्मू कश्मीर को लेकर नीति स्पष्ट नहीं है। आतंकवादी घटनाएं इस बीच बढ़ गई है और सरकार वोट की राजनीति के लिए समुदाय विशेष को निशाना बनाकर काम कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर भी आलोचना की और कहा कि देश की आर्थिक स्थिति इस सरकार की कमजोर नीति के कारण डांवाडोल हो गई है। उन्होंने कहा कि महंगाई चरम पर है और पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं और सरकार उसे नियंत्रित करने के लिए कोई कदम नहीं उठा पा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Oct 2021 14:48:39 +0530</pubDate>
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